Jun 19, 2026

19-06-2026 तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा


19-06-2026 

तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा 



आज तोताराम बहुत विचलित था । इतना परेशान तो मोदी जी ट्रम्प द्वारा रूस से तेल खरीदने की मनाही या 100% टेरिफ़ की धमकी से भी नहीं हुए होंगे । 

हमने पूछा- वत्स, इतना परेशान क्यों है ? तू तो ईडी के भयभीत तृणमूल कॉंग्रेस के सांसदों और विधायकों की तरह डरा हुआ लग रहा है ।  

बोला- मास्टर, ईडी का क्या है । बड़ा सरल उपाय है । भाजपा में शामिल हो जाओ । तत्काल पवित्र, ईमानदार और संस्कारी । मैं तो एक सामान्य नागरिक के नाते अपनी जान की सुरक्षा चाहता हूँ ।जहाँ तक माल का प्रश्न है तो वह तो मेरे पास है नहीं । अपने नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व होता है । 

हमने कहा- दायित्व तो सरकार के और भी बहुत से होते हैं लेकिन हर बस में लिखी सूचना से सरकार का उत्तर समझा जा सकता है-  ‘यात्री अपने जान माल की रक्षा स्वयं करें’ । वैसे तेरी जान को खतरा किससे है ?

बोला- जब सुबह तेरे यहाँ आता हूँ तो तीन चार कुत्ते नियमित रूप से भोंक भोंककर मुझे डराते हैं जैसे कि कुछ उत्साही राष्ट्रवादी युवक मस्जिद के पास हनुमान चालीसा का पाठ करके या जय श्रीराम के नारे लगाकर मुसलमानों को डराते हैं । 

हमने कहा- कल ध्यान से देखकर, पहचानकर बताना कहीं वे कुत्ते मुसलमान तो नहीं ।   

बोला- कैसे पहचान सकता हूँ । वे कोई कपड़े थोड़े पहनते हैं । वैसे जब से भागवत जी ने कहा है कि हिन्दू और मुसलमानों का डीएनए एक है तो कफ्यूजन और बढ़ गया है । 

हमने कहा- ऐसे मामलों में तू भागवत जी को नहीं हिमन्ता बिस्वा सरमा, धामी, सुवेन्दु अधिकारी, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, योगी जी आदि को सुनाकर । 

बोला- मुझे इन बातों से कोई मतलब नहीं । बस, मुझे तो सुरक्षा चाहिए । जेड प्लस सुरक्षा जिससे तीन चार क्या हजार कुत्ते भी मेरा कुछ न बिगाड़ सकें । 

हमने कहा- फावड़े का एक टूटा हुआ डंडा पड़ा है जाते समय ले जाना और जब भी कुत्ते भोंकें एक दो बार फटकार देना, भाग जाएंगे । 

बोला- भागवत जी तो बहुत बढ़िया लाठी चलाते हैं । मैंने एक बार स्वयंसेवकों को लट्ठ संचालन सिखाते हुए उनका वीडियो भी देखा था । अब भी क्या लट्ठ भाँजते हैं । सुना है कोई अच्छा लाठी चलाने वाला हो तो तीव्र घुमावदार संचालन से बंदूक की गोली से भी बचाव के सकता है । वैसे भी उनके अंडर में तो 40-50 लाख स्वयंसेवकों की सेना आती है । फिर उन्हें जेड प्लस सुरक्षा क्यों मिली हुई है ? वे न तो आयकर देते हैं, न उनकी कोई नौकरी और वेतन है । फिर जेड प्लस सुरक्षा का 40-50 लाख रुपया महिना कहाँ से देते हैं ?

हमने कहा- वे राष्ट्रवादी, संस्कारी, स्वयंसेवी संस्था के सर्वेसर्वा हैं । उनके प्रचारक सरकार में हैं । उनसे कौन कुछ माँग सकता है ? ये तो 40-50 लाख रुपये महिने की बात है उनका तो हजारों करोड़ का आधारभूत ढांचा है, अरबों का बजट है फिर भी किसी को कोई हिसाब किताब नहीं देते जबकि एक छोटी सी गौशाला और दुकान चलाने वाला तक अपना हिसाब देता है । तूने तो सारी ज़िंदगी में 40-50 लाख नहीं कमाए होंगे । इसलिए जेड प्लस सुरक्षा की बात छोड़ । इन कुत्तों का तुष्टीकरण कर दिया कर । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- जैसे राष्ट्रवादी सरकारें अपने अवैतनिक सैनिकों को कभी गौशाला के नाम से तो कभी काँवड़ियों के लिए भंडारे लगाने आदि के बहाने लाखों रुपया देकर लाभान्वित करती रहती हैं । 



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19-06-2026 अब और क्या बाकी रह गया


19-06-2026 

अब और क्या बाकी रह गया 



तोताराम आज बहुत उत्साहित था, बोला- अब और क्या बाकी रह गया ?

हमने कहा- कुछ नहीं । कुछ बाकी नहीं रहा । जिस राम मंदिर के कारण भाजपा पावर में आई, जिसका शिलापूजन, प्राणप्रतिष्ठा, ध्वज-उत्तोलन मोदी जी ने किया उस रामलला के गर्भगृह की छत से पानी टपक रहा है । चंदे और चढ़ावे में चोरी और घपला हो रहा है, बहुमूल्य शिलाएं गायब हैं ।और मजे की बात यह कि  बात बात पर बुलडोज़र चलवा देने वाले और एनकाउंटर करवा देने वाले दबंग योगी जी के राज में एफआईआर तक नहीं हो रही है । मथुरा के कृष्ण मंदिर के तोशाखाना से हजारों करोड़ के सोने और रत्न गायब होने की शिकायत फलाहारी बाबा से अपने खून से पत्र लिखकर की है लेकिन सब तरफ चुप्पी है । हिन्दू ही नहीं अब तो उनके आराध्य तक खतरे में हैं और वह भी तब जब चपरासी से लेकर राष्ट्रपति तक सब हिन्दू हैं ।  सचमुच अब और क्या बाकी रह गया ? 

बोला- अब अपनी इस बुलेट वाणी को विराम दे । मैं मोदी जी की जी-7 सम्मेलन में अद्भुत उपलब्धि के बारे में बताना चाहता था । किसी को कुछ भी ऊलजलूल बक देने वाले नितांत फूहड़, अविश्वसनीय ट्रम्प ने मोदी जी के बारे में क्या कहा ? ‘सबसे सुंदर दिखने वाले फ़रिश्ते जैसे’ । क्या आजतक किसी प्रधानमंत्री के बारे में किसी अमेरिका राष्ट्रपति से ऐसा कुछ कहा था ? इंदिरा गाँधी को तो निक्सन ने चुड़ैल कहा था । 

हमने कहा- जैसे ट्रम्प विश्वसनीय वैसे ये फ़रिश्ते । प्रशंसा और निंदा महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि कर कौन रहा है ? किसी अज्ञानी, स्वार्थी और लफ़्फ़ाज़ व्यक्ति की बात का कोई महत्व नहीं होता । वह पल पल में स्वार्थ के अनुसार बदलता रहता है ।अब तुझे कोई तुझसे ही पूरा खर्चा लेकर साहित्य मनीषी, राष्ट्ररत्न जैसा कोई सम्मान दे दे तो उसका क्या कोई महत्व है । हमारे पास ‘विश्वा’ में छपने के लिए ऐसे ऐसे कवियों की रचनाएं आती हैं जिनको दो दोहे तक छंद में  लिखने नहीं आते लेकिन उनके परिचय में 50-60 सम्मानों की लिस्ट होती है ।हमें भी इलाहाबाद की किसी हिन्दी सेवी संस्था ने 2000 रुपये रजिस्ट्रेशन के बदले सम्मान लेने के लिए बुलाया था लेकिन हमारे बजट में ऐसा प्रोविजन नहीं था सो नहीं गए । आजकल सम्मान भी खरीदे जाते हैं । 

बोला- तो तू क्या कहना चाहता है ? क्या मोदी जी को जो 40-45 सम्मान मिले हैं वे उन्होंने खरीदे हैं ? 

हमने कहा- हमने ऐसा तो नहीं कहा लेकिन यह भी सच है कि किसी को मूर्ख बनाने के लिए उसकी झूठी प्रशंसा की जाती है और जो वस्ताव में मूर्ख होता है वह चक्कर में आ भी जाता है जैसे अपने गाने की प्रशंसा सुनकर कौआ लोमड़ी को अपनी रोटी गंवा बैठा । इंदिरा जी को तो निक्सन ने चुड़ैल कहा था क्योंकि वे उसके दबाव में नहीं आईं । लेकिन इंदिरा को यह देश और दुनिया क्या मानते हैं यह किसी से छुपा नहीं है । इस एंजिल (फ़रिश्ते) और ब्यूटीफुल लु किंग (सुंदर) विशेषण में लोमड़ी की चालाक खुशामद नजर आती है किसी पारखी की नजर कम । वैसे ट्रम्प के सौंदर्य-प्रेम का अनुमान उनके अनेक वैवाहिक और विवाहेतर संबंधों के आधार पर लगाया जा सकता है । 

