Dec 28, 2025


एक कुण्डलिया :

राजनीति के रंग 

( 25 दिसंबर 2025 को नेता और भक्तों के आचरण )



पी. एम. प्रेयर चर्च में, भक्त मॉल  हुड़दंग 
बहुत कठिन है समझना राजनीति के रंग 
राजनीति के रंग, संग सँग दूध खटाई 
देखें कब तक निभ पाते ये नाटक भाई 
कह जोशी कवि जब तक तुम चेतोगे भैय्या 
तब तक रंगा बिल्ला डुबा चुकेंगे नैय्या 

-26 दिसंबर 2025 


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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

2015-12-28 

 गमला चोर 

( लखनऊ प्रेरणा स्थल से कार्यक्रम के बाद लोग गमले उठा ले गए- एक समाचार) 



किससे लेकर प्रेरणा देश चला किस ओर 
कोई वोट चुरा रहा, कोई गमला चोर 
कोई गमला चोर, कोई 'हसदेव' चुराए 
एयर प्यूरीफायर बेचे, आँख दिखाए 
कह जोशी कवि सबने शर्म बेचकर खाई 
नहीं अटल का 'राजधर्म' दे रहा दिखाई 



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Dec 23, 2025

पी एस एस

पी एस एस  

राजनीति की भाषा, चरित्र, नैतिकता और रुपये के डालर के मुकाबले मूल्य में निरंतर गिरावट का दौर है । हमारे यहाँ के रात के पारे में भी पिछले सप्ताह गिरावट का दौर था लेकिन इसका राजनीति और अर्थव्यवस्था से कोई संबंध नहीं था । अब तीन दिन से पारा ऊपर चढ़ रहा है लेकिन राजनीति वाली गिरावट का दौर बदस्तूर जारी है ।

आज तोताराम आया तो सिर्फ एक टीशर्ट में । राहुल गाँधी टीशर्ट में भारत यात्रा कर ले, संसद में टीशर्ट में चले जाएँ लेकिन मोदी जी बहुत शालीन और विनम्र हैं । वे चाहे गंगा स्नान ही कर रहे हों लेकिन सिक्स पैक हीरो की तरह न अपनी 56 इंची छाती का प्रदर्शन करते हैं और न ही टीशर्ट जैसा बच्चों वाला पहनावा पहनते हैं । हाँ, राजनीति की जरूरत के मुताबिक आँखें नचाना, अंगुलियों से संकेत करना और दीदी ओ दीदी का व्यंजक कमेन्ट करना तो मजबूरी हो जाता है । आज मोदी जी से सात साल बड़ा तोताराम टीशर्ट में । 



  

हमने कहा- तोताराम, अभी संयोग से ठंड कुछ कम है लेकिन इससे भ्रमित होने की जरूरत नहीं है । यह सर्दी का कोई चुनावी पैंतरा है जैसे सबके खातों में पंद्रह लाख, लाडकी बहना को तीन तीन हजार या बिहार में 10-10 हजार । सरकार और रंडी को पलटते देर नहीं लगती । ठंडी अभी गई नहीं है । अभी दो-चार दिन में पलटी मरने वाली है । चपेटे में आ गया तो ऐसा उलझेगा जैसे ट्रम्प के टेरिफ़ और युद्ध विराम में मोदी जी । 

जैसे ही तोताराम पास आया तो हमने गौर किया कि उसकी टीशर्ट पर कुछ लिखा हुआ भी है ।ध्यान से देखा, लिखा था- P S S 

हमने कहा- तोताराम, यह क्या है ?

बोला- P S S है । 

हमने कहा- यह एक विवादास्पद लिखावट है । इससे किसी की भावना आहत हो सकती है । तेरे खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाई जा सकती है । पुलिस किसी चोर, बैंक का लोन लेकर भागने वाले या आतंकी या घुसपैठिए को भले ही न पकड़ पाए लेकिन तुझे पकड़कर अंदर कर देगी और स्टेंस स्वामी की तरह बिना केस चले हिरासत में ही निबट जाएगा । और कुछ नहीं तो हो सकता है कोई कुत्ता इन अक्षरों को देखकर कुछ और समझकर तेरे ऊपर पेशाब कर जाए ।

बोला- कुत्ता कोई भक्त नहीं होता । कुत्ते भी आर और पी अक्षरों में फरक करना जानते हैं । हो सकता है । जिसने कामरा की टीशर्ट पर पेशाब किया वह कुत्ता नहीं, कोई सेवक रहा होगा । 

हमने कहा- हो सकता है कोई कुत्ता नहीं तो कोई संवेदनशील भक्त तेरा सार्वजनिक रूप से मूत्राभिषेक नहीं तो लात घूँसों से अभिनंदन ही कर जाए तो सर्दी भर चोटों पर चूना हल्दी लगाता रहेगा । 

बोला- लेकिन यह तो मेरी आस्था भक्ति का मामला है । 

हमने पूछा- मतलब ?

बोला- मतलब कि पी एस एस का मतलब है 'प्रभु श्याम सेवक' । खाटू वाले श्याम जी का सेवक ।

हमने कहा- जो स्वयं ही सेवा का दीवाना हुआ होता है उसके पास इतना समय नहीं होता । ऐसे सेवक न तो प्रश्न करते हैं और प्रश्न पूछते हैं । वे तो सीधा एक्शन लेते हैं । बाद का काम तो पुलिस और प्रभु का होता है । वही पीटने वाले को बचाता है और पिटने वाले पर केस दर्ज करवाता है ।

बोला- तो क्या किसी का नाम पूरन सिंह सेरावत, पवन सिंह शेखावत, प्रभु शरण शर्मा हो तो वह पी एस एस नहीं लिख सकता ?

हमने कहा- लिख सकता है लेकिन कनफ्यूजिंग तरीके से नहीं । लिखे पी एस शर्मा । 

बोला- लेकिन 'मनरेगा' को 'जी राम जी' बनाते समय तो कन्फ्यूजन छोड़ दिया कि नहीं ? जी गाँधी है या गोडसे ? 

हमने कहा- यह जी फॉर सब जगह गड़बड़ है । सरकार हमारी है तो मतलब कोई और कैसे निकाल सकता है । मतलब हम निकालेंगे । जी से गू, गटर, गंगा, गोमूत्र, गोबर, गीता, गर्व कुछ भी बनाएं । वैसे बच्चों को वर्णमाला सिखाने के लिए चित्रों का उपयोग करने वाले की नीयत पर निर्भर करता है जैसे ब से अहिंसक बकरी बनाए या बंदूक । श से शलगम और शराब दोनों हो सकते हैं । ग से गणेश भी और गधा भी । 

बोला- लेकिन आर एस एस का तो एक ही मतलब होता है । भले ही रजिस्टर्ड नहीं है लेकिन कोई इस पूजनीय नाम के साथ उल्टा सीधा नहीं कर सकता । राम शरण शर्मा या राम सिंह शेखावत भी नहीं । कल्पना कर अगर उस कुणाल कामरा ने सही स्पेलिंग वाली टीशर्ट पहनी होती तो ? 

हमने तो कहा- तो सुप्रीम कोर्ट को हिरासत में लिए गए विद्यार्थियों की सुनवाई के लिए पाँच साल से समय नहीं मिला हो लेकिन कामरा का तीया-पाँचा वैसे ही फटाफट हो जाता जैसे राहुल गाँधी का फैसला, सदस्यता समाप्ति और मकान खाली करवाना सब एक दिन में पूर्ण । 



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Dec 20, 2025

अच्छा हुआ



अच्छा हुआ 


तोताराम के आते ही हमने कहा- तोताराम, अच्छा हुआ । 

बोला- इसमें कहने की क्या बात है । इस देश और दुनिया के सौभाग्य से मोदी जी हैं तो अवश्य ही सब कुछ अच्छा ही होगा । 28 वां वैश्विक सम्मान मिल गया । एक तरफ की छाती सम्मानों से ढँक गई । अब अगले 12 सालों में 28 सम्मान और मिल जाएंगे तो दूसरी तरफ का 28 इंच का एरिया भी कवर हो जाएगा । आगे से, पीछे से जिधर से भी देखो सम्मान ही सम्मान । मेडल ही मेडल । ​

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हमने कहा- तोताराम, तुम्हारी मेडलों की इस बात से हमें अपने बचपन का हिन्दी के नवभारत टाइम्स अखबार याद आ रहा है । हमारे यहाँ दिल्ली वाला संस्करण आया करता था जिसमें दूसरे पेज में छोटे-छोटे विज्ञापन छपा करते थे जैसे पाँच रुपये में डाक्टर बनें, जादुई अँगूठी, ज्योतिषियों-तांत्रिकों के विज्ञापन, दिल्ली के सिनेमा घरों में लगी फिल्मों के विज्ञापन, फिल्म किस सिनेमा घर में कितने सप्ताह से चल रही है, दिल्ली के कई बैंडों के विज्ञापन भी हुआ करते थे । बैंड मास्टरों की छाती पर कई तरह के मेडल, सजावटी झब्बे जैसे लटके हुए होते थे । हमें वे बैंडमास्टर सेना के किसी बड़े जनरल से कम नहीं लगते थे । मोदी जी की छाती के चारों तरह लटके 56 मैडलों की कल्पना करके हमें कुछ कुछ वैसी ही अनुभूति हो रही है ।

बोला- लेकिन मोदी जी की विनम्रता देख कि वे एक भी मेडल अपनी छाती पर लटकाए नहीं घूमते । इतने शर्मीले हैं कि एंटायर पॉलिटिकल साइंस की अद्भुत, अनुपम  और अभूतपूर्व डिग्री भी न तो अपने नाम के साथ लगाते हैं और न ही किसी को दिखाते हैं । यह तो पत्रकारों के कुचरणी करने पर शाह साहब ने दिखा दी लेकिन मोदी जी ने ऐसे आत्मप्रशंसा वाले कृत्य को रोकने के लिए हाई कोर्ट से गुप्त रखने की सिफारिश करवा ली । 

हमने कहा- हमारा 'अच्छा हुआ' कहने का अर्थ मोदी जी के डंके और मेडलों से नहीं था । 

बोला- तो फिर ?

हमने कहा- हम तो यह कह रहे थे कि अच्छा हुआ जो हमने नेहरू जी के समय में नौकरी शुरू की और मोदी जी के प्रधान सेवक बनने से पहले ही रिटायर भी हो गए । 

बोला- इसमें क्या अच्छा हुआ ? यह तो हमारा दुर्भाग्य है । अगर आज नौकरी लगी होती तो मोदी जी के हाथों से नियुक्ति पत्र लेते । अब कुछ लोग तो यही समझते हैं कि हमने न तो कहीं कोई सरकारी नौकरी की और शायद पढ़े लिखे भी हैं या नहीं । हो सकता है कि डिग्री भी ऐसी वैसी ही हो । 

हमने कहा- नेहरू जी को लोगों की फिक्र ही कहाँ थी । लगे रहते थे अपने मौज मजे में । मोदी जी 20-20 घंटे रोज काम करते हैं फिर भी ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने, मंदिर मंदिर जाकर भगवानों की सुख सुविधा का ध्यान रखने के साथ साथ नौकरियों के नियुक्ति पत्र देने तक का काम करते हैं ।  

बोला- और मोदी जी की लोगों का सम्मान करने की इस भावना से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री भी लोगों को नियुक्ति पत्र बांटने लगे हैं । 

हमने कहा- वैसे यह काम उस समय 15 पैसे के लिफ़ाफ़े से हो जाता था जबकि आज इस काम के लिए करोड़ों के विज्ञापन और तामझाम वाले आयोजन किए जाते हैं । लेकिन इन आयोजनों में और भी कई तरह के अभद्र नाटक भी तो होने लगे हैं । इसीलिए हम कहते हैं कि अच्छा हुआ जो सारे काम मोदी के आने से पहले ही निबट गए अन्यथा हमारा भी जुलूस निकल जाता । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- पता है, अभी दो पाँच दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश जी ने क्या अनीतिपूर्ण काम कर दिया ?

बोला- क्या ?

हमने कहा-वे कुछ डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बाँट रहे थे । जब एक मुस्लिम लड़की को नियुक्ति पत्र देने लगे तो अचानक उसका हिजाब खींच दिया । 

बोला- तो इसमें क्या हो गया ? हो सकता है हिजाब में छुपकर कोई और लड़की नियुक्ति पत्र ले जाती तो ? हो सकता है वह कोई आतंकवादी हो, घुसपैठिया हो । आजकल वैसे ही घुसपैठिये देश और विशेषकर बिहार में घुसकर कांग्रेस को चुनाव जिता रहे हैं । इसीके लिए शाह साहब सारे देश में SIR लगाए हुए हैं । बिहार की सुरक्षा के लिए नीतीश जी ने हिजाब खींच दिया तो क्या हो गया । देश की सुरक्षा के लिए सब कुछ जायज है । 

हमने कहा- लेकिन कल्पना कर अगर हमें नियुक्ति पत्र देते हुए कोई नीतीश जी जैसा नेता देश की सुरक्षा के नाते हमारी पहचान जानने के लिए हमारा कुर्ता खींचकर जनेऊ चेक करने लग जाता तो ?

बोला- तो क्या हो जाता ? वैसे भी आजकल बहुत से लोग स्वेच्छा से माला, तिलक, जनेऊ, पार्टी के चिह्न आदि का अशालीन प्रदर्शन करते हैं या नहीं ?

हमने कहा- हम ने तो जनेऊ पहनना वर्षों पहले ही छोड़ दिया है । जब कोई कर्मकांड करते ही नहीं तो दिखावा करने से क्या फायदा । मान लेते हैं जनेऊ चेक करना भी बुरा नहीं है लेकिन कल को नियुक्ति पत्र देने वाले राष्ट्रभक्त नेता को हमारी जनेऊ न मिलने पर उसे हमारे मुसलमान होने का शक हो जाता और वह खतना देखने के लिए हमारा पायजामा खींच देता तो कैसा लगता ? 

बोला- मास्टर, तू भी बात को खींच खींचकर  जब तक गटर में नहीं डाल देता तब तक तुझे चैन नहीं मिलता । 

हमने कहा- चलो इसे छोड़ते हैं लेकिन इतना तो तय है कि अच्छा हुआ जो हमने नेहरू जी के समय नौकरी शुरू  की और मोदी जी के आने से पहले रिटायर हो गए अन्यथा न खिंचता पायजामा लेकिन इतना तो तय है कि इनसे नियुक्ति पत्र लेते तो पेंशन तो नहीं ही मिलती ।  

नेहरू जी वाली पेंशन मिल रही है यह क्या कम अच्छा है । बहुत अच्छा है । बस, अब तो भगवान से यही प्रार्थना कर कि मोदी जी हमारे जीते जी पेंशन बंद न कर दें । अन्यथा इनका कोई ठिकाना नहीं । ये कुछ भी कर सकते हैं । स्टेडियम से पटेल और मनरेगा से गाँधी का नाम हटा दिया और 'राम' के दोनों तरफ दो गोडसे  'जी'  बैठा दिए । अब दिखा बेटे 'हे राम' बोलकर । 




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