May 14, 2026

14-05-2026 भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले


14-05-2026 


 


भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले 





 



आज जैसे ही बरामदे में झाँका तो देखा, तोताराम । 


हमने खीजते हुए कहा- कल तुझे कहा था ना, वर्क फ्रॉम होम की तरह चाय फ्रॉम होम । 


बोला- मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही  किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके वालों की संसद है । और यह कोई ट्रम्प का कार्यालय थोड़े है जो ‘मे आई कम इन, सर’ कह कर डरते डरते पूछ कर आना होगा । 


हमने कहा- फिर भी मोदी जी ने सच्चे देशभक्तों से राष्ट्रहित में जो अपील की है उसका तो सम्मान करना चाहिए कि नहीं ?


बोला- सम्मान है तो सही । मेरे घर से यहाँ आने के लिए किसी वाहन की जरूरत नहीं, कोई पेट्रोल नहीं फुँकता, और तुझे चाय पिलाने के लिए सोना आयात करने कोई अपना नाम कढ़ा 15 लाख का सूट पहनने की जरूरत भी नहीं । इसी 50 रुपए वाली घिसी लुंगी में जिसमें बंगाल में वोट तक नहीं डालने दिया जाता, निःसंकोच चाय पिला सकता है । और मैं कोई प्रश्न नहीं कर सकता कि चाय ठंडी है, एक ही पत्ती को बार बार उबाला गया है, या यह चाय नहीं लड़की का बुरादा है, गिलास ढंग से धोया है या नहीं आदि । और तू मोदी जी की तरह 12 साल में एक भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं है । 


हमने कहा- लेकिन चाय पीना क्या जरूरी है ? मोदी जी ने तो यहाँ तक कहा है कि तेल भी कम खाओ । जहाँ गुजरात में हर चीज में गुड़ और मूंगफली का तेल जी भर कर होता है वहाँ के मोदी जी तेल, नमक, चीनी कुछ भी नहीं खाते । यह बात और है कि चुनावी मजबूरी में सड़क किनारे की किसी ऐसी वैसी दुकान से खूब सरसों का तेल और मिर्च डलवाकर झालमुड़ी खाली । तभी तो शंखप्रक्षालन के लिए तीरथ तीरथ जाना पड़ रहा है ।

फिर भी तुझे टी फ्रॉम होम ही पीना चाहिए । 


बोला- तेरे यहाँ चाय पीने आना रूस से सस्ता तेल और ईरान से खाद खरीदने जैसा कोई जघन्य अपराध थोड़े है जिसके लिए ऐसे डरें जैसे कि कहीं एप्सटीन फ़ाइल न खुल जाए । 

और फिर मैं कौनसा मध्य प्रदेश के राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर की तरह कार्यभार संभालने के लिए कारों का काफिला लेकर आता हूँ । सुना है समाचारों के अनुसार काफिले में कम से कम 50 और अधिक से अधिक 700 कारें थीं ।जब कि पाठ्यपुस्तक वाला विभाग खान, पुल, सड़क जैसा कमाई वाला विभाग भी नहीं है । 

 

हमने कहा- उनकी क्या बात करता है ? सबसे पहले तो वे सच्चे भक्त हैं । तेरी तरह मौका परस्त नहीं हैं ।

दूसरे ‘सौभाग्य’ शाली हैं, तीसरे ‘सिंह’ और चौथे सबसे ऊपर ‘ठाकुर’ और पाँचवें ‘मध्यप्रदेश से’  हैं जहाँ से

कोई भी विजय शाह सोफिया कुरैशी को पाकिस्तान की बहिन कहकर भी साफ बचा रह सकता है, कोई भी

कैलाश विजयवर्गीय ‘घंटा’ बयान देकर भी खानदानी संस्कारी बना रह सकता है, नीमच में भंवर लाल को

किसी दूसरे धर्म का लगने मात्र पर किसी भाजपा कार्यकर्ता दिनेश द्वारा पीटा जा सकता है,या

सीधी का प्रवेश शुक्ला किसी आदिवासी के सिर पर पेशाब कर सकता है । 



 



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May 13, 2026

13-05-2026 चाय फ्रॉम होम

13-05-2026 


चाय फ्रॉम होम 







आज जैसे ही तोताराम आया हमने कुछ नीची नज़रों और नीची आवाज में कहा- हमें माफ करना, तोताराम !


बोला- जैनियों में एक अच्छी प्रथा है ‘क्षमावणी’ ।  साल में एक बार अपने अच्छे बुरे कर्मों के लिए उल्टे मन से ही सही माफी मांगते हैं । माफी मांगना और माफ करना दोनों ही बड़प्पन की निशानी है । वैसे तो तुझे एक सड़ियल चाय पर रोज एक घंटा अपने मन की बकवास पेलने के लिए बहुत पहले माफी ही नहीं माँगनी चाहिए थी बल्कि प्रायश्चित स्वरूप चांद्रायण व्रत करना चाहिए था ।


हमने कहा- हम चाय और मन की बात के लिए माफी नहीं माँग रहे है । चाय अपने आप में कुछ नहीं होती । वह तो एक संस्कृति और शिष्टाचार है । जिसे कभी कोई चलती ट्रेन में पिलाकर निभाता है तो कभी कोई 15 लाख का सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहनकर निभाता है । हम तो तुझे, मैना और कुछ परिजनों को एक सरप्राइज़ देना चाहते थे । हमने इसी 10 मई को अपनी शादी के 68 वर्ष पूरे  होने के उपलक्ष्य में किसी लक्जरी क्रूज़ शिप से योरप के कुछ देशों के एक महिने के ट्रिप का कार्यक्रम बनाया था । पाँच मिलियन का नॉन रिफंडेबल एडवांस भी दे दिया था लेकिन हम ठहरे मोदीभक्त और मोदी जी ठहरे सच्चे और सबसे बड़े, न भूतो न भविष्यति की श्रेणी वाले देशभक्त । सो देश की अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को देखते हुए सभी देशवासियों से विदेश यात्राएं टालने की अपील के कारण अपना यह कार्यक्रम निरस्त कर दिया है । बस, इसीके लिए माफी मांग रहे थे । 


बोला- मास्टर, मैं भी तुमसे एक बात के लिए माफी मांगने वाला था । मैंने भी अपने दोनों परिवारों के साथ चार्टर्ड प्लेन से अयोध्या यात्रा  का कार्यक्रम बनाया था । सोचा था प्राणप्रतिष्ठा पर नहीं जा पाए थे । इस साल दशहरे के आसपास मैना अस्सी साल की हो जाएगी सो इस उपलक्ष्य में मैना के वजन के बराबर 55 किलो सोना राममंदिर में दान दे आएंगे । लेकिन मोदी जी ने कहा है कि एक साल तक सोना नहीं खरीदना है ।सो मैंने भी अमेरिका से 55 किलो सोने के आयात का ऑर्डर केन्सल कर दिया है । क्या मैं अपने ऐसे छोटे मोटे शौक कुछ समय के लिए स्थगित नहीं कर सकता  ?  


हमने कहा- तोताराम, क्या तुमने आज कुछ ज्यादा लंबी तो नहीं फेंक दी ?


बोला- भाई साहब, शुरूआत किसने की थी ? 


हमने कहा- तोताराम, सच है झूठे के उपदेश का कोई असर नहीं पड़ता । हमें याद है 1962 में जब हम सीमेंट फेक्टरी सवाईमाधोपुर के स्कूल में अध्यापक थे तो भारत चीन का युद्ध शुरू हो गया था । हमारे स्कूल में चंदे के लिए कलेक्टर आये थे । हमने जोश में आकर अपनी शादी में मिली सोने की अंगूठी दे दी थी । उसके बाद ऐसा संयोग हुआ कि आज तक कोई सोने चांदी तो क्या तांबे पीतल का भी कोई गहना नहीं पहना ।

 

उसी माहौल में इंदिरा जी ने अपने सभी गहने रक्षाकोष में दे दिए थे । शास्त्री जी ने 1965 के अन्न संकट के समय जब देशवासियों से सप्ताह में एक दिन सोमवार शाम को भोजन न करने का आह्वान किया था तो उसे पहले खुद अपने घर में लागू किया था । एक बार एक महिला गाँधी जी के पास आई और अपने बेटे को गुड़ न खाने की सलाह देने का आग्रह करने लगी । गांधी जी ने उसे तीन दिन बाद आने को कहा । तीसरे दिन जब वह आई तो गाँधी जी उसके बेटे से कहा कि गुड़ खाना तुम्हारे लिए ठीक नहीं है । महिला ने कहा- बापू, जैसे आज आप यह बात कह रहे हैं वैसे ही उस दिन भी कह देते । बिना बात ही दो चक्कर लगवाए । बापू बोले- पहले मैं भी गुड़ खाया करता था तो तुम्हारे बेटे को न खाने के लिए कैसे कह सकता था । अब तीन दिन से गुड़ खाना छोड़ने के बाद मुझमें ऐसा कहने का आत्मबल आया है ।    


खुद किसी न किसी बहाने, किसी न किसी मंदिर में जाकर रोड़ शो में करोड़ों फूंकने वाले मोदी जी की अपील का कोई असर नहीं होने वाला । वैसे भी जिस देश में 80 करोड़ लोग दो जून के अन्न के लिए भिखारियों की तरह लाइन लगाते हों वहाँ सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने के चोंचलों से कुछ नहीं होने वाला । और लो अब चल दिए हवाई यात्रा और मितव्ययिता का उपदेश देकर विदेश यात्रा पर । क्या यह काम यहीं से फोन से नहीं हो सकता था । ट्रम्प ने तो फोन पर ही युद्ध विराम नहीं करवा दिया था क्या ? ये भी कर लेते वर्क फ्रॉम होम । 


बोला- मास्टर, तू इस संसार के लिए मोदी जी के दायित्त्वों को नहीं समझ सकता । वे विश्वगुरु हैं, दुनिया की सुख शांति, सुव्यवस्था की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है उन पर । तेरा क्या है, तू तो साल में छह महिने एक लुंगी में यहाँ बरामदे में बैठा बकवास करता रह सकता है लेकिन मोदी जी तो वसुधैव कुटुंबकम् के मानने वाले हैं । सब रिश्ते नाते, संबंध निभाने पड़ते हैं । फरवरी में फादर लैंड गए थे तो क्या उसके आसपास में चाचा लैंड, फूफा लैंड, मामा लैंड आदि नहीं जाएंगे ?  फिर कभी किसी मौसी, नानी लैंड भी जाना पड़  सकता है ।  


हमने कहा- और इसी चक्कर में तीन साल से मणिपुर की ओर ध्यान देने का समय नहीं मिला ।घर से पहले बाहर पोपुलर होने के चक्कर वालों के घर उजड़ते देर नहीं लगती । लेकिन कोई बात नहीं, हम तो एक कदम और आगे जाकर मोदी जी की बात को मानेंगे । अब कल से तेरी चाय भी ‘फ्रॉम होम’ और डिजिटल हुआ करेगी । नो कमिंग टु बरामदा । 




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May 10, 2026

10-05-2026 किससे किसकी रक्षा ?



10-05-2026 


किससे  किसकी रक्षा ?  



आज तो तोताराम वह सब कुछ हो-हवाकर आया जो कुछ बनने का स्वप्न भारत को दिखाया जा रहा है और अब तक जिसे मुसलमानों और कांग्रेस ने रोक रखा था । और तो और अपनी मृत्यु के 78 साल बाद तक गाँधी और 62 साल बाद भी नेहरू जिसे साकार होने नहीं दे रहे हैं । 

आते ही शुरू हो गया । और वातावरण जग्गी वासुदेव की ‘शिव के साथ एक रात्रि’  की तरह धांसू हो उठा । 



सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।

लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥


जो मनुष्य ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को प्राप्त होता है। 

इसलिए हे पापात्मा मास्टर, तू भी सोमनाथ लिंग के दर्शन करके अपने पापों का प्रक्षालन कर और मृत्यु के बाद स्वर्ग को  प्राप्त हो । 

हमने कहा- यह किसका प्रोजेक्ट है ? 

बोला- ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है । वैसे गुजरात में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मोदी जी जो एक बड़ा भव्य आयोजन करवा रहे हैं, अपने राजस्थान में इस प्रोजेक्ट के प्रचारक, एजेंट या प्रतिनिधि मुख्यमंत्री भजनलाल हैं जो स्कूलों की बिल्डिंगें संभालने से पहले राजस्थान के करदाताओं का पैसा खर्च करके दिल खोलकर खुले हाथ से विज्ञापन छपवा रहे हैं । भजनलाल जी ने ही यह श्लोक अपने विज्ञापन में छपवाया है और साथ ही नीचे भुगतान के लिए एक क्यू आर कोड भी दिया है । हाँ, यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने पैसे देने पर कितने दिन के लिए किस श्रेणी का स्वर्ग मिलेगा ।


हमने कहा- जब भजन लाल जी शाखा तो दूर, स्कूल में जाना भी शुरू नहीं हुए थे तब हमने 1971 में  पोरबंदर के बिरला स्कूल में पढ़ाते हुए सोमनाथ के दर्शन कर लिए थे । अब जो कुछ होना होगा वह उसी के पुण्य प्रताप से हो जाएगा । रो रोकर दिए गए 2 परसेंट डी ए में से सोमनाथ जाने या कोई दान-दक्षिण देने का प्रावधान नहीं बनता । 


  

हम कोई कहीं के मुख्यमंत्री, मंत्री तो हैं नहीं जो अपनी मुख्य ड्यूटी छोड़कर सरकारी खर्च पर मुफ़्त में इस उस तीर्थ को अपवित्र करते और पाप धोते फिरें । 


बोला- फिर भी कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए ।और आज तेरी शादी को 67 साल हो रहे हैं इसी उपलक्ष्य में  कुछ हो जाए । 


हमने कहा- 1 अप्रैल को मोदी जी की शादी को भी 58 साल हो गए थे । उनको तो तूने न बधाई दी और न ही रिटायर्ड लोगों पर कुछ कृपा करने की सलाह कि अबकी डी ए चार की बजाय छह परसेंट कर दें । जबकि लक्षणों और संयोगों को देखते हुए वे निश्चित रूप से बुद्ध के अवतार सिद्ध होते हैं । उनकी जन्म पत्री देखकर ज्योतिषियों ने बताया था कि या तो यह बालक महान सन्यासी बनेगा या फिर चक्रवर्ती सम्राट । उनके वैराग्य के लक्षण देखकर माता पिता ने सिद्धार्थ की तरह उनकी जल्दी शादी कर दी और संयोग देख सिद्धार्थ की पत्नी का नाम यशोधरा और इनकी पत्नी का नाम जसोदा । 


बोला- यह बात तो सच है । मोदी जी एक साथ ही चक्रवर्ती सम्राट है और एक फकीर भी । देखा नहीं, कैसे धर्म और विरासत की रक्षा के लिए भागे भागे फिर रहे हैं । अगर कुछ नहीं करेंगे तो हो सकता है ये मुसलमान, ईसाई और कांग्रेसी सोमनाथ के मंदिर को फिर तोड़ न डालें । इसलिए घूम घूमकर हिंदुत्व की विरासत की रक्षा करना बहुत जरूरी है । 


हमने कहा- ये सब झूठ और कुप्रचार है और दूसरों के हर कार्य का श्रेय लेने की कुटिल चालाकी है । मोदी जी के जन्म से पहले देश के गृहमंत्री कांग्रेसी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना को अंतिम रूप दिया था और 8 मई 1950 को काम की शुरूआत हो गई थी । जब मोदी जी एक साल के भी नहीं थे तक कांग्रेस के बड़े नेता राजेन्द्र बाबू इसकी प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे । 

 

अब या तो तू जाने या भजनलाल जी या फिर मोदी जी जानें कि वे किस विरासत की किससे रक्षा कर रहे हैं । 

 



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30-04-2026 ऑटो फेयर


30-04-2026 

ऑटो फेयर 



हमने पूछा- तोताराम, ऑटो फेयर के बारे में पढ़ा ? 




बोला- सीकर में किसी बधाई, फेयर और यात्रा की कोई औकात ही नहीं । अखबार में इसके अलावा और होता ही क्या है ? क्या देखना पढ़ना ? अब चूँकि अखबार एक वैसा ही कार्यक्रम हो गया है जैसे ‘मन की बात’ । जिनको पार्टी में अपने नंबर बढ़ाने हैं, जिन्हें अपनी कुर्सी पक्की करनी है वे सुनते हैं, बल्कि सुनने का नाटक करते हैं लेकिन अब किसी को इससे कोई मतलब नहीं ।रोज कोई न कोई कलश यात्रा निकलती है, कोई न कोई स्कूल इतिहास रचता है और उनसे विज्ञापन लेने वाले अखबार उस विज्ञापन को खबर बनाकर छपते हैं ।


ऐसे ही अखबारों में कोई जनहित या जन सरोकार का या सरकारों के भ्रष्टाचारों के समाचार छापने का साहस तो है नहीं सो ऐसे ही आलतू फालतू समाचारों से पन्ने भर देते हैं ।कभी कोई कलश यात्रा, कभी कोई शोभा यात्रा,कभी कोई लाल नीली, हरी पीली भगवा रैली । और कुछ नहीं तो किसी अखबार की तरफ से कोई न कोई फेयर । जिसमें किसी स्थानीय ग्राउंड को किराये पर लेकर दुकानें  लगवाना और धंधा करना । लोकतंत्र का चौथा पाया न हुआ दिल्ली का कोई न कोई मंगल, बुध बाजार हो गया । 


तो हो सकता है किसी अखबार ने ऑटो फेयर भी लगवा लिया हो । वैसे अपने सीकर शहर में ही चार हजार रजिस्टर्ड और एक दो हजार बिना रजिस्टर्ड ऑटो तो होंगे ही । 


हमने कहा- हम ऐसे किसी छोटे मोटे फेयर की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो चीन के बीजिंग में कोई चार लाख वर्ग मीटर में फैले ऑटो मतलब ऑटो रिक्शा नहीं, तरह तरह की एडवांस्ड कारों की प्रदर्शनी लगाई है । 



बोला- मैं उस टुच्चे, छोटी आँख वाला गणेश बनाने वाले देश की बात ही नहीं करना चाहता । अरे, एक संस्कारी विश्वविद्यालय के सीधे सादे बच्चों ने एक खिलौना कुत्ता खरीदकर क्या दिखा दिया, दुनिया में हमारा मज़ाक बनाने लगा । अरे भाई ये छोटी मोटी बातें चलती रहती हैं । मैंने तो बहुत पहले सुना था कि चीन दूसरे देशों से तरह तरह के यंत्र मँगवाता है और उन्हें खोल खालकर थोड़ा बहुत इधर उधर करके अपने नाम से कुछ नया बना लेता है । उसका हमसे क्या मुकाबला । इतने वर्गमीटर में तो हम किसी छोटे मोटे उत्सव में दस-बीस लाख दीये जलवा देते हैं ।इतना बाद कार्यक्रम तो हम दस बीस लोगों को सरकारी नौकरी देने का हल्ला-गुल्ला मचाने के लिए कर देते हैं ।  


हमने कहा- ये कारें दुनिया की सबसे एडवांस्ड कारें है । विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में चीन 2080 में चल रहा है । ये कारें बहुत से काम खुद ही कर लेती हैं । परिस्थिति के अनुसार निर्णय तक ले लेती हैं, फटाफट चार्ज हो जाती हैं, टायर फटने पर भी रुकने का काम नहीं, जरूरी हो तो उड़ भी लेंगी । 


बोला- बस ? ये सब विशेषताएं तो हमारे यहाँ के वाहनों में जाने कब से पाई जाती हैं । हमारे पुराणों में तो जाने कैसे कैसे अस्त्र शस्त्र हुए हैं जो अपना लक्ष्य बेधकर कर सकुशल अपने गैराज, स्टोर या तरकश में आ जाते थे । नो वेस्टिज । 


कारें तो जाने क्या, क्या करके कहाँ लुप्त हो जाती हैं । यहाँ तो एक सामान्य बुलडोज़र तक इतना समझदार होता है कि वह अपराधी का धर्म, जाति, वस्त्र आदि पहचान कर स्वविवेक से न्याय करके निर्णय भी कार्यान्वित कर देता है कि कहाँ, कब, किसका घर, कितना ढहाना है । जीपें भी निर्णय ले लेती हैं कि उसमें  बैठा व्यक्ति कौन है, कितना बड़ा अपराधी है और उसके अनुसार फैसला करके यथा समय, यथा स्थान पलट भी जाती हैं ।   



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