Jun 5, 2026

05-06-2026 ध्यान रखना मास्टर !


05-06-2026 


ध्यान रखना मास्टर !




हमारे घर का गेट सामान्य गेट है । न बहुत वज़नी और न ही सजावटी । न कहीं कोई नेमप्लेट और न ही वर्तमान या भूतपूर्व पद का उल्लेख । हालाँकि घर में कई अधिकारी, डॉक्टर, प्रिंसिपल आदि हैं फिर भी पता नहीं क्यों हमें यह भोंडा प्रदर्शन लगता है ।मोहल्ले वाले जानते हैं कि यहाँ मास्टर जी रहते हैं और कोई रजिस्ट्री या डिलीवरी वाला आता है तो उसके पास मोबाइल नंबर होता ही है । फोन कर लेता है । कौन तीन मिनट के लोकल कॉल का एक रुपया लगता है । हाँ, एक तरफ पानी का बिल देने वाले ने एक नंबर अटका रखा है और अब जनगणना वाले ने उसी के पास एक मकान नंबर जैसा कुछ लिख रखा है ।  


डिग्री और पद मनुष्य की बहुत बड़ी कुंठा होती है ।वह उसे प्रदर्शित किया बिना रह नहीं पाता । वर्तमान नहीं तो भूतपूर्व ही सही पद तो है । शुरू में भूतपूर्व पूरा लिखवाते हैं । फिर केवल भू. पू. किया और उसके बाद केवल पू. और बाद में तो वह संकोच भी गायब । पू. को भी थोड़ा घिसवा देते हैं । अपना परिचय ऐसे देते हैं जैसे कि अब भी उसी पद पर हैं । वैसे आज से कोई पचास साल पहले पोरबंदर में हमारे साथ अंग्रेजी के एक एंग्लो अमेरिकन अध्यापक हुआ करते थे चार्ल्स मैसी । मेरठ विश्वविद्यालय से पीएचडी भी थे ।  एक दिन हमने वैसे ही सहज भाव से कह दिया और मैसी भाई क्या हाल हैं ?

मैसी साहब तो बिफर पड़े- नो मैसी भाई मिस्टर जोशी,  कॉल मी डॉक्टर मैसी ।


वैसे आज भी कुछ ऐसे संकोची और विनम्र संत होते हैं जो लोगों की लाख कोशिशों के बावजूद न तो डिग्री दिखाते हैं बल्कि ऐसे और कहते हैं कि मैं पढ़-वढा कुछ नहीं हूँ ।  


तो प्रिय पाठकगण, चाय का गिलास थामे थामे तोताराम अचानक घर के गेट के पिलर के पास गया और लौट आया । दो घूंट लेने के बाद फिर वही प्रक्रिया ।

 

हमने पूछा- क्या बात है तू तो गेट के चक्कर ऐसे लगा रहा है जैसे मोदी जी चुनाव के समय बंगाल के । कभी झालमुड़ी खा रहे हैं तो कभी यमुना में छठ स्नान तक का साहस न जुटा पाने वाले, हुगली में नौका विहार कर रहे हैं भले ही लोग उसे नौका विहार, मौका विहार या धोखा विहार जाने क्या क्या कह रहे हैं । 


बोला- मास्टर, समय बहुत खराब है । सावधानी हटी और दुर्घटना घटी । पता नहीं, कब तेरे मकान के इस पिलर पर कोई अपना नाम लिख जाए और चार दिन बाद दावा करने लग जाए कि यह मकान मेरा है । देखा नहीं, पिछले कुछ दिनों में इलाहाबाद का प्रयाग हो गया, कलकत्ता का कोलकाता हो गया हालाँकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद हाईकोर्ट और कलकत्ता विश्वविद्यालय नाम अभी तक चल रहे हैं ।एक मिनट में सरदार पटेल स्टेडियम नरेंद्र मोदी हो गया । किंग्स वे राजपथ, रेसकोर्स लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ । अब बस मोदी धाम,मोदी-मंदिर बाकी रह गए हैं जहाँ लोग अपने अधिकारों के तहत नही बल्कि आरती, जागरण, प्रसाद चढ़ाने के लिए जाया करेंगे । 


हमने कहा- किसी के लिखने से क्या होता है ? झुंझुनू में एक बनिया परिवार था जलेबी चोर । उनके किसी पूर्वज ने लालच में खाने के साथ साथ दो चार जलेबी जेब में भी रख ली होगी और मजाक मजाक में लोगों ने तलाशी भी ले ली होगी तो नाम पद गया ‘जलेबीचोर’ । लोग सीधे सरल हुआ करते थे सो नाम चल निकला । अब कहीं उनके वंशजों को खयाल आया तो सरनेम बदल लिया ‘अग्रवाल’ । फिर भी पुराने लोग जब पूछने आते हैं तो वही ‘जलेबीचोर’ पूछते हैं । बहुत देर बाद बात इस पर स्पष्ट होती ही कि जी हमारा मतलब उन्हीं से है जिन्हें पहले जलेबीचोर कहते थे ।

 

बोला- अब वह बात नहीं है । अब तो किसी बंदोपाध्याय ने बनर्जी, बसु ने बासु, घोष ने घोषाल, मुखोपाध्याय ने मुखर्जी बता दिया तो वोटर लिस्ट से नाम कट जाता है । तेरे तीनों बच्चों के हायर सेकेंडरी के सर्टिफिकेट में पोर्टब्लेयर नाम लिखा हुआ है लेकिन अब कहाँ है पोर्टब्लेयर ? जल्दी से अमित शाह जी से मिलकर श्री विजयपुरम करवा ले । अगर उन्हें नकली प्रमाण पत्र के नाम पर परेशान किया गया तो मुश्किल हो जाएगी। और तू भी अपना रीजनल कॉलेज ऑफ एज्यूकेशन, भोपाल से अपनी बीएड की डिग्री में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की जगह ‘माँ वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करवा ले । 


याद रख तुझे डिग्री दिखाने से कोई हाई कोर्ट छूट देने वाला नहीं है । 


हमने कहा- देखेंगे । अभी क्या कोई कल ही चेंज हुआ जा रहा है ?


बोला- यह राम भक्तों का रामराज्य है और देश ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’। जैसे एक धोबी ने अपने घर में सीता के बारे में कुछ कहा लेकिन पता लगते ही राम ने सीता के वनवास का निर्णय ले लिया वैसे ही अगर किसी काँवड़िए, गौरक्षक और स्वयंसेवक ने उलटे मन से भी सुझाव दे दिया तो ऐसे सुझावों को लागू करने के लिए भले ही विपक्ष को बाहर निकालना पड़े लेकिन काम होगा फटाफट । बचाव में ही सुरक्षा है । जो भी आवश्यक कार्यवाही हो, शुरू कर ही दे ।


हमने कहा- लेकिन बरकतुल्लाह तो बहुत बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे । सुभाष से भी पहले राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में काबुल में निर्वासन में बनी पहली भारत सरकार में वे प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए थे । 


बोला- वह सब तो ठीक है लेकिन थे तो मुसलमान । अब बता मुसलमान कैसे भारतभक्त हो सकता है ? भले ही वह जस्टिस सय्यद आगा हुसैन,अशफाकुल्ला या अब्दुल हमीद या सोफिया कुरैशी या दीपक मुहम्मद कोई भी हो । वैसे ही जैसे कोई भी हिन्दू देशद्रोही नहीं हो सकता चाहे वह सर शोभासिंह, सर शादीलाल, हंसराज वोहरा, फणीन्द्र नाथ, जय गोपाल, मनमोहन, ललित कुमार ही क्यों न हो ।     



-रमेश जोशी    



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jun 4, 2026

03-06-2026 धोए कान : हुए स्नान


03-06-2026 

धोए कान : हुए स्नान  











कल पानी नहीं आया । 20 मिनट मोटर व्यर्थ ही चली जैसे किसान आंदोलन में  700 अच्छे भले किसान अच्छे दिनों की बलि चढ़ गए । न मोदी जी ने मिलने योग्य समझा और न ही संसद ने श्रद्धांजलि देने लायक । फोन किया तो जलदाय विभाग वालों ने उत्तर दिया- हमने तो खोल दिया । एक बार फिर मोटर चलाकर देख लें । अब सरकारी उपलब्धियां है जितनी मर्जी हों उतनी पहुँचें । पहुँचें और न पहुँचे तो भी क्या कर लोगे । 10 मिनट और मोटर चलाई तो बमुश्किल कोई पाँच बाल्टी पानी आया । टैंकर वाले को फोन कर दिया कि कल सुबह सबसे पहले हमारा नंबर लगा देना । बस, उसीका  इंतजार कर रहे थे कि तोताराम हाजिर ।

बोला- ऐसे कैसे मोदी जी तरह बैठा है कि ट्रम्प परमीशन दें तो रूस से तेल खरीदे ।

हमने कहा- हमारी कोई एप्सटीन फ़ाइल किसी के पास नहीं है या किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि एक दिन में हमारा कैरियर में खराब कर दें । हम नेहरू जी के जमाने के अपॉइन्टी हैं । भले ही उन्होंने हमें मोदी जी की तरह नियुक्ति पत्र नहीं दिया हो ।रात को भी दो लोटे पानी नहीं डाला सो सोचते हैं कि टैंकर वाला आ जाए तो फ्रेश होकर ही चाय पियें । 

बोला- मोदी जी ने मितव्ययिता के लिए कहा है । पानी भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए । जल ही जीवन है । जल है तो कल है । 

हमने कहा- कल की बात तो कल देखी जाएगी, यहाँ तो एक एक दिन भारी पड़ रहा है । रोज हर चीज के भाव बाढ़ रहे हैं । सुना है सरकार ने चुपचाप सोना बेच दिया है ।देश के 2 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित पेय जल नल से सप्लाई हो रहा है ।स्वच्छता में देश में  नंबर वन इंदौर में ‘सबका साथ सबका विकास’ के तहत मल और जल के  कनेक्शन उसी तरह से मिल जाते हैं जैसे ईडी से डरकर कोई दलबदलकर भाजपा में शामिल हो जाता है । असुरक्षित जल भी पूरा नहीं मिल रहा है ।  लगता है अब मुर्दों को भी नहलाने की जगह स्पंज किया जाएगा ।  

बोला- ज्यादा नहाने से भी कई समस्याएं पैदा होती हैं । इसीलिए पूजा में भी देवताओं को दूब के ब्रश से दो छींटों में स्नान करवा दिया जाता है । अपने टोंक जिले में जिला शिक्षा कार्यालय में एक प्रशासनिक अधिकारी हैं  दीनदयाल कसेरा । वे पिछले पाँच सालों से एक लीटर पानी से स्नान करते हैं और इसका जगह जगह प्रदर्शन और प्रशिक्षण भी देते हैं । 

हमने कहा- अधिकारी हैं तो उन्हें तो सब अधिकार हैं जैसे शुभेन्दु अधिकारी । चाहें तो ईद पर कुर्बानी में टांग अड़ा दें और चाहें तो योगी जी की 14 साल से बड़ी गौमाता को काटने की छूट दे दें । 

बोला- वे अधिकारी होने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांगानेर विभाग के व्यवस्था प्रमुख भी हैं । स्वयंसेवक सुविधा नहीं, सेवा को महत्त्व देता है । वह बिना किसी सुविधा के भी जब मौका देखता है सेवा कर ही डालता है । उसे सेवा के सामने सुविधा की परवाह नहीं होती । इतिहास उठाकर देख, 90 वर्ष तक स्वयंसेवकों ने ठंड में हाफ पेंट में  ठिठुरते हुए सेवा की है । बहुत से स्वयंसेवक तो 35-40 वर्ष तक भीख मांगकर भी सेवा करते रहे । निर्धन इतने कि संस्था तक रजिस्टर्ड नहीं और न ही कोई बैंक खाता । 

हमने कहा- तोताराम, पानी का क्या है । पानी तो आँख में होना चाहिए जैसे कि ग़ालिब कहते हैं-

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल 
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है । 

हयादार,  खुद्दार तो चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाते हैं और बेशर्म गटर में भी बेशर्मी से तैरते रहते हैं । सुना नहीं, जर्मनी के हेस्से राज्य (वित्तीय केंद्र फ्रैंकफर्ट) के वित्त मंत्री थॉमस शेफर ने मार्च 2020 में आत्महत्या कर ली थी। 54 वर्षीय शेफर का शव फ्रैंकफर्ट के पास एक रेलवे ट्रैक पर मिला था। उनकी मृत्यु का कारण कोविड-19 महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों से गहरी चिंता और तनाव बताया गया था।

और एक ये ऐसे बेशर्म हैं कि न अर्थव्यवस्था संभलती है और न ही कानून व्यवस्था । ज्यादा पूछो तो कह देते हैं देश का विभाजन गाँधी  के कारण हुआ, हिन्दू खतरे में है, रुपया कांग्रेस के कारण गिर रहा है और ज्यादा तकलीफ है तो पाकिस्तान चले जाओ ।  

बोला- मन पवित्र होना चाहिए । तन का क्या, नश्वर है । कबीर कहते हैं- न्हाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाय । 
हमने कहा- और मन का क्या । उसकी तो केवल बात ही होती है । काम से क्या लेना देना । 

-रमेश जोशी 


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jun 2, 2026

02-06-2026 मियाँ की जूती मियाँ के सिर


02-06-2026 मियाँ की जूती मियाँ के सिर


तोताराम ने बैठते ही पूछा- माताजी का क्या हाल है ? हमने कहा- क्या बहकी-बहकी बात कर रहा है । इस गई 20 अप्रैल को माताजी को गुजरे 26 साल हो गए और आज तू हाल पूछ रहा है ।वैसे तो प्राण निकलने के साथ ही सब खेल खत्म हो जाता है लेकिन धर्म के नाम पर मुफ़्त का माल खाने वाले परजीवी लोग स्वर्ग नरक का चक्कर चलाकर कभी श्राद्ध, कभी बरसी के नाम पर ठगते रहते हैं । मरे हुए के नाम पर जिंदा का जीना हराम किये रहते हैं । अगर इसी रफ्तार से जगद्गुरु की वैज्ञानिक सोच बढ़ती रही तो ये लोग आपके मृत माता-पिता के नाम से अपना रिचार्ज करवाने लगेंगे कि यजमान आपकी माताजी के ताजा हालचाल मिलते रहने के लिए तीन हजार का जियो का रिचार्ज करवा दीजिए । बोला- मैं ताई के हालचाल थोड़े पूछ रहा हूँ । मैं तो योगी जी की माताजी का हाल जानना चाहता था । हमने कहा- तो फिर तुझे योगी जी से पूछना चाहिये । उनकी माताजी सावित्री देवी पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं । अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ होता तो अब तक तो सारे देश को खबर हो जाती । बोला- मैं जन्म देने वाली माता की नहीं, बल्कि बिना घोषित किए ही राष्ट्र की स्वतः सनातन माता ‘गौमाता’ की बात कर रहा हूँ जिसका कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं ने उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ कहकर अपमान किया है । इन पर तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलता चाहिए । और फौरी न्याय के बतौर इनके घरों पर बुलडोज़र तो तत्काल चला ही दिया जाना चाहिए । हमने कहा- इस संसार में सभी पशु ही तो है । शेर, बाघ, भेड़िया हिंस्र पशु हैं; गाएं, भैंस, बकरी, भेड़, घोडा, गधा आदि पालतू पशु हैं । ये चौपाये होते हैं । मनुष्य के दो पैर होते हैं । वह अपने आगे के दो पैरों को हाथों की तरह काम में लेकर औजार बना सकता है, खेती कर सकता है, समाज का निर्माण करता है इसलिए वह एक सामाजिक पशु ( सोशियल एनिमल ) है । जैसे ही मनुष्य ने दो पैरों पर खड़े होना शुरू किया वह पशु से भिन्न हो गया । बंदर भालुओं को भी राम ने अपने साथ लिया क्योंकि वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे और मनुष्य के परिवार के निकट ही थे । साहित्य-संगीत-कला विहीन अंध भक्त भी तो बिना सींग पूंछ के पशु ही हैं । लालची को धन-पशु कहते हैं ।कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक ऋक्षराज जांबवान की पुत्री जांबवती थी । बोला- गाय हमें दूध पिलाती है इसलिए वह माता है, सभी देशवासी उसका दूध पीते हैं इसलिए वह पशु नहीं राष्ट्रमाता है । हमने कहा- अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ? फिर वह नॉर्थ ईस्ट और गोवा में माता क्यों नहीं है ? अगर माता है तो माता है फिर चाहे कहीं भी, कितनी भी उम्र की हो । मुसलमानों को हड़काने के लिए कुछ और, चुनाव के लिए कुछ और, और हिन्दू मालिकों के बूचड़खानों के लिए कुछ और । हो सकता है कल को मछली हाथ में लटकाकर बंगाल में चुनाव प्रचार करने की तरह नागालैंड में गाय काटते हुए या मंगलवार को गौमांस खाने का वीडियो जारी करना पड़ जाए । और फिर भई हमारे पासपोर्ट में तो हमारी वास्तविक माता का ही नाम लिखा हुआ है । जो माता मानते हैं उनके रिकार्ड में चेंज करवा दे । वैसे सावरकर गाय को माता नहीं, एक उपयोगी पशु मात्र मानते थे । तो क्या सावरकर पर भी एफ आई आर करोगे ? और किरण रिजिजू तो घोषित गाय भक्षक है । उसे भाजपा और मंत्रीमंडल से तो कम से कम अभी हटा दो । और बीफ खाने वाले फादरलैंड इज़राइल से तो संबंध तोड़ ही लो । बोला- फिलहाल तो इस मादनी का कुछ करना पड़ेगा जिसने मियाँ की जूती मियाँ के सिर मार दी ।




 

 




पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jun 1, 2026

01-06-2026 आज का मेन्यू


02-06-2026 

मियाँ की जूती मियाँ के सिर 






तोताराम ने बैठते ही पूछा- माताजी का क्या हाल है ?

हमने कहा- क्या बहकी-बहकी बात कर रहा है । इस गई 20 अप्रैल को माताजी को गुजरे 26 साल हो गए और आज तू हाल पूछ रहा है ।वैसे तो प्राण निकलने के साथ ही सब खेल खत्म हो जाता है लेकिन धर्म के नाम पर मुफ़्त का माल खाने वाले परजीवी लोग स्वर्ग नरक का चक्कर चलाकर कभी श्राद्ध, कभी बरसी के नाम पर ठगते रहते हैं । मरे हुए के नाम पर जिंदा का जीना हराम किये रहते हैं । अगर इसी रफ्तार से जगद्गुरु की वैज्ञानिक सोच बढ़ती रही तो ये लोग आपके मृत माता-पिता के नाम से अपना रिचार्ज करवाने लगेंगे कि यजमान आपकी माताजी के ताजा हालचाल मिलते रहने के लिए तीन हजार का जियो का रिचार्ज करवा दीजिए । 

बोला- मैं ताई के हालचाल थोड़े पूछ रहा हूँ । मैं तो योगी जी की माताजी का हाल जानना चाहता था । 

हमने कहा-  तो फिर तुझे योगी जी से पूछना चाहिये । उनकी माताजी सावित्री देवी पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं । अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ होता तो अब तक तो सारे देश को खबर हो जाती ।

बोला- मैं जन्म देने वाली माता की नहीं, बल्कि बिना घोषित किए ही राष्ट्र की स्वतः सनातन माता ‘गौमाता’ की बात कर रहा हूँ जिसका कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं ने उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ कहकर अपमान किया है । इन पर तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलता चाहिए । और फौरी न्याय के बतौर इनके घरों पर बुलडोज़र तो तत्काल चला ही दिया जाना चाहिए । 

हमने कहा- इस संसार में सभी पशु ही तो है । शेर, बाघ, भेड़िया हिंस्र पशु हैं; गाएं, भैंस, बकरी, भेड़, घोडा, गधा आदि पालतू पशु हैं । ये चौपाये होते हैं । मनुष्य के दो पैर होते हैं । वह अपने आगे के दो पैरों को हाथों की तरह काम में लेकर औजार बना सकता है, खेती कर सकता है, समाज का निर्माण करता है  इसलिए वह एक सामाजिक पशु ( सोशियल एनिमल )  है । जैसे ही मनुष्य ने  दो पैरों पर खड़े होना शुरू किया वह पशु से भिन्न हो गया । बंदर भालुओं को भी राम ने अपने साथ लिया क्योंकि वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे और मनुष्य के परिवार के निकट ही थे । साहित्य-संगीत-कला विहीन अंध भक्त भी तो बिना सींग पूंछ के पशु ही हैं । लालची को धन-पशु कहते हैं ।कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक ऋक्षराज जांबवान की पुत्री जांबवती थी । 

बोला- गाय हमें दूध पिलाती है इसलिए वह माता है, सभी देशवासी उसका दूध पीते हैं इसलिए वह पशु नहीं राष्ट्रमाता है । 

हमने कहा- अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं ।  उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ? फिर वह नॉर्थ ईस्ट और गोवा में माता क्यों नहीं है ? अगर माता है तो माता है फिर चाहे कहीं भी, कितनी भी उम्र की हो । मुसलमानों को हड़काने के लिए कुछ और, चुनाव के लिए कुछ और, और  हिन्दू मालिकों के बूचड़खानों के लिए कुछ और । हो सकता है कल को मछली हाथ में लटकाकर बंगाल में चुनाव प्रचार करने की तरह नागालैंड में गाय काटते हुए या मंगलवार को गौमांस खाने का वीडियो जारी करना पड़ जाए ।  

और फिर भई हमारे पासपोर्ट में तो हमारी वास्तविक माता का ही नाम लिखा हुआ है । जो माता मानते हैं उनके रिकार्ड में चेंज करवा दे । वैसे सावरकर गाय को माता नहीं, एक उपयोगी पशु मात्र मानते थे । तो क्या सावरकर पर भी एफ आई आर करोगे ? और किरण रिजिजू तो घोषित गाय भक्षक है । उसे भाजपा और मंत्रीमंडल से तो कम से कम अभी हटा दो ।  और बीफ खाने वाले फादरलैंड इज़राइल से तो संबंध तोड़ ही लो । 

बोला- फिलहाल तो इस मादनी का कुछ करना पड़ेगा जिसने मियाँ की जूती मियाँ के सिर मार दी । 



 




पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach