20-10-2026
आस्था का जी पी एस
( दिल्ली के एक पॉश इलाके की सड़क का दृश्य )
हम चाय के लिए तोताराम का इंतजार कर रहे थे लेकिन वह नहीं आया । जब उसके हिस्से की भी चाय निबटाकर हम अंदर जाने लगे तो तोताराम मंडी की ओर से आता हुआ दिखाई दिया।
हमने रुकते हुए कहा- अगर कहीं और जाने का कार्यक्रम था तो जाते हुए बता जाता तो हम न तो तेरा इंतजार करते और न ही चाय बनवाते ।
बोला- क्या बताऊँ मास्टर,मेरे उधर से एक लड़का रेहड़ी लेकर इसी समय सब्जी लेने के लिए जाता है । हुआ यह कि मैं फोन देखता हुआ उसके साथ लग लिया और ध्यान न ही रहा कि कब तेरे यहाँ रुकने की बजाय मंडी पहुँच गया ।
हमने कहा- इस तरह किसी पर भी विश्वास करके उसका अनुसरण करने से पहले तुझे आजकल की छोटी-मोटी खबरों से ही कुछ सीख लेना चाहिए ।
बोला- जैसे ?
हमने कहा- नवंबर 2024 में एक शादी में शामिल होने के लिए तीन युवक जी पी एस पर भरोसा करके गुड़गाँव जा रहे थे । और जी पी एस को अपडेट नहीं किया गया था तो वे बाढ़ में टूट चुके एक पुल के कारण राम गंगा में गिर कर बह गए ।
इसी तरह अभी एक दो दिन पहले ग्वालियर में एक ट्रक वाले ने जी पी एस पर अंधविश्वास करके शीतलामाता के मंदिर की दर्शन की कतार में खड़े 15 लोगों को मार और 42 को घायल कर दिया ।
इसी तरह बंगलुरु के गूगल मैप पर भरोसा करके नौ सॉफ्टवेयर इंजीनीयर जंगल में भटक गए ।
इसी तरह अगर तुम नेताओं के शाब्दिक विकास पर भरोसा करके किसी पुल पर चढ़ गए तो संभव है वह आधे रास्ते में ही धसक जाए या जिस हाइवे के फ़ोटो देखकर हाई स्पीड में चल पड़े तो किसी गड्ढे में न गिर पड़ो ।
बोला- तो क्या करें ?
हमने कहा- बुद्ध ने बहुत पहले कह दिया- अप्प दीपो भव । अपना दीया खुद बनो। किसी भी बात को इसलिए न मान लें किसी तथाकथित बड़े व्यक्ति ने कही है ।यहीं से अंधश्रद्धा शुरू होती है ।
विभिन्न रूपों में भी सच एक होता है लेकिन उसे सबको अपने अपने रास्ते से पाना होता है । किसी के रास्ते पर चलने को बजाय अपना रास्ता बनाओ ।
अगर हनुमान जी रावण के किसी जी पी एस के भरोसे रहते तो रात कभी की बीत जाती और हनुमान जी जोशीमठ से लंका पहुँचने बजाय कहीं भोपाल या हैदराबाद में ही चक्कर काटते रह जाते ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach