03-10-2026
देशप्रेम की दाल फ्राई
पहले जैसे राजस्थान, विशेषकर शेखावाटी के लोग जब भी गाँव से लोटा-डोरी लेकर निकलते थे तो सीधे कलकत्ता-मुंबई जाकर रुकते थे वैसे ही आजकल मध्यम वर्ग के पढ़े लिखे नौकरीपेशा आईटी प्रोफेशनल के रिटायर्ड माता पिता जब घर से निकलते है तो सीधे बंगलुरु पहुंचते हैं । या ईडी के छापे से डरे हुए जनसेवक भाजपा के दफ्तर में पहुंचकर पाक-साफ हो जाते हैं । बस, समझिए इसी ट्रेंड के तहत हम आजकल बंगलुरु में हैं ।
इस कारण तोताराम से वैसे सत्संग नहीं हो पाता है जैसे बरामदे में बैठकर होता था फिर भी हम तोताराम से वैसे ही जुड़ जाते हैं जैसे मोदी जी ट्रम्प से हॉट लाइन से जुड़ जाते हैं और उनसे तत्काल नई ट्रेड डील, टेरिफ़, तेल खरीदने आदि के बारे नवीनतम आदेश ले लेते हैं या जैसे मुख्यमंत्री ‘’मन की बात सुनते हुए फ़ोटो अपलोड करके मोदी जी को अपनी मोदी- भक्ति का प्रमाण भेज देते हैं ।
हमारे पास बीएसएनएल का डेढ़ हजार वार्षिक वाला प्लान है । घर में रहते हुए तो सत्संग में कोई बाधा नहीं आती क्योंकि वाई फ़ाई है लेकिन जब बाहर निकलते हैं तो नेटवर्क नहीं मिलता । मिलता है तो कुछ कुछ वैसा ही मिलता है जैसे डीए । साल भर यू ट्यूब पर वीडियो बनाने वालों के ‘केन्द्रीय कर्मचारियों की हुई बल्ले-बल्ले’ के वीडियो देख-देखकर कहीं राम-राम करके 2 परसेंट डीए के दर्शन होते हैं । और तब तक महंगाई 5 परसेंट बढ़ चुकी होती है ।
आज सुबह सुबह जब घूमने गए तो मन किया सत्संग हो जाए लेकिन नेटवर्क नदारद । हमारे आवासीय परिसर के एक ब्लॉक के कोने पर कभी कभी नेटवर्क मिल जाता है सो वहीं जाकर कोशिश की लेकिन वैसे ही सफलता नहीं मिली जैसे कि बार बार पेपर लीक हो जाने से युवाओं की आयु सीमा निकल जाती है ।
जब तोताराम को यह समस्या बताई तो बोला- नेट वर्क बदल ले जैसे कि दाढ़ी में तिनके वाला अपराधी नेता पार्टी बदलकर राष्ट्रवादी वाशिंग मशीन में छलांग लगा लेता है ।मोदी जी वाला प्लान ले ले ।
हमने पूछा- तो क्या मोदी जी ने कोई टेलीकॉम कंपनी खोल ली है ?
बोला- वे फकीर हैं । इन चक्करों में नहीं पड़ते लेकिन जियो वाला प्लान ले ले । वह रक तरह से उन्हीं का तो है ।
हमने कहा- झूठ । वह तो अंबानी का है ।
बोला- सबके साथ से सब का विकास होता है । उन्हीं का समझ । तभी तो शुभारंभ में विज्ञापन में मोदी जी की नीली जैकेट पहने हुए फ़ोटो नहीं छापी थी ?
हमने कहा- ठीक है, देखेंगे लेकिन जब तक दाल फ्राई समाप्त न हो जाए यह संभव नहीं ।
बोला- क्या ? सुबह घूमते-घूमते दाल फ्राई खा रहा है ? यह कौनसा समय है ? यह ठीक है कि आजकल लोग पार्टियों में प्लेट में खाना लिए-लिए खड़े-खड़े खाते रहते हैं लेकिन सुबह सुबह हम दाल फ्राई खाते खाते कौन घूमता है ?
हमने कहा- राष्ट्रवादी लोगों ने तो कॉकरोचों को प्रतीक बनाकर दशहरे पर पुतला बनाकर रावण के साथ फूँक भी दिया और तू है कि इतने से प्रतीक को नहीं समझता । कैसा हिन्दी का मास्टर हैं ।
बोला- तो तू समझा दे ।
हमने कहा- हमारे बीएसएनएल वाले प्लान की वेलिडिटी अप्रैल 2027 तक है । उससे पहले चेंज करने पर यह छह महीने का 750/- रुपये का नुकसान कौन भरेगा ?
बोला- तो क्या मात्र साढ़े सात सौ रुपये की इस दाल फ्राई के पीछे राष्ट्र हित को दांव पर लगा देगा ? अगर पैसे के चक्कर में बासी दाल फ्राई खाकर दस्त लग गए तो जाने कितने साढ़े सात सौ निकल जाएंगे ।
अगर गलत पति मिल गया तो पत्नी को छोड़कर भाग जाने वाले पति की तरह पत्नी को भी उस निखट्टू से पीछा छुड़ा लेना चाहिए । अगर गलत सरकार चुन भी ली तो कोई बात नहीं लेकिन उसके लिए करवा चौथ का व्रत रखने की कोई जरूरत नहीं है । दोपहर में ही रात की ठंडी रोटी ही सही, खाकर व्रत भंग कर देने में ही फायदा है ।
इसे अर्थशास्त्र sunk cost fallacy कहते हैं । अगर कोई गलत निर्णय ले लिया गया है तो उस पर हुए खर्च की चिंता में उसे ढोते रहने की बजाय उससे पीछा छुड़ाने में ही समझदारी है ।
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