Jun 20, 2026

20-06-2026 मेलोनी की फिगर

20-06-2026 

मेलोनी की फिगर 


हमने पूछा- तोताराम, मेलोनी की फिगर क्या है ? 

बोला- इस बुढ़ापे में बच्चों के बारे में ट्रम्प की तरह लूज टाक करते हुए तुझे शर्म नहीं आती ? फिगर मॉडल की होती है । वह उसका प्रदर्शन करती है और लाभ उठाती है ।

हमने कहा- मेलोनी हमारे सबसे छोटे बेटे से भी 10 साल छोटी है । तूने क्या हमें इतना लंपट समझ लिया ।मॉडल विज्ञापन करने वाले ही नहीं होते । किसी भी क्षेत्र में कोई  मानदंड स्थापित करने वालों को भी मॉडल ही कहते हैं ।लगता है तूने एनटायर इंग्लिश में एम ए किया है ।  मेलोनी को हम एक मॉडल प्रधानमंत्री मानते हैं । बड़ी खुद्दार और दबंग नेता है । लेखिका सिंगल मदर की जिजीविषा वाली बेटी है ।कोई उचक्का टाइप प्रॉपर्टी डीलर नहीं है । उसका एक व्यक्तित्व है । 

बोला- लेकिन फिगर का तो एक ही अर्थ होता है छाती, कमर और कूल्हों का नाप जैसे 36-28-36 ।  इसे जानकर तुझे क्या करना है । वैसे इसमें पूछना क्या है । वैसे ही दिखाई देता कि सामान्य हाइट और फिगर की एक लड़की है । होगा 32 इंच सीना । 

हमने कहा- वो तो ठीक है । लेकिन जी -7 सम्मिट में अपने फूहड़ और बड़बोले स्वभाव के अनुसार कुछ भी बोल देने वाले ट्रम्प ने जब कहा कि मेलोनी तो मेरे साथ फ़ोटो खिंचवाने के लिए गिड़गिड़ा रही थी, मरी जा रही थी तो मेलोनी ने जो जवाब दिया उससे हम कन्फ्यूज हो गए । उसने कहा- ट्रम्प बकवास कर रहे हैं । न इटली और न मैं किसी के सामने गिड़गिड़ाने वाले हैं । उसके इस जवाब से हमें लगा कि उसका सीना कम से कम 112 इंच का तो होगा ही । 

बोला- वीरता और आकार दो चीजें हैं । जरूरी नहीं कि बड़े आकार वाला वीर हो ही । वीरता तन का नहीं मन का विषय है । वीरता का मूल भाव है साहस । तभी सूक्ति है-  

न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।

संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥

  • सरल अर्थ: बिना जोखिम (मुसीबत या संदेह) उठाए कोई भी मनुष्य सुख, समृद्धि या भलाई प्राप्त नहीं कर सकता। लेकिन यदि वह जोखिम उठाता है और जीवित बच जाता है, तभी वह सफलता (कल्याण) का दर्शन करता है। 

  •  संदेश: यह श्लोक हमें सिखाता है कि महान उपलब्धियों के लिए साहस और कदम उठाना जरूरी है। डरकर पीछे रहने वाले कभी आगे नहीं बढ़ते, और जो जोखिम उठाकर आगे बढ़ते हैं, विजय उन्हीं को मिलती है।

ऐसे नेता को ही जनता दिल से अपना नेता मानती है और उसके पीछे चट्टान की तरह खड़ी हो जाती है जैसे कि ईरान के नेताओं के साहस के कारण वहाँ की जनता एकजुट हो गई और विजयी हुई । 

 हमने कहा- लेकिन मोदी जी ने 56 इंची सीने के बावजूद ट्रम्प से अपने नागरिकों की हत्या के बारे में कुछ नहीं कहा । पहले जहाँ ‘माइ फ्रेंड’  कहा करते थे वहाँ हर वाक्य में  ‘योर एक्सेलेंसी’ कह रहे थे । 

बोला- अब जब ट्रम्प बार बार मोदी जी को कभी ब्यूटीफुल, कभी एंजिल कह कर खुशामद कर रहा था तो फिर उसे झिड़कना अच्छा भी नहीं लगता । 80 साल का बुजुर्ग आदमी है ।  

मोदी जी बहुत संवेदनशील और लिहाज करने वाले विनम्र व्यक्ति हैं ।उन्होंने कभी सलमान खान या धर्मेद्र की तरह कमीज उतारकर अपने सीने का प्रदर्शन नहीं किया । कुम्भ में स्नान किया तो भी धोती कुर्ता पहनकर ।   

और फिर यह 56 इंची सीना वास्तव में थोड़े होता है । यह तो अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतीकात्मक कथन है । दारा सिंह का सीना भी 56 नहीं केवल 52 इंच का ही था ।  


 


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20-06-2026 बही लिख लिख के क्या होगा


20-06-2026 

बही लिख लिख के क्या होगा 



आज तोताराम ने आते ही कहा- मास्टर, यह कांग्रेस भी कम नहीं ?

हमने कहा- कम ही है । कभी देश के सभी राज्यों में जिसकी सरकारें थीं, बिना किसी को गाली निकाले, बिना  हिन्दू-मुसलमान किये केवल नेहरू जी के नाम से दो बैलों के निशान पर वोट मिल जाते थे वह बड़ी मुश्किल से विरोधी दल के दर्ज़े को पा सकी है । राम राम करके तीन चार राज्यों में सरकार है । अब और इससे क्या कम होगी । 

बोला- मैं सीटों और सत्ता की बात नहीं कर रहा हूँ । कुचरणी करने के मामले में कह रहा हूँ कि कांग्रेस भी कम नहीं । उसके पास ईडी नहीं है, यूएपीए नहीं है फिर भी  कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि जिस संगठन के लाखों करोड़ों अनुयायी हैं, अरबों का फंड जिसके पास है, जो दुनिया के अनेक देशों में फैली हुई है और जिसका सदस्य हुए बिना कोई इस देश का प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या और किसी बड़े पद पर नहीं बैठ सकता, जिसके प्रधान को फ्री में जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है और प्रधानमंत्री के अनुसार जो दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है उसे अपना हिसाब किताब देना, बताना चाहिए, आय-व्यय और गतिविधियों के लेख जोखा सार्वजनिक करना चाहिए । क्यों वह एक रहस्यमय संगठन की तरह काम करता है । 


हमने कहा- इसमें क्या बुराई है ? पारदर्शिता तो ईमानदारी का प्रमाण है । इसीसे कोई संगठन विश्वसनीय बनता है ।अगर कोई संगठन अपनी गतिविधियां, योजनाएं, हिसाब-किताब  गुप्त रखता है तो वह संदेहास्पद हो ही जाता है जैसे कि तालिबान, माओवादी आदि । जब पैसा इकट्ठा करते हैं, जुलूस-जलसा करते हैं, मीटिंग-मंत्रणा करते हैं तो किसी से क्या छुपाना । गाँधी जी तो जब भी कोई कार्यक्रम, आंदोलन, जलसा-जुलूस आदि करते थे तो बाकायदा अंग्रेज सरकार को  सूचित करते थे कि अमुक स्थान पर इतने लोग इस समय इस प्रकार से आंदोलन करेंगे । अब ऐसे में अंग्रेज उन्हें किस आधार पर दंडित करें । उन्हें कैसे अलोकतांत्रिक सिद्ध करें । ऐसे में उन पर अत्याचार करें तो दुनिया में बदनामी । इसी सच्चाई और पारदर्शिता के कारण उनका आंदोलन सत्याग्रह कहलाया जिसने दुनिया में प्रतिरोध का एक नया  विमर्श स्थापित किया । यही गाँधी की महानता थी जिसे दुनिया ने स्वीकार किया । आज भी हमारे पास दुनिया के सामने अपने परिचय के लिए गाँधी और बुद्ध के अतिरिक्त कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं देता । 

बोला- लेकिनसंघ है तो एक परिवार ही जिसका कोई भी सदस्य अगर किसी को कुछ देता है तो किसी को क्या परेशानी है । देने वाला गुरु दक्षिण देने से पहले टेक्स तो दे ही चुका है । फिर क्या बार बार टेक्स लिया जाएगा ?

हमने कहा- टेक्स तो बार बार नहीं लिया जाएगा लेकिन जब जनता का पैसा है, इतना बड़ा बजट और संगठन है, देश दुनिया में मान्यता है तो हिसाब रखना और देना अच्छा ही है । पारदर्शिता से संगठन का सम्मान और बढ़ेगा । 

बोला- जो संस्कारी होते हैं वे अपने दान-दक्षिणा का ढोल नहीं पीटते हैं । वे गुप्त दान में विश्वास करते हैं । 

हमने कहा- फिर भी हिसाब किताब तो हिसाब किताब ही होता है । मंदिर में चढ़ावे का भी हिसाब रखा जाता है । इससे मंदिर का सम्मान बढ़ता है और अगर चढ़ावे कुछ गड़बड़ी दिखाई देती है तो सम्मान में कमी आती है जैसे आजकल राम  मंदिर की विश्वसनीयता खतरे में पड़ी हुई है । गाँधी जी के आश्रम में अगर किसी दिन हिसाब किताब में एक पैसे का भी अंतर होता था तो खजांची को अपनी जेब से जमा करवाकर हिसाब ठीक करना होता था । यह दंड के बतौर नहीँ बल्कि पारदर्शिता के लिए जरूरी था ।

बोला- लेकिन संघ में तो गुरुदक्षिणा होती है । अब पति-पत्नी, गुरु-शिष्य, पिता-पुत्र आदि के संबंधों का भी कांग्रेस हिसाब मांगेगी ? फिर क्या शालीनता रह जाएगी इन पवित्र रिश्तों में । हमारा दर्शन तो कहता है- बही लिख लिख के क्या होगा यहीं सब कुछ लुटाना है । सजन रे झूठ मत बोलो ।

हमने कहा- लेकिन अगर हिसाब देने से सच की स्थापना होती है तो हिसाब मांगा और दिया भी जाना चाहिए । राम ने तो एक धोबी के अपने खुद में घर में रात को अपनी पत्नी के साथ झगड़े में सीता के बारे में प्रवाद करने मात्र से सीता को त्याग दिया । हालाँकि सीता की समस्त सुरक्षा का प्रबंध भी किया लेकिन राजधर्म की स्थापना और जनता के विश्वास को कायम रखने के लिए जो किया वह भी जरूरी था । इसलिए अगर दाढ़ी में तिनका या मन में चोर नहीं है तो हिसाब देने में क्या बुराई है । 

हमारे यहाँ तो ईडी आएगी तो हम बचने के लिए भाजपा में जाने की बजाय हिसाब देना बेहतर समझेंगे क्योंकि हमारे दिल में चोर नहीं है । 

आगे तुम जानो, तुम्हारी सरकार है जिसे चाहो देशद्रोही बताकर जेल में डाल दो और दस दस साल तक केस ही टेबल पर मत आने दो या चाहे जिस बलात्कारी को साल में छह महिने बेल और फरलो दे दो । 

विवाह खुल्लम खुल्ला, धूम-धड़ाके से होता है, कार्ड छपते हैं, अनेक लोग गवाह होते हैं, उसका पंजीकरण होता है । हाँ, अवैध संबंधों को छुपाया जाता है । वैसे आजकल तो ‘लिव इन’ का भी रजिस्ट्रेशन होने लगा है ।  

बोला- जब हिन्दू धर्म ही रजिस्टर्ड नहीं है तो हिंदुओं की संस्थाओं का कैसा रजिस्ट्रेशन ? 

हमने कहा- रजिस्ट्रेशन तो जैन, बौद्ध, ईसाइयत, इस्लाम किसी भी धर्म का नहीं है तो क्या वे कानून से ऊपर हो जाएंगे ? किसी के प्रति उनका कोई दायित्व नहीं ? ईसाइयों को विदेशी मिशनरी चंदे और मस्जिदों को पेट्रो डॉलर से जोड़ा जाता है कि नहीं ? लेकिन सब चंदे चिट्ठे का हिसाब रखते हैं । विदेशों में संघ के संगठन ‘हिन्दू सेवक संघ’ के नाम से रजिस्टर्ड है और जिनसे उसे डॉलर में चंदा मिलता है । कम से कम उसका हिसाब तो फेरा के तहत दिया ही जाना चाहिए ।  

 



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Jun 19, 2026

19-06-2026 तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा


19-06-2026 

तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा 



आज तोताराम बहुत विचलित था । इतना परेशान तो मोदी जी ट्रम्प द्वारा रूस से तेल खरीदने की मनाही या 100% टेरिफ़ की धमकी से भी नहीं हुए होंगे । 

हमने पूछा- वत्स, इतना परेशान क्यों है ? तू तो ईडी के भयभीत तृणमूल कॉंग्रेस के सांसदों और विधायकों की तरह डरा हुआ लग रहा है ।  

बोला- मास्टर, ईडी का क्या है । बड़ा सरल उपाय है । भाजपा में शामिल हो जाओ । तत्काल पवित्र, ईमानदार और संस्कारी । मैं तो एक सामान्य नागरिक के नाते अपनी जान की सुरक्षा चाहता हूँ ।जहाँ तक माल का प्रश्न है तो वह तो मेरे पास है नहीं । अपने नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व होता है । 

हमने कहा- दायित्व तो सरकार के और भी बहुत से होते हैं लेकिन हर बस में लिखी सूचना से सरकार का उत्तर समझा जा सकता है-  ‘यात्री अपने जान माल की रक्षा स्वयं करें’ । वैसे तेरी जान को खतरा किससे है ?

बोला- जब सुबह तेरे यहाँ आता हूँ तो तीन चार कुत्ते नियमित रूप से भोंक भोंककर मुझे डराते हैं जैसे कि कुछ उत्साही राष्ट्रवादी युवक मस्जिद के पास हनुमान चालीसा का पाठ करके या जय श्रीराम के नारे लगाकर मुसलमानों को डराते हैं । 

हमने कहा- कल ध्यान से देखकर, पहचानकर बताना कहीं वे कुत्ते मुसलमान तो नहीं ।   

बोला- कैसे पहचान सकता हूँ । वे कोई कपड़े थोड़े पहनते हैं । वैसे जब से भागवत जी ने कहा है कि हिन्दू और मुसलमानों का डीएनए एक है तो कफ्यूजन और बढ़ गया है । 

हमने कहा- ऐसे मामलों में तू भागवत जी को नहीं हिमन्ता बिस्वा सरमा, धामी, सुवेन्दु अधिकारी, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, योगी जी आदि को सुनाकर । 

बोला- मुझे इन बातों से कोई मतलब नहीं । बस, मुझे तो सुरक्षा चाहिए । जेड प्लस सुरक्षा जिससे तीन चार क्या हजार कुत्ते भी मेरा कुछ न बिगाड़ सकें । 

हमने कहा- फावड़े का एक टूटा हुआ डंडा पड़ा है जाते समय ले जाना और जब भी कुत्ते भोंकें एक दो बार फटकार देना, भाग जाएंगे । 

बोला- भागवत जी तो बहुत बढ़िया लाठी चलाते हैं । मैंने एक बार स्वयंसेवकों को लट्ठ संचालन सिखाते हुए उनका वीडियो भी देखा था । अब भी क्या लट्ठ भाँजते हैं । सुना है कोई अच्छा लाठी चलाने वाला हो तो तीव्र घुमावदार संचालन से बंदूक की गोली से भी बचाव के सकता है । वैसे भी उनके अंडर में तो 40-50 लाख स्वयंसेवकों की सेना आती है । फिर उन्हें जेड प्लस सुरक्षा क्यों मिली हुई है ? वे न तो आयकर देते हैं, न उनकी कोई नौकरी और वेतन है । फिर जेड प्लस सुरक्षा का 40-50 लाख रुपया महिना कहाँ से देते हैं ?

हमने कहा- वे राष्ट्रवादी, संस्कारी, स्वयंसेवी संस्था के सर्वेसर्वा हैं । उनके प्रचारक सरकार में हैं । उनसे कौन कुछ माँग सकता है ? ये तो 40-50 लाख रुपये महिने की बात है उनका तो हजारों करोड़ का आधारभूत ढांचा है, अरबों का बजट है फिर भी किसी को कोई हिसाब किताब नहीं देते जबकि एक छोटी सी गौशाला और दुकान चलाने वाला तक अपना हिसाब देता है । तूने तो सारी ज़िंदगी में 40-50 लाख नहीं कमाए होंगे । इसलिए जेड प्लस सुरक्षा की बात छोड़ । इन कुत्तों का तुष्टीकरण कर दिया कर । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- जैसे राष्ट्रवादी सरकारें अपने अवैतनिक सैनिकों और भक्तों को कभी गौशाला के नाम से तो कभी काँवड़ियों के लिए भंडारे लगाने आदि के बहाने लाखों रुपया अनुदान देकर लाभान्वित करती रहती हैं वैसे ही तू भी इन्हें कभी कभी टुकड़ा फेंक दिया कर । ये कौनसे सिद्धांतवादी हैं, है तो कुत्ते ही भले ही किसी भी धर्म, जाति और देश के हों । 

 



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19-06-2026 अब और क्या बाकी रह गया


19-06-2026 

अब और क्या बाकी रह गया 



तोताराम आज बहुत उत्साहित था, बोला- अब और क्या बाकी रह गया ?

हमने कहा- कुछ नहीं । कुछ बाकी नहीं रहा । जिस राम मंदिर के कारण भाजपा पावर में आई, जिसका शिलापूजन, प्राणप्रतिष्ठा, ध्वज-उत्तोलन मोदी जी ने किया उस रामलला के गर्भगृह की छत से पानी टपक रहा है । चंदे और चढ़ावे में चोरी और घपला हो रहा है, बहुमूल्य शिलाएं गायब हैं ।और मजे की बात यह कि  बात बात पर बुलडोज़र चलवा देने वाले और एनकाउंटर करवा देने वाले दबंग योगी जी के राज में एफआईआर तक नहीं हो रही है । मथुरा के कृष्ण मंदिर के तोशाखाना से हजारों करोड़ के सोने और रत्न गायब होने की शिकायत फलाहारी बाबा से अपने खून से पत्र लिखकर की है लेकिन सब तरफ चुप्पी है । हिन्दू ही नहीं अब तो उनके आराध्य तक खतरे में हैं और वह भी तब जब चपरासी से लेकर राष्ट्रपति तक सब हिन्दू हैं ।  सचमुच अब और क्या बाकी रह गया ? 

बोला- अब अपनी इस बुलेट वाणी को विराम दे । मैं मोदी जी की जी-7 सम्मेलन में अद्भुत उपलब्धि के बारे में बताना चाहता था । किसी को कुछ भी ऊलजलूल बक देने वाले नितांत फूहड़, अविश्वसनीय ट्रम्प ने मोदी जी के बारे में क्या कहा ? ‘सबसे सुंदर दिखने वाले फ़रिश्ते जैसे’ । क्या आजतक किसी प्रधानमंत्री के बारे में किसी अमेरिका राष्ट्रपति से ऐसा कुछ कहा था ? इंदिरा गाँधी को तो निक्सन ने चुड़ैल कहा था । 

हमने कहा- जैसे ट्रम्प विश्वसनीय वैसे ये फ़रिश्ते । प्रशंसा और निंदा महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि कर कौन रहा है ? किसी अज्ञानी, स्वार्थी और लफ़्फ़ाज़ व्यक्ति की बात का कोई महत्व नहीं होता । वह पल पल में स्वार्थ के अनुसार बदलता रहता है ।अब तुझे कोई तुझसे ही पूरा खर्चा लेकर साहित्य मनीषी, राष्ट्ररत्न जैसा कोई सम्मान दे दे तो उसका क्या कोई महत्व है । हमारे पास ‘विश्वा’ में छपने के लिए ऐसे ऐसे कवियों की रचनाएं आती हैं जिनको दो दोहे तक छंद में  लिखने नहीं आते लेकिन उनके परिचय में 50-60 सम्मानों की लिस्ट होती है ।हमें भी इलाहाबाद की किसी हिन्दी सेवी संस्था ने 2000 रुपये रजिस्ट्रेशन के बदले सम्मान लेने के लिए बुलाया था लेकिन हमारे बजट में ऐसा प्रोविजन नहीं था सो नहीं गए । आजकल सम्मान भी खरीदे जाते हैं । 

बोला- तो तू क्या कहना चाहता है ? क्या मोदी जी को जो 40-45 सम्मान मिले हैं वे उन्होंने खरीदे हैं ? 

हमने कहा- हमने ऐसा तो नहीं कहा लेकिन यह भी सच है कि किसी को मूर्ख बनाने के लिए उसकी झूठी प्रशंसा की जाती है और जो वस्ताव में मूर्ख होता है वह चक्कर में आ भी जाता है जैसे अपने गाने की प्रशंसा सुनकर कौआ लोमड़ी को अपनी रोटी गंवा बैठा । इंदिरा जी को तो निक्सन ने चुड़ैल कहा था क्योंकि वे उसके दबाव में नहीं आईं । लेकिन इंदिरा को यह देश और दुनिया क्या मानते हैं यह किसी से छुपा नहीं है । इस एंजिल (फ़रिश्ते) और ब्यूटीफुल लु किंग (सुंदर) विशेषण में लोमड़ी की चालाक खुशामद नजर आती है किसी पारखी की नजर कम । वैसे ट्रम्प के सौंदर्य-प्रेम का अनुमान उनके अनेक वैवाहिक और विवाहेतर संबंधों के आधार पर लगाया जा सकता है । 

और जहाँ तक अमेरिका के राष्ट्रपतियों के मन में भारत के प्रधानमंत्रियों के प्रति सम्मान का प्रश्न है तो उसका अनुमान  रीगन द्वारा राजीव गाँधी पर छाता तानकर चलने में, नेहरू जी के लिए ट्रू मैन का देर तक हवाई अड्डे पर उनके इंतजार करने से पता चलता है जबकि ब्यूटीफुल लुकिंग को लेने व्हाइट हाउस के दरवाजे पर एक तृतीय श्रेणी का कर्मचारी भेजा जाता है । ओबामा कहते थे जब मनमोहन बोलते हैं तो सारी दुनिया सुनती है । 

बोला- फिर भी प्रशंसा तो प्रशंसा ही होती है । 

हमने कहा- प्रशंसा क्या, जिस तरह से पर्ची लेकर ट्रम्प से बात कर रहे थे उससे यह लगता था जैसे किसी चौथी फेल को यूपीएससी के इंटरव्यू में बैठा दिया हो । सब लोग हँस रहे हैं । साथ में ले गई पर्ची भी ढंग से नहीं देख पा रहे थे । इससे अच्छा तो जाते ही नहीं या आमिर शाह जैसे चाणक्य और इतिहास के विद्यार्थी को भेज देते । 

वैसे भी हम वास्तविक  जी-7 की गिनती में थोड़े आते हैं । वह तो कुछ देशों को खुश करने के लिए गैलरी में खड़े होकर फिल्म देखने जैसा दर्जा दिया गया है जैसे दक्षिण कोरिया, ब्राजील, मिस्र, कीनिया के साथ मोदी जी के शब्दों में विश्वगुरु भारत को ।  

कभी हम रूस और अमेरिका के दो ध्रुवीय विश्व में गुटनिरपेक्ष सिद्धांत के रूप में तीसरी निष्पक्ष शक्ति हुआ करते थे । इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में दिल्ली में 92 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ विराट सम्मेलन हुआ था । हमारी आवाज दुनिया में सुनी जाती थी । तब कोई ट्रम्प हमें इस तरह गरिया नहीं सकता था । और अब कहीं गैलरी में खड़े हैं । अब तो बस धक्के मारकर बाहर भागना ही बाकी रह गया है । सचमुच कुछ बाकी नहीं रह गया है ।



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