Feb 11, 2017

 सर्व संकट निवारक शल्य क्रिया 

आज तोताराम आया तो बहुत खुश था | कहने लगा- मास्टर, मिल गया सभी दुखों के निवारण का इलाज |

हमने कहा- क्या संजीवनी बूटी मिल गई या फिर कल्प वृक्ष या कामधेनु हाथ लग गई ?

बोला- इनमें से तो कुछ भी नहीं लेकिन जापान के टोयामा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के न्यूरोन से तकलीफदेह यादों को मिटाने में सफलता पा ली है |अब वे लेजर से दैनिक और ज़रूरी यादों को बचाते हुए तकलीफदेह यादों की सफाई कर देंगे | 

हमने कहा- वास्तव में अच्छी सूचना है |आज के समय में तो किसान, मजदूर, विद्यार्थी, गृहस्थ यहाँ तक कि साधु-सन्यासी तक सब परेशान हैं |किसी को नौकरी नहीं मिल रही,किसी को सूदखोर सता रहा है, किसी की आमदनी में गृहस्थी की गाड़ी नहीं चल रही, किसी की खेती पर पाला पड़ गया | हाँ, नेता सभी सुखी हैं चाहे सत्ताधारी पार्टी का हो या विरोधी दल का |नेता वर्तमान हो या भूतपूर्व या फिर भावी, मंत्री पद पर हो या सलाहकार मंडल में लेकिन सभी के लिए यह लोकतंत्र सभी साधन-सुविधाएँ जुटा ही देता है |किसी को कोई तकलीफ नहीं है |

बोला- क्यों नेताओं को कोई कष्ट नहीं है क्या ?अपने से पहले की सभी सरकारों को नाकारा और राष्ट्र विरोधी सिद्ध करना, उनके द्वारा किए गए सभी कामों को गलत सिद्ध करने की मानसिकता और उन्हें कुछ देखने, सुनने और करने ही नहीं देती | सारे दिन ईर्ष्या, चुगली, निंदा और छिद्रान्वेषण की मानसिकता में रहना क्या कोई छोटा कष्ट है ? अच्छे कपड़े, बढ़िया खाना, यात्रा के लिए दरवाजे पर खड़ा चार्टर्ड प्लेन, भाषण की भड़ास के लिए रेडियो, टी.वी. और अखबार और हाँ में हाँ मिलाने के लिए इधर-उधर चारों तरफ चमचे |फिर भी चैन नहीं है | यह चौबीस घंटे की मर्मान्तक पीड़ा है | 

हमने कहा- तो इसका उपाय क्या है ? अब कांग्रेस के नेतृत्त्व में देश आज़ाद हुआ, नेहरू जी पहले प्रधान मंत्री थे, उन्होंने देश में बड़े-बड़े कारखाने लगवाए, विज्ञान के उच्च शिक्षण संस्थान खुलवाए, बाँध बनवाए, उनकी बेटी ने देश को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया, पाकिस्तान पर नकेल लगा रखी थी, बांग्ला देश बनवाया, दुनिया में उसकी धाक थी |किसी भी सरकार ने कुछ भी किया तो वह देश के लिए ही तो किया |अब उसे पार्टियों में बाँटकर देखने और बिना बात गलत प्रचारित करने में शक्ति लगाने में क्या फायदा ? अरे, काम करो तो सही, अच्छा या बुरा सब को आज नहीं तो कल पता  चल ही जाएगा |देश की जनता अंधी तो नहीं है |बिना बात किसी को नीचा दिखाने के लिए क्यों परेशान हो रहे हो ? अपनी शक्ति किसी ढंग के काम में लगाओ |

बोला- मेरा भी यही विचार है | मनरेगा को बुरा भी बताएँगे और उसका स्मारक भी बनाएँगे बल्कि बढ़ चढ़कर बजट का प्रावधान भी करेंगे |जब बुरा कार्यक्रम था तो छोड़ क्यों नहीं देते |

हमने कहा- छोड़ कैसे दें |यही तो राजनीति की दुधारू गाय है |और मनरेगा का स्मारक ही क्या, किसी तथाकथित महान आत्मा का स्मारक बनवाना भी बढ़िया काम है |३० लाख पूजास्थलों वाले इस देश में कौन कहेगा कि महापुरुषों के स्मारक मत बनाओ लेकिन स्मारक बनाने से ही तो काम नहीं चल जाएगा और फिर इस देश ३६ करोड़ देवता हैं तो ७२ करोड़ महापुरुष भी हैं |इनके स्मारकों के बाद जिन्दा लोगों के लिए तो रहने की जगह भी नहीं बचेगी |

बोला- यही तो  मैं कहना चाहता था कि यदि मोदी जी के दिमाग से कांग्रेस की तकलीफदेह यादें खुरचकर हटा दी जाएँ तो उनके सभी कष्ट दूर हो जाएँगे और फिर शांतिपूर्वक काम कर सकेंगे |काम न भी करेंगे तो कम से कम दुखी आत्मा को शांति तो मिलेगी | 

हमने कहा- लेकिन तोताराम, यह शांति उनके लिए बहुत महँगी पड़ेगी |फिर बचेगा क्या ? फिर चुनावी रैली और मन की बात में बोलेंगे क्या ?वैसे हमारा तो मानना है कि इस देश में एक मोदी जी ही सच्चे कांग्रेसी हैं |कोई कांग्रेसी भी कांग्रेस को इतना याद नहीं करता होगा जितना मोदी जी |इसलिए भले ही मोदी जी को कांग्रेस-स्मृति से कष्ट होता है लेकिन कांग्रेस के जीवन के लिए मोदी जी का यह कांग्रेस फोबिया बहुत ज़रूरी है |

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