Mar 19, 2026

2026-03-19 आज चाय पी रहा है, कल को.....

2026-03-19 

आज चाय पी रहा है, कल को...... 

  

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राजस्थान में बारिश, आंधी और ओले गिरने का अलर्ट तो तीन चार दिन से था लेकिन वह सच रात को हुआ । ओले तो बहुत कम और छोटे छोटे गिरे लेकिन बारिश अच्छी हो गई । दो दिन पहले रात को खिड़की खोलनी पड़ती थी । रात उसे बंद करना पड़ा । बीच में उठकर बेड में से मोटा कंबल निकालना पड़ा । अच्छी नींद आई कुछ वैसी ही जैसी राहुल की सदस्यता रद्द करके मोदी जी और महुआ मोइत्रा की सदस्यता रद्द होने निशिकांत दुबे की आत्मा को शांति मिली थी । हाँ, खटर-पटर में नींद का जो घाटा हुआ वह सुबह देर से आँख खुलने से पूरा हो गया । 

सुबह उठकर देखा तो महिनों से रुकी हुई नाली बारिश के पानी के बहाव से साफ हो चुकी थी जैसे मोदी जी के आने की तैयारी में सब कुछ फिटफाट हो जाता है । बारिश के कारण दूध वाला भी नहीं आया । लेकिन कुछ ठंड होने से चाय का मूड बना तो नीबू वाली चाय ही बनाकर बरामदे में ले आये । लुंगी बनियान पर एक चद्दर डाले उकड़ू बैठे चाय की एक चुस्की ही ली थी कि तोताराम की आवाज आई- मास्टर कुछ तो लिहाज कर लिया कर । 

हमने पूछा- किसका ? यहाँ कौन हमारा जेठ या ससुर बैठा है जिससे घूँघट करना है । और फिर हम कौन भाजपा नेता मनोहर लाल धाकड़ की तरह हाई वे पर ही धकड़पना दिखा रहे हैं । चाय ही तो पी रहे हैं ।  

बोला- आज तू बरामदे में ऐसे उकड़ू बैठकर चाय पी रहा है, कल को राहुल गांधी की तरह संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पकौड़ों का सेवन करेगा । दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की क्या इज्जत रह जाएगी । 

हमने कहा- हाँ,हाँ संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने से देश का लोकतंत्र बदनाम होता है  और् संसद में किसी को कटुआ, भड़ुआ, आतंकवादी कहने से दुनिया में भारत के वसुधैव कुटुम्बकं का संदेश जाता है । और अब तो अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता आयोग द्वारा भारत में सांप्रदायिकता और उसमें आर एस एस की भूमिका पर चर्चा होने लगी है । वह क्या देश के लोकतंत्र के लिए शर्म की बात नहीं है ? 

बोला- वह् तो भारत के दुनिया में बजने वाले डंके से जलने वालों का षड्यन्त्र है ।  लेकिन जब संसद की कैंटीन में अच्छी और सस्ती चाय, पकौड़े, बिस्किट सबकी व्यवस्था है, टेबल कुर्सी हैं तो सीढ़ियों पर चाय का क्या अर्थ है ?

हमने कहा- हो सकता है चाय पर चर्चा कर रहे हों क्योंकि अंदर तो ओम बिरला बोलने नहीं देते ।और चाय के बिना चर्चा हो नहीं सकती । मोदी जी भी तो चर्चा करने के लिए ओबामा को चाय बनाकर पिला रहे थे कि नहीं । तो चाय पीने में क्या बुराई है ?

बोला- चाय बना रहे थे थे लेकिन तूने सलीका नहीं देखा । उसके लिए विशेष रूप से सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहना था । आज भी उसकी दुनिया में चर्चा होती है । और कुछ नहीं तो इन काँग्रेसियों को मोदी जी से कम से कम इतना सलीका तो सीख ही लेना चाहिए । 

हमने कहा- क्या जर्सी गाय , कांग्रेस की विधवा, 50 करोड़ की गर्ल, फ्रेंड, शूर्पनखा  जैसे शब्दों से देश के लोकतंत्र का सम्मान बढ़ता है ?संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने में ऐसा क्या हो गया जो तुम लोगों को लोकतंत्र पर खतरा नजर आने लगा है । 

बोला- इसमें एक और बड़ा षड्यन्त्र छुपा हुआ । आज चाय पी रहा है । कल को चाय बनाने लगेगा, परसों बेचने लगेगा और ऐसे करते करते देश का प्रधानमंत्री बन जाएगा । यह सब अनैतिक तरीकों से मोदी जी की कुर्सी हथियाने की चाल है लेकिन शाह साहब ऐसा नहीं होने देंगे । राहुल पर देशद्रोह का का केस लगा देंगे । 

हमने कहा- लेकिन साबित कैसे करेंगे ?

बोला- साबित करने की क्या जरूरत है । और बहुत से लोगों की तरह अनंत काल तक हिरासत में तो रख ही सकते हैं ।

  



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Mar 18, 2026

2026-03-17 मोदी जी और असंवैधानिकता

2026-03-17 

 मोदी जी और असंवैधानिकता 


आज जैसे ही तोताराम आया हमने उसे लपक लिया, पूछा- यह क्या हो रहा है मोदी जी के राज में ?

बोला- क्या हो रहा है ? सब ठीक तो चल रहा है । गैस की कोई किल्लत नहीं,  कानून व्यवस्था दुरुस्त,  दुनिया में डंका । और क्या चाहिए ?

हमने कहा- मोदी के लोकसभा क्षेत्र में संविधान का उल्लंघन जो हो रहा है । ​

 


बोला- और किसी की बात तो मैं नहीं कह सकता लेकिन मोदी जी के रहते और चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन संविधान का उल्लंघन नहीं हो सकता । क्या कभी तू ने भारत के किसी प्रधानमंत्री को संसद की सीढ़ियों पर इस माथा टेकते देखा था ? और अब तो उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए संसद में सेंगोल भी रखवा लिया है । वह सेंगोल जिसे नेहरू जी ने संग्रहालय में रखवा दिया था और कुछ राष्ट्रप्रेमियों के अनुसार वे जिसे वॉकिंग स्टिक के रूप में काम में लिया करते थे । जो भी संविधान की ओर आँख उठाकर भी देखेगा मोदी जी इसी सेंगोल से उसकी ठुकाई कर देंगे । 

हमने कहा- लेकिन सेंगोल तो राजदंड का प्रतीक है, लोकतंत्र का नहीं । और फिर जब मोदी जी लोगों को संविधान की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखने देंगे तो लोग उसे पढ़ेंगे कैसे ? और पढ़े बिना उस पर आचरण कैसे करेंगे ? फिर तो जो मोदी जी बताएंगे वही संविधान माना जाएगा ।  

बोला- मास्टर, बात को इधर उधर नहीं भटकाना चाहिए । बात संविधान के उल्लंघन की हो रही थी तो बता मोदी जी ने कैसे संविधान का उल्लंघन किया या करवाया ? 

हमने कहा- हमारे संविधान में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की बात कही गई है लेकिन जब मोदी जी के चुनाव क्षेत्र बनारस में कुछ जिज्ञासु बालक नाली पर गैस का चूल्हा रखकर चाय बनाने का प्रयोग कर रहे थे तो पुलिस ने उनके बर्तन भांडे छीन लिए और भगा दिया । अगर ऐसे ही हम बच्चों की जिज्ञासा का दमन करते रहेंगे तो देश में विज्ञान का विकास कैसे होगा ? 

बोला- विज्ञान का विकास तो इस देश में बहुत पहले से ही हुआ हुआ है । वेदों का अध्ययन करना चाहिये और यूरोप वालों के निकाल लेने के बाद अगर कुछ बचा हुआ है तो पहले उसे निकालना चाहिए इससे पहले कि ये ईसाई लोग उसे निकाल कर यूरोप ले जाएँ । यह नाली वाला तो कहीं भागा जा रहा है क्या ?  इसे तो कभी भी निकाल लेंगे । 

वैसे भी राष्ट्रवादी पार्टी होने के कारण भारतीय ज्ञान परंपरा पर भाजपा का एकाधिकार है । देख ले प्रमाण- 

भारतीय ज्ञान परंपरा 

 BHARATIIYA     JNYAN    PARAMPARA 

 B J P     

भा  ज  पा 


हमने कहा- तोताराम, यह तो तूने बिल्कुल मोदी जी वाला ज्ञान पेल दिया ।  लेकिन बच्चों को इस तरह हतोत्साहित करना भी तो उचित नहीं । इससे वैज्ञानिक सोच का विकास रुकता है । 

बोला- ठीक है लेकिन इससे अराजकता फैलने का भी तो डर है । इस आविष्कार का तो मोदी जी का पेटेंट है । यह नियमों का उल्लंघन है ।इस प्रकार गैस बनाने से पहले मोदी जी से पूछना चाहिए या फिर नियमानुसार सरकार को रॉयल्टी देनी चाहिए । इस प्रकार ये अराजक तत्व आज नाली से बिना रायल्टी दिए गैस बना रहे हैं, कल को बिना रायल्टी दिए कहीं भी कुएं खोदकर तेल निकालने लग जाएंगे । नाली और नाली में प्रवाहित होने वाला सनातन पदार्थ राष्ट्र की संपत्ति है । यह राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी का मामला भी बनता है । इससे पहले भी इनका वह नेता राहुल गाँधी सारे देश में मोहब्बत की दुकानें खोलता फिर रहा था लेकिन आज तक सरकार को न जी एस टी दिया और न ही जमीन को  रेसिडेन्शियल से बिजनेस में कन्वर्ट करवाया । थोड़े दिन रुक जा उस पर भी इनकम टेक्स और अतिक्रमण का केस किया जाएगा । ​

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वैसे जब तक यह गैस उत्पादक खाद्य पदार्थ किसी के पेट में है तब तक व्यक्ति का है लेकिन गटर में प्रवाहित होने के बाद वह राष्ट्र की संपत्ति हो जाता है । अगर किसी को व्यक्तिगत रूप से गैस बनानी है तो उसे अपने आगे-पीछे पाइप लगाकर अपने घर में ही गैस बनानी चाहिए । इस तरह नाली पर सामान रखकर सड़क रोकना अतिक्रमण है । यह तो योगी जी दयालुता है जो बुलडोज़र नहीं चलवाया । देखा किस प्रेम और शालीनता से मुस्कुराते हुए सामान ले जा रहे हैं ।  

हमने कहा- न्यायालय ने भी तो अनुराग ठाकुर के मुसलमानों के साथ सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने वाले 'गोली मारो' वाले बयान पर कोई संज्ञान नहीं लिया था क्योंकि उन्होंने यह वाक्यांश प्रेमपूर्ववक मुस्कुराते हुए कहा था । 

-रमेश जोशी  

          

     



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Mar 16, 2026

2026-03-01 बोल, थैंक यू मोदी जी


2026-03-01 

बोल, थैंक यू मोदी जी 


आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया-  'बोल- थैंक यू मोदी जी' ।  वैसे ही जैसे आजकल के नए नए राम भक्त किसी भी मुसलमान को घेरकर कहते हैं- 'बोल, जय श्री राम' । 

हमने कहा- तोताराम, हम इतने मजबूर नहीं हैं कि 200 रुपए, नाश्ते का एक पैकेट और एक बीड़ी का बंडल/पाँच गुटके/ कोल्ड ड्रिंक लेकर किसी चुनावी रैली में जाएँ और 'मोदी-मोदी' चिल्लाएँ और न ही इतने डरपोक हैं कि किसी भी ऐरे-गैरे के कहने से किसी को धन्यवाद देने लगें । हाँ, किसी ने धन्यवाद के लायक कुछ किया हो तो हम इतने कृतघ्न भी नहीं हैं कि धन्यवाद न कहें । लेकिन मोदी जी ने हमारे लिए या देश के लिए कौनसा ऐसा काम किया है जिसके लिए 'थैंक यू मोदी जी' बोलें । 

बोला- सीधे सीधे तेरे लिए नहीं किया तो क्या देश के किसी भी भाग के लिए कुछ भी अच्छा किया है तो धन्यवाद तो बनता ही है । तेरे लिए नहीं, राजस्थान के लिए नहीं तो केरल के लिए तो किया ही है ना । केरल का नाम केरलम् करने को मंजूरी दे तो दी । 

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हमने पूछा- पहली बात तो यह कि इस प्रकार नाम बदलने से क्या होता है । मूर्ख को मूर्खम् , दुष्ट को दुष्टम्, मूत्र को मूत्रम् करने से क्या उनका चरित्र या अवगुणों में कोई कमी आ जाएगी ? 

बोला- अगर मोदी जी को तेरे इस जुमले का पता चल जाए तो वे शीघ्र ही केरल में होने वाले चुनाव में इसे मुद्दा बना सकते हैं कि कुछ कांग्रेसी केरल को दुष्ट और मूर्ख बता रहे हैं । वैसे ही जैसे राष्ट्रपति के बंगाल में अपमान की आड़ में ध्रुवीकरण करने लगे ।
 
हमने कहा- लेकिन यह भूल गए कि खुद की पार्टी ने राम मंदिर शिलापूजन,राम लला की प्राणप्रतिष्ठा और संसद भवन के उद्घाटन में दलित और आदिवासी राष्ट्रपतियों को उपेक्षित किया था । लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे । और फिर केरल के लोग पढ़े लिखे और समझदार हैं । वे महाराष्ट्र,  बिहार, दिल्ली वालों की तरह दो चार हजार में बिकने वाले नहीं है ।  

वैसे केरलं करने से कुछ होना हवाना नहीं फिर भी तुझे बता दें  कि यह प्रस्ताव 2024 का है जिसे आज चुनाव से ठीक पहले स्वीकार करके एक घटिया केरल-प्रेम का प्रदर्शन किया जा रहा है । केरल का सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, बौद्धिकता, काम करने की शिद्दत पूरे देश के लिए अनुकरणीय है लेकिन उससे कोई कुछ सीखना नहीं चाहता । 

खैर चल, आज तुझे इसी बात पर गिलासम् में चायम्  पिलाएंगे  । 

बोला- वही सड़ियल चाय । 

हमने कहा- तो बस, यह 'थैंक यू मोदी जी' भी वैसे ही है जैसे केरल का केरलं या पोर्टब्लेयर का श्री विजयपुरम हो जाना । अब भी श्री विजयपुरम अर्थात पोर्टब्लेयर से भेजी गई किताब उसी तरह 20 दिन में आती है जैसे 40-50 साल पहले आती थी । वे सोचते हैं श्रीविजयपुरम करने से तमिलनाडु के जागरूक नागरिक मूर्ख बन जाएंगे । वे काँवड़िए नहीं हैं । 
और जहाँ तक केरल की बात है तो केरलं दो शब्दों से बना है केरा और आलम अर्थात नारियल की भूमि और दूसरा  "चेर - स्थल", 'कीचड़' और "अलम-प्रदेश" शब्दों के योग से चेरलम बना था, जो बाद में केरल बन गया। केरल शब्द का एक और अर्थ है : - वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो। समुद्र और पर्वत के संगम स्थान को भी केरल कहा जाता है। 

बोला- जब कीचड़ है तो कमल भी खिलकर ही रहेगा । 

हमने कहा- हाँ, हाँ कमल खिलेगा लेकिन संप्रदायिकता, नस्ल, जाति, धर्म वाला कमल नहीं बल्कि इस कीचड़ से नितांत असंपकृत, अप्रभावित भारतीय माइ थोलॉजी का एक शानदार प्रतीक, एक अद्भुत मिथक- कमल  । खिलेगा क्या ? सौभाग्य से आज भी खिला हुआ है और खिला रहेगा । यही तो हमारे संविधान की आत्मा है । सद्भाव । 

-रमेश जोशी  

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Mar 15, 2026

2026-03-15 आपदा में अवसर


2026-03-15 
आपदा में अवसर 








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आज तोताराम अपेक्षाकृत जल्दी आ गया । 

हमने कहा- तोताराम, ठीक है मुफ़्त के माल पर बड़े बड़े संत भी पिल पड़ते हैं लेकिन बाद में भुगतना तो खुद को ही पड़ता है । अन्य दिनों की बजाय आदमी दीर्घ शंका के लिए जल्दी जाना पड़ता है । कहाँ भागी जा रही थी तेरी चाय । 

बोला- मास्टर, चाय की बात नहीं है । एक अच्छी खबर है । आपदा में अवसर ।

हमने कहा- आपदा में अवसर व्यापारियों के लिए होते हैं । वे अपने पास पड़े पुराने स्टॉक की कालाबाजारी करने लग जाते हैं । अभी इजराइल वाले लफड़े में देख ले । आपदा का फायदा उठाकर बिकने लगा कि नहीं सिलेंडर तीन तीन हजार में । अदानी ने भी अपनी गैस के दाम बढ़ा दिए कि नहीं । और मोदी जी ने भी प्रति सिलेंडर 60 रुपये बढ़ा ही दिए । 

बोला- मोदी जी कोई व्यापारी थोड़े हैं । वे तो सब कुछ राष्ट्रहित में करते हैं । यहाँ तक कि दिन में दस-दस ड्रेसें बदलना भी वे भी भारत की गरीब राष्ट्र की इमेज सुधारने के लिए करते हैं अन्यथा वे तो संत हैं । उनके लिए तो एक चीवर ही पर्याप्त है । देखा नहीं था केदारनाथ की गुफा में और गंगा में स्नान करते हुए मात्र एक भगवा वस्त्र में । 

हमने कहा- देख लेना जब अमेरिका इज्जत बचाने के लिए ईरान से खिसक लेना तब भी मोदी जी 60 रुपये की यह वृद्धि वापिस नहीं लेंगे । जी एस टी उत्सव की तरह दस रुपये घटाकर फिर कोई बचत उत्सव जरूर मना लेंगे ।  

बोला- छोड़, ये सब बड़े लोगों की बातें हैं । मैं तो अपने लिए आपदा में अवसर की बात कर रहा था । 

हमने कहा- हमारे लिए तो आपदाएं ही होती हैं । अवसर तो व्यापारियों और नेताओं के लिए होते हैं । राम मंदिर को ही देख ले ।राम मंदिर और विकास के नाम पर लोगों की ज़मीनें कब्जा लीं और दुकाने उजाड़ दीं और बड़े व्यापारियों को होटलों के लिए दे दीं । नेताओं को राम के नाम पर गद्दी मिल गई और गुजरात के व्यापारियों को धंधा । दोनों की बंदरबाँट । और भगवान और सच्चे भक्तों को क्या मिला ? मिलावटी प्रसाद । ये तो प्रभु कुछ खाते नहीं हैं अन्यथा अब तक पेट स्थायी रूप से खराब हो गया होता ।

बोला- अपने मन की बात छोड़ और काम की बात सुन । अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि ईरान के दस लोगों के बारे में खबर देने वाले को दस मिलियन डालर का इनाम दिया जाएगा । अब हम लोगों को गैस के सिलेंडर का चक्कर छोड़कर ईरान के अमेरिका के लिए वांटेड लोगों का पता लगाना चाहिए । वैसे भी मोदी जी ने कह दिया है कि गैस की कोई समस्या नहीं है । और कुछ कमी हुई तो नाले से निकाल लेंगे । 

हमने कहा- हमें जब बैंक का क्लर्क सीट पर नहीं मिलता तो यह तक तो पता लगा नहीं सकते कि वह छुट्टी पर है या इधर उधर चाय या पूजा के बहाने मटरगश्ती कर रहा है । मोदी जी तक का तो पता नहीं लगा सकते कि मणिपुर और संसद की महत्वपूर्ण कार्यवाही छोड़कर इजराइल गए हैं या किसी गुफा में ध्यान लगा रहे हैं या चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ईरान के नेताओं का पता लगा लेंगे । अंधभक्तों की तरह दुनिया के नक्शे में ईरान ढूँढ़ने में चार दिन लग जाएंगे । यह  कोई मस्जिद में नीचे मंदिर ढूँढ़ने जितना आसान थोड़े है । 

बोला- जैसे मोदी जी कपड़े देखकर आतंकवादियों को पहचान लेते हैं तो अपन भी किसी काली पगड़ी वाले का पता दे देंगे या ट्रम्प से उन दस लोगों का कोई अंतःवस्त्र या दाढ़ी का बाल मँगवा लेंगे और उससे कोई टोना टोटका या मारण मंत्र का जाप कर देंगे तो वहीं का वहीं मर जाएगा । अपने सतातन में तो ऐसे बहुत मिसाइलों का ज्ञान भरा पड़ा है । पहले भी तो हमारे यहाँ के भक्तों ने यज्ञ करके ट्रम्प को चुनाव जिताया था कि नहीं ? और कुछ नहीं तो इस बहाने कुछ एडवांस ही ट्रम्प से कबाड़ लेंगे । काम नहीं हुआ तो वापिस कर देंगे । 

हमने कहा- तू ट्रम्प को इतना भोला समझता है क्या ? वह कोई गांधी नेहरू की तरह भला आदमी नहीं है । उसका इतिहास सुनेगा तो तेरी तेरी अकल ठिकाने आ जाएगी । वह नेता नहीं प्रॉपर्टी डीलर है । उसे अपनी राजनीति के थ्रू अपने बेटे को दुनिया में बिजनेस दिलवाना है । मोदी जी खुद को बड़ा चतुर समझते थे । उनसे ही अमेरिका में अपने लिए चुनाव प्रचार करवा लिया और अब उन्हीं को बर्फ में लगा दिया कि नहीं ? पता नहीं, किस किस फ़ाइल के चक्कर में ऐसा फँसा दिया कि अब थूक सूख रहा है, जुबान नहीं खुल रही है । रूस से अच्छी भली दोस्ती थी, सस्ता तेल मिल रहा था । ईरान से रुपये में डील हो रही थी । सब गड़बड़ करवा दिया । अब खरीदो महंगा तेल और पिटवाओ दुनिया में भद्द । 

बोला- फिर भी किसी न किसी तरह यह खबर उड़वा दें कि तोताराम और मास्टर ने ईरान के दस लोगों की अमेरिका को खबर देने का ठेका लिया तो कम से कम एक बार चर्चा तो वाइरल हो जाएगी । निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर की तरह चर्चित तो हो जाएंगे । 

हमने कहा- ये फालतू बातें छोड़ । चाय पीकर गैस एजेंसी का एक चक्कर लगा आते हैं । क्या पता बुकिंग हो ही जाए । 

बोला- आज संडे है । कल सोचेंगे । अब तो निश्चिंत होकर चाय पर बकवास करते हैं । और 2047 तक भारत को विकसित बनाने का ड्राफ्ट तैयार करते हैं । 

हमने कहा- कोई बात नहीं  । वैसे यह काम मोदी जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कर दिया था । अब तो बस इंतजार कर उस दिन का अगर प्रभु तब तक जिंदा रखे तो । मोदी जी की बात और है वे तो ...... । 

-रमेश जोशी 
 

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