May 4, 2026

04-05-2026 शोभा अपरंपार


04-05-2026    
शोभा अपरंपार 



काशी में त्रिशूल सँग शोभा अपरंपार 
मगर कभी तो दीखिए जनता के दरबार 
जनता के दरबार, दर्द दुखियों का जानें 
समझें अपना धर्म मदद करने की ठानें 
'जोशी' प्रभु ! मणिपुर भी है भारत का हिस्सा 
नहीं चुनावी मुद्दा ना अखबारी किस्सा 








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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

May 3, 2026

03-05-2026 अधम शरीर




03-05-2026 


अधम शरीर 






हजामत बनवाए दो महिने हो गए । आजकल दिन बहुत जल्दी निकल आता है ।जब दुकान पर जाते हैं तो भीड़ लगी मिलती है । पहले वाला ज़माना तो रहा नहीं । अब तो कोई दाढ़ी बनवाता है तो भी उसमें सोलह शृंगार निकल आते हैं । और उसे किसी विशेष तरीके, नक्शे और डिजाइन में ऐसे सजाया जाता जैसे किसी मंगल यान का ड्रॉइंग बनाया जा रहा हो । कटिंग बनवाने वाला बाल भी रँगवाता है, भौहें भी सँवरवाता है जैसे कि किसी दुल्हिन या दूल्हे का मेकअप हो रहा हो । कई बार तो हम बात देखते देखते दुखी होकर लौट आते हैं । लेकिन अब चूंकि एक तो गरमी बढ़ गई दूसरे हमें मोदी जी की तरह लंबे बाल रखने की आदत नहीं । सो सबसे पहला नंबर लगाने के लिए साढ़े छह बजे ही चाय पीकर दुकान पर पहुँच गए । दुकानदार झाड़ू लगा रहा था । हमारा पहला नंबर । 


अब आराम से नहायेंगे, नाश्ता करेंगे । आये तो देखा तोताराम बैठा हुआ । हम कुछ कहें उससे पहले वही चालू हो गया, बोला- हो गया सोलह शृंगार, अब उबटन और लगा ले । लगता है तुझे ही अब ममता दीदी की जगह भाजपा के मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई जाएगी । या फिर मोदी जी या अमित शाह की जगह तुझे ही कोलकाता में रोड़ शो करना है । इस बुढ़ापे में भी इस नश्वर देह के प्रति इतना मोह । 


हमने कहा- आज तेरा व्यंग्य कुछ ज्यादा नहीं हो गया ? हम तो छह महिने लुंगी में रहने वाले, हफ्ते दस दिन में एक बार ट्रिमर से दाढ़ी खुरचने वाले हैं और तू हमें लज्जित इस तरह कर रहा है जैसे हम कोई 15 लाख का सूट पहने हुए हैं या दिन में दस बार नए नए महँगे परिधान बदलते हैं । जहाँ तक देह की बात है तो कौन कहता है कि देश नश्वर नहीं है । यह तो राम ने खुद कहा है । बालि के वध के बाद विलाप करती तारा से वे कहते हैं-


"छिति जल पावक गगन समीरा

पंच रचित अति अधम शरीरा"

बोला- और क्या ? सभी शरीर इन्हीं पाँच तत्वों से बने हैं इसलिए सब नश्वर हैं और अधम भी । जब तक इनमें कोई और विशिष्ट तत्त्व शामिल नहीं होता यह शरीर अधम और नश्वर ही रहेगा । 

हमने पूछा- क्या सभी मानव देहधारी अधम ही होते हैं ?  इस अधमता से मुक्त होकर उत्तमता का कोई मार्ग उनके लिए नहीं है ? 

बोला- है । एक और श्रेष्ठ तत्त्व । जैसे राम में रामत्त्व, कृष्ण में कृष्णत्त्व , बुद्ध में बुद्धत्त्व  । 

हमने पूछा- क्या गाँधीत्त्वा  , नेहरूत्त्व , पटेलत्त्व, भगत सिंहत्त्व, सुभाषत्त्व, कलामत्त्व आदि से काम नहीं चलेगा । मनुष्यत्त्व से काम चले तो हम थोड़ा मनुष्यत्त्व का तो दावा कर सकते हैं ।  

बोला- कह नहीं सकता लेकिन अभी एक नया तत्त्व खोजा गया है । भारत के एक ज्ञान-विज्ञान प्रधान राज्य गुजरात के एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ‘महाराजा सयाजीराव गायकवाड विश्वविद्यालय, बड़ोदरा’ के समाजशास्त्र विभाग ने एक नया तत्त्व खोजा है- मोदीतत्त्व । उसका अध्ययन करने और उसे जीवन में उतारने के बाद यह जीवन अधम नहीं रहेगा । 

विश्वविद्यालय ऐसे ही मोदी को मक्खन लगाने के लिए ऐसा नहीं कर रहे हैं । इसके बारे में कोई 500-600 कबीर साफ कह गए हैं-

क्षिति जल पावक गगन समीरा 

पंच रचित यह अधम सरीरा 

छठवाँ ‘मोदी तत्व’ मिले तो 

जन्म धन्य हो जाय  कबीरा । 

हमने पूछा- तो फिर इस तत्त्व में किस सत्कर्म का सबसे अधिक योगदान और महत्व माना जाएगा ?

मगरमच्छ का बच्चा उठकर लाना, चाय बेचना, शादी करके पत्नी का परित्याग करना, भीख मांगना या दिन में चार बार नए नए वस्त्र धारण करना । 

बोला- नहीं ये तो कोई भी कर सकता है । प्रधानममंत्री बनकर सब संसाधन आत्मप्रशंसा और विज्ञापन में लगाए बिना यह नहीं हो सकता । 

हमने कहा- लेकिन यह टिकेगा कब तक ? 

बोला- साफ बात है जब तक आप पद पर हैं । तूने वह कहानी सुनी कि नहीं ? जब नवाब साहब की कुतिया बीमार हुई तो सारा गाँव हालचाल पूछने आया लेकिन जब नवाब साहब मरे तो चार कंधे भी नहीं जुटे । 

यह चतुर चमचों का युग है मास्टर । चिलमिया भाई किसके, दम लगाया और खिसके ।

हमने कहा- वैसे हमारा सुझाव है कि द्वितीय विश्व युद्ध से पहले ऐसी ही जिस मानसिकता का योरप में उदय हुआ था उसके साथ इसका तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाना चाहिए जिससे बात और अच्छी तरह समझ में आएगी और इसके वैश्विक संदर्भ का भी पता चलेगा । फिर भी चल, लास्ट में तूने सच बोल दिया , यही दुनिया के व्यवहार का सार तत्त्व है । रुक, अभी चाय बनवाते हैं ।




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03-05-2026 'मोदी-तत्त्व' ज्ञान



03-05-2026 

'मोदी-तत्त्व' ज्ञान 

(महाराज सयाजीराव विश्वविद्यालय में 'मोदी तत्त्व' में डिग्री -एक समाचार 2 मई 2026 )

क्षिति जल पावक गगन औ' हवा से बनी देह 

फिर भी इसकी अधमता में न तनिक संदेह 

में तनिक संदेह, देह पावन हो जाए 

इसमें छठवाँ 'मोदी-तत्त्व' अगर मिल जाए 

जोशी बड़ोदरा में चालू हुई पढ़ाई 

पाए वही प्रवेश  भगे जो छोड़ लुगाई । 




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May 2, 2026

01-05-2026 लुंगी में लोकतंत्र

01-05-2026 



लुंगी में लोकतंत्र  


तोताराम ने हमारी बात को तरजीह देते हुए कहा- तो आज चल ही आते हैं निर्वाचन कार्यालय में मतदाता सूची में अपना नाम देखने के लिए । 


हमने भी तसदीक करते हुए कहा- अब लू का डर तो रहा नहीं । ले ये दो प्याज तो अपनी जेब में रख ले और दो हम और निकाल लेते हैं ।

 

बोला- कोई पेंट शर्ट तो डाल । ऐसे चलेगा क्या लुंगी में ही ।

 

हमने कहा- वैसे बुराई तो इसमें भी कुछ नहीं है । 


बोला- है । वह जमाना गया जब गाँधी आधी धोती में ब्रिटेन के महाराजा से मिलने चले गए थे । यह मोदी जी और शाह साहब का राज है । अब वोट डालने का भी ड्रेस कोड हो गया है । तभी बंगाल के एक मतदान केंद्र पर सुरक्षा बलों ने लुंगी वाले गणेश मजूमदार और अली मण्डल को रोक दिया । जब पेंट शर्ट पहनकर आये तब वोट डाल सके । कुछ तो खयाल रखा जाना चाहिए शालीनता और संस्कारों का ।यह तो सुरक्षा बलों की सज्जनता है जो ए आई सम्मिट के शर्टलेस प्रदर्शकरियों की तरह जेल में नहीं डाला । अगर निर्वाचन विभाग वाले बंगाल वाले सुरक्षा बालों की तरह संस्कारी और शालीन हुए तो तेरा वोट ही स्थायी रूप से काट देंगे  ।



हमने कहा- तमिलनाडु और केरल में तो लोग सभी जगह लुंगी में चले जाते हैं । हम भी जब पोर्टब्लेयर में थे तो लुंगी में बाजार चले जाते थे । वहाँ के नमी और गरमी वाले जलवायु में यह एक बहुत बढ़िया पहनावा है ।फटाफट सूख जाती है और इस्तरी करने की भी कोई जरूरत नहीं । हमारे विद्यालय प्रबंध समिति में चेयरमैन वहाँ के शिक्षा सचिव चारी साहब एक बार आये तो वे लुंगी और हवाई चप्पल पहने हुए थे । और उनकी पत्नी तो बिना चप्पल के ही थीं ।कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज तो  हमेशा ही लुंगी पहनते थे ।   




बोला- यह कांग्रेस का कामराज नहीं, मोदी जी का रामराज है । 


हमने कहा- रामराज में तो राम को हमने नंगे पाँव और एक धोती में वन वन भटकते देखा है । हनुमान जी भी एक छोटे से कपड़े की लंगोटी में ही रहते हैं । आर एस एस को भी फुल पेंट 2016 में तब उपलब्ध हुई जब मोदी जी ने उसे हजारों करोड़ के चंदे और हर प्रकार के ऑडिट से  मुक्त बना दिया । संघ में सर संचालक सुदर्शन जी को हमने कई बार हाफ पेंट में, हिटलरी मुद्रा में नमस्ते सदा वत्सले गाते देखा-सुना है । हालाँकि हमें बड़ा अजीब लगा । बुजुर्ग को कम से कम धोती ही पहना देते लेकिन क्या करें गण के वेश की गरिमा से बंधे हुए थे । 





और जब मोदी जी ने महाबलीपुरम में जिन पिंग का स्वागत किया था तो लुंगी में ही तो थे । क्या वोट डालना इससे भी बड़ा औपचारिक आयोजन है । यह कोई ओबामा को चाय पिलाना थोड़े ही है जो 15 लाख का सोने के तारों से कढ़ा अपने नाम वाला सूट पहना जाए । 


बोला- लुंगी होती है सस्ती, चारखाने वाली, गरीबों की जिसे केरल में मुंडू और तमिलनाडु में कैली कहते हैं 

संभ्रांत लोगों वाली महंगी होती है उसे वेष्टि कहते हैं । मोदी जी वाली लुंगी नहीं, वेष्टि है , महंगी । मोदी जी तो इतने सभ्य हैं कि गंगा स्नान भी पांचों कपड़ों में करते हैं । कभी अभिमान में भरकर भी अपना 56 इंची सीने का भद्दा या शालीन कैसा भी प्रदर्शन नहीं किया । 

हमने कहा- वैसे बंगाल के चुनावों के निवृत्त होते ही मोदी जी ने जिस शिव का त्रिशूल लिए डमरू बजाते हुए बनारस में फ़ोटो खिंचवाया वे तो दिगम्बर हैं निर्वस्त्र ,लुंगी भी नहीं । क्या उन्हें बनारस से निकाल दोगे । जो निर्वस्त्र रह सके वही शिव हो सकता है । सम्पूर्ण पारदर्शी । कोई एप्सटीन फ़ाइल नहीं । कोई भी कर ले जांच । किसी ट्रम्प और नेतनयाहू का कोई डर नहीं ।

शिव या महावीर वस्त्रों की कमाई नहीं खाते । वे सबके कल्याण अपने शिवत्व के कारण जाने जाते हैं, सूटबूट के कारण नहीं । 

वैसे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए लुंगी उतरवाना ठीक नहीं क्योंकि लुंगी के बिना घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें निकालेंगे कैसे ?   

फिर भी सोच किसी 70-80 वर्ष के बुजुर्ग को केवल लुंगी पहनने मात्र के लिए इस तरह लज्जित करना उचित है ?


बोला- मास्टर, लोकतंत्र की रक्षा के बहुत कुछ करना पड़ता है । लोकतंत्र और वह भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी का । 




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