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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
जूते में कंकड़ - सामयिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य |
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26-06-2026
अभी यहीं घूम रहा है ?
तोताराम मोदी जी के मन की बात की तरह तय समय पर आ पहुँचा । हमने कुछ नहीं कहा तो खुद ही बोला- क्या बात है, चाय हो गई ?
हमने कहा- चाय तो हो गई लेकिन तू अभी यहीं घूम रहा है ?
बोला- यहाँ नहीं तो क्या सेशेल्स जाऊँगा । मोदी जी बात और है । उन्हें तो देश के लिए सम्मान लेने जाना ही पड़ता है । सेशेल्स तो फिर भी एक लाख तीस हजार की जनसंख्या वाला देश है । तुवालू (हवाई और आस्ट्रेलिया के बीच) में नौ हजार चार सौ, नाऊरू (प्रशांत महासागर में एक छोटा सा द्वीप) में 12 हजार, पलाऊ ( पश्चिमी प्रशांत महासागर में 34 छोटे छोटे द्वीपों का देश) में 18 हजार लोग रहते हैं और शी लैंड ( इंग्लैंड के सफोक तट से 12 किलोमीटर दूर) नाम के देश की जनसंख्या तो मात्र 27 ही है । सम्मान देने के लिए बुलाया जाएगा तो वहाँ भी जाना पड़ेगा ।
हमने कहा- हमारा ज्ञानवर्द्धन करने के लिए धन्यवाद लेकिन हम तो तेरी तीर्थयात्रा को लेकर उत्सुक थे सो पूछ लिया । कल ही तो मोदी जी ने सीकर जिले के 2392 हिन्दू बुजुर्गों को ट्रेन से और 293 हिन्दू बुजुर्गों को हवाई जहाज से तीर्थ यात्रा करवाने के लिए लाटरी निकाली है । क्या तेरा नंबर नहीं लग सकता ?
बोला- और मुसलमान ?
हमने कहा- उनका परलोक बहुत सुधर गया । इसलिए 2018 से उन्हें सबसीडी देना बंद कर दिया है । अगर ज्यादा ही सुधारना है तो पाकिस्तान चले जाएंगे लेकिन हिंदुओं का तो एक ही देश है । यहाँ परलोक नहीं सुधरेगा तो कहाँ सुधरेगा ।
बोला- क्या कहा, मोदी जी ने लॉटरी निकाली है ? यह देश बेचारे मोदी जी से क्या क्या काम करवाएगा । पहले ही 20-20 घंटे काम करते हैं । बच्चों को परीक्षा के लिए टिप्स देने से लेकर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने तक के जाने क्या क्या काम करने पड़ रहे हैं । पहले से ही सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री का रिकार्ड बना चुके हैं । एक बुजुर्ग सेवाभवी सज्जन का यह देश जाने और कितना शोषण करेगा ।
हमने कहा- यह लॉटरी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने नहीं बल्कि जिलाधीश आशीष मोदी ने निकाली है । यह लॉटरी केवल हिन्दू बुजुर्गों के लिए है । सबसीडी नहीं पूर्ण निःशुल्क ।
बोला- एक तो मैंने अप्लाई नहीं किया । कर भी देता तो नंबर नहीं आता ।
हमने कहा- क्यों, क्या कमी है तुझ में ? 83 साल का बुजुर्ग है । हिन्दू है, ब्राह्मण है, शाकाहारी है ।
बोला- वह तो ठीक है लेकिन मैं तेरी संगति में संस्कारहीन हो गया हूँ । न तो रोज नहाता, न संध्या वंदन करता, न आठों अंगुलियों में अंगूठियाँ पहनता, न लंबा तिलक लगाता, न गले में भगवा पटका डालता, न किसी कलश यात्रा और भगवा रैली या विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेता, न अजान से मुझे सिर दर्द होता, न मैं कपड़ों से आतंकवादियों को पहचान सकता, न मैंने कभी किसी मस्जिद पर भगवा झण्डा फहराया ।
हमने कहा- कोई बात नहीं । चाय बनवाते हैं । अगले साल अप्लाई कर देना । हम तेरा मस्जिद के सामने सुंदरकांड का पाठ करते हुए एक बढ़िया सा फ़ोटो खिंचवा देंगे । फॉर्म के साथ वही लगा देना । और यहीं सड़क पर कनक दंडवत करते हुए फागुन में खाटू श्याम् जी के मेले के समय तेरा फ़ोटो एक फ़ोटो छपवा देंगे- शीर्षक होगा- कनक दंडवत करते खाटू श्याम जी जाते हुए एक 83 वर्षीय श्रद्धालु मास्टर तोताराम । फिर तीर्थ यात्रा क्या एम एल ए का टिकट भी मिल सकता है ।
बोला- मास्टर, इसमें तो बहुत खर्च होता होगा ।
हमने कहा- कुछ ज्यादा नहीं । इस मद में राजस्थान 200 करोड़, उत्तर प्रदेश 500 करोड़ और सारा देश एक वर्ष में केवल साढ़े तीन-चार हजार करोड़ खर्च करता है ।
बोला- लेकिन इतना कर्ज आता कहाँ से है ?
हमने कहा- आदमी की साख होनी चाहिए कर्ज की क्या कमी है । अभी तो मोदी जी का डंका बज रहा है तभी तो पिछले 13 प्रधानमंत्रियों ने 67 साल में जितना कर्ज लिया उससे तीन गुणा मोदी जी को अकेले 12 साल में मिल गया । जितना सम्मानित राष्ट्र और नेता उतना अधिक कर्ज । अमेरिका को देख 38 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है । अपना तो एक ट्रिलियन भी नहीं है । राम राम करके पौन ट्रिलियन है । बड़े सेठ बने फिरने वाले अंबानी पर 4 लाख करोड़ और अदानी पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये मात्र कर्ज । अभी बहुत गुंजाइश है ।
बोला- तो फिर राजस्थान में स्कूलों की छत क्यों गिर रही हैं ? मोदी जी के 12 साल में देश में 80 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए । स्कूलों के बढ़िया भवन बनाएं, अच्छी सुविधाएं दें । देश ज्ञान विज्ञान में आगे बढ़ेगा । अगर चाहें तो तीर्थ यात्राओं पर होने वाले बजट का सदुपयोग करें तो एक साल में तीन आई आई टी या तीन एम्स बन सकते हैं ।
हमने कहा- जब तक हिन्दू तीर्थयात्री और काँवड़िए बन रहे हैं तब तक ही हिन्दुत्व सुरक्षित है । नहीं तो पढ़-लिखकर नौकरी मांगेंगे, पेपर लीक को लेकर दुखी होंगे, कॉकरोच बनेंगे, आंदोलन करेंगे ।
हमें तो युवाओं को धर्म योद्धा, गौरक्षक, सनातन संस्कृति सेनानी बनाना है । देश की सुख शांति और धर्मपरायणता के लिए तीर्थ यात्रा और मंदिर कॉरीडोर निर्माण ही ठीक हैं ।
बोला- लेकिन आजकल मंदिरों में तो चोरी डाका हो रहा है ।
हमने कहा- यह तो होगा ही । कोई नई बात नहीं । ज्यादा धन होने से महमूद ग़ज़नवी सोमनाथ आया । अब उसकी कोई जरूरत नहीं है । यहीं हजारों ग़ज़नवी धर्म की ध्वजा लेकर घूम रहे हैं । जहाँ गंदगी वहाँ मक्खियाँ, जहाँ कीचड़ वहाँ कमल, जहाँ कमल वहाँ लक्ष्मी का वास । चिंता मत कर इस दुनिया में धर्म ही एक ऐसा धंधा है जिसमें सारे नेताओं और कामचोरों का गुजारा होता है । इस धंधे में हमेशा बहुत गुंजाइश है ।
25-06-2026
लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र
कोई चालीस साल पहले की बात है जब दिल्ली में हुआ करते थे । तब बाहर से दिल्ली में आने वाला हर आदमी यही सोचता था कि किसी तरह दिल्ली में कहीं भी सौ-पचास गज का प्लॉट हो जाए फिर भले ही उसे रहने लायक बनने में ज़िंदगी गुजर जाए । ऐसे प्लॉट दिल्ली के किसानों के खेतों में हुआ करते थे जहाँ निर्माण रोकने देने के नाम पर डी डी ए वाले वसूली करते घूमा करते थे । ऐसी खेतों में कटी कॉलोनियाँ अवैध कॉलोनियाँ कहलाती थीं ।
ऐसे में लोग अपनी कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए उसका नाम इंदिरा कॉलोनी या संजय कॉलोनी रख लिया करते थे । यह एक प्रकार का टोटका होता है । जैसे कोई अपने बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा देता है या कोई अपने मकान के मुख्य द्वार पर टायर लटका देता है या किसी दैत्य का मुखौटा लगा देता है । आज भी डरे हुए लोग भूत-पिशाच भगाने के लिए भगवा गमछा गले में डाल लेते है या फिर कई रंग के कलावे बांध लेते हैं या तिलक खींच लेते हैं या आठों अंगुलियों में तरह तरह की अंगूठिया पहन लेते हैं । ये सब लोक परलोक के तंत्र मंत्र हैं ।
आज तोताराम ने कहा- मास्टर, अपने बरामदे का नाम ‘नमो बरामदा’ रख लेते हैं ।
हमने कहा- क्या हमें मोदी जी ने इसके लिए कोई सबसीडी दी है या यह कोई अवैध निर्माण है जो इसे ‘नमो’ की आड़ में वैधता प्रदान करें । मोदी जी चाहें तो स्टेडियम का नाम एक झटके में अपने नाम कर लें लेकिन यहाँ तो वही चलेगा जो हम चाहेंगे ।
बोला- 2016 में जब ट्रम्प पहली बार राष्ट्रपति बने थे तब सुलभ शौचालय वाले बिन्देश्वरी पाठक ने हरियाणा के मेवात इलाके में सफाई कर्मचारियों के लिए कुछ मकान बनवाए थे तो उनका नाम ‘ट्रम्प विलेज’ रखा था ।
हमने कहा- ठीक है जब उन्हें इसका कारण पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि हो सकता है इससे कुछ सहयोग या प्रचार मिल जाए लेकिन हुआ कुछ नहीं, भद्द बेकार में पिटी । वैसे ही जैसे ट्रम्प की जीत के लिए 2020 में हिन्दू महासभा वालों ने यज्ञ किया था । यह बात और है कि देवताओं ने उनकी एक नहीं सुनी । इसी तरह मोदी जी ने भी बेशर्मी से अमेरिका में नारा दे ही दिया था ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ । सोच अगर चुनाव के दिनों में कोई विदेशी नेता भारत में आकर राहुल के लिए ऐसा नारा लगाए तो ? लेकिन क्या किया जाए । राजस्थानी में कहावत भी तो है-
आप गुरूजी कातरा मारै
ओराँ नै परमोद सिखावै ।
बोला- मास्टर, सब एक दूसरे को समझाते हैं । भले ग्रहों को कोई नहीं पूछता है लेकिन बुरे ग्रहों के लिए शांति पाठ करवाता है । कहा भी है-
बसे बुराई जासु तन ताही को सनमान
भलो भलो कहि छांडिए खोटे ग्रह जपदान
हमने कहा- और क्या ? मोदी जी यहाँ कण कण पर अपना फ़ोटो छपवा दें, हर चीज के आगे पीछे ‘नमो’ जोड़ दें लेकिन देखा नहीं पिछले दिनों जब अमेरिका गए थे तो ट्रम्प कैसे मोदी जी को ब्यूटीफुल, एंजल आदि कहकर मजे ले रहा था लेकिन मोदी जी बार बार ‘योर एक्सीलेंसी’ ‘योर एक्सिलेंसी’ की रट लगाए हुए थे । ट्रम्प का क्या ठिकाना । बड़ा मुँहफट और गैरजिम्मेदार आदमी है । पता नहीं कब क्या बोल जाए ।
ग्रहशांति के लिए पता नहीं क्या क्या करना पड़ता है । ऐसे में 56 इंच का सीना कुछ काम नहीं आता । जेलेन्स्की ने बिना पर्ची के ही टीशर्ट में ही अपना जलवा दिखा दिया था ।
सारे नाटकों के बावजूद लोक ही सच और सत्य आचरण करता है ।
बोला- मतलब ?
हमने कहा- जैसे कि कुछ अंधभक्त भले ही गोडसे के प्रति आदर का दिखावा करते हों लेकिन आज किसी गोडसे सरनेम वाले महाराष्ट्रियन का नाम ‘नाथूराम’ नहीं होगा । भले ही लोग विभीषण को कितना भी बड़ा भक्त बताएं लेकिन क्या किसी का नाम ‘विभीषण’ सुना है ?
27-06-2026
पादुका चोरी
भले ही मोदी जी ने हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा नहीं करवाई हो लेकिन अब भी देश में हवाई चप्पलें पहनने वालों की संख्या बहुत है । ऐसा हवाई चप्पलों के कारण हवाई यात्रा का अवसर मिलने की उम्मीद नहीं बल्कि महँगे जूते न खरीद सकने के कारण है । आजकल रुपये और राजनीति दोनों के स्तर की तरह हवाई चप्पलों का स्तर भी गिर गया है । दोनों में से किसी भी चप्पल का कोई पट्टा कहीं से भी तृणमूल वालों या राघव चड्ढा या ठाकरे ग्रुप के सांसदों की तरह भाजपा की ओर खिसक गया तो फिर कोई इलाज नहीं । पहले की तरह दस-बीस रुपये के पट्टे बदलने से काम नहीं चलता । पूरी चप्पलें ही बदलनी पड़ती हैं । और कीमत भी 250/- रुपये के लगभग । हमने कल ही नई चप्पलें खरीदनी पड़ी ।
हमारा और तोताराम का नाप एक ही है । तोताराम जैसे ही चाय पीकर चलने लगा तो अपनी पुरानी चप्पलों की जगह हमारी चप्पलें पैरों में डाल ली । हमारे ‘बरामदा ट्रस्ट’ की सुरक्षा किसी चंपत राय के भरोसे नहीं है जो सैंकड़ों करोड़ का चढ़ावा गुपचुप गायब हो जाए । हमने तुरंत पकड़ा और कहा- देखते देखते दिन दहाड़े !
बोला- भूल हो गई । और ये कोई राम की पादुकाएं हैं क्या, सौ रुपये की फुटपाथ वाली चप्पलें ही तो हैं ।अगर चोरी का इरादा होता तो ‘राम मंदिर’ की तरह चढ़ावा गणना के समय के सी सी टी वी कैमरे की फुटेज ही गायब नहीं करवा देता । वैसे यह ‘अमृत काल’ की भारतीय लोकतंत्र की बस है जिसमें लिखा हो या न लिखा हो लेकिन यात्रियों को अपने जान-माल की रक्षा खुद ही करनी होती है ।
हमने कहा- वैसे हुआ बहुत बुरा । राम भक्तों की निगहबानी में राम की पादुकाएं ही चोरी !
बोला- इसमें बुरा क्या है ? जहाँ नाली में कीचड़ होगा वहाँ कमल खिलें या नहीं लेकिन बदबू और मच्छर जरूर होंगे । जहाँ गंदगी होगी वहाँ मक्खियों को निमंत्रण देने की कोई जरूरत नहीं । अब जहाँ धन है वहाँ चोरों के अलावा और कौन चक्कर लगाएगा ? सुंदरियों का जमघट लगवाकर वहाँ मजबूरन ब्रह्मचारियों और संस्कारियों को बिठा दोगे तो क्या वे विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करेंगे ?
हमने कहा- इस मामले में मोदी जी बहुत समझदार हैं ।
बोला- कैसे ?
हमने कहा- मोदी जी श्रद्धांजलि देते समय भी अपने जूते अर्थात पादुकाएं नहीं उतारते । पता नहीं, कब कौन उठाकर चंपत हो जाए । राजा की पादुकाएं होती ही ऐसी हैं । तभी तो भरत जी जैसे ही ननिहाल से अयोध्या आये सबसे पहले चित्रकूट जाकर पादुकाएं लेकर आये । राजा की पादुकाएं साधारण नहीं होतीं । जिसके पास राम की पादुकाएं वही अयोध्या का शासक । हो सकता है कोई गद्दी के चक्कर में ही पादुका लेकर चंपत हो गया हो ।
बोला- वैसे मास्टर, जब भरत राम की पादुकाएं ले आये तो राम को नंगे पाँव वन वन घूमने में परेशानी तो बहुत हुई होगी । कुछ भी हो योगी जी की न्यायप्रियता के कारण चंपत राय को त्यागपत्र तो देना ही पड़ा ।
हमने कहा- त्यागपत्र से क्या होता है ? बैंकों से अरबों लेकर भागा ललित मोदी अगर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दे तो क्या उसे निरपराध मान लिया जाएगा ?
बोला- चंपत राय का ड्राइवर और कुछ और लोग भी हिरासत में लिए तो गए ही हैं ।
हमने कहा- यह तो तथाकथित रामराज्य है । असली रामराज्य में भी राम के वनवास का दोष आज भी मंथरा पर लगाया जाता है । इसी तरह सीता के वनवास के लिए राम के छवि निर्माण के लिए एक निरीह धोबी पर लानत भेजी जाती है । इसी तरह बड़े लोगों पर कुछ आंच नहीं आने वाली । और हिरासत में लिए गए लोगों को भी दस बीस दिन में जमानत मिल जाएगी । उसके बाद ज़िंदगी भर केस टेबल पर नहीं आएगा । और अगर आ भी गया और जेल भी हुई तो राम रहीम की तरह परोल पर बाहर आते रहेंगे ।
आखिर ये भी तो बिलकीस बनो के बलात्कारियों की तरह संस्कारी लोग हैं । वसीम बरेलवी को सुन-
ग़रीब लहरों पे पहरे बिठाए जाते हैं समुंदरों की तलाशी कोई नहीं लेता