Jul 8, 2026

07-07-2026 हनुमान जी का दल बदल


07-07-2026 

हनुमान जी का दल बदल 





जैसे कोई ट्रेवलिंग सेल्समैन छह दिन घूमघाम कर एक दिन के लिए घर आता है और फिर सूटकेस जमाकर निकल लेता है या जैसे मोदी जी 27 से 29 जून तक सशेल्स की ‘सम्मान समेट यात्रा’ से लौटे, सम्मान को सुरक्षित काँच की अलमारी में सजाया और फिर 6 जुलाई को केश सज्जा करवाकर, नए कपड़े लेकर, सम्मान समेटने के लिए इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया की यात्रा पर निकल गए वैसे ही तोताराम सुबह चाय पीकर गया था और लंच खाकर, दोपहर थोड़ा आराम  करके फिर चार बजे आ धमका । 

हमने कहा- मोदी जी ने तो सेवा के लिए घर परिवार छोड़ दिया । 20-20 घंटे रोज देश की सेवा के साथ साथ विश्वगुरु की जिम्मेदारी संभालने के लिए भागे फिरते हैं लेकिन तू घर पर क्यों नहीं टिकता ?

बोला- मैं चाय पीने नहीं आया हूँ । आज मंगलवार है । देश दुनिया में भूतपिशाच बहुत उपद्रव मचा रहे हैं सो चल जयपुर रोड़ तक चलते हैं । घूमना भी हो जाएगा और हनुमान जी के दर्शन भी । 

हमने कहा- तो क्या लौट आये ? 

बोला- कौन ? मोदी जी तो 11-12 जुलाई को लौटेंगे । फिर कहाँ का कार्यक्रम है मुझे पता नहीं । और हनुमान जी के कहीं जाने का सवाल नहीं उठता । 

हमने कहा- क्या पता, हमने तो कल एक वीडियो देखा था जिसमें हनुमान जी लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड़ शो में नाच रहे थे लेकिन अभी तक न तो किसी संस्कारी हिन्दू की भावना आहत हुई और न ही कहीं कोई एफ आई आर हुई । 

बोला- यह हमारा आंतरिक मामला है जैसे राम मंदिर की चोरी । हमारे राम, हमारा मंदिर, हम कुछ भी करें । कांग्रेस, राम मंदिर में दर्शन के लिए अभी तक नहीं गए लोग और जिन्होंने राम मंदिर के लिए कोई चंदा नहीं दिया उन्हें कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है । हम हनुमान को नचाएं या राम को स्कूल जाने की उम्र में गर्भगृह में बैठा दें हमारी मर्जी । हाँ, अगर कोई अन्य पार्टी या धर्म का व्यक्ति ऐसा कुकर्म करता तो दिखाते कि धर्म, भावना और सत्ता की ताकत क्या होती है । 

हमने कहा- ठीक है । लेकिन जब हनुमान जी आउट ऑफ स्टेशन हैं तो चल कर क्या करेंगे । 

बोला- वे हनुमान जी थोड़े थे । उनके हाथ में राम का ध्वज थोड़े था । उनके हाथ में भाजपा का झण्डा था जिस पर कमल का निशान साफ दिखाई दे रहा था । हो सकता है कोई संस्कारी और धार्मिक कार्यकर्ता हो जो यूपी के अगले चुनाव में टिकट पाने के लिए यह नाटक कर रहा हो । 

हमने कहा- भले ही हम किसी संस्कारी संस्था के स्वयंसेवक नहीं हैं लेकिन राम के निस्वार्थ सेवक, पराक्रमी और सामान्य लोगों के लिए सहज सुलभ रहने वाले हनुमान जी का बहुत आदर करते हैं । अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए उनका वेश धारण करना हमें बहुत बुरा लगता है । अगर पार्टी में स्थान बनाना हो तो हनुमान बनने की जगह गाँधी नेहरू परिवार को गाली निकाल सकता था, किसी मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा सकता था, किसी मुसलमान के फ्रिज में गौ मांस ढूंढ सकता था, किसी मस्जिद के आगे सुंदरकांड का पाठ कर सकता था, किसी तृणमूल वाले सांसद पर अंडे फेंक सकता था । 

बोला- चल, मंदिर तो चलते हैं । पक्का मान अपने जयपुर रोड़ वाले हनुमान जी यथास्थान मिलेंगे । यह होगा कोई लखनऊ कानपुर का कार्यकर्ता । 

हमने कहा- तोताराम, यह भी हो सकता है कि ये असली हनुमान जी ही हों । अयोध्या में अपनी चौकीदारी के बावजूद ट्रस्ट के चंदा गिनती करने वाले अनट्रस्टवर्दी लोगों के कुकर्मों से दुखी होकर हमेशा के कहीं हिमालय में जा रहे हों । या उन्हें डर  हो कि बचने का कोई रास्ता न देखकर ट्रस्ट वाले कहीं इन्हें ही न फँसा दें कि हनुमान जी से पूछो । यहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं की है । या यह डर रहा हो कि कहीं कोई उनकी गदा ही न गायब कर दे । दुष्टता पर उतरे आदमी का कोई ठिकाना नहीं । गदा के बिना उनसे कौन डरेगा  जैसे यूएपीए, कोर्ट और ईडी के बिना सरकार से  । 

-रमेश जोशी 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 6, 2026

05-07-2026 चंदन-पानी


05-07-2026 

चंदन-पानी 



इससे पहले कि तोताराम पेपर लीक या राम मंदिर चोरी जैसा कोई मुद्दा उठाए या सरकारी कर्मचारियों की पे कमीशन, डीए की तर्ज पर चाय के साथ किसी खाद्य पदार्थ की मांग करे हमने अपनी तरफ से मोदी जी तरह उसे उलझाने के लिए प्रश्न उछाल दिया, पूछा- यह ई-20 क्या है ? कहीं भारतीय क्रिकेट की महान हस्ती, शाह साहब के साहबज़ादे जय शाह ने क्रिकेट का कोई नया फॉर्मेट ईजाद किया है ?  एक पिकनिक जैसे परंपरागत पाँच दिवसीय क्रिकेट मैच के आयोजन से आगे जाकर वन डे, डे नाइट, 20-20 आदि । 

बोला- ऐसे तो सर्वज्ञ होने का दावा करता है और फरक आस्ट्रेलिया और आस्ट्रिया का मालूम नहीं । यह टी-20 जैसा कुछ नहीं है ।  यह तो गड़करी के सुपुत्र द्वारा आविष्कृत एक ऐसा पदार्थ  है जो उत्पादक के लिए तो सस्ता है लेकिन ग्राहक को उसका कोई लाभ नहीं मिलता । वह पदार्थ है ‘ई-20’ । ई मतलब ईथेनॉल । गन्ने के रस जैसा कुछ । दुनिया में कोई देश इस तरह, इतना और इस उत्साह से इसे काम में नहीं ले रहा है लेकिन मोदी जी इसका ‘गटर-गैस’ की तरह जहाँ तहाँ प्रचार करते फिर रहे हैं । इस पदार्थ को 80 लीटर पेट्रोल या डीजल में 20 लीटर के हिसाब से मिलाया जाता है ।  इससे ऑटो मोबाइल क्षेत्र का तीव्र विकास होगा ?

हमने कहा- हमने तो सुना है कि इससे माइलेज कम हो जाता है और कार में कई तरह की खराबियाँ आ जाती हैं । 

बोला- तभी तो । ज्यादा चलाऊ पुख्ता चीजों से बाजार की गति थम जाती है । यूज एण्ड थ्रो और फिर नया लो । इसीसे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है जैसे कि उद्घाटन से पहले ही सड़क या पुल टूट जाए तो रूलिंग पार्टी की अर्थव्यवस्था सुधरती है । नकली दवा बनाने वाले और घटिया निर्माण करने वाले ही तो 40% कमीशन देंगे, पी एम केयर फंड की केयर करेंगे और इलेक्शन बॉन्ड खरीदेंगे । 

हमने कहा- एक योगी जी का 80-20 भी तो है ?

बोला- वह तो चुनाव जीतने और बुलडोज़र चलाने का एक फार्मूला है जिसमें 20 प्रतिशत मुसलमानों को 80 प्रतिशत हिंदुओं के लिए खतरा बताया जाता है । 

हमने कहा- लेकिन यह तो उनके नाथ पंथ के सिद्धांतों के खिलाफ है । तुझे पता होना चाहिए-

नाथ पंथ (विशेषकर गोरखनाथ संप्रदाय) का मुसलमानों के साथ एक गहरा और ऐतिहासिक रूप से समावेशी संबंध रहा है। इस पंथ ने सदियों से हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के अनुयायियों को अपने दर्शन और साधना से जोड़ा है। यह सनातन के बरक्स लोकधर्म है जो बुद्ध से होता हुआ कबीर तक जाता है । इसके मूल में शिव हैं जो कल्याण के देवता हैं और अर्द्ध नारीश्वर हैं । 


नाथ पंथ और इस्लाम के मुख्य जुड़ाव बिंदु:

  • मुस्लिम जोगी (फकीर): इस पंथ में एक समय में बड़ी संख्या में "मुस्लिम जोगी" शामिल थे। उत्तर प्रदेश (जैसे गोरखपुर), पंजाब और बंगाल में ऐसे कई परिवार आज भी हैं जो नाथ परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इस्लाम को मानते हैं। 

  • पीर रतन नाथ की कथा: नाथ परंपरा में पीर रतन नाथ (या कायानाथ) एक प्रमुख संत माने जाते हैं, जिनका संबंध मक्का और पैगंबर मोहम्मद से भी जोड़ा जाता है। हिंदू और मुसलमान दोनों उनकी पूजा करते हैं।

  • साझा पूजा स्थल: कई नाथ स्थलों पर संतों की समाधियों को हिंदू और मुस्लिम दोनों समान रूप से पूजते हैं। पंजाब के बठिंडा में स्थित बाबा रतन हाजी की दरगाह (या मठ) इसका एक प्रमुख उदाहरण है। 

  • सूफीवाद से समानता: नाथ पंथ की हठयोग और कुंडलिनी जैसी रहस्यवादी साधनाएं, सूफी संतों (जैसे बाबा बुल्ले शाह और अन्य) की विचारधारा के बहुत करीब रही हैं।

  • 'पीर' की उपाधि: नाथ पंथ के कई मठों में मुख्य संतों या पुजारियों को "पीर" कहकर भी संबोधित किया जाता है।

बोला- राजनीति का कोई पंथ नहीं होता । वहाँ चुनाव जीतना ही महत्वपूर्ण होता है । चुनाव के लिए भला नहीं,  जिताऊ कैंडीडेट ढूँढ़ा जाता है ।  फिर उसके पास शिक्षा या सज्जनता की जगह कोई एनटायर या एफ़िडिफिट वाली डिग्री ही क्यों न हो । 

हमने कहा- लेकिन मिलने में क्या बुराई है । मिलने से ताकत बढ़ती है जैसे मिश्र धातु मतलब अलॉय । मुसलमानों,दलितों, आदिवासियों को सम्मान और प्रेम से जोड़कर देश और और मजबूत बनाया जा सकता है । गहनों का जोड़ मजबूत करने के लिए सोने चांदी में तांबे का टांका लगाया जाता है । सूती कपड़े में 20 प्रतिशत सिंथेटिक मिला देने से वह मजबूत और धोने-प्रेस करने में आसान हो जाता है । दूध में पानी, घी में चर्बी, सीमेंट में रेता, ईडी से डरकर तृणमूल, शिवसेना और आप विधायकों और सांसदों के भाजपा में जाने की तरह मत मिलो । मिलना है तो चंदन-पानी की तरह मिलो जिसकी सुवास अंग अंग में समा जाए ।  

बोला- ऐसे रैदासी सिद्धांतों से राजनीति नहीं चलती । अगर ऐसे नियम मानने लगे तो देश सेवा कैसे करेंगे ? देश सेवा के लिए बहुमत चाहिए और बहुमत के लिए सुवेन्दु, हिमंता, राघव, एकनाथ जरूरी हैं ।  

हमने कहा- सारी माथाकूट छोड़ तोताराम, हमें फ्री का एक आइडिया आया है । गाड़ी में गौ मूत्र भरके, ड्राइवर को एक पव्वा पिलाकर उसके गले में एक भगवा गमछा डालकर, जयश्रीराम का नारा लगाते हुए वाहन को एक जोर का धक्का दे दो और फिर देखो वाहन कैसे फ्री में पवन वेग से अपने गंतव्य तक पहुंचता है ।  

-रमेश जोशी 

 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

06-07-2026 अमृत काल ( एक कुण्डलिया )

    06-07-2026 
अमृत काल ( एक कुण्डलिया ) 





राम-कोष की लूट है जी भरकर के लूट 
अमृत काल के बाद में मिले ना मिले छूट 
मिले ना मिले छूट, टूट जब भ्रम जाएगा 
चंदा देने मंदिर कोई क्यूँ आएगा 
जोशी जब तक चक्कर चलता स्वर्ग-नरक का 
तब तक रस्ता नहीं खुलेगा ज्ञान-तरक का 

-रमेश जोशी 







पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 4, 2026

30-06-2026 हड़बड़ी में गड़बड़ी


30-06-2026 

हड़बड़ी में गड़बड़ी 






 


हमने कहा- तोताराम, जल्दी का काम शैतान का । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- झूठ नहीं कहा है कि सहज पके सो मीठा होय लेकिन जिसे अपने कर्मों पर विश्वास नहीं होता और जो ईवेंट मनेजमेंट के सहारे अपनी इमेज बनाता है वह जल्दी करता है और उसी चक्कर में अपनी भद्द पिटवाता है । 

 बोला- यह, वह, जो, उस आदि में लपेट कर बात मत कर । साफ साफ बता । 

हमने कहा- जैसे चुनावी लाभ लेने के लिए शिखर के बिना ही प्राणप्रतिष्ठा कर दी गई तो राम मंदिर का गर्भगृह टपकने लगा कि नहीं ? 400 पार वाले 240 पर अटक गए और जिस राम के राज में-

बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।

मांगें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ 

इस दोहे अर्थ है कि राम जी के राज में चंद्रदेव अपनी अमृतमयी किरणों से पृथ्वी को परिपूर्ण रखते हैं। सूर्य देव केवल उतनी ही गर्मी देते हैं, जितनी वर्षा या अन्य कार्यों के लिए आवश्यक होती है। बादल भी ऐसे हैं जो केवल मांगने पर और आवश्यकता के अनुसार ही जल बरसाते हैं, अर्थात वहां अतिवृष्टि या अनावृष्टि जैसी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। 


लेकिन आज कट्टरता की राजनीति तथा मूर्खता और स्वार्थपूर्ण विकास के कारण स्थिति यह हो गई है कि गरमी भयंकर और दूर दूर तक बरसात नहीं । अल्पवृष्टि का खतरा मंडरा रहा है । जहाँ तहाँ सड़कें और पुल टूट रहे हैं । इतनी सुरक्षा और संस्कारी लोगों के ट्रस्ट, व्यवस्था में होते हुए राम लला की पादुकाएं चोरी हो गईं । और बुलडोज़र चलेगा 100 मीटर का प्लॉट खरीदने वाले लवकुश पर । हो सकता है कल को यह सिद्ध कर दिया जाए कि चोरी-वोरी कुछ नहीं हुई है बल्कि राम लला के बेटों लव कुश ने सुरक्षा की दृष्टि से सामान एक बैंक लाकर में रखवा दिया था । 

हड़बड़ी का एक और ताज़ा उदाहरण देख ले । 1400 करोड़ की सहायता के बदले एक सम्मान लिया उसमें भी तीन गलतियाँ । 

बोला- तू यहाँ बरामदे में बैठा नितंबों से सुपारी फोड़ता रहता है । देश दुनिया को संभालना पड़े तो पता चले । जहाँ 240 पर अटकने की बात है तो राम के चढ़ावे और चंदे के बल पर पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र में खरीद-फरोख्त करके 400 पार भी हो जाएंगे ।  

हमने कहा- तो फिर पीयूष गोयल को नंबर बढ़वाने के लिए सम्मान का ड्राफ्ट फाइनल होने से पहले ही इसे अपने ट्विटर पर डालने की क्या जरूरत थी ? चल, एक और उदाहरण देते हैं । 2018 में पटेल की मूर्ति के उद्घाटन के विज्ञापन में 8-10 गलतियाँ थीं । और नया उदाहरण ओडिशा की स्कूली पाठ्य पुस्तकों का जिनमें कई हजार गलतियाँ है । 

बोला- ये छोटी-मोटी बातें हैं । शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।विदुर की पत्नी कृष्ण को देखकर इतनी भावविह्वल हो गई कि केलों की गिरी नीचे गिराकर कृष्ण को केले के छिलके खिलाती रही । रीतिकाल के कवि पद्माकर ने नायिका की अत्यधिक उत्सुकता बड़ा ही मनोवैज्ञानिक और सुंदर चित्रण किया है जो नायक के आने का समाचार सुनकर इतनी हड़बड़ी में होती है कि पैरों में लगाने वाला महावर आँखों में और आँखों में लगाने वाला काजल पैरों में लगा लेती है।

आए हैं समीप पीय, प्रीति की प्रतीति मानों,

भई अति अकुलाहट, सुहाई सब बात है।

आनँद की उमंग में, उमंगि अनुराग भई,

भूलि सुधि-बुधि, देह-गेह की न घात है॥

पग में लगाई काजर, नैनन महावर दे,

हिय हुलसाए, भई बावरी सी ज्ञात है। 

 

-रमेश जोशी 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach