Jun 1, 2026

01-06-2026 आज का मेन्यू





01-06-2026 


आज का मेन्यू 



 




आज आते ही तोताराम ने वैसे ही दमित इच्छाओं का पिटारा खोल दिया जैसे किसी पेटू और गरीब ब्राह्मण को कोई धनवान जजमान मन इच्छा भोजन का न्यौता दे दे । वैसे ही जैसे किसी टुच्चे व्यक्ति को बड़ा पद मिल जाए तो वह पागल हो जाता है । फिर तो अंगूठा छाप होते हुए भी चार-चार महँगे पेन ऊपर वाली जेब में प्रदर्शित करता है, दिखाने के लिए अंग्रेजी का अखबार पढ़ते हुए या कोई फ़ाइल देखते हुए या किसी कागज पर हस्ताक्षर करते हुए या फोन करते हुए फ़ोटो खिंचवाता है। दिन में दस दस ड्रेसें बदलता है । हो सकता है सोता भी कोई महंगा सूट पहन कर ही हो । उसका मन करता है कि कैसे हाथ पैरों की 16 अंगुलियों में 32 अंगूठियाँ पहन लूँ । 

इसी के लिए अपने मारवाड़ी में एक कहावतभी है-


नादीदी कै होई कटोरी 

पानी पी पी मरगी छोरी 


बोला- मास्टर, आज तेरी सड़ियल चाय नहीं चलेगी । आज तो बस एक गिलास बिहार का सत्तू और दो चार जरदालू ही लूँगा । 


हमने कहा- सत्तू तो समझ आता है । बचपन में तो खैर पता नहीं था लेकिन मुहावरे में जरूर पढ़ते थे ‘सत्तू बांधकर पीछे पड़ना’ जैसे आजकल लोग देश के पीछे पड़े हुए हैं । जिन्हें पानी मिल जाता है वे हाथ धोकर भी पीछे पड़ जाते हैं । आजकल तो सेवक लोग तृणमूल वालों को उल्टा लटकाकर सीधा करने में व्यस्त हैं । लेकिन यह आलू, कचालू, रतालू, श्रद्धालु, झगड़ालू, शंकालु जैसा जरदालू क्या है ? क्या कोई ज़र्दे से बना हुआ पदार्थ है ? 


बोला- विश्वगुरु मोदी जी को नहीं सुनेगा तो ऐसे ही अज्ञान के अंधकार में भटकता रहेगा । तरह तरह की समस्याओं, बीमारियों, कठिनाइयों से घिरा रहेगा । जरदालू एक प्रकार का आम होता है । मोदी जी ने बताया है कि इस आम की खुशबू इतनी बेजोड़ होती है कि इसे दूर से ही पहचाना जा सकता है जैसे कि किसी आतंकवादी को उसके वस्त्रों से । अब यह आम लोकल से ग्लोबल हो गया है जैसे कि मोदी जी खुद राष्ट्रीय से अधिक अंतर्राष्ट्रीय हो गए हैं । मदर लैंड से फादर लैंड जाने लगे हैं । 


हमने कहा- हाँ, यह और बात है कि जापान ने हमारे आम और चीन ने चावल स्तरहीन बताकर वापिस कर दिए हैं । वैसे मान ले अगर हम तेरा प्रिय आम जरदालू उपलब्ध भी करवा दें तो खाएगा कैसे ?


बोला- खाने को तो क्या है कैसे भी खाया जा सकता है । जाएगा तो इसी पापी पेट में लेकिन कल की ‘मन की बात’ में मोदी जी ने यह नहीं बताया कि खाना कैसे है ? 


हमने कहा- जैसे यूट्यूब पर इलाज बताने वाले इधर उधर की हजार बातें करते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि अमुक रामबाण औषधि कितनी, कैसे लेनी है । मतलब कि आखिर में जाना तो उसी के पास पड़ेगा । वैसे ही मोदी जी संकेत कर देते हैं कभी मोरिंगा  के पराँठे का, कभी आम का लेकिन यह स्पष्ट नहीं करते कि चाटना, चूसना, काटना, गटकना, भकोसना या अमरस बनाकर कैसे सेवन करें । किस पार्टी वाले को आम किस तरह खाना चाहिए । मूल रूप से राष्ट्रवादी या ईडी से डरकर राष्ट्रवादी पार्टी में आये दोनों एक ही तरह आम का सेवन करेंगे या अलग अलग तरीके से । किस मुद्रा में, किस समय किस गृह-नक्षत्र में सेवन करना उपयुक्त रहेगा ? 


वैसे फिलहाल जब तक मोदी जी द्वारा अनुशंसित इस मेन्यू का इंतजाम नहीं होता चाय के बारे में क्या नवीनतम निर्देश हैं ? चाय पत्ती किस ब्रांड की होगी, एक गिलास में कितना पानी, कितनी चीनी, कितना दूध डाला जाएगा;  पानी, चीनी, दूध,अलग अलग रहेंगे या सब कुछ बनाने वाले की सुविधा और मर्जी के मुताबिक होंगे ? क्या चाय की पत्ती स्टेशन की चाय की तरह बार बार काम में ली जा सकती है ? 


बोला- मास्टर, यह तो किसी सरकारी योजना का लाभ लेने, जनगणना के प्रश्नों के उत्तर देने या किसी मुसलमान के लिए वोटर  लिस्ट में नाम जुड़वाने या श्याम रंगीला की तरह वाराणसी से नामांकन दाखिल करने की तरह बड़ा कठिन काम है । 

मैं चलता हूँ । कल मिलेंगे । 


वैसे यूट्यूब में मोदी जी की मन की बात के सारे एपिसोड उपलब्ध हैं । सारे दिन बैठ बैठा मक्खी मारता रहता है । कुछ ढंग का देख  सुन लिया कर तो कुछ ज्ञान बढ़ेगा,  जीने का सलीका आएगा और परलोक भी सुधरेगा ।  


हमने कहा- तोताराम, मोदी जी तो बहुत विनम्र  और संकोची व्यक्ति हैं । वे अपने बारे में कभी कुछ नहीं बोलते । अरे, देश दुनिया की इतनी भी क्या फिक्र कि खुद को बिल्कुल ही भूल जाएँ । खुद का तनिक भी खयाल न रखें । उन्हें अपनी पसंद ना पसंद देश को बताते रहना चाहिए जिससे उनके  खान पान और सुख सुविधा का पूरा खयाल रखा जा सके ।अब देश सेवा के जुनून में घर भी नहीं बसाया । नहीं तो कभी न कभी बता ही देते कि भई, आज ‘ऊँदियो’ खाने का मन है या आज लीला मरी नो आचार खावा नो मन छे ।  


बोला- नहीं, व्यक्तिगत स्तर पर तो मोदी जी इन सब तुच्छ बातों से ऊपर हैं । उनकी जीवनी में पढ़ा था कि वे नमक, चीनी, तेल आदि नहीं खाते । वैसे भी जिसने 40 साल भीख माँगकर खाया हो वह सब स्वादों ही क्या, भूख-प्यास आदि सभी मानवीय दुर्बलताओं से ऊपर उठ जाता है । 


-रमेश जोशी    





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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

May 31, 2026

31-05-2026 धर्मो रक्षति रक्षितः


31-05-2026 


धर्मो रक्षति रक्षितः 







आज तोताराम बहुत खुश था, बोला- देखा, ऐसे धर्म अपनी रक्षा करने वाले की रक्षा करता है । आखिर ‘ट्रम्प’ की जान बच ही गई । 


हमने कहा- तोताराम, क्या अब फिर किसी ने संत शिरोमणि ट्रम्प पर  प्राणघातक हमला कर दिया ? जुलाई 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान हमला, अप्रैल 2026 में कोरसपोन्डेंट्स डिनर के समय हमला और अभी मई में व्हाइट हाउस के सामने फिर गोलीबारी । वास्तव में इस दुनिया में भले लोगों का तो जीना ही हराम है । ईसा मसीह को दुष्ट लोगों ने सूली पर चढ़ा दिया । महात्मा गाँधी, मुजीबुर्रहमान, भंडारनायके, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी जाने किन किन की हत्या कर दी गई ।


बोला- मैं हत्या की बात नहीं कर रहा ।  मैं तो ईद के दिन बांग्ला देश में कुर्बानी से ‘ट्रम्प’ को बचा लिए जाने की बात कर रहा हूँ । 


हमने कहा- यह ठीक है हमारे यहाँ नर बलि के कई प्रसंग आते हैं । खलीफा ने भी अल्लाह के लिए अपने बेटे की बलि दी थी लेकिन जैसा कि ऐसे मामलों में होता है तलवार किसी और पर चल गई और खलीफा का बेटा बच गया । हमारे यहाँ भी कुछ दुष्ट लोग महात्मा गाँधी की हत्या को ‘वध’ कहते हैं जो कि एक प्रकार से महान पुण्य कार्य माना जाता है । हिन्दू महासभा की एक नेता शकुन पांडे ने तो बाकायदा गाँधी के पुतले पर गोली चलाते हुए फ़ोटो खिंचवाकर अपने इरादों का परिचय दिया था । इसी तरह से हिन्दू महासभा के विनायक सावरकर से सहायता प्राप्त गोडसे के पत्र में एक कार्टून में गाँधी को दस सिर वाला ‘रावण’ बनाकर श्यामाप्रसाद मुखर्जी और सावरकर द्वारा उस पर तीर चलते हुए दिखाकर अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे ।  


लेकिन ट्रम्प को किसने पकड़कर बांग्लादेश पहुँचा दिया ? ईरान से तो ऐसा समाचार आया नहीं और न ही ट्रम्प इन दिनों बांग्लादेश की यात्रा पर हैं कि किसी पशु विक्रेता ने उन्हें भैंसा समझकर पकड़कर किसी कसाई को बेच दिया । हालाँकि जिस तरह से उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर मंगवा लिया और अब उसका तेल भारत जैसे अपने आज्ञाकारी देशों को बेचने वाले हैं और भारत के उद्योगपति यहाँ निवेश करके बेकारी कम करने की बजाय अमेरिका में निवेश कर रहे है, उससे तो ट्रम्प दुनिया में इस समय महिषासुर कीतरह किसी बिगड़ैल भैंसे वाली भूमिका ही निभा रहे हैं । 


वैसे भारत में तो मुसलमानों ने ईद के मौके पर अपने को विवादों से परे रखने की समझदारी दिखाई है गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का नारा देकर और पशुपालकों से गाय न खरीदकर । 


बोला- मास्टर, तू मेरी बात सुने बिना ही बात को अपने अनुसार रँग कर बढ़ाए चला जा रहा है । यह अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रम्प नहीं बल्कि 700 किलो का एक एलबीनो भैंसा है जिसके बाल भूरे हैं और रंग भी काला नहीं है । 


हमने कहा- यह तो बीमारी है । कई ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनकी चमड़ी बहुत गोरी सी हो जाती है और बाल भी सफेद या सुनहरे और आँखें दिन में ढंग से नहीं देख पातीं । यह एक प्रकार का विकार है । मनुष्यों की तरह जानवरों में भी विकार हो जाते हैं । ये जन्मजात होते हैं और ठीक होना बहुत मुश्किल है । 


अपंग मनुष्य और बीमार जानवर की कुर्बानी जायज नहीं है ।हो सकता है शरीर की तरह दिमाग में भी कोई खराबी आ गई हो ।  अच्छा हुआ जो ‘ट्रम्प’ की कुर्बानी नहीं दी । ऐसे जानवर को खाकर जाने कितने लोग जिस्मानी और दिमागी तौर पर बीमार हो सकते थे । सरकार ने भी अच्छा ही किया जो उस भैंसे को चिड़ियाघर में भेज दिया लेकिन 700 किलो की कोई चिड़िया होती है क्या ? 


इसे तो सूअरों में बाड़े में रखना चाहिए था ।


 फिर भी चलो अच्छा ही हुआ । अगर अपने इस ‘भावना प्रधान देश’ में ऐसा हुआ होता तो इस ईद पर गाय की कुर्बानी से बच निकले मुसलमानों को मोदी जी के मित्र की कुर्बानी के अर्द्ध सत्य ‘ट्रम्प हतो नरो वा भैंसो वा’ को लेकर दंगा करवा देते । 


-रमेश जोशी 


 

 



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May 30, 2026

29-05-2026 मास्टर, यू आर ग्रेट



29-05-2026 


मास्टर,  यू आर ग्रेट 



आज तोताराम ने आते ही मोदी जी के तेल का कम उपयोग करने की सलाह और अपील के बावजूद तेल का पूरा का पूरा टिन ही बरामदे में फैला दिया, बोला- मास्टर, यू आर ग्रेट ।

 

हम फिसलते फिसलते बचे । बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए बैठे रहे और कहा- यह कैसा षड्यन्त्र है ? हम कोई ग्रेट नहीं हैं । ग्रेट होना कोई मजाक है ? जो चाहे जिसे चाहे जब चाहे ग्रेट कह देता है । भारत में इतिहास में दो ही ग्रेट हुए हैं एक अशोक और दूसरा अकबर । वे भी दोनों एक साथ नहीं हुए । दोनों में 15-16 सौ साल का अंतर है । 


बोला- नहीं, ऐसी बात नहीं है । अब एक साथ दो दो ग्रेट सारी दुनिया देख रही है कि नहीं । एक अमेरिका में ट्रम्प और दूसरे भारत में मोदी जी । वे वहाँ अमेरिका को ग्रेट बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़े हुए हैं । जनता घबराई हुई है । पता नहीं, अब और कितना ग्रेट बनाएगा । दम फूला जा रहा है । ऐसे ही यहाँ मोदी जी 20-20 घंटे बिना आराम किए भारत को ग्रेट बनाने में भिड़े हुए हैं । चिंतित तो यहाँ की जनता भी बहुत है ग्रेटनेस से लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है ।


हमने कहा- तोताराम, हमें तो लगता है कि अब इस देश दुनिया में सामान्य लोग तो पैदा होने ही बंद हो गए हैं ।  

जो भी पैदा होता है ग्रेट से कम होता ही नहीं है ।बंगाल में सुवेन्दु अधिकारी को देख ले, उत्तराखंड में धामी को देख ले, असम में हिमन्त बिस्वा को देख ले कोई कहीं से सामान्य नजर आता है ? लेकिन हम न तो ग्रेट हैं और न ही ग्रेट बनना चाहते हैं और न ही कोई हमें ग्रेट कहकर उल्लू बना सकता है ।  


बोला- फिर भी मास्टर, इतने दिन से तू मुझे निभा रहा क्या यह ग्रेटनेस नहीं है ? 


तोताराम के इस वाक्य ने हमें गहरे तक छू लिया । हमने कहा- तोताराम, तुम्हें क्या निभाना ? तू तो एक प्रकार हमारा ही दूसरा पहलू है । अरे,  एक चाय का ही तो खर्चा है । सोच, कौन किसके यहाँ ऐसे नियमित रूप से आता है । हम तेरे बिना सुबह की कल्पना भी नहीं कर सकते । 


बोला- फिर भी मास्टर, एक बात तो माननी पड़ेगी । भारत में अनेक प्रधानमंत्री हुए हैं लेकिन किसी को अमेरिका के किसी राष्ट्रपति ने ‘यू आर ग्रेट’ लिखकर नहीं दिया । ऐसा कहते हुए तोताराम ने अपने फोन में से हमारे सामने एक बड़ा फ़ोटो कर दिया जिसमें अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियों गोर मोदी जी को एक फ़ोटो भेंट कर रहे हैं जिसमें मोदी जी और ट्रम्प दिखाई दे रहे हैं और जिस पर ट्रम्प ने अपनी लिखावट में हस्ताक्षर सहित लिखा हुआ है- मिस्टर प्राइम मिनिस्टर यू आर ग्रेट ।






हमने कहा- तोताराम, यह ग्रेटनेस बहुत महँगी पड़ रही है । इसके बदले में भारत को अगले पाँच साल में अमेरिका से 500 अरब डालर अर्थात 42 लाख करोड़ का सामना खरीदना पड़ेगा । भारत पर इतना विदेशी कर्ज तो मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से पहले शुरू के 66 वर्षों में भी नहीं हुआ था ।

बोला- फिर भी क्या यह कम गर्व की बात है कि अकबर के 500 सालों बाद इस देश को एक ग्रेट मिला है । ऐसे देखें तो एक साल का एक अरब डॉलर ही तो हुआ । इस देश की जनता में ‘इस सीमेंट’ की तरह ‘बहुत जान है’ । 


हमने कहा- ट्रम्प बहुत अविश्वसनीय व्यक्ति है । वह एक बार पकड़ लेने पर किसी का पीछा नहीं छोड़ता । ईरान शांति वार्ता को ही देख ले ।  कितने दिन से नाटक पर नाटक किए जा रहा है । फिर कुछ दिन  बाद कह देगा कि मैं जब चाहूँ मोदी का कैरियर खत्म कर सकता हूँ । 


हमारा तो कहना है कि मोदी जी ग्रेटनेस का चक्कर छोड़ें और अगर कोई कमजोर नस दबी हुई है तो भी हिम्मत करके सब कुछ साफ कर देना चाहिए । नहीं तो यह आदमी ब्लेकमेल कर करके मोदी जी की सारी ज़िंदगी नरक बना देगा । 


बोला- मास्टर, इस बारे में तो मैं क्या कह सकता हूँ । इस बारे में तो कोई चाणक्य ही कुछ कह और कर सकता है । 



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30-05-2026 ले पानी पी


30-05-2026 


ले पानी पी 




जैसे ही तोताराम आया हमने उसकी जलसेवा करते हुए कहा- ले, पानी पी । 


तोताराम ने भी बड़ी शालीनता से गिलास थामा और धन्यवाद दिया । 


चाय आने में दस-पंद्रह मिनट लगने की संभावना थी सो पाँच मिनट बाद ही हमने फिर उसके गिलास में पानी डालते हुए कहा- ले, थोड़ा और पी ले ।


तोताराम ने दो घूंट लेकर गिलास अलग रख दिया । 


पाँच मिनट और बीते । कुल दस मिनट हो गए लेकिन चाय अभी नहीं आई । आ जाएगी, यह कौन सी मन की बात है जिसके बिना राष्ट्र की हृदय गति रुक जाएगी । हमने फिर पूछ लिया- पानी और दें ?


अब तो तोताराम फट पड़ा । वास्तव में कुचरणी बहुत बुरी चीज होती है । अगर मंदिर के चबूतरे पर बैठे पंडित जी को दस मिनट में पचास लोगों के  ‘पंडित जी, राम राम’  का जवाब देना पड़ जाए तो पंडित जी गाली निकालते हुए उनके पीछे भागने लगेंगे । कोई भी चीज हो, अति बहुत बुरी होती है । तभी कहा गया है-


अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।



बोला- मुझे पकड़कर टंकी में पटक दे जो रोज रोज का चाय का झंझट खत्म ।ईंधन, दूध और चाय पत्ती सबका खर्च बच जाएगा । देश की डांवाडोल अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी । पानी पिला रहा है या मेरे प्राण लेना चाहता है । ठीक है कुछ नहीं तो पानी से भी अभ्यागत का स्वागत किया जाता है । लेकिन यह क्या ? पाँच मिनट में तीसरी बार पानी । लगता है राजस्थान में भजन कीर्तन मंडली और मोदी जी के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘वंदे गंगा अभियान’ के तहत कल कुछ ज्यादा की पानी आ गया लगता है ?


हमने कहा- ऐसी बात नहीं है । परसों दिन में बिजली कटौती होने के कारण पानी नहीं आया और कल अज्ञात कारणों से बमुश्किल चार बाल्टी पानी आया । वैसे ही टंकी में पानी पेंदे से जा लगा है । लगता है कल तो एक टैंकर डलवाना ही पड़ेगा । पिछले महिने तो साढ़े तीन सौ लिए थे । अब जब से ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल लेने से मना किया तो हो सकता है चार सौ माँग ले । 


बोला- जब पानी की इतनी तंगी है तो मुझे बार बार क्यों पानी पिलाए जा रहा है । ट्रम्प से आदेशों के तहत मोदी जी ही बहुत हैं देश को पानी पिलाने के लिए ।  







हमने कहा- हमने भी अब अपने दिमाग को ताला लगाकर चाबी उस गंगा मैया में फेंक दी है । बस, अब कोई कष्ट नहीं । जो जो मोदी जी कहते हैं करते चले जाते हैं । दो दिन पहले उन्होंने मंत्रीमण्डल की बैठक में एक बहुत बड़ी ज्ञान की बात कही है कि गरमी के दुष्प्रभावों और लू से बचने के लिए बार बार पानी पियें । और मीडिया ने भी जनहित में यह समाचार बड़े उत्साह से देश में पहुंचाया दिया है । मोदी जी ने तो बच्चों तक को यह समझाया है कि अपने माता-पिता, नाना-नानी, दादा-दादी आदि को गरमी में बार बार पानी पीने के लिए याद दिलाते रहे । पहले तो पोते-पोतियाँ यदा-कदा फोन किया करते थे लेकिन अब दो दिन से  पोते-पोतियों के फोन आ रहे हैं कि बाबा पानी पीते रहना । सो हमने भी तेरा खयाल रखते हुए पानी के लिए पूछ लिया तो क्या गुनाह कर दिया । शुक्र मना कि मोदी जी हैं नहीं तो क्या कभी नेहरू जी, शास्त्रीजी या इंदिरा जी आदि ने फोन करके कहा था कि मास्टरों गरमी बहुत पड़ रही है पानी पीते रहना । 


बोला- मोदी जी का कोई व्यक्तिगत परिवार न होने का यही तो फायदा है कि 140 करोड़ ही क्या, पूरा संसार की उनका परिवार है । 


हमने कहा- हाँ, लेकिन कांग्रेस और मुसलमानों को छोड़कर ।

 

बोला- ऐसी बात नहीं है, देखा नहीं अभी अभी जब विदेश दौरे पर गए थे तो कैसे यू ए ई वाले की तरफ पेंगविन की तरह हाथ फैलाकर बढ़ रहे थे । लेकिन यह पानी वाली बात तो उन्होंने तेरे मेरे लिए नहीं बल्कि अपनी नेक सलाह को मानकर ऊर्जा और ईधन की बचत करने वाले सम्राट चौधरी जैसे देश के सच्चे सेवकों के लिए कही है । तुझे पता है सम्राट, जो चाहें तो धरती पर पैर न रखें लेकिन मोदी जी के आह्वान पर अपने घर से 400 मीटर दूर कार्यालय तक पैदल गए हैं । सोच कितनी धूप झेली होगी और कितनी ऊर्जा खर्च हुई होगी । मेरा क्या है यहीं दो कदम पर तो हूँ ।सच्चे भक्तों को बीच बीच में पानी पीते रहना बहुत जरूरी है । 


वैसे कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि भक्त लोग मोदी जी के कहने से ज्यादा पानी पीने लगे हों इसीलिए तेरे यहाँ कम पानी आ रहा हो । 



हमने कहा- तोताराम, कुछ भी मोदी जी की बात का प्रभाव तो होता है । अभी अपने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय सीकर के कुलगुरु रोज अपने घर से 100 मीटर दूर अपने कार्यालय पैदल जाएंगे ।अखबार में सचित्र समाचार आया है । वैसे जब तेल की कोई कमी नहीं थी तब तो बैठक से शयनकक्ष तक चार्टर्ड प्लेन से जाया करते होंगे । अब सोच पेट्रोल की कितनी बचत हुई होगी । ऐसे ही थोड़ी कर पा रहे हैं मोदी जी ऊर्जा संकट का मुकाबला ? बड़े बड़े त्यागी पड़े हैं देश में । सब तेरी हमारी तरह आरामतलब और स्वार्थी थोड़े हैं ।



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