Oct 8, 2026

07-10-2026 नमो संवत


07-10-2026 नमो संवत 




महान लोगों में एक विशेषता सब में समान रूप से पाई जाती है कि उन्हें भले ही अपने पृष्ठप्रदेश का होश न हो, मोबाइल पर रील देखते हुए किसी से टकरा जाएँ या कहीं भी सड़क पर गौमाता द्वारा विसर्जित किए हुए पुण्य पदार्थ में पैर चला जाए लेकिन दुनिया की फिक्र यहाँ तक करते हैं कि आज किसके घर में क्या हुआ, क्या बना, किसकी लड़की किसके लड़के के साथ घूम रही थी आदि । ऐसे लोगों के लिए एक चुटकुला बहुत प्रसिद्ध है । एक महान सज्जन थे जो मोहल्ले के लड़कों को इधर-उधर खड़े देखकर तरह तरह के प्रश्न पूछ लिया करते थे और सही उत्तर न मिलने पर डाँटा करते थे कि जब पढ़ोगे नहीं तो पता कैसे चलेगा ।  

एक दिन जैसे ही वे महान सज्जन घर से निकले तो बच्चों ने पूछा- ताऊजी, क्या आप रामलाल को जानते हैं ? सज्जन ने कहा- नहीं । तो बच्चों ने बताया कि घर पर रहेंगे तो पता चलेगा ना कि आपके पीछे से आपके घर में आने वाला रामलाल कौन है ? उसके बाद सज्जन ने बाहर जाना और प्रश्न पूछना बंद कर दिया ।  

तोताराम भी ऐसे ही महापुरुषों की श्रेणी में आता है जिसे न महंगाई की फिक्र है, न 18 महीने के हड़प लिए गए डीए के एरियर का कोई मलाल । फिक्र है तो फालतू में मुद्दों और नाटकों की । हर बात में अपनी सुविधानुसार स्थानीय, राष्ट्रीय से अंतर्राष्ट्रीय कुछ भी हो जाता है ।  

आज आते ही तोताराम ने आदेश दिया- जा, फटाफट 25 कटोरियाँ लेकर आ ।  

हमने कहा- कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं है । वही चाय और वही गिलास । कभी कुछ होगा तो कटोरी भी आ जाएगी ।  

बोला- कटोरी तो ला । आज का सेलेब्रेशन तोताराम की तरफ से है ।   

क्या करते । किसी तरह छोटी बड़ी कटोरियाँ, प्याले और प्लेटें बटोरकर गिनती पूरी की और तोताराम के सामने लाकर पटक दिए ।  

तोताराम ने जेब से छोटे साइज़ के नमकीन बिस्किटों के दो-तीन पैकेट निकाल कर सभी में एक एक बिस्किट रख दिया ।  

हमने कहा- यह क्या नाटक है ? ये सब तो एक प्लेट में आ सकते थे ।  

बोला- किसी भी अवसर को विशिष्ट बनाने के लिए कुछ नया करना जरूरी होता है जैसे वर्षगांठ के अनुसार दीयों या मोमबत्तियों की संख्या । मोदी जी के जन्म दिन 17 सितंबर को देश की जनता ने उनके लिए आशीर्वाद स्वरूप  कोई 17 करोड़ दीये जलाए थे । उसी तरह आज दिन उनकी देश सेवा के ठीक 25 वर्ष पूरे हुए हैं । आज ही के दिन उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी । उसी के उपलक्ष्य में 25 कटोरियों में 25 बिस्किट परोसकर उनके सेवा संकल्प के 25 वर्ष मना रहे हैं ।  

हमने कहा- कर दी ना वही गरीब मास्टरों वाली बात । अगर मनाना ही तो था कुछ ढंग से मनाता । न सही अहमदाबाद में भूपेन्द्र  पटेल द्वारा  6500 छात्रों की मानव रंगोली मगर कुछ तो ..   

बोला- अगर व्यक्ति दृष्टि सम्पन्न हो तो छात्रों की रंगोली और दीयों में खर्च करने की बजाय कुछ बड़ा भी सोचा और किया जा सकता है ।  

हमने पूछा- जैसे ? 

बोला- सेवा संकल्प के 25 वर्षों के उपलक्ष्य में दिन को 25 घंटे का बनाया जा सकता है । 25 सेकंड का 1 मिनट, 25 मिनट का एक घंटा, 25 घंटों का एक दिन, 25 सप्ताहों का एक महिना, 25 महीनों का एक वर्ष ।  

हमने कहा- यह क्या बकवास ? दिन, रात, वर्ष आदि पृथ्वी, सूर्य की गतियों, परिभ्रमण के अनुसार बनते हैं । कोई अपनी मर्जी के कैसे सब कुछ उलट पुलट सकता है ? 

बोला- सब संभव है । पहले 4 पैसे का 1 आना, 4 आने की एक चवन्नी, चार चवन्नियों का 1 रुपया हुआ करता था । उसके बाद याद हैं ना 1 अक्टूबर 1957 को नए रुपए-पैसे चलन में आए थे । कुछ दिनों एक पुराने पैसे में डेढ़ नए पैसे का बड़ा चक्कर चला  था ।कई जगहों पर तो लोग आधे आधे पैसे के लिए लड़ पड़ते थे लेकिन फिर धीरे धीरे सब ठीक हो गया । 

दिन रात, सूर्य और पृथ्वी का परिभ्रमण वैसे ही रहेंगे बस, उसी में 25-25 फिट कर दिए जाएंगे । जैसे काल तो वही है लेकिन अनेक राजाओं ने अपने नाम से संवत शुरू कर दिए जैसे विक्रम संवत, ईस्वी सन, शक संवत, हिजरी सन । क्या वैसे ही 17 सितंबर 1950 या 7 अक्टूबर 2001 या फिर 17 मई 2014 से नया संवत शुरू नहीं किया जा सकता है ?  

 

हमने कहा- तोताराम, तेरा भी जवाब नहीं । बहुत ऊंचा आइडिया लाया है । चल, घोषित कर दें कि जब तक दिन 25 घंटे का और 17 सितंबर 1950 से नया संवत्सर शुरू नहीं किया जाता तब तक ‘जेन 80’ की ओर से सीकर के मास्टर तोताराम और रमेश जोशी जंतर मन्तर पर आमरण अनशन जारी रखेंगे ।  

बोला- और अगर जंतर मन्तर से हटा दिया गया तो ? 

हमने कहा- यह कोई कॉकरोचों या राहुल गांधी का आंदोलन थोड़े ही है जो पेलेट गन, कांटे वाली लाठी या ए के 47 से निबटेंगे । यह तो राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक आंदोलन होगा जिसमें पुलिस पुष्प वर्षा करेगी और स्वयंसेवी संस्थाएँ लंगर लगायेंगी । फिर भी कोई बाधा आई तो अपना ‘बरामद विष्ठा’  मुबारक ।  

बोला- तो उस संवत् का नाम क्या होगा, मोदी संवत, नरेंद्र संवत, संकल्प संवत ?  

हमने कहा- सदाबहार नाम- ‘नमो संवत' । नमो भगवते वासुदेवाय ।  

बोला- वाह, इसमें तो प्रकारांतर से संघ और संचालक जी दोनों का छोंक लग गया । गुड ।


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