Mar 16, 2026

2026-03-01 बोल, थैंक यू मोदी जी


2026-03-01 

बोल, थैंक यू मोदी जी 


आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया-  'बोल- थैंक यू मोदी जी' ।  वैसे ही जैसे आजकल के नए नए राम भक्त किसी भी मुसलमान को घेरकर कहते हैं- 'बोल, जय श्री राम' । 

हमने कहा- तोताराम, हम इतने मजबूर नहीं हैं कि 200 रुपए, नाश्ते का एक पैकेट और एक बीड़ी का बंडल/पाँच गुटके/ कोल्ड ड्रिंक लेकर किसी चुनावी रैली में जाएँ और 'मोदी-मोदी' चिल्लाएँ और न ही इतने डरपोक हैं कि किसी भी ऐरे-गैरे के कहने से किसी को धन्यवाद देने लगें । हाँ, किसी ने धन्यवाद के लायक कुछ किया हो तो हम इतने कृतघ्न भी नहीं हैं कि धन्यवाद न कहें । लेकिन मोदी जी ने हमारे लिए या देश के लिए कौनसा ऐसा काम किया है जिसके लिए 'थैंक यू मोदी जी' बोलें । 

बोला- सीधे सीधे तेरे लिए नहीं किया तो क्या देश के किसी भी भाग के लिए कुछ भी अच्छा किया है तो धन्यवाद तो बनता ही है । तेरे लिए नहीं, राजस्थान के लिए नहीं तो केरल के लिए तो किया ही है ना । केरल का नाम केरलम् करने को मंजूरी दे तो दी । 

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हमने पूछा- पहली बात तो यह कि इस प्रकार नाम बदलने से क्या होता है । मूर्ख को मूर्खम् , दुष्ट को दुष्टम्, मूत्र को मूत्रम् करने से क्या उनका चरित्र या अवगुणों में कोई कमी आ जाएगी ? 

बोला- अगर मोदी जी को तेरे इस जुमले का पता चल जाए तो वे शीघ्र ही केरल में होने वाले चुनाव में इसे मुद्दा बना सकते हैं कि कुछ कांग्रेसी केरल को दुष्ट और मूर्ख बता रहे हैं । वैसे ही जैसे राष्ट्रपति के बंगाल में अपमान की आड़ में ध्रुवीकरण करने लगे ।
 
हमने कहा- लेकिन यह भूल गए कि खुद की पार्टी ने राम मंदिर शिलापूजन,राम लला की प्राणप्रतिष्ठा और संसद भवन के उद्घाटन में दलित और आदिवासी राष्ट्रपतियों को उपेक्षित किया था । लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे । और फिर केरल के लोग पढ़े लिखे और समझदार हैं । वे महाराष्ट्र,  बिहार, दिल्ली वालों की तरह दो चार हजार में बिकने वाले नहीं है ।  

वैसे केरलं करने से कुछ होना हवाना नहीं फिर भी तुझे बता दें  कि यह प्रस्ताव 2024 का है जिसे आज चुनाव से ठीक पहले स्वीकार करके एक घटिया केरल-प्रेम का प्रदर्शन किया जा रहा है । केरल का सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, बौद्धिकता, काम करने की शिद्दत पूरे देश के लिए अनुकरणीय है लेकिन उससे कोई कुछ सीखना नहीं चाहता । 

खैर चल, आज तुझे इसी बात पर गिलासम् में चायम्  पिलाएंगे  । 

बोला- वही सड़ियल चाय । 

हमने कहा- तो बस, यह 'थैंक यू मोदी जी' भी वैसे ही है जैसे केरल का केरलं या पोर्टब्लेयर का श्री विजयपुरम हो जाना । अब भी श्री विजयपुरम अर्थात पोर्टब्लेयर से भेजी गई किताब उसी तरह 20 दिन में आती है जैसे 40-50 साल पहले आती थी । वे सोचते हैं श्रीविजयपुरम करने से तमिलनाडु के जागरूक नागरिक मूर्ख बन जाएंगे । वे काँवड़िए नहीं हैं । 
और जहाँ तक केरल की बात है तो केरलं दो शब्दों से बना है केरा और आलम अर्थात नारियल की भूमि और दूसरा  "चेर - स्थल", 'कीचड़' और "अलम-प्रदेश" शब्दों के योग से चेरलम बना था, जो बाद में केरल बन गया। केरल शब्द का एक और अर्थ है : - वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो। समुद्र और पर्वत के संगम स्थान को भी केरल कहा जाता है। 

