19-04-2026
बिल गिर गया
आज तोताराम कुछ परेशान सा था, बोला- मास्टर, बिल गिर गया ।
हमने कहा- कोई चिंता की बात नहीं । चूहे की कौन सी फिक्स ड्यूटी होती है । सुना है सेवा के लिए प्रतिबद्ध कुछ मनुष्य तो दिन में 20-20 घंटे और बिना कोई छुट्टी लिए ही देश की नींव खोदते रहते हैं । फिर ये तो चूहे हैं । बिल खोदना ही इनका काम है ।इन्हें किसी हार्वर्ड की डिग्री नहीं चाहिए । इनके पास बिल खोदने के हार्ड वर्क की एनटायर मास्टर्स की डिग्री है ।ऐसे में खोदा गया कोई बिल अगर गिर भी गया तो क्या ? एक नहीं और अनेक बिल खोद डालेंगे ।
तुझे चिड़िया और चुहिया की कहानी पता है ना ? दोनों में दोस्ती थी । एक दिन चुहिया ने चिड़िया से अपना घर दिखाने के लिए कहा । चिड़िया ने कहा कि उसका घर बहुत दूर है और रास्ते में कई तरह की समस्याएं हैं । लेकिन चुहिया नहीं मानी । रास्ते में चुहिया कँटीली झाड़ियों में फँस गई । चिड़िया ने हाल पूछा तो बोली, मैं फँसी नहीं मैं तो नाक छिदवा रही थी । इसी तरह डूबने पर उसने उसे स्नान करना बताया । लेकिन हार नहीं मानी ।
एक दिन चुहिया का बिल गिर गया तो चिड़िया ने कमेन्ट किया- चुहिया रे चुहिया तेरा तो बिल गिर गया ।
चुहिया भी बड़ी ढीठ थी, बोली- मैं तो इसे गिराना ही चाहती थी । शत्रु को धोखा देकर नया एजेंडा और मुद्दा सेट करना मेरे मकसद थे ।यही मेरी चाणक्य नीति थी ।
तोताराम बोला- मैं तो तुझे राजनीतिक रूप से जाग्रत रखने के लिए अवगत कराता रहता हूँ और तू है कि ऐसी ऐसी फालतू और बेसिर पैर की बातें करता है कि मेरा दिमाग खराब हो जाता है । जी करता है अपना जूता निकालकर अपना ही सिर पीट लूँ ।
हमने कहा- इस समय तेरा ही नहीं सारी दुनिया में ही भले आदमियों का यही हाल हो रहा है ।यहाँ या वहाँ, कहीं देख ले सब सिर पीटने वाली बातें । जिनको कुछ नहीं करना वे ऐसी ही बातें करते रहते हैं । अब उधर ट्रम्प दिन में सौ बकवास करता है ।और यहाँ ये चूहे । अरे भाई होना हवाना कुछ नहीं । जो करना है कर लें । कर दे फाड़कर एक की दो । बरसने को कुछ है नहीं । बस गरजना और वह भी हर समय । वनस्पति बादल के गरजने से नहीं बरसने से पुष्ट होती है ।
बोला-मास्टर, मैं किसी चूहे के बिल की नहीं मैं संसद में महिला आरक्षण बिल के गिरने की बात करना चाहता था ।
हमने कहा- लेकिन तू तो इस तरह घबराया हुआ बोल रहा है जैसे किसी बुजुर्ग होती जा रही महिला का बड़ी मुश्किल से धारण किए गर्भ का 'पात' हो गया हो ।
बोला- मास्टर, क्या अद्भुत संयोग है कि तूने भी इस स्थिति का उसी गंभीरता से सटीक वर्णन किया है जैसे रात को अपने राष्ट्र के नाम संदेश में मोदी जी ने ।
हमने कहा- वैसे तोताराम जहाँ तक किसी के कल्याण की बात है तो अगर नीयत ठीक है तो महिला ही क्या किसी का भी कल्याण बिना किसी बिल के भी किया जा सकता है । सभी माननीय अपने घर, परिवार और आसपास संपर्क में आने वाली महिलाओं के प्रति ही सम्मान और सहानुभूति रख लें ।अपने घरों में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और पूरा वेतन दे दें । न्यूनतम वेतन माँगने वाले मजदूर, मजदूरनियों पर डंडे कहाँ की पुलिस बरसा रही है ? महिला पहलवानों को किसने घसीटा था संसद मार्ग पर । मुफ़्त शिक्षा, सड़क और कार्य स्थल पर पूर्ण सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है ? निकालो अपने बलात्कार के आरोपी सांसदों को बाहर, जाओ मणिपुर और माँगो वहाँ की पीड़ित महिलाओं से माफी ।चुनावी रैली, रोड़ शो, फ़ोटो सेशन से तो फुरसत मिलती नहीं और करने चले है महिलाओं का सम्मान । पचास करोड़ की गर्ल फ्रेंड, जर्सी गाय जैसे सम्मान सूचक शब्द किस संत के हैं ? ये तो अपनी छोड़ी पत्नी से ही गुजारा भत्ता न मांगें तो ही बहुत है । और तो और आदिवासी महिला राष्ट्रपति से ही माननीयों का व्यवहार देख लो ।
बोला- लेकिन मास्टर, बिल .....
हमने कहा- क्या बिल बिल । चूहों का काम ही है बिल खोदना ।कुछ भी खा जाना । किसी भी पुल में घुसकर खोदेंगे,किसी बांध को बिल बना बना कर ढहा देंगे, किसी भी सड़क में घुसकर बिल बना देंगे, खाद्य निगम के गोदामों में घुसकर करोड़ों का अनाज खा जाएंगे और तो और शराब बंदी वाले राज्यों में बरामद करोड़ों की शराब पी जाएंगे । चूहे तो हर माननीय केजघन्य मुकदमों की फ़ाइलें खा जाएंगे । अभी विदेशों में चूहे इतने सक्रिय नहीं हुए हैं । अगर इन्हें अमेरिका का वीजा दे दिया जाए तो ये वहाँ जाकर एप्सटीन वाली फ़ाइल तक कुतर आएंगे । फिर दाग ढूँढता रह जाएगा नेतन्याहू ।
तोताराम उठा और कहते हुए चल दिया- तुझे तेरा बिल और चूहे मुबारक ।मेरे मुँह से गुस्से में शाह साहब या विधूड़ी की तरह कोई संसदीय शब्द निकल जाए उससे पहले चल ही देना चाहिए । चाय का क्या है ? यह कौन सी मोदी जी द्वारा ओबामा या छोटी आँख वाले गणेश जी को पिलाई जाने वाली विशेष चाय है ।
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