Apr 12, 2026

11-04-2026 राजा भोज और गंगू तेली


11-04-2026 

राजा भोज और गंगू तेली 





आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया- हाथ-पैर धोकर, साफ-सुथरे आसन पर शांत और एकाग्रचित्त होकर बैठ ।  

हमने कहा- आसन क्या, कहे तो सिंहासन पर बैठ जाएँ लेकिन स्वच्छ, शुद्ध और पवित्र होकर तो तुझे बैठना है । और अगर दो दिन से उपवास किया हुआ है तो और भी बेहतर ।  

बोला-  यह मुँह और एक लाख रुपए किलो का मशरूम । तू क्या कोई मोदी जी है जो मैं अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन की तरह तेरा इंटरव्यू लेने के लिए सही मानसिकता और आध्यात्मिक स्तर पर बात करने के लिए  45 घंटे उपवास करके आऊँगा । 

हमने कहा- तो फिर हमें क्यों पूजा की इस मुद्रा में बैठाना चाहता है ? 

बोला- तुझे अलाय,बलाय, भावी अनिष्ट और एफ आई आर से बचाने के लिए । 

हमने पूछा- हम कौन सा कोई कुकर्म कर रहे हैं जो अनिष्ट की संभावना हो सकती है । 

बोला- एक तो तू बात बात में ‘ही-ही,खी-खी’ करता रहता है दूसरे व्यंग्य लिखता है । 

हमने कहा- तो व्यंग्य लिखना क्या कोई अपराध है ?

बोला- हाँ, है । व्यंग्य के अतिरक्त चाहे बलात्कार, गबन, घपला कुछ भी कर ले । उनसे बचने के रास्ते हैं ।  लेकिन व्यंग्य में तो सीधे सीधे गैरजमानती गिरफ़्तारी होती है । और केस और फैसले की कोई अवधि तय नहीं । 

हमने पूछा- तो तू कैसे हमें बचा लेगा ?

बोला- वही तो उपक्रम करने के लिए तुझे आसन बिछकर बैठने को कह रहा हूँ । 

हमने पूछा- उससे क्या होगा ?

बोला- आज शनिवार है और मैं तुझे शनि महाराज की कथा सुनाऊँगा जिससे तेरा अनिष्ट निवारण होगा । 

हमने पूछा- कौन सी कथा ?

बोला- वही राजा भोज और गंगू तेली की कथा । जिसमें शनि की कुदृष्टि से खूँटी हार निगल गई थी और चोरी के इल्ज़ाम में राजा भोज के हाथ पैर काटे डाले गए थे और उस लुंज-पुंज राजा भोज को गंगू तेली की घाणी पर बैठकर कोल्हू के बैलों को हाँकना पड़ा था । 

हमने कहा- इस प्रकार गंगू तेली की कहानी के बहाने हो सकता है तू भी मोदी जी का मजाक उड़ा रहा हो । 

बोला- मोदी जी इन बातों का बुरा नहीं मानते । यह सब तो उनके कुछ अति उत्साही भक्त करते हैं । मोदी जी तो दो दो किलो गालियां खाकर पोषण प्राप्त करते हैं । वे तो खुद बताते हैं कि लोग उन्हे कौन कौन सी गालियों से विभूषित करते हैं । और नाराज क्यों होंगे । हो सकता है उनका किसी अगले-पिछले जन्म का गंगू तेली से कोई रिश्ता-नाता ही हो । 

हमने पूछा- तू  ऐसा किस आधार पर कह सकता है । 

बोला- उनके देश-विदेश में दिए गए कई भाषण हैं जिनमें वे सभी जगह से अपना कोई न कोई नाता-रिश्तानिकाल लेते हैं । हो सकता है कभी किसी तेली बहुत क्षेत्र में चुनावी रैली करते समय वे रहस्योद्घाटन कर दें कि मेरा तेलियों से बहुत गहरा और सुख दुख का रिश्ता है ।  पिछले जन्म में जब मैं राजा भोज था तब मैंने शनि देव के श्राप से पीड़ित अपने दुख के दिन गंगू तेली के यहाँ काटे थे ।  

 

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Apr 10, 2026

2026-04-08 ढोल और सौभाग्य


2026-04-08 

ढोल और सौभाग्य 






​​

आज तोताराम आते ही शुद्ध सनातनी की तरह ज्योतिष और वास्तु में हर समस्या का समाधान बताने वाले आजकल के प्रपंची संतों की तरह बोला- 

नृपस्य चित्तं, कृपणस्य वित्तं, मनोरथाः दुर्जनमानवानाम्। 

त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यं, देवो न जानाति, कुतो मनुष्यः॥

प्रिय भक्तो,  इसका अर्थ है कि राजा का मन (निर्णय), कंजूस का धन, दुष्टों के विचार, स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य- इन पाँचों को समझना स्वयं देवताओं के लिए भी कठिन है, तो मनुष्य की क्या बिसात वह तो कुत्ता होता है ।  

हमने कहा- आजकल के अनपढ़ बाबाओं की तरह संस्कृत की आड़ में भारतीय वांग्मय के बकवासी अर्थ मत कर । हमारी डिग्रियाँ कोई नकली या एन्टायर एम ए वाली नहीं हैं । किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट के प्रश्नोत्तरों का रट्टा लगाकर नहीं कबाड़ी है । जैसे मोदी जी चाय विक्रय, भिक्षाटन और ज्योतिष के सालिड ज्ञान के बल पर आगे बढ़े हैं, वैसे ही हमने असली टेक्स्ट बुक्स पढ़कर अपने उत्तर तैयार करके प्राप्त की है । तू अंतिम दो शब्दों का अनर्थ कर रहा है । 

‘कुतो’ का अर्थ कुत्ता नहीं बल्कि ‘कहाँ’ होता है । मतलब जब देवता ही नहीं समझ सकते तो मनुष्य ‘कहाँ’ से समझेगा ? अर्थात मनुष्य में तो इतनी बुद्धि होने का प्रश्न ही नहीं उठता । यह सच है कि अगर लंपटता की दृष्टि से देखें तो पुरुष कुत्ता ही ठहरता है । पहले अप्सराओं के लिए तपस्या किया करता था और आजकल भी दान-पुण्य, तीर्थ-व्रत हूरों और अप्सराओं के लालच में करता है । आजकल भी तो तरह तरह की देशी-विदेशी एपस्तीनी फ़ाइलें खुल रही हैं जिन्हें केरल, कश्मीर फ़ाइलों की आड़ में छुपाते छुपाते भी फ़ाइलें हैं कि खुली ही जा रही हैं और तथाकथित संस्कारी ब्लेकमेल हुए जा रहे हैं । 

बोला- पता नहीं, क्यों मेरा ही राम निकल जाता है जो तुझसे अपने मन की बात, सुख-दुख, जिज्ञासाएँ साझा करता हूँ । अच्छा हो चाय पीकर चुपचाप निकल लूँ । मैं तो पंजाब के नवाँ शहर के गुरुचरण की बात कर रहा था कि जिसका लॉटरी में पूरे डेढ़ करोड़ का इनाम निकला है । 

हमने कहा- तोताराम, यह लॉटरी का धंधा कभी जनता के फायदे का नहीं होता । 10 करोड़ के टिकट बेचकर दो करोड़ के इनाम निकाल देते हैं । कमाई लॉटरी का धंधा करने वालों की और पैसा जनता का । सभी धंधा करने वाले इसी तरह लोगों को उल्लू बनाते हैं । चुनावों में दो हजार रुपए का आश्वासन देकर जीत जाते हैं ।  कुछ लोगों को दो सौ पकड़ा कर तरह तरह नियमों की आड़ में पल्ला झाड़ लेते हैं । और फिर महंगाई बढ़ाकर उससे दोगुना फिर खींच लेते हैं ।साथ ही इससे भाग्यवाद को बढ़ावा मिलता है जो किसी समाज को पुरुषार्थ से दूर ले जाता है । ऐसे समाजों में ही धार्मिक स्थान और धर्म का धंधा और धर्म की राजनीति अधिक मिलते हैं । तभी ऐसे देशों में सरकारें स्कूल, कॉलेज, कारखाने आदि बनाने की बजाय मूर्तियाँ, धार्मिक कॉरीडोर आदि पर खरबों रुपया लुटाती हैं और अरबों डकार जाती हैं । ऐसे ही कोचिंग सेंटर वाले हजारों छात्रों से करोड़ों फीस ले लेते हैं और फिर दस-बीस झूठे सच्चे सलेक्टेड बच्चों का विज्ञापन करके फिर नए छात्रों को जुटा लेते हैं ।  

बोला- मुझे अब चाय भी नहीं पीनी । मैं चलता हूँ । मैं कोई लॉटरी का टिकट बेचने थोड़े ही आया था ।  

हमने कहा- फिर भी तोताराम, हमारे पूर्वजों ने अपने अनुभव से ज्ञान की बहुत सी बातें एक साथ इतने बढ़िया ढंग से कही हैं कि बस । अब देख राजा के बारे में कहा है कि राजा हजार ‘मन की बात’ करे लेकिन उसके मन का कुछ पता नहीं चलता । जाने कब कहाँ, कितना टेरिफ़ बढ़ा दें, कब नोटबंदी कर दे । इसी तरह कंजूस आदमी का कुछ पता नहीं चलता । कब किसी बैंक से लोन लेकर खुद को दिवालिया घोषित करके हजारों करोड़ लेकर विदेश भाग जाए । इसी तरह दुष्ट का कोई ठिकाना नहीं कि कब किस नेकी का बदला बदी से चुका दे । कब लालच में अपनी पितृ पार्टी को छोड़कर सत्ताधारी पार्टी में चला जाए । लेकिन पुरुष के मामले में भाग्य की बात से हम सहमत नहीं हैं क्योंकि जिसे भाग्य कहा जाता है वह या तो संयोग है या फिर सिंधिया, अशोक चव्हाण, शुभेन्दु अधिकारी, चिराग पासवान, हिमन्त बिस्वा आदि की सफलता एक शुद्ध सौदा है ।  लेकिन स्त्रियों पर लगाए गए इकतरफा आरोप से हम सहमत नहीं हैं ।  

बोला- क्यों ?

हमने कहा- क्योंकि इसमें स्त्री की अकेली की ही गलती नहीं होती । उसे पुरुष भ्रष्ट करता है । क्या अहिल्या अकेली ही दोषी थी ? क्या उसमें गौतम द्वारा उसकी जरूरतों को न समझना और इन्द्र की लंपटता का कोई रोल नहीं था ?

बोला- लेकिन ऋषि मुनि तो अप्सराओं के पास नहीं जाते थे । वे ही तरह-तरह से लुभाकर उनका तप भंग करती थीं । 

हमने कहा- वे क्या करें । वे कौन अपनी मर्जी से आती थीं । उन्हें तो इन्द्र की एप्सटीन फ़ाइल के तहत आना पड़ता था । 

बोला- तो ढोल का सौभाग्य से कोई संबंध हो सकता है क्या  ?

हमने कहा- यह तुमने एक वैज्ञानिक प्रश्न पूछा है । विज्ञान है ही कार्य-कारण का संबंध जानने का नाम । एक होता है अपनी रोटी-रोजी के लिए किसी के लिए भी एक तय रकम के बदले ढोल बजाने वाला । उसकी सीमित आमदनी होती है । दूसरा होता है किसी के एजेंडे के तहत ढोल बजाने वाला जैसे विदेशों में प्रभु के स्वागत में हो-ही, हो-ही चिल्लाने वाला । वह कैजुअल लेबर की तरह होता है । ढोल बजाओ । कभी किसी का तो कभी किसी का । ढोल  का धंधा न मिले तो किसी खास रंग के झंडे की रैली निकालो तो कभी किसी धार्मिक स्थान के आगे डी जे की धुन पर नाचो ।कोई पहचान नहीं ।  

सबसे सही वह होता है जो किसी पर भरोसा नहीं करता बल्कि अपना ढोल खुद बजाता है । हो सकता है कुछ समय कुछ भी न मिले लेकिन जब मौका लग जाता है तो वारे-न्यारे हो जाते हैं । सड़क से सीधा संसद पहुँच जाता है । इसीलिए तुमने देखा होगा कि अच्छे भले इंजीनीयर, डॉक्टर अपना काम छोड़कर अपने खर्चे से बड़े सेवकों के होर्डिंग लगवाते हैं, उनके जन्म दिन पर अखबारों में बधाई संदेश छपवाते हैं, यात्रा-रैली निकालते हैं, सम्मेलन करवाते हैं । और एक दिन सेवा का अवसर पा ही जाते हैं । 

सेवा का मतलब तो तू समझता ही है । बकवास करो और जनता के टेक्स के पैसे की बंदरबाँट में शामिल हो जाओ । 

-रमेश जोशी 



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Apr 9, 2026

02-04-2026 गुजरात, तंत्र और उल्लू



02-04-2026 

गुजरात, तंत्र और उल्लू 

  

 


(इसका साइज़ इतना रखेंगे कि पढ़ा जा सके 

आज तोताराम बहुत खुश था । बोला- मास्टर, विकल्प मिल गया । 

हमने पूछा- क्या ? मोदी जी का विकल्प मिल गया ?

बोला- कैसी बातें करता है । मोदी जी का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता तो मिलेगा कहाँ से ? अगर ऐसा होता तो लोग क्यों कहते 'मोदी नहीं तो कौन ? वे तो एक ही हैं, निर्विकल्प । तभी तो न कोई आगे और न कोई पीछे फिर भी मजबूरी में देश हित में रोज 20-20 घंटे इस संन्यास की उम्र में भी काम किये जा रहे हैं । 

मोदी जी नहीं, हाँ,कामधेनु का विकल्प मिल गया । सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला, तंत्र में काम आने वाला चमत्कारी उल्लू । 

हमने कहा- तेरे होते हुए इस बरामदा विष्ठा को किसी और की जरूरत ही क्या है ? वैसे सारे तंत्र उल्लुओं के बल पर ही चलते हैं । समझदारों से तो तंत्र को खतरा हो जाता है तभी वह किसी न किसी बहाने उनका मुँह बंद करवा देता है । फिर चाहे वे 'ही-ही,खी-खी' पर वीडियो बनाने वाले व्यंग्यकार हों या पोल खोलने वाले पत्रकार । सबके चेनल इसीलिए तो बंद करवाए जा रहे हैं । ​



बोला- मैं समझता हूँ तेरा व्यंग्य । लेकिन चुल्लू भर चाय में उल्लू बनने वाला तोताराम ही हो सकता है वरना लोग भले ही उल्लू को मूर्ख समझते हों लेकिन उल्लू वास्तव में होता बहुत चालाक है ।  

हमने कहा- वैसे धेनु भी चाहे कामधेनु न हो लेकिन होती बड़े काम की चीज है ।सरकार को वोट दिलवाती है, गौशाला वालों को कागजों में दर्ज होकर अनुदान दिलवाती है, किसी काम की न हो तो बूचड़खाने में जाकर तो हिन्दू बीफ निर्यातकों को कमाई करवाती है और अगर कोई मुसलमान उसे कहीं ले जा रहा हो तो गौ रक्षकों को हफ्ता वसूली करवाती है । 

बोला- बात को घुमाया मत । मैं उल्लू की बात कर रहा हूँ । गुजरात में  तांत्रिक क्रियाओं में काम आने वाला उल्लू 10-10 लाख तक में बेचा जा रहा है । दावा है कि इससे सिद्धि प्राप्त होती है जिसके फलस्वरूप सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । 

हमने कहा- उल्लू भी कई तरह तरह के होते हैं । यह उल्लू कैसा उल्लू है ? उल्लू के प्रकार के अनुसार दाम होने चाहियें । 

बोला- उल्लू तो उल्लू होता है जैसे गधा, अंधभक्त । 

हमने कहा- नहीं । एक होता है सामान्य उल्लू, एक काठ का उल्लू, एक उल्लू का पट्ठा । और एक होता है सुपर उल्लू । सुपर उल्लू ही लक्ष्मी का वाहन होता है । ये सब जगह न तो दिखाई देते हैं और न ही सरलता से पकड़ में आते हैं । ये बड़े बड़े नेताओं के आसपास ही पाए जाते हैं । ये उल्लू नहीं किसी और ही वेश में मिलते हैं । ये रात में शिकार करते नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति, परोपकार के प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं । लक्ष्मी के साथ फ़ोटो में तो कभी नहीं । ये वास्तव में मूर्ख नहीं होते जैसा कि उल्लुओं के बारे में फैलाया गया है । 

बोला- और ?

हमने कहा- सामान्य उल्लू दिन में सोते हैं और रात में पेट भरने का जुगाड़ करते हैं । इन्हें खेती के लिए भी उपयोगी माना जाता है क्योंकि ये चूहों को खाते हैं । काठ का उल्लू किसी से कुछ नहीं माँगता-चाहता । वह तो परंपरा से किसी के भी द्वारा यूज किया जाता है । उल्लू का पट्ठा स्वयं की प्रेरणा से कुछ नहीं करता । उसे अपने उस्ताद से जैसा आदेश मिलता है वैसा करता है जैसे कहीं वाहन रैली निकालना, कहीं विराट सम्मेलन करना, कभी किसी अन्य धर्म-स्थान के आगे डी जे बजाना आदि आदि ।  

बोला- साफ-साफ बता तुझे किसी मनोकामना की सिद्धि के लिए कोई उल्लू खरीदना है ?

हमने कहा- पहली बात तो हमें इनमें बातों में विश्वास नहीं है, दूसरे आठवें पे कमीशन या 18 महिने के बकाया डीए के लिए लाखों का खर्च क्यों किया जाए तीसरे गुजरात का कोई भरोसा नहीं । वहाँ नकली माल बहुत बनता है । जैसे नकली डॉक्टर, नकली जज/कोट, नकली डिग्री, नकली, पठान का नकली बच्चा और कभी न नापी गई असंभव 56 इंच की छाती । 

बोला- फिर भी देश को उल्लू बनाने में कोई कमी हो तो बता ?  

 

 


 


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Apr 8, 2026

2026-04-08 ढोल की पोल


2026-04-08     


ढोल की पोल 


पिट पिट करके फट लिया विश्व गुरू का ढोल 

फटे ढोल से देखती दुनिया इसकी पोल 

दुनिया इसकी पोल जीभ तालू से चिपकी 

ट्रम्प दिखाता इसे हैसियत जब तब इसकी 

जोशी किससे क्या लेकर बैठा है खाकर 

इज़राइल को बाप बनाए खुद ही जाकर 


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Apr 2, 2026

2026-04-02 कुण्डलिया चोरों के अड्डे


2026-04-02   कुण्डलिया 

चोरों के अड्डे 


शिक्षा सेहत धर्म का मचा हुआ है शोर 

इन तीनों में ही घुसे सबसे ज्यादा चोर 

सबसे ज्यादा चोर, नया कुछ नहीं सिखाएँ 

प्रश्न और उत्तर देकर रट्टे लगवाएँ 

जोशी जाँच दवा में जमकर हिस्सा पाएँ 

चर्बी मिला प्रसाद बाँटकर नोट कमाएँ 


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Mar 31, 2026

31-03-2026 भाँति भाँति के कॉपीराइट





31-03-2026 

भाँति भाँति के कॉपीराइट 

2002 में सेवानिवृत्त होकर जयपुर से सीकर बच्चों के पास आ गए । 
उन दिनों दिल्ली में अटल जी जमे हुए थे लेकिन वैचारिक भिन्नता के बावजूद कुछ भी असामान्य नहीं लगता था । मजे से आलोचना-व्यंग्य चलते थे । फिर चुनाव जीतने के लिए उनके थिंक टैंक ने गहराई में जाकर एक नारा निकाला 'फ़ील गुड' और उसके बाद 'शाइनिंग इंडिया' । उस समय के उनके चाणक्य प्रमोद महाजन ने कहा- ये बच्चे क्या चुनाव लड़ेंगे ? और मजे की बात कि लोगों को गुड़ फ़ील नहीं हुआ और अटल जी धुंधलके में चले गए और बच्चों ने अश्वमेध का घोड़ा रोक लिया और उसके बाद एक बहुत कम बोलने वाले मनमोहन जी आये । बाद का इतिहास लगभग एक जैसा ही है और सभी के ज्ञान-ध्यान-संज्ञान में है । 

इन बारह वर्षों में राज्य सरकारों के परिवर्तन के अतिरिक्त सीकर का परिवेश लगभग एक जैसा ही रहा । सब कुछ सामान्य । सभी विचारों के लोग आपस में सामान्य रूप से मिलना जुलना, हँसी मजाक सब करते रहते थे । और एक सबसे अच्छी बात यह थी कि उन दिनों लिखने पढ़ने वाले महिने दो महिने में एक बार कहीं न कहीं मिलजुल लेते थे । इन कार्यक्रमों में युवा भी आया करते थे लेकिन अब सब कुछ लगभग बंद है । सब कुछ प्रदर्शन की राजनीति से आक्रांत हो गया है ।नौकरियां कम हो गई हैं। जो कुछ निकलती हैं वे पेपर लीक, नकली परीक्षार्थी आदि घपलों में उलझी हुई हैं । विकास कहाँ हो रहा है पता नहीं लेकिन विकास के विज्ञापन हर राज्य के दिखाई दे जाते हैं । युवा भगवा रैली, विराट हिन्दू सम्मेलन और काँवड़-कलश यात्रा में अपना और देश का विकास और भविष्य तलाशने लगे हैं ।

कुल मिलाकर सारी सांस्कृतिक गतिविधियां हमारी और तोताराम की 'चाय-चर्चा' पर परनिंदा तक सीमित रह गई है और साहित्य ? ओडिशा में विश्वनाथ मिश्र के 'नरेंद्र आरोहणम्' और मधु किश्वर के 'मोदीनामा'  तक रह गया है ।और मज़े की बात यह कि समाचारों में न तो ओडिशा के इस कवि का नाम मिला और न ही फ़ोटो । मोदी का नाम और मोदी का ही फ़ोटो । मानो महत्वपूर्ण कवि और काव्य नहीं 'मोदी' हैं । शायद इसीलिए गुप्त जी ने कहा था-
राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है 
कोई कवि बन जाए सहज संभाव्य है । 
इसी तरह मधु किश्वर और उनकी पुस्तक 'मोदीनामा' का नाम भी तभी पता चला  जब उन्होंने अपने यूज किये जाने का 'मी टू' टाइप खुलासा किया ।   
 
इन सब अनुलोमों-विलोमों-और प्रतिलोमों के बीच कल एक कनिष्ठ मित्र ने बताया कि एक छोटे-मोटे कार्यक्रम से यह साहित्यिक सन्नाटा तोड़ा जा सकता है और इसके लिए उन्होंने किसी संस्था का नाम भी बताया । भारत और उसके विकास से संबंधित कुछ नाम था ।  

हालाँकि हम जानते हैं कि तोताराम एकदम निठल्ला है, उसके पास कोई काम नहीं है जिस प्रकार भारत के रेल मंत्री और गार्डों तक के पास कोई काम नहीं है । ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने का काम तक मोदी जी कर लेते हैं । या फिर मास्टरों द्वारा बच्चों को परीक्षा से पूर्व गुरु मंत्र देने का काम भी मोदी जी सम्पन्न कर देते हैं । फिर भी तोताराम की ग्रन्थि को सहलाते हुए आज हमने उसके सामने यही शुभ समाचार रखते हुए कहा- तोताराम, अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर इस रविवार को शाम फ्री रखना । 

​ 







बोला- मास्टर, कोई बहुत बड़ा लालच या भय न हो तो अब बाहर निकलने में ही भला है । वैसे ही साहसी युवा मोबाइल पर बतियाते, मोटर साइकल दौड़ाते, राह चलते लोगों को डराते, सबको पीछे छोड़कर जाने कहाँ पहुंचना चाहते हैं । या फिर घर से बाहर कोई कलश-यात्रा, काँवड़-यात्रा, देश भक्ति के रंग वाले झंडे फहराते वाहन । अच्छा है ऐसे में घर में ही रहना । कहीं मर मरा गए तो संभालने वाला भी नहीं मिलेगा । उत्साही भीड़ और त्योहारों का सांस्कृतिक जुनून ऐसा ही होता है । कोई जय श्रीराम का घोष करता है तो लगता है कि अब आया कोई पत्थर । 

हमने कहा- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है । बहुत दिनों बाद किसी विकास-विकूस जैसी किसी संस्था का कवि गोष्ठी का कोई कार्यक्रम है । 

बोला- क्या अपने यहाँ के किसी कवि ने 'मोदी चालीसा' या 'मोदी माहात्म्य' लिखा है क्योंकि जहाँ भी विकास होगा वहाँ मोदी जी के अतिरिक्त और कौन हो सकता है ? जहाँ कोई विकास दुबे हो या बुलडोज़र हो  वहाँ योगी जी के अतिरिक्त कोई और हो ही नहीं सकता । 

हमने कहा- ऐसा कुछ नहीं । कविता-शविता होगी । सुन सुना लेंगे, कुछ चेंज हो जाएगा । 

बोला- मैं तो कुछ व्यस्त हूँ लेकिन तू हो आ लेकिन सुनने-सुनाने में जरा सावधानी रखना । 

हमने कहा- कविता सुनने सुनाने में कैसी सावधानी । अपनी अपनी अभिव्यक्ति, अपनी स्वतंत्रता । 

बोला- अब वह बात नहीं रही । बहुत सोचना-विचारना पड़ता है । देखा नहीं, मध्यप्रदेश में 'भाइयो, बहनो' कहकर कुछ मिमिक्री करने वाला निलंबित कर दिया गया । कई लोगों के लिपटने-चिपटने और ही ही, खे खे करने वाले वीडियो हटवा दिए गए हैं । 

हमने कहा- भाइयो, बहनो, कहकर तो आज से कोई 132 वर्ष पहले विवेकानंद ने शिकागो में अमेरिकावासियों का दिल जीत लिया था । लेकिन उन्होंने या विवेकानंद मिशन वालों ने तो इस पर कोई कॉपीराइट नहीं जताया । 

बोला- जताते भी कैसे ? उनका नाम भी नरेंद्र था । वे ही फिर 1950 में जन्म लेकर आये हैं । 

हमने कहा- लेकिन उन्होंने 'लेडीज़ ऐंड जेन्टलमेन' कहा था । यह पश्चिम की संस्कृति है जबकि हमारे यहाँ पुरुष का नाम पहले आता है । इसीलिए मोदी जी 'भाइयो और बहनो'  बोलते हैं । 

बोला- मेरा काम बताना था सो बता दिया । अब आगे तू है और तेरे कर्म । जैसा कर्म करेगा वैसा फल देंगे अंधभक्त । ये तो मोदी जी हैं ।इनका तो 'ही ही खी खी' का भी पेटेंट है । देखा नहीं, ही ही खी खी करने पर राजीव निगम, भगत राम आदि के फेस बुक बंद हो गए कि नहीं ? 
उनकी तुलना में अत्यंत सामान्य लोगों तक ने अपने अपने छोटे छोटे कामों के पेटेंट करवा रखे हैं । 

हमने पूछा- जैसे ?

बोला- जैसे अनिल कपूर ने अपने एक शब्द 'झक्कास' का, जैकी श्रॉफ ने 'भीड़ू' और अमिताभ बच्चन ने 'देवियो और सज्जनो' का पेटेंट करवा रखा है । 

हमने कहा- तो फिर हम भी 'मास्टर' और 'तोताराम'  का पेटेंट करवा लेते हैं । फिर देखते हैं हमारी स्वीकृति के बिना मोदी जी कैसे कोई 'मास्टर स्ट्रोक' लगाते हैं । और कैसे कोई  'अपने मुँह मियां मिट्ठू' बनता है । 



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Mar 23, 2026

2026-03-01 वेद-विज्ञान

2026-03-01


वेद-विज्ञान

आज तोताराम बहुत खुश था । ​





हमने पूछा- क्या बात है तोताराम, तू तो ऐसे खुश हो रहा है जैसे बुकिंग करवाते ही एक साथ दो सिलेंडर पुराने रेट में मिल गए हों या ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल खरीदने के लिए एक और महिने की स्वीकृति दे दी हो या फिर मोदी जी ने कोरोना काल में हजम किया 18 महिने का डीए रिलीज़् कर दिया हो ।

बोला- छोटी औकात, छोटी कल्पना । गरीब आदमी कल्पना भी करेगा तो दो की जगह तीन रोटी और रूखी की जगह चुपड़ी की । उसे पुंगनूर गाय के घी में मशरूम फ्राई की कल्पना करते हुए भी बैंक का वसूली का नोटिस आने का डर लगता है ।

मैं ऐसी छोटी कल्पना नहीं करता । आज तो सत्य साकार हो गया । हमारे सनातन और वैदिक ज्ञान को राष्ट्रीय मान्यता मिल गई है ।

हमने कहा- मोदी है तो मुमकिन है । आज तो उनका सितारा बुलंद है । दुनिया में कौन है जो उनकी बात टाल दे । फिर यह तो देश का एक छोटा सा बोर्ड या प्रवेश परीक्षा है । वे तो बिना डिग्री और प्रवेश परीक्षा के किसी को भी कुलपति बना दें, बिना किसी यूपीएससी परीक्षा के लेटरल एंट्री से सरकार में संयुक्त सचिव बना दें । फिर भी ज़रा बात को स्पष्ट तो कर जिससे हमें प्रतिक्रिया देने में सुविधा हो । वैसे ऐसे छोटे-मोटे शैक्षणिक मामलों में तो स्मृति ईरानी और सम्राट चौधरी भी प्रतिक्रिया दे सकते हैं ।

बोला-  महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVVY) से वेद-विभूषण (12वीं समकक्ष) उत्तीर्ण छात्र अब एआईसीटीई के मानदंडों के अनुसार इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं जैसे जेईई मेन (JEE Main)आदि में बैठ सकते हैं और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।  

हमने कहा- इसके लिए किसी इंजीनीयरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने और डिग्री लेने की क्या जरूरत है ।देश में बहुत पहले से झाड़-फूँक,मंत्र-तंत्र, गोबर गोमूत्र से सब बीमारियों का इलाज लोग कर ही रहे हैं ।देखा नहीं कोरोना काल में एक संदिग्ध ज्ञान और डिग्री वाले वैदिक ज्ञानी बाबा के काढ़े का देश के स्वास्थ्य मंत्री लोकार्पण कर रहे थे । और तो और खुद मोदी जी ने ऐसे बहुत से प्राचीन भारतीय तथाकथित वेद ज्ञान-विज्ञान के नुस्खों का विज्ञान-भवन से उद्घोष किया है ।

बोला- तुझे पता होना चाहिए कि जब ये यूरोप के लोग भारत में आये थे तो इन्होंने हमारे देश का आर्थिक शोषण ही नहीं किया बल्कि हमारे वेदों का सारा ज्ञान भी निकालकर ले गए और फिर अपने वहाँ उसके आधार पर नए नए आविष्कार किये ।

हमने कहा- मदरसों और संस्कृत पाठशालाओं में केवल रटाया जाता है । प्रश्न, जिज्ञासा, तर्क और प्रयोग का वहाँ कोई विधान नहीं है । और इस प्रकार की शिक्षा से भक्त बनाए जा सकते हैं वैज्ञानिक नहीं । वैसे तो आजकल इंजीनीयरिंग मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटरों में बच्चों को केवल रटाया ही जाता है । तभी तो हमारे यहाँ सी वी रामन के बाद कोई नोबल नहीं प्राप्त कर सका ।

हमारे चाचाजी संस्कृत पाठशाला में ही पढ़े थे । एक बार आजादी से पहले संस्कृत पाठशालाओं में विज्ञान का प्रवेश करवाने के लिए सामान्य विज्ञान की एक छोटी सी पुस्तक शामिल की गई ।जिसे बच्चों ने रट लिया और परीक्षा में प्रश्नों को देखे बिना ही 'बच्चो तुमने रेल का इंजन तो देखा ही होगा । हमारा शरीर भी एक इंजन के समान ही होता है......।' से शुरु करके जितना लिख सकते थे लिख आये । ऐसे में विज्ञान के क्षेत्र में क्या करेंगे ।

बोला- तो बता हमारे यहाँ आकाशवाणी होती थी कि नहीं ? क्या था वह ? आज का रेडियो । संजय दूर से ही धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आँखों देखा हाल सुना रहा था । क्या था वह । टेलीविजन का लाइव टेलेकास्ट । राम का बाण लक्ष्य बेधकर वापिस उनके तरकश में आ जाता था वह गाइडेड मिसाइल ही तो था । हनुमान जी जब चाहे लघु और विराट रूप धरण कर लेते थे । है किसी देश के पास यह टेकनॉलॉजी ? ऋषि मुनि किसी को भी श्राप से भस्म कर देते थे । होलिका के पास फायर प्रूफ चुनरी थी ।शिव बहुत बड़े पशु चिकित्सक और सर्जन थे । उनके लिए गणेश वाली प्लास्टिक सर्जरी और अपने ससुर को बकरे का सिर लगा देना तो मामूली बात थी ।

हमने कहा- लेकिन आज की आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस ?

बोला- विष्णु द्वारा सुंदरी का वेश धारण करके एक ही बर्तन से सुरों और असुरों को शराब और अमृत पिलाने का धोखा करना आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस नहीं तो क्या था ? और तो और आजकल जिस ड्रोन का हल्ला मचा हुआ है उसका आविष्कार तो हमारे द्रोणाचार्य ने किया था । अंग्रेजी में ड्रोन और द्रोण एक ही तरह इसीलिए तो लिखा जाता है ।

हमने कहा- तो फिर मोदी जी को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में इस बात का मुकदमा कर देना चाहिए जो जो देश ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं वे बैक डेट से भारत को उसकी रॉयल्टी दें । ट्रम्प, नेतन याहू, चीन, रूस सबकी हवा खिसक जाएगी । भूल जाएंगे टेरिफ़ वार ।

बोला- मास्टर, तेरी ऊपर की मंजिल अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है । तेरा ज्ञान भी राम भद्राचार्य और सुधांशु त्रिवेदी की तरह अपार है । अब चुपचाप दिल्ली जाकर राष्ट्रहित में मोदी जी को यह महत्वपूर्ण जानकारी दे ही दे । अगर तेरे जैसा कोई ज्ञानी दिल्ली वाली अंतर्राष्ट्रीय ए आई सम्मिट के समय मोदी जी को यह ज्ञान दे देता तो गलघोंटिया वाले ड्रोन कुत्ते को लेकर चीन के आगे शर्मिंदा नहीं होना पड़ता । खैर दिल्ली जा तो सही । क्या पता तुझे किसी इंजीनीयरिंग विश्व विद्यालय का उपकुलपति ही बना दें । ऐसे ज्ञानियों की इस समय देश के शिक्षा संस्थानों में बहुत जरूरत है ।

-रमेश जोशी


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Mar 21, 2026

2026-03-20 चाय और गंगाजल

2026-03-20 
चाय और गंगाजल  

आज तोताराम ने आते ही पूछा- मास्टर, तेरे पास थोड़ा गंगाजल पड़ा हुआ है क्या ?

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हमने कहा- गंगाजल की अभी क्या जरूरत आ पड़ी । अभी तो शतक लगाएंगे और मोदी जी के सपनों का 2047 वाला विकसित भारत भी देखेंगे । वैसे गंगाजल का क्या है ? पीकर मरने के लिए और भी बहुत कुछ उपलब्ध है । कफ सीरप पीकर मर सकता है, देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का पानी पीकर मर सकता है, किसी जुलूस-जलसे के हुड़दंग में जाकर मर सकता है, किसी धनबली या बाहुबली के सुपुत्र की कीमती तेज रफ्तार कार के नीचे आकर मर सकता है, स्वदेसी दारू पीकर मर सकता है, धार्मिक उत्साह और उन्माद में मर सकता है । वैसे भी अमर कौन है ? कुछ नहीं करेगा तो भी एक दिन मरना तय है । इसीलिए गालिब ने ठीक ही कहा है-

मौत का एक दिन मुअय्यन हैं 
नींद क्यों रात भर नहीं आती 

बोला- मुझ पर कौन देश के एक सौ चालीस करोड़ की जिम्मेदारी है और कौनसा पितृभूमि इजराइल के साथ खड़ा होना है जो रात भर नींद नहीं आएगी । मैं तो इसलिए पूछ रहा था कि अब किसी पोस्ट ऑफिस से या कहीं और से कोई गंगाजल मँगवाने का धरम नहीं रहा ।सुना है बनारस में कुछ मुसलमानों ने गंगा में रोजा इफ्तारी करके गंगाजल को अपवित्र कर दिया है । अब उसे पीकर तो जैसा थोड़ा बहुत धर्म बचा होगा वह भी भ्रष्ट हो जाएगा । 

 हमने कहा- तोताराम, धर्म न तो किसी पुस्तक में है और न ही किसी कर्मकांड में । धर्म तो हमारे सत्कर्मों में है, प्रेम और भाईचारे में हैं, शांति और करुणा में है । मिलकर रहेंगे तो शांति से जियेंगे, लड़ेंगे तो दुखी होकर तनाव में मरेंगे । और जहाँ तक पवित्रता की बात है तो वह आस्था की एक अवधारणा है । वैसे जो  हम खाएं पीएं वह वस्तु साफ-सुथरी और स्वच्छ हो । मंदिर के प्रसाद को भक्त पवित्र और पूज्य मान सकता है लेकिन अगर उसमें किसी अखाद्य पदार्थ की मिलावट होगी या वह बासी होगा तो उससे फूड पॉइजनिंग हो जाएगी और फिर मरने से कोई ईश्वर या खुदा नहीं बचा सकेगा । बहुत बार सुनते हैं कि नहीं कि प्रसाद खाने से लोगों को उलटी-दस्त हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा । 

दुनिया में न धर्म बचा है और न कर्म बचा है । अब तो लालच बचा है पब्लिसिटी का, धन का, पद का । इसलिए पवित्रता का चक्कर छोड़ो स्वच्छता का ध्यान रखो । और नदियों को  पूजने का नाटक करने की बजाय उनकी सफाई पर ध्यान देना चाहिए भक्तों को भी और सरकार को भी ।गंगा दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी है इस पर शर्म आनी चाहिए । रिश्ता जोड़ना एक काव्यात्मक और मिथकीय भावना हो सकती है लेकिन उस भावना मात्र से कुछ नहीं होता । उसे व्यवहार में भी उतरना चाहिए ।  वास्तव में  योरप में न तो नदियों को माँ माना जाता है और न ही उनकी आरती उतारी जाती है लेकिन उनकी सफाई का ध्यान रखा जाता है । 

बोला- लेकिन क्या गंगा में इफ्तार पार्टी करना और वीडियो बनाकर डालना क्या उचित है । 

हमने कहा- बिल्कुल नहीं। धर्म और उसके कर्मकांड सबका निजी मामला है । उसे अपने घर या धार्मिक स्थान पर शालीनता और शांति से मनाना चाहिए । किसी प्रकार का अनावश्यक प्रदर्शन, धूम-धड़ाका, डी जे, यात्रा, जुलूस, रँग-बिरंगी रैलियाँ और लफंगई सर्वथा गलत है फिर चाहे वह बहुसंख्यकों द्वारा हो या फिर अल्पसंख्यकों द्वारा । धर्म आतंक, राजनीति और चुनाव का हथियार नहीं होना चाहिए ।

बच्चों को क्या दोष दें । आजकल तो बड़े-बूढ़े भी अपने गू मूत करने तक में अनेक फोटोग्राफरों को बुलाते हैं और अपने फ़ोटो, वीडियो तरह तरह से वाइरल करवाते हैं और फिर उसका चुनाव में फायदा उठाते हैं । अन्यथा क्या नेताओं को हम सरकारी खर्चे पर वी आई पी  तीर्थयात्रा करने के लिए चुनते हैं ?  अरे, तीर्थ यात्रा करनी है तो राजनीति को छोड़ो और जाओ चुपचाप पदयात्रा करते हुए चारों धाम । यह क्या कि अपनी ड्यूटी छोड़कर कभी किसी नदी में स्नान, कभी किसी धार्मिक कॉरीडोर का उद्घाटन, कभी किसी गुफा में ध्यान और साथ में सौ सौ फ़ोटोग्राफर ।
 
मौज मज़ा, पर्यटन, खेल तमाशा और आध्यात्मिकता में कुछ तो अंतर होना चाहिए कि नहीं ? क्या गरबा पहले नहीं होता था लेकिन अब वह बाजार द्वारा संचालित एक प्रदर्शन पूर्ण व्यवसाय हो गया है ।  वही हाल अन्य त्योहारों का हो गया है । इसके लिए जरूरी है कि आध्यात्मिक और सच्चे धार्मिक नेता इस अश्लील प्रदर्शन से अपने अपने धर्मों और समाजों को बचाएं । लेकिन वे क्या बचाएंगे वे तो खुद अपराधों,अय्याशी, प्रदर्शन और राजनीति के कीचड़ में लिथड़े हुए हैं । वैसे सच में तो सभी उत्सव हमें जोश में भी होश कायम रखना सिखाने के लिए होते हैं ।  

बोला- मास्टर, आज तो तूने बिना गैस के ही अपने मन की बात से मुझे मरणांतकता तक पका दिया है । अब कम से कम चाय तो पिला दे । 

हमने कहा- चाय भी पिला देंगे लेकिन समझ ले कि चाय भी गंगाजल की पवित्रता की तरह एक अवधारणात्मक मामला है । किसे पता कि चाय पिलाने वाला जो चाय और उसकी पत्ती को ताज़ा बताकर तुम्हें पिला रहा है वह किसी रेलवे स्टेशन की 65 साल पुरानी चाय हो ।  

बोला- अब बकवास मत कर और जैसी भी है पिला पिलू दे और साथ में सिर दर्द की कोई गोली हो तो वह भी ले आना । 

हमने कहा- तोताराम, कौन किसे गोली दे रहा है अगर यही समझ आ जाए तो कहीं भी लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ेगा । लोग इतने मूर्ख है कि गोली और जुमलों को ही मास्टर स्ट्रोक समझ और समझा देते हैं । 

वैसे तोताराम, गंगा में इफ्तार की इस दुर्घटना से हमारा ध्यान एक और बहुत बड़ी समस्या की ओर जा रहा है कि चलो इफ्तार करने वालों को तो जेल में डाल देंगे, इनके घर पर बुलडोज़र चला देंगे लेकिन गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा के किनारे बसे शहरों गांवों में तो सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सब कुछ खाते पीते हैं । उन सबका मलमूत्र गंगा-जमुना में जाता है । उसे कैसे हिन्दू गंदगी और मुसलमान गंदगी तथा अपवित्र करने वाली और अपवित्र न करने वाली गंदगी के रूप में अलग अलग करके माता स्वरूप धार्मिक नदियों की पवित्रता को बचाएंगे । 

 

बोला- उसकी चिंता मत कर । उसके लिए तो हमारे पास कपड़ों से पहचानने वाली तकनीक की तरह गंदगी के धर्म को पहचानने की तकनीक भी है ।

-रमेश जोशी 


  
  


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Mar 19, 2026

2026-03-19 आज चाय पी रहा है, कल को.....

2026-03-19 

आज चाय पी रहा है, कल को...... 

  

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राजस्थान में बारिश, आंधी और ओले गिरने का अलर्ट तो तीन चार दिन से था लेकिन वह सच रात को हुआ । ओले तो बहुत कम और छोटे छोटे गिरे लेकिन बारिश अच्छी हो गई । दो दिन पहले रात को खिड़की खोलनी पड़ती थी । रात उसे बंद करना पड़ा । बीच में उठकर बेड में से मोटा कंबल निकालना पड़ा । अच्छी नींद आई कुछ वैसी ही जैसी राहुल की सदस्यता रद्द करके मोदी जी और महुआ मोइत्रा की सदस्यता रद्द होने निशिकांत दुबे की आत्मा को शांति मिली थी । हाँ, खटर-पटर में नींद का जो घाटा हुआ वह सुबह देर से आँख खुलने से पूरा हो गया । 

सुबह उठकर देखा तो महिनों से रुकी हुई नाली बारिश के पानी के बहाव से साफ हो चुकी थी जैसे मोदी जी के आने की तैयारी में सब कुछ फिटफाट हो जाता है । बारिश के कारण दूध वाला भी नहीं आया । लेकिन कुछ ठंड होने से चाय का मूड बना तो नीबू वाली चाय ही बनाकर बरामदे में ले आये । लुंगी बनियान पर एक चद्दर डाले उकड़ू बैठे चाय की एक चुस्की ही ली थी कि तोताराम की आवाज आई- मास्टर कुछ तो लिहाज कर लिया कर । 

हमने पूछा- किसका ? यहाँ कौन हमारा जेठ या ससुर बैठा है जिससे घूँघट करना है । और फिर हम कौन भाजपा नेता मनोहर लाल धाकड़ की तरह हाई वे पर ही धकड़पना दिखा रहे हैं । चाय ही तो पी रहे हैं ।  

बोला- आज तू बरामदे में ऐसे उकड़ू बैठकर चाय पी रहा है, कल को राहुल गांधी की तरह संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पकौड़ों का सेवन करेगा । दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की क्या इज्जत रह जाएगी । 

हमने कहा- हाँ,हाँ संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने से देश का लोकतंत्र बदनाम होता है  और् संसद में किसी को कटुआ, भड़ुआ, आतंकवादी कहने से दुनिया में भारत के वसुधैव कुटुम्बकं का संदेश जाता है । और अब तो अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता आयोग द्वारा भारत में सांप्रदायिकता और उसमें आर एस एस की भूमिका पर चर्चा होने लगी है । वह क्या देश के लोकतंत्र के लिए शर्म की बात नहीं है ? 

बोला- वह् तो भारत के दुनिया में बजने वाले डंके से जलने वालों का षड्यन्त्र है ।  लेकिन जब संसद की कैंटीन में अच्छी और सस्ती चाय, पकौड़े, बिस्किट सबकी व्यवस्था है, टेबल कुर्सी हैं तो सीढ़ियों पर चाय का क्या अर्थ है ?

हमने कहा- हो सकता है चाय पर चर्चा कर रहे हों क्योंकि अंदर तो ओम बिरला बोलने नहीं देते ।और चाय के बिना चर्चा हो नहीं सकती । मोदी जी भी तो चर्चा करने के लिए ओबामा को चाय बनाकर पिला रहे थे कि नहीं । तो चाय पीने में क्या बुराई है ?

बोला- चाय बना रहे थे थे लेकिन तूने सलीका नहीं देखा । उसके लिए विशेष रूप से सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहना था । आज भी उसकी दुनिया में चर्चा होती है । और कुछ नहीं तो इन काँग्रेसियों को मोदी जी से कम से कम इतना सलीका तो सीख ही लेना चाहिए । 

हमने कहा- क्या जर्सी गाय , कांग्रेस की विधवा, 50 करोड़ की गर्ल, फ्रेंड, शूर्पनखा  जैसे शब्दों से देश के लोकतंत्र का सम्मान बढ़ता है ?संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने में ऐसा क्या हो गया जो तुम लोगों को लोकतंत्र पर खतरा नजर आने लगा है । 

बोला- इसमें एक और बड़ा षड्यन्त्र छुपा हुआ । आज चाय पी रहा है । कल को चाय बनाने लगेगा, परसों बेचने लगेगा और ऐसे करते करते देश का प्रधानमंत्री बन जाएगा । यह सब अनैतिक तरीकों से मोदी जी की कुर्सी हथियाने की चाल है लेकिन शाह साहब ऐसा नहीं होने देंगे । राहुल पर देशद्रोह का का केस लगा देंगे । 

हमने कहा- लेकिन साबित कैसे करेंगे ?

बोला- साबित करने की क्या जरूरत है । और बहुत से लोगों की तरह अनंत काल तक हिरासत में तो रख ही सकते हैं ।

हमने कहा- तोताराम, ये सब तो गाली और भीख की तरह ओ बी सी के नाम से सहानुभूति वोट बटोरने के नाटक हैं अन्यथा चाय से ही कुछ होना होता तो हम लोग 60 साल से चाय से चिपके हुए हैं लेकिन ‘भाजपा जिला वृद्ध मोर्चा के मोहल्ला प्रवक्ता’  तक तो बन नहीं पाए ।  

  



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Mar 18, 2026

2026-03-17 मोदी जी और असंवैधानिकता

2026-03-17 

 मोदी जी और असंवैधानिकता 


आज जैसे ही तोताराम आया हमने उसे लपक लिया, पूछा- यह क्या हो रहा है मोदी जी के राज में ?

बोला- क्या हो रहा है ? सब ठीक तो चल रहा है । गैस की कोई किल्लत नहीं,  कानून व्यवस्था दुरुस्त,  दुनिया में डंका । और क्या चाहिए ?

हमने कहा- मोदी के लोकसभा क्षेत्र में संविधान का उल्लंघन जो हो रहा है । ​

 


बोला- और किसी की बात तो मैं नहीं कह सकता लेकिन मोदी जी के रहते और चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन संविधान का उल्लंघन नहीं हो सकता । क्या कभी तू ने भारत के किसी प्रधानमंत्री को संसद की सीढ़ियों पर इस माथा टेकते देखा था ? और अब तो उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए संसद में सेंगोल भी रखवा लिया है । वह सेंगोल जिसे नेहरू जी ने संग्रहालय में रखवा दिया था और कुछ राष्ट्रप्रेमियों के अनुसार वे जिसे वॉकिंग स्टिक के रूप में काम में लिया करते थे । जो भी संविधान की ओर आँख उठाकर भी देखेगा मोदी जी इसी सेंगोल से उसकी ठुकाई कर देंगे । 

हमने कहा- लेकिन सेंगोल तो राजदंड का प्रतीक है, लोकतंत्र का नहीं । और फिर जब मोदी जी लोगों को संविधान की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखने देंगे तो लोग उसे पढ़ेंगे कैसे ? और पढ़े बिना उस पर आचरण कैसे करेंगे ? फिर तो जो मोदी जी बताएंगे वही संविधान माना जाएगा ।  

बोला- मास्टर, बात को इधर उधर नहीं भटकाना चाहिए । बात संविधान के उल्लंघन की हो रही थी तो बता मोदी जी ने कैसे संविधान का उल्लंघन किया या करवाया ? 

हमने कहा- हमारे संविधान में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की बात कही गई है लेकिन जब मोदी जी के चुनाव क्षेत्र बनारस में कुछ जिज्ञासु बालक नाली पर गैस का चूल्हा रखकर चाय बनाने का प्रयोग कर रहे थे तो पुलिस ने उनके बर्तन भांडे छीन लिए और भगा दिया । अगर ऐसे ही हम बच्चों की जिज्ञासा का दमन करते रहेंगे तो देश में विज्ञान का विकास कैसे होगा ? 

बोला- विज्ञान का विकास तो इस देश में बहुत पहले से ही हुआ हुआ है । वेदों का अध्ययन करना चाहिये और यूरोप वालों के निकाल लेने के बाद अगर कुछ बचा हुआ है तो पहले उसे निकालना चाहिए इससे पहले कि ये ईसाई लोग उसे निकाल कर यूरोप ले जाएँ । यह नाली वाला तो कहीं भागा जा रहा है क्या ?  इसे तो कभी भी निकाल लेंगे । 

वैसे भी राष्ट्रवादी पार्टी होने के कारण भारतीय ज्ञान परंपरा पर भाजपा का एकाधिकार है । देख ले प्रमाण- 

भारतीय ज्ञान परंपरा 

 BHARATIIYA     JNYAN    PARAMPARA 

 B J P     

भा  ज  पा 


हमने कहा- तोताराम, यह तो तूने बिल्कुल मोदी जी वाला ज्ञान पेल दिया ।  लेकिन बच्चों को इस तरह हतोत्साहित करना भी तो उचित नहीं । इससे वैज्ञानिक सोच का विकास रुकता है । 

बोला- ठीक है लेकिन इससे अराजकता फैलने का भी तो डर है । इस आविष्कार का तो मोदी जी का पेटेंट है । यह नियमों का उल्लंघन है ।इस प्रकार गैस बनाने से पहले मोदी जी से पूछना चाहिए या फिर नियमानुसार सरकार को रॉयल्टी देनी चाहिए । इस प्रकार ये अराजक तत्व आज नाली से बिना रायल्टी दिए गैस बना रहे हैं, कल को बिना रायल्टी दिए कहीं भी कुएं खोदकर तेल निकालने लग जाएंगे । नाली और नाली में प्रवाहित होने वाला सनातन पदार्थ राष्ट्र की संपत्ति है । यह राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी का मामला भी बनता है । इससे पहले भी इनका वह नेता राहुल गाँधी सारे देश में मोहब्बत की दुकानें खोलता फिर रहा था लेकिन आज तक सरकार को न जी एस टी दिया और न ही जमीन को  रेसिडेन्शियल से बिजनेस में कन्वर्ट करवाया । थोड़े दिन रुक जा उस पर भी इनकम टेक्स और अतिक्रमण का केस किया जाएगा । ​

 ​


वैसे जब तक यह गैस उत्पादक खाद्य पदार्थ किसी के पेट में है तब तक व्यक्ति का है लेकिन गटर में प्रवाहित होने के बाद वह राष्ट्र की संपत्ति हो जाता है । अगर किसी को व्यक्तिगत रूप से गैस बनानी है तो उसे अपने आगे-पीछे पाइप लगाकर अपने घर में ही गैस बनानी चाहिए । इस तरह नाली पर सामान रखकर सड़क रोकना अतिक्रमण है । यह तो योगी जी दयालुता है जो बुलडोज़र नहीं चलवाया । देखा किस प्रेम और शालीनता से मुस्कुराते हुए सामान ले जा रहे हैं ।  

हमने कहा- न्यायालय ने भी तो अनुराग ठाकुर के मुसलमानों के साथ सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने वाले 'गोली मारो' वाले बयान पर कोई संज्ञान नहीं लिया था क्योंकि उन्होंने यह वाक्यांश प्रेमपूर्ववक मुस्कुराते हुए कहा था । 

-रमेश जोशी  

          

     



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Mar 16, 2026

2026-03-01 बोल, थैंक यू मोदी जी


2026-03-01 

बोल, थैंक यू मोदी जी 


आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया-  'बोल- थैंक यू मोदी जी' ।  वैसे ही जैसे आजकल के नए नए राम भक्त किसी भी मुसलमान को घेरकर कहते हैं- 'बोल, जय श्री राम' । 

हमने कहा- तोताराम, हम इतने मजबूर नहीं हैं कि 200 रुपए, नाश्ते का एक पैकेट और एक बीड़ी का बंडल/पाँच गुटके/ कोल्ड ड्रिंक लेकर किसी चुनावी रैली में जाएँ और 'मोदी-मोदी' चिल्लाएँ और न ही इतने डरपोक हैं कि किसी भी ऐरे-गैरे के कहने से किसी को धन्यवाद देने लगें । हाँ, किसी ने धन्यवाद के लायक कुछ किया हो तो हम इतने कृतघ्न भी नहीं हैं कि धन्यवाद न कहें । लेकिन मोदी जी ने हमारे लिए या देश के लिए कौनसा ऐसा काम किया है जिसके लिए 'थैंक यू मोदी जी' बोलें । 

बोला- सीधे सीधे तेरे लिए नहीं किया तो क्या देश के किसी भी भाग के लिए कुछ भी अच्छा किया है तो धन्यवाद तो बनता ही है । तेरे लिए नहीं, राजस्थान के लिए नहीं तो केरल के लिए तो किया ही है ना । केरल का नाम केरलम् करने को मंजूरी दे तो दी । 

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हमने पूछा- पहली बात तो यह कि इस प्रकार नाम बदलने से क्या होता है । मूर्ख को मूर्खम् , दुष्ट को दुष्टम्, मूत्र को मूत्रम् करने से क्या उनका चरित्र या अवगुणों में कोई कमी आ जाएगी ? 

बोला- अगर मोदी जी को तेरे इस जुमले का पता चल जाए तो वे शीघ्र ही केरल में होने वाले चुनाव में इसे मुद्दा बना सकते हैं कि कुछ कांग्रेसी केरल को दुष्ट और मूर्ख बता रहे हैं । वैसे ही जैसे राष्ट्रपति के बंगाल में अपमान की आड़ में ध्रुवीकरण करने लगे ।
 
हमने कहा- लेकिन यह भूल गए कि खुद की पार्टी ने राम मंदिर शिलापूजन,राम लला की प्राणप्रतिष्ठा और संसद भवन के उद्घाटन में दलित और आदिवासी राष्ट्रपतियों को उपेक्षित किया था । लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे । और फिर केरल के लोग पढ़े लिखे और समझदार हैं । वे महाराष्ट्र,  बिहार, दिल्ली वालों की तरह दो चार हजार में बिकने वाले नहीं है ।  

वैसे केरलं करने से कुछ होना हवाना नहीं फिर भी तुझे बता दें  कि यह प्रस्ताव 2024 का है जिसे आज चुनाव से ठीक पहले स्वीकार करके एक घटिया केरल-प्रेम का प्रदर्शन किया जा रहा है । केरल का सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, बौद्धिकता, काम करने की शिद्दत पूरे देश के लिए अनुकरणीय है लेकिन उससे कोई कुछ सीखना नहीं चाहता । 

खैर चल, आज तुझे इसी बात पर गिलासम् में चायम्  पिलाएंगे  । 

बोला- वही सड़ियल चाय । 

हमने कहा- तो बस, यह 'थैंक यू मोदी जी' भी वैसे ही है जैसे केरल का केरलं या पोर्टब्लेयर का श्री विजयपुरम हो जाना । अब भी श्री विजयपुरम अर्थात पोर्टब्लेयर से भेजी गई किताब उसी तरह 20 दिन में आती है जैसे 40-50 साल पहले आती थी । वे सोचते हैं श्रीविजयपुरम करने से तमिलनाडु के जागरूक नागरिक मूर्ख बन जाएंगे । वे काँवड़िए नहीं हैं । 
और जहाँ तक केरल की बात है तो केरलं दो शब्दों से बना है केरा और आलम अर्थात नारियल की भूमि और दूसरा  "चेर - स्थल", 'कीचड़' और "अलम-प्रदेश" शब्दों के योग से चेरलम बना था, जो बाद में केरल बन गया। केरल शब्द का एक और अर्थ है : - वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो। समुद्र और पर्वत के संगम स्थान को भी केरल कहा जाता है। 

बोला- जब कीचड़ है तो कमल भी खिलकर ही रहेगा । 

हमने कहा- हाँ, हाँ कमल खिलेगा लेकिन संप्रदायिकता, नस्ल, जाति, धर्म वाला कमल नहीं बल्कि इस कीचड़ से नितांत असंपकृत, अप्रभावित भारतीय माइ थोलॉजी का एक शानदार प्रतीक, एक अद्भुत मिथक- कमल  । खिलेगा क्या ? सौभाग्य से आज भी खिला हुआ है और खिला रहेगा । यही तो हमारे संविधान की आत्मा है । सद्भाव । 

-रमेश जोशी  

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Mar 15, 2026

2026-03-15 आपदा में अवसर


2026-03-15 
आपदा में अवसर 








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आज तोताराम अपेक्षाकृत जल्दी आ गया । 

हमने कहा- तोताराम, ठीक है मुफ़्त के माल पर बड़े बड़े संत भी पिल पड़ते हैं लेकिन बाद में भुगतना तो खुद को ही पड़ता है । अन्य दिनों की बजाय आदमी दीर्घ शंका के लिए जल्दी जाना पड़ता है । कहाँ भागी जा रही थी तेरी चाय । 

बोला- मास्टर, चाय की बात नहीं है । एक अच्छी खबर है । आपदा में अवसर ।

हमने कहा- आपदा में अवसर व्यापारियों के लिए होते हैं । वे अपने पास पड़े पुराने स्टॉक की कालाबाजारी करने लग जाते हैं । अभी इजराइल वाले लफड़े में देख ले । आपदा का फायदा उठाकर बिकने लगा कि नहीं सिलेंडर तीन तीन हजार में । अदानी ने भी अपनी गैस के दाम बढ़ा दिए कि नहीं । और मोदी जी ने भी प्रति सिलेंडर 60 रुपये बढ़ा ही दिए । 

बोला- मोदी जी कोई व्यापारी थोड़े हैं । वे तो सब कुछ राष्ट्रहित में करते हैं । यहाँ तक कि दिन में दस-दस ड्रेसें बदलना भी वे भी भारत की गरीब राष्ट्र की इमेज सुधारने के लिए करते हैं अन्यथा वे तो संत हैं । उनके लिए तो एक चीवर ही पर्याप्त है । देखा नहीं था केदारनाथ की गुफा में और गंगा में स्नान करते हुए मात्र एक भगवा वस्त्र में । 

हमने कहा- देख लेना जब अमेरिका इज्जत बचाने के लिए ईरान से खिसक लेना तब भी मोदी जी 60 रुपये की यह वृद्धि वापिस नहीं लेंगे । जी एस टी उत्सव की तरह दस रुपये घटाकर फिर कोई बचत उत्सव जरूर मना लेंगे ।  

बोला- छोड़, ये सब बड़े लोगों की बातें हैं । मैं तो अपने लिए आपदा में अवसर की बात कर रहा था । 

हमने कहा- हमारे लिए तो आपदाएं ही होती हैं । अवसर तो व्यापारियों और नेताओं के लिए होते हैं । राम मंदिर को ही देख ले ।राम मंदिर और विकास के नाम पर लोगों की ज़मीनें कब्जा लीं और दुकाने उजाड़ दीं और बड़े व्यापारियों को होटलों के लिए दे दीं । नेताओं को राम के नाम पर गद्दी मिल गई और गुजरात के व्यापारियों को धंधा । दोनों की बंदरबाँट । और भगवान और सच्चे भक्तों को क्या मिला ? मिलावटी प्रसाद । ये तो प्रभु कुछ खाते नहीं हैं अन्यथा अब तक पेट स्थायी रूप से खराब हो गया होता ।

बोला- अपने मन की बात छोड़ और काम की बात सुन । अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि ईरान के दस लोगों के बारे में खबर देने वाले को दस मिलियन डालर का इनाम दिया जाएगा । अब हम लोगों को गैस के सिलेंडर का चक्कर छोड़कर ईरान के अमेरिका के लिए वांटेड लोगों का पता लगाना चाहिए । वैसे भी मोदी जी ने कह दिया है कि गैस की कोई समस्या नहीं है । और कुछ कमी हुई तो नाले से निकाल लेंगे । 

हमने कहा- हमें जब बैंक का क्लर्क सीट पर नहीं मिलता तो यह तक तो पता लगा नहीं सकते कि वह छुट्टी पर है या इधर उधर चाय या पूजा के बहाने मटरगश्ती कर रहा है । मोदी जी तक का तो पता नहीं लगा सकते कि मणिपुर और संसद की महत्वपूर्ण कार्यवाही छोड़कर इजराइल गए हैं या किसी गुफा में ध्यान लगा रहे हैं या चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ईरान के नेताओं का पता लगा लेंगे । अंधभक्तों की तरह दुनिया के नक्शे में ईरान ढूँढ़ने में चार दिन लग जाएंगे । यह  कोई मस्जिद में नीचे मंदिर ढूँढ़ने जितना आसान थोड़े है । 

बोला- जैसे मोदी जी कपड़े देखकर आतंकवादियों को पहचान लेते हैं तो अपन भी किसी काली पगड़ी वाले का पता दे देंगे या ट्रम्प से उन दस लोगों का कोई अंतःवस्त्र या दाढ़ी का बाल मँगवा लेंगे और उससे कोई टोना टोटका या मारण मंत्र का जाप कर देंगे तो वहीं का वहीं मर जाएगा । अपने सतातन में तो ऐसे बहुत मिसाइलों का ज्ञान भरा पड़ा है । पहले भी तो हमारे यहाँ के भक्तों ने यज्ञ करके ट्रम्प को चुनाव जिताया था कि नहीं ? और कुछ नहीं तो इस बहाने कुछ एडवांस ही ट्रम्प से कबाड़ लेंगे । काम नहीं हुआ तो वापिस कर देंगे । 

हमने कहा- तू ट्रम्प को इतना भोला समझता है क्या ? वह कोई गांधी नेहरू की तरह भला आदमी नहीं है । उसका इतिहास सुनेगा तो तेरी तेरी अकल ठिकाने आ जाएगी । वह नेता नहीं प्रॉपर्टी डीलर है । उसे अपनी राजनीति के थ्रू अपने बेटे को दुनिया में बिजनेस दिलवाना है । मोदी जी खुद को बड़ा चतुर समझते थे । उनसे ही अमेरिका में अपने लिए चुनाव प्रचार करवा लिया और अब उन्हीं को बर्फ में लगा दिया कि नहीं ? पता नहीं, किस किस फ़ाइल के चक्कर में ऐसा फँसा दिया कि अब थूक सूख रहा है, जुबान नहीं खुल रही है । रूस से अच्छी भली दोस्ती थी, सस्ता तेल मिल रहा था । ईरान से रुपये में डील हो रही थी । सब गड़बड़ करवा दिया । अब खरीदो महंगा तेल और पिटवाओ दुनिया में भद्द । 

बोला- फिर भी किसी न किसी तरह यह खबर उड़वा दें कि तोताराम और मास्टर ने ईरान के दस लोगों की अमेरिका को खबर देने का ठेका लिया तो कम से कम एक बार चर्चा तो वाइरल हो जाएगी । निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर की तरह चर्चित तो हो जाएंगे । 

हमने कहा- ये फालतू बातें छोड़ । चाय पीकर गैस एजेंसी का एक चक्कर लगा आते हैं । क्या पता बुकिंग हो ही जाए । 

बोला- आज संडे है । कल सोचेंगे । अब तो निश्चिंत होकर चाय पर बकवास करते हैं । और 2047 तक भारत को विकसित बनाने का ड्राफ्ट तैयार करते हैं । 

हमने कहा- कोई बात नहीं  । वैसे यह काम मोदी जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कर दिया था । अब तो बस इंतजार कर उस दिन का अगर प्रभु तब तक जिंदा रखे तो । मोदी जी की बात और है वे तो ...... । 

-रमेश जोशी 
 

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