बोला- जब कीचड़ है तो कमल भी खिलकर ही रहेगा । 

हमने कहा- हाँ, हाँ कमल खिलेगा लेकिन संप्रदायिकता, नस्ल, जाति, धर्म वाला कमल नहीं बल्कि इस कीचड़ से नितांत असंपकृत, अप्रभावित भारतीय माइ थोलॉजी का एक शानदार प्रतीक, एक अद्भुत मिथक- कमल  । खिलेगा क्या ? सौभाग्य से आज भी खिला हुआ है और खिला रहेगा । यही तो हमारे संविधान की आत्मा है । सद्भाव । 

-रमेश जोशी  

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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Mar 15, 2026

2026-03-15 आपदा में अवसर


2026-03-15 
आपदा में अवसर 








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आज तोताराम अपेक्षाकृत जल्दी आ गया । 

हमने कहा- तोताराम, ठीक है मुफ़्त के माल पर बड़े बड़े संत भी पिल पड़ते हैं लेकिन बाद में भुगतना तो खुद को ही पड़ता है । अन्य दिनों की बजाय आदमी दीर्घ शंका के लिए जल्दी जाना पड़ता है । कहाँ भागी जा रही थी तेरी चाय । 

बोला- मास्टर, चाय की बात नहीं है । एक अच्छी खबर है । आपदा में अवसर ।

हमने कहा- आपदा में अवसर व्यापारियों के लिए होते हैं । वे अपने पास पड़े पुराने स्टॉक की कालाबाजारी करने लग जाते हैं । अभी इजराइल वाले लफड़े में देख ले । आपदा का फायदा उठाकर बिकने लगा कि नहीं सिलेंडर तीन तीन हजार में । अदानी ने भी अपनी गैस के दाम बढ़ा दिए कि नहीं । और मोदी जी ने भी प्रति सिलेंडर 60 रुपये बढ़ा ही दिए । 

बोला- मोदी जी कोई व्यापारी थोड़े हैं । वे तो सब कुछ राष्ट्रहित में करते हैं । यहाँ तक कि दिन में दस-दस ड्रेसें बदलना भी वे भी भारत की गरीब राष्ट्र की इमेज सुधारने के लिए करते हैं अन्यथा वे तो संत हैं । उनके लिए तो एक चीवर ही पर्याप्त है । देखा नहीं था केदारनाथ की गुफा में और गंगा में स्नान करते हुए मात्र एक भगवा वस्त्र में । 

हमने कहा- देख लेना जब अमेरिका इज्जत बचाने के लिए ईरान से खिसक लेना तब भी मोदी जी 60 रुपये की यह वृद्धि वापिस नहीं लेंगे । जी एस टी उत्सव की तरह दस रुपये घटाकर फिर कोई बचत उत्सव जरूर मना लेंगे ।  

बोला- छोड़, ये सब बड़े लोगों की बातें हैं । मैं तो अपने लिए आपदा में अवसर की बात कर रहा था । 

हमने कहा- हमारे लिए तो आपदाएं ही होती हैं । अवसर तो व्यापारियों और नेताओं के लिए होते हैं । राम मंदिर को ही देख ले ।राम मंदिर और विकास के नाम पर लोगों की ज़मीनें कब्जा लीं और दुकाने उजाड़ दीं और बड़े व्यापारियों को होटलों के लिए दे दीं । नेताओं को राम के नाम पर गद्दी मिल गई और गुजरात के व्यापारियों को धंधा । दोनों की बंदरबाँट । और भगवान और सच्चे भक्तों को क्या मिला ? मिलावटी प्रसाद । ये तो प्रभु कुछ खाते नहीं हैं अन्यथा अब तक पेट स्थायी रूप से खराब हो गया होता ।

बोला- अपने मन की बात छोड़ और काम की बात सुन । अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि ईरान के दस लोगों के बारे में खबर देने वाले को दस मिलियन डालर का इनाम दिया जाएगा । अब हम लोगों को गैस के सिलेंडर का चक्कर छोड़कर ईरान के अमेरिका के लिए वांटेड लोगों का पता लगाना चाहिए । वैसे भी मोदी जी ने कह दिया है कि गैस की कोई समस्या नहीं है । और कुछ कमी हुई तो नाले से निकाल लेंगे । 

हमने कहा- हमें जब बैंक का क्लर्क सीट पर नहीं मिलता तो यह तक तो पता लगा नहीं सकते कि वह छुट्टी पर है या इधर उधर चाय या पूजा के बहाने मटरगश्ती कर रहा है । मोदी जी तक का तो पता नहीं लगा सकते कि मणिपुर और संसद की महत्वपूर्ण कार्यवाही छोड़कर इजराइल गए हैं या किसी गुफा में ध्यान लगा रहे हैं या चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ईरान के नेताओं का पता लगा लेंगे । अंधभक्तों की तरह दुनिया के नक्शे में ईरान ढूँढ़ने में चार दिन लग जाएंगे । यह  कोई मस्जिद में नीचे मंदिर ढूँढ़ने जितना आसान थोड़े है । 

बोला- जैसे मोदी जी कपड़े देखकर आतंकवादियों को पहचान लेते हैं तो अपन भी किसी काली पगड़ी वाले का पता दे देंगे या ट्रम्प से उन दस लोगों का कोई अंतःवस्त्र या दाढ़ी का बाल मँगवा लेंगे और उससे कोई टोना टोटका या मारण मंत्र का जाप कर देंगे तो वहीं का वहीं मर जाएगा । अपने सतातन में तो ऐसे बहुत मिसाइलों का ज्ञान भरा पड़ा है । पहले भी तो हमारे यहाँ के भक्तों ने यज्ञ करके ट्रम्प को चुनाव जिताया था कि नहीं ? और कुछ नहीं तो इस बहाने कुछ एडवांस ही ट्रम्प से कबाड़ लेंगे । काम नहीं हुआ तो वापिस कर देंगे । 

हमने कहा- तू ट्रम्प को इतना भोला समझता है क्या ? वह कोई गांधी नेहरू की तरह भला आदमी नहीं है । उसका इतिहास सुनेगा तो तेरी तेरी अकल ठिकाने आ जाएगी । वह नेता नहीं प्रॉपर्टी डीलर है । उसे अपनी राजनीति के थ्रू अपने बेटे को दुनिया में बिजनेस दिलवाना है । मोदी जी खुद को बड़ा चतुर समझते थे । उनसे ही अमेरिका में अपने लिए चुनाव प्रचार करवा लिया और अब उन्हीं को बर्फ में लगा दिया कि नहीं ? पता नहीं, किस किस फ़ाइल के चक्कर में ऐसा फँसा दिया कि अब थूक सूख रहा है, जुबान नहीं खुल रही है । रूस से अच्छी भली दोस्ती थी, सस्ता तेल मिल रहा था । ईरान से रुपये में डील हो रही थी । सब गड़बड़ करवा दिया । अब खरीदो महंगा तेल और पिटवाओ दुनिया में भद्द । 

बोला- फिर भी किसी न किसी तरह यह खबर उड़वा दें कि तोताराम और मास्टर ने ईरान के दस लोगों की अमेरिका को खबर देने का ठेका लिया तो कम से कम एक बार चर्चा तो वाइरल हो जाएगी । निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर की तरह चर्चित तो हो जाएंगे । 

हमने कहा- ये फालतू बातें छोड़ । चाय पीकर गैस एजेंसी का एक चक्कर लगा आते हैं । क्या पता बुकिंग हो ही जाए । 

बोला- आज संडे है । कल सोचेंगे । अब तो निश्चिंत होकर चाय पर बकवास करते हैं । और 2047 तक भारत को विकसित बनाने का ड्राफ्ट तैयार करते हैं । 

हमने कहा- कोई बात नहीं  । वैसे यह काम मोदी जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कर दिया था । अब तो बस इंतजार कर उस दिन का अगर प्रभु तब तक जिंदा रखे तो । मोदी जी की बात और है वे तो ...... । 

-रमेश जोशी 
 

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Mar 13, 2026

2026-03-13 गटर-ज्ञान का मोदी-मंत्रा


2026-03-13 

गटर-ज्ञान का मोदी-मंत्रा 

आज सवेरे सवेरे तोताराम नहीं आया । कोई दस बजे उसका फोन आया । बोला- मास्टर, कहे तो खाना बनाने का सामान लेकर हम दोनों आ जाएँ ? खाना बनेगा तब तक गैस के लिए एक और कोशिश कर आएंगे । 

हमने कहा- तोताराम, आज तूने बहुत घटिया बात कर दी । नहीं हैं हम अंबानी की तरह अमेरिका में रिफाइनरी लगाने के लिए 300 अरब डॉलर की औकात वाले लेकिन इतने गए गुजरे भी नहीं कि तुम दोनों की चार रोटी के लिए पाव चून न जुटे । नेहरू के जमाने के मास्टर हैं । पेंशन मिल रही है । मोदी जी के जमाने में लगे होते तो बात और थी । पेंशन क्या पूरी तनख्वाह के लाले पड़ जाते । 

तोताराम और मैना दोनों आ गए । पत्नी और मैना रसोई में खाना बनाने और अर्थव्यवस्था से लेकर विदेश नीति तक पर अपने हिसाब से भारत का डंका बजाने लगीं । 

अवसर का लाभ उठाते हुए हमने तोताराम से राष्ट्रहित में चर्चा की शुरुआत की । पूछा- तोताराम, इजराइल और ट्रम्प की इस खुराफाती आपदा में क्या हम कोई अवसर खोज सकते हैं ? क्या इस ऊर्जा संकट में हम अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक ज्ञान में से कुछ सामयिक उपाय खोज निकाल सकते हैं ?

बोला- हाँ, मास्टर कोशिश तो करनी ही चाहिए । वैसे ये योरप के ईसाई वेदों में से सारा ज्ञान निकाल कर ले गए । 

हमने कहा- फिर भी कुछ न कुछ बचा हो तो खुरचकर खुरचाकर देखना तो चाहिए । 

बोला- हाँ, कोशिश हो तो रही है देश के विभिन्न आईआई टी में । की जा रही है गोबर और गोमूत्र से अक्षय ऊर्जा स्रोत ढूँढ़ने की कोशिशें । 

हमने कहा- वैसे इस समय गाँधी जी के सत्य के प्रयोग की तरह मोदी जी के गटर-गैस-ज्ञान के प्रयोग करने में क्या बुराई है । 





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बोला- बुराई तो कुछ नहीं है लेकिन आजकल इन विपक्षियों और यूट्यूब वालों के पास मोदी जी के नाली में पाइप डालकर चाय बनाने वाले बयान का मजाक उड़ाने के अलावा और कोई कार्यक्रम है ही नहीं ।
 
हमने कहा- तोताराम, शुरू शुरू में नया सोचने और करने वाले प्रतिभाशाली लोगों का मज़ाक उड़ाया ही जाता है लेकिन मोदी जी के इस ज्ञान में नितांत झूठ भी तो नहीं । 

बोला- और क्या ? जेम्स वाट ने चाय की भाप से उछलते हुए ढक्कन को देखकर भाप का इंजन बना दिया, न्यूटन ने पेड़ से गिरते सेव को देखकर गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत खोज लिया । मोदी जी भी जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति है ।स्टेशन पर चाय बेचते, 35 साल भीख माँगते और अपने  ज्योतिष ज्ञान से ट्रेन की भीड़भाड़ में सीट कबाड़ लेने वाले मोदी जी के पास लौकिक ज्ञान का अपार भंडार है । यह ठीक है कि उनकी डिग्री संदेहास्पद है लेकिन वाल्मीकि के पास कौन सी डिग्री थी । एकलव्य ने भी अपने स्वानुभाव और लगन से क्या धनुर्विद्या नहीं सीख ली थी ? वे झोला उठाकर चल दें उससे पहले देश को उनके ज्ञान का लाभ उठा लेना चाहिए । नहीं तो यह ज्ञान उनके साथ ही चला जाएगा । 

और फिर हमारे विद्वान लोग तो कहते आये हैं-

उत्तम विद्या लीजिए जदपि नीच पे होय 
पर्यो अपावन ठौर में कंचन तजे न कोय ।।  

हमने कहा- वैसे नाली की गैस लेकर चाय बनाने की बात कोई निराधार नहीं है । जीवों से निकलने वाले मल, मूत्र, डकार, पाद आदि में ज्वलनशील मिथेन गैस होती है । उसका कैसे उपयोग किया जाए यही तो प्रश्न है । वैज्ञानिकों का यही तो काम है कि किसी भी अवधारणा पर काम करें । हमें याद है जब हम 1985 से 2001 तक दिल्ली में थे तब लाजपतनगर में गटर से कुकिंग गैस बनाने के प्लांट की बात चली थी । गोबर गैस प्लांट क्या झूठ हैं ? 
और फिर मोदी जी तो नीच भी नहीं है । महान ज्ञानी, विनम्र, संकोची, और संत स्वभाव वाले व्यक्ति हैं । उनसे ज्ञान लेने में क्या बुराई है ? ट्रम्प के शांति प्रयासों का लाभ क्या हमने ऑपरेशन सिंदूर में नहीं उठाया ? और क्या अब हम इज़राइल और ट्रम्प से साथ मिलकर विश्वशान्ति के लिए काम नहीं कर रहे ?

बोला- वैसे मास्टर, जमुना में दुनिया भर का कूड़ा भरा है, गाजीपुर में दुनिया के सबसे बड़े कूड़े के पहाड़ खड़े हैं । इस संकट के समय में क्या उसे जलाकर खाना नहीं बनाया जा सकता ? 
लेकिन विघ्नसंतोषी लोग पर्यावरण के नाम से फिर मोदी जी को घेरने लगेंगे । 

हमने कहा- तोताराम, ये प्रदूषण वगैरह भी भरे पेट वालों के शगूफ़े हैं । प्रदूषण से कहाँ तक बचोगे ? अरे, दुनिया में हर समय जाने क्या क्या जलता रहता है ? और नहीं तो लोग मोदी जी के दुनिया में बजते डंके से ही जले जा रहे हैं । अरे, जब संसद में विधूड़ी के कटुवे, भड़ुए, मुल्ले और आतंकवादी से प्रदूषण नहीं फैला तो गाजीपुर का कूड़ा जलाने के क्या हो जाएगा । अच्छा है ऊर्जा की ऊर्जा और सफाई की सफाई । 

बोला- विधूड़ी का स्टेटमेंट तो प्रदूषण नहीं बल्कि सनातन का सार और हिन्दू राष्ट्र का जयघोष था । 

-रमेश जोशी 


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2026-03-12 क्षमा वीरस्य भूषणम्


2026-03-12 

क्षमा वीरस्य भूषणम् 

आज सुबह तोताराम नहीं आया । नहीं आया तो क्या हुआ ? यह कोई मोदी जी के 'मन की बात' तो है नहीं जिसके महिने में एक बार न होने से महिना पूरा नहीं होगा, पेंशन नहीं मिलेगी या पानी-बिजली का बिल नहीं आएगा । सो तोताराम के बिना भी हमारे सभी काम यथावत पूरे हुए । रात को आठ बजे जैसे ही सोने के लिए लेटे तो दूर जयपुर रोड़ से घड़घड की आवाज आने लगी । और शनैः शनैः तेज होने लगी । यह कर्ण कटु ध्वनि अगर जल्दी से नजदीक आकर गुजर जाती तो पीछा छूटता लेकिन नहीं । यह तो हिन्दुत्व के रक्षक प्रचंड भक्तों के डी जे की तरह पीछा ही नहीं छोड़ रही थी । लग रहा था कि यह ध्वनि सीधे सीधे नजदीक नहीं आ रही थी बल्कि टेढ़ी-मेढ़ी चलकर आ रही थी । कुछ देर बाद स्थिति साफ हुई कि कोई सड़क पर गैस का सिलेंडर लुढ़काता ला रहा है ।और लुढ़काने वाला सिलेंडर को सीधा नहीं लुढ़का पा रहा है । 

जब परेशान हो गए तो सोचा कि बाहर निकल कर इस व्यक्ति की सिलेंडर लुढ़काने में कुछ सहायता कर दें जिससे यह गुजर जाए तो हम भी सोएं । बाहर निकले तो देखा कि तोताराम सिलेंडर लुढ़काता ला रहा है । 

यह कौनसा समय है सिलेंडर लाने का ? 

पूछा- इस समय कौन सी गैस एजेंसी खुलती है ? और फिर तुझे क्या जरूरत थी एजेंसी से घर तक सिलेंडर लाने की ? अब सिलेंडर हमारे यहाँ रख दे । चाय-वाय और चर्चा कुछ नहीं; सीधे घर जा । सुबह इसे तेरे घर तक पहुँचाने की कोई व्यवस्था करेंगे ।  मोदी जी के राज में सब कुछ सुव्यवस्थित चल तो रहा है ।

बोला- आज दोपहर में खत्म हो गया था । फोन किया तो एजेंसी वाले ने उठाया नहीं । ऑनलाइन बुक करवाया तो पता चला कि सर्वर डाउन है । तो सोचा कि ईरान इजराइल के झगड़े में क्या पता क्या चक्कर पड़ जाए । सोचा खुद ही ले आऊँ लेकिन लाइन में लगे-लगे रात हो गई मगर काम नहीं हुआ । 

हमने कहा- सरकार के तो वक्तव्य आ रहे हैं कि कोई समस्या नहीं है तो फिर यह क्या है ?

बोला- सच बताऊँ मास्टर, सारे राष्ट्र प्रेम, हिन्दुत्व और मोदी भक्ति के बावजूद अब लगने लगा है कि काम मोदी जी के बस का है नहीं ।हर खाते में 15-15 लाख, हर साल दो करोड़ नौकरियां, नोट बंदी, कोरोना, तालाबंदी, जी एस टी, ऑपरेशन सिंदूर सब में पोल खुलती गई । अब तो इनकी हालत वह हो गई है जैसे किसी ने भेड़ के कान पर जूती रख दी हो । एक दम मीनकुमारी की तरह 'मैं चुप रहूँगी' । 




हमने कहा- अभी तो तू कुछ कोयले पड़े हैं वे ले जा । कल तू और मैना दोनों हमारे यहाँ खाना खा लेना । फिर देखते हैं । हो सकता है मोदी जी यूक्रेन और रूस के वार के समय की तरह  'पापा, मोदी जी ने वार रुकवा दी' जैसा कोई चमत्कार कर दें । 

बोला- ये सब मीडिया का हैड लाइन मनेजमेंट है और कुछ नहीं । अगर कुछ दम होता तो जब ट्रम्प ने 80 बार कहा कि मैंने सीजफायर करवाया तब कुछ बोलते या खामेनाई की हत्या के बाद या वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अपहरण पर कुछ बोलते लेकिन कुछ नहीं बोले । जुबान तालू से चिपक गई । अब तो जब ट्रम्प को झख मारकर वियतनाम की तरह ईरान से भागना पड़ेगा तभी कुछ रास्ता निकलेगा । 

हमने कहा- हमें तो तब भी कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि वह एपस्टीन फ़ाइल वाला भी कोई न कोई गहरा झंझट फँसा हुआ लगता है । रूस से अपने स्तर पर सस्ता तेल तक नहीं खरीद पा रहे हैं । उसके लिए भी ट्रम्प की परमीशन चाहिए । गजब दुर्गति, बेइज्जती और जग हँसाई हो रही है देश की ।अब तो इन्हें चाहिए कि हिम्मत करके देश को सारा सच बता दें । माफी माँग लें । सच बोलने से सब पाप धुल जाते हैं और इस देश की जनता बहुत दयालु है । माफ भी कर देगी और साथ भी देगी लेकिन कोई सच बोलने और माफी मांगने का साहस दिखाए तो सही । 

बोला- मास्टर, क्षमा माँगना और क्षमा करना दोनों ही वीरता के काम हैं । तभी कहा है- क्षमा वीरस्य भूषणम् । 

-रमेश जोशी 

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