Jul 10, 2026

09-07-2026 मुकरी : हड़कंप


09-07-2026    

 

 मुकरी : हड़कंप 




दिन में चार बार जो खुद के 

कहे हुए से पलटी मारे 

जाने क्या क्या बकता रहता 

सोच समझ या बिना बिचारे 


घर बाहर मचता हड़कंप 

क्यों सखि पागल ? 

ना सखि ट्रम्प 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

09-07-2026 मुकरी : सरेंडर


09-07-2026 

 मुकरी : सरेंडर 







बनता  छप्पन इंची छाती 

दुनिया कहती चपड़कनाती 

आँख दिखाने के मौके पर 

इसकी दुम नीची हो  जाती 



जिस तिस आगे करे सरेंडर 


क्यों सखि  गीदड़  ? 


नहीं नरेंदर 


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

09-07-2026 मुकरी : अनपढ़


 09-07-2026   

 मुकरी : अनपढ़ 




दो  दिन भी घर में ना टिकता 

दुनिया भर में फिरता  रहता 

उलटी पुलटी बात बनाए 

एक्स्ट्रा टू ए बी ले आए  


जगद्गुरू की साख डुबो दी  

क्यों सखि अनपढ़ 

ना सखि मोदी 


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

10-07-2026 ट्रस्ट की कुदृष्टि

10-07-2026  

ट्रस्ट की कुदृष्टि 

( 'चुनाव के बाद उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे' - बंगाल में चुनाव भाषण में अमित शाह- 4 मई 2026 ) 




 

 

हम भी कितने मूर्ख थे किया ट्रस्ट पर ट्रस्ट 

भरे हुए थे ट्रस्ट में दुनिया भर के भ्रष्ट 

दुनिया भर के भ्रष्ट, बज गया जग में डंका 

भक्त अयोध्या और  विभीषण लूटे लंका 

कह जोशी अब चमत्कार 'चाणक्य' दिखाएं

इनको सीधा  करने को उल्टा लटकाएं । 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 8, 2026

07-07-2026 हनुमान जी का दल बदल


07-07-2026 

हनुमान जी का दल बदल 





जैसे कोई ट्रेवलिंग सेल्समैन छह दिन घूमघाम कर एक दिन के लिए घर आता है और फिर सूटकेस जमाकर निकल लेता है या जैसे मोदी जी 27 से 29 जून तक सशेल्स की ‘सम्मान समेट यात्रा’ से लौटे, सम्मान को सुरक्षित काँच की अलमारी में सजाया और फिर 6 जुलाई को केश सज्जा करवाकर, नए कपड़े लेकर, सम्मान समेटने के लिए इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया की यात्रा पर निकल गए वैसे ही तोताराम सुबह चाय पीकर गया था और लंच खाकर, दोपहर थोड़ा आराम  करके फिर चार बजे आ धमका । 

हमने कहा- मोदी जी ने तो सेवा के लिए घर परिवार छोड़ दिया । 20-20 घंटे रोज देश की सेवा के साथ साथ विश्वगुरु की जिम्मेदारी संभालने के लिए भागे फिरते हैं लेकिन तू घर पर क्यों नहीं टिकता ?

बोला- मैं चाय पीने नहीं आया हूँ । आज मंगलवार है । देश दुनिया में भूतपिशाच बहुत उपद्रव मचा रहे हैं सो चल जयपुर रोड़ तक चलते हैं । घूमना भी हो जाएगा और हनुमान जी के दर्शन भी । 

हमने कहा- तो क्या लौट आये ? 

बोला- कौन ? मोदी जी तो 11-12 जुलाई को लौटेंगे । फिर कहाँ का कार्यक्रम है मुझे पता नहीं । और हनुमान जी के कहीं जाने का सवाल नहीं उठता । 

हमने कहा- क्या पता, हमने तो कल एक वीडियो देखा था जिसमें हनुमान जी लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड़ शो में नाच रहे थे लेकिन अभी तक न तो किसी संस्कारी हिन्दू की भावना आहत हुई और न ही कहीं कोई एफ आई आर हुई । 

बोला- यह हमारा आंतरिक मामला है जैसे राम मंदिर की चोरी । हमारे राम, हमारा मंदिर, हम कुछ भी करें । कांग्रेस, राम मंदिर में दर्शन के लिए अभी तक नहीं गए लोग और जिन्होंने राम मंदिर के लिए कोई चंदा नहीं दिया उन्हें कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है । हम हनुमान को नचाएं या राम को स्कूल जाने की उम्र में गर्भगृह में बैठा दें हमारी मर्जी । हाँ, अगर कोई अन्य पार्टी या धर्म का व्यक्ति ऐसा कुकर्म करता तो दिखाते कि धर्म, भावना और सत्ता की ताकत क्या होती है । 

हमने कहा- ठीक है । लेकिन जब हनुमान जी आउट ऑफ स्टेशन हैं तो चल कर क्या करेंगे । 

बोला- वे हनुमान जी थोड़े थे । उनके हाथ में राम का ध्वज थोड़े था । उनके हाथ में भाजपा का झण्डा था जिस पर कमल का निशान साफ दिखाई दे रहा था । हो सकता है कोई संस्कारी और धार्मिक कार्यकर्ता हो जो यूपी के अगले चुनाव में टिकट पाने के लिए यह नाटक कर रहा हो । 

हमने कहा- भले ही हम किसी संस्कारी संस्था के स्वयंसेवक नहीं हैं लेकिन राम के निस्वार्थ सेवक, पराक्रमी और सामान्य लोगों के लिए सहज सुलभ रहने वाले हनुमान जी का बहुत आदर करते हैं । अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए उनका वेश धारण करना हमें बहुत बुरा लगता है । अगर पार्टी में स्थान बनाना हो तो हनुमान बनने की जगह गाँधी नेहरू परिवार को गाली निकाल सकता था, किसी मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा सकता था, किसी मुसलमान के फ्रिज में गौ मांस ढूंढ सकता था, किसी मस्जिद के आगे सुंदरकांड का पाठ कर सकता था, किसी तृणमूल वाले सांसद पर अंडे फेंक सकता था । 

बोला- चल, मंदिर तो चलते हैं । पक्का मान अपने जयपुर रोड़ वाले हनुमान जी यथास्थान मिलेंगे । यह होगा कोई लखनऊ कानपुर का कार्यकर्ता । 

हमने कहा- तोताराम, यह भी हो सकता है कि ये असली हनुमान जी ही हों । अयोध्या में अपनी चौकीदारी के बावजूद ट्रस्ट के चंदा गिनती करने वाले अनट्रस्टवर्दी लोगों के कुकर्मों से दुखी होकर हमेशा के कहीं हिमालय में जा रहे हों । या उन्हें डर  हो कि बचने का कोई रास्ता न देखकर ट्रस्ट वाले कहीं इन्हें ही न फँसा दें कि हनुमान जी से पूछो । यहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं की है । या यह डर रहा हो कि कहीं कोई उनकी गदा ही न गायब कर दे । दुष्टता पर उतरे आदमी का कोई ठिकाना नहीं । गदा के बिना उनसे कौन डरेगा  जैसे यूएपीए, कोर्ट और ईडी के बिना सरकार से  । 

-रमेश जोशी 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 6, 2026

05-07-2026 चंदन-पानी


05-07-2026 

चंदन-पानी 



इससे पहले कि तोताराम पेपर लीक या राम मंदिर चोरी जैसा कोई मुद्दा उठाए या सरकारी कर्मचारियों की पे कमीशन, डीए की तर्ज पर चाय के साथ किसी खाद्य पदार्थ की मांग करे हमने अपनी तरफ से मोदी जी तरह उसे उलझाने के लिए प्रश्न उछाल दिया, पूछा- यह ई-20 क्या है ? कहीं भारतीय क्रिकेट की महान हस्ती, शाह साहब के साहबज़ादे जय शाह ने क्रिकेट का कोई नया फॉर्मेट ईजाद किया है ?  एक पिकनिक जैसे परंपरागत पाँच दिवसीय क्रिकेट मैच के आयोजन से आगे जाकर वन डे, डे नाइट, 20-20 आदि । 

बोला- ऐसे तो सर्वज्ञ होने का दावा करता है और फरक आस्ट्रेलिया और आस्ट्रिया का मालूम नहीं । यह टी-20 जैसा कुछ नहीं है ।  यह तो गड़करी के सुपुत्र द्वारा आविष्कृत एक ऐसा पदार्थ  है जो उत्पादक के लिए तो सस्ता है लेकिन ग्राहक को उसका कोई लाभ नहीं मिलता । वह पदार्थ है ‘ई-20’ । ई मतलब ईथेनॉल । गन्ने के रस जैसा कुछ । दुनिया में कोई देश इस तरह, इतना और इस उत्साह से इसे काम में नहीं ले रहा है लेकिन मोदी जी इसका ‘गटर-गैस’ की तरह जहाँ तहाँ प्रचार करते फिर रहे हैं । इस पदार्थ को 80 लीटर पेट्रोल या डीजल में 20 लीटर के हिसाब से मिलाया जाता है ।  इससे ऑटो मोबाइल क्षेत्र का तीव्र विकास होगा ?

हमने कहा- हमने तो सुना है कि इससे माइलेज कम हो जाता है और कार में कई तरह की खराबियाँ आ जाती हैं । 

बोला- तभी तो । ज्यादा चलाऊ पुख्ता चीजों से बाजार की गति थम जाती है । यूज एण्ड थ्रो और फिर नया लो । इसीसे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है जैसे कि उद्घाटन से पहले ही सड़क या पुल टूट जाए तो रूलिंग पार्टी की अर्थव्यवस्था सुधरती है । नकली दवा बनाने वाले और घटिया निर्माण करने वाले ही तो 40% कमीशन देंगे, पी एम केयर फंड की केयर करेंगे और इलेक्शन बॉन्ड खरीदेंगे । 

हमने कहा- एक योगी जी का 80-20 भी तो है ?

बोला- वह तो चुनाव जीतने और बुलडोज़र चलाने का एक फार्मूला है जिसमें 20 प्रतिशत मुसलमानों को 80 प्रतिशत हिंदुओं के लिए खतरा बताया जाता है । 

हमने कहा- लेकिन यह तो उनके नाथ पंथ के सिद्धांतों के खिलाफ है । तुझे पता होना चाहिए-

नाथ पंथ (विशेषकर गोरखनाथ संप्रदाय) का मुसलमानों के साथ एक गहरा और ऐतिहासिक रूप से समावेशी संबंध रहा है। इस पंथ ने सदियों से हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के अनुयायियों को अपने दर्शन और साधना से जोड़ा है। यह सनातन के बरक्स लोकधर्म है जो बुद्ध से होता हुआ कबीर तक जाता है । इसके मूल में शिव हैं जो कल्याण के देवता हैं और अर्द्ध नारीश्वर हैं । 


नाथ पंथ और इस्लाम के मुख्य जुड़ाव बिंदु:

  • मुस्लिम जोगी (फकीर): इस पंथ में एक समय में बड़ी संख्या में "मुस्लिम जोगी" शामिल थे। उत्तर प्रदेश (जैसे गोरखपुर), पंजाब और बंगाल में ऐसे कई परिवार आज भी हैं जो नाथ परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इस्लाम को मानते हैं। 

  • पीर रतन नाथ की कथा: नाथ परंपरा में पीर रतन नाथ (या कायानाथ) एक प्रमुख संत माने जाते हैं, जिनका संबंध मक्का और पैगंबर मोहम्मद से भी जोड़ा जाता है। हिंदू और मुसलमान दोनों उनकी पूजा करते हैं।

  • साझा पूजा स्थल: कई नाथ स्थलों पर संतों की समाधियों को हिंदू और मुस्लिम दोनों समान रूप से पूजते हैं। पंजाब के बठिंडा में स्थित बाबा रतन हाजी की दरगाह (या मठ) इसका एक प्रमुख उदाहरण है। 

  • सूफीवाद से समानता: नाथ पंथ की हठयोग और कुंडलिनी जैसी रहस्यवादी साधनाएं, सूफी संतों (जैसे बाबा बुल्ले शाह और अन्य) की विचारधारा के बहुत करीब रही हैं।

  • 'पीर' की उपाधि: नाथ पंथ के कई मठों में मुख्य संतों या पुजारियों को "पीर" कहकर भी संबोधित किया जाता है।

बोला- राजनीति का कोई पंथ नहीं होता । वहाँ चुनाव जीतना ही महत्वपूर्ण होता है । चुनाव के लिए भला नहीं,  जिताऊ कैंडीडेट ढूँढ़ा जाता है ।  फिर उसके पास शिक्षा या सज्जनता की जगह कोई एनटायर या एफ़िडिफिट वाली डिग्री ही क्यों न हो । 

हमने कहा- लेकिन मिलने में क्या बुराई है । मिलने से ताकत बढ़ती है जैसे मिश्र धातु मतलब अलॉय । मुसलमानों,दलितों, आदिवासियों को सम्मान और प्रेम से जोड़कर देश और और मजबूत बनाया जा सकता है । गहनों का जोड़ मजबूत करने के लिए सोने चांदी में तांबे का टांका लगाया जाता है । सूती कपड़े में 20 प्रतिशत सिंथेटिक मिला देने से वह मजबूत और धोने-प्रेस करने में आसान हो जाता है । दूध में पानी, घी में चर्बी, सीमेंट में रेता, ईडी से डरकर तृणमूल, शिवसेना और आप विधायकों और सांसदों के भाजपा में जाने की तरह मत मिलो । मिलना है तो चंदन-पानी की तरह मिलो जिसकी सुवास अंग अंग में समा जाए ।  

बोला- ऐसे रैदासी सिद्धांतों से राजनीति नहीं चलती । अगर ऐसे नियम मानने लगे तो देश सेवा कैसे करेंगे ? देश सेवा के लिए बहुमत चाहिए और बहुमत के लिए सुवेन्दु, हिमंता, राघव, एकनाथ जरूरी हैं ।  

हमने कहा- सारी माथाकूट छोड़ तोताराम, हमें फ्री का एक आइडिया आया है । गाड़ी में गौ मूत्र भरके, ड्राइवर को एक पव्वा पिलाकर उसके गले में एक भगवा गमछा डालकर, जयश्रीराम का नारा लगाते हुए वाहन को एक जोर का धक्का दे दो और फिर देखो वाहन कैसे फ्री में पवन वेग से अपने गंतव्य तक पहुंचता है ।  

-रमेश जोशी 

 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

06-07-2026 अमृत काल ( एक कुण्डलिया )

    06-07-2026 
अमृत काल ( एक कुण्डलिया ) 





राम-कोष की लूट है जी भरकर के लूट 
अमृत काल के बाद में मिले ना मिले छूट 
मिले ना मिले छूट, टूट जब भ्रम जाएगा 
चंदा देने मंदिर कोई क्यूँ आएगा 
जोशी जब तक चक्कर चलता स्वर्ग-नरक का 
तब तक रस्ता नहीं खुलेगा ज्ञान-तरक का 

-रमेश जोशी 







पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 4, 2026

30-06-2026 हड़बड़ी में गड़बड़ी


30-06-2026 

हड़बड़ी में गड़बड़ी 






 


हमने कहा- तोताराम, जल्दी का काम शैतान का । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- झूठ नहीं कहा है कि सहज पके सो मीठा होय लेकिन जिसे अपने कर्मों पर विश्वास नहीं होता और जो ईवेंट मनेजमेंट के सहारे अपनी इमेज बनाता है वह जल्दी करता है और उसी चक्कर में अपनी भद्द पिटवाता है । 

 बोला- यह, वह, जो, उस आदि में लपेट कर बात मत कर । साफ साफ बता । 

हमने कहा- जैसे चुनावी लाभ लेने के लिए शिखर के बिना ही प्राणप्रतिष्ठा कर दी गई तो राम मंदिर का गर्भगृह टपकने लगा कि नहीं ? 400 पार वाले 240 पर अटक गए और जिस राम के राज में-

बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।

मांगें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ 

इस दोहे अर्थ है कि राम जी के राज में चंद्रदेव अपनी अमृतमयी किरणों से पृथ्वी को परिपूर्ण रखते हैं। सूर्य देव केवल उतनी ही गर्मी देते हैं, जितनी वर्षा या अन्य कार्यों के लिए आवश्यक होती है। बादल भी ऐसे हैं जो केवल मांगने पर और आवश्यकता के अनुसार ही जल बरसाते हैं, अर्थात वहां अतिवृष्टि या अनावृष्टि जैसी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। 


लेकिन आज कट्टरता की राजनीति तथा मूर्खता और स्वार्थपूर्ण विकास के कारण स्थिति यह हो गई है कि गरमी भयंकर और दूर दूर तक बरसात नहीं । अल्पवृष्टि का खतरा मंडरा रहा है । जहाँ तहाँ सड़कें और पुल टूट रहे हैं । इतनी सुरक्षा और संस्कारी लोगों के ट्रस्ट, व्यवस्था में होते हुए राम लला की पादुकाएं चोरी हो गईं । और बुलडोज़र चलेगा 100 मीटर का प्लॉट खरीदने वाले लवकुश पर । हो सकता है कल को यह सिद्ध कर दिया जाए कि चोरी-वोरी कुछ नहीं हुई है बल्कि राम लला के बेटों लव कुश ने सुरक्षा की दृष्टि से सामान एक बैंक लाकर में रखवा दिया था । 

हड़बड़ी का एक और ताज़ा उदाहरण देख ले । 1400 करोड़ की सहायता के बदले एक सम्मान लिया उसमें भी तीन गलतियाँ । 

बोला- तू यहाँ बरामदे में बैठा नितंबों से सुपारी फोड़ता रहता है । देश दुनिया को संभालना पड़े तो पता चले । जहाँ 240 पर अटकने की बात है तो राम के चढ़ावे और चंदे के बल पर पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र में खरीद-फरोख्त करके 400 पार भी हो जाएंगे ।  

हमने कहा- तो फिर पीयूष गोयल को नंबर बढ़वाने के लिए सम्मान का ड्राफ्ट फाइनल होने से पहले ही इसे अपने ट्विटर पर डालने की क्या जरूरत थी ? चल, एक और उदाहरण देते हैं । 2018 में पटेल की मूर्ति के उद्घाटन के विज्ञापन में 8-10 गलतियाँ थीं । और नया उदाहरण ओडिशा की स्कूली पाठ्य पुस्तकों का जिनमें कई हजार गलतियाँ है । 

बोला- ये छोटी-मोटी बातें हैं । शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।विदुर की पत्नी कृष्ण को देखकर इतनी भावविह्वल हो गई कि केलों की गिरी नीचे गिराकर कृष्ण को केले के छिलके खिलाती रही । रीतिकाल के कवि पद्माकर ने नायिका की अत्यधिक उत्सुकता बड़ा ही मनोवैज्ञानिक और सुंदर चित्रण किया है जो नायक के आने का समाचार सुनकर इतनी हड़बड़ी में होती है कि पैरों में लगाने वाला महावर आँखों में और आँखों में लगाने वाला काजल पैरों में लगा लेती है।

आए हैं समीप पीय, प्रीति की प्रतीति मानों,

भई अति अकुलाहट, सुहाई सब बात है।

आनँद की उमंग में, उमंगि अनुराग भई,

भूलि सुधि-बुधि, देह-गेह की न घात है॥

पग में लगाई काजर, नैनन महावर दे,

हिय हुलसाए, भई बावरी सी ज्ञात है। 

 

-रमेश जोशी 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 3, 2026

03-07-2026 लघु कथा भक्त की हवाई चप्पलें


लघु कथा 

भक्त की हवाई चप्पलें  




एक भक्त था । बहुत परेशान था । इतना परेशान कि कोई नीट का परीक्षार्थी भी पेपर लीक होने से नहीं हुआ होगा । 15 लाख और अच्छे दिन के जुमले पर आँख मींचकर वोट देने वाला भी इतना निराश नहीं हुआ होगा । उसे तो एक ही भरोसा, एक ही आस और एक ही विश्वास था । केवल राम का । जैसे अंधभक्तों को हर तीर्थ पर जाकर फ़ोटो शूट करवाने वाले अपने अजैविक नेता पर ।  

भक्त रोज रामचारित का मास पारायण करता था । मंगलवार को एक टाइम खाना खाता था । हर बार भय लगने पर हनुमान चालीसा बाँचता था । उसे भूत पिशाच भगाने के लिए पुलिस से अधिक प्रभु पर विश्वास था । वह अपने मन की बात भी रेडियो पर नहीं बल्कि एकांत में प्रभु के साथ ही करता था । उसे विश्वास था कि भले ही अंतिम समय में ही सही लेकिन गजराज को मगरमच्छ से बचाने वाले भगवान विष्णु की तरह उसके आराध्य राम जरूर आएंगे । 

किसी तरह राम की कृपा से भक्त का जीवन कट ही रहा था क्योंकि उसकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी । उसे न तो सोना खरीदना था, गाड़ी नहीं थी सो पेट्रोल डलवाने का चक्कर भी नहीं। विदेश यात्रा भी नहीं क्योंकि किसी देश का सर्वोच्च पुरस्कार भी नहीं मिलना था । लेकिन आज उसका धैर्य चुक गया क्योंकि बड़ा बेटा बी ए करके पिछले दस वर्षों से प्रतियोगी परीक्षा देते देते ओवर एज हो गया ।इंसान से कॉकरोच बन गया । कल तो परीक्षा केंसिल होने के कारण एक विरोध प्रदर्शन में गया और पुलिस द्वारा अभिनंदित होकर टांग तुड़वाकर घर लौटा । 

भक्त तीर्थयात्रियों की भगदड़ में मरकर मोक्ष को प्राप्त करके ऊपर पहुँचा तो जाते ही अपने आराध्य पर बिफर पड़ा । बोला- प्रभु, मैं ही मूर्ख था जो आप पर विश्वास करके उल्लू बनता रहा । सब झूठ है कि आप अंत समय में ही सही भक्तों का उद्धार करने जरूर पहुंचते हैं । अजामिल को तो अपने बेटे नारायण का नाम लेने मात्र से ही कन्फ्यूज होकर आपके दूतों ने उसका उद्धार कर दिया । मैं आपको जाने कितनी बार पुकारता रहा लेकिन आप मणिपुर,  युद्ध विराम, गाजा और ईरान में बच्चों के संहार पर वसुधैव कुटुम्बकं वाले महामानव की तरह चुप रहे । पुलिस भी चोरों के भाग जाने और अग्निशमन वाले सब कुछ राख हो जाने के बाद ही सही आ तो जाती है लेकिन आप .....? 


राम भक्त की पीड़ा से द्रवित हुए और बोले- भक्त, मेरी मजबूरी समझो । मैं अब पहले की तरह स्वतंत्र नहीं हूँ । मुझे कुछ दुष्टों ने एक मंदिर में कैद कर रखा है । जनता के बीच तक नहीं जाने देते हैं । मैं तुम्हारी पुकार सुनकर आना चाहता था लेकिन क्या बताऊँ दुष्टों ने मेरी पादुकाएं ही चुरा लीं । और इतनी तेज धूप में बिना पादुका मेरे पैर जलने लगे थे । मुझे माफ करना भक्त । 

भक्त ने  कहा- प्रभु, हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा करवाने के वादे पर विश्वास करके खरीदी थी लेकिन वह भी अन्य वादों की तरह झूठा ही निकला । इन्हें पहन लें । घिसी हुई सही लेकिन पैरों को जलने से तो बचाएंगी ही । 

और भक्त ने अपनी हवाई चप्पलें रामजी के सामने रख दीं । 


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 2, 2026

29-06-2026 बाल दान


29-06-2026 
बाल दान 


( टी वी न्यूज वायरस शब्द हट देंगे )


आज तोताराम ने आते ही हमारी आत्मा को ललकारा, बोला- ज़िंदगी हो गई कमाते, भोगते लेकिन कभी एक पैसा भी दान दक्षिणा में नहीं दिया । यह सब यहीं धरा रह जाएगा। क्या लेकर आया था और क्या लेकर जाएगा । यही सब कुछ लुटाना है । अपने हाथ से जो दे जाएगा वही इस भवसागर में नाव बनकर तुझे पार लगाएगा । 

हमने कहा- जब हमने हराम का, मुफ़्त का, नाजायज कुछ कमाया ही नहीं तो किस बात का दान दें । हमें तो ऊपर वाले ने जो कुछ दिया काटकर ही दिया है । वही हाल- एक गरीब आदमी था इसलिए उसकी भगवान से डिमांड भी कम ही थी ।उसने ‘सबका साथ : सबका विकास’ की तरह अपने इस प्रोजेक्ट में भगवान को भी 50-50 का आश्वासन देकर शामिल कर लिया । उसने भगवान से चार आने माँगे ।  कुछ दूर चलकर उसे एक दुअन्नी पड़ी मिली । याचक राम मंदिर के ट्रस्टियों की तरह समझदार था । उसने दो आने जेब में रखते हुए कहा- 
अल्ला मियाँ बड़े सयाने । पहले काट लिए दो आने ।। 
सो हम तो लेने से पहले ही दान दे देते हैं । और हम कौन अंबानी हैं जो लाल बाग के गणेश जी को 20 किलो सोने का मुकुट चढ़ा दें, राम मंदिर में 33 किलो सोना चढ़ा दें, या अपनी बेटी के दो बच्चों के नाम से 300 किलो सोना दान कर दें । 

बोला- फिर भी कुछ तो दान-पुण्य किया कर । मन को शांति मिलेगी । 

हमने कहा- हमने तो बहुत पहले जब विश्व हिन्दू परिषद वाले दो-दो, पाँच-पाँच रुपए राम मंदिर के लिए इकट्ठे कर रहे थे तब किसी को पाँच रुपये दिए थे । रसीद इसलिए संभाल कर नहीं रखी कि हमें उसके बदले में राम से कुछ नहीं चाहिए । लेकिन जब से राम मंदिर में ट्रस्टियों और मुख्य लोगों ने डाका डाला है हमें उन पाँच रुपये से अधिक अपनी मूर्खता के लिए शर्मिंदगी हो रही है । हमारा तो मानना है कि किसी को किसी भी धार्मिक स्थान पर एक पैसा भी नहीं चढ़ाना चाहिए । उससे बेईमानी को बढ़ावा मिलता है । न होगा चढ़ावा और न मंदिर में जुटेंगे चोर-उचक्के । 
वैसे अब अंबानी जी ने किस मंदिर में कौनसा बड़ा दान दिया है ?

बोला- अनंत अंबानी ने तिरुपति मंदिर में केश दान किए हैं । 

हमने कहा- इसमें कौन बड़ी बात है । रोज हजारों पुरुष ही नहीं स्त्रियाँ तक अपने केश दान करती हैं जो विग बनाने के लिए विदेशों में अच्छी कीमत पर बिकते हैं । और अगर इसीसे कोई पुण्य प्राप्त होता हो तो हम भी अब से अपने केश, जितने भी मोदीराज में महंगाई के बावजूद बच पाए हैं, दान कर दिया करेंगे । तू यहीं से तिरुपति पार्सल कर दिया कर । पार्सल का खर्च तू करेगा या मोदी जी ऐसे पार्सलों के लिए कोई फ्री की स्कीम निकालें । पहले डिफेंस फंड में भेजी गई राशि के लिए मनीऑर्डर का खर्च नहीं लगा करता था । एक बार हमने सन 1999 में पोती के जन्म दिन पर एक हजार रुपये भेजे थे । अगर आज की तरह ‘पी एम केयर फंड’ में भेजते तो किसी हिसाब का भी पता नहीं चलता । 

बोला- तेरे सिर पर चार बाल हैं । तुझे बालों की शोभा का क्या पता । अनंत के ये लंबे, घने, घुँघराले, रेशमी बाल । मेरे खयाल से इन्हें सामान्य बालों की तरह नहीं बेचा जाएगा बल्कि विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा जिनके भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति से दर्शन किया करेंगे ।  इसी तरह सोच अगर रबीन्द्रनाथ ठाकुर या मोदी जी केश दान कर दें तो बड़ी बात हो क्योंकि ये उनकी पहचान हैं । अगर मोदी जी दाढ़ी मूंछ मुँड़वाकर जाएँ तो ट्रम्प तो फिर भी पहचान लेंगे लेकिन मेलोनी तो नहीं ही पहचान पाएगी । 

हमने कहा- बाल का दान भी क्या कोई दान होता है ? मुफ़्त की खेती है । ज़िंदगी भर बाल बढ़ते रहते हैं और आदमी कटवाता रहता है । फिर बाल और दाँत जैसी चीजें अपने स्थान पर ही शोभा देती है । 

बोला- बाल कोई एक तरह के ही थोड़े होते हैं । बाल बाल में भी फ़र्क़ होता है । एक बाल हज़रत बल दरगाह में रखा हुआ है । साधारण आदमी का दाँत निकाल कर ऐसे ही फेंक दिया जाता है जबकि बुद्ध के दाँत पर श्रीलंका में मंदिर बना हुआ है । जो सबसे निकट होता है उसे मुहावरे में 'नाक का बाल' कहते हैं । कुछ लोगों की आँख में सूअर का बाल होता है । ऐसे आदमी को अपने अलावा कोई दूसरा नहीं सुहाता । वह् दूसरों को दुखी करके ही खुश होता है । आजकल देश दुनिया में ऐसे लोग ज्यादा दिखाई दे रहे हैं जो दूसरे देशों को परेशान किए हुए हैं । जो कायर होते हैं, जो किसी को लाल आँख नहीं दिख सकते और जिन्हें दुनिया के ताकतवर देश जब चाहे हड़का देते हैं वे अपने देश के लोगों को जाति-धर्म के आधार पर परेशान करके ही एक प्रकार का कुटिल आनंद प्राप्त करते हैं ।

हमने कहा- लेकिन हम तो मूंछ के बाल को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं । मूंछ स्वाभिमान का प्रतीक होती है । यह प्रतीकात्मक होती है । जो अपनी बात का पक्का वही मूंछ वाला । महाराणा प्रताप ने दुख उठाए लेकिन अपनी मूंछ नीची नहीं होने दी । इसलिए भले ही  हल्दीघाटी के युद्ध के बाद से वन वन भटके लेकिन आप उन्हें हारा हुआ नहीं कह सकते । आजकल तो ऐसे बड़ी बड़ी दाढ़ी- मूंछ वाले होते हैं जो अपने वादे को बाद में बड़ी बेशर्मी से जुमला कह कर मुकर जाते हैं ।

बोला- मूंछ के बारे में एक किस्सा भी तो है । 

हमने कहा- हाँ, है ना । एक राजपूत एक सेठ से कुछ रुपये उधार मांगने गया । सेठ ने कहा कि वह कुछ गिरवी रखे बिना उधार नहीं दे सकता । राजपूत ने अपना मूंछ का बाल उखाड़ कर कहा - सेठ इसे रख लो । सेठ ने बाल रख लिया और रुपये दे दिए । वहाँ बैठा एक अन्य व्यक्ति यह सब देख रहा था । वह भी अगले दिन सेठ ले पास उधार मांगने गया । सेठ ने उसे भी कुछ गिरवी रखने को कहा । उसने थैले में से अपनी दाढ़ी-मूँछें निकाली और बोला ये ले और पचास रुपये दे दे । सेठ बोला- हम मूँछें गिरवी रखते हैं, ऊन नहीं । 

बोला- लेकिन अनंत अंबानी ने केवल बाल ही थोड़े दिए हैं । करोड़ों की इलेक्ट्रिक बसें भी तो दी दान की हैं ।

हमने कहा- अच्छी बात है लेकिन दान की सबसे बड़ी बात यह है कि उसके लिए आपने कितना कष्ट उठाया । दान के बाद आपके पास बचा क्या ? इसीलिए बुद्ध ने दान में मिले स्वर्ण आभूषणों से बढ़कर एक बुढ़िया द्वारा दिए गए अधखाए अनार को बताया था । क्योंकि उसके पास इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं था । यह भी पता नहीं कि वह कितने दिन की भूखी थी । उसने यह अनार खुद भूखे रहकर दिया था । सैंकड़ों करोड़ दान के बाद भी अंबानी-अदानी के पास हजारों लाखों करोड़ और बचे हुए हैं । इस दान के लिए उन्होंने कोई कष्ट नहीं उठाया है । ठीक है लेकिन हमारे हिसाब से  इसका प्रचार नहीं नहीं करना चाहिए था । दान की चर्चा करने से उसका महत्व कम हो जाता है । 

भगवान के लिए शबरी के बेर और सुदामा के चावल अधिक महत्वपूर्ण होते हैं । 
 



 
 

 
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की रहने वाली 85 वर्षीय कचरा बीनने वाली महिला बिदुला बाई देवार ने राम मंदिर निर्माण के लिए 20 रुपये का दान दिया था जो इनकी आधे दिन की कमाई थी  । 

राम मंदिर, कृष्ण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर आदि के चोर पुजारी राम की सोने की रत्न जटित पादुका और सोना चुराकर चंपत हो जाते हैं लेकिन सुदामा, शबरी और बिदुला बाई के दान को वे क्या समझें । तभी तो मीरा कहती है-

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । 
खरच न खूटे चोर न लै हैं 
दिन दिन बढ़त सवायो । 


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jul 1, 2026

26-06-2026 अभी यहीं घूम रहा है ?





======================================

26-06-2026  


अभी यहीं घूम रहा है ? 


तोताराम मोदी जी के मन की बात की तरह तय समय पर आ पहुँचा । हमने कुछ नहीं कहा तो खुद ही बोला- क्या बात है, चाय हो गई ?

हमने कहा- चाय तो हो गई लेकिन तू अभी यहीं घूम रहा है ? 

बोला- यहाँ नहीं तो क्या सेशेल्स जाऊँगा । मोदी जी बात और है । उन्हें तो देश के लिए सम्मान लेने जाना ही पड़ता है । सेशेल्स तो फिर भी एक लाख तीस हजार की जनसंख्या वाला देश है । तुवालू (हवाई और आस्ट्रेलिया के बीच) में नौ हजार चार सौ, नाऊरू (प्रशांत महासागर में एक छोटा सा द्वीप) में 12 हजार, पलाऊ ( पश्चिमी प्रशांत महासागर में 34 छोटे छोटे द्वीपों का देश) में 18 हजार लोग रहते हैं और शी लैंड ( इंग्लैंड के सफोक तट से 12 किलोमीटर दूर) नाम के देश की जनसंख्या तो मात्र 27 ही है । सम्मान देने के लिए बुलाया जाएगा तो वहाँ भी जाना पड़ेगा । 

हमने कहा- हमारा ज्ञानवर्द्धन करने के लिए धन्यवाद लेकिन हम तो तेरी तीर्थयात्रा को लेकर उत्सुक थे सो पूछ लिया । कल ही तो मोदी जी ने सीकर जिले के 2392 हिन्दू बुजुर्गों को ट्रेन से और 293 हिन्दू बुजुर्गों को हवाई जहाज से तीर्थ यात्रा करवाने के लिए लाटरी निकाली है । क्या तेरा नंबर नहीं लग सकता ? 

बोला- और मुसलमान ?

हमने कहा- उनका परलोक बहुत सुधर गया । इसलिए 2018 से उन्हें सबसीडी देना बंद कर दिया है ।  अगर ज्यादा ही सुधारना है तो पाकिस्तान चले जाएंगे लेकिन हिंदुओं का तो एक ही देश है । यहाँ परलोक नहीं सुधरेगा तो कहाँ सुधरेगा । 

बोला- क्या कहा, मोदी जी ने लॉटरी निकाली है ? यह देश बेचारे मोदी जी से क्या क्या काम करवाएगा । पहले ही 20-20 घंटे काम करते हैं । बच्चों को परीक्षा के लिए टिप्स देने से लेकर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने तक के जाने क्या क्या काम करने पड़ रहे हैं । पहले से ही सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री का रिकार्ड बना चुके हैं । एक बुजुर्ग सेवाभवी सज्जन का यह देश जाने और कितना शोषण करेगा । 

हमने कहा- यह लॉटरी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने नहीं बल्कि जिलाधीश आशीष मोदी ने निकाली है । यह लॉटरी केवल हिन्दू बुजुर्गों के लिए है । सबसीडी नहीं पूर्ण निःशुल्क । 

बोला- एक तो मैंने अप्लाई नहीं किया । कर भी देता तो नंबर नहीं आता । 

हमने कहा- क्यों, क्या कमी है तुझ में ? 83 साल का बुजुर्ग है । हिन्दू है, ब्राह्मण है, शाकाहारी है । 

बोला- वह तो ठीक है लेकिन मैं तेरी संगति में संस्कारहीन हो गया हूँ । न तो रोज नहाता, न संध्या वंदन करता, न आठों अंगुलियों में अंगूठियाँ पहनता, न लंबा तिलक लगाता, न गले में भगवा पटका डालता, न किसी कलश यात्रा और भगवा रैली या विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेता, न अजान से मुझे सिर दर्द होता, न मैं कपड़ों से आतंकवादियों को पहचान  सकता, न मैंने कभी किसी मस्जिद पर भगवा झण्डा फहराया । 

हमने कहा- कोई बात नहीं । चाय बनवाते हैं । अगले साल अप्लाई कर देना । हम तेरा मस्जिद के सामने सुंदरकांड का पाठ करते हुए एक बढ़िया सा फ़ोटो खिंचवा देंगे । फॉर्म के साथ वही लगा देना । और यहीं सड़क पर कनक दंडवत करते हुए फागुन में खाटू श्याम् जी के मेले के समय तेरा फ़ोटो एक फ़ोटो छपवा देंगे- शीर्षक होगा-  कनक दंडवत करते खाटू श्याम जी जाते हुए एक 83 वर्षीय श्रद्धालु मास्टर तोताराम । फिर तीर्थ यात्रा क्या एम एल ए का टिकट भी मिल सकता है । 

बोला- मास्टर, इसमें तो बहुत खर्च होता होगा । 

हमने कहा- कुछ ज्यादा नहीं । इस मद में राजस्थान 200 करोड़, उत्तर प्रदेश 500 करोड़ और सारा देश एक वर्ष में केवल साढ़े तीन-चार हजार करोड़ खर्च करता है । 

बोला- लेकिन इतना कर्ज आता कहाँ से है ? 

हमने कहा- आदमी की साख होनी चाहिए कर्ज की क्या कमी है । अभी तो मोदी जी का डंका बज रहा है तभी तो पिछले  13 प्रधानमंत्रियों ने 67 साल में जितना कर्ज लिया उससे तीन गुणा मोदी जी को अकेले 12 साल में मिल गया । जितना सम्मानित राष्ट्र और नेता उतना अधिक कर्ज । अमेरिका को देख 38 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है । अपना तो एक ट्रिलियन भी नहीं है । राम राम करके पौन ट्रिलियन है । बड़े सेठ बने फिरने वाले अंबानी पर 4 लाख करोड़ और अदानी पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये मात्र कर्ज । अभी बहुत गुंजाइश है । 

बोला- तो फिर राजस्थान में स्कूलों की छत क्यों गिर रही हैं ? मोदी जी के 12 साल में देश में 80 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए । स्कूलों के बढ़िया भवन बनाएं, अच्छी सुविधाएं दें । देश ज्ञान विज्ञान में आगे बढ़ेगा । अगर चाहें तो तीर्थ यात्राओं पर होने वाले बजट का सदुपयोग करें तो एक साल में तीन आई आई टी या तीन एम्स बन सकते हैं । 

हमने कहा- जब तक हिन्दू तीर्थयात्री और काँवड़िए बन रहे हैं तब तक ही हिन्दुत्व सुरक्षित है । नहीं तो पढ़-लिखकर नौकरी मांगेंगे, पेपर लीक को लेकर दुखी होंगे, कॉकरोच बनेंगे, आंदोलन करेंगे । 

हमें तो युवाओं को धर्म योद्धा, गौरक्षक, सनातन संस्कृति सेनानी बनाना है । देश की सुख शांति और धर्मपरायणता के लिए तीर्थ यात्रा और मंदिर कॉरीडोर निर्माण ही ठीक हैं । 

बोला- लेकिन आजकल मंदिरों में तो चोरी डाका हो रहा है । 

हमने कहा- यह तो होगा ही । कोई नई बात नहीं । ज्यादा धन होने से महमूद ग़ज़नवी सोमनाथ आया । अब उसकी कोई जरूरत नहीं है । यहीं हजारों ग़ज़नवी धर्म की ध्वजा लेकर घूम रहे हैं । जहाँ गंदगी वहाँ मक्खियाँ, जहाँ कीचड़ वहाँ कमल, जहाँ कमल वहाँ लक्ष्मी का वास । चिंता मत कर इस दुनिया में धर्म ही एक ऐसा धंधा है जिसमें सारे नेताओं और कामचोरों का गुजारा होता है ।  इस धंधे में हमेशा बहुत गुंजाइश है । 




 



 

 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jun 27, 2026

25-06-2026 लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र


25-06-2026 


लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र 



कोई चालीस साल पहले की बात है जब दिल्ली में हुआ करते थे । तब बाहर से दिल्ली में आने वाला हर आदमी यही सोचता था कि किसी तरह दिल्ली में कहीं भी सौ-पचास गज का प्लॉट हो जाए फिर भले ही उसे रहने लायक बनने में ज़िंदगी गुजर जाए । ऐसे प्लॉट दिल्ली के किसानों के खेतों में हुआ करते थे जहाँ निर्माण रोकने देने के नाम पर डी डी ए वाले वसूली करते घूमा करते थे । ऐसी खेतों में कटी कॉलोनियाँ अवैध कॉलोनियाँ कहलाती थीं । 

ऐसे में लोग अपनी कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए उसका नाम इंदिरा कॉलोनी या संजय कॉलोनी रख लिया करते थे । यह एक प्रकार का टोटका होता है । जैसे कोई अपने बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा देता है या कोई अपने मकान के मुख्य द्वार पर टायर लटका देता है या किसी दैत्य का मुखौटा लगा देता है । आज भी डरे हुए लोग भूत-पिशाच भगाने के लिए भगवा गमछा गले में डाल लेते है या फिर कई रंग के कलावे बांध लेते हैं या तिलक खींच लेते हैं या आठों अंगुलियों में तरह तरह की अंगूठिया पहन लेते हैं । ये सब लोक परलोक के तंत्र मंत्र हैं । 

आज तोताराम ने कहा- मास्टर, अपने बरामदे  का नाम ‘नमो बरामदा’  रख लेते हैं । 

हमने कहा- क्या हमें मोदी जी ने इसके लिए कोई सबसीडी दी है या यह कोई अवैध निर्माण है जो इसे ‘नमो’ की आड़ में वैधता प्रदान करें । मोदी जी चाहें तो स्टेडियम का नाम एक झटके में अपने नाम कर लें लेकिन यहाँ तो वही चलेगा जो हम चाहेंगे । 

बोला- 2016 में जब ट्रम्प पहली बार राष्ट्रपति बने थे तब सुलभ शौचालय वाले बिन्देश्वरी पाठक ने हरियाणा के मेवात इलाके में सफाई कर्मचारियों के लिए कुछ मकान बनवाए थे तो उनका नाम ‘ट्रम्प विलेज’ रखा था । 

हमने कहा- ठीक है जब उन्हें इसका कारण पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि हो सकता है इससे कुछ सहयोग या प्रचार मिल जाए लेकिन हुआ कुछ नहीं, भद्द बेकार में पिटी । वैसे ही जैसे ट्रम्प की जीत के लिए 2020 में हिन्दू महासभा वालों ने यज्ञ किया था । यह बात और है कि देवताओं ने उनकी एक नहीं सुनी । इसी तरह मोदी जी ने भी बेशर्मी से अमेरिका में नारा दे ही दिया था ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ । सोच अगर चुनाव के दिनों में कोई विदेशी नेता भारत में आकर राहुल के लिए ऐसा नारा लगाए तो ? लेकिन क्या किया जाए । राजस्थानी में कहावत भी तो है-  

आप गुरूजी कातरा मारै 

ओराँ नै परमोद सिखावै । 

बोला- मास्टर, सब एक दूसरे को समझाते हैं । भले ग्रहों को कोई नहीं पूछता है लेकिन बुरे ग्रहों के लिए शांति पाठ करवाता है ।  कहा भी है-

बसे बुराई जासु तन ताही को सनमान 

भलो भलो कहि छांडिए खोटे ग्रह जपदान 

हमने कहा- और क्या ? मोदी जी यहाँ कण कण पर अपना फ़ोटो छपवा दें, हर चीज के आगे पीछे ‘नमो’ जोड़ दें लेकिन देखा नहीं पिछले दिनों जब अमेरिका गए थे तो ट्रम्प कैसे मोदी जी को ब्यूटीफुल, एंजल आदि  कहकर मजे ले रहा था लेकिन मोदी जी बार बार ‘योर एक्सीलेंसी’ ‘योर  एक्सिलेंसी’ की रट लगाए हुए थे । ट्रम्प का क्या ठिकाना । बड़ा मुँहफट और गैरजिम्मेदार आदमी है । पता नहीं कब क्या बोल जाए । 

ग्रहशांति के लिए पता नहीं क्या क्या करना पड़ता है । ऐसे में 56 इंच का सीना कुछ काम नहीं आता । जेलेन्स्की ने बिना पर्ची के ही टीशर्ट में ही अपना जलवा दिखा दिया था । 

सारे नाटकों के बावजूद लोक ही सच और सत्य आचरण करता है । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- जैसे कि कुछ अंधभक्त भले ही गोडसे के प्रति आदर का दिखावा करते हों लेकिन आज किसी गोडसे सरनेम वाले महाराष्ट्रियन का नाम ‘नाथूराम’ नहीं होगा । भले ही लोग विभीषण को कितना भी बड़ा भक्त बताएं लेकिन क्या किसी का नाम ‘विभीषण’ सुना है ?  



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

27-06-2026 पादुका चोरी

27-06-2026 

पादुका चोरी 


भले ही मोदी जी ने हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा नहीं करवाई हो लेकिन अब भी देश में हवाई चप्पलें पहनने वालों की संख्या बहुत है । ऐसा हवाई चप्पलों के कारण हवाई यात्रा का अवसर मिलने की उम्मीद नहीं बल्कि महँगे जूते न खरीद सकने के कारण है । आजकल रुपये और राजनीति दोनों के स्तर की तरह हवाई चप्पलों का स्तर भी गिर गया है । दोनों में से किसी भी चप्पल का कोई पट्टा कहीं से भी तृणमूल वालों या राघव चड्ढा या ठाकरे ग्रुप के सांसदों की तरह भाजपा की ओर खिसक गया तो फिर कोई इलाज नहीं । पहले की तरह दस-बीस रुपये के पट्टे बदलने से काम नहीं चलता । पूरी चप्पलें ही बदलनी पड़ती हैं । और कीमत भी 250/- रुपये के लगभग । हमने कल ही नई चप्पलें खरीदनी पड़ी । 

हमारा और तोताराम का नाप एक ही है । तोताराम जैसे ही चाय पीकर चलने लगा तो अपनी पुरानी चप्पलों की जगह हमारी चप्पलें पैरों में डाल ली । हमारे ‘बरामदा ट्रस्ट’ की सुरक्षा किसी चंपत राय के भरोसे नहीं है जो सैंकड़ों करोड़ का चढ़ावा गुपचुप गायब हो जाए ।  हमने तुरंत पकड़ा और कहा- देखते देखते दिन दहाड़े !

बोला- भूल हो गई । और ये कोई राम की पादुकाएं हैं क्या, सौ रुपये की फुटपाथ वाली चप्पलें ही तो हैं ।अगर चोरी का इरादा होता तो ‘राम मंदिर’ की तरह चढ़ावा गणना के समय के सी सी टी वी कैमरे की फुटेज ही गायब नहीं करवा देता । वैसे यह ‘अमृत काल’ की भारतीय लोकतंत्र की बस है जिसमें लिखा हो या न लिखा हो लेकिन यात्रियों को अपने जान-माल की रक्षा खुद ही करनी होती है । 

हमने कहा- वैसे हुआ बहुत बुरा । राम भक्तों की निगहबानी में राम की पादुकाएं ही चोरी ! 

बोला- इसमें बुरा क्या है ? जहाँ नाली में कीचड़ होगा वहाँ कमल खिलें या नहीं लेकिन बदबू और मच्छर जरूर होंगे । जहाँ गंदगी होगी वहाँ मक्खियों को निमंत्रण देने की कोई जरूरत नहीं । अब जहाँ धन है वहाँ चोरों के अलावा और कौन चक्कर लगाएगा ? सुंदरियों का जमघट लगवाकर वहाँ मजबूरन ब्रह्मचारियों और संस्कारियों को बिठा दोगे तो क्या वे विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करेंगे ? 

हमने कहा- इस मामले में मोदी जी बहुत समझदार हैं । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- मोदी जी श्रद्धांजलि देते समय भी अपने जूते अर्थात पादुकाएं नहीं उतारते । पता नहीं, कब कौन उठाकर चंपत हो जाए । राजा की पादुकाएं होती ही ऐसी हैं । तभी तो भरत जी जैसे ही ननिहाल से अयोध्या आये सबसे पहले चित्रकूट जाकर पादुकाएं लेकर आये । राजा की पादुकाएं साधारण नहीं होतीं ।  जिसके पास राम की पादुकाएं वही अयोध्या का शासक । हो सकता है कोई गद्दी के चक्कर में ही पादुका लेकर चंपत हो गया हो । 

बोला- वैसे मास्टर, जब भरत राम की पादुकाएं ले आये तो राम को नंगे पाँव वन वन घूमने में परेशानी तो बहुत हुई होगी । कुछ भी हो योगी जी की न्यायप्रियता के कारण चंपत राय को त्यागपत्र तो देना ही पड़ा । 

हमने कहा- त्यागपत्र से क्या होता है ? बैंकों से अरबों लेकर भागा ललित मोदी अगर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दे तो क्या उसे निरपराध मान लिया जाएगा ? 

बोला- चंपत राय का ड्राइवर और कुछ और लोग भी हिरासत में लिए तो गए ही हैं । 

हमने कहा- यह तो तथाकथित रामराज्य है । असली रामराज्य में भी राम के वनवास का दोष आज भी मंथरा पर लगाया जाता है । इसी तरह सीता के वनवास के लिए राम के छवि निर्माण के लिए एक निरीह धोबी पर लानत भेजी जाती है । इसी तरह बड़े लोगों पर कुछ आंच नहीं आने वाली । और हिरासत में लिए गए लोगों को भी दस बीस दिन में जमानत मिल जाएगी । उसके बाद ज़िंदगी भर केस टेबल पर नहीं आएगा । और अगर आ भी गया और जेल भी हुई तो राम रहीम की तरह परोल पर बाहर आते रहेंगे । 

आखिर ये भी तो बिलकीस बनो के बलात्कारियों की तरह संस्कारी लोग हैं । वसीम बरेलवी को सुन-

ग़रीब लहरों पे पहरे बिठाए जाते हैं समुंदरों की तलाशी कोई नहीं लेता





पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

Jun 22, 2026

22-06-2026 योग किया ?


22-06-2026 

योग किया ? 


आते ही तोताराम ने पूछा- योग किया ? ठीक वैसे ही जैसे कोई मेट या मुंशी मिस्त्री से पूछता है- कितना प्लास्टर हुआ ? 

हमने कहा- क्या योग करना कोई मजदूरी है जो तू हमारे काम की रिपोर्ट ले रहा है ? यह हमारा व्यक्तिगत मामला है । हम योग करें या भोग। तू क्यों बिना बात की अफ़सरी झाड़ रहा है । और फिर योग, भोग, तप, तंत्र-मंत्र या अन्य कोई युक्ति सब हाईवे वाले ‘धाकड़’ की तरह थोड़े किये जाते हैं । तुलसी मानस के बालकाण्ड में कहते हैं-

जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ॥

योग, युक्ति, तप, मंत्र सब छुपाकर किये जाते हैं तभी उनका पूरा फल मिलता है ।  

बोला- तुझे पता होना चाहिए अब योग राष्ट्रीय कार्यक्रम हो गया है । कल छुट्टी थी लेकिन मास्टर स्कूलों में गए, और भी सरकार से लाभान्वित होने वाले या मोदी जी से लाभ पाने की उम्मीद रखने वाले सभी ने योग किया और फ़ोटो नेट पर डाले जिससे मोदी सरकार उन्हें देखकर उनकी कर्तव्यपरायणता और देशभक्ति का हिसाब-किताब रख सके । खुद मोदी जी ने कोलकाता में रेड रोड़ जैसी व्यस्त सड़क को सात दिन से बंद करवाकर कर मंच, कैमरे लगवाकर सभी देशभक्तों को योग सिखाया । इससे पता चलता है कि मोदी जी देशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कितने सजग और सक्रिय हैं । 

हमने कहा- दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल होता है । तभी कबीर कहते हैं-

करनी मीठी खाँड सी करनी बिस की लोय 

कथनी तज करनी करे तो बिस अमरित होय । 

मन वचन और कर्म की एकता ही सच्चा योग है । नहीं तो रामदेव वाला धंधा है । देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए केवल योग से काम नहीं चलता । सबसे पहले उन्हें स्वास्थ्यवर्द्धक और पूरा भोजन चाहिए, फिर भी अगर बीमार हो जाएँ तो असली दवाइयाँ, डॉक्टर और अस्पताल चाहिएं । योग स्वस्थ रहने के लिए पथ्य-परहेज, आहार-विहार की एक भारतीय पद्धति है । वह दवा और भोजन का विकल्प नहीं है । जब राजनीतिक पार्टियां नकली दवा बनाने वाली कंपनियों से चंदा लेंगी तो स्वास्थ्य का भगवान भी मालिक नहीं हो सकता । योग का ढोंग करने, योग करो स्वस्थ रहो का नारा लगाना जिम्मेदारी से बचने का बहाना है । जैसे कि जगह जगह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  का नारा लिखवा देने से काम नहीं होता । उसके लिए विज्ञापन की बजाय शिक्षा का बजट बढ़ाना पड़ता है और बेटियों को भ्रष्ट संतों और बाहुबली नेताओं से बचाना होता है । 

हाँ, योग से एक फायदा तो होता है । 

बोला- चल तूने कुछ तो माना । बता किसी आसन का कोई फायदा । 

हमने कहा- तीन आसन है एक शवासन, दूसरा कूर्मासन और तीसरा मार्जर्यासन । 

जब कोई समस्या या जिम्मेदारी लेने की बात आये तो शवासन लगा लो । सभी प्रभावित लोग धीरे धीरे सिर फोड़ कर चुप हो जाएंगे और इस तरह से सभी तनाव, समस्याएं और विवाद धीरे धीरे स्वतः शांत हो जाएंगे जैसे मणिपुर विवाद, महिला पहलवान शोषण, नीट पेपर लीक आदि । दूसरा है कूर्मासन । जब कोई संकट आये तो कछुए की तरह अपने हाथ पैर अपने खोल में समेट कर पड़े रहो । जब संकट टल जाए तब फिर देश के विकास में लग जाओ जैसे आजादी के आंदोलन में जब देश अंग्रेजों से लड़-भिड़ रहा था तब तथाकथित देशभक्तों ने ऐसे ही कूर्मासन लगा रखा था। और अब जब संकट नहीं है तब बिना कुछ किये खुद देशप्रेमी बनकर सबको हड़काते फिर रहे हैं । तीसरा है मार्जर्यासन । मार्जरी बिल्ली को कहते हैं । कभी उसे अंगड़ाई तोड़ते देखा है ? इस आसन से रीढ़ की हड्डी लचीली हो जाती है । जिससे आप ट्रम्प जैसे किसी भी कैरियर खराब कर सकने वाले दुष्ट या फायदा पहुँचाने वाले सेठ के आगे सरलता से झुककर अपना कैरियर बचा सकते हैं और धन जुटा सकते हैं । 

देश का सम्मान जाए भाड़ में ।    

 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach