2026-03-03
किसे सुनाएँ हाल
खेले रंग गुलाल भगत जी
चरे मुफ़्त का माल भगत जी
बंदर को उस्तरा दे दिया
हुआ हाल बेहाल भगत जी
साबुन पानी नहीं लगाता
सीधा छीले खाल भगत जी
काम धाम कुछ नहीं जानता
सिर्फ बजाए गाल भगत जी
अमरीका की धुन पर नाचे
नहीं कोई सुर ताल भगत जी
अपने मन की कहता रहता
किसे सुनाएँ हाल भगत जी
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach