Jun 4, 2026

03-06-2026 धोए कान : हुए स्नान


03-06-2026 

धोए कान : हुए स्नान  











कल पानी नहीं आया । 20 मिनट मोटर व्यर्थ ही चली जैसे किसान आंदोलन में  700 अच्छे भले किसान अच्छे दिनों की बलि चढ़ गए । न मोदी जी ने मिलने योग्य समझा और न ही संसद ने श्रद्धांजलि देने लायक । फोन किया तो जलदाय विभाग वालों ने उत्तर दिया- हमने तो खोल दिया । एक बार फिर मोटर चलाकर देख लें । अब सरकारी उपलब्धियां है जितनी मर्जी हों उतनी पहुँचें । पहुँचें और न पहुँचे तो भी क्या कर लोगे । 10 मिनट और मोटर चलाई तो बमुश्किल कोई पाँच बाल्टी पानी आया । टैंकर वाले को फोन कर दिया कि कल सुबह सबसे पहले हमारा नंबर लगा देना । बस, उसीका  इंतजार कर रहे थे कि तोताराम हाजिर ।

बोला- ऐसे कैसे मोदी जी तरह बैठा है कि ट्रम्प परमीशन दें तो रूस से तेल खरीदे ।

हमने कहा- हमारी कोई एप्सटीन फ़ाइल किसी के पास नहीं है या किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि एक दिन में हमारा कैरियर में खराब कर दें । हम नेहरू जी के जमाने के अपॉइन्टी हैं । भले ही उन्होंने हमें मोदी जी की तरह नियुक्ति पत्र नहीं दिया हो ।रात को भी दो लोटे पानी नहीं डाला सो सोचते हैं कि टैंकर वाला आ जाए तो फ्रेश होकर ही चाय पियें । 

बोला- मोदी जी ने मितव्ययिता के लिए कहा है । पानी भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए । जल ही जीवन है । जल है तो कल है । 

हमने कहा- कल की बात तो कल देखी जाएगी, यहाँ तो एक एक दिन भारी पड़ रहा है । रोज हर चीज के भाव बाढ़ रहे हैं । सुना है सरकार ने चुपचाप सोना बेच दिया है ।देश के 2 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित पेय जल नल से सप्लाई हो रहा है ।स्वच्छता में देश में  नंबर वन इंदौर में ‘सबका साथ सबका विकास’ के तहत मल और जल के  कनेक्शन उसी तरह से मिल जाते हैं जैसे ईडी से डरकर कोई दलबदलकर भाजपा में शामिल हो जाता है । असुरक्षित जल भी पूरा नहीं मिल रहा है ।  लगता है अब मुर्दों को भी नहलाने की जगह स्पंज किया जाएगा ।  

बोला- ज्यादा नहाने से भी कई समस्याएं पैदा होती हैं । इसीलिए पूजा में भी देवताओं को दूब के ब्रश से दो छींटों में स्नान करवा दिया जाता है । अपने टोंक जिले में जिला शिक्षा कार्यालय में एक प्रशासनिक अधिकारी हैं  दीनदयाल कसेरा । वे पिछले पाँच सालों से एक लीटर पानी से स्नान करते हैं और इसका जगह जगह प्रदर्शन और प्रशिक्षण भी देते हैं । 

हमने कहा- अधिकारी हैं तो उन्हें तो सब अधिकार हैं जैसे शुभेन्दु अधिकारी । चाहें तो ईद पर कुर्बानी में टांग अड़ा दें और चाहें तो योगी जी की 14 साल से बड़ी गौमाता को काटने की छूट दे दें । 

बोला- वे अधिकारी होने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांगानेर विभाग के व्यवस्था प्रमुख भी हैं । स्वयंसेवक सुविधा नहीं, सेवा को महत्त्व देता है । वह बिना किसी सुविधा के भी जब मौका देखता है सेवा कर ही डालता है । उसे सेवा के सामने सुविधा की परवाह नहीं होती । इतिहास उठाकर देख, 90 वर्ष तक स्वयंसेवकों ने ठंड में हाफ पेंट में  ठिठुरते हुए सेवा की है । बहुत से स्वयंसेवक तो 35-40 वर्ष तक भीख मांगकर भी सेवा करते रहे । निर्धन इतने कि संस्था तक रजिस्टर्ड नहीं और न ही कोई बैंक खाता । 

हमने कहा- तोताराम, पानी का क्या है । पानी तो आँख में होना चाहिए जैसे कि ग़ालिब कहते हैं-

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल 
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है । 

हयादार,  खुद्दार तो चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाते हैं और बेशर्म गटर में भी बेशर्मी से तैरते रहते हैं । सुना नहीं, जर्मनी के हेस्से राज्य (वित्तीय केंद्र फ्रैंकफर्ट) के वित्त मंत्री थॉमस शेफर ने मार्च 2020 में आत्महत्या कर ली थी। 54 वर्षीय शेफर का शव फ्रैंकफर्ट के पास एक रेलवे ट्रैक पर मिला था। उनकी मृत्यु का कारण कोविड-19 महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों से गहरी चिंता और तनाव बताया गया था।

और एक ये ऐसे बेशर्म हैं कि न अर्थव्यवस्था संभलती है और न ही कानून व्यवस्था । ज्यादा पूछो तो कह देते हैं देश का विभाजन गाँधी  के कारण हुआ, हिन्दू खतरे में है, रुपया कांग्रेस के कारण गिर रहा है और ज्यादा तकलीफ है तो पाकिस्तान चले जाओ ।  

बोला- मन पवित्र होना चाहिए । तन का क्या, नश्वर है । कबीर कहते हैं- न्हाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाय । 
हमने कहा- और मन का क्या । उसकी तो केवल बात ही होती है । काम से क्या लेना देना । 

-रमेश जोशी 


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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jun 2, 2026

02-06-2026 मियाँ की जूती मियाँ के सिर


02-06-2026 मियाँ की जूती मियाँ के सिर


तोताराम ने बैठते ही पूछा- माताजी का क्या हाल है ? हमने कहा- क्या बहकी-बहकी बात कर रहा है । इस गई 20 अप्रैल को माताजी को गुजरे 26 साल हो गए और आज तू हाल पूछ रहा है ।वैसे तो प्राण निकलने के साथ ही सब खेल खत्म हो जाता है लेकिन धर्म के नाम पर मुफ़्त का माल खाने वाले परजीवी लोग स्वर्ग नरक का चक्कर चलाकर कभी श्राद्ध, कभी बरसी के नाम पर ठगते रहते हैं । मरे हुए के नाम पर जिंदा का जीना हराम किये रहते हैं । अगर इसी रफ्तार से जगद्गुरु की वैज्ञानिक सोच बढ़ती रही तो ये लोग आपके मृत माता-पिता के नाम से अपना रिचार्ज करवाने लगेंगे कि यजमान आपकी माताजी के ताजा हालचाल मिलते रहने के लिए तीन हजार का जियो का रिचार्ज करवा दीजिए । बोला- मैं ताई के हालचाल थोड़े पूछ रहा हूँ । मैं तो योगी जी की माताजी का हाल जानना चाहता था । हमने कहा- तो फिर तुझे योगी जी से पूछना चाहिये । उनकी माताजी सावित्री देवी पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं । अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ होता तो अब तक तो सारे देश को खबर हो जाती । बोला- मैं जन्म देने वाली माता की नहीं, बल्कि बिना घोषित किए ही राष्ट्र की स्वतः सनातन माता ‘गौमाता’ की बात कर रहा हूँ जिसका कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं ने उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ कहकर अपमान किया है । इन पर तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलता चाहिए । और फौरी न्याय के बतौर इनके घरों पर बुलडोज़र तो तत्काल चला ही दिया जाना चाहिए । हमने कहा- इस संसार में सभी पशु ही तो है । शेर, बाघ, भेड़िया हिंस्र पशु हैं; गाएं, भैंस, बकरी, भेड़, घोडा, गधा आदि पालतू पशु हैं । ये चौपाये होते हैं । मनुष्य के दो पैर होते हैं । वह अपने आगे के दो पैरों को हाथों की तरह काम में लेकर औजार बना सकता है, खेती कर सकता है, समाज का निर्माण करता है इसलिए वह एक सामाजिक पशु ( सोशियल एनिमल ) है । जैसे ही मनुष्य ने दो पैरों पर खड़े होना शुरू किया वह पशु से भिन्न हो गया । बंदर भालुओं को भी राम ने अपने साथ लिया क्योंकि वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे और मनुष्य के परिवार के निकट ही थे । साहित्य-संगीत-कला विहीन अंध भक्त भी तो बिना सींग पूंछ के पशु ही हैं । लालची को धन-पशु कहते हैं ।कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक ऋक्षराज जांबवान की पुत्री जांबवती थी । बोला- गाय हमें दूध पिलाती है इसलिए वह माता है, सभी देशवासी उसका दूध पीते हैं इसलिए वह पशु नहीं राष्ट्रमाता है । हमने कहा- अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ? फिर वह नॉर्थ ईस्ट और गोवा में माता क्यों नहीं है ? अगर माता है तो माता है फिर चाहे कहीं भी, कितनी भी उम्र की हो । मुसलमानों को हड़काने के लिए कुछ और, चुनाव के लिए कुछ और, और हिन्दू मालिकों के बूचड़खानों के लिए कुछ और । हो सकता है कल को मछली हाथ में लटकाकर बंगाल में चुनाव प्रचार करने की तरह नागालैंड में गाय काटते हुए या मंगलवार को गौमांस खाने का वीडियो जारी करना पड़ जाए । और फिर भई हमारे पासपोर्ट में तो हमारी वास्तविक माता का ही नाम लिखा हुआ है । जो माता मानते हैं उनके रिकार्ड में चेंज करवा दे । वैसे सावरकर गाय को माता नहीं, एक उपयोगी पशु मात्र मानते थे । तो क्या सावरकर पर भी एफ आई आर करोगे ? और किरण रिजिजू तो घोषित गाय भक्षक है । उसे भाजपा और मंत्रीमंडल से तो कम से कम अभी हटा दो । और बीफ खाने वाले फादरलैंड इज़राइल से तो संबंध तोड़ ही लो । बोला- फिलहाल तो इस मादनी का कुछ करना पड़ेगा जिसने मियाँ की जूती मियाँ के सिर मार दी ।




 

 




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Jun 1, 2026

01-06-2026 आज का मेन्यू


02-06-2026 

मियाँ की जूती मियाँ के सिर 






तोताराम ने बैठते ही पूछा- माताजी का क्या हाल है ?

हमने कहा- क्या बहकी-बहकी बात कर रहा है । इस गई 20 अप्रैल को माताजी को गुजरे 26 साल हो गए और आज तू हाल पूछ रहा है ।वैसे तो प्राण निकलने के साथ ही सब खेल खत्म हो जाता है लेकिन धर्म के नाम पर मुफ़्त का माल खाने वाले परजीवी लोग स्वर्ग नरक का चक्कर चलाकर कभी श्राद्ध, कभी बरसी के नाम पर ठगते रहते हैं । मरे हुए के नाम पर जिंदा का जीना हराम किये रहते हैं । अगर इसी रफ्तार से जगद्गुरु की वैज्ञानिक सोच बढ़ती रही तो ये लोग आपके मृत माता-पिता के नाम से अपना रिचार्ज करवाने लगेंगे कि यजमान आपकी माताजी के ताजा हालचाल मिलते रहने के लिए तीन हजार का जियो का रिचार्ज करवा दीजिए । 

बोला- मैं ताई के हालचाल थोड़े पूछ रहा हूँ । मैं तो योगी जी की माताजी का हाल जानना चाहता था । 

हमने कहा-  तो फिर तुझे योगी जी से पूछना चाहिये । उनकी माताजी सावित्री देवी पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं । अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ होता तो अब तक तो सारे देश को खबर हो जाती ।

बोला- मैं जन्म देने वाली माता की नहीं, बल्कि बिना घोषित किए ही राष्ट्र की स्वतः सनातन माता ‘गौमाता’ की बात कर रहा हूँ जिसका कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं ने उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ कहकर अपमान किया है । इन पर तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलता चाहिए । और फौरी न्याय के बतौर इनके घरों पर बुलडोज़र तो तत्काल चला ही दिया जाना चाहिए । 

हमने कहा- इस संसार में सभी पशु ही तो है । शेर, बाघ, भेड़िया हिंस्र पशु हैं; गाएं, भैंस, बकरी, भेड़, घोडा, गधा आदि पालतू पशु हैं । ये चौपाये होते हैं । मनुष्य के दो पैर होते हैं । वह अपने आगे के दो पैरों को हाथों की तरह काम में लेकर औजार बना सकता है, खेती कर सकता है, समाज का निर्माण करता है  इसलिए वह एक सामाजिक पशु ( सोशियल एनिमल )  है । जैसे ही मनुष्य ने  दो पैरों पर खड़े होना शुरू किया वह पशु से भिन्न हो गया । बंदर भालुओं को भी राम ने अपने साथ लिया क्योंकि वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे और मनुष्य के परिवार के निकट ही थे । साहित्य-संगीत-कला विहीन अंध भक्त भी तो बिना सींग पूंछ के पशु ही हैं । लालची को धन-पशु कहते हैं ।कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक ऋक्षराज जांबवान की पुत्री जांबवती थी । 

बोला- गाय हमें दूध पिलाती है इसलिए वह माता है, सभी देशवासी उसका दूध पीते हैं इसलिए वह पशु नहीं राष्ट्रमाता है । 

हमने कहा- अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं ।  उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ? फिर वह नॉर्थ ईस्ट और गोवा में माता क्यों नहीं है ? अगर माता है तो माता है फिर चाहे कहीं भी, कितनी भी उम्र की हो । मुसलमानों को हड़काने के लिए कुछ और, चुनाव के लिए कुछ और, और  हिन्दू मालिकों के बूचड़खानों के लिए कुछ और । हो सकता है कल को मछली हाथ में लटकाकर बंगाल में चुनाव प्रचार करने की तरह नागालैंड में गाय काटते हुए या मंगलवार को गौमांस खाने का वीडियो जारी करना पड़ जाए ।  

और फिर भई हमारे पासपोर्ट में तो हमारी वास्तविक माता का ही नाम लिखा हुआ है । जो माता मानते हैं उनके रिकार्ड में चेंज करवा दे । वैसे सावरकर गाय को माता नहीं, एक उपयोगी पशु मात्र मानते थे । तो क्या सावरकर पर भी एफ आई आर करोगे ? और किरण रिजिजू तो घोषित गाय भक्षक है । उसे भाजपा और मंत्रीमंडल से तो कम से कम अभी हटा दो ।  और बीफ खाने वाले फादरलैंड इज़राइल से तो संबंध तोड़ ही लो । 

बोला- फिलहाल तो इस मादनी का कुछ करना पड़ेगा जिसने मियाँ की जूती मियाँ के सिर मार दी । 



 




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May 31, 2026

31-05-2026 धर्मो रक्षति रक्षितः


31-05-2026 


धर्मो रक्षति रक्षितः 







आज तोताराम बहुत खुश था, बोला- देखा, ऐसे धर्म अपनी रक्षा करने वाले की रक्षा करता है । आखिर ‘ट्रम्प’ की जान बच ही गई । 


हमने कहा- तोताराम, क्या अब फिर किसी ने संत शिरोमणि ट्रम्प पर  प्राणघातक हमला कर दिया ? जुलाई 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान हमला, अप्रैल 2026 में कोरसपोन्डेंट्स डिनर के समय हमला और अभी मई में व्हाइट हाउस के सामने फिर गोलीबारी । वास्तव में इस दुनिया में भले लोगों का तो जीना ही हराम है । ईसा मसीह को दुष्ट लोगों ने सूली पर चढ़ा दिया । महात्मा गाँधी, मुजीबुर्रहमान, भंडारनायके, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी जाने किन किन की हत्या कर दी गई ।


बोला- मैं हत्या की बात नहीं कर रहा ।  मैं तो ईद के दिन बांग्ला देश में कुर्बानी से ‘ट्रम्प’ को बचा लिए जाने की बात कर रहा हूँ । 


हमने कहा- यह ठीक है हमारे यहाँ नर बलि के कई प्रसंग आते हैं । खलीफा ने भी अल्लाह के लिए अपने बेटे की बलि दी थी लेकिन जैसा कि ऐसे मामलों में होता है तलवार किसी और पर चल गई और खलीफा का बेटा बच गया । हमारे यहाँ भी कुछ दुष्ट लोग महात्मा गाँधी की हत्या को ‘वध’ कहते हैं जो कि एक प्रकार से महान पुण्य कार्य माना जाता है । हिन्दू महासभा की एक नेता शकुन पांडे ने तो बाकायदा गाँधी के पुतले पर गोली चलाते हुए फ़ोटो खिंचवाकर अपने इरादों का परिचय दिया था । इसी तरह से हिन्दू महासभा के विनायक सावरकर से सहायता प्राप्त गोडसे के पत्र में एक कार्टून में गाँधी को दस सिर वाला ‘रावण’ बनाकर श्यामाप्रसाद मुखर्जी और सावरकर द्वारा उस पर तीर चलते हुए दिखाकर अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे ।  


लेकिन ट्रम्प को किसने पकड़कर बांग्लादेश पहुँचा दिया ? ईरान से तो ऐसा समाचार आया नहीं और न ही ट्रम्प इन दिनों बांग्लादेश की यात्रा पर हैं कि किसी पशु विक्रेता ने उन्हें भैंसा समझकर पकड़कर किसी कसाई को बेच दिया । हालाँकि जिस तरह से उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर मंगवा लिया और अब उसका तेल भारत जैसे अपने आज्ञाकारी देशों को बेचने वाले हैं और भारत के उद्योगपति यहाँ निवेश करके बेकारी कम करने की बजाय अमेरिका में निवेश कर रहे है, उससे तो ट्रम्प दुनिया में इस समय महिषासुर कीतरह किसी बिगड़ैल भैंसे वाली भूमिका ही निभा रहे हैं । 


वैसे भारत में तो मुसलमानों ने ईद के मौके पर अपने को विवादों से परे रखने की समझदारी दिखाई है गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का नारा देकर और पशुपालकों से गाय न खरीदकर । 


बोला- मास्टर, तू मेरी बात सुने बिना ही बात को अपने अनुसार रँग कर बढ़ाए चला जा रहा है । यह अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रम्प नहीं बल्कि 700 किलो का एक एलबीनो भैंसा है जिसके बाल भूरे हैं और रंग भी काला नहीं है । 


हमने कहा- यह तो बीमारी है । कई ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनकी चमड़ी बहुत गोरी सी हो जाती है और बाल भी सफेद या सुनहरे और आँखें दिन में ढंग से नहीं देख पातीं । यह एक प्रकार का विकार है । मनुष्यों की तरह जानवरों में भी विकार हो जाते हैं । ये जन्मजात होते हैं और ठीक होना बहुत मुश्किल है । 


अपंग मनुष्य और बीमार जानवर की कुर्बानी जायज नहीं है ।हो सकता है शरीर की तरह दिमाग में भी कोई खराबी आ गई हो ।  अच्छा हुआ जो ‘ट्रम्प’ की कुर्बानी नहीं दी । ऐसे जानवर को खाकर जाने कितने लोग जिस्मानी और दिमागी तौर पर बीमार हो सकते थे । सरकार ने भी अच्छा ही किया जो उस भैंसे को चिड़ियाघर में भेज दिया लेकिन 700 किलो की कोई चिड़िया होती है क्या ? 


इसे तो सूअरों में बाड़े में रखना चाहिए था ।


 फिर भी चलो अच्छा ही हुआ । अगर अपने इस ‘भावना प्रधान देश’ में ऐसा हुआ होता तो इस ईद पर गाय की कुर्बानी से बच निकले मुसलमानों को मोदी जी के मित्र की कुर्बानी के अर्द्ध सत्य ‘ट्रम्प हतो नरो वा भैंसो वा’ को लेकर दंगा करवा देते । 


-रमेश जोशी 


 

 



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