Mar 9, 2026

2026-03-09 फीकी चाय : मीठी चाय

2026-03-09 

 फीकी चाय : मीठी चाय 

आज तोताराम को आये और बैठे कई देर हो गई । बैठने की मुद्रा कई बार बदलने के बाद बोला- तो क्या आज बिना किसी कार्यवाही के ही बरामदा संसद का सत्रावसान हो जाएगा ? 

हमने कहा- आज तुम्हारी उसी तरह से कोई आवश्यकता नहीं है जिस प्रकार भारत की संसद में विपक्ष की । जब तू बोलने का अवसर न दिए जाने के कारण हल्ला मचा कर बहिर्गमन कर जाएगा तब हम सर्वसम्मति से बिल पास करवा लेंगे । 

बोला- मतलब ?

हमने कहा- मतलब यह कि आज चीनी नहीं है । थोड़ी देर में कोने वाले चौधरी की दुकान खुल जाएगी तब चीनी ले आएंगे । दुकान आठ बजे खुलती है और तब तक तुझे रुकना नहीं है । वैसे तू चाय पीता ही चीनी के चक्कर में है , फीकी चाय या ब्लेक कॉफी तो बुद्धिजीवी पीते हैं और तुम भक्त लोगों का बुद्धि के क्या लेना देना । 

बोला- फीकी या मीठी, चाय या कॉफी पिला या नहीं लेकिन हमारी बुद्धि पर शक ठीक नहीं है । वैसे तूने कोने वाले चौधरी की दुकान से चीनी लाने के लिए परमीशन ले ली है या नहीं ?

हमने कहा- चीनी खरीदें या नमक । इससे खरीदें या उससे, किसी से परमीशन लेने की क्या जरूरत । यह हमारे और दुकानदार के बीच का मामला है । 

बोला- नहीं मास्टर, अब वह  बात नहीं रही । अब ज़माना बदल गया है । अब दुनिया बहुत छोटी, एक दूसरे पर निर्भर  और कूटनीति से भरपूर हो गई है । अब नेहरू वाला ज़माना नहीं रहा जब हम स्टील के कारखाने, आई आई टी आदि अलग-अलग देशों के सहयोग से बना रहे थे ।यहाँ तक कि उस जमाने में अमेरिका ने बोकारो का स्टील प्लांट लगाने का वादा किया था लेकिन लटकाता रहा तो हमने रूस के सहयोग से लगा लिया । 

बोला- उस समय की बात और थी । 

हमने कहा- और बात क्या ? उस समय तो हम कोई विकसित देश क्या ढंगे से विकासशील भी नहीं थे ।देश का ढांचा खड़ा करने के लिए जाने किस किस काम के लिए दुनिया में भाग-दौड़ रहे थे । हाँ, लेकिन तब हम मानसिक और नैतिक रूप से कमजोर नहीं थे । 

बोला- तुझे क्या पता ? आज कल दुनिया वैसी नहीं रही । बहुत कुछ सोचना पड़ता है ।क्या पता किसी ऐसे वैसे से कोई सामान खरीद लें तो अमेरिका कहीं सौ दो सौ प्रतिशत टेरिफ़ न लगा दे । तुझे पता होना चाहिए कि यह दुकानदार कम्युनिस्ट अमराराम की पार्टी का है ।और अमेरिका कम्युनिस्टों से बहुत खार खाता है ।  

हमने कहा- अमेरिका से डरें वे लोग जिनका एपस्टीन फाइल में नाम है ।  अपना रिकार्ड एकदम साफ है । इसलिए हम न किसी के सामने सरेंडर करेंगे और न ही कंप्रोमाइज्ड होंगे । 

बोला- लेकिन तू भी तो कई बार बच्चों के पास अमेरिका आता-जाता रहा है कि नहीं ।  बस, इतने पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जेल में डाला जा सकता है । फिर सिद्ध होते रहना निर्दोष केजरीवाल, सिसोदिया, स्टेंस स्वामी की तरह । तुझे कोई राम रहीम की तरह क्लीन चिट या पेरॉल नहीं देने वाला । हाँ, अगर तेरे पास भारत के रूस से तेल खरीदने के लिए एक महिने की परमीशन की तरह कोई छूट हो तो बात और है । 

हमने कहा- हम इस प्रकार की कोई बंदिश मानने वाले नहीं है ।साँच को आँच नहीं । 

बोला- गाँधी का आज भी सारी दुनिया सम्मान करती है । लेकिन मारने वाले ने तो उनको निबटा दिया कि नहीं । मैं इस चक्कर में पड़ने वाला नहीं हूँ । इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से मैं चौधरी की दुकान से चीनी खरीदने के मामले से अपने आप को उसी तरह से अलग करता हूँ जिस प्रकार मोदी जी ने खामेनई की हत्या के मामले में श्रद्धांजलि देने या शोक प्रकट करने से अपने आप को अलग कर लिया । 

और तोताराम उठकर चल गया है । 

-रमेश जोशी 

 



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Mar 8, 2026

तोताराम की संवेदनशीलता


 

तोताराम की संवेदनशीलता


हमारी गली में कुछ ही कुत्ते यहाँ के स्थायी निवासी हैं । उन्हें यहाँ किसी SIR का खतरा नहीं है क्योंकि अभी उनको वोट देने का अधिकार नहीं मिला है । किसी पार्टी को उनके वोट कटवाकर या जुड़वाकर जीत का गणित बैठाने की  जरूरत नहीं है । एक ही मकान में 00 नंबर लगाकर दो चार सौ कुत्तों के वोट दिखाने की जरूरत नहीं है । इसलिए यहाँ दूसरे मोहल्ले के कुत्तों के आने को 'घुसपैठ' नाम नहीं दिया जाता । हम जब जरूरत हो उनके साथ संवाददाता सम्मेलन कर लेते हैं । हमें उनके किसी भी प्रश्न से असहजता महसूस नहीं होती । वे जो चाहें प्रश्न पूछ सकते हैं । न तो हमारी मोहल्ले में 'घुसपैठ' रोकने की जिम्मेदारी है और न ही हम किसी अन्य मोहल्ले से चुनाव के समय बस और ट्रेन से उन्हें यहाँ फर्जी वोट डालने के लिए भेजते-बुलाते हैं । वे सहज भाव से आते-जाते रहते हैं जैसे सत्ताधारी पार्टी में अन्य पार्टियों के भ्रष्टाचारी नेता सहज ही शामिल हो जाते हैं ।

उनमें किसी तरह के सांप्रदायिक दंगे नहीं होते  क्योंकि न तो वे कोई विशेष प्रकार के वस्त्र पहनते हैं जिनसे उन्हें पहचाना जा सके और न ही किसी खास तरह की दाढ़ी रखते और न ही किसी राष्ट्रवादी रंग का पटका डालते और न ही किसी देवता के नाम का किसी अन्य कुत्ते से जबरदस्ती नारा लगवाते और न ही किसी को वन्देमातरम गीत के छह छंद गाने के लिए बाध्य करते । कभी कभी किसी खाद्य पदार्थ को लेकर वैसे ही मामूली झड़प हो जाती है जैसे कि किसी पार्टी के भोज में स्वयंसेवक गुलाबजामुन या बादाम की बरफी के लिए धक्कामुक्की करने लगते हैं । ऐसे में हम उनके बीच ट्रम्प की तरह युद्ध विराम करवा देते हैं लेकिन सप्ताह में दो दो बार 'मैंने युद्ध विराम करवाया'  कहकर हम कभी उन्हें ह्यूमिलिएट नहीं करते इसलिए वे हमारा सम्मान भी करते हैं । 


आज जैसे ही हमने तोताराम के सामने चाय का गिलास रखा एक कुत्ते ने उसे सूंघने का दुस्साहस किया । वह गिलास से मुँह टच कर दे उससे पहले ही हमने उसे 'हट साले' कहकर भगा दिया ।  

हालाँकि हमने कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया था । कुत्ते को ही तो और वह भी उसके अनुचित काम के लिए डाँटा था । और फिर यह शब्द तो संसद में भी चलता है ।कुत्ता तलवे चाटने का विनम्र काम ही तो करता है ।इस शब्द का प्रयोग करने पर किसी 'अति माननीय'  पर कोई कार्यवाही नहीं होती । बस, संसद की कार्यवाही में शामिल न करने का कठोर दंड दे दिया जाता है । लेकिन तोताराम उसी तरह भड़क उठा जैसे कि निर्वाचित होते ही, शपथ-ग्रहण से पहले ही कोई अति सनातनी विधायक जनसेवा के सनातन काम 'किसी अंडे की रेहड़ी को हटवाने' के लिए पहुँच जाता है । 

बोला- मास्टर, तुझे पता होना चाहिए आज तूने बंगाल का अपमान किया है । कोई भी सच्चा बंगाली इसे बर्दाश्त नहीं करेगा । 

हमने कहा- तोताराम, इस कुत्ते के पूर्वज तो अनेक पीढ़ियों से राजस्थान के सीकर शहर के इसी मोहल्ले में रहते आये हैं । न यह माछ-भात खाता है, न लुंगी पहनता है, न बांग्ला बोलता है । और अगर कुत्ते को भैरों जी से जोड़ता है तो वे तो बनारस के कोतवाल माने जाते हैं । नाराज भी होंगे तो बनारस के लोग होंगे । और फिर हो जाएँ नाराज हमें कौन सा वहाँ से चुनाव लड़ना है । लेकिन हमारी गली के इस कुत्ते का बंगाल से क्या संबंध है ? और अगर तुझे ज्यादा ही समस्या है तो हम इसे कुत्ते ही जगह 'श्वान' कह देते हैं जैसे आवारा सांड कहकर गौ भक्तों की नाराजगी से बचने के लिए समझदार पत्रकार उन्हें 'बेसहारा साँड' लिख देते हैं ।वैसे 'साँड' अपने आप में दादागीरी का पर्याय होता है । हालाँकि इससे उनके गर्व और गौरव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । वे उसी तरह राहगीरों को आतंकित और घायल करते रहते हैं ।  

बोला- तुझे पता होना चाहिए कि दुर्गा के दो मुख्य कमांडो हैं दो भैरव, एक काला और एक गोरा । उनके साथ दो कुत्ते भी हैं- एक काला और एक सफेद । कुत्ते का अपमान  प्रकारांतर से दुर्गा और दुर्गा मतलब बंगाल का अपमान है । 

हमने कहा- हमें कौनसा बंगाल से या कहीं और से चुनाव लड़ना है जो इस फालतू के पचड़े में पड़ेंगे । 

बोला- लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है उन्हें तो फ़र्क़ पड़ता है ना । वे तो गाली की गिनती की तरह इसे भी मुद्दा बना सकते हैं ना । 

हमने कहा- ये सब मोदी जी जैसे समर्पित और देश के सम्मान के लिए सतर्क 56 इंची छाती वालों की चिंता के विषय हैं । वैसे यह समय राष्ट्रपति की आड़ में खेल खेलने की बजाय 'अमेरिका द्वारा 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की आज्ञा देने' के समाचार से होने वाले देश के अपमान के प्रतिकार में खड़े होने का अधिक है । 

-रमेश जोशी   


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Mar 7, 2026

मोदी जी अकेले क्या क्या करें ?


मोदी जी अकेले क्या क्या करें ? 

आज तोताराम बहुत परेशान था । आते ही न चाय की बात की और न ही अपने या मोदी जी के मन की बात का कोई जिक्र । 
बोला- मास्टर, मोदी जी अकेले क्या क्या करें ? 
हमने कहा- इसमें गलती मोदी जी की ही है । कोई और कर भी क्या सकता है  ?  और फिर यह तो उन्हें प्रधान मंत्री बनने से पहले सोचना चाहिए था । 

बोला- कर क्यों नहीं सकता । कर तो रहे हैं दिन रात कोशिश । इतने राष्ट्रभक्त संस्कारी लोगों को छाँट छाँटकर मंत्रीमण्डल में रखा है । नहीं मिले तो लेटरल एंट्री के द्वारा जाने कहाँ कहाँ से योग्य व्यक्तियों को पिछले दरवाजे से विभिन्न संस्थानों में बैठा तो दिया है । अब और क्या करें । 

हमने कहा- लेकिन लगता है कोई भी मोदी जी के योग्यता के पैमानों पर खरा नहीं उतरता । तभी तो चाहे रेल को हरी  झंडी दिखाना हो या राफेल की डील करना हो, ए आई पर भाषण देना हो या परीक्षा पर चर्चा करनी हो । न तो शिक्षा मंत्री से कोई मदद मिल पाती है और न ही कोई तकनॉलॉजी मंत्री कुछ कर या कह पाता है । अब ऐसे में हम क्या कर सकते हैं ? भुगतें । दिखाएं ट्रेन को हरी झंडी, करें मंदिरों में आरती , पढ़ाएं कक्षाओं में जाकर । छाँटा तो उन्होंने ही है ना । 

बोला- मैं इन छोटे छोटे मुद्दों की चर्चा नहीं कर रहा हूँ । मैं तो दुनिया में देश की बेइज्ज़ती और बदनामी की बात कर रहा हूँ । 

हमने कहा- दुनिया में मोदी जी का डंका बज तो रहा है । दुनिया के बड़े से बड़े नेता मोदी जी से गले मिलने के लिए तरस रहे हैं । जहाँ जाते हैं वहीं के राष्ट्राध्यक्ष अपने देश का सर्वोच्च सम्मान देने हवाई अड्डे पर ही आ जाते हैं । छप्पन इंची सीना  पदकों से दोनों तरफ से भर गया है, पदक लगाने के लिए जगह ही नहीं बची है ।  लाखों लोग हवाई जहाज से उतरने से पहले ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाने लग जाते हैं । औरतें उनके ग्लो को देखकर विह्वल हो जाती हैं, उनको छूकर धन्य हो जाती हैं । और क्या चाहिए । 

बोला- यह तो ठीक है लेकिन ये कांग्रेस वाले वाले देश और मोदी जी की छवि बिगाड़ने के लिए आजादी के पहले से लगे हुए हैं । इसका क्या किया जाए ? 

हमने कहा- मोदी जी का तो जन्म ही 1950 में हुआ है तो आजादी के पहले की बिगड़ी हुई छवि के लिए मोदी जी कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं । 2014 के बाद से मोदी जी की जिम्मेदारी है । सो लगे तो हुए हैं देश की छवि सुधारने में । तभी तो चौबीसों घंटे न सोते हैं , न सोने देते हैं । संसद से शौचालय तक अपने सुंदर फ़ोटो, सेल्फ़ी पॉइंट बना तो दिए । जहाँ देखो वहाँ खंभ में राम, खड्ग में राम की तरह सब जगह मोदी जी ही मोदी जी । राम मंदिर तक में राम से पहले मोदी जी । अब तो 5 किलो राशन के अनाज के दानों पर नाम लिखवाना बाकी रह गया है । 

ओबामा को 15 लाख का सूट पहनकर चाय पिला तो दी । ह्यूस्टन में भारत मूल के सवर्ण हिंदुओं का पैसा खर्च करके ‘हाऊ डी मोदी’ और अहमदाबाद में हमारा टेक्स  का पैसा खर्च करके ‘नमस्ते ट्रम्प’ करवा तो दिया । और क्या क्या करें ? 

बोला- अकेले मोदी जी क्या करें । मोदी जी का काता कूता ये कांग्रेस वाले कपास कर देते हैं । पहले वह महात्मा गाँधी ! एक छोटी सी धोती पहनकर चला गया इरविन से मिलने । करवा दिया देश की इज्जत का कचरा । आज तक वहाँ के सभ्य लोग उसे अधनंगे फकीर के नाम से जानते हैं । फिर तुम्हारा या केजरीवाल । याद है कैसे 200 रुपये के सेंडल पहनकर फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद के साथ फ़ोटो खिंचवाने पहुँच गया था राष्ट्रपति भवन और करवा दिया था कि नहीं देश और मोदी जी की इज्जत का कबाड़ा । और फिर यह राहुल गाँधी एक टी शर्ट में घूमता फिर रहा था भारत जोड़ो के नाम पर देश का फजीता करवाता । तभी तो इसे पुतिन से मिलने नहीं दिया गया । लेकिन ये मानते कहाँ है ? 

अब देश की इज्जत बढ़ाने के लिए बड़ी मुश्किल से ए आई पर सम्मिट करवाईजाने कहाँ कहाँ के विशेषज्ञ और सी ई ओ बुलाए तो कांग्रेस ने कुछ बदमाशों को भेजकर शर्ट लेस प्रदर्शन करवा दिया । क्या समझें होंगे लोग कि इस देश के युवाओं के पास कमीज तक नहीं है । क्या मोदी जी और शाह जी की तरह  ‘बार बाला’  ‘जर्सी गाय, ‘50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड’, ‘साले’ जैसे शालीनलोकतान्त्रिक शब्दों से विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते थे ? 

 




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Mar 3, 2026

किसे सुनाएँ हाल

2026-03-03  

 किसे सुनाएँ हाल 


खेले  रंग गुलाल भगत जी 

चरे मुफ़्त का माल भगत जी 


बंदर को उस्तरा दे दिया  

हुआ हाल बेहाल भगत जी 


साबुन पानी नहीं लगाता 

सीधा छीले खाल भगत जी 


काम धाम कुछ नहीं जानता  

सिर्फ बजाए गाल भगत जी 


अमरीका की धुन पर नाचे 

नहीं कोई सुर ताल भगत जी 


अपने मन की कहता रहता  

किसे  सुनाएँ हाल भगत जी 


 

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