02-04-2026
गुजरात, तंत्र और उल्लू
(इसका साइज़ इतना रखेंगे कि पढ़ा जा सके
आज तोताराम बहुत खुश था । बोला- मास्टर, विकल्प मिल गया ।
हमने पूछा- क्या ? मोदी जी का विकल्प मिल गया ?
बोला- कैसी बातें करता है । मोदी जी का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता तो मिलेगा कहाँ से ? अगर ऐसा होता तो लोग क्यों कहते 'मोदी नहीं तो कौन ? वे तो एक ही हैं, निर्विकल्प । तभी तो न कोई आगे और न कोई पीछे फिर भी मजबूरी में देश हित में रोज 20-20 घंटे इस संन्यास की उम्र में भी काम किये जा रहे हैं ।
मोदी जी नहीं, हाँ,कामधेनु का विकल्प मिल गया । सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला, तंत्र में काम आने वाला चमत्कारी उल्लू ।
हमने कहा- तेरे होते हुए इस बरामदा विष्ठा को किसी और की जरूरत ही क्या है ? वैसे सारे तंत्र उल्लुओं के बल पर ही चलते हैं । समझदारों से तो तंत्र को खतरा हो जाता है तभी वह किसी न किसी बहाने उनका मुँह बंद करवा देता है । फिर चाहे वे 'ही-ही,खी-खी' पर वीडियो बनाने वाले व्यंग्यकार हों या पोल खोलने वाले पत्रकार । सबके चेनल इसीलिए तो बंद करवाए जा रहे हैं ।
बोला- मैं समझता हूँ तेरा व्यंग्य । लेकिन चुल्लू भर चाय में उल्लू बनने वाला तोताराम ही हो सकता है वरना लोग भले ही उल्लू को मूर्ख समझते हों लेकिन उल्लू वास्तव में होता बहुत चालाक है ।
हमने कहा- वैसे धेनु भी चाहे कामधेनु न हो लेकिन होती बड़े काम की चीज है ।सरकार को वोट दिलवाती है, गौशाला वालों को कागजों में दर्ज होकर अनुदान दिलवाती है, किसी काम की न हो तो बूचड़खाने में जाकर तो हिन्दू बीफ निर्यातकों को कमाई करवाती है और अगर कोई मुसलमान उसे कहीं ले जा रहा हो तो गौ रक्षकों को हफ्ता वसूली करवाती है ।
बोला- बात को घुमाया मत । मैं उल्लू की बात कर रहा हूँ । गुजरात में तांत्रिक क्रियाओं में काम आने वाला उल्लू 10-10 लाख तक में बेचा जा रहा है । दावा है कि इससे सिद्धि प्राप्त होती है जिसके फलस्वरूप सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ।
हमने कहा- उल्लू भी कई तरह तरह के होते हैं । यह उल्लू कैसा उल्लू है ? उल्लू के प्रकार के अनुसार दाम होने चाहियें ।
बोला- उल्लू तो उल्लू होता है जैसे गधा, अंधभक्त ।
हमने कहा- नहीं । एक होता है सामान्य उल्लू, एक काठ का उल्लू, एक उल्लू का पट्ठा । और एक होता है सुपर उल्लू । सुपर उल्लू ही लक्ष्मी का वाहन होता है । ये सब जगह न तो दिखाई देते हैं और न ही सरलता से पकड़ में आते हैं । ये बड़े बड़े नेताओं के आसपास ही पाए जाते हैं । ये उल्लू नहीं किसी और ही वेश में मिलते हैं । ये रात में शिकार करते नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति, परोपकार के प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं । लक्ष्मी के साथ फ़ोटो में तो कभी नहीं । ये वास्तव में मूर्ख नहीं होते जैसा कि उल्लुओं के बारे में फैलाया गया है ।
बोला- और ?
हमने कहा- सामान्य उल्लू दिन में सोते हैं और रात में पेट भरने का जुगाड़ करते हैं । इन्हें खेती के लिए भी उपयोगी माना जाता है क्योंकि ये चूहों को खाते हैं । काठ का उल्लू किसी से कुछ नहीं माँगता-चाहता । वह तो परंपरा से किसी के भी द्वारा यूज किया जाता है । उल्लू का पट्ठा स्वयं की प्रेरणा से कुछ नहीं करता । उसे अपने उस्ताद से जैसा आदेश मिलता है वैसा करता है जैसे कहीं वाहन रैली निकालना, कहीं विराट सम्मेलन करना, कभी किसी अन्य धर्म-स्थान के आगे डी जे बजाना आदि आदि ।
बोला- साफ-साफ बता तुझे किसी मनोकामना की सिद्धि के लिए कोई उल्लू खरीदना है ?
हमने कहा- पहली बात तो हमें इनमें बातों में विश्वास नहीं है, दूसरे आठवें पे कमीशन या 18 महिने के बकाया डीए के लिए लाखों का खर्च क्यों किया जाए तीसरे गुजरात का कोई भरोसा नहीं । वहाँ नकली माल बहुत बनता है । जैसे नकली डॉक्टर, नकली जज/कोट, नकली डिग्री, नकली, पठान का नकली बच्चा और कभी न नापी गई असंभव 56 इंच की छाती ।
बोला- फिर भी देश को उल्लू बनाने में कोई कमी हो तो बता ?
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