Jun 27, 2026

25-06-2026 लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र


25-06-2026 


लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र 



कोई चालीस साल पहले की बात है जब दिल्ली में हुआ करते थे । तब बाहर से दिल्ली में आने वाला हर आदमी यही सोचता था कि किसी तरह दिल्ली में कहीं भी सौ-पचास गज का प्लॉट हो जाए फिर भले ही उसे रहने लायक बनने में ज़िंदगी गुजर जाए । ऐसे प्लॉट दिल्ली के किसानों के खेतों में हुआ करते थे जहाँ निर्माण रोकने देने के नाम पर डी डी ए वाले वसूली करते घूमा करते थे । ऐसे खेतों में कटी कॉलोनियाँ अवैध कॉलोनियाँ कहलाती थीं । 

ऐसे में लोग अपनी कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए उसका नाम इंदिरा कॉलोनी या संजय कॉलोनी रख लिया करते थे । यह एक प्रकार का टोटका होता है । जैसे कोई अपने बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा देता है या कोई अपने मकान के मुख्य द्वार पर टायर लटका देता है या किसी दैत्य का मुखौटा लगा देता है । आज भी डरे हुए लोग भूत-पिशाच भगाने के लिए भगवा गमछा गले में डाल लेते है या फिर कई रंग के कलावे बांध लेते हैं या तिलक खींच लेते हैं या आठों अंगुलियों में तरह तरह की अंगूठिया पहन लेते हैं । ये सब लोक परलोक के तंत्रमंत्र हैं । 

आज तोताराम ने कहा- मास्टर, अपने बरामदे  का नाम ‘नमो बरामदा’  रख लेते हैं । 

हमने कहा- क्या हमें मोदी जी ने इसके लिए कोई सबसीडी दी है या यह कोई अवैध निर्माण है जो इसे ‘नमो’ की आड़ में वैधता प्रदान करें । मोदी जी चाहें तो स्टेडियम का नाम एक झटके में अपने नाम कर लें लेकिन यहाँ तो वही चलेगा जो हम चाहेंगे । 

बोला- 2016 में जब ट्रम्प पहली बार राष्ट्रपति बने थे तब सुलभ शौचालय वाले बिन्देश्वरी पाठक ने हरियाणा के मेवात इलाके में सफाई कर्मचारियों के लिए कुछ मकान बनवाए थे तो उनका नाम ‘ट्रम्प विलेज’ रखा था । 

हमने कहा- ठीक है जब उन्हें इसका कारण पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि हो सकता है इससे कुछ सहयोग या प्रचार मिल जाए लेकिन हुआ कुछ नहीं, भद्द बेकार में पिटी । वैसे ही जैसे ट्रम्प की जीत के लिए 2020 में हिन्दू महासभा वालों ने यज्ञ किया था । यह बात और है कि देवताओं ने उनकी एक नहीं सुनी । इसी तरह मोदी जी ने भी बेशर्मी से अमेरिका में नारा दे ही दिया था ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ । सोच अगर चुनाव के दिनों में कोई विदेशी नेता भारत में आकर राहुल के लिए ऐसा नारा लगाए तो ? लेकिन क्या किया जाए । राजस्थानी में कहावत भी तो है-  

आप गुरूजी कातरा मारै 

ओराँ नै परमोद सिखावै । 

बोला- मास्टर, सब एक दूसरे को समझते हैं लेकिन भले ग्रहों को कोई नहीं पूछता है लेकिन बुरे ग्रहों के लिए शांति पाठ करवाता है ।  कहा भी है-

बसे बुराई जासु तन ताही को सनमान 

भलो भलो कहि छांडिए खोटे ग्रह जपदान 

हमने कहा- और क्या ? मोदी जी यहाँ कण कण पर अपना फ़ोटो छपवा दें हर चीज के आगे पीछे ‘नमो’ जोड़ दें लेकिन देखा नहीं पिछले दिनों जब अमेरिका गए थे तो ट्रम्प कैसे मोदी जी को ब्यूटीफुल, एंजल आदि  कहकर मजे ले रहा था लेकिन मोदी जी बार बार ‘योर एक्सीलेंसी’ ‘योर  एक्सिलेंसी’ की रट लगाए हुए थे । ट्रम्प का क्या ठिकाना । बड़ा मुँहफट और गैरजिम्मेदार आदमी है । पता नहीं कब क्या बोल जाए । 

ग्रहशांति के लिए पता नहीं क्या क्या करना पड़ता है । ऐसे में 56 इंच का सीना कुछ काम नहीं आता । जेलेन्स्की ने बिना पर्ची के ही टीशर्ट में ही अपना जलवा दिखा दिया था । 

सारे नाटकों के बावजूद लोक ही सच और सत्य आचरण करता है । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- जैसे कि कुछ अंधभक्त भले ही गोडसे के प्रति आदर का दिखावा करते हों लेकिन आज किसी गोडसे सरनेम वाले महाराष्ट्रियन का नाम ‘नाथूराम’ नहीं होगा । भले ही लोग विभीषण को कितना भी बड़ा भक्त बताएं लेकिन क्या किसी का नाम ‘विभीषण’ सुना है ?  



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27-06-2026 पादुका चोरी

27-06-2026 

पादुका चोरी 


भले ही मोदी जी ने हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा नहीं करवाई हो लेकिन अब भी देश में हवाई चप्पलें पहनने वालों की संख्या बहुत है । ऐसा हवाई चप्पलों के कारण हवाई यात्रा का अवसर मिलने की उम्मीद नहीं बल्कि महँगे जूते न खरीद सकने के कारण है । आजकल रुपये और राजनीति दोनों के स्तर की तरह हवाई चप्पलों का स्तर भी गिर गया है । दोनों में से किसी भी चप्पल का कोई पट्टा कहीं से भी तृणमूल वालों या राघव चड्ढा या ठाकरे ग्रुप के सांसदों की तरह भाजपा की ओर खिसक गया तो फिर कोई इलाज नहीं । पहले की तरह दस-बीस रुपये के पट्टे बदलने से काम नहीं चलता । पूरी चप्पलें ही बदलनी पड़ती हैं । और कीमत भी 250/- रुपये के लगभग । हमने कल ही नई चप्पलें खरीदनी पड़ी । 

हमारा और तोताराम का नाप एक ही है । तोताराम जैसे ही चाय पीकर चलने लगा तो अपनी पुरानी चप्पलों की जगह हमारी चप्पलें पैरों में डाल ली । हमारे ‘बरामदा ट्रस्ट’ की सुरक्षा किसी चंपत राय के भरोसे नहीं है जो सैंकड़ों करोड़ का चढ़ावा गुपचुप गायब हो जाए ।  हमने तुरंत पकड़ा और कहा- देखते देखते दिन दहाड़े !

बोला- भूल हो गई । और ये कोई राम की पादुकाएं हैं क्या, सौ रुपये की फुटपाथ वाली चप्पलें ही तो हैं ।अगर चोरी का इरादा होता तो ‘राम मंदिर’ की तरह चढ़ावा गणना के समय के सी सी टी वी कैमरे की फुटेज ही गायब नहीं करवा देता । वैसे यह ‘अमृत काल’ की भारतीय लोकतंत्र की बस है जिसमें लिखा हो या न लिखा हो लेकिन यात्रियों को अपने जान-माल की रक्षा खुद ही करनी होती है । 

हमने कहा- वैसे हुआ बहुत बुरा । राम भक्तों की निगहबानी में राम की पादुकाएं ही चोरी ! 

बोला- इसमें बुरा क्या है ? जहाँ नाली में कीचड़ होगा वहाँ कमल खिलें या नहीं लेकिन बदबू और मच्छर जरूर होंगे । जहाँ गंदगी होगी वहाँ मक्खियों को निमंत्रण देने की कोई जरूरत नहीं । अब जहाँ धन है वहाँ चोरों के अलावा और कौन चक्कर लगाएगा ? सुंदरियों का जमघट लगवाकर वहाँ मजबूरन ब्रह्मचारियों और संस्कारियों को बिठा दोगे तो क्या वे विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करेंगे ? 

हमने कहा- इस मामले में मोदी जी बहुत समझदार हैं । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- मोदी जी श्रद्धांजलि देते समय भी अपने जूते अर्थात पादुकाएं नहीं उतारते । पता नहीं, कब कौन उठाकर चंपत हो जाए । राजा की पादुकाएं होती ही ऐसी हैं । तभी तो भरत जी जैसे ही ननिहाल से अयोध्या आये सबसे पहले चित्रकूट जाकर पादुकाएं लेकर आये । राजा की पादुकाएं साधारण नहीं होतीं ।  जिसके पास राम की पादुकाएं वही अयोध्या का शासक । हो सकता है कोई गद्दी के चक्कर में ही पादुका लेकर चंपत हो गया हो । 

बोला- वैसे मास्टर, जब भरत राम की पादुकाएं ले आये तो राम को नंगे पाँव वन वन घूमने में परेशानी तो बहुत हुई होगी । कुछ भी हो योगी जी की न्यायप्रियता के कारण चंपत राय को त्यागपत्र तो देना ही पड़ा । 

हमने कहा- त्यागपत्र से क्या होता है ? बैंकों से अरबों लेकर भागा ललित मोदी अगर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दे तो क्या उसे निरपराध मान लिया जाएगा ? 

बोला- चंपत राय का ड्राइवर और कुछ और लोग भी हिरासत में लिए तो गए ही हैं । 

हमने कहा- यह तो तथाकथित रामराज्य है । असली रामराज्य में भी राम के वनवास का दोष आज भी मंथरा पर लगाया जाता है । इसी तरह सीता के वनवास के लिए राम के छवि निर्माण के लिए एक निरीह धोबी पर लानत भेजी जाती है । इसी तरह बड़े लोगों पर कुछ आंच नहीं आने वाली । और हिरासत में लिए गए लोगों को भी दस बीस दिन में जमानत मिल जाएगी । उसके बाद ज़िंदगी भर केस टेबल पर नहीं आएगा । और अगर आ भी गया और जेल भी हुई तो राम रहीम की तरह परोल पर बाहर आते रहेंगे । 

आखिर ये भी तो बिलकीस बनो के बलात्कारियों की तरह संस्कारी लोग हैं । 

ग़रीब लहरों पे पहरे बिठाए जाते हैं समुंदरों की तलाशी कोई नहीं लेता





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Jun 22, 2026

22-06-2026 योग किया ?


22-06-2026 

योग किया ? 


आते ही तोताराम ने पूछा- योग किया ? ठीक वैसे ही जैसे कोई मेट या मुंशी मिस्त्री से पूछता है- कितना प्लास्टर हुआ ? 

हमने कहा- क्या योग करना कोई मजदूरी है जो तू हमारे काम की रिपोर्ट ले रहा है ? यह हमारा व्यक्तिगत मामला है । हम योग करें या भोग। तू क्यों बिना बात की अफ़सरी झाड़ रहा है । और फिर योग, भोग, तप, तंत्र-मंत्र या अन्य कोई युक्ति सब हाईवे वाले ‘धाकड़’ की तरह थोड़े किये जाते हैं । तुलसी मानस के बालकाण्ड में कहते हैं-

जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ॥

योग, युक्ति, तप, मंत्र सब छुपाकर किये जाते हैं तभी उनका पूरा फल मिलता है ।  

बोला- तुझे पता होना चाहिए अब योग राष्ट्रीय कार्यक्रम हो गया है । कल छुट्टी थी लेकिन मास्टर स्कूलों में गए, और भी सरकार से लाभान्वित होने वाले या मोदी जी से लाभ पाने की उम्मीद रखने वाले सभी ने योग किया और फ़ोटो नेट पर डाले जिससे मोदी सरकार उन्हें देखकर उनकी कर्तव्यपरायणता और देशभक्ति का हिसाब-किताब रख सके । खुद मोदी जी ने कोलकाता में रेड रोड़ जैसी व्यस्त सड़क को सात दिन से बंद करवाकर कर मंच, कैमरे लगवाकर सभी देशभक्तों को योग सिखाया । इससे पता चलता है कि मोदी जी देशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कितने सजग और सक्रिय हैं । 

हमने कहा- दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल होता है । तभी कबीर कहते हैं-

करनी मीठी खाँड सी करनी बिस की लोय 

कथनी तज करनी करे तो बिस अमरित होय । 

मन वचन और कर्म की एकता ही सच्चा योग है । नहीं तो रामदेव वाला धंधा है । देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए केवल योग से काम नहीं चलता । सबसे पहले उन्हें स्वास्थ्यवर्द्धक और पूरा भोजन चाहिए, फिर भी अगर बीमार हो जाएँ तो असली दवाइयाँ, डॉक्टर और अस्पताल चाहिएं । योग स्वस्थ रहने के लिए पथ्य-परहेज, आहार-विहार की एक भारतीय पद्धति है । वह दवा और भोजन का विकल्प नहीं है । जब राजनीतिक पार्टियां नकली दवा बनाने वाली कंपनियों से चंदा लेंगी तो स्वास्थ्य का भगवान भी मालिक नहीं हो सकता । योग का ढोंग करने, योग करो स्वस्थ रहो का नारा लगाना जिम्मेदारी से बचने का बहाना है । जैसे कि जगह जगह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  का नारा लिखवा देने से काम नहीं होता । उसके लिए विज्ञापन की बजाय शिक्षा का बजट बढ़ाना पड़ता है और बेटियों को भ्रष्ट संतों और बाहुबली नेताओं से बचाना होता है । 

हाँ, योग से एक फायदा तो होता है । 

बोला- चल तूने कुछ तो माना । बता किसी आसन का कोई फायदा । 

हमने कहा- तीन आसन है एक शवासन, दूसरा कूर्मासन और तीसरा मार्जर्यासन । 

जब कोई समस्या या जिम्मेदारी लेने की बात आये तो शवासन लगा लो । सभी प्रभावित लोग धीरे धीरे सिर फोड़ कर चुप हो जाएंगे और इस तरह से सभी तनाव, समस्याएं और विवाद धीरे धीरे स्वतः शांत हो जाएंगे जैसे मणिपुर विवाद, महिला पहलवान शोषण, नीट पेपर लीक आदि । दूसरा है कूर्मासन । जब कोई संकट आये तो कछुए की तरह अपने हाथ पैर अपने खोल में समेट कर पड़े रहो । जब संकट टल जाए तब फिर देश के विकास में लग जाओ जैसे आजादी के आंदोलन में जब देश अंग्रेजों से लड़-भिड़ रहा था तब तथाकथित देशभक्तों ने ऐसे ही कूर्मासन लगा रखा था। और अब जब संकट नहीं है तब बिना कुछ किये खुद देशप्रेमी बनकर सबको हड़काते फिर रहे हैं । तीसरा है मार्जर्यासन । मार्जरी बिल्ली को कहते हैं । कभी उसे अंगड़ाई तोड़ते देखा है ? इस आसन से रीढ़ की हड्डी लचीली हो जाती है । जिससे आप ट्रम्प जैसे किसी भी कैरियर खराब कर सकने वाले दुष्ट या फायदा पहुँचाने वाले सेठ के आगे सरलता से झुककर अपना कैरियर बचा सकते हैं और धन जुटा सकते हैं । 

देश का सम्मान जाए भाड़ में ।    

 



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Jun 21, 2026

21-06-2026 कॉकरोचों का धरना


21-06-2026 

कॉकरोचों का धरना  


जैसे ही तोताराम बैठने को हुआ हमने उसे आज की ब्रेकिंग न्यूज दी- कॉकरोचों का धरना अवैध घोषित कर दिया गया है । 

बोला- यह क्या कोई समाचार है ? कुछ कॉमन सेंस से काम लिया कर । कॉकरोच इस सृष्टि के सबसे पुराने जीवित प्राणी हैं । उनके इस सनातन का सम्मान करते हुए घर की दीवारों की दरारों, गटर, रसोई के सीलन भरे कोनों में आवास और सब प्रकार का बचा-खुचा खाना निःशुल्क उपलब्ध करवाया तो जाता है । अब कॉकरोच भी धरना देने लगे । इसीलिए नीति आयोग के अमिताभ कान्त ने कहा था कि भारत में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है । मदर ऑफ डेमोक्रेसी का मतलब यह भी नहीं है कि कॉकरोच भी धरना देने लगें । कल को मक्खी, मच्छर, दीमक भी धरना देने लगेंगे । लगता है अब इनका मुकाबला करने के लिए एक नई सी जे पी मतलब ‘चप्पल जनता पार्टी’ बनानी पड़ेगी जो इन्हें देखते ही चप्पल फटकारकर ठिकाने लगा देगी ।    

हमने कहा-  हम वास्तविक कॉकरोचों की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो परीक्षा व्यवस्था से दुखी और बेकार छात्रों की बात कर रहे हैं जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने कॉकरोच बताया था, और जिन्होंने अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई है । वे जंतर मंतर पर थाली और चम्मच बजाय कर प्रदर्शन कर रहे थे । 

बोला- वैसे तो जिस तरह से ये अन्याय को मूर्खतापूर्ण और कायराना तरीके से बर्दाश्त करते हैं उससे तो ये कॉकरोच से ज्यादा कुछ लगते भी नहीं । फिर भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब बातों की आजादी है लेकिन उसका एक शिष्टाचार होता है । कोरोना के समय ताली थाली बजवाई थी कि नहीं । तब बजा लेते । अब आगे भी ऐसे मौके आएंगे तब बजा लेना और पोस्ट कर देना ताली थाली बजाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की तरह अपना फ़ोटो । अगर कुछ और हल्ला  मचाने का मन है तो बना लें ‘डी जे पी’ मतलब डिस्क जॉकी पार्टी और मस्जिदों के सामने गाएं बजायें हनुमान चालीसा । कोई कुछ नहीं कहेगा बल्कि प्रोमोजिंग युवा नेता बनने का रास्ता भी साफ हो सकता है जैसे जयपुर में दिपके को थप्पड़ मारने वाला चर्चित हो गया और तत्काल जमानत भी मिल गई । 

हमने कहा- जंतर मंतर तो वैसे भी प्रायः प्रदर्शन करने का स्थान रहा है जैसे रामलीला मैदान या लंदन का हाइड पार्क । भाजपा और रामदेव ने भी तो अन्ना हजारे की आड़ में रामलीला मैदान पर कब्जा जमा लिया था । और अब देखा नहीं संस्कारी और राष्ट्रवादी लोगों का शासन आने के बाद कोलकाता का रेड रोड़ सात दिन के लिए योग के चक्कर में बंद कर दिया कि नहीं । जबकि कुछ दिन पहले नमाज के लिए दो घंटे के लिए भी मना कर दिया गया था । 

बोला- अन्ना का आंदोलन भ्रष्टाचार के विरुद्ध था और योग एक अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम है । नमाज तो एक कट्टर धार्मिक कार्यक्रम है जिससे आम जनता को परेशानी होती है । 

हमने कहा- यह भी अजीब बात है कि मुसलमानों और ईसाइयों के कार्यक्रम तो धार्मिक होते हैं और कोई न कोई जिहाद होते हैं । इसलिए इन्हें अपने घरों में मनाने में भी सोचना पड़ता है और हिंदुओं के होली, दिवाली, दुर्गा पूजा और पथ संचलन और भगवा रैली आदि सब कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं । इसलिए इन्हें स्कूलों में भी मनाया जाना चाहिए ।  क्या मुसलमानों और ईसाइयों की कोई संस्कृति नहीं होती ? 

हमें तो याद है कि हम स्कूलों में बच्चों के साथ सभी धर्मों के त्योहार बड़े सद्भाव और उत्साह से मनाते थे । 

बोला- तभी तो भारत में हिन्दू धर्म खतरे में पड़ गया । अब देखो मोदी जी, योगी जी, धामी जी आदि लगे तो हुए हैं सब काम छोड़कर । जब धर्म बचेगा तभी तो देश बचेगा । 

हमने कहा- लेकिन यह कैसा धर्म है जहाँ बिना किसी महमूद ग़ज़नवी के बिना ही राम मंदिर में करोड़ों का गबन हो गया । 

बोला- चुप, जो राम को बदनाम करने की कोशिश की तो । योगी जी ने कहा है कि जब तक फैसला न हो जाए तब तक इस बारे में कोई बात करके राम को बदनाम न किया जाए । 

हमने कहा- अजीब तमाशा और तर्क है । बदनामी चोर की होती है या जिसके घर चोरी हुई है उसकी ? कहीं इस तरह चोरों को बचाने का इरादा तो नहीं है ? सोमनाथ पर डाके से शिव बदनाम होते हैं या महमूद ग़जनवी ? हाँ, उस समय के देश-समाज में रक्षकों की कायरता जरूर रेखांकित होती है । 



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