और जहाँ तक अमेरिका के राष्ट्रपतियों के मन में भारत के प्रधानमंत्रियों के प्रति सम्मान का प्रश्न है तो उसका अनुमान  रीगन द्वारा राजीव गाँधी पर छाता तानकर चलने में, नेहरू जी के लिए ट्रू मैन का देर तक हवाई अड्डे पर उनके इंतजार करने से पता चलता है जबकि ब्यूटीफुल लुकिंग को लेने व्हाइट हाउस के दरवाजे पर एक तृतीय श्रेणी का कर्मचारी भेजा जाता है । ओबामा कहते थे जब मनमोहन बोलते हैं तो सारी दुनिया सुनती है । 

बोला- फिर भी प्रशंसा तो प्रशंसा ही होती है । 

हमने कहा- प्रशंसा क्या, जिस तरह से पर्ची लेकर ट्रम्प से बात कर रहे थे उससे यह लगता था जैसे किसी चौथी फेल को यूपीएससी के इंटरव्यू में बैठा दिया हो । सब लोग हँस रहे हैं । साथ में ले गई पर्ची भी ढंग से नहीं देख पा रहे थे । इससे अच्छा तो जाते ही नहीं या आमिर शाह जैसे चाणक्य और इतिहास के विद्यार्थी को भेज देते । 

वैसे भी हम वास्तविक  जी-7 की गिनती में थोड़े आते हैं । वह तो कुछ देशों को खुश करने के लिए गैलरी में खड़े होकर फिल्म देखने जैसा दर्जा दिया गया है जैसे दक्षिण कोरिया, ब्राजील, मिस्र, कीनिया के साथ मोदी जी के शब्दों में विश्वगुरु भारत को ।  



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Jun 17, 2026

16-06-2026 कितने चंपतराय

16-06-2026   

कितने चंपतराय 





(राम मंदिर चढ़ावा घोटाला प्रकट हुआ- 15-06-2026)

क्या क्या ले चंपत हुए कितने चंपतराय 
भक्त भला क्या चीज है प्रभु भी समझ न पाय 
प्रभु भी समझ न पाय, धर्म के खातिर चंदा 
निकला नेता-व्यापारी का साझा धंधा 
कह जोशी कविराय राम को घट माँहि समाना 
 भैय्या मूरख बनकर काहे दर दर धक्के खाना  




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Jun 7, 2026

07-06-2026 सर फोड़ना


07-06-2026 


सर फोड़ना 





आज तोताराम कुछ उदास था । कई देर चुपचाप बैठे रहने के बाद बोला- मास्टर, तू अगर मज़ाक न उड़ाये तो एक बात कहूँ ? आज मेरा रोने को जी कर रहा है । क्या तेरे कंधे पर सिर रखकर रो लूँ । हमारे प्रभु को तो अपने सात समुद्र पार के प्रभु की स्नेहिल डांट झेलने से ही फुरसत नहीं है । ऊपर से अपना रोना ही पूरा नहीं होता तो हमारा रोना क्या सुनेंगे ? 


हमने कहा- तोताराम, हम सब मनुष्य हैं । सबकी अपनी अपनी समस्याएं हैं, सुख -दुख हैं । आते जाते रहते हैं । एक दूसरे के साथ मिल बाँटकर, रो-धोकर कर जीवन काट लेते हैं । कुछ नहीं तो अपना कंधा तो तुझे दे ही सकते हैं । रो ले, जी हल्का हो जाएगा । वैसे  कल कोक्रोचों के दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल हुए वांगचुक ने कहा है कि घर पर रोने से अच्छा है सड़क पर उतरें । तो चल, हम दोनों जयपुर रोड़ पर या कलेक्ट्रेट के सामने चल कर रोयें । क्या पता, किसी का दिल ही पसीज जाए । 


बोला- इस जमाने में किसी का दिल पसीजने वाला नहीं है। इसीलिए पाँच सौ साल पहले ही रहीम जी कह गए हैं- 


रहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखो गोय । 

सुन अठिलैहैं लोग सब बाँटि न लैहैं कोय ।। अपना दुख मन में छुपा कर रखो। कोई मदद नहीं करेगा, सब मज़ाक उड़ाएंगे । 


