May 2, 2026

01-05-2026 लुंगी में लोकतंत्र

01-05-2026 



लुंगी में लोकतंत्र  


तोताराम ने हमारी बात को तरजीह देते हुए कहा- तो आज चल ही आते हैं निर्वाचन कार्यालय में मतदाता सूची में अपना नाम देखने के लिए । 


हमने भी तसदीक करते हुए कहा- अब लू का डर तो रहा नहीं । ले ये दो प्याज तो अपनी जेब में रख ले और दो हम और निकाल लेते हैं ।

 

बोला- कोई पेंट शर्ट तो डाल । ऐसे चलेगा क्या लुंगी में ही ।

 

हमने कहा- वैसे बुराई तो इसमें भी कुछ नहीं है । 


बोला- है । वह जमाना गया जब गाँधी आधी धोती में ब्रिटेन के महाराजा से मिलने चले गए थे । यह मोदी जी और शाह साहब का राज है । अब वोट डालने का भी ड्रेस कोड हो गया है । तभी बंगाल के एक मतदान केंद्र पर सुरक्षा बलों ने लुंगी वाले गणेश मजूमदार और अली मण्डल को रोक दिया । जब पेंट शर्ट पहनकर आये तब वोट डाल सके । कुछ तो खयाल रखा जाना चाहिए शालीनता और संस्कारों का ।यह तो सुरक्षा बलों की सज्जनता है जो ए आई सम्मिट के शर्टलेस प्रदर्शकरियों की तरह जेल में नहीं डाला । अगर निर्वाचन विभाग वाले बंगाल वाले सुरक्षा बालों की तरह संस्कारी और शालीन हुए तो तेरा वोट ही स्थायी रूप से काट देंगे  ।



हमने कहा- तमिलनाडु और केरल में तो लोग सभी जगह लुंगी में चले जाते हैं । हम भी जब पोर्टब्लेयर में थे तो लुंगी में बाजार चले जाते थे । वहाँ के नमी और गरमी वाले जलवायु में यह एक बहुत बढ़िया पहनावा है ।फटाफट सूख जाती है और इस्तरी करने की भी कोई जरूरत नहीं । हमारे विद्यालय प्रबंध समिति में चेयरमैन वहाँ के शिक्षा सचिव चारी साहब एक बार आये तो वे लुंगी और हवाई चप्पल पहने हुए थे । और उनकी पत्नी तो बिना चप्पल के ही थीं ।कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज तो  हमेशा ही लुंगी पहनते थे ।   




बोला- यह कांग्रेस का कामराज नहीं, मोदी जी का रामराज है । 


हमने कहा- रामराज में तो राम को हमने नंगे पाँव और एक धोती में वन वन भटकते देखा है । हनुमान जी भी एक छोटे से कपड़े की लंगोटी में ही रहते हैं । आर एस एस को भी फुल पेंट 2016 में तब उपलब्ध हुई जब मोदी जी ने उसे हजारों करोड़ के चंदे और हर प्रकार के ऑडिट से  मुक्त बना दिया । संघ में सर संचालक सुदर्शन जी को हमने कई बार हाफ पेंट में, हिटलरी मुद्रा में नमस्ते सदा वत्सले गाते देखा-सुना है । हालाँकि हमें बड़ा अजीब लगा । बुजुर्ग को कम से कम धोती ही पहना देते लेकिन क्या करें गण के वेश की गरिमा से बंधे हुए थे । 





और जब मोदी जी ने महाबलीपुरम में जिन पिंग का स्वागत किया था तो लुंगी में ही तो थे । क्या वोट डालना इससे भी बड़ा औपचारिक आयोजन है । यह कोई ओबामा को चाय पिलाना थोड़े ही है जो 15 लाख का सोने के तारों से काढ़ा अपने नाम वाला सूट पहना जाए । 


बोला- लुंगी होती है सस्ती, चारखाने वाली, गरीबों की जिसे केरल में मुंडू और तमिलनाडु में कैली कहते हैं 

संभ्रांत लोगों वाली महंगी होती है उसे वेष्टि कहते हैं । मोदी जी वाली लुंगी नहीं, वेष्टि है , महंगी । मोदी जी तो इतने सभ्य हैं कि गंगा स्नान भी पांचों कपड़ों में करते हैं । कभी अभिमान में भरकर भी अपना 56 इंची सीने का भद्दा या शालीन कैसा भी प्रदर्शन नहीं किया । 

हमने कहा- वैसे बंगाल के चुनावों के निवृत्त होते ही मोदी जी ने जिस शिव का त्रिशूल लिए डमरू बजाते हुए बनारस में फ़ोटो खिंचवाया वे तो दिगम्बर हैं निर्वस्त्र ,लुंगी भी नहीं । क्या उन्हें बनारस से निकाल दोगे । जो निर्वस्त्र रह सके वही शिव हो सकता है । सम्पूर्ण परदशी । कोई एप्सटीन फ़ाइल नहीं । कोई भी कर ले जांच । किसी ट्रम्प और नेतनयाहू का कोई डर नहीं ।

शिव या महावीर वस्त्रों की कमाई नहीं खाते । वे सबके कल्याण अपने शिवत्व के कारण जाने जाते हैं, सूटबूट के कारण नहीं । 

वैसे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए लुंगी उतरवाना ठीक नहीं क्योंकि लुंगी के बिना घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें निकालेंगे कैसे ?   

फिर भी सोच किसी 70-80 वर्ष के बुजुर्ग को केवल लुंगी पहनने मात्र के लिए इस तरह लज्जित करना उचित है ?


बोला- मास्टर, लोकतंत्र की रक्षा के बहुत कुछ करना पड़ता है । लोकतंत्र और वह भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी का । 




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May 1, 2026

01-05-2026 भारतीय ज्ञान परंपरा


01-05-2026 

भारतीय ज्ञान परंपरा 



 


 



आज पहली मई है । मजदूर दिवस । इसी उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन की माँग करने वाले मजदूरों को नक्सली और पाकिस्तानी बता दिया गया और उनके समर्थकों को हिरासत । तभी से दिल धड़क रहा था को कोई मास्टर स्ट्रोक लगने वाला है । वैसे इस स्ट्रोक से मास्टरों का कोई लेना देना नहीं है । यह तो दो ही लगाते हैं एक क्रिकेट खेलने वाला और दूसरा चाय बेचने वाला और नाम बदनाम हम मास्टरों का । 


हर महिने पेंशन क्रेडिट होने की सूचना महिने के अंतिम दिन आ जाती है लेकिन इस बार नदारद । तोताराम विलंब से आया, कोई 10 बजे । आते ही पूछा- लगता है, मोदी जी ने मास्टर स्ट्रोक लगा दिया है ?


हमने पूछा- तुम्हें किस अशुभ को देख सुनकर यह अनुभव हुआ ?


बोला- यह देख । और तोताराम ने हमारे सामने केन्द्रीय विद्यालय के किसी साथी पेंशनर का साझा किया हुआ एक मेसेज दिखा दिया, लिखा था- अब भविष्य में रिटायर्ड कर्मचारियों को कोई वेतन आयोग और महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिलेगा । इसलिए अभी बैंक चल देते हैं । खुलते ही पूछ लेंगे कि पेंशन का क्या हुआ ?  


हमने कहा- तुझे पता है तापमान 43 चल रहा है । लू लग जाएगी । 


बोला- अब उसकी चिंता मत कर । 51 डिग्री तक का तो इलाज मिल गया है । 


हमने पूछा - क्या किसी जेबी ए सी का आविष्कार हुआ है जिसे जेब में रख कर लू से सुरक्षित घूमते रहो । 


बोला- कुछ ऐसा ही है लेकिन आविष्कार सनातन है । कभी देखा है इस गरमी में भी 55 वर्षीय सिंधिया कैसे खिले खिले रहते हैं । सब इसी आविष्कार का कमाल है । 


हमने कहा- लेकिन ए सी तो बिजली के बाद का आविष्कार हैं सनातन कैसे हुआ । 


बोला- सनातन, वैदिक और शुद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा का है । जानते तो ज्योतिरादित्य पहले से भी थे लेकिन भारतीय ज्ञान परंपरा की विरोधी कांग्रेस ने उस ज्ञान को उजागर नहीं होने दिया । इसी दुख के कारण भारतीय ज्ञान, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति आदि के उपासक सिंधिया जी ने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा के नेतृत्व में निकल पड़े भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रचार करने । और कल बता ही दिया कि जेब में प्याज रखने मात्र से 51 डिग्री तापमान में सुरक्षित रहा जा सकता है । और क्या चाहिए । चल, निश्चिंत होकर चल । 


हमने कहा- ये सब नेताओं की फालतू  बातें हैं । आजकल बाबाओं से लेकर नेताओं और गली कूचे के निठल्ले सब ऐसा ही ज्ञान पेले जा रहे हैं क्योंकि ऊपर से ही ज्ञान (!) की यह गंगोत्री निरंतर प्रवाहित हो रही है । 


बोला- नहीं, ऐसी बात नहीं है । यह  सिंधिया परिवार का अचूक, अनुभूत नुस्खा है । 


हमने पूछा- वह कैसे ?


बोला- मई 1857 में देश का पहला सम्मिलित स्वतंत्रता संग्राम हुआ था । उसकी गरमी में बहुत से स्वतंत्रता-प्रेमी राजवंश झुलस गए थे । दिल्ली के बहादुर शाह के वंशज आज भी गरीबी में जीवन बिता रहे हैं ।घरबार, लालकिला सब छिन गए ।  झांसी की रानी के वंशजों की कोई खोज खबर है ?लेकिन उस आग में सिंधिया परिवार का कुछ नहीं बिगड़ा । वे तब भी अपने 400 कमरों के राजमहल में रहते थे और आज भी । ज़रा सी भी गरमी उन तक नहीं पहुंची । 


हमने कहा- वह किसी प्याज का नहीं बल्कि अंग्रेज-भक्ति का चमत्कार था । आज भी जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, आमेर, कुंभलगढ़, बूंदी, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, जूनागढ़ आदि किले उनके अंग्रेज भक्तों के मालिकों केवंशजों के पास हैं जिनमें होटल का धंधा चल रहा है ।


हाँ, ‘प्याज जेब में रखने’ का कुछ व्यापारिक संदेश यह हो सकता है कि निकट भविष्य में प्याज की कमी होने वाली है । कमाई करने के लिए जमाखोरी कर लें  । 


-रमेश जोशी 



 



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Apr 30, 2026

28-04-2026 कंधे पर कंकाल

28-04-2026 

कंधे पर कंकाल 

( ऑडिश के क्योंझार जिले का अशिक्षित जीतू बैंक के नियमों की संतुष्टि के प्रमाण स्वरूप बहिन का कंकाल लेकर पहुँच गया - एक समाचार )





जीतू पहुँच बैंक में धर कंधे कंकाल 
औ' प्रधान सेवक उधर खेल रहे फुटबॉल  
खेल रहे फुटबाल, बॉल है जीतू मुंडा 
कर बैठा शालीन बैंक-नियमों का कुंडा 
कह जोशी कवि 'गर नीरव मोदी बन जाता 
कर्जा लेकर जा विदेश में मौज उड़ाता 














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Apr 29, 2026

24-04-2026 तीन में न तेरह में

24-04-2026 


तीन में न तेरह में 






आज जैसे ही तोताराम आया तो उसके बैठने से पहले ही हमने कहा- अब 4 मई को ही बात करेंगे । 


बोला- क्यों, मैं क्या कोई तेरा झालमुड़ी में खरीदा हुआ वोटर हूँ जो इस तरह दुत्कार रहा है । और लानत है तुझ पर जो मदर ऑफ  डेमोक्रेसी वाले चरित्रवान देश के एक बुजुर्ग मतदाता को इस तरह अपमानित कर रहा है । न तो मोदी जी बंगाल के मतदाताओं को इतना टुच्चा समझते हैं और न ही बंगाल की अस्मिता को । वे तो बंगाल के दीवाने हैं । उनका तो बंगाल से की जन्मों का नाता है । इसीलिए जिस इलाके में झालमुड़ी खाई उसमें आचार संहिता लागू हो गई तो गंगा में नौका विकार करने लगे लेकिन बंगाल नहीं छोड़ा  और फोकस में बने रहे । 

वैसे मैं चाय नहीं पीने वाला हूँ । अभी लूज मोशन की दवा चल ही रही है ।आमाशय की एप्सटीन फ़ाइल के पुनः लीक हो जाने की रिस्क नहीं ले सकता । मैं तो सोच रहा हूँ कि कोलकाता निकल जाऊँ । और 4 मई को मोदी जी के कर कमलों से कुछ मिठाई और झालमुड़ी ग्रहण करूँ क्योंकि वह बहुत शुद्ध सात्विक होगी । उससे किसी तरह की लीकेज की संभावना नहीं रहेगी । 


हमने कहा- चला जा लेकिन रहना सावधान क्योंकि कुछ भी हो सकता है । क्या पता जीत भी जाएँ और पानी के लिए भी न पूछें क्योंकि मोदी जी और शाह जी का इतिहास ऐसा ही रहा है । 2014 में वोट देकर लोग अब तक 15 लाख और अच्छे दिन के लिए आँखें फाड़े हुए हैं । हमें तो ये लोग विश्वसनीय लगते नहीं । मन हो तो अनुराग ठाकुर वाली सात्विक मछली भी टेस्ट कर सकता है ।   एक पुलिस अधिकारी ने बड़े प्रेम से वहाँ पुलिस का कर्तव्य समझाया है कि सही तरीके निबटेंगे । देश पुलिस का गलत तरीका ही जानती है । अब सही इससे और कितना खतरनाक होगा, पता नहीं । वैसे सही तरीका लोगों ने अतीक अहमद और विकास शुक्ला के समय कुछ कुछ देख तो लिया था ।




 

बोला- कोई बात नहीं । और कुछ नहीं तो इस गर्मी में गंगा में नौका विहार ही कर आऊँगा । अभी तो मोदी जी वाली नाव वहीं लगी हुई होगी । 

 

हमने कहा- एक बात तो हैं तोताराम, मोदी जी दिल्ली में छठ पूजा के समय यमुना में स्नान का साहस तो नहीं जुटा सके हालाँकि रेखा गुप्ता ने उनके लिए एक नई और स्वच्छ यमुना और घाट बनवा तो दिए थे लेकिन लोक प्रवाद की भी ताकत होती है जिसके चलते मोदी जी छठ स्नान नहीं कर सके । चलो, अब गंगा स्नान कर लिया । न सही गंगा पुत्र की गंदी गंगा, दीदी की साफ सुथरी हुगली ही सही । हमने तो आज से कोई 45 साल पहले देखी थी हुगली । तब लोग इसमें नहाते नहीं थे । इसका पानी हरिसन रोड़ और बड़ा बाजार की सड़कें धोने के काम आता था । 

फिर भी ...... 


बोला- फिर भी क्या ? 


हमने कहा- 4 मई को तू छुपना भी चाहेगा तो जगह नहीं मिलेगी ऐसा ऐलान योगी जी भी कर चुके हैं । शाह साहब ने भी कहा है कि 4 मई को उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे । कहीं उनकी पकड़ में आगया तो ? तू तो यह भी सिद्ध नहीं कर पाएगा कि तू भारत का वोटर है । बांग्लादेशी बताकर बी एस एफ वाले मगरमच्छों के आगे डाल देंगे । 


बोला- ऐसे कैसे ? हम तो शाह साहब के जन्म से पहले के 1961 में राजस्थान में पंचायतों के चुनाव से लेकर 1999 के जनरल इलेक्शन तक मतदान अधिकारी रह चुके मास्टर हैं ।   


हमने कहा- बंगाल में 27 लाख के वोट कट चुके हैं । कागजों में मृत । अच्छा हो कि कोलकाता जाने की बजाय यहाँ चुनाव के ऑफिस में चलकर पता कर आयें । कहीं शाह साहब ने हमें यहाँ उल्टा लटकाकर मृत घोषित न कर दिया हो । फिर कहते फिरना कि हम शाह साहब के जन्म से पहले के मतदान अधिकारी हैं । 


हमें अपनी हैसियत समझ लेनी चाहिए । हम न तीन में हैं, न तेरह में ।


बोला- मास्टर यह कहावत तो सुनी है, पुरानी है । हर कहावत के पीछे एक कहानी होती है तो  इसके पीछे की कहानी क्या है ? 


हमने कहा- वह फिर कभी सुनाएंगे । फिलहाल तो तू चुनाव  के ऑफिस में चलने का कार्यक्रम बना । 


 


 





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