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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
2026-03-01
वैसे तोताराम, गंगा में इफ्तार की इस दुर्घटना से हमारा ध्यान एक और बहुत बड़ी समस्या की ओर जा रहा है कि चलो इफ्तार करने वालों को तो जेल में डाल देंगे, इनके घर पर बुलडोज़र चला देंगे लेकिन गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा के किनारे बसे शहरों गांवों में तो सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सब कुछ खाते पीते हैं । उन सबका मलमूत्र गंगा-जमुना में जाता है । उसे कैसे हिन्दू गंदगी और मुसलमान गंदगी तथा अपवित्र करने वाली और अपवित्र न करने वाली गंदगी के रूप में अलग अलग करके माता स्वरूप धार्मिक नदियों की पवित्रता को बचाएंगे ।
बोला- उसकी चिंता मत कर । उसके लिए तो हमारे पास कपड़ों से पहचानने वाली तकनीक की तरह गंदगी के धर्म को पहचानने की तकनीक भी है ।
-रमेश जोशी
2026-03-19
आज चाय पी रहा है, कल को......
राजस्थान में बारिश, आंधी और ओले गिरने का अलर्ट तो तीन चार दिन से था लेकिन वह सच रात को हुआ । ओले तो बहुत कम और छोटे छोटे गिरे लेकिन बारिश अच्छी हो गई । दो दिन पहले रात को खिड़की खोलनी पड़ती थी । रात उसे बंद करना पड़ा । बीच में उठकर बेड में से मोटा कंबल निकालना पड़ा । अच्छी नींद आई कुछ वैसी ही जैसी राहुल की सदस्यता रद्द करके मोदी जी और महुआ मोइत्रा की सदस्यता रद्द होने निशिकांत दुबे की आत्मा को शांति मिली थी । हाँ, खटर-पटर में नींद का जो घाटा हुआ वह सुबह देर से आँख खुलने से पूरा हो गया ।
सुबह उठकर देखा तो महिनों से रुकी हुई नाली बारिश के पानी के बहाव से साफ हो चुकी थी जैसे मोदी जी के आने की तैयारी में सब कुछ फिटफाट हो जाता है । बारिश के कारण दूध वाला भी नहीं आया । लेकिन कुछ ठंड होने से चाय का मूड बना तो नीबू वाली चाय ही बनाकर बरामदे में ले आये । लुंगी बनियान पर एक चद्दर डाले उकड़ू बैठे चाय की एक चुस्की ही ली थी कि तोताराम की आवाज आई- मास्टर कुछ तो लिहाज कर लिया कर ।
हमने पूछा- किसका ? यहाँ कौन हमारा जेठ या ससुर बैठा है जिससे घूँघट करना है । और फिर हम कौन भाजपा नेता मनोहर लाल धाकड़