17-09-2026
एक दीया जबरदस्ती का
आज हम तोताराम के आने से पहले ही बरामदे में बैठे थे और सामने जल रहा था एक दीया । हमारी मेहनत से अर्जित की गई पेंशन से; जनता के टेक्स का माले मुफ़्त नहीं कि हर साल बेरहमी से संख्या बढ़ाते जाओ, गिनीज बुक में नाम दर्ज कराते जाओ।
बोला- आज के दिन तो भूल जाता 18 महीने के डी ए के एरियर की नाराजगी और कम से कम सात दीये तो जला लेता । वैसे लगता है उत्साह में समय भी भूल गया । अरे, सुबह के 6 से 7 नहीं शाम के 6 से 7 की बात थी ।
हमने कहा- हमने यह दीया किसी को आशीर्वाद के लिए नहीं जलाया है बल्कि यह संवेदना का दीया है उनके लिए जिनकी पिछले 12 वर्षों में किसी ने सुध नहीं ली बल्कि बेशर्मी से उपेक्षित कर दिया जैसे किसान, मणिपुर के उपद्रव पीड़ित लोग, नोटबंदी में बैंक की लाइन में मरे सैंकड़ों लोग, सड़कों पर घसीटी गई न्याय मांगने निकली पहलवान लड़कियां, लॉकडाउन में यातना झेल झेलकर मारे मजदूर, कोरोना में उपेक्षा और असुविधा में मरे लाखों लोग और अब जंतर मंतर पर पैलेट गन और सादे वेश में घुस गए गुंडों के डंडे खाने वाले विद्यार्थियों के लिए है ।
और फिर आशीर्वाद अपने मन से अपने आप निकलता है जैसे कि तपती दोपहरी में किसी पेड़ की छाया में बैठते ही उस पेड़ को लगाने वाले के लिए या किसी प्याऊ में ठंड पानी पीकर अपने आप आशीर्वाद निकल जाता है । शब्दों में नहीं, मौन ।
और फिर मोदी जी ने कौन हमारे पाँव छुए हैं जो आशीर्वाद दें । ये तो सरकारी आदेश देकर आशीर्वाद वसूल कर रहे हैं ।
बोला- मोदी जी ने तो बिना क्षमा मांगे ही जंतर मंतर वाले बच्चों को माफ कर दिया था ।
हमने कहा- यहाँ भी एक प्रकार से वही किया । आशीर्वाद अपने सत्कर्मों से अपने आप मिल जाता है और क्षमा अंदर से दुख होने पर पश्चाताप होने पर मांगी जाती है । किसी की धुनाई करो और फिर बड़े बनकर उसी को क्षमा करने का नाटक करो । यह क्षमा याचना नहीं थी, जले पर नमक छिड़कना था । पीड़ित के पीड़क क्षमा याचना करता है । पीड़ित को माफ करने का क्या तुक है ?
बोला- फिर भी जब सारे देश में करोड़ों दीये जलाए जा रहे हैं ।
हमने कहा- उसका सत्य सब जानते हैं । पार्टी वाले कुर्सी बचाने के लिए और कर्मचारी नौकरी बचाने के लिए । और फिर मोदी जी ने तो खाने का तेल बचाने का नारा भी तो दिया था । और अब उनके पार्टी अध्यक्ष दीये जलाने का आदेश दे रहे हैं ।
बोला- संशयात्मा विनश्यति । विश्वास रख । सुना है हरिद्वार में कई ऐसे चमत्कारी संत हैं जो पानी में पूरी तल देते हैं । और फिर कहा गया है कि जिनका रुतबा होता है उनके तो पेशाब में भी दीये जलते हैं ।
एक बार ट्राइ करने में क्या नुकसान है । हो सकता है नाली की गैस की तरह यह नुस्खा भी काम कर जाए ।
हमने कहा- दीया ही जलाना है तो ज्ञान का जलाओ, आपसी सम्मान का जलाओ, स्वाभिमान का जलाओ, ईमान का जलाओ; चापलूसी का नहीं ।
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