Apr 24, 2026

24-04-2026 तोताराम की एप्सटीन फ़ाइल


24-04-2026 


तोताराम की एप्सटीन फ़ाइल  






दो दिन हो गए लेकिन तोताराम नहीं आया । न आये । उसका आना कोई इतना महत्वपूर्ण भी नहीं ।  हम मोदी जी के मन की बात के लिए एक महिने तक इंतजार करते ही हैं । लेकिन मोदी जी तो बाकी उनतीस दिन 22-22 घंटे देश के लिए  कुछ न कुछ  करते ही  रहते हैं । चाहे रास्ते में पड़ने वाली किसी भी छोटीमोटी टपरी पर सामान्य झालमुड़ी खाना ही क्यों न हो । वे जो कुछ भी करें देश सेवा ही होती है । भौतिक सेवा नहीं तो आध्यात्मिक, भावनात्मक या प्रेरणात्मक सेवा से फुरसत कहाँ है ? ज्ञानेश कुमार और अमित शाह की तरह । एक साफ-सुथरा चुनाव करवाने के लिए करोड़ों  काट-पीट रहा है तो दूसरा चप्पे चप्पे पर पुलिस खड़ी करके सहज स्थितियाँ बना रहे हैं । 

लेकिन तोताराम क्या कर रहा होगा ? 

मन में तोताराम का खयाल आते ही हम उसके घर की ओर चल पड़े । कोई पचास कदम भी नहीं है उसका घर । 

जाकर देखा । तोताराम लेटा हुआ हैं । 

हमने छेड़ा- तू तो ऐसे विश्राम कर रहा है जैसे कोई चुनाव प्रचार से थका हुआ नेता मसाज करवा रहा है । क्या हुआ ? 

बोला- मास्टर, उस दिन झालमुड़ी नहीं खानी चाहिए थी । 

हमने कहा- जब हमने कहा तो तुझे समझ आया नहीं । वैसे हुआ क्या है ?

बोला- आमाशय की एप्सटीन फ़ाइल लीक हो गई ।

हमने कहा- लीक होकर कहीं पब्लिक तक तो नहीं पहुँच गई ? मतलब आमाशय से शौचालय के कमोड तक ही रहा मामला या आगे कुछ और ? 

बोला- नहीं पब्लिक तक तो नहीं पहुँचा मामला ।हाँ, उस रात को घुटन्ना थोड़ा गीला जरूर हो गया था । उसके बाद डाइपर लगा लिया था ।  

हमने कहा- आदमी को अपनी औकात में रहना चाहिए । किसी की भी देखादेखी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए ।नाल घोड़ों को ठोंकी जाती हैं, मेंढकी को नहीं । मोदी की नकल के लिए मोदी जी जैसा हाजमा और बल चाहिए । वे तो जवान हैं, बालब्राह्मचारी है, विष्णु के अवतार हैं । उनका क्या, वराह अवतार में उन्होंने पाताल तक खोदकर धरती को निकाल लिया था ।देवताओं के साथ सब कुछ देखते हैं लेकिन क्या किसी गर्भ गृह में शौचालय देखा ? उसका कारण है । शाह साहब ने क्या झूठ बताया था कि वे तो सारे सारे दिन पार्टी की मीटिंग लेते रहते हैं और बीच में एक बार भी शौचालय नहीं जाते । तुझे तो अपनी उम्र का खयाल करना चाहिए था । वैसे कितने दस्त हुए ?

बोला- उसकी क्या गिनती करना ।कहावत को थोड़ा बदल दे-  पानी पी और कमोड में डाल । 

हमने कहा- अगर मांसाहार की निंदा जैसे मुद्दों पर चुनाव जीतने वाली पवित्र पार्टी के युवा नेता की तरह मछली खा लेता तो ? 

बोला- अब बस भी कर । अब हो गई गलती । मुझे मोदी का अनुकरण करने के उपलक्ष्य में कौन सा मरणोपरांत परम वीर चक्र मिलने वाला था । 

भूल्यो बामण भेड़ खाई, 

ओजूँ खा तो राम दुहाई । 

      




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Apr 23, 2026

20-04-2026 आप प्रधानमंत्री हो क्या ?


  

20-04-2026 


आप प्रधानमंत्री हो क्या ? 



आज तोताराम कोई शाम 4 बजे भी आ टपका । 

हमने कहा- हमारे पास दिन में दो दो बार चाय पिलाने का बजट नहीं है । 


बोला- इस 42 डिग्री तापमान में मुझे चाय पीनी भी नहीं है । भाभी ने जरूर बेल का शर्बत बनाया होगा । लेकिन वह भी नहीं । अब तो बैंक जा रहा हूँ । कई महिने हो गए पास बुक ही पूरी करवा लाते हैं ।आ चलें । 

 

मन तो नहीं था लेकिन कुछ कहते नहीं बना । वैसे ही जैसे भले ही ट्रम्प दिन में चार बार कह दे कि मैंने युद्ध विराम करवाया लेकिन मोदी जी दोस्ती के लिहाज में यह नहीं कह पाते कि यह गलत है । वैसे ही हम भी मन न होते भी तोताराम के साथ चल पड़े । 


बैंक हमारे घर से ज़्यादा दूर नहीं है । जयपुर रोड़ हमारे घर से कोई 150-200 मीटर है और उस पर चढ़ते ही बाईं तरफ मुड़कर पूर्व दिशा में चलने पर कोई 50 मीटर चलकर इंडिस्ट्रीयल एरिया के मोड़ पर बैंक है । रोड़ पर चढ़ते ही बाई तरफ के कोने पर कई रेहड़ी ठेले वाले खड़े होते हैं जो गोलगप्पे, चाट पापड़ी, दही, भल्ले और झालमुड़ी बेचते हैं । रात के कोई नौ बजे तक अच्छी भीड़ और रौनक रहती है ।उनकी दुकानदारी शाम चार बजे से ही शुरू होती है । 

 

जैसे ही मोड़ पर पहुँचे तोताराम ने कहा- मास्टर, झालमुड़ी खाते हैं ।


हमने कहा-  यह क्या मोदी जी की तरह कहीं भी दुकान देखी और बच्चों की तरह मचल गए झालमुड़ी खाने के लिए ।उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना है । 2047 में देश को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में ‘मेक अमरीका ग्रेट अगैन’ (मेगा) की तरह ‘मेक इंडिया ग्रेट अगैन’ (मीगा) बनाना है । 


बोला- उसकी तू चिंता मत कर । अगर छाती 56 इंच की है तो पेट भी लक्कड़ हजम पत्थर हजम होगा । 35 साल भिक्षा माँग कर खाया है तो उन्हें कुछ नहीं होगा । भिखारी का न खाने समय होता है और न ही कोई मीनू फिक्स होता है ।  किसी माई ने जो भी ठंडा-बासी दे दिया सो खा लिया । 


हमने कहा-  इस उम्र में हम ठेले पर बिकने वाली चीजें नहीं खाना चाहते । जब तिरुपति के प्रसाद में चर्बी की मिलावट हो सकती है, जिस देश में भक्त भगवान तक को कुछ नहीं समझते वहाँ इन ठेले रेहड़ी वालों से ज़्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए । वैसे भी जब हम पहली बार पोर्टब्लेयर गए थे तो शिप मिस हो जाने के कारण हमें 15 दिन तक केन्द्रीय विद्यालय, फोर्ट विलियम में रहना पड़ा था । वहाँ अंदर की एक बाजार भी था वहीं हम खाना और नाश्ता कर लेते थे ।जिधर जाओ वही मछली और सरसों के तेल की गंध ।  बंगाल में मछली और चावल का खाना है । वहाँ सब्जी-मछली पकाने में सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता । हमें उसकी आदत नहीं । हम तो गुजरात की तरह मूँगफली का तेल काम में लेते हैं । वहीं से हमें सरसों के तेल की गंध बड़ी अजीब लगती है । और फिर झालमुड़ी में तो सरसों का तेल कच्चा ही डालते हैं ।

तुझे खाना है तो खा ले । 


तोताराम ने एक झालमुड़ी बनवाई और अच्छी तरह से तीखी बनवा कर खाई । खाने के बाद दस का एक नोट निकाल कर दिया तो ठेलेवाले बड़ी अजीब निगाहों से तोताराम को देखा और बोला- मास्टर जी, दस रुपए में एक झालमुड़ी वाला ज़माना गया ।पच्चीस रुपए निकालिए ।

 

बोला- क्यों ? कल सारे देश ने देखा नहीं कि एक अप्रत्याशित रूप से व्यवस्थित,स्थाई, विभिन्न सामानों से ठसाठस भरी, साफ सुथरी दुकान वाले एक बिहारी मुड़ी वाले ने बंगाल में मोदी जी को दस रुपए में एक मुड़ी खिलाई थी। एक दिन में अढ़ाई गुणा महंगाई बढ़ गई क्या ? 


रेहड़ी वाला भी अकड़ गया, बोला- मास्टर जी, आप कोई प्रधानमंत्री हो क्या ? जो दस रुपये में झालमुड़ी खिला दूँ इस आशा में कि आप मुझे कोई एयर पोर्ट दिलवा दोगे । अगर प्यार से कहते तो बात और थी लेकिन आप तो नेतागीरी लगा रहे हैं तो सुन लीजिए कि जब तक 25 रुपए नहीं आएंगे तब तक आप यहीं बैठे रहिए ।   


हमने भी बीच में बोलना उचित नहीं समझा और चुपचाप उठकर इंडिस्ट्रीयल एरिया के सामने वाले शर्माजी की दुकान से लाकर उस झालमुड़ी वाले को दिए और तोताराम को बंधकी से छुड़वाकर लाए ।


हमने कहा- तोताराम,अगर नीयत खराब हो तो बड़ा सोचो। अगर हजार दो हजार करोड़ रुपये बैंक से उधार लेकर भागते तो सरकारें तुम्हें सेफ पेसेज उपलब्ध करवा देतीं लेकिन 15 रुपए में कोई दया दिखाने नहीं आएगा । जैसे कि बैंक में सामान्य लोगों का मिनिमम बैलेंस से दो रुपये कम होने पर लेकर जुर्माना लग जाता है ।लेकिन नीरव मोदी विदेश में मजे कर रहा है । 


अब घर चल, हो गई पासबुक पूरी । क्यों ईरान युद्ध में भारत की तरह हमारा तमाशा बनवा रहा है  ।  

    



    




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Apr 18, 2026

19-04-2026 बिल गिर गया


19-04-2026  


बिल गिर गया 






आज तोताराम कुछ परेशान सा था, बोला- मास्टर, बिल गिर गया ।

 

हमने कहा- कोई चिंता की बात नहीं । चूहे की कौन सी फिक्स ड्यूटी होती है । सुना है सेवा के लिए प्रतिबद्ध कुछ मनुष्य तो दिन में 20-20 घंटे और बिना कोई छुट्टी लिए ही देश की नींव खोदते रहते हैं । फिर ये तो चूहे हैं । बिल खोदना ही इनका काम है ।इन्हें किसी हार्वर्ड की डिग्री नहीं चाहिए । इनके पास बिल खोदने के हार्ड वर्क की एनटायर मास्टर्स की डिग्री है ।ऐसे में खोदा गया कोई बिल अगर  गिर भी गया तो क्या ?  एक नहीं और अनेक बिल खोद डालेंगे ।

 

तुझे चिड़िया और चुहिया की कहानी पता है ना ? दोनों में दोस्ती थी । एक दिन चुहिया ने चिड़िया से अपना घर दिखाने के लिए कहा । चिड़िया ने कहा कि उसका घर बहुत दूर है और रास्ते में कई तरह की समस्याएं हैं । लेकिन चुहिया नहीं मानी । रास्ते में चुहिया कँटीली झाड़ियों में फँस गई । चिड़िया ने हाल पूछा तो बोली, मैं फँसी नहीं मैं तो नाक छिदवा रही थी । इसी तरह डूबने पर उसने उसे स्नान करना बताया । लेकिन हार नहीं मानी । 


एक दिन चुहिया का बिल गिर गया तो चिड़िया ने कमेन्ट किया- चुहिया रे चुहिया तेरा तो बिल गिर गया । 

चुहिया भी बड़ी ढीठ थी, बोली- मैं तो इसे गिराना ही चाहती थी । शत्रु को धोखा देकर नया एजेंडा और मुद्दा सेट करना मेरे मकसद थे  ।यही मेरी चाणक्य नीति थी । 


तोताराम बोला- मैं तो तुझे राजनीतिक रूप से जाग्रत रखने के लिए अवगत कराता रहता हूँ और तू है कि ऐसी ऐसी फालतू और बेसिर पैर की बातें करता है कि मेरा दिमाग खराब हो जाता है । जी करता है अपना जूता निकालकर अपना ही सिर पीट लूँ ।

 

हमने कहा- इस समय तेरा ही नहीं सारी दुनिया में ही भले आदमियों का यही हाल हो रहा है ।यहाँ या वहाँ, कहीं देख ले सब सिर पीटने वाली बातें । जिनको कुछ नहीं करना वे ऐसी ही बातें करते रहते हैं । अब उधर ट्रम्प दिन में सौ बकवास करता है ।और यहाँ ये चूहे । अरे भाई होना हवाना कुछ नहीं । जो करना है कर लें । कर दे फाड़कर एक की दो । बरसने को कुछ है नहीं । बस गरजना और वह भी हर समय । वनस्पति बादल के गरजने से नहीं बरसने से पुष्ट होती है । 


बोला-मास्टर, मैं किसी चूहे के बिल की नहीं मैं संसद में महिला आरक्षण बिल के गिरने की बात करना चाहता था । 


हमने कहा- लेकिन तू तो इस तरह घबराया हुआ बोल रहा है जैसे किसी बुजुर्ग होती जा रही महिला का बड़ी मुश्किल से धारण किए गर्भ का 'पात' हो गया हो ।


बोला- मास्टर, क्या अद्भुत संयोग है कि तूने भी इस स्थिति का उसी गंभीरता से सटीक वर्णन किया है जैसे रात को अपने राष्ट्र के नाम संदेश में मोदी जी ने ।


हमने कहा- वैसे तोताराम जहाँ तक किसी के कल्याण की बात है तो अगर नीयत ठीक है तो महिला ही क्या किसी का भी कल्याण बिना किसी बिल के भी किया जा सकता है । सभी माननीय अपने घर, परिवार और आसपास संपर्क में आने वाली महिलाओं के प्रति ही सम्मान और सहानुभूति रख लें ।अपने घरों में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और पूरा वेतन दे दें । न्यूनतम वेतन माँगने वाले मजदूर, मजदूरनियों पर डंडे कहाँ की पुलिस बरसा रही है ? महिला पहलवानों को किसने घसीटा था संसद मार्ग पर ।  मुफ़्त शिक्षा, सड़क और कार्य स्थल पर पूर्ण सुरक्षा  किसकी जिम्मेदारी है ?  निकालो अपने बलात्कार के आरोपी सांसदों को बाहर, जाओ मणिपुर और माँगो वहाँ की पीड़ित महिलाओं से माफी ।चुनावी रैली, रोड़ शो, फ़ोटो सेशन से तो फुरसत मिलती नहीं और करने चले है महिलाओं का सम्मान । पचास करोड़ की गर्ल फ्रेंड, जर्सी गाय जैसे सम्मान सूचक शब्द किस संत के हैं ?  ये तो अपनी छोड़ी पत्नी से ही गुजारा भत्ता न मांगें तो ही बहुत है । और तो और आदिवासी महिला राष्ट्रपति से ही माननीयों का व्यवहार देख लो । 


बोला- लेकिन मास्टर, बिल .....

 

हमने कहा- क्या बिल बिल । चूहों का काम ही है बिल खोदना ।कुछ भी खा जाना ।  किसी भी पुल में घुसकर खोदेंगे,किसी बांध को बिल बना बना कर ढहा देंगे, किसी भी सड़क में घुसकर बिल बना देंगे, खाद्य निगम के गोदामों में घुसकर करोड़ों का अनाज खा जाएंगे और तो और शराब बंदी वाले राज्यों में बरामद करोड़ों की शराब पी जाएंगे । चूहे तो हर माननीय केजघन्य मुकदमों की फ़ाइलें खा जाएंगे । अभी विदेशों में चूहे इतने सक्रिय नहीं हुए हैं । अगर इन्हें अमेरिका का वीजा दे दिया जाए तो ये वहाँ जाकर एप्सटीन वाली फ़ाइल तक कुतर आएंगे । फिर दाग ढूँढता रह जाएगा नेतन्याहू । 


तोताराम उठा और कहते हुए चल दिया- तुझे तेरा बिल और चूहे मुबारक ।मेरे मुँह से गुस्से में शाह साहब या विधूड़ी की तरह कोई  संसदीय शब्द निकल जाए उससे पहले चल ही देना चाहिए । चाय का क्या है ? यह कौन सी मोदी जी द्वारा ओबामा या छोटी आँख वाले गणेश जी को पिलाई जाने वाली विशेष चाय है ।  







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Apr 17, 2026

07-04-2026 8. नमो मगरमच्छ मनेजमेंट मिशन

 

नमो मगरमच्छ मनेजमेंट मिशन 


तोताराम एक छोटी सी बोतल लाया जिसमें एक छोटा सा जीव था चार पैर वाला ।  



बोतल को हमारे सामने रखते हुआ बोला- यह क्या है ? 

हमने कहा- जब तू लाया है तो पता भी तुझे ही होना चाहिए कि यह क्या है ।वैसे तू जो कहे वही सही । 

बोला- यह भी कोई उत्तर है । लगने को क्या है ? इस तरह से तू मुँहदेखी भी तो कह सकता है ।  

हमने कहा- हाँ, हो सकता है जैसे कि मोदी जी जहाँ भी जाते हैं कोई रिश्तेदारी निकाल लेते हैं । इज़राइल से हमारा कोई लेना देना नहीं है और रिश्तेदारी का तो सवाल ही नहीं उठता फिर भी मोदी जी कह बैठे कि इज़राइल फादरलैंड है और भारत मदरलैंड है । सभी देशों के लोग अपने देश को फादरलैंड मदरलैंड कुछ भी तो कहते हैं । इज़राइल की तरह जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड आस्ट्रिया आदि भी अपने देश को फ़ादरलैंड कहते हैं । हमारे हिसाब से मदरलैंड  ज़्यादा सही है क्योंकि मदर कभी संदेहास्पद नहीं हो सकती । बाप का क्या है ? जो भी ताकतवर आकर देश पर कब्जा कर लेता है वही बाप बन बैठता है । हालाँकि मोदी जी का ऐसा कोई विचार भी नहीं था लेकिन लोगों को अनर्थ करने का मौका मिल गया । कल को पूछने लगेंगे कि अब हमारा मौसालैंड, फूफालैंड, चाचालैंड , नानालैंड भी बताओ । 

वैसे हमें तो यह एक मरियल छिपकली लगती है । 

बोला- नहीं, तेरा अनुमान गलत है । यह छिपकली नहीं, एक मगरमच्छ है । 

हमने कहा- हो सकता है कुछ और हो । इसे निकालकर पेड़ पर रखकर देख ।अगर रंग हरा हो जाए तो गिरगिट है क्योंकि गिरगिट भी मौके के अनुसार रंग बदल लेता है । 

बोला- यह मगरमच्छ है । 

हमने कहा- अगर मगर से क्या होता है और अगर मगर है तो फिर यह कुपोषित है। हो सकता है इसके हिस्से का पोषाहार कोई अधिकारी खा गया हो । 

बोला- यह शीघ्र ही विष्णु के मत्स्यावातार की तरह बड़ा हो जाएगा । और जैसे विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर मनु के नेतृत्व में  जल प्रलय से सृष्टि को बचाया था वैसे ही यह बंगलादेश से जुड़ी भारत की जल सीमा  वाले क्षेत्र में तैनात होकर अवैध घुसपैठ को रोकेगा । 

हमने पूछा- वैसे ऐसी अद्भुत योजना है किस चाणक्य के दिमाग की उपज ? 

बोला- सही पहचाना । यह चाणक्य के अवतार अमित शाह जी के दिमाग की उपज है । डंकी रूट से अमेरिका में घुसने वालों को रोकने के लिए ऐसी योजना तो ट्रम्प के दिमाग में भी नहीं आई । लेकिन यह वर्तमान में छिपकली और भविष्य का  मगरमच्छ बंगलादेश वालों को कैसे पहचानेगा ? 

बोला- यह गुजरात के उसी मगरमच्छ के परिवार से है जिसके बच्चे को मोदी जी बचपन में पकड़कर घर लाए थे । 


यह भी उनकी तरह बंगलदेशियों को उनके कपड़ों से पहचान लेगा । 

हमने कहा- तो फिर अयोध्या, बनारस आदि के मंदिरों के ठेकों की तरह सीमा सुरक्षा बल में गुजरात मे मगरमच्छों का 100% रिजर्वेशन पक्का । 




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