May 10, 2026

10-05-2026 किससे किसकी रक्षा ?



10-05-2026 


किससे  किसकी रक्षा ?  



आज तो तोताराम वह सब कुछ हो-हवाकर आया जो कुछ बनने का स्वप्न भारत को दिखाया जा रहा है और अब तक जिसे मुसलमानों और कांग्रेस ने रोक रखा था । और तो और अपनी मृत्यु के 78 साल बाद तक गाँधी और 62 साल बाद भी नेहरू जिसे साकार होने नहीं दे रहे हैं । 

आते ही शुरू हो गया । और वातावरण जग्गी वासुदेव की ‘शिव के साथ एक रात्रि’  की तरह धांसू हो उठा । 



सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।

लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥


जो मनुष्य ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को प्राप्त होता है। 

इसलिए हे पापात्मा मास्टर, तू भी सोमनाथ लिंग के दर्शन करके अपने पापों का प्रक्षालन कर और मृत्यु के बाद स्वर्ग को  प्राप्त हो । 

हमने कहा- यह किसका प्रोजेक्ट है ? 

बोला- ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है । वैसे गुजरात में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मोदी जी जो एक बड़ा भव्य आयोजन करवा रहे हैं, अपने राजस्थान में इस प्रोजेक्ट के प्रचारक, एजेंट या प्रतिनिधि मुख्यमंत्री भजनलाल हैं जो स्कूलों की बिल्डिंगें संभालने से पहले राजस्थान के करदाताओं का पैसा खर्च करके दिल खोलकर खुले हाथ से विज्ञापन छपवा रहे हैं । भजनलाल जी ने ही यह श्लोक अपने विज्ञापन में छपवाया है और साथ ही नीचे भुगतान के लिए एक क्यू आर कोड भी दिया है । हाँ, यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने पैसे देने पर कितने दिन के लिए किस श्रेणी का स्वर्ग मिलेगा ।


हमने कहा- जब भजन लाल जी शाखा तो दूर, स्कूल में जाना भी शुरू नहीं हुए थे तब हमने 1971 में  पोरबंदर के बिरला स्कूल में पढ़ाते हुए सोमनाथ के दर्शन कर लिए थे । अब जो कुछ होना होगा वह उसी के पुण्य प्रताप से हो जाएगा । रो रोकर दिए गए 2 परसेंट डी ए में से सोमनाथ जाने या कोई दान-दक्षिण देने का प्रावधान नहीं बनता । 


  

हम कोई कहीं के मुख्यमंत्री, मंत्री तो हैं नहीं जो अपनी मुख्य ड्यूटी छोड़कर सरकारी खर्च पर मुफ़्त में इस उस तीर्थ को अपवित्र करते और पाप धोते फिरें । 


बोला- फिर भी कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए ।और आज तेरी शादी को 67 साल हो रहे हैं इसी उपलक्ष्य में  कुछ हो जाए । 


हमने कहा- 1 अप्रैल को मोदी जी की शादी को भी 58 साल हो गए थे । उनको तो तूने न बधाई दी और न ही रिटायर्ड लोगों पर कुछ कृपा करने की सलाह कि अबकी डी ए चार की बजाय छह परसेंट कर दें । जबकि लक्षणों और संयोगों को देखते हुए वे निश्चित रूप से बुद्ध के अवतार सिद्ध होते हैं । उनकी जन्म पत्री देखकर ज्योतिषियों ने बताया था कि या तो यह बालक महान सन्यासी बनेगा या फिर चक्रवर्ती सम्राट । उनके वैराग्य के लक्षण देखकर माता पिता ने सिद्धार्थ की तरह उनकी जल्दी शादी कर दी और संयोग देख सिद्धार्थ की पत्नी का नाम यशोधरा और इनकी पत्नी का नाम जसोदा । 


बोला- यह बात तो सच है । मोदी जी एक साथ ही चक्रवर्ती सम्राट है और एक फकीर भी । देखा नहीं, कैसे धर्म और विरासत की रक्षा के लिए भागे भागे फिर रहे हैं । अगर कुछ नहीं करेंगे तो हो सकता है ये मुसलमान, ईसाई और कांग्रेसी सोमनाथ के मंदिर को फिर तोड़ न डालें । इसलिए घूम घूमकर हिंदुत्व की विरासत की रक्षा करना बहुत जरूरी है । 


हमने कहा- ये सब झूठ और कुप्रचार है और दूसरों के हर कार्य का श्रेय लेने की कुटिल चालाकी है । मोदी जी के जन्म से पहले देश के गृहमंत्री कांग्रेसी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना को अंतिम रूप दिया था और 8 मई 1950 को काम की शुरूआत हो गई थी । जब मोदी जी एक साल के भी नहीं थे तक कांग्रेस के बड़े नेता राजेन्द्र बाबू इसकी प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे । 

 

अब या तो तू जाने या भजनलाल जी या फिर मोदी जी जानें कि वे किस विरासत की किससे रक्षा कर रहे हैं । 

 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

30-04-2026 ऑटो फेयर


30-04-2026 

ऑटो फेयर 



हमने पूछा- तोताराम, ऑटो फेयर के बारे में पढ़ा ? 




बोला- सीकर में किसी बधाई, फेयर और यात्रा की कोई औकात ही नहीं । अखबार में इसके अलावा और होता ही क्या है ? क्या देखना पढ़ना ? अब चूँकि अखबार एक वैसा ही कार्यक्रम हो गया है जैसे ‘मन की बात’ । जिनको पार्टी में अपने नंबर बढ़ाने हैं, जिन्हें अपनी कुर्सी पक्की करनी है वे सुनते हैं, बल्कि सुनने का नाटक करते हैं लेकिन अब किसी को इससे कोई मतलब नहीं ।रोज कोई न कोई कलश यात्रा निकलती है, कोई न कोई स्कूल इतिहास रचता है और उनसे विज्ञापन लेने वाले अखबार उस विज्ञापन को खबर बनाकर छपते हैं ।


ऐसे ही अखबारों में कोई जनहित या जन सरोकार का या सरकारों के भ्रष्टाचारों के समाचार छापने का साहस तो है नहीं सो ऐसे ही आलतू फालतू समाचारों से पन्ने भर देते हैं ।कभी कोई कलश यात्रा, कभी कोई शोभा यात्रा,कभी कोई लाल नीली, हरी पीली भगवा रैली । और कुछ नहीं तो किसी अखबार की तरफ से कोई न कोई फेयर । जिसमें किसी स्थानीय ग्राउंड को किराये पर लेकर दुकानें  लगवाना और धंधा करना । लोकतंत्र का चौथा पाया न हुआ दिल्ली का कोई न कोई मंगल, बुध बाजार हो गया । 


तो हो सकता है किसी अखबार ने ऑटो फेयर भी लगवा लिया हो । वैसे अपने सीकर शहर में ही चार हजार रजिस्टर्ड और एक दो हजार बिना रजिस्टर्ड ऑटो तो होंगे ही । 


हमने कहा- हम ऐसे किसी छोटे मोटे फेयर की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो चीन के बीजिंग में कोई चार लाख वर्ग मीटर में फैले ऑटो मतलब ऑटो रिक्शा नहीं, तरह तरह की एडवांस्ड कारों की प्रदर्शनी लगाई है । 



बोला- मैं उस टुच्चे, छोटी आँख वाला गणेश बनाने वाले देश की बात ही नहीं करना चाहता । अरे, एक संस्कारी विश्वविद्यालय के सीधे सादे बच्चों ने एक खिलौना कुत्ता खरीदकर क्या दिखा दिया, दुनिया में हमारा मज़ाक बनाने लगा । अरे भाई ये छोटी मोटी बातें चलती रहती हैं । मैंने तो बहुत पहले सुना था कि चीन दूसरे देशों से तरह तरह के यंत्र मँगवाता है और उन्हें खोल खालकर थोड़ा बहुत इधर उधर करके अपने नाम से कुछ नया बना लेता है । उसका हमसे क्या मुकाबला । इतने वर्गमीटर में तो हम किसी छोटे मोटे उत्सव में दस-बीस लाख दीये जलवा देते हैं ।इतना बाद कार्यक्रम तो हम दस बीस लोगों को सरकारी नौकरी देने का हल्ला-गुल्ला मचाने के लिए कर देते हैं ।  


हमने कहा- ये कारें दुनिया की सबसे एडवांस्ड कारें है । विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में चीन 2080 में चल रहा है । ये कारें बहुत से काम खुद ही कर लेती हैं । परिस्थिति के अनुसार निर्णय तक ले लेती हैं, फटाफट चार्ज हो जाती हैं, टायर फटने पर भी रुकने का काम नहीं, जरूरी हो तो उड़ भी लेंगी । 


