May 30, 2026

29-05-2026 मास्टर, यू आर ग्रेट



29-05-2026 


मास्टर,  यू आर ग्रेट 



आज तोताराम ने आते ही मोदी जी के तेल का कम उपयोग करने की सलाह और अपील के बावजूद तेल का पूरा का पूरा टिन ही बरामदे में फैला दिया, बोला- मास्टर, यू आर ग्रेट ।

 

हम फिसलते फिसलते बचे । बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए बैठे रहे और कहा- यह कैसा षड्यन्त्र है ? हम कोई ग्रेट नहीं हैं । ग्रेट होना कोई मजाक है ? जो चाहे जिसे चाहे जब चाहे ग्रेट कह देता है । भारत में इतिहास में दो ही ग्रेट हुए हैं एक अशोक और दूसरा अकबर । वे भी दोनों एक साथ नहीं हुए । दोनों में 15-16 सौ साल का अंतर है । 


बोला- नहीं, ऐसी बात नहीं है । अब एक साथ दो दो ग्रेट सारी दुनिया देख रही है कि नहीं । एक अमेरिका में ट्रम्प और दूसरे भारत में मोदी जी । वे वहाँ अमेरिका को ग्रेट बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़े हुए हैं । जनता घबराई हुई है । पता नहीं, अब और कितना ग्रेट बनाएगा । दम फूला जा रहा है । ऐसे ही यहाँ मोदी जी 20-20 घंटे बिना आराम किए भारत को ग्रेट बनाने में भिड़े हुए हैं । चिंतित तो यहाँ की जनता भी बहुत है ग्रेटनेस से लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है ।


हमने कहा- तोताराम, हमें तो लगता है कि अब इस देश दुनिया में सामान्य लोग तो पैदा होने ही बंद हो गए हैं ।  

जो भी पैदा होता है ग्रेट से कम होता ही नहीं है ।बंगाल में सुवेन्दु अधिकारी को देख ले, उत्तराखंड में धामी को देख ले, असम में हिमन्त बिस्वा को देख ले कोई कहीं से सामान्य नजर आता है ? लेकिन हम न तो ग्रेट हैं और न ही ग्रेट बनना चाहते हैं और न ही कोई हमें ग्रेट कहकर उल्लू बना सकता है ।  


बोला- फिर भी मास्टर, इतने दिन से तू मुझे निभा रहा क्या यह ग्रेटनेस नहीं है ? 


तोताराम के इस वाक्य ने हमें गहरे तक छू लिया । हमने कहा- तोताराम, तुम्हें क्या निभाना ? तू तो एक प्रकार हमारा ही दूसरा पहलू है । अरे,  एक चाय का ही तो खर्चा है । सोच, कौन किसके यहाँ ऐसे नियमित रूप से आता है । हम तेरे बिना सुबह की कल्पना भी नहीं कर सकते । 


बोला- फिर भी मास्टर, एक बात तो माननी पड़ेगी । भारत में अनेक प्रधानमंत्री हुए हैं लेकिन किसी को अमेरिका के किसी राष्ट्रपति ने ‘यू आर ग्रेट’ लिखकर नहीं दिया । ऐसा कहते हुए तोताराम ने अपने फोन में से हमारे सामने एक बड़ा फ़ोटो कर दिया जिसमें अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियों गोर मोदी जी को एक फ़ोटो भेंट कर रहे हैं जिसमें मोदी जी और ट्रम्प दिखाई दे रहे हैं और जिस पर ट्रम्प ने अपनी लिखावट में हस्ताक्षर सहित लिखा हुआ है- मिस्टर प्राइम मिनिस्टर यू आर ग्रेट ।






हमने कहा- तोताराम, यह ग्रेटनेस बहुत महँगी पड़ रही है । इसके बदले में भारत को अगले पाँच साल में अमेरिका से 500 अरब डालर अर्थात 42 लाख करोड़ का सामना खरीदना पड़ेगा । भारत पर इतना विदेशी कर्ज तो मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से पहले शुरू के 66 वर्षों में भी नहीं हुआ था ।

बोला- फिर भी क्या यह कम गर्व की बात है कि अकबर के 500 सालों बाद इस देश को एक ग्रेट मिला है । ऐसे देखें तो एक साल का एक अरब डॉलर ही तो हुआ । इस देश की जनता में ‘इस सीमेंट’ की तरह ‘बहुत जान है’ । 


हमने कहा- ट्रम्प बहुत अविश्वसनीय व्यक्ति है । वह एक बार पकड़ लेने पर किसी का पीछा नहीं छोड़ता । ईरान शांति वार्ता को ही देख ले ।  कितने दिन से नाटक पर नाटक किए जा रहा है । फिर कुछ दिन  बाद कह देगा कि मैं जब चाहूँ मोदी का कैरियर खत्म कर सकता हूँ । 


हमारा तो कहना है कि मोदी जी ग्रेटनेस का चक्कर छोड़ें और अगर कोई कमजोर नस दबी हुई है तो भी हिम्मत करके सब कुछ साफ कर देना चाहिए । नहीं तो यह आदमी ब्लेकमेल कर करके मोदी जी की सारी ज़िंदगी नरक बना देगा । 


बोला- मास्टर, इस बारे में तो मैं क्या कह सकता हूँ । इस बारे में तो कोई चाणक्य ही कुछ कह और कर सकता है । 



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30-05-2026 ले पानी पी


30-05-2026 


ले पानी पी 




जैसे ही तोताराम आया हमने उसकी जलसेवा करते हुए कहा- ले, पानी पी । 


तोताराम ने भी बड़ी शालीनता से गिलास थामा और धन्यवाद दिया । 


चाय आने में दस-पंद्रह मिनट लगने की संभावना थी सो पाँच मिनट बाद ही हमने फिर उसके गिलास में पानी डालते हुए कहा- ले, थोड़ा और पी ले ।


तोताराम ने दो घूंट लेकर गिलास अलग रख दिया । 


पाँच मिनट और बीते । कुल दस मिनट हो गए लेकिन चाय अभी नहीं आई । आ जाएगी, यह कौन सी मन की बात है जिसके बिना राष्ट्र की हृदय गति रुक जाएगी । हमने फिर पूछ लिया- पानी और दें ?


अब तो तोताराम फट पड़ा । वास्तव में कुचरणी बहुत बुरी चीज होती है । अगर मंदिर के चबूतरे पर बैठे पंडित जी को दस मिनट में पचास लोगों के  ‘पंडित जी, राम राम’  का जवाब देना पड़ जाए तो पंडित जी गाली निकालते हुए उनके पीछे भागने लगेंगे । कोई भी चीज हो, अति बहुत बुरी होती है । तभी कहा गया है-


अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।



बोला- मुझे पकड़कर टंकी में पटक दे जो रोज रोज का चाय का झंझट खत्म ।ईंधन, दूध और चाय पत्ती सबका खर्च बच जाएगा । देश की डांवाडोल अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी । पानी पिला रहा है या मेरे प्राण लेना चाहता है । ठीक है कुछ नहीं तो पानी से भी अभ्यागत का स्वागत किया जाता है । लेकिन यह क्या ? पाँच मिनट में तीसरी बार पानी । लगता है राजस्थान में भजन कीर्तन मंडली और मोदी जी के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘वंदे गंगा अभियान’ के तहत कल कुछ ज्यादा की पानी आ गया लगता है ?


हमने कहा- ऐसी बात नहीं है । परसों दिन में बिजली कटौती होने के कारण पानी नहीं आया और कल अज्ञात कारणों से बमुश्किल चार बाल्टी पानी आया । वैसे ही टंकी में पानी पेंदे से जा लगा है । लगता है कल तो एक टैंकर डलवाना ही पड़ेगा । पिछले महिने तो साढ़े तीन सौ लिए थे । अब जब से ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल लेने से मना किया तो हो सकता है चार सौ माँग ले । 


बोला- जब पानी की इतनी तंगी है तो मुझे बार बार क्यों पानी पिलाए जा रहा है । ट्रम्प से आदेशों के तहत मोदी जी ही बहुत हैं देश को पानी पिलाने के लिए ।  







हमने कहा- हमने भी अब अपने दिमाग को ताला लगाकर चाबी उस गंगा मैया में फेंक दी है । बस, अब कोई कष्ट नहीं । जो जो मोदी जी कहते हैं करते चले जाते हैं । दो दिन पहले उन्होंने मंत्रीमण्डल की बैठक में एक बहुत बड़ी ज्ञान की बात कही है कि गरमी के दुष्प्रभावों और लू से बचने के लिए बार बार पानी पियें । और मीडिया ने भी जनहित में यह समाचार बड़े उत्साह से देश में पहुंचाया दिया है । मोदी जी ने तो बच्चों तक को यह समझाया है कि अपने माता-पिता, नाना-नानी, दादा-दादी आदि को गरमी में बार बार पानी पीने के लिए याद दिलाते रहे । पहले तो पोते-पोतियाँ यदा-कदा फोन किया करते थे लेकिन अब दो दिन से  पोते-पोतियों के फोन आ रहे हैं कि बाबा पानी पीते रहना । सो हमने भी तेरा खयाल रखते हुए पानी के लिए पूछ लिया तो क्या गुनाह कर दिया । शुक्र मना कि मोदी जी हैं नहीं तो क्या कभी नेहरू जी, शास्त्रीजी या इंदिरा जी आदि ने फोन करके कहा था कि मास्टरों गरमी बहुत पड़ रही है पानी पीते रहना । 


बोला- मोदी जी का कोई व्यक्तिगत परिवार न होने का यही तो फायदा है कि 140 करोड़ ही क्या, पूरा संसार की उनका परिवार है । 


हमने कहा- हाँ, लेकिन कांग्रेस और मुसलमानों को छोड़कर ।

 

बोला- ऐसी बात नहीं है, देखा नहीं अभी अभी जब विदेश दौरे पर गए थे तो कैसे यू ए ई वाले की तरफ पेंगविन की तरह हाथ फैलाकर बढ़ रहे थे । लेकिन यह पानी वाली बात तो उन्होंने तेरे मेरे लिए नहीं बल्कि अपनी नेक सलाह को मानकर ऊर्जा और ईधन की बचत करने वाले सम्राट चौधरी जैसे देश के सच्चे सेवकों के लिए कही है । तुझे पता है सम्राट, जो चाहें तो धरती पर पैर न रखें लेकिन मोदी जी के आह्वान पर अपने घर से 400 मीटर दूर कार्यालय तक पैदल गए हैं । सोच कितनी धूप झेली होगी और कितनी ऊर्जा खर्च हुई होगी । मेरा क्या है यहीं दो कदम पर तो हूँ ।सच्चे भक्तों को बीच बीच में पानी पीते रहना बहुत जरूरी है । 


वैसे कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि भक्त लोग मोदी जी के कहने से ज्यादा पानी पीने लगे हों इसीलिए तेरे यहाँ कम पानी आ रहा हो । 



हमने कहा- तोताराम, कुछ भी मोदी जी की बात का प्रभाव तो होता है । अभी अपने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय सीकर के कुलगुरु रोज अपने घर से 100 मीटर दूर अपने कार्यालय पैदल जाएंगे ।अखबार में सचित्र समाचार आया है । अब सोच पेट्रोल की कितनी बचत हुई होगी । ऐसे ही थोड़ी कर पा रहे हैं मोदी जी ऊर्जा संकट का मुकाबला ? बड़े बड़े त्यागी पड़े हैं देश में । सब तेरी हमारी तरह आरामतलब और स्वार्थी थोड़े हैं ।



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May 27, 2026

27-05-2026 मुसलमानों को क्या हो गया ?


27-05-2026 



मुसलमानों को क्या हो गया  ? 










आज तोताराम बड़ा बेचैन था, बोला- यह मुसलमानों को क्या हो गया ?


हमने कहा- क्या हो गया ? पढ़ें तो यूपीएससी जिहाद, किसी हिन्दू लड़की से प्यार हो जाए तो लव जिहाद, किसी मेडिकल कॉलेज में सलेक्ट हो जाएँ तो मेडिकल जिहाद, क्रिकेट में कोई कमाल दिखा दें तो क्रिकेट जिहाद, कहीं किसी सोसाइटी में प्लॉट-मकान खरीद  लें तो लैंड जिहाद । हालाँकि अनुपात में पिछले कई दशकों से कोई अंतर नहीं आया है फिर भी जनसंख्या जिहाद । भाजपा ने सबका साथ सबका विकास के तहत एक भी मुसलमान को पंच से प्रधान तक कोई भी टिकट न देकर किसी तरह ‘लोकतंत्र जिहाद’ को रोका हुआ है । अब तो रोटी-पानी और साँस लेने वाला जिहाद ही बाकी बचा है । फिर भी अब कौनसा देशद्रोह, भावना आहत करने वाला नया कांड कर दिया क्या ?


बोला- मास्टर, लगता है इनको देश का विभाजन करवाने वाला वह गाँधी, जिसे देशभक्तों ने कोई आठ दशक पहले ही निबटा दिया था, वैचारिक रूप से इन्हें बहका रहा है । सुना ! अब कह रहे हैं हम न तो गाय को काटेंगे और न ही गाय का मांस खाएंगे । अब यह भी कोई बात हुई ? और अब तो इनका एक धर्मिक नेता कह रहा है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे । 


हमने कहा- यह तो अच्छी बात है । बाबर ने भी हिन्दू भावनाओं को देखते हुए गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था । 


बोला- अगर ये गाय नहीं काटेंगे तो फिर जो निठल्ले गौ रक्षक हफ्ता वसूली करते घूम रहे हैं उनका काम कैसे चलेगा । हो सकता है अब वे सरकार से काम, नौकरी माँगने लग जाएंगे । बंगाल में बहुत से हिन्दू पशुपालक अच्छी कमाई करने के लिए बहुत सी गाएं ईद पर बेचने के लिए आये तो मुसलमानों ने कह दिया कि वे न तो गाय काटेंगे और न ही खाएंगे । अब वे हिन्दू गौपालक घोषाल क्या करें । रोजाना एक जानवर पर खाने का चार-पाँच सौ रुपया खर्च हो रहा है । कमाई गई सो अलग ।  


हमने कहा- लेकिन हमें तो खुश होना चाहिए कि मुसलमानों ने हिंदुओं की भावनाओं का खयाल रखना शुरू कर दिया है । अच्छा है गौहत्या न होगी तो सत्य सनातन सतयुग लौट आएगा । राष्ट्रवादी हिन्दू गौ भक्तों का गौशाला उद्योग और विकसित होगा । 


बोला- गौ शाला उद्योग गायों से नहीं, कागजों पर गाएं दिखाकर सरकारी अनुदान पेलने से विकसित होता है । और अब एक बहुत बड़ा मुद्दा जिसके तहत अनेक छुटभय्ये नेता नेतागीरी करते घूमते फिर रहे हैं अचानक मुद्दाविहीन हो जाएंगे ।  कल को ये लोग  हिन्दू मालिकों के बड़े बड़े बूचड़खानों में गाएं काटने का काम बंद कर देंगे  ? तो हिन्दू मालिक जो हजारों करोड़ का बीफ निर्यात करके कमाई करते हैं और सनातनी पार्टियों को चंदा  देते हैं उसका क्या होगा । 

हमने कहा- तो क्या हुआ ? करोड़ों हिन्दू मांस खाते हैं । जब मुसलमान नहीं आये थे तो क्या मांस खाने वाले हिन्दू और पशु काटने वाले कसाई भारत में नहीं हुआ करते थे ।

 

बोला- वह तो ठीक है लेकिन फिर हिंदुओं की सात्विक और अहिंसक वाली छवि का क्या होगा ? और अगर किसी ने यह उत्तराखंड के ‘बाबा ड्रेसेज’ के मुस्लिम मालिक की तर्ज पर हिन्दू मालिक के बूचड़खाने के मुसलमान नाम पर केस कर दिया तो ? फिर क्या हिन्दू, शर्मा, वर्मा, सिंह, सनातन, वैदिक, जय शेराँ  वाली जैसा कोई नाम रखेंगे ? । 


अब तो मोदी जी तत्काल कोई अध्यादेश लाना चाहिए कि कोई भी मुसलमान पवित्र हिन्दू आस्था, संस्कृति और मुद्दों में अपनी टांग नहीं अड़ा सकेगा । 


 



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May 25, 2026

25-05-2026 मैं भी कॉकरोच


25-05-2026 


मैं भी कॉकरोच 







आज तोताराम बड़े ठसके से आया । धुले हुए कुर्ता-पायजामा ।आज ही की बनी हुई दाढ़ी और 56 का आधा 28 इंची सीना लेकिन हिन्दुत्व के गर्व से फूला हुआ । सिर पर टोपी जिस पर लिखा हुआ था- मैं भी कॉकरोच । जैसे कभी मनमोहन सरकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार को लेकर जिसे देखो वही ‘मैं भी अन्ना’ की टोपी लगाकर घूमने लगा था या जैसे कभी लोग बिना पूछे ही कहने लगे थे- मैं भी चौकीदार । यह और बात है कि इतने चौकीदारों के होते हुई भी विदेशी मुद्रा का भंडार और रुपए की क्रय शक्ति और लाखों लोगों के वोट वोटर लिस्ट से पता नहीं कैसे चोरी हो गए । 


तोताराम हमेशा की तरह बैठा नहीं, ऐसे खड़ा रहा जैसे हम माइक पर घोषणा करें-  

अब मैं आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष आदरणीय तोताराम जी से आग्रह करूँगा कि वे आगे आयें और अपना स्थान ग्रहण करें । और उनको माल्यार्पण से स्वागत करेंगे फलाँ फलाँ जी ।


लेकिन हमने ऐसा कुछ नहीं कहा। तोताराम खुद ही बैठ गया । 


हमने कहा- आज यह अपना पद नाम लिखी टोपी लगाने की क्या जरूरत आ पड़ी ? दुनिया में कोई भी इस तरह का नाटक नहीं करता । न सूरज-चाँद, न शेर, न गीदड़ कोई अपने नाम की पट्टी लगाकर नहीं घूमता । मोदी जी भी अपने 32 सम्मान,  ‘प्रधान सेवक’;  ‘विश्व गुरु’ के बैज अपने सीने पर लगाए नहीं घूमते । उनके तेज से ही लोग लहचान जाते हैं कि ये अवतारी हैं । सब अपने गुणों और कर्मों से अपने आप ही पहचाने जा सकते हैं । कोई कम पढ़ा लिखा होता है वह दो-दो पेन रखता है और बात बात में अपने हाई स्कूल पास होने की बात करता है लेकिन मोदी जी ने कभी अपनी एनटायर पॉलिटिकाल साइंस की डिग्री नहीं दिखाई बल्कि जब भी कोई प्रसंग आया तो यही कहते रहे कि मैँ कोई पढ़-लिखा नहीं हूँ । 


वैसे तू यह अपनी परिचयात्मक टोपी न पहनता तो भी दुनिया जानती है कि मेरी औकात और हैसियत कॉकरोच से ज्यादा नहीं है । 


खैर, हमने उसके हाथ में गिलास थमाते हुए कहा- चाय पी । 


अभी तोताराम पूरा सा बैठा भी नहीं था कि उछल पड़ा और लगभग पूरी की पूरी चाय बिखर गई, बोला- कॉकरोच !! 


हमने देखा कि वास्तव में एक छोटा सा कॉकरोच भागा जा रहा था । 


हमने कहा- कॉकरोच डर गए क्या ? निकल गई सारी वीरता । 


बोला- कुछ भी हो मास्टर, ये चूहे, कॉकरोच, छिपकली कोई बहुत खतरनाक नहीं होते फिर भी अच्छा भला आदमी इनसे डर ही जाता है ।

 

हमने कहा- अब दस दिन में ही तुम्हारी पार्टी के दो करोड़ सदस्य होने से क्या मोदी जी भी डर गए हैं ? 


बोला- नहीं, वे ऐसे सतही आंदोलनों से डरने वाले नहीं हैं ।अभी तो ट्रम्प उन्हें कह रहे हैं-आई लव मोदी । वे जानते हैं ऐसे आंदोलनों की असलियत । 2011 में अन्ना आंदोलन कैसे, किस तरह शुरू हुआ और उससे कैसे, किसको लाभ हुआ और उसमें किसी वास्तविक बदलाव जैसा कुछ नहीं था ।तभी उस आंदोलन से निकले केजरीवाल जैसे चढ़े वैसे ही फिसल गए । धंधे वालों का धंधा सैंकड़ों गुणा बढ़ गया । जो असली खिलाड़ी थे वे सत्ता पर जम गए ।


सरकारें जब किसी सिद्धांत को लेकर बनती हैं तो परिवर्तन आता है फिर चाहे वे संघ की सरकार हो या कम्यूनिस्ट या मध्यमार्गी कांग्रेस की । असली सिद्धांतवादी संघ निसृत भाजपा ने ठोस काम किया और अपने सिद्धांतों के अनुसार सब कुछ सेट कर लिया ।अब जब तक कोई ठोस सिद्धांत वाली पार्टी निरंतर काम नहीं करेगी तब तक इन्हें कोई खतरा नहीं । 


हमने कहा- तो फिर कॉकरोच का क्या होगा ? 


बोला- वही होगा, लोग तेरी तरह बिखरी चाय को भूल जाएंगे और अमेरिका से 500 अरब डॉलर की डील तथा एक और सरेंडर हो जाएगा ।  


हमने कहा- ठीक है लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि बच्चा झुनझुने से बहुत देर तक नहीं बहल सकता । दूध की जगह तो दूध ही चाहिए भले ही पानी मिला हुआ ही क्यों न  हो ।जब अन्ना का आंदोलन चल रहा था तब हम अमेरिका में थे । हमारे कई शिष्य ‘मैं भी अन्ना’ की टोपी लगाकर फ़ोटो भेजते थे और बाद में वे ही खीजते भी मिले । 


बोला- कोई बात नहीं । कुछ दिन का तो इंतजाम हो गया। बाद में कोई और झुनझुना देखेंगे ।  


-रमेश जोशी 



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May 22, 2026

22-05-2026 कमल को बचाना है

22-05-2026 


कमल को बचाना है  





 रात सोने में कुछ देर हो गई थी । नींद खुली तो बरामदे के आसपास मरियल सी आवाज सुनाई दी- 


कमल को बचाना है 

कॉकरोच को भगाना है 


नारे के शब्द तो जुलूस जैसे थे लेकिन आवाज मात्र एक ही और वह भी मिमियाती हुई । वैसे ही जैसे वन मैन शो, वन मैन पार्टी या एकल विद्यालय । खुद ही झाड़ू लगाओ, खुद ही घंटी बजाओ, खुद ही पढ़ाओ वैसे ही जैसे चिराग पासवान, जयंत चौधरी, हनुमान बेनीवाल, जीतन राम मांझी, आठवले की पार्टी । पोस्टर चिपकाने से लेकर अध्यक्षता करने तक खुद ही खुद । जैसे भाजपा में फ़ोटो खिंचवाने,  झंडी दिखाने और किसी भी विभाग की योजना का लोकार्पण करने के लिए अकेले मोदी जी । 


बाहर निकलकर देखा तो तोताराम । एक पुराने से कपड़े का बैनर दोनों हाथों में थामे जिस पर नीचे लिखा था- 


कमल को बचाना है 

कॉकरोच को भगाना है । 


और ऊपर एक तरफ झाड़ू, दूसरी तरफ चप्पल बीच में कॉकरोच । 


हमने कहा- कांग्रेस मुक्त भारत करते करते यह कॉकरोच मारो अभियान तक आ गए !  घुसपैठिया मुक्त भारत का क्या हुआ ?


बोला- घुसपैठिया मुक्त भारत तो एक चुनावी जुमला है जो यथासमय चलेगा लेकिन अब यह एक नई, गंदी और वाइराल बीमारी अचानक आ गई है जिसका तत्काल इलाज बहुत जरूरी है । उस एक जज ने नकली डिग्री वालों के चक्कर में बेकारों को भी लपेटकर कॉकरोच क्या कह दिया आफत हो गई । अब इन्होंने एक पार्टी बना ली है । कॉकरोच जनता पार्टी । और मजे की बात देख मास्टर, हमारी पार्टी के जितने फॉलोवर अब तक बन पाए हैं उससे ज्यादा इसके पाँच सात दिन में हो गए । 


हमने कहा- यह सब इन बेकारों के मजाक हैं । दो चार दिन में ठंडे हो जाएंगे । 


बोला- मास्टर, जब लोग सत्ता का मजाक उड़ाने लगते हैं तो समझो लोगों का भय कम हो रहा है । और शासन भय से ही तो चलता है । हँसना और मजाक करना निर्भयता की शुरुआत है । भय बिन होय न प्रीत । 


हमने कहा- कॉकरोचों से क्या डरना ? लाइट जला दो, भाग जाएंगे । जो न भागें उन पर चप्पल या झाड़ू जो भी सनातन हथियार उपलब्ध हो चला दो । कॉकरोच की भी कोई जान होती है । 


बोला- मास्टर, नेपाल श्रीलंका बांगलादेश में देखा नहीं ? ज़माना खराब है । पहले से ही एहतियात बरतना जरूरी है । 


हमने कहा- तो इन्हें पाकिस्तानी, बाबर की औलाद आदि कहकर बदनाम कर दो , यूएपीए लगा दो, ईडी भेज दो, बुलडोज़र चलवा दो ।  


बोला- इनके साथ यह भी एक समस्या है । न इनके पास नौकरी, न घर, फटी जेब । नंगा राम से भी बड़ा । कोई अजित पवार, अशोक चव्हाण, सुवेन्दु अधिकारी, राघव चड्ढा, हिमांत बिस्वा सरमा, नारायण राणे, छगन भुजबल आदि होते तो ईडी की एक रेड में ही काम हो जाता ।  इनका अकाउंट भी  बंद कर दिया लेकिन बात है कि वाइराल हुई जा रही है । 


हमने कहा- तो इन्हें पाकिस्तानी एजेंट बताया दो । 


बोला- क्या बताएं यह दाँव भी नहीं चलेगा क्योंकि मुसलमान न पढ़ते हैं क्योंकि न तो उन्हें सुविधा मिलती है और न ही नौकरियां । इसलिए वे दस-बारह साल के होते न होते खुद ही कोई न कोई छोटा-मोटा धंधा पकड़ लेते हैं । इन पढ़े लिखे बेकारों में तो अधिकतर हिन्दू ही हैं । चुनाव में अगर वोट न देने का चक्कर चल गया तो ज्ञानेश कुमार के एसआईआर के बावजूद जीतना मुश्किल हो जाएगा । विद्वान कह  गए हैं-


बहुतन को न विरोधिए निबल जान बलवान 

मिली भखि जाहिं पिपीलिका नागहिं नग के मान 


हजारों चींटियाँ मिलकर पहाड़ जैसे साँप को खा जाती हैं । 


हमने कहा- तो कोई भ्रम फैलाकर इसकी हवा निकाल दो । 


बोला- यही तो कर रहे हैं । इसीलिए यह कमल रक्षा पार्टी बनाई है । कमल लक्ष्मी का सिंहासन है । अगर कमल नहीं रहा तो लक्ष्मी कहाँ बैठेगी । देश कंगाल हो जाएगा ।  किसी भी व्रत में कमल गट्टा खाया जाता है । कमल नहीं तो गट्टा कहाँ से मिलेगा । सनातन पर संकट ।  सृष्टि को बनाने वाले ब्रह्माजी भी कमल पर ही बैठते हैं । और इन कॉकरोचों का कुछ पता नहीं ।  खाने को न मिले तो कहीं कमल को ही न खा जाएँ । और रामचन्द्र कृपालु भी कंज (कमल )के बिना कैसे गाया जाएगा ।  


बोलते बोलते अचानक तोताराम ने नारा बुलंद किया-


कमल को बचाना है 

कॉकरोच को भगाना है । 


हमने कहा- बहुत हो गया । आज तुझे चाय नहीं, छाछ पिलाते हैं । दिल-दिमाग दोनों ठंडे हो जाएंगे । कमल की चिंता छोड़ । ये सब तो चुनाव चिह्न हैं । पहले दीपक था अब कमल है । कांग्रेस भी तो पहले बैलों से चली फिर गए बछड़े से और अब हाथ । अगर ये कॉकरोच कमल को खा जाएंगे तो क्या । कुछ भी रख लेंगे निशान । काम करेगी तो 56 इंच की सफेद दाढ़ी ही काफी है । 


बोला- फिर भी मास्टर, हवा का कुछ ठिकाना नहीं । सावधानी हटी और दुर्घटना घटी । 




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May 21, 2026

21-05-2026 छोटे फूफा


21-05-2026 


छोटे फूफा 





आज तोताराम ने पूछा- छोटे फूफा आ गए ?


हमने कहा- अब छोटे और बड़े फूफा कोई आने वाले नहीं हैं । अब तो जब हुक्म होगा हम ही उनके पास जाएंगे । जहाँ फूफा लोग जा चुके हैं वहाँ से कोई लौटकर नहीं आता । वैसे यह किस फूफा की बात कर रहा है तू ?


बोला- मेलोनी के फूफा की । 


हमने कहा- मेलोनी के फूफा राजीव गाँधी तो हो सकते हैं क्योंकि उनकी ससुराल इटली में है ।संजय गाँधी छोटे फूफा हो सकते थे लेकिन वे भी नहीं रहे । 


बोल- क्यों, मोदी जी छोटे फूफा नहीं हो सकते क्या ? मानो तो रिश्ता, न मानो तो बाप भी कुछ नहीं ।राष्ट्र के रिश्ते सारे राष्ट्र  पर लागू होते हैं जैसे किसी गाँव के दामाद से सारा गाँव मजे लेता है कि नहीं ? बापू सारे देश का एक, सरदार सारे देश का एक, नेताजी सारे देश के एक । मोदी जी राजीव गाँधी से पाँच सात साल छोटे हैं । इटली से उनका भी कोई राष्ट्रीय रिश्ता बनता है कि नहीं ? ऐसे में   इटली के 50 साल तक के बच्चे सोनिया की ससुराल से आये मोदी जी को छोटा फूफा नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ।  


हमने कहा- हमें तो ध्यान ही नहीं आया कि इतने दिनों से मोदी जी और मेलोनी की चर्चा क्यों चल रही है । अब मामला समझ में आया । कुछ भी हो तोताराम, आदमी लाख दुनियादारी छोड़ दे लेकिन फिर भी कुछ न कुछ तो बचा ही रहता है आदमी के मन में । जिसके बहिन नहीं होती वह किसी को धर्म की बहिन बना लेता है । ठीक है मोदी जी ने देश की सेवा के लिए घर नहीं बसाया, लेकिन कहीं न कहीं मन में वात्सल्य है तो सही । और मेलोनी भी देखा नहीं, कैसे खुश नजर आती है मोदी जी के साथ जैसे पिता या दादा के साथ कोई बेटी-पोती । आजकल तो कई लड़कियां बुजुर्गों को बॉय फ्रेंड तक कहती हैं । ‘खूबसूरत’ फिल्म में देखा नहीं रेखा कैसे अशोक कुमार के साथ गाती है- सारे नियम तोड़ दो, नियम से चलना छोड़ दो । 

 

बोला- तभी तो मोदी जी मेलोनी के लिए ‘मेलोड़ी’ चॉकलेट लेकर गए हैं । 


हमने कहा- भले ही परिवार नहीं बसाया हो लेकिन मोदी में समझ तो है । वैसे तो हम आजकल बाहर बहुत कम जाते हैं और जाते हैं तो भी चुपचाप जो काम करना होता है करके सीधे घर आ जाते हैं । लेकिन बहू जब भी बाहर से आती है तो खाने की कोई न कोई चीज जरूर लाती है । उसने हमें भी कहा कि हम जब बाहर से आयें बच्चों के लिए कुछ न कुछ लेकर आया करें, भले ही दो चार टॉफी ही क्यों न हो ।इससे दादा पोते-पोतियों का रिश्ता गहरा होता है । हमें प्रेरणा देने के लिए वह अपने आप से हमारी मेज की दराज में टॉफी का पैकेट रख देती है । लेकिन मोदी जी तो संघ परिवार के बाल ब्रह्मचारी होकर भी बहुत व्यावहारिक निकले । 


बोला- यही तो विशेषता है मोदी जी की । जहाँ भी जाते हैं कोई न कोई इस-उस या पिछले जन्म का रिश्ता निकाल ही लेते हैं । अबकी बार तो क्या अनुप्रासात्मक मास्टर स्ट्रोक मारा है- मेलोनी और मेलोडी । कभी राजीव गाँधी के दिमाग में भी इटली की किसी मेलोनी के लिए कोई  मेलोड़ी चॉकलेट ले जाने का आइडिया नहीं आया होगा ।


हमने कहा- अगर कमला हैरिस अमेरिका की राष्ट्रपति बन जाती तो हो सकता है  मोदी जी उसके लिए ‘कमलापसंद’ पान मसाला ले जाते । 


बोला- वैसे मास्टर, एक बात तो तुझे माननी पड़ेगी कि मोदी जी का गुजराती दिमाग सब जगह काम करता है ।अगर सबसे बड़ा पैक भी दिया होगा तो 391 ग्राम वाला लगभग 100 रुपए का आता है मतलब दो डॉलर से भी कम ।



  



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May 19, 2026

19-05-2026 गर्व से कहो हम कॉकरोच है


19-05-2026 

गर्व से कहो हम कॉकरोच है  



आज जैसे ही तोताराम आया, हमने कहा- तोताराम, क्यों न अपन भी कोई पार्टी बना लें ।

बोला- बनी तो हुई है बी टी पी बरामदा टी पार्टी । एक टी पार्टी बनी थी अमेरिका में ‘बोस्टन टी पार्टी’ जिसने सब कुछ बदलकर रख दिया था और एक तेरी यह बरामदा टी पार्टी । आज तक कुछ नहीं हुआ ।

हमने कहा- तो इसे बीजेपी बना लेते हैं ‘बरामदा जनता पार्टी’ या ‘बुढ़ऊ जनता पार्टी’ ।

बोला- वह भी करके देख लिया लेकिन हिमन्त बिसवा, सुवेन्दु अधिकारी, अशोक चव्हाण तो दूर कोई राघव चड्ढा भी चड्डी पहनने नहीं आया ।

हमने कहा- पार्टी में कोई नाम से नहीं दाम और भय से आता है । हमारे पास कौन सा पी एम केयर फंड या इलेक्शन बॉन्ड का धन है और डराने के लिए कौनसी पुलिस, ईडी है ।

बोला- और चाय भी थर्ड क्लास ।

हमने कहा- तो फिर बरामदा झालमुड़ी पार्टी बना लेते हैं ।

बोला- अब झालमुड़ी और नौकाविहार का समय गया । वह अगर आएगा तो 2031 में चुनाव के समय । अब फाँकता रहे बंगाल झालमुड़ी और चलता रहेगा बुलडोज़र ।

हमने कहा- तो सी जे पी बना लेते हैं । सी जे पी मतलब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ।

बोला- कल्पना भी की तो कंजूसी वाली । मिर्ची के साथ रोटी की । कल्पना में तो मोदी जी वाला मशरूम खा लेता । सी जे पी से क्रोकोडाइल जनता पार्टी भी तो बना सकता था । मोदी जी वाला मगरमच्छ का बच्चा । अब तक तो जनता रूपी गजराज को समुद्र में घसीट ले जाने लायक बड़ा हो गया होता । लेकिन नहीं, रहा वही का वही कॉकरोच । जरा की आवाज हुई, लाइट जली तो फिर भयभीत होकर किसी नाली या दरार में गायब ।

हमने कहा- लेकिन यह नई पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हो तो बहुत पोपुलर रही है । दो दिन में ही चालीस हजार हो गए । वैसे अगर कॉकरोच जनता पार्टी न बनाओ तो भी इस देश में बहुमत कॉकरोचों का ही है । काँवड़ लाने वाले, मस्जिदों के आगे डी जे बजाने वाले, गौरक्षक सब कॉकरोच से अधिक कुछ नहीं हैं । और हम तो कहते हैं ये राज्यसभा में जाने के लिए, अपने बच्चों को नौकरी दिलवाने के लिए गटर में उतरने वाले जज भी कॉकरोच से ज्यादा कुछ नहीं हैं । रात ढले बचा खुचा भोजनखाने वाले निर्देशक मण्डल के सदस्य भी हमें तो कॉकरोच ही लगते हैं ।

बोला- वैसे एक बात तो है मास्टर, कॉकरोच उड़ भी लेते हैं ।

हमने कहा- लेकिन धर्म और राष्ट्रवाद की ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार करना किसी भी कॉकरोच के लिए संभव नहीं ।और उन्हें पार किए बिना कोई भी सार्थक परिवर्तन संभव नहीं ।

अगर कोई कॉकरोच मुफ़्त का माल खाकर बहुत मोटा हो जाए और उसका सीना 56 का हो जाए तब भी अगर वह सच के उजाले का सामना नहीं कर सके तो वह कॉकरोच ही माना जाएगा । महात्मा गाँधी नहीं हो जाएगा ।


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May 18, 2026

18-05-2026 गू, चू… और कॉकरोच


18-05-2026 

गू, चू… और कॉकरोच 


आजकल तथाकथित बड़े लोग मतलब खुद को खुदा समझने वाले लोग जिन्हें जनता फुद्दू समझती है,, कुछ भी उल्टा सीधा बोल देते हैं । लगता है संसद और कोर्ट सड़क पर आगए जैसे कि स्वच्छता की गिनती में ऊपर आने वाले शहरों में अस्वच्छ पानी पीकर लोग मर जाते हैं या सीवर की गंदगी सड़क से होती हुई गृहप्रवेश करने लगती है । हमारा फोन कौन मोदी जी और ट्रम्प उठाते हैं । ले देकर एक तोताराम ही है जिसे हम मन की बात के बहाने पकड़ लेते हैं । उसकी भी वैसे ही मजबूरी है जैसे कि मोदी जी की । 

हम तो खैर तोताराम को चाय तो पिलाते हैं लेकिन ट्रम्प है कि मोदी को वैसे ही बात, बिना बात हड़काता रहता है ।  कभी कहता है  मैंने युद्ध विराम करवाया और सौभाग्य-सिंदूर को खतरे में डाल देता है । कभी कहता है मैं जब चाहे मोदी का कैरियर खत्म कर सकता हूँ । और जब कुछ ज्यादा हो जाता है तो बीच बीच में ठंडे छींटे दे देता है कि इंडिया बड़ा लक्की है कि उसे मोदी जी जैसा प्रधानमंत्री मिला । वैसे जनता जानती है अपने सौभाग्य श्री को । दुनिया का क्या है ? वह तो माँग देखती है या फिर करवा चौथ का व्रत । 

तो लब्बोलुआब यह कि जैसे ही तोताराम आया हमने उसे बोलने का मौका दिए बिना ही पकड़ा- यह ट्रम्प अपने को समझता क्या है ?

बोला- इस एक छोटी सी बात के पीछे ही सब कुछ छुपा है, मास्टर ! राई की ओट परबत । आदमी खुद को समझ ले तो दुनिया की सारी समस्याएं ही हल हो जाएँ । आदमी सब कुछ समझ लेता है लेकिन खुद की तरफ़ कभी ध्यान नहीं देता । पीछे से लगभग सारी खोपड़ी खाली हुई रहती है लेकिन सामने के चार बालों को माथे पर ऐसे सजाता है जैसे कि कोई जवान छैला । बात करते करते कुछ भी भूल जाता है, लिखते बोलते हाथ-जुबान लड़खड़ाते हैं लेकिन बात करता है 56 इंची छाती की । इसीलिए अपने मारवाड़ी में कहावत है- मन मैं मूरख और जूण मैं कोई दुखी कोनी अर्थात सब खुद को बहुत चतुर समझते हैं और गंदी नाली में पड़ा कीड़ा भी खुद को सुखी समझता है । ऐसी गलतफहमी के बिना जीवन कटता नहीं ।

वैसे मोदी जी के डीयर फ्रेंड ट्रम्प से तुझे क्या परेशानी है ? 

हमने कहा- अभी अप्रैल में जन्म आधारित नागरिकता को लेकर उसने चीन और भारत को ‘नरक का गड्ढा’ कहा है । यह तो बहुत गलत बात है । 

बोला- इसमें गलत क्या है ? यह दुनिया है ही नरक का द्वार । जो भी जीव इस दुनिया में जिस कर्म से आता है उस कुकर्म के सारे इलाके नरक मतलब मल मूत्र के निकास द्वार के आसपास ही होते हैं । सभी धर्मों में इस संसार को नरक ही माना है । अगर यह दुनिया नरक नहीं होती तो धर्म का धंधा करने वाले लोग इससे अलग स्वर्ग का लालच देकर लोगों को बहकाते कैसे ? और ट्रम्प का मूल देश जर्मनी ही अगर स्वर्ग होता तो उसके पूर्वज जर्मनी छोड़कर अमेरिका आते ही क्यों ।और मज़े की बात कि अब ट्रम्प को उसी नरक के गड्ढे चीन जाना पड़ा कुछ फौरी फायदे के लिए । 

लेकिन तू ट्रम्प की ही आलोचना क्यों करता है ? अभी दो चार दिन पहले दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में चू… जैसे नरक के आसपास के इलाके में स्थित स्थान से उत्पन्न कहा गया है । इसमें भी क्या बुराई है । एक महंत जी ने भी कुछ महिनों पहले एक पत्रकार को इसी शब्द से विभूषित किया था । इसमें क्या है यह तो हमारे संस्कारी हिन्दी बेल्ट का लोकसंस्कृति से लथपथ शब्द है । इसी बेल्ट में माँ और बहिन को भी इस संस्कार में सहजता से शामिल कर लिया जाता है । सबका साथ, सबका विकास । 

हमने कहा- चलो ये तो सामान्य लोग हैं लेकिन भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भी तो कोई कमी नहीं छोड़ी । वे बेरोजगार युवकों को कॉकरोच बता रहे हैं । 



बोला- बेकार होना बहुत बड़ी पीड़ा है । चालीस साल नौकरी करके लाखों की पेंशन लेने वाला जज भी जब सोचता है कि घर बैठने की बजाय कहीं राज्य सभा में ही घुस जाऊँ । फिर चाहे वहाँ कुछ भी न करूँ मुफ़्त में सरकारी बंगले में रहूँ और मजे करूँ । ऐसा सोचने वाला भी कॉकरोच की गति को ही प्राप्त होता है । वह भी एक प्रकार से राजा की जूठन पर पलता है कॉकरोच की तरह । गंदी जगहों पर अधिक पाया जाता है । संसद में पीछे बैठकर हिजड़ा मुस्कराहट और ताली बजाने के अतिरिक्त कुछ करने लायक नहीं रहता । 

लेकिन सूर्यकांत जी ने तो सफाई दी है कि उन्होंने ऐसा उन वकीलों के लिए कहा है जिनकी डिग्रियाँ संदेहास्पद है । 

हमने कहा- तोताराम, यह तो और भी खतरनाक स्टेटमेंट है । यह तो विपक्ष को समझ ही नहीं आया नहीं तो मुद्दा और भी बड़ा बन जाता । यह इशारा तो प्रकारांतर से बहुत ऊपर तक पहुंचता है ? 

कुछ दिनों पहले मोदी जी की एनटायर पॉलिटिकाल साइंस की डिग्री के बारे में प्रश्न करने पर भी तो कोर्ट ने रोक लगा दी थी और उसके लिए कुछ ज्यादा ही उछल कूद करने पर केजरीवाल पर 25 हजार का जुर्माना लगा दिया गया था । 

बोला- मास्टर, वैसे मुझे तो इस कॉकरोच वाले विशेषण में भी कोई बुराई नजर नहीं आती । अगर अतिवादी लोग अन्यथा न लें तो पृथ्वी पर जीवन के विकास क्रम में कॉकरोच राम कृष्ण से भी पहले आते हैं सबसे पुराने । कोई  30-35 करोड़ पुराने जीव । सही अर्थों में तो ये ही सनातन हैं जैसे किसी भी महान देश में बेरोजगार ।     


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May 16, 2026

16-05-2026 नो फ़ोटो, प्लीज !


16-05-2026 


नो फ़ोटो, प्लीज !






आज तोताराम कोई 8 बजे आया । हमने कहा- सारे दिन चाय नहीं बनती । यह कोई रेलवे स्टेशन की चाय की दुकान थोड़े ही है जो चाय का भगोना धीमी आँच पर हर समय चढ़ा रहेगा और जैसे ही ट्रेन आई चीनी और दूध डाला और चल पड़े ‘चाय गरम’ कहते हुए ।हाँ, कल बहू स्कूल से आते समय गन्ने का रस ले आई थी । उसमें से कुछ बचा हुआ होगा तो दो घूंट पिला देंगे ।  


बोला- प्रभु, मैं चाय पीने नहीं बल्कि चुनाव कार्यालय में चलने के लिए आया हूँ । पता कर ही लेना चाहिए कि वॉटर लिस्ट में नाम है या नहीं । नहीं तो जैसे बंगाल में SIR में काट दिए नाम वालों की सभी सरकारी सुविधाएं बंद कर दी गई हैं वैसे ही कहीं अति उत्साह में आकर मोदी जी ने हमारी पेंशन बंद करवा दी तो मुश्किल हो जाएगी । फिर 2047 का मोदी जी का अति विकसित भारत देखना तो दूर 2027 पकड़ना भी मुश्किल हो जाएगा ।  


हमने कहा- तो ठीक है, यही घर के आगे खड़े हो जाते हैं । कभी कभी यहाँ से ही ऑटो मिल जाता है । सीधे कलेक्टरेट के आगे उतार देगा । 


बोला- नहीं, ऑटो से नहीं, पैदल चलेंगे । मोदी जी की अपील के बाद क्या हम डीजल पेट्रोल बचाने के लिए इतना भी नहीं कर सकते । अपने राजस्थान के तो एक मंत्री बस से जा रहे थे तो एक साइकल पर । यह बात और है कि उनका फ़ोटो लेने के लिए पीछे पीछे कार चल रही थी और साइकिल से गिर पड़ने की स्थिति में एक अंबुलेन्स भी । और बिहार के ‘सम्राट’ तो पैदल ही निकल पड़े । 


हमने कहा- तो फिर पोती से कह देते हैं वह हम दोनों का पैदल चलते हुए फ़ोटो ले लेगी । शाम को फ़ोटो अखबार में दे आएंगे । क्या पता छप ही जाए । और ऊपर मोदी जी को भी भिजवा देंगे । क्या पता कभी वक़्त जरूरत काम ही आ जाए । 


बोला- नहीं मास्टर, मैं अब किसी के साथ कोई फ़ोटो नहीं खिंचवाना चाहता है । पता नहीं, कौन किस रूप में किस अपराध में शामिल निकल आये और बिना बात मेरी बदनामी हो जाए । लोग आजकल मोदी जी के साथ अदानी, अनिल अंबानी, बीएचयू के गैंग रेप के अपराधियों, कुणाल पांडे, अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल तथा सिडनी की एक अदालत द्वारा महिलाओं के अपहरण और बलात्कार के दोषी बालेश धनखड़ के फ़ोटो दिखा दिखाकर जाने क्या क्या बातें कर हैं ? 


हमने कहा- तो क्या हम तुझे अपराधी नजर आ रहे हैं ? 


बोला- किसे पता ? तभी तो कहा है-


सबसे बच-बच कर चलना है  दुनिया में इंसान रे 

ना जाने किस वेश में बाबा मिल जाए शैतान  रे । 


अभी देखा नहीं राजस्थान में नीट पेपर लीक के आरोपी बिंवाल का शिक्षामंत्री मदन दिलावर के साथ फ़ोटो दिखाकर लोग जाने क्या क्या कह रहे हैं । ये तो मदन जी हैं दिलावर हैं मतलब बहादुर और साहसी जो कुछ भी कहकर बच जाएंगे लेकिन मेरा क्या होगा ? मैं कोई हिमन्ता, अधिकारी, अशोक चव्हाण थोड़े हूँ जो पाक साफ भी घोषित के दिया जाऊँगा और मंत्री भी बना दिया जाऊंगा । 

 

हमने कहा- लेकिन हम पर किसी पेपर लीक का या अन्य भ्रष्टाचार आरोप कैसे लगा सकता है ? हम तो पिछले 25 साल से बरामदे में बैठे हैं । 


बोला- आज जिस बिंवाल पर पेपर लीक का आरोप है चार साल पहले उसके परिवार के चार-पाँच बच्चे नीट में सलेक्ट हुए थे और तेरे परिवार के चार बच्चे भी आई आई टी से जुड़े हैं दो बेटे और दो पोते । इतना प्रमाण क्या कम है ? चलना हो तो चल, ऑटो से चल या पैदल लेकिन


 ‘नो फ़ोटो प्लीज’ ।    



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May 14, 2026

14-05-2026 भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले


14-05-2026 


 


भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले 





 



आज जैसे ही बरामदे में झाँका तो देखा, तोताराम । 


हमने खीजते हुए कहा- कल तुझे कहा था ना, वर्क फ्रॉम होम की तरह चाय फ्रॉम होम । 


बोला- मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही  किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके वालों की संसद है । और यह कोई ट्रम्प का कार्यालय थोड़े है जो ‘मे आई कम इन, सर’ कह कर डरते डरते पूछ कर आना होगा । 


हमने कहा- फिर भी मोदी जी ने सच्चे देशभक्तों से राष्ट्रहित में जो अपील की है उसका तो सम्मान करना चाहिए कि नहीं ?


बोला- सम्मान है तो सही । मेरे घर से यहाँ आने के लिए किसी वाहन की जरूरत नहीं, कोई पेट्रोल नहीं फुँकता, और तुझे चाय पिलाने के लिए सोना आयात करने कोई अपना नाम कढ़ा 15 लाख का सूट पहनने की जरूरत भी नहीं । इसी 50 रुपए वाली घिसी लुंगी में जिसमें बंगाल में वोट तक नहीं डालने दिया जाता, निःसंकोच चाय पिला सकता है । और मैं कोई प्रश्न नहीं कर सकता कि चाय ठंडी है, एक ही पत्ती को बार बार उबाला गया है, या यह चाय नहीं लड़की का बुरादा है, गिलास ढंग से धोया है या नहीं आदि । और तू मोदी जी की तरह 12 साल में एक भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं है । 


हमने कहा- लेकिन चाय पीना क्या जरूरी है ? मोदी जी ने तो यहाँ तक कहा है कि तेल भी कम खाओ । जहाँ गुजरात में हर चीज में गुड़ और मूंगफली का तेल जी भर कर होता है वहाँ के मोदी जी तेल, नमक, चीनी कुछ भी नहीं खाते । यह बात और है कि चुनावी मजबूरी में सड़क किनारे की किसी ऐसी वैसी दुकान से खूब सरसों का तेल और मिर्च डलवाकर झालमुड़ी खाली । तभी तो शंखप्रक्षालन के लिए तीरथ तीरथ जाना पड़ रहा है ।

फिर भी तुझे टी फ्रॉम होम ही पीना चाहिए । 


बोला- तेरे यहाँ चाय पीने आना रूस से सस्ता तेल और ईरान से खाद खरीदने जैसा कोई जघन्य अपराध थोड़े है जिसके लिए ऐसे डरें जैसे कि कहीं एप्सटीन फ़ाइल न खुल जाए । 

और फिर मैं कौनसा मध्य प्रदेश के राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर की तरह कार्यभार संभालने के लिए कारों का काफिला लेकर आता हूँ । सुना है समाचारों के अनुसार काफिले में कम से कम 50 और अधिक से अधिक 700 कारें थीं ।जब कि पाठ्यपुस्तक वाला विभाग खान, पुल, सड़क जैसा कमाई वाला विभाग भी नहीं है । 

 

हमने कहा- उनकी क्या बात करता है ? सबसे पहले तो वे सच्चे भक्त हैं । तेरी तरह मौका परस्त नहीं हैं ।

दूसरे ‘सौभाग्य’ शाली हैं, तीसरे ‘सिंह’ और चौथे सबसे ऊपर ‘ठाकुर’ और पाँचवें ‘मध्यप्रदेश से’  हैं जहाँ से

कोई भी विजय शाह सोफिया कुरैशी को पाकिस्तान की बहिन कहकर भी साफ बचा रह सकता है, कोई भी

कैलाश विजयवर्गीय ‘घंटा’ बयान देकर भी खानदानी संस्कारी बना रह सकता है, नीमच में भंवर लाल को

किसी दूसरे धर्म का लगने मात्र पर किसी भाजपा कार्यकर्ता दिनेश द्वारा पीटा जा सकता है,या

सीधी का प्रवेश शुक्ला किसी आदिवासी के सिर पर पेशाब कर सकता है । 



 



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May 13, 2026

13-05-2026 चाय फ्रॉम होम

13-05-2026 


चाय फ्रॉम होम 







आज जैसे ही तोताराम आया हमने कुछ नीची नज़रों और नीची आवाज में कहा- हमें माफ करना, तोताराम !


बोला- जैनियों में एक अच्छी प्रथा है ‘क्षमावणी’ ।  साल में एक बार अपने अच्छे बुरे कर्मों के लिए उल्टे मन से ही सही माफी मांगते हैं । माफी मांगना और माफ करना दोनों ही बड़प्पन की निशानी है । वैसे तो तुझे एक सड़ियल चाय पर रोज एक घंटा अपने मन की बकवास पेलने के लिए बहुत पहले माफी ही नहीं माँगनी चाहिए थी बल्कि प्रायश्चित स्वरूप चांद्रायण व्रत करना चाहिए था ।


हमने कहा- हम चाय और मन की बात के लिए माफी नहीं माँग रहे है । चाय अपने आप में कुछ नहीं होती । वह तो एक संस्कृति और शिष्टाचार है । जिसे कभी कोई चलती ट्रेन में पिलाकर निभाता है तो कभी कोई 15 लाख का सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहनकर निभाता है । हम तो तुझे, मैना और कुछ परिजनों को एक सरप्राइज़ देना चाहते थे । हमने इसी 10 मई को अपनी शादी के 68 वर्ष पूरे  होने के उपलक्ष्य में किसी लक्जरी क्रूज़ शिप से योरप के कुछ देशों के एक महिने के ट्रिप का कार्यक्रम बनाया था । पाँच मिलियन का नॉन रिफंडेबल एडवांस भी दे दिया था लेकिन हम ठहरे मोदीभक्त और मोदी जी ठहरे सच्चे और सबसे बड़े, न भूतो न भविष्यति की श्रेणी वाले देशभक्त । सो देश की अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को देखते हुए सभी देशवासियों से विदेश यात्राएं टालने की अपील के कारण अपना यह कार्यक्रम निरस्त कर दिया है । बस, इसीके लिए माफी मांग रहे थे । 


बोला- मास्टर, मैं भी तुमसे एक बात के लिए माफी मांगने वाला था । मैंने भी अपने दोनों परिवारों के साथ चार्टर्ड प्लेन से अयोध्या यात्रा  का कार्यक्रम बनाया था । सोचा था प्राणप्रतिष्ठा पर नहीं जा पाए थे । इस साल दशहरे के आसपास मैना अस्सी साल की हो जाएगी सो इस उपलक्ष्य में मैना के वजन के बराबर 55 किलो सोना राममंदिर में दान दे आएंगे । लेकिन मोदी जी ने कहा है कि एक साल तक सोना नहीं खरीदना है ।सो मैंने भी अमेरिका से 55 किलो सोने के आयात का ऑर्डर केन्सल कर दिया है । क्या मैं अपने ऐसे छोटे मोटे शौक कुछ समय के लिए स्थगित नहीं कर सकता  ?  


हमने कहा- तोताराम, क्या तुमने आज कुछ ज्यादा लंबी तो नहीं फेंक दी ?


बोला- भाई साहब, शुरूआत किसने की थी ? 


हमने कहा- तोताराम, सच है झूठे के उपदेश का कोई असर नहीं पड़ता । हमें याद है 1962 में जब हम सीमेंट फेक्टरी सवाईमाधोपुर के स्कूल में अध्यापक थे तो भारत चीन का युद्ध शुरू हो गया था । हमारे स्कूल में चंदे के लिए कलेक्टर आये थे । हमने जोश में आकर अपनी शादी में मिली सोने की अंगूठी दे दी थी । उसके बाद ऐसा संयोग हुआ कि आज तक कोई सोने चांदी तो क्या तांबे पीतल का भी कोई गहना नहीं पहना ।

 

उसी माहौल में इंदिरा जी ने अपने सभी गहने रक्षाकोष में दे दिए थे । शास्त्री जी ने 1965 के अन्न संकट के समय जब देशवासियों से सप्ताह में एक दिन सोमवार शाम को भोजन न करने का आह्वान किया था तो उसे पहले खुद अपने घर में लागू किया था । एक बार एक महिला गाँधी जी के पास आई और अपने बेटे को गुड़ न खाने की सलाह देने का आग्रह करने लगी । गांधी जी ने उसे तीन दिन बाद आने को कहा । तीसरे दिन जब वह आई तो गाँधी जी उसके बेटे से कहा कि गुड़ खाना तुम्हारे लिए ठीक नहीं है । महिला ने कहा- बापू, जैसे आज आप यह बात कह रहे हैं वैसे ही उस दिन भी कह देते । बिना बात ही दो चक्कर लगवाए । बापू बोले- पहले मैं भी गुड़ खाया करता था तो तुम्हारे बेटे को न खाने के लिए कैसे कह सकता था । अब तीन दिन से गुड़ खाना छोड़ने के बाद मुझमें ऐसा कहने का आत्मबल आया है ।    


खुद किसी न किसी बहाने, किसी न किसी मंदिर में जाकर रोड़ शो में करोड़ों फूंकने वाले मोदी जी की अपील का कोई असर नहीं होने वाला । वैसे भी जिस देश में 80 करोड़ लोग दो जून के अन्न के लिए भिखारियों की तरह लाइन लगाते हों वहाँ सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने के चोंचलों से कुछ नहीं होने वाला । और लो अब चल दिए हवाई यात्रा और मितव्ययिता का उपदेश देकर विदेश यात्रा पर । क्या यह काम यहीं से फोन से नहीं हो सकता था । ट्रम्प ने तो फोन पर ही युद्ध विराम नहीं करवा दिया था क्या ? ये भी कर लेते वर्क फ्रॉम होम । 


बोला- मास्टर, तू इस संसार के लिए मोदी जी के दायित्त्वों को नहीं समझ सकता । वे विश्वगुरु हैं, दुनिया की सुख शांति, सुव्यवस्था की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है उन पर । तेरा क्या है, तू तो साल में छह महिने एक लुंगी में यहाँ बरामदे में बैठा बकवास करता रह सकता है लेकिन मोदी जी तो वसुधैव कुटुंबकम् के मानने वाले हैं । सब रिश्ते नाते, संबंध निभाने पड़ते हैं । फरवरी में फादर लैंड गए थे तो क्या उसके आसपास में चाचा लैंड, फूफा लैंड, मामा लैंड आदि नहीं जाएंगे ?  फिर कभी किसी मौसी, नानी लैंड भी जाना पड़  सकता है ।  


हमने कहा- और इसी चक्कर में तीन साल से मणिपुर की ओर ध्यान देने का समय नहीं मिला ।घर से पहले बाहर पोपुलर होने के चक्कर वालों के घर उजड़ते देर नहीं लगती । लेकिन कोई बात नहीं, हम तो एक कदम और आगे जाकर मोदी जी की बात को मानेंगे । अब कल से तेरी चाय भी ‘फ्रॉम होम’ और डिजिटल हुआ करेगी । नो कमिंग टु बरामदा । 




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May 10, 2026

10-05-2026 किससे किसकी रक्षा ?



10-05-2026 


किससे  किसकी रक्षा ?  



आज तो तोताराम वह सब कुछ हो-हवाकर आया जो कुछ बनने का स्वप्न भारत को दिखाया जा रहा है और अब तक जिसे मुसलमानों और कांग्रेस ने रोक रखा था । और तो और अपनी मृत्यु के 78 साल बाद तक गाँधी और 62 साल बाद भी नेहरू जिसे साकार होने नहीं दे रहे हैं । 

आते ही शुरू हो गया । और वातावरण जग्गी वासुदेव की ‘शिव के साथ एक रात्रि’  की तरह धांसू हो उठा । 



सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।

लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥


जो मनुष्य ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को प्राप्त होता है। 

इसलिए हे पापात्मा मास्टर, तू भी सोमनाथ लिंग के दर्शन करके अपने पापों का प्रक्षालन कर और मृत्यु के बाद स्वर्ग को  प्राप्त हो । 

हमने कहा- यह किसका प्रोजेक्ट है ? 

बोला- ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है । वैसे गुजरात में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मोदी जी जो एक बड़ा भव्य आयोजन करवा रहे हैं, अपने राजस्थान में इस प्रोजेक्ट के प्रचारक, एजेंट या प्रतिनिधि मुख्यमंत्री भजनलाल हैं जो स्कूलों की बिल्डिंगें संभालने से पहले राजस्थान के करदाताओं का पैसा खर्च करके दिल खोलकर खुले हाथ से विज्ञापन छपवा रहे हैं । भजनलाल जी ने ही यह श्लोक अपने विज्ञापन में छपवाया है और साथ ही नीचे भुगतान के लिए एक क्यू आर कोड भी दिया है । हाँ, यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने पैसे देने पर कितने दिन के लिए किस श्रेणी का स्वर्ग मिलेगा ।


हमने कहा- जब भजन लाल जी शाखा तो दूर, स्कूल में जाना भी शुरू नहीं हुए थे तब हमने 1971 में  पोरबंदर के बिरला स्कूल में पढ़ाते हुए सोमनाथ के दर्शन कर लिए थे । अब जो कुछ होना होगा वह उसी के पुण्य प्रताप से हो जाएगा । रो रोकर दिए गए 2 परसेंट डी ए में से सोमनाथ जाने या कोई दान-दक्षिण देने का प्रावधान नहीं बनता । 


  

हम कोई कहीं के मुख्यमंत्री, मंत्री तो हैं नहीं जो अपनी मुख्य ड्यूटी छोड़कर सरकारी खर्च पर मुफ़्त में इस उस तीर्थ को अपवित्र करते और पाप धोते फिरें । 


बोला- फिर भी कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए ।और आज तेरी शादी को 67 साल हो रहे हैं इसी उपलक्ष्य में  कुछ हो जाए । 


हमने कहा- 1 अप्रैल को मोदी जी की शादी को भी 58 साल हो गए थे । उनको तो तूने न बधाई दी और न ही रिटायर्ड लोगों पर कुछ कृपा करने की सलाह कि अबकी डी ए चार की बजाय छह परसेंट कर दें । जबकि लक्षणों और संयोगों को देखते हुए वे निश्चित रूप से बुद्ध के अवतार सिद्ध होते हैं । उनकी जन्म पत्री देखकर ज्योतिषियों ने बताया था कि या तो यह बालक महान सन्यासी बनेगा या फिर चक्रवर्ती सम्राट । उनके वैराग्य के लक्षण देखकर माता पिता ने सिद्धार्थ की तरह उनकी जल्दी शादी कर दी और संयोग देख सिद्धार्थ की पत्नी का नाम यशोधरा और इनकी पत्नी का नाम जसोदा । 


बोला- यह बात तो सच है । मोदी जी एक साथ ही चक्रवर्ती सम्राट है और एक फकीर भी । देखा नहीं, कैसे धर्म और विरासत की रक्षा के लिए भागे भागे फिर रहे हैं । अगर कुछ नहीं करेंगे तो हो सकता है ये मुसलमान, ईसाई और कांग्रेसी सोमनाथ के मंदिर को फिर तोड़ न डालें । इसलिए घूम घूमकर हिंदुत्व की विरासत की रक्षा करना बहुत जरूरी है । 


हमने कहा- ये सब झूठ और कुप्रचार है और दूसरों के हर कार्य का श्रेय लेने की कुटिल चालाकी है । मोदी जी के जन्म से पहले देश के गृहमंत्री कांग्रेसी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना को अंतिम रूप दिया था और 8 मई 1950 को काम की शुरूआत हो गई थी । जब मोदी जी एक साल के भी नहीं थे तक कांग्रेस के बड़े नेता राजेन्द्र बाबू इसकी प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे । 

 

अब या तो तू जाने या भजनलाल जी या फिर मोदी जी जानें कि वे किस विरासत की किससे रक्षा कर रहे हैं । 

 



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