May 30, 2026

29-05-2026 मास्टर, यू आर ग्रेट



29-05-2026 


मास्टर,  यू आर ग्रेट 



आज तोताराम ने आते ही मोदी जी के तेल का कम उपयोग करने की सलाह और अपील के बावजूद तेल का पूरा का पूरा टिन ही बरामदे में फैला दिया, बोला- मास्टर, यू आर ग्रेट ।

 

हम फिसलते फिसलते बचे । बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए बैठे रहे और कहा- यह कैसा षड्यन्त्र है ? हम कोई ग्रेट नहीं हैं । ग्रेट होना कोई मजाक है ? जो चाहे जिसे चाहे जब चाहे ग्रेट कह देता है । भारत में इतिहास में दो ही ग्रेट हुए हैं एक अशोक और दूसरा अकबर । वे भी दोनों एक साथ नहीं हुए । दोनों में 15-16 सौ साल का अंतर है । 


बोला- नहीं, ऐसी बात नहीं है । अब एक साथ दो दो ग्रेट सारी दुनिया देख रही है कि नहीं । एक अमेरिका में ट्रम्प और दूसरे भारत में मोदी जी । वे वहाँ अमेरिका को ग्रेट बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़े हुए हैं । जनता घबराई हुई है । पता नहीं, अब और कितना ग्रेट बनाएगा । दम फूला जा रहा है । ऐसे ही यहाँ मोदी जी 20-20 घंटे बिना आराम किए भारत को ग्रेट बनाने में भिड़े हुए हैं । चिंतित तो यहाँ की जनता भी बहुत है ग्रेटनेस से लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है ।


हमने कहा- तोताराम, हमें तो लगता है कि अब इस देश दुनिया में सामान्य लोग तो पैदा होने ही बंद हो गए हैं ।  

जो भी पैदा होता है ग्रेट से कम होता ही नहीं है ।बंगाल में सुवेन्दु अधिकारी को देख ले, उत्तराखंड में धामी को देख ले, असम में हिमन्त बिस्वा को देख ले कोई कहीं से सामान्य नजर आता है ? लेकिन हम न तो ग्रेट हैं और न ही ग्रेट बनना चाहते हैं और न ही कोई हमें ग्रेट कहकर उल्लू बना सकता है ।  


बोला- फिर भी मास्टर, इतने दिन से तू मुझे निभा रहा क्या यह ग्रेटनेस नहीं है ? 


तोताराम के इस वाक्य ने हमें गहरे तक छू लिया । हमने कहा- तोताराम, तुम्हें क्या निभाना ? तू तो एक प्रकार हमारा ही दूसरा पहलू है । अरे,  एक चाय का ही तो खर्चा है । सोच, कौन किसके यहाँ ऐसे नियमित रूप से आता है । हम तेरे बिना सुबह की कल्पना भी नहीं कर सकते । 


बोला- फिर भी मास्टर, एक बात तो माननी पड़ेगी । भारत में अनेक प्रधानमंत्री हुए हैं लेकिन किसी को अमेरिका के किसी राष्ट्रपति ने ‘यू आर ग्रेट’ लिखकर नहीं दिया । ऐसा कहते हुए तोताराम ने अपने फोन में से हमारे सामने एक बड़ा फ़ोटो कर दिया जिसमें अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियों गोर मोदी जी को एक फ़ोटो भेंट कर रहे हैं जिसमें मोदी जी और ट्रम्प दिखाई दे रहे हैं और जिस पर ट्रम्प ने अपनी लिखावट में हस्ताक्षर सहित लिखा हुआ है- मिस्टर प्राइम मिनिस्टर यू आर ग्रेट ।






हमने कहा- तोताराम, यह ग्रेटनेस बहुत महँगी पड़ रही है । इसके बदले में भारत को अगले पाँच साल में अमेरिका से 500 अरब डालर अर्थात 42 लाख करोड़ का सामना खरीदना पड़ेगा । भारत पर इतना विदेशी कर्ज तो मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से पहले शुरू के 66 वर्षों में भी नहीं हुआ था ।

बोला- फिर भी क्या यह कम गर्व की बात है कि अकबर के 500 सालों बाद इस देश को एक ग्रेट मिला है । ऐसे देखें तो एक साल का एक अरब डॉलर ही तो हुआ । इस देश की जनता में ‘इस सीमेंट’ की तरह ‘बहुत जान है’ । 


हमने कहा- ट्रम्प बहुत अविश्वसनीय व्यक्ति है । वह एक बार पकड़ लेने पर किसी का पीछा नहीं छोड़ता । ईरान शांति वार्ता को ही देख ले ।  कितने दिन से नाटक पर नाटक किए जा रहा है । फिर कुछ दिन  बाद कह देगा कि मैं जब चाहूँ मोदी का कैरियर खत्म कर सकता हूँ । 


हमारा तो कहना है कि मोदी जी ग्रेटनेस का चक्कर छोड़ें और अगर कोई कमजोर नस दबी हुई है तो भी हिम्मत करके सब कुछ साफ कर देना चाहिए । नहीं तो यह आदमी ब्लेकमेल कर करके मोदी जी की सारी ज़िंदगी नरक बना देगा । 


बोला- मास्टर, इस बारे में तो मैं क्या कह सकता हूँ । इस बारे में तो कोई चाणक्य ही कुछ कह और कर सकता है । 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

30-05-2026 ले पानी पी


30-05-2026 


ले पानी पी 




जैसे ही तोताराम आया हमने उसकी जलसेवा करते हुए कहा- ले, पानी पी । 


तोताराम ने भी बड़ी शालीनता से गिलास थामा और धन्यवाद दिया । 


चाय आने में दस-पंद्रह मिनट लगने की संभावना थी सो पाँच मिनट बाद ही हमने फिर उसके गिलास में पानी डालते हुए कहा- ले, थोड़ा और पी ले ।


तोताराम ने दो घूंट लेकर गिलास अलग रख दिया । 


पाँच मिनट और बीते । कुल दस मिनट हो गए लेकिन चाय अभी नहीं आई । आ जाएगी, यह कौन सी मन की बात है जिसके बिना राष्ट्र की हृदय गति रुक जाएगी । हमने फिर पूछ लिया- पानी और दें ?


अब तो तोताराम फट पड़ा । वास्तव में कुचरणी बहुत बुरी चीज होती है । अगर मंदिर के चबूतरे पर बैठे पंडित जी को दस मिनट में पचास लोगों के  ‘पंडित जी, राम राम’  का जवाब देना पड़ जाए तो पंडित जी गाली निकालते हुए उनके पीछे भागने लगेंगे । कोई भी चीज हो, अति बहुत बुरी होती है । तभी कहा गया है-


अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।



बोला- मुझे पकड़कर टंकी में पटक दे जो रोज रोज का चाय का झंझट खत्म ।ईंधन, दूध और चाय पत्ती सबका खर्च बच जाएगा । देश की डांवाडोल अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी । पानी पिला रहा है या मेरे प्राण लेना चाहता है । ठीक है कुछ नहीं तो पानी से भी अभ्यागत का स्वागत किया जाता है । लेकिन यह क्या ? पाँच मिनट में तीसरी बार पानी । लगता है राजस्थान में भजन कीर्तन मंडली और मोदी जी के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘वंदे गंगा अभियान’ के तहत कल कुछ ज्यादा की पानी आ गया लगता है ?


हमने कहा- ऐसी बात नहीं है । परसों दिन में बिजली कटौती होने के कारण पानी नहीं आया और कल अज्ञात कारणों से बमुश्किल चार बाल्टी पानी आया । वैसे ही टंकी में पानी पेंदे से जा लगा है । लगता है कल तो एक टैंकर डलवाना ही पड़ेगा । पिछले महिने तो साढ़े तीन सौ लिए थे । अब जब से ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल लेने से मना किया तो हो सकता है चार सौ माँग ले । 


बोला- जब पानी की इतनी तंगी है तो मुझे बार बार क्यों पानी पिलाए जा रहा है । ट्रम्प से आदेशों के तहत मोदी जी ही बहुत हैं देश को पानी पिलाने के लिए ।  







हमने कहा- हमने भी अब अपने दिमाग को ताला लगाकर चाबी उस गंगा मैया में फेंक दी है । बस, अब कोई कष्ट नहीं । जो जो मोदी जी कहते हैं करते चले जाते हैं । दो दिन पहले उन्होंने मंत्रीमण्डल की बैठक में एक बहुत बड़ी ज्ञान की बात कही है कि गरमी के दुष्प्रभावों और लू से बचने के लिए बार बार पानी पियें । और मीडिया ने भी जनहित में यह समाचार बड़े उत्साह से देश में पहुंचाया दिया है । मोदी जी ने तो बच्चों तक को यह समझाया है कि अपने माता-पिता, नाना-नानी, दादा-दादी आदि को गरमी में बार बार पानी पीने के लिए याद दिलाते रहे । पहले तो पोते-पोतियाँ यदा-कदा फोन किया करते थे लेकिन अब दो दिन से  पोते-पोतियों के फोन आ रहे हैं कि बाबा पानी पीते रहना । सो हमने भी तेरा खयाल रखते हुए पानी के लिए पूछ लिया तो क्या गुनाह कर दिया । शुक्र मना कि मोदी जी हैं नहीं तो क्या कभी नेहरू जी, शास्त्रीजी या इंदिरा जी आदि ने फोन करके कहा था कि मास्टरों गरमी बहुत पड़ रही है पानी पीते रहना । 


बोला- मोदी जी का कोई व्यक्तिगत परिवार न होने का यही तो फायदा है कि 140 करोड़ ही क्या, पूरा संसार की उनका परिवार है । 


हमने कहा- हाँ, लेकिन कांग्रेस और मुसलमानों को छोड़कर ।

 

बोला- ऐसी बात नहीं है, देखा नहीं अभी अभी जब विदेश दौरे पर गए थे तो कैसे यू ए ई वाले की तरफ पेंगविन की तरह हाथ फैलाकर बढ़ रहे थे । लेकिन यह पानी वाली बात तो उन्होंने तेरे मेरे लिए नहीं बल्कि अपनी नेक सलाह को मानकर ऊर्जा और ईधन की बचत करने वाले सम्राट चौधरी जैसे देश के सच्चे सेवकों के लिए कही है । तुझे पता है सम्राट, जो चाहें तो धरती पर पैर न रखें लेकिन मोदी जी के आह्वान पर अपने घर से 400 मीटर दूर कार्यालय तक पैदल गए हैं । सोच कितनी धूप झेली होगी और कितनी ऊर्जा खर्च हुई होगी । मेरा क्या है यहीं दो कदम पर तो हूँ ।सच्चे भक्तों को बीच बीच में पानी पीते रहना बहुत जरूरी है । 


वैसे कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि भक्त लोग मोदी जी के कहने से ज्यादा पानी पीने लगे हों इसीलिए तेरे यहाँ कम पानी आ रहा हो । 



हमने कहा- तोताराम, कुछ भी मोदी जी की बात का प्रभाव तो होता है । अभी अपने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय सीकर के कुलगुरु रोज अपने घर से 100 मीटर दूर अपने कार्यालय पैदल जाएंगे ।अखबार में सचित्र समाचार आया है । अब सोच पेट्रोल की कितनी बचत हुई होगी । ऐसे ही थोड़ी कर पा रहे हैं मोदी जी ऊर्जा संकट का मुकाबला ? बड़े बड़े त्यागी पड़े हैं देश में । सब तेरी हमारी तरह आरामतलब और स्वार्थी थोड़े हैं ।



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

May 27, 2026

27-05-2026 मुसलमानों को क्या हो गया ?


27-05-2026 



मुसलमानों को क्या हो गया  ? 










आज तोताराम बड़ा बेचैन था, बोला- यह मुसलमानों को क्या हो गया ?


हमने कहा- क्या हो गया ? पढ़ें तो यूपीएससी जिहाद, किसी हिन्दू लड़की से प्यार हो जाए तो लव जिहाद, किसी मेडिकल कॉलेज में सलेक्ट हो जाएँ तो मेडिकल जिहाद, क्रिकेट में कोई कमाल दिखा दें तो क्रिकेट जिहाद, कहीं किसी सोसाइटी में प्लॉट-मकान खरीद  लें तो लैंड जिहाद । हालाँकि अनुपात में पिछले कई दशकों से कोई अंतर नहीं आया है फिर भी जनसंख्या जिहाद । भाजपा ने सबका साथ सबका विकास के तहत एक भी मुसलमान को पंच से प्रधान तक कोई भी टिकट न देकर किसी तरह ‘लोकतंत्र जिहाद’ को रोका हुआ है । अब तो रोटी-पानी और साँस लेने वाला जिहाद ही बाकी बचा है । फिर भी अब कौनसा देशद्रोह, भावना आहत करने वाला नया कांड कर दिया क्या ?


बोला- मास्टर, लगता है इनको देश का विभाजन करवाने वाला वह गाँधी, जिसे देशभक्तों ने कोई आठ दशक पहले ही निबटा दिया था, वैचारिक रूप से इन्हें बहका रहा है । सुना ! अब कह रहे हैं हम न तो गाय को काटेंगे और न ही गाय का मांस खाएंगे । अब यह भी कोई बात हुई ? और अब तो इनका एक धर्मिक नेता कह रहा है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे । 


हमने कहा- यह तो अच्छी बात है । बाबर ने भी हिन्दू भावनाओं को देखते हुए गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था । 


बोला- अगर ये गाय नहीं काटेंगे तो फिर जो निठल्ले गौ रक्षक हफ्ता वसूली करते घूम रहे हैं उनका काम कैसे चलेगा । हो सकता है अब वे सरकार से काम, नौकरी माँगने लग जाएंगे । बंगाल में बहुत से हिन्दू पशुपालक अच्छी कमाई करने के लिए बहुत सी गाएं ईद पर बेचने के लिए आये तो मुसलमानों ने कह दिया कि वे न तो गाय काटेंगे और न ही खाएंगे । अब वे हिन्दू गौपालक घोषाल क्या करें । रोजाना एक जानवर पर खाने का चार-पाँच सौ रुपया खर्च हो रहा है । कमाई गई सो अलग ।  


हमने कहा- लेकिन हमें तो खुश होना चाहिए कि मुसलमानों ने हिंदुओं की भावनाओं का खयाल रखना शुरू कर दिया है । अच्छा है गौहत्या न होगी तो सत्य सनातन सतयुग लौट आएगा । राष्ट्रवादी हिन्दू गौ भक्तों का गौशाला उद्योग और विकसित होगा । 


बोला- गौ शाला उद्योग गायों से नहीं, कागजों पर गाएं दिखाकर सरकारी अनुदान पेलने से विकसित होता है । और अब एक बहुत बड़ा मुद्दा जिसके तहत अनेक छुटभय्ये नेता नेतागीरी करते घूमते फिर रहे हैं अचानक मुद्दाविहीन हो जाएंगे ।  कल को ये लोग  हिन्दू मालिकों के बड़े बड़े बूचड़खानों में गाएं काटने का काम बंद कर देंगे  ? तो हिन्दू मालिक जो हजारों करोड़ का बीफ निर्यात करके कमाई करते हैं और सनातनी पार्टियों को चंदा  देते हैं उसका क्या होगा । 

हमने कहा- तो क्या हुआ ? करोड़ों हिन्दू मांस खाते हैं । जब मुसलमान नहीं आये थे तो क्या मांस खाने वाले हिन्दू और पशु काटने वाले कसाई भारत में नहीं हुआ करते थे ।

 

बोला- वह तो ठीक है लेकिन फिर हिंदुओं की सात्विक और अहिंसक वाली छवि का क्या होगा ? और अगर किसी ने यह उत्तराखंड के ‘बाबा ड्रेसेज’ के मुस्लिम मालिक की तर्ज पर हिन्दू मालिक के बूचड़खाने के मुसलमान नाम पर केस कर दिया तो ? फिर क्या हिन्दू, शर्मा, वर्मा, सिंह, सनातन, वैदिक, जय शेराँ  वाली जैसा कोई नाम रखेंगे ? । 


अब तो मोदी जी तत्काल कोई अध्यादेश लाना चाहिए कि कोई भी मुसलमान पवित्र हिन्दू आस्था, संस्कृति और मुद्दों में अपनी टांग नहीं अड़ा सकेगा । 


 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

May 25, 2026

25-05-2026 मैं भी कॉकरोच


25-05-2026 


मैं भी कॉकरोच 







आज तोताराम बड़े ठसके से आया । धुले हुए कुर्ता-पायजामा ।आज ही की बनी हुई दाढ़ी और 56 का आधा 28 इंची सीना लेकिन हिन्दुत्व के गर्व से फूला हुआ । सिर पर टोपी जिस पर लिखा हुआ था- मैं भी कॉकरोच । जैसे कभी मनमोहन सरकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार को लेकर जिसे देखो वही ‘मैं भी अन्ना’ की टोपी लगाकर घूमने लगा था या जैसे कभी लोग बिना पूछे ही कहने लगे थे- मैं भी चौकीदार । यह और बात है कि इतने चौकीदारों के होते हुई भी विदेशी मुद्रा का भंडार और रुपए की क्रय शक्ति और लाखों लोगों के वोट वोटर लिस्ट से पता नहीं कैसे चोरी हो गए । 


तोताराम हमेशा की तरह बैठा नहीं, ऐसे खड़ा रहा जैसे हम माइक पर घोषणा करें-  

अब मैं आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष आदरणीय तोताराम जी से आग्रह करूँगा कि वे आगे आयें और अपना स्थान ग्रहण करें । और उनको माल्यार्पण से स्वागत करेंगे फलाँ फलाँ जी ।


लेकिन हमने ऐसा कुछ नहीं कहा। तोताराम खुद ही बैठ गया । 


हमने कहा- आज यह अपना पद नाम लिखी टोपी लगाने की क्या जरूरत आ पड़ी ? दुनिया में कोई भी इस तरह का नाटक नहीं करता । न सूरज-चाँद, न शेर, न गीदड़ कोई अपने नाम की पट्टी लगाकर नहीं घूमता । मोदी जी भी अपने 32 सम्मान,  ‘प्रधान सेवक’;  ‘विश्व गुरु’ के बैज अपने सीने पर लगाए नहीं घूमते । उनके तेज से ही लोग लहचान जाते हैं कि ये अवतारी हैं । सब अपने गुणों और कर्मों से अपने आप ही पहचाने जा सकते हैं । कोई कम पढ़ा लिखा होता है वह दो-दो पेन रखता है और बात बात में अपने हाई स्कूल पास होने की बात करता है लेकिन मोदी जी ने कभी अपनी एनटायर पॉलिटिकाल साइंस की डिग्री नहीं दिखाई बल्कि जब भी कोई प्रसंग आया तो यही कहते रहे कि मैँ कोई पढ़-लिखा नहीं हूँ । 


वैसे तू यह अपनी परिचयात्मक टोपी न पहनता तो भी दुनिया जानती है कि मेरी औकात और हैसियत कॉकरोच से ज्यादा नहीं है । 


खैर, हमने उसके हाथ में गिलास थमाते हुए कहा- चाय पी । 


अभी तोताराम पूरा सा बैठा भी नहीं था कि उछल पड़ा और लगभग पूरी की पूरी चाय बिखर गई, बोला- कॉकरोच !! 


हमने देखा कि वास्तव में एक छोटा सा कॉकरोच भागा जा रहा था । 


हमने कहा- कॉकरोच डर गए क्या ? निकल गई सारी वीरता । 


बोला- कुछ भी हो मास्टर, ये चूहे, कॉकरोच, छिपकली कोई बहुत खतरनाक नहीं होते फिर भी अच्छा भला आदमी इनसे डर ही जाता है ।

 

हमने कहा- अब दस दिन में ही तुम्हारी पार्टी के दो करोड़ सदस्य होने से क्या मोदी जी भी डर गए हैं ? 


बोला- नहीं, वे ऐसे सतही आंदोलनों से डरने वाले नहीं हैं ।अभी तो ट्रम्प उन्हें कह रहे हैं-आई लव मोदी । वे जानते हैं ऐसे आंदोलनों की असलियत । 2011 में अन्ना आंदोलन कैसे, किस तरह शुरू हुआ और उससे कैसे, किसको लाभ हुआ और उसमें किसी वास्तविक बदलाव जैसा कुछ नहीं था ।तभी उस आंदोलन से निकले केजरीवाल जैसे चढ़े वैसे ही फिसल गए । धंधे वालों का धंधा सैंकड़ों गुणा बढ़ गया । जो असली खिलाड़ी थे वे सत्ता पर जम गए ।


सरकारें जब किसी सिद्धांत को लेकर बनती हैं तो परिवर्तन आता है फिर चाहे वे संघ की सरकार हो या कम्यूनिस्ट या मध्यमार्गी कांग्रेस की । असली सिद्धांतवादी संघ निसृत भाजपा ने ठोस काम किया और अपने सिद्धांतों के अनुसार सब कुछ सेट कर लिया ।अब जब तक कोई ठोस सिद्धांत वाली पार्टी निरंतर काम नहीं करेगी तब तक इन्हें कोई खतरा नहीं । 


हमने कहा- तो फिर कॉकरोच का क्या होगा ? 


बोला- वही होगा, लोग तेरी तरह बिखरी चाय को भूल जाएंगे और अमेरिका से 500 अरब डॉलर की डील तथा एक और सरेंडर हो जाएगा ।  


हमने कहा- ठीक है लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि बच्चा झुनझुने से बहुत देर तक नहीं बहल सकता । दूध की जगह तो दूध ही चाहिए भले ही पानी मिला हुआ ही क्यों न  हो ।जब अन्ना का आंदोलन चल रहा था तब हम अमेरिका में थे । हमारे कई शिष्य ‘मैं भी अन्ना’ की टोपी लगाकर फ़ोटो भेजते थे और बाद में वे ही खीजते भी मिले । 


बोला- कोई बात नहीं । कुछ दिन का तो इंतजाम हो गया। बाद में कोई और झुनझुना देखेंगे ।  


-रमेश जोशी 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach