Jul 3, 2026

03-07-2026 लघु कथा भक्त की हवाई चप्पलें


लघु कथा 

भक्त की हवाई चप्पलें  





एक भक्त था । बहुत परेशान था । इतना परेशान कि कोई नीट का परीक्षार्थी भी पेपर लीक होने से नहीं हुआ होगा । 15 लाख और अच्छे दिन के जुमले पर आँख मींचकर वोट देने वाला भी इतना निराश नहीं हुआ होगा । उसे तो एक ही भरोसा, एक ही आस और एक ही विश्वास था । केवल राम का । जैसे अंधभक्तों को हर तीर्थ पर जाकर फ़ोटो शूट करवाने वाले अपने अजैविक नेता पर ।  

भक्त रोज रामचारित का मास पारायण करता था । मंगलवार को एक टाइम खाना खाता था । हर बार भय लगने पर हनुमान चालीसा बाँचता था । उसे भूत पिशाच भगाने के लिए पुलिस से अधिक प्रभु पर विश्वास था । वह अपने मन की बात भी रेडियो पर नहीं बल्कि एकांत में प्रभु के साथ ही करता था । उसे विश्वास था कि भले ही अंतिम समय में ही सही लेकिन गजराज को मगरमच्छ से बचाने वाले भगवान विष्णु की तरह उसके आराध्य राम जरूर आएंगे । 

किसी तरह राम की कृपा से भक्त का जीवन कट ही रहा था क्योंकि उसकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी । उसे न तो सोना खरीदना था, गाड़ी नहीं थी सो पेट्रोल डलवाने का चक्कर भी नहीं। विदेश यात्रा भी नहीं क्योंकि किसी देश का सर्वोच्च पुरस्कार भी नहीं मिलना था । लेकिन आज उसका धैर्य चुक गया क्योंकि बड़ा बेटा बी ए करके पिछले दस वर्षों से प्रतियोगी परीक्षा देते देते ओवर एज हो गया ।इंसान से कॉकरोच बन गया । कल तो परीक्षा केंसिल होने के कारण एक विरोध प्रदर्शन में गया और पुलिस द्वारा अभिनंदित होकर टांग तुड़वाकर घर लौटा । 

भक्त तीर्थयात्रियों की भगदड़ में मरकर मोक्ष को प्राप्त करके ऊपर पहुँचा तो जाते ही अपने आराध्य पर बिफर पड़ा । बोला- प्रभु, मैं ही मूर्ख था जो आप पर विश्वास करके उल्लू बनता रहा । सब झूठ है कि आप अंत समय में ही सही भक्तों का उद्धार करने जरूर पहुंचते हैं । अजामिल को तो अपने बेटे नारायण का नाम लेने मात्र से ही कन्फ्यूज होकर आपके दूतों ने उसका उद्धार कर दिया । मैं आपको जाने कितनी बार पुकारता रहा लेकिन आप मणिपुर,  युद्ध विराम, गाजा और ईरान में बच्चों के संहार की तरह चुप रहे । पुलिस भी चोरों के भाग जाने और अग्निशमन वाले सब कुछ राख हो जाने के बाद ही सही आ तो जाती है लेकिन आप .....? 


राम भक्त की पीड़ा से द्रवित हुए और बोले- भक्त, मेरी मजबूरी समझो । मैं अब पहले की तरह स्वतंत्र नहीं हूँ । मुझे कुछ दुष्टों ने एक मंदिर में कैद कर रखा है । जनता के बीच तक नहीं जाने देते हैं । मैं तुम्हारी पुकार सुनकर आना चाहता था लेकिन क्या बताऊँ दुष्टों ने मेरी पादुकाएं ही चुरा लीं । और इतनी तेज धूप में नंगे पैर मेरे पैर जलने लगे थे । मुझे माफ करना भक्त । 

भक्त ने  कहा- प्रभु, हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा करवाने के वादे पर विश्वास करके खरीदी थी लेकिन वह भी अन्य वादों की तरह झूठा ही निकला । इन्हें पहन लें । घिसी हुई सही लेकिन पैरों को जलने से तो बचाएंगी ही । 

और भक्त ने अपनी हवाई चप्पलें रामजी के सामने रख दीं । 


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Jul 2, 2026

29-06-2026 बाल दान


29-06-2026 
बाल दान 


( टी वी न्यूज वायरस शब्द हट देंगे )


आज तोताराम ने आते ही हमारी आत्मा को ललकारा, बोला- ज़िंदगी हो गई कमाते, भोगते लेकिन कभी एक पैसा भी दान दक्षिणा में नहीं दिया । यह सब यहीं धरा रह जाएगा। क्या लेकर आया था और क्या लेकर जाएगा । यही सब कुछ लुटाना है । अपने हाथ से जो दे जाएगा वही इस भवसागर में नाव बनकर तुझे पार लगाएगा । 

हमने कहा- जब हमने हराम का, मुफ़्त का, नाजायज कुछ कमाया ही नहीं तो किस बात का दान दें । हमें तो ऊपर वाले ने जो कुछ दिया काटकर ही दिया है । वही हाल- एक गरीब आदमी था इसलिए उसकी भगवान से डिमांड भी कम ही थी ।उसने ‘सबका साथ : सबका विकास’ की तरह अपने इस प्रोजेक्ट में भगवान को भी 50-50 का आश्वासन देकर शामिल कर लिया । उसने भगवान से चार आने माँगे ।  कुछ दूर चलकर उसे एक दुअन्नी पड़ी मिली । याचक राम मंदिर के ट्रस्टियों की तरह समझदार था । उसने दो आने जेब में रखते हुए कहा- 
अल्ला मियाँ बड़े सयाने । पहले काट लिए दो आने ।। 
सो हम तो लेने से पहले ही दान दे देते हैं । और हम कौन अंबानी हैं जो लाल बाग के गणेश जी को 20 किलो सोने का मुकुट चढ़ा दें, राम मंदिर में 33 किलो सोना चढ़ा दें, या अपनी बेटी के दो बच्चों के नाम से 300 किलो सोना दान कर दें । 

बोला- फिर भी कुछ तो दान-पुण्य किया कर । मन को शांति मिलेगी । 

हमने कहा- हमने तो बहुत पहले जब विश्व हिन्दू परिषद वाले दो-दो, पाँच-पाँच रुपए राम मंदिर के लिए इकट्ठे कर रहे थे तब किसी को पाँच रुपये दिए थे । रसीद इसलिए संभाल कर नहीं रखी कि हमें उसके बदले में राम से कुछ नहीं चाहिए । लेकिन जब से राम मंदिर में ट्रस्टियों और मुख्य लोगों ने डाका डाला है हमें उन पाँच रुपये से अधिक अपनी मूर्खता के लिए शर्मिंदगी हो रही है । हमारा तो मानना है कि किसी को किसी भी धार्मिक स्थान पर एक पैसा भी नहीं चढ़ाना चाहिए । उससे बेईमानी को बढ़ावा मिलता है । न होगा चढ़ावा और न मंदिर में जुटेंगे चोर-उचक्के । 
वैसे अब अंबानी जी ने किस मंदिर में कौनसा बड़ा दान दिया है ?

बोला- अनंत अंबानी ने तिरुपति मंदिर में केश दान किए हैं । 

हमने कहा- इसमें कौन बड़ी बात है । रोज हजारों पुरुष ही नहीं स्त्रियाँ तक अपने केश दान करती हैं जो विग बनाने के लिए विदेशों में अच्छी कीमत पर बिकते हैं । और अगर इसीसे कोई पुण्य प्राप्त होता हो तो हम भी अब से अपने केश, जितने भी मोदीराज में महंगाई के बावजूद बच पाए हैं, दान कर दिया करेंगे । तू यहीं से तिरुपति पार्सल कर दिया कर । पार्सल का खर्च तू करेगा या मोदी जी ऐसे पार्सलों के लिए कोई फ्री की स्कीम निकालें । पहले डिफेंस फंड में भेजी गई राशि के लिए मनीऑर्डर का खर्च नहीं लगा करता था । एक बार हमने सन 1999 में पोती के जन्म दिन पर एक हजार रुपये भेजे थे । अगर आज की तरह ‘पी एम केयर फंड’ में भेजते तो किसी हिसाब का भी पता नहीं चलता । 

बोला- तेरे सिर पर चार बाल हैं । तुझे बालों की शोभा का क्या पता । अनंत के ये लंबे, घने, घुँघराले, रेशमी बाल । मेरे खयाल से इन्हें सामान्य बालों की तरह नहीं बेचा जाएगा बल्कि विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा जिनके भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति से दर्शन किया करेंगे ।  इसी तरह सोच अगर रबीन्द्रनाथ ठाकुर या मोदी जी केश दान कर दें तो बड़ी बात हो क्योंकि ये उनकी पहचान हैं । अगर मोदी जी दाढ़ी मूंछ मुँड़वाकर जाएँ तो ट्रम्प तो फिर भी पहचान लेंगे लेकिन मेलोनी तो नहीं ही पहचान पाएगी । 

हमने कहा- दान की सबसे बड़ी बात यह है कि उसके लिए आपने कितना कष्ट उठाया । दान के बाद आपके पास बचा क्या ? इसीलिए बुद्ध ने दान में मिले स्वर्ण आभूषणों से बढ़कर एक बुढ़िया द्वारा दिए गए अधखाए अनार को बताया था । क्योंकि उसके पास इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं था । यह भी पता नहीं कि वह कितने दिन की भूखी थी । उसने यह अनार खुद अधभूखे रहकर दिया था । सैंकड़ों करोड़ दान के बाद भी अंबानी-अदानी के पास हजारों लाखों करोड़ और बचे हुए हैं । इस दान के लिए उन्होंने कोई कष्ट नहीं उठाया है । 

भगवान के लिए शबरी के बेर और सुदामा के चावल अधिक महत्वपूर्ण होते हैं । 
 



 
 

 
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की रहने वाली 85 वर्षीय कचरा बीनने वाली महिला बिदुला बाई देवार ने राम मंदिर निर्माण के लिए 20 रुपये का दान दिया था जो इनकी आधे दिन की कमाई थी  । 

राम मंदिर, कृष्ण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर आदि के चोर पुजारी राम की सोने की रत्न जटित पादुका और सोना चुरा सकते हैं लेकिन सुदामा, शबरी और बिदुला बाई के दान को छू भी नहीं सकते । तभी तो मीरा कहती है-

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । 
खरच न खूटे चोर न लै हैं 
दिन दिन बढ़त सवायो । 


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Jul 1, 2026

26-06-2026 अभी यहीं घूम रहा है ?





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26-06-2026  


अभी यहीं घूम रहा है ? 


तोताराम मोदी जी के मन की बात की तरह तय समय पर आ पहुँचा । हमने कुछ नहीं कहा तो खुद ही बोला- क्या बात है, चाय हो गई ?

हमने कहा- चाय तो हो गई लेकिन तू अभी यहीं घूम रहा है ? 

बोला- यहाँ नहीं तो क्या सेशेल्स जाऊँगा । मोदी जी बात और है । उन्हें तो देश के लिए सम्मान लेने जाना ही पड़ता है । सेशेल्स तो फिर भी एक लाख तीस हजार की जनसंख्या वाला देश है । तुवालू (हवाई और आस्ट्रेलिया के बीच) में नौ हजार चार सौ, नाऊरू (प्रशांत महासागर में एक छोटा सा द्वीप) में 12 हजार, पलाऊ ( पश्चिमी प्रशांत महासागर में 34 छोटे छोटे द्वीपों का देश) में 18 हजार लोग रहते हैं और शी लैंड ( इंग्लैंड के सफोक तट से 12 किलोमीटर दूर) नाम के देश की जनसंख्या तो मात्र 27 ही है । सम्मान देने के लिए बुलाया जाएगा तो वहाँ भी जाना पड़ेगा । 

हमने कहा- हमारा ज्ञानवर्द्धन करने के लिए धन्यवाद लेकिन हम तो तेरी तीर्थयात्रा को लेकर उत्सुक थे सो पूछ लिया । कल ही तो मोदी जी ने सीकर जिले के 2392 हिन्दू बुजुर्गों को ट्रेन से और 293 हिन्दू बुजुर्गों को हवाई जहाज से तीर्थ यात्रा करवाने के लिए लाटरी निकाली है । क्या तेरा नंबर नहीं लग सकता ? 

बोला- और मुसलमान ?

हमने कहा- उनका परलोक बहुत सुधर गया । इसलिए 2018 से उन्हें सबसीडी देना बंद कर दिया है ।  अगर ज्यादा ही सुधारना है तो पाकिस्तान चले जाएंगे लेकिन हिंदुओं का तो एक ही देश है । यहाँ परलोक नहीं सुधरेगा तो कहाँ सुधरेगा । 

बोला- क्या कहा, मोदी जी ने लॉटरी निकाली है ? यह देश बेचारे मोदी जी से क्या क्या काम करवाएगा । पहले ही 20-20 घंटे काम करते हैं । बच्चों को परीक्षा के लिए टिप्स देने से लेकर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने तक के जाने क्या क्या काम करने पड़ रहे हैं । पहले से ही सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री का रिकार्ड बना चुके हैं । एक बुजुर्ग सेवाभवी सज्जन का यह देश जाने और कितना शोषण करेगा । 

हमने कहा- यह लॉटरी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने नहीं बल्कि जिलाधीश आशीष मोदी ने निकाली है । यह लॉटरी केवल हिन्दू बुजुर्गों के लिए है । सबसीडी नहीं पूर्ण निःशुल्क । 

बोला- एक तो मैंने अप्लाई नहीं किया । कर भी देता तो नंबर नहीं आता । 

हमने कहा- क्यों, क्या कमी है तुझ में ? 83 साल का बुजुर्ग है । हिन्दू है, ब्राह्मण है, शाकाहारी है । 

बोला- वह तो ठीक है लेकिन मैं तेरी संगति में संस्कारहीन हो गया हूँ । न तो रोज नहाता, न संध्या वंदन करता, न आठों अंगुलियों में अंगूठियाँ पहनता, न लंबा तिलक लगाता, न गले में भगवा पटका डालता, न किसी कलश यात्रा और भगवा रैली या विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेता, न अजान से मुझे सिर दर्द होता, न मैं कपड़ों से आतंकवादियों को पहचान  सकता, न मैंने कभी किसी मस्जिद पर भगवा झण्डा फहराया । 

हमने कहा- कोई बात नहीं । चाय बनवाते हैं । अगले साल अप्लाई कर देना । हम तेरा मस्जिद के सामने सुंदरकांड का पाठ करते हुए एक बढ़िया सा फ़ोटो खिंचवा देंगे । फॉर्म के साथ वही लगा देना । और यहीं सड़क पर कनक दंडवत करते हुए फागुन में खाटू श्याम् जी के मेले के समय तेरा फ़ोटो एक फ़ोटो छपवा देंगे- शीर्षक होगा-  कनक दंडवत करते खाटू श्याम जी जाते हुए एक 83 वर्षीय श्रद्धालु मास्टर तोताराम । फिर तीर्थ यात्रा क्या एम एल ए का टिकट भी मिल सकता है । 

बोला- मास्टर, इसमें तो बहुत खर्च होता होगा । 

हमने कहा- कुछ ज्यादा नहीं । इस मद में राजस्थान 200 करोड़, उत्तर प्रदेश 500 करोड़ और सारा देश एक वर्ष में केवल साढ़े तीन-चार हजार करोड़ खर्च करता है । 

बोला- लेकिन इतना कर्ज आता कहाँ से है ? 

हमने कहा- आदमी की साख होनी चाहिए कर्ज की क्या कमी है । अभी तो मोदी जी का डंका बज रहा है तभी तो पिछले  13 प्रधानमंत्रियों ने 67 साल में जितना कर्ज लिया उससे तीन गुणा मोदी जी को अकेले 12 साल में मिल गया । जितना सम्मानित राष्ट्र और नेता उतना अधिक कर्ज । अमेरिका को देख 38 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है । अपना तो एक ट्रिलियन भी नहीं है । राम राम करके पौन ट्रिलियन है । बड़े सेठ बने फिरने वाले अंबानी पर 4 लाख करोड़ और अदानी पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये मात्र कर्ज । अभी बहुत गुंजाइश है । 

बोला- तो फिर राजस्थान में स्कूलों की छत क्यों गिर रही हैं ? मोदी जी के 12 साल में देश में 80 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए । स्कूलों के बढ़िया भवन बनाएं, अच्छी सुविधाएं दें । देश ज्ञान विज्ञान में आगे बढ़ेगा । अगर चाहें तो तीर्थ यात्राओं पर होने वाले बजट का सदुपयोग करें तो एक साल में तीन आई आई टी या तीन एम्स बन सकते हैं । 

हमने कहा- जब तक हिन्दू तीर्थयात्री और काँवड़िए बन रहे हैं तब तक ही हिन्दुत्व सुरक्षित है । नहीं तो पढ़-लिखकर नौकरी मांगेंगे, पेपर लीक को लेकर दुखी होंगे, कॉकरोच बनेंगे, आंदोलन करेंगे । 

हमें तो युवाओं को धर्म योद्धा, गौरक्षक, सनातन संस्कृति सेनानी बनाना है । देश की सुख शांति और धर्मपरायणता के लिए तीर्थ यात्रा और मंदिर कॉरीडोर निर्माण ही ठीक हैं । 

बोला- लेकिन आजकल मंदिरों में तो चोरी डाका हो रहा है । 

हमने कहा- यह तो होगा ही । कोई नई बात नहीं । ज्यादा धन होने से महमूद ग़ज़नवी सोमनाथ आया । अब उसकी कोई जरूरत नहीं है । यहीं हजारों ग़ज़नवी धर्म की ध्वजा लेकर घूम रहे हैं । जहाँ गंदगी वहाँ मक्खियाँ, जहाँ कीचड़ वहाँ कमल, जहाँ कमल वहाँ लक्ष्मी का वास । चिंता मत कर इस दुनिया में धर्म ही एक ऐसा धंधा है जिसमें सारे नेताओं और कामचोरों का गुजारा होता है ।  इस धंधे में हमेशा बहुत गुंजाइश है । 




 



 

 



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Jun 27, 2026

25-06-2026 लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र


25-06-2026 


लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र 



कोई चालीस साल पहले की बात है जब दिल्ली में हुआ करते थे । तब बाहर से दिल्ली में आने वाला हर आदमी यही सोचता था कि किसी तरह दिल्ली में कहीं भी सौ-पचास गज का प्लॉट हो जाए फिर भले ही उसे रहने लायक बनने में ज़िंदगी गुजर जाए । ऐसे प्लॉट दिल्ली के किसानों के खेतों में हुआ करते थे जहाँ निर्माण रोकने देने के नाम पर डी डी ए वाले वसूली करते घूमा करते थे । ऐसी खेतों में कटी कॉलोनियाँ अवैध कॉलोनियाँ कहलाती थीं । 

ऐसे में लोग अपनी कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए उसका नाम इंदिरा कॉलोनी या संजय कॉलोनी रख लिया करते थे । यह एक प्रकार का टोटका होता है । जैसे कोई अपने बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा देता है या कोई अपने मकान के मुख्य द्वार पर टायर लटका देता है या किसी दैत्य का मुखौटा लगा देता है । आज भी डरे हुए लोग भूत-पिशाच भगाने के लिए भगवा गमछा गले में डाल लेते है या फिर कई रंग के कलावे बांध लेते हैं या तिलक खींच लेते हैं या आठों अंगुलियों में तरह तरह की अंगूठिया पहन लेते हैं । ये सब लोक परलोक के तंत्र मंत्र हैं । 

आज तोताराम ने कहा- मास्टर, अपने बरामदे  का नाम ‘नमो बरामदा’  रख लेते हैं । 

हमने कहा- क्या हमें मोदी जी ने इसके लिए कोई सबसीडी दी है या यह कोई अवैध निर्माण है जो इसे ‘नमो’ की आड़ में वैधता प्रदान करें । मोदी जी चाहें तो स्टेडियम का नाम एक झटके में अपने नाम कर लें लेकिन यहाँ तो वही चलेगा जो हम चाहेंगे । 

बोला- 2016 में जब ट्रम्प पहली बार राष्ट्रपति बने थे तब सुलभ शौचालय वाले बिन्देश्वरी पाठक ने हरियाणा के मेवात इलाके में सफाई कर्मचारियों के लिए कुछ मकान बनवाए थे तो उनका नाम ‘ट्रम्प विलेज’ रखा था । 

हमने कहा- ठीक है जब उन्हें इसका कारण पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि हो सकता है इससे कुछ सहयोग या प्रचार मिल जाए लेकिन हुआ कुछ नहीं, भद्द बेकार में पिटी । वैसे ही जैसे ट्रम्प की जीत के लिए 2020 में हिन्दू महासभा वालों ने यज्ञ किया था । यह बात और है कि देवताओं ने उनकी एक नहीं सुनी । इसी तरह मोदी जी ने भी बेशर्मी से अमेरिका में नारा दे ही दिया था ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ । सोच अगर चुनाव के दिनों में कोई विदेशी नेता भारत में आकर राहुल के लिए ऐसा नारा लगाए तो ? लेकिन क्या किया जाए । राजस्थानी में कहावत भी तो है-  

आप गुरूजी कातरा मारै 

ओराँ नै परमोद सिखावै । 

बोला- मास्टर, सब एक दूसरे को समझाते हैं । भले ग्रहों को कोई नहीं पूछता है लेकिन बुरे ग्रहों के लिए शांति पाठ करवाता है ।  कहा भी है-

बसे बुराई जासु तन ताही को सनमान 

भलो भलो कहि छांडिए खोटे ग्रह जपदान 

हमने कहा- और क्या ? मोदी जी यहाँ कण कण पर अपना फ़ोटो छपवा दें, हर चीज के आगे पीछे ‘नमो’ जोड़ दें लेकिन देखा नहीं पिछले दिनों जब अमेरिका गए थे तो ट्रम्प कैसे मोदी जी को ब्यूटीफुल, एंजल आदि  कहकर मजे ले रहा था लेकिन मोदी जी बार बार ‘योर एक्सीलेंसी’ ‘योर  एक्सिलेंसी’ की रट लगाए हुए थे । ट्रम्प का क्या ठिकाना । बड़ा मुँहफट और गैरजिम्मेदार आदमी है । पता नहीं कब क्या बोल जाए । 

ग्रहशांति के लिए पता नहीं क्या क्या करना पड़ता है । ऐसे में 56 इंच का सीना कुछ काम नहीं आता । जेलेन्स्की ने बिना पर्ची के ही टीशर्ट में ही अपना जलवा दिखा दिया था । 

सारे नाटकों के बावजूद लोक ही सच और सत्य आचरण करता है । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- जैसे कि कुछ अंधभक्त भले ही गोडसे के प्रति आदर का दिखावा करते हों लेकिन आज किसी गोडसे सरनेम वाले महाराष्ट्रियन का नाम ‘नाथूराम’ नहीं होगा । भले ही लोग विभीषण को कितना भी बड़ा भक्त बताएं लेकिन क्या किसी का नाम ‘विभीषण’ सुना है ?  



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