बोला- बस ? ये सब विशेषताएं तो हमारे यहाँ के वाहनों में जाने कब से पाई जाती हैं । हमारे पुराणों में तो जाने कैसे कैसे अस्त्र शस्त्र हुए हैं जो अपना लक्ष्य बेधकर कर सकुशल अपने गैराज, स्टोर या तरकश में आ जाते थे । नो वेस्टिज । 


कारें तो जाने क्या, क्या करके कहाँ लुप्त हो जाती हैं । यहाँ तो एक सामान्य बुलडोज़र तक इतना समझदार होता है कि वह अपराधी का धर्म, जाति, वस्त्र आदि पहचान कर स्वविवेक से न्याय करके निर्णय भी कार्यान्वित कर देता है कि कहाँ, कब, किसका घर, कितना ढहाना है । जीपें भी निर्णय ले लेती हैं कि उसमें  बैठा व्यक्ति कौन है, कितना बड़ा अपराधी है और उसके अनुसार फैसला करके यथा समय, यथा स्थान पलट भी जाती हैं ।   



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

May 9, 2026

08-05-2026 सिलेंडर में चूहा



08-05-2026 


सिलेंडर में चूहा  




कल हमारे मेल पर एक मेसेज आया जिसका भावार्थ यह था कि आपका महंगाई भत्ता 58 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है जिसका एरियर मई की पेंशन के साथ आपके खाते में जमा हो जाएगा । 


आज जैसे ही तोताराम आया, हमने कहा- ले संभाल, कॉमर्शियल सिलेंडर में से निकला चूहा । 


बोला- क्या मतलब, सिलेंडर में चूहा ?  कभी कभी सिलेंडर में कुछ पानी या कभी एक आध किलो कम गैस की बात तो सुनी थी । कभी कभी रेगुलेटर पुराना होने पर कुछ लीकेज भी हो सकता है लेकिन गैस में चूहा ? इतनी जगह ही कहाँ होती है सिलेंडर में कि चूहा घुस जाए । 


हमने कहा- लोकतंत्र में चूहे ही सबसे शक्तिशाली होते हैं । वे कहीं भी घुस सकते हैं, कुछ भी खा सकते हैं । बिहार में कुछ समय पहले करोड़ों के गेहूं ही नहीं खा गए बल्कि बांध में घुस कर उसे ढहा दिया, थानों में पकड़कर रखी अवैध दारू पी गए । एक और राज्य में तो हेरोइन ही चट कर गए । और कभी किसी विशिष्ट सेवक के लिए घातक हो सकने वाली फ़ाइल भी कुतर जाते हैं । अब बस, एप्सटीन फ़ाइल में घुसने की फिराक में हैं चूहे । 


बोला- बात कॉमर्शियल सिलेंडर में चूहे की  बात हो रही थी । 


हमने कहा- वह ऐसे है कि हर साल दो  बार चार-चार परसेंट बढ़ने वाला डी ए इस बार दो परसेंट ही बढ़ा है । यह चूहा नहीं तो और क्या है ? घरेलू गैस के नहीं बढ़ाए तो क्या डी ए में खा गए ।   


बोला- अगर डी ए भी नहीं बढ़ाते और घरेलू गैस के भी बढ़ा देते तो क्या कर लेता ? अच्छा है ना, घरेलू पर तो नहीं बढ़ाए । दुकानदारों की दुकानदार जानें । 


हमने कहा- कॉमर्शियल में बढ़ाए उनका बोझ भी हम पर ही पड़ेगा । दुकानदार नमकीन और मिठाई के दाम बढ़ा देगा । कौन  अपनी जेब से लगाएगा ।   


बोला- मास्टर, अब 84 का होने जा रहा है । इतना मत सोचाकर । मानसिक शांति के लिए भौतिक बातों से ऊपर उठकर भी कुछ सोचा कर । महानायक अमिताभ के ‘कुछ मीठा हो जाए’ की तरह ‘कुछ आध्यात्मिक हो जाए’ । 


हमने कहा- जब भौतिक न्याय नहीं होता तो आध्यात्मिकता का कोई अर्थ नहीं । कृष्ण ने गीता में अर्जुन को अध्यात्म का पलायनवादी उपदेश नहीं दिया बल्कि कर्म की कठोर भूमि पर जमकर पैर टिकाने के लिए कहा था । अगर आध्यात्मिकता की बात है तो कुछ नेताओं को भी तो बता जो 65 के होने पर भी वानप्रस्थ में भी नहीं जाना चाहते । दशरथ को तो जब अपने कान के पास एक सफेद बाल दिखाई दिया तो उन्होंने वशिष्ठ जी को बुलाकर राम को राज देकर वन में जाने का विचार कर लिया था । लेकिन शाह साहब का तो पूरा खल्वाट निकल आया और जो दो चार बाल बचे हैं वे भी सफेद हो चुके हैं । लेकिन लगे हुए हैं देश का उद्धार करने में । ऐसे ही मोदी जी 75 के हो रहे हैं लेकिन सन्यास तो दूर वानप्रस्थ तक के बारे में कुछ सोचने से भी भागते हैं । कहने को खुद को फकीर कहते हैं । शास्त्र कहते हैं कि संत तो ब्रह्मचर्य आश्रम से सीधे सन्यास में प्रवेश करते हैं । उनके लिए गृहस्थ और वानप्रस्थ होते ही नहीं ।और मोदी जी हैं कि लौट लौट कर गृहस्थ में गिरे पड़ते हैं ।जबकि ‘जोरू न जाता, अल्ला मियाँ से नाता’  ।  


इन्हें दे अध्यात्म का उपदेश कि जाकर बरामदे में बैठे और अपने गुरु आडवाणी जी का हालचाल पूछें जिन्होंने इन्हें सिंहासन पर बैठाया है । 


हमारा क्या है ? हम तो आधी ज़िंदगी एक लुंगी और दो चाय पर काट रहे हैं । अगर तुझे ज्यादा लगता है तो इसमें भी कोई कटौती करें क्या ? 


बोला- मास्टर, तेरी कोई भी बात चल सकती है लेकिन नाता अल्ला मियाँ से नहीं चलेगा। अल्ला मियाँ से नाता हो गया तो हमारा फिर बचेगा ही क्या ? ईश्वर अल्ला तेरे नाम हो जाएगा । फिर किस मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे ? यह बात और है कि हम चुनाव जीतने के लिए बंगाल में भगवा पटका धारण करके मंगलवार को मांस-मछली खाते हुए वीडियो डाल देते हैं और हमारे उम्मीदवार ज़िंदा मछली हाथ में लटकाकर चुनाव प्रचार करते हैं ।   



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

May 8, 2026

07-05-2026 बरामदा मेट गाला मॉर्निंग


07-05-2026 


बरामदा मेट गाला मॉर्निंग 


 आज तोताराम एक अजीब सा लबादा और कमर पर एक गमछा बांधे प्रकट हुआ । इस गरमी में बड़ा विचित्र लगा । हमारा तो छह महिने का ‘मात्र लुंगी’ काल चल रहा है जैसे अंग्रेजी राज में वायसराय सर्दी में दिल्ली में रहते थे और गरमी में लवाज़में के साथ शिमला चले जाते थे ठीक वैसे ही । या फिर वैसे जैसे गरमियों में स्कूलों का समय बदल जाता है । 


हमने कहा- यह क्या तमाशा है । क्या अघोरियों का वेश बना रखा है । जनता को ऊटपटाँग हरकतों से प्रभावित करने वाले बाबाओं की तरह गरमी में पंचाग्नि तप का तमाशा कर रहा है । 


बोला- जब मोदी जी ने संसद में प्लास्टिक की बोतलों से बनी जैकेट का प्रदर्शन किया था तब तो कुछ नहीं बोला था तू । और तो और गोदीमीडिया उस पर विशेष कार्यक्रम करने लगा । और तोताराम कुछ प्रेरक और नया करे तो तमाशा ! 


हमने कहा- सही बात है सेठ कांच भी पहने तो हीरा और गरीब हीरा भी पहने तो कांच । ब्रांड अम्बेडसर बनना, प्रेरणा देना नहीं, कर्म करके दिखाना अधिक महत्वपूर्ण होता है । फिर भी तेरे इस गूदड़ का क्या विशेष अर्थ और संदेश है । 


बोला- तुझे पता है एक वार्षिक आयोजन होता है न्यूयार्क में ‘मेट गाला नाइट’ ? इसे फैशन की सबसे बड़ी रात माना जाता है । इसकी एक टिकट होती है 1 करोड़ रुपए की और अगर टेबल रिजर्व करवाओ तो साढ़े तीन करोड़ । इस बार इसमें कई भारतीय भी शामिल हुए थे जैसे ईशा अंबानी, करण जौहर, मनीष मल्होत्रा, सुधा रेड्डी आदि । सो मैंने सोचा अपने बरामदे में आम आदमी के लिए एक सस्ता ‘मेट गाला मॉर्निंग’ आयोजित कर लिया जाए तो बरामदे के लिए कुछ फंड इकट्ठा हो जाएगा । सो पिताजी के जमाने का एक कंबल और यह गमछा बांध कर आ गया ।

 

बहुत गर्मी लग रही है, कहते हुए तोताराम ने उस गूदड़ को बरामदे के एक कोने में पटक दिया ।  




हमने कहा- तोताराम, ये सब कुंठित धनवान लोगों के नाटक हैं । अन्यथा इन वस्त्रों की क्या कोई उपयोगिता है ?  शादी के लंबे गाउन या किसी लबादे का क्या अर्थ है । न तो उसे पहनकर कोई कुछ काम कर  सकता है, न ही उसे पहनकर कोई सोता है, न ही ऐसे वस्त्र आरामदायक होते हैं । 


बोला- तो फिर ये लोग इन पर इतना खर्च क्यों करते हैं, क्यों पहनते हैं ? 


हमने कहा- जब व्यक्ति के पास अपार धन आ जाता है और धन की सार्थकता का पता नहीं होता तो वह ऐसे ही करता है । शास्त्रों ने धन की तीन गतियाँ बताई हैं- 



"दानं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। 

यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति॥"

( धन की तीन गतियाँ हैं—दान, भोग और नाश। जो न देता है, न भोगता है, उसके धन की तीसरी गति—नाश—होती है)। 


भोग की भी एक सीमा होती है । अधिक भोग आपको क्षीण करता है । दान की कोई सीमा नहीं होती । वह जरूरी है । न दोगे तो भी तुम्हारे साथ जाने वाला नहीं है । इसलिए अच्छा है अपने हाथ से परोपकार कर जाओ । और परोपकार का भी भ्रम मत पालो क्योंकि तुम इसे अपने साथ लेकर नहीं आये थे । यह यहीं से, यहीं के लोगों के साथ, यहीं के लिए कमाया हुआ है । 


ज्ञानहीन धनवानों के साथ अनेक झूठे और स्वार्थी प्रशंसक चिपके रहते हैं और उन्हें ऐसे ही फालतू कामों में उलझाकर झूठी सार्थकता और यश का भरोसा दिलाते रहते हैं जबकि समाज के लिए कुछ न करने वाले ऐसे धनवानों के मरने जीने का कोई अर्थ नहीं होता ।




 


बोला- तो क्या ईशा अंबानी ने जो हीरे मोतियों की चोली पहनी है, या सुधा  रेड्डी ने 250 करोड़ का हार पहना है या करण जौहर ने गलीचा सा ओढ़ रखा है उसका कोई महत्व नहीं है । हो सकता है इन वस्त्रों में गर्मी सर्दी नहीं लगती हो, यह खाना अच्छी तरह से पचता हो, या कब्ज नहीं होती हो, या दाँत न सड़ते हों या बाल न झड़ते, सफेद होते हों । 


हमने कहा- अगर इनसे ऐसा कुछ होता तो फिर धनवान तो न बूढ़े होटे, न बीमार पड़ते और न मरते । अगर इन बातों में कोई दम होता तो क्या कभी बिरला, टाटा या अज़ीम प्रेम जी को ऐसे कार्यक्रमों में क्यों नहीं देखा  ? भारत में समाज सेवा के लिए सबसे अधिक दान देने वालों में टाटा का नंबर पहला है । 


याद रख, त्यागने से महावीर,बुद्ध, ईसा, गाँधी, नेहरू बड़े बने हैं ऐसे ऊटपटाँग कपड़े पहनने और वस्तुएं बटोरने से नहीं । यह दुनिया गांधी की दीवानी उनकी आधी धोती के कारण नहीं उनके त्याग और कर्मों के कारण है । लाखों का पेन और लाखों का चश्मा खरीद लेने से कोई शिक्षित, लेखक और बुद्धिजीवी नहीं बन जाता । 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach