29-06-2026
बाल दान
( टी वी न्यूज वायरस शब्द हट देंगे )
आज तोताराम ने आते ही हमारी आत्मा को ललकारा, बोला- ज़िंदगी हो गई कमाते, भोगते लेकिन कभी एक पैसा भी दान दक्षिणा में नहीं दिया । यह सब यहीं धरा रह जाएगा। क्या लेकर आया था और क्या लेकर जाएगा । यही सब कुछ लुटाना है । अपने हाथ से जो दे जाएगा वही इस भवसागर में नाव बनकर तुझे पार लगाएगा ।
हमने कहा- जब हमने हराम का, मुफ़्त का, नाजायज कुछ कमाया ही नहीं तो किस बात का दान दें । हमें तो ऊपर वाले ने जो कुछ दिया काटकर ही दिया है । वही हाल- एक गरीब आदमी था इसलिए उसकी भगवान से डिमांड भी कम ही थी ।उसने ‘सबका साथ : सबका विकास’ की तरह अपने इस प्रोजेक्ट में भगवान को भी 50-50 का आश्वासन देकर शामिल कर लिया । उसने भगवान से चार आने माँगे । कुछ दूर चलकर उसे एक दुअन्नी पड़ी मिली । याचक राम मंदिर के ट्रस्टियों की तरह समझदार था । उसने दो आने जेब में रखते हुए कहा-
अल्ला मियाँ बड़े सयाने । पहले काट लिए दो आने ।।
सो हम तो लेने से पहले ही दान दे देते हैं । और हम कौन अंबानी हैं जो लाल बाग के गणेश जी को 20 किलो सोने का मुकुट चढ़ा दें, राम मंदिर में 33 किलो सोना चढ़ा दें, या अपनी बेटी के दो बच्चों के नाम से 300 किलो सोना दान कर दें ।
बोला- फिर भी कुछ तो दान-पुण्य किया कर । मन को शांति मिलेगी ।
हमने कहा- हमने तो बहुत पहले जब विश्व हिन्दू परिषद वाले दो-दो, पाँच-पाँच रुपए राम मंदिर के लिए इकट्ठे कर रहे थे तब किसी को पाँच रुपये दिए थे । रसीद इसलिए संभाल कर नहीं रखी कि हमें उसके बदले में राम से कुछ नहीं चाहिए । लेकिन जब से राम मंदिर में ट्रस्टियों और मुख्य लोगों ने डाका डाला है हमें उन पाँच रुपये से अधिक अपनी मूर्खता के लिए शर्मिंदगी हो रही है । हमारा तो मानना है कि किसी को किसी भी धार्मिक स्थान पर एक पैसा भी नहीं चढ़ाना चाहिए । उससे बेईमानी को बढ़ावा मिलता है । न होगा चढ़ावा और न मंदिर में जुटेंगे चोर-उचक्के ।
वैसे अब अंबानी जी ने किस मंदिर में कौनसा बड़ा दान दिया है ?
बोला- अनंत अंबानी ने तिरुपति मंदिर में केश दान किए हैं ।
हमने कहा- इसमें कौन बड़ी बात है । रोज हजारों पुरुष ही नहीं स्त्रियाँ तक अपने केश दान करती हैं जो विग बनाने के लिए विदेशों में अच्छी कीमत पर बिकते हैं । और अगर इसीसे कोई पुण्य प्राप्त होता हो तो हम भी अब से अपने केश, जितने भी मोदीराज में महंगाई के बावजूद बच पाए हैं, दान कर दिया करेंगे । तू यहीं से तिरुपति पार्सल कर दिया कर । पार्सल का खर्च तू करेगा या मोदी जी ऐसे पार्सलों के लिए कोई फ्री की स्कीम निकालें । पहले डिफेंस फंड में भेजी गई राशि के लिए मनीऑर्डर का खर्च नहीं लगा करता था । एक बार हमने सन 1999 में पोती के जन्म दिन पर एक हजार रुपये भेजे थे । अगर आज की तरह ‘पी एम केयर फंड’ में भेजते तो किसी हिसाब का भी पता नहीं चलता ।
बोला- तेरे सिर पर चार बाल हैं । तुझे बालों की शोभा का क्या पता । अनंत के ये लंबे, घने, घुँघराले, रेशमी बाल । मेरे खयाल से इन्हें सामान्य बालों की तरह नहीं बेचा जाएगा बल्कि विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा जिनके भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति से दर्शन किया करेंगे । इसी तरह सोच अगर रबीन्द्रनाथ ठाकुर या मोदी जी केश दान कर दें तो बड़ी बात हो क्योंकि ये उनकी पहचान हैं । अगर मोदी जी दाढ़ी मूंछ मुँड़वाकर जाएँ तो ट्रम्प तो फिर भी पहचान लेंगे लेकिन मेलोनी तो नहीं ही पहचान पाएगी ।
हमने कहा- बाल का दान भी क्या कोई दान होता है ? मुफ़्त की खेती है । ज़िंदगी भर बाल बढ़ते रहते हैं और आदमी कटवाता रहता है । फिर बाल और दाँत जैसी चीजें अपने स्थान पर ही शोभा देती है ।
बोला- बाल कोई एक तरह के ही थोड़े होते हैं । बाल बाल में भी फ़र्क़ होता है । एक बाल हज़रत बल दरगाह में रखा हुआ है । साधारण आदमी का दाँत निकाल कर ऐसे ही फेंक दिया जाता है जबकि बुद्ध के दाँत पर श्रीलंका में मंदिर बना हुआ है । जो सबसे निकट होता है उसे मुहावरे में 'नाक का बाल' कहते हैं । कुछ लोगों की आँख में सूअर का बाल होता है । ऐसे आदमी को अपने अलावा कोई दूसरा नहीं सुहाता । वह् दूसरों को दुखी करके ही खुश होता है । आजकल देश दुनिया में ऐसे लोग ज्यादा दिखाई दे रहे हैं जो दूसरे देशों को परेशान किए हुए हैं । जो कायर होते हैं, जो किसी को लाल आँख नहीं दिख सकते और जिन्हें दुनिया के ताकतवर देश जब चाहे हड़का देते हैं वे अपने देश के लोगों को जाति-धर्म के आधार पर परेशान करके ही एक प्रकार का कुटिल आनंद प्राप्त करते हैं ।
हमने कहा- लेकिन हम तो मूंछ के बाल को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं । मूंछ स्वाभिमान का प्रतीक होती है । यह प्रतीकात्मक होती है । जो अपनी बात का पक्का वही मूंछ वाला । महाराणा प्रताप ने दुख उठाए लेकिन अपनी मूंछ नीची नहीं होने दी । इसलिए भले ही हल्दीघाटी के युद्ध के बाद से वन वन भटके लेकिन आप उन्हें हारा हुआ नहीं कह सकते । आजकल तो ऐसे बड़ी बड़ी दाढ़ी- मूंछ वाले होते हैं जो अपने वादे को बाद में बड़ी बेशर्मी से जुमला कह कर मुकर जाते हैं ।
बोला- मूंछ के बारे में एक किस्सा भी तो है ।
हमने कहा- हाँ, है ना । एक राजपूत एक सेठ से कुछ रुपये उधार मांगने गया । सेठ ने कहा कि वह कुछ गिरवी रखे बिना उधार नहीं दे सकता । राजपूत ने अपना मूंछ का बाल उखाड़ कर कहा - सेठ इसे रख लो । सेठ ने बाल रख लिया और रुपये दे दिए । वहाँ बैठा एक अन्य व्यक्ति यह सब देख रहा था । वह भी अगले दिन सेठ ले पास उधार मांगने गया । सेठ ने उसे भी कुछ गिरवी रखने को कहा । उसने थैले में से अपनी दाढ़ी-मूँछें निकाली और बोला ये ले और पचास रुपये दे दे । सेठ बोला- हम मूँछें गिरवी रखते हैं, ऊन नहीं ।
बोला- लेकिन अनंत अंबानी ने केवल बाल ही थोड़े दिए हैं । करोड़ों की इलेक्ट्रिक बसें भी तो दी दान की हैं ।
हमने कहा- अच्छी बात है लेकिन दान की सबसे बड़ी बात यह है कि उसके लिए आपने कितना कष्ट उठाया । दान के बाद आपके पास बचा क्या ? इसीलिए बुद्ध ने दान में मिले स्वर्ण आभूषणों से बढ़कर एक बुढ़िया द्वारा दिए गए अधखाए अनार को बताया था । क्योंकि उसके पास इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं था । यह भी पता नहीं कि वह कितने दिन की भूखी थी । उसने यह अनार खुद भूखे रहकर दिया था । सैंकड़ों करोड़ दान के बाद भी अंबानी-अदानी के पास हजारों लाखों करोड़ और बचे हुए हैं । इस दान के लिए उन्होंने कोई कष्ट नहीं उठाया है । ठीक है लेकिन हमारे हिसाब से इसका प्रचार नहीं नहीं करना चाहिए था । दान की चर्चा करने से उसका महत्व कम हो जाता है ।
भगवान के लिए शबरी के बेर और सुदामा के चावल अधिक महत्वपूर्ण होते हैं ।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की रहने वाली 85 वर्षीय कचरा बीनने वाली महिला बिदुला बाई देवार ने राम मंदिर निर्माण के लिए 20 रुपये का दान दिया था जो इनकी आधे दिन की कमाई थी ।
राम मंदिर, कृष्ण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर आदि के चोर पुजारी राम की सोने की रत्न जटित पादुका और सोना चुराकर चंपत हो जाते हैं लेकिन सुदामा, शबरी और बिदुला बाई के दान को वे क्या समझें । तभी तो मीरा कहती है-
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ।
खरच न खूटे चोर न लै हैं
दिन दिन बढ़त सवायो ।
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