तभी तो सोनिया गाँधी ने अपने जीवन के अनेक हृदयविदारक कष्ट दिल पर पत्थर रखकर चुपचाप सह लिए । क्या मिला इस देश से उसे । पहले देवर का निधन, फिर सास और पति की हत्या और स्वयंसेवी निंदकों से निरंतर निंदा- कभी बार बाला, कभी जर्सी गाय, कभी काग्रेस की विधवा । उसने अपनी जीवनी में एक पत्र में लिखा हैं- मैंने जितना जीवन राजीव के साथ बिताया है उससे अधिक जीवन इस देश में उनके बिना बिता दिया है । अगर आपको मुझसे शिकायत है तो मुझे मेरा राजीव लौटा दो, मैं इटली लौट जाऊँगी । और अगर नहीं लौटा सकते तो मुझे शांति से यहाँ की मिट्टी में मिल जाने दो । 


हमने कहा- लेकिन दुख को चुपचाप सह लेने और घर में बैठकर रो लेने से क्या फायदा हुआ ? मोदी जी को देख, अपनी गरीबी, चाय विक्रय और चतुराई से हथियाये गए ओ बी सीत्व का कार्ड खेलकर प्रधानमंत्री बन गए और अब अपनी माँ का अपमान और गालियों का कार्ड खेलकर चुनाव जीत रहे हैं । इसलिए रोओ, नकली आँसू निकालकर रोओ, दिखा दिखाकर रोओ ।घड़ियाली आँसू रोओ ऐसे आँसू नहीं निकलें तो ग्लिसरिन लगाकर रोओ ।  


बोला- लेकिन मोदी जी के पास तो गोदी मीडिया है, जनता के टेक्स का फ्री का पैसा है । मैं कैसे रोने के लिए अखबार में फुल पेज का विज्ञापन छपाऊँ । वे तो मन की बात की आड़ में भी कोई न कोई मतलब का एंगल निकाल लेते हैं ।


हमने कहा- देखो गालिब ने भी यही कहा है कि अपने दुख का हल्ला मचाने में शर्म मत करो । जहाँ भी मौका मिले दुख को भुनाओ । जिस तिस की चौखट पर सिर फोड़ो । वह कहता है- 


वफ़ा कैसी कहाँ का इश्क जब सर फोड़ना ठहरा

तो फिर ऐ संग-ए-दिल ! तेरा ही संग-ए-आस्तां क्यों हो 


इसी ट्रिक को ही सभी धर्म भी अपनाते हैं क्योंकि धर्मों के पास आपकी दुनियावी समस्याओं का कोई हल नहीं है बल्कि कहीं न कहीं धर्म ही आपकी समस्या है ।  सभी धर्म सभी समस्याओं का एक काल्पनिक हल बताने का धंधा हैं इसीलिए वे भी आपको सिर फोड़ने के लिए तरह तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं जैसे हिंदुओं को सिर फोड़ने के लिए मूर्तियाँ और शिवलिंग, मुसलमानों के लिए काबे का काला प्रस्तर का ढांचा,  यहूदियों के लिए रोने के लिए ‘विलाप की दीवार’, ईसाइयों के लिए तरह तरह के क्रॉस ।इंग्लैंड में भी एक स्थान है हाइड पार्क जहाँ जाकर कोई भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी के भी विरुद्ध अपनी भड़ास निकाल सकता है । भी तो किसी जाति के वोट लेने के लिए, उनके लिए शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार की सुविधा मुहय्या करवाने की बजाय  अलग अलग जातियों के लोगों के लिए उनके महापुरुषों की मूर्तियाँ स्थापित करवा देती हैं । रोओ और फोड़ो सिर और हमें जिताते रहो चुनाव । ज्यादा ही कष्ट है तो चलो तुम्हारे नेता के जन्म दिन को राजकीय अवकाश घोषित कर देते हैं । अगर झारखंड के आदिवासियों को अपनी जमीन व्यापारियों को दिए जाने से परेशानी है तो कोई बात नहीं, रख देते हैं किसी हवाई अड्डे का नाम बिरसामुण्डा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ।

बोला- लेकिन मास्टर, अपने इधर तो पानी की भी बड़ी किल्लत है ।

हमने कहा- उसके लिए भजन मंडली ‘वंदे गंगा’ नृत्य नाटिका लेकर घूम तो रही है । और फिर भी तू संतुष्ट नहीं है तो

अपने झुंझुनू जिले के इस्लामपुर का नाम श्रीरामपुर करने प्रस्ताव रख तो दिया है । बोला- हाँ, यह ठीक है । पहले वहाँ

पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में ‘आब-ए-ज़मज़म’ आया करता था अब पवित्र गंगा जल आया करेगा ।




 



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