05-05-2026
सम्पूर्ण सेवा
आज जैसे ही तोताराम आया, हमने कहा- तोताराम, तू अपनी भाभी से चाय लेकर पी लेना । हम तो जरा पैकिंग में व्यस्त हैं । कपड़े तो दो चार रख लिए लेकिन वह भगवा वाला पटका नहीं मिल रहा है ।
बोला- क्यों, लगता है बंगाल का रिजल्ट आते ही राघव चड्ढा की तरह हृदय परिवर्तन हो गया ?
हमने कहा- राघव चड्ढा की तो सुनते हैं ई डी के छापे से चड्डी ढीली हो गई थी लेकिन हमारे यहाँ तो न ई डी आई और न ही कोई एप्सटीन फ़ाइल खुली । और न ही हमें करोड़ों की कोई डील चाहिए । हम तो देश के भविष्य को लेकर संवेदनशील हो गए हैं ।
बोला- वैसे अब जब से गंगोत्री से गंगासागर तक और कश्मीर से कच्छ तक जब कमल खिल गया तो फिर किसी को कुछ नहीं मिलने वाला । हो सकता है अब बीजेपी में शामिल होने वालों को कुछ देने की बजाय दस-बीस हजार रुपए ऊपर से लिए और जा रहे हों । अब तक तो फ्री में मिलने वाली झालमुड़ी भी खत्म हो गई होगी । इस समय तो जीत के नशे में लोग इतने बावले हो रहे हैं कि महिला रिजर्वेशन बिल के नाम पर सत्ता में आये लोग एक पुरुष को ममता जैसी साड़ी पहनाकर उसका जुलूस निकालकर मज़ाक और बना रहे हैं । ऐसे में तेरे भाजपा में शामिल होने से क्या फ़र्क़ पड़ जाएगा ? अगर तेरे संस्कार, हिंदुत्त्व और राष्ट्रीयता ज्यादा ही जाग्रत हो गए हों तो चल अपने मोहल्ले का एक लड़का कई दिनों से विराट हिन्दू सम्मेलन के चक्कर में होर्डिंग लगवा रहा था उसी के हाथों तुझे पटका पहनवा भाजपा में दीक्षित करवा देते हैं ।
फिर भी इस हृदय परिवर्तन का कारण क्या है ?
हमने कहा- हम चाहते हैं कि मोदी जी को सेवा का सम्पूर्ण अवसर दिया जाए । बेचारे सब कुछ छोड़छाड़कर सेवा करने आए हैं और लोग हैं कि उसमें तरह तरह से बाधा डाल रहे हैं । और कुछ नहीं तो साठ साल पहले मरे हुए नेहरू जी दो करोड़ नौकरियां देने में टांग अड़ा देते हैं । आखिर किस किस बाधा से लड़ें ।
बोला- सेवा तो कोई भी किसी भी रूप में करे वह सदैव सम्पूर्ण होती है ।
इसी के लिए ईशोपनिषद (और बृहदारण्यक उपनिषद) का प्रसिद्ध शांति मंत्र है:
"ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥"
एक छोटे से स्वयंसेवक से लेकर ज्ञानेश कुमार तक सबकी सेवा सदैव सम्पूर्ण होती है । वह हर स्थिति में पूर्णता की ओर ही जाती है ।
हमने कहा- फिर भी हम देखते हैं कि मोदी जी ने देश सेवा के लिए अच्छा भला पारिवारिक जीवन छोड़ा, भीख माँगने जैसा मस्ती का असीमित पैकेज वाला कैरियर छोड़ा और अब लोग हैं कि सेवा ही नहीं करने दे रहे हैं । सेवा करने के लिए उन्हें कभी केदारनाथ की गुफा में ध्यान लगाना पड़ता है, तो कभी रोड़ शो करना पड़ता है, कभी प्रधानमंत्री का काम छोड़कर हर रेल को हरी झंडी दिखानी पड़ती है तो कभी डमरू बजाना पड़ता है तो कहीं त्रिशूल लहराना पड़ता है तो कभी कहीं भी किसी ऐसी वैसी दुकान पर झालमुड़ी खानी पड़ती है, कभी हुगली में अकेले कैमरा लेकर बैठना पड़ता है ।अब देश सेवा का काम कब करें । ऊपर से ये विपक्ष वाले ‘नरेंदर सरेंडर’ करने लग जाते हैं ।
अब तो सभी पार्टियों को चाहिए कि जब तक मोदी जी देश का अपने मन और योजना के अनुसार विकास न कर लें तब तक पंचायत से पार्लियामेंट तक की सारी सीटें हमेशा के लिए मोदी जी के नाम कर दें जिससे वे संविधान, इतिहास जो कुछ चाहें सुविधानुसार बदलकर देश का विकास कर ही डालें । यह रोज रोज का रोना तो बंद हो । गाँधी नेहरू द्वारा बिगाड़ा हुआ देश एक बार ढंग से शून्य से शिखर तक सेट कर दें ।
अगर ऐसा हो जाए तो कम से कम 2047 तक सब कुछ करकरा के झोला उठाकर हिमालय में अनंत शांति और विश्राम के लिए चले तो जाएँ ।
बिना बात इतने वर्षों से देश और दुनिया को जो टेंशन बना हुआ है कम से कम उससे तो पीछा छूटे ।
-रमेश जोशी
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