Jul 6, 2026

05-07-2026 चंदन-पानी


05-07-2026 

चंदन-पानी 



इससे पहले कि तोताराम पेपर लीक या राम मंदिर चोरी जैसा कोई मुद्दा उठाए या सरकारी कर्मचारियों की पे कमीशन, डीए की तर्ज पर चाय के साथ किसी खाद्य पदार्थ की मांग करे हमने अपनी तरफ से मोदी जी तरह उसे उलझाने के लिए प्रश्न उछाल दिया, पूछा- यह ई-20 क्या है ? कहीं भारतीय क्रिकेट की महान हस्ती, शाह साहब के साहबज़ादे जय शाह ने क्रिकेट का कोई नया फॉर्मेट ईजाद किया है ?  एक पिकनिक जैसे परंपरागत पाँच दिवसीय क्रिकेट मैच के आयोजन से आगे जाकर वन डे, डे नाइट, 20-20 आदि । 

बोला- ऐसे तो सर्वज्ञ होने का दावा करता है और फरक आस्ट्रेलिया और आस्ट्रिया का मालूम नहीं । यह टी-20 जैसा कुछ नहीं है ।  यह तो गड़करी के सुपुत्र द्वारा आविष्कृत एक ऐसा पदार्थ  है जो उत्पादक के लिए तो सस्ता है लेकिन ग्राहक को उसका कोई लाभ नहीं मिलता । वह पदार्थ है ‘ई-20’ । ई मतलब ईथेनॉल । गन्ने के रस जैसा कुछ । दुनिया में कोई देश इस तरह, इतना और इस उत्साह से इसे काम में नहीं ले रहा है लेकिन मोदी जी इसका ‘गटर-गैस’ की तरह जहाँ तहाँ प्रचार करते फिर रहे हैं । इस पदार्थ को 80 लीटर पेट्रोल या डीजल में 20 लीटर के हिसाब से मिलाया जाता है ।  इससे ऑटो मोबाइल क्षेत्र का तीव्र विकास होगा ?

हमने कहा- हमने तो सुना है कि इससे माइलेज कम हो जाता है और कार में कई तरह की खराबियाँ आ जाती हैं । 

बोला- तभी तो । ज्यादा चलाऊ पुख्ता चीजों से बाजार की गति थम जाती है । यूज एण्ड थ्रो और फिर नया लो । इसीसे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है जैसे कि उद्घाटन से पहले ही सड़क या पुल टूट जाए तो रूलिंग पार्टी की अर्थव्यवस्था सुधरती है । नकली दवा बनाने वाले और घटिया निर्माण करने वाले ही तो 40% कमीशन देंगे, पी एम केयर फंड की केयर करेंगे और इलेक्शन बॉन्ड खरीदेंगे । 

हमने कहा- एक योगी जी का 80-20 भी तो है ?

बोला- वह तो चुनाव जीतने और बुलडोज़र चलाने का एक फार्मूला है जिसमें 20 प्रतिशत मुसलमानों को 80 प्रतिशत हिंदुओं के लिए खतरा बताया जाता है । 

हमने कहा- लेकिन यह तो उनके नाथ पंथ के सिद्धांतों के खिलाफ है । तुझे पता होना चाहिए-

नाथ पंथ (विशेषकर गोरखनाथ संप्रदाय) का मुसलमानों के साथ एक गहरा और ऐतिहासिक रूप से समावेशी संबंध रहा है। इस पंथ ने सदियों से हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के अनुयायियों को अपने दर्शन और साधना से जोड़ा है। 

नाथ पंथ और इस्लाम के मुख्य जुड़ाव बिंदु:

  • मुस्लिम जोगी (फकीर): इस पंथ में एक समय में बड़ी संख्या में "मुस्लिम जोगी" शामिल थे। उत्तर प्रदेश (जैसे गोरखपुर), पंजाब और बंगाल में ऐसे कई परिवार आज भी हैं जो नाथ परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इस्लाम को मानते हैं। 

  • पीर रतन नाथ की कथा: नाथ परंपरा में पीर रतन नाथ (या कायानाथ) एक प्रमुख संत माने जाते हैं, जिनका संबंध मक्का और पैगंबर मोहम्मद से भी जोड़ा जाता है। हिंदू और मुसलमान दोनों उनकी पूजा करते हैं।

  • साझा पूजा स्थल: कई नाथ स्थलों पर संतों की समाधियों को हिंदू और मुस्लिम दोनों समान रूप से पूजते हैं। पंजाब के बठिंडा में स्थित बाबा रतन हाजी की दरगाह (या मठ) इसका एक प्रमुख उदाहरण है। 

  • सूफीवाद से समानता: नाथ पंथ की हठयोग और कुंडलिनी जैसी रहस्यवादी साधनाएं, सूफी संतों (जैसे बाबा बुल्ले शाह और अन्य) की विचारधारा के बहुत करीब रही हैं।

  • 'पीर' की उपाधि: नाथ पंथ के कई मठों में मुख्य संतों या पुजारियों को "पीर" कहकर भी संबोधित किया जाता है।

बोला- राजनीति का कोई पंथ नहीं होता । वहाँ चुनाव जीतना ही महत्वपूर्ण होता है । चुनाव के लिए भला नहीं,  जिताऊ कैंडीडेट ढूँढ़ा जाता है ।  फिर उसके पास शिक्षा या सज्जनता की जगह कोई एनटायर या एफ़िडिफिट वाली डिग्री ही क्यों न हो । 

हमने कहा- लेकिन मिलने में क्या बुराई है । मिलने से ताकत बढ़ती है जैसे मिश्र धातु मतलब अलॉय । मुसलमानों,दलितों, आदिवासियों को सम्मान और प्रेम से जोड़कर देश और और मजबूत बनाया जा सकता है । गहनों का जोड़ मजबूत करने के लिए सोने चांदी में तांबे का टांका लगाया जाता है । सूती कपड़े में 20 प्रतिशत सिंथेटिक मिला देने से वह मजबूत और धोने-प्रेस करने में आसान हो जाता है । दूध में पानी, घी में चर्बी, सीमेंट में रेता नहीं; चंदन-पानी की तरह मिलो जिसकी सुवास अंग अंग में समा जाए ।  

बोला- ऐसे रैदासी सिद्धांतों से राजनीति नहीं चलती । अगर ऐसे नियम मानने लगे तो देश सेवा कैसे करेंगे ? देश सेवा के लिए बहुमत चाहिए और बहुमत के लिए सुवेन्दु, हिमंता, राघव, एकनाथ जरूरी हैं ।  

हमने कहा- सारी माथाकूट छोड़ तोताराम, हमें फ्री का एक आइडिया आया है । गाड़ी में गौ मूत्र भरके, ड्राइवर को एक पव्वा पिलाकर उसके गले में एक भगवा गमछा डालकर, जयश्रीराम का नारा लगाते हुए वाहन को एक जोर का धक्का दे दो और फिर देखो वाहन कैसे फ्री में पवन वेग से अपने गंतव्य तक पहुंचता है ।  

-रमेश जोशी 

 



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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

06-07-2026 अमृत काल ( एक कुण्डलिया )

    06-07-2026 
अमृत काल ( एक कुण्डलिया ) 





राम-कोष की लूट है जी भरकर के लूट 
अमृत काल के बाद में मिले ना मिले छूट 
मिले ना मिले छूट, टूट जब भ्रम जाएगा 
चंदा देने मंदिर कोई क्यूँ आएगा 
जोशी जब तक चक्कर चलता स्वर्ग-नरक का 
तब तक रस्ता नहीं खुलेगा ज्ञान-तरक का 

-रमेश जोशी 







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Jul 4, 2026

30-06-2026 हड़बड़ी में गड़बड़ी


30-06-2026 

हड़बड़ी में गड़बड़ी 






 


हमने कहा- तोताराम, जल्दी का काम शैतान का । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- झूठ नहीं कहा है कि सहज पके सो मीठा होय लेकिन जिसे अपने कर्मों पर विश्वास नहीं होता और जो ईवेंट मनेजमेंट के सहारे अपनी इमेज बनाता है वह जल्दी करता है और उसी चक्कर में अपनी भद्द पिटवाता है । 

 बोला- यह, वह, जो, उस आदि में लपेट कर बात मत कर । साफ साफ बता । 

हमने कहा- जैसे चुनावी लाभ लेने के लिए शिखर के बिना ही प्राणप्रतिष्ठा कर दी गई तो राम मंदिर का गर्भगृह टपकने लगा कि नहीं ? 400 पार वाले 240 पर अटक गए और जिस राम के राज में-

बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।

मांगें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ 

इस दोहे अर्थ है कि राम जी के राज में चंद्रदेव अपनी अमृतमयी किरणों से पृथ्वी को परिपूर्ण रखते हैं। सूर्य देव केवल उतनी ही गर्मी देते हैं, जितनी वर्षा या अन्य कार्यों के लिए आवश्यक होती है। बादल भी ऐसे हैं जो केवल मांगने पर और आवश्यकता के अनुसार ही जल बरसाते हैं, अर्थात वहां अतिवृष्टि या अनावृष्टि जैसी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। 


लेकिन आज कट्टरता की राजनीति तथा मूर्खता और स्वार्थपूर्ण विकास के कारण स्थिति यह हो गई है कि गरमी भयंकर और दूर दूर तक बरसात नहीं । अल्पवृष्टि का खतरा मंडरा रहा है । जहाँ तहाँ सड़कें और पुल टूट रहे हैं । इतनी सुरक्षा और संस्कारी लोगों के ट्रस्ट, व्यवस्था में होते हुए राम लला की पादुकाएं चोरी हो गईं । और बुलडोज़र चलेगा 100 मीटर का प्लॉट खरीदने वाले लवकुश पर । हो सकता है कल को यह सिद्ध कर दिया जाए कि चोरी-वोरी कुछ नहीं हुई है बल्कि राम लला के बेटों लव कुश ने सुरक्षा की दृष्टि से सामान एक बैंक लाकर में रखवा दिया था । 

हड़बड़ी का एक और ताज़ा उदाहरण देख ले । 1400 करोड़ की सहायता के बदले एक सम्मान लिया उसमें भी तीन गलतियाँ । 

बोला- तू यहाँ बरामदे में बैठा नितंबों से सुपारी फोड़ता रहता है । देश दुनिया को संभालना पड़े तो पता चले । जहाँ 240 पर अटकने की बात है तो राम के चढ़ावे और चंदे के बल पर पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र में खरीद-फरोख्त करके 400 पार भी हो जाएंगे ।  

हमने कहा- तो फिर पीयूष गोयल को नंबर बढ़वाने के लिए सम्मान का ड्राफ्ट फाइनल होने से पहले ही इसे अपने ट्विटर पर डालने की क्या जरूरत थी ? चल, एक और उदाहरण देते हैं । 2018 में पटेल की मूर्ति के उद्घाटन के विज्ञापन में 8-10 गलतियाँ थीं । और नया उदाहरण ओडिशा की स्कूली पाठ्य पुस्तकों का जिनमें कई हजार गलतियाँ है । 

बोला- ये छोटी-मोटी बातें हैं । शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।विदुर की पत्नी कृष्ण को देखकर इतनी भावविह्वल हो गई कि केलों की गिरी नीचे गिराकर कृष्ण को केले के छिलके खिलाती रही । रीतिकाल के कवि पद्माकर ने नायिका की अत्यधिक उत्सुकता बड़ा ही मनोवैज्ञानिक और सुंदर चित्रण किया है जो नायक के आने का समाचार सुनकर इतनी हड़बड़ी में होती है कि पैरों में लगाने वाला महावर आँखों में और आँखों में लगाने वाला काजल पैरों में लगा लेती है।

आए हैं समीप पीय, प्रीति की प्रतीति मानों,

भई अति अकुलाहट, सुहाई सब बात है।

आनँद की उमंग में, उमंगि अनुराग भई,

भूलि सुधि-बुधि, देह-गेह की न घात है॥

पग में लगाई काजर, नैनन महावर दे,

हिय हुलसाए, भई बावरी सी ज्ञात है। 

 

-रमेश जोशी 



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Jul 3, 2026

03-07-2026 लघु कथा भक्त की हवाई चप्पलें


लघु कथा 

भक्त की हवाई चप्पलें  




एक भक्त था । बहुत परेशान था । इतना परेशान कि कोई नीट का परीक्षार्थी भी पेपर लीक होने से नहीं हुआ होगा । 15 लाख और अच्छे दिन के जुमले पर आँख मींचकर वोट देने वाला भी इतना निराश नहीं हुआ होगा । उसे तो एक ही भरोसा, एक ही आस और एक ही विश्वास था । केवल राम का । जैसे अंधभक्तों को हर तीर्थ पर जाकर फ़ोटो शूट करवाने वाले अपने अजैविक नेता पर ।  

भक्त रोज रामचारित का मास पारायण करता था । मंगलवार को एक टाइम खाना खाता था । हर बार भय लगने पर हनुमान चालीसा बाँचता था । उसे भूत पिशाच भगाने के लिए पुलिस से अधिक प्रभु पर विश्वास था । वह अपने मन की बात भी रेडियो पर नहीं बल्कि एकांत में प्रभु के साथ ही करता था । उसे विश्वास था कि भले ही अंतिम समय में ही सही लेकिन गजराज को मगरमच्छ से बचाने वाले भगवान विष्णु की तरह उसके आराध्य राम जरूर आएंगे । 

किसी तरह राम की कृपा से भक्त का जीवन कट ही रहा था क्योंकि उसकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी । उसे न तो सोना खरीदना था, गाड़ी नहीं थी सो पेट्रोल डलवाने का चक्कर भी नहीं। विदेश यात्रा भी नहीं क्योंकि किसी देश का सर्वोच्च पुरस्कार भी नहीं मिलना था । लेकिन आज उसका धैर्य चुक गया क्योंकि बड़ा बेटा बी ए करके पिछले दस वर्षों से प्रतियोगी परीक्षा देते देते ओवर एज हो गया ।इंसान से कॉकरोच बन गया । कल तो परीक्षा केंसिल होने के कारण एक विरोध प्रदर्शन में गया और पुलिस द्वारा अभिनंदित होकर टांग तुड़वाकर घर लौटा । 

भक्त तीर्थयात्रियों की भगदड़ में मरकर मोक्ष को प्राप्त करके ऊपर पहुँचा तो जाते ही अपने आराध्य पर बिफर पड़ा । बोला- प्रभु, मैं ही मूर्ख था जो आप पर विश्वास करके उल्लू बनता रहा । सब झूठ है कि आप अंत समय में ही सही भक्तों का उद्धार करने जरूर पहुंचते हैं । अजामिल को तो अपने बेटे नारायण का नाम लेने मात्र से ही कन्फ्यूज होकर आपके दूतों ने उसका उद्धार कर दिया । मैं आपको जाने कितनी बार पुकारता रहा लेकिन आप मणिपुर,  युद्ध विराम, गाजा और ईरान में बच्चों के संहार पर वसुधैव कुटुम्बकं वाले महामानव की तरह चुप रहे । पुलिस भी चोरों के भाग जाने और अग्निशमन वाले सब कुछ राख हो जाने के बाद ही सही आ तो जाती है लेकिन आप .....? 


राम भक्त की पीड़ा से द्रवित हुए और बोले- भक्त, मेरी मजबूरी समझो । मैं अब पहले की तरह स्वतंत्र नहीं हूँ । मुझे कुछ दुष्टों ने एक मंदिर में कैद कर रखा है । जनता के बीच तक नहीं जाने देते हैं । मैं तुम्हारी पुकार सुनकर आना चाहता था लेकिन क्या बताऊँ दुष्टों ने मेरी पादुकाएं ही चुरा लीं । और इतनी तेज धूप में बिना पादुका मेरे पैर जलने लगे थे । मुझे माफ करना भक्त । 

भक्त ने  कहा- प्रभु, हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा करवाने के वादे पर विश्वास करके खरीदी थी लेकिन वह भी अन्य वादों की तरह झूठा ही निकला । इन्हें पहन लें । घिसी हुई सही लेकिन पैरों को जलने से तो बचाएंगी ही । 

और भक्त ने अपनी हवाई चप्पलें रामजी के सामने रख दीं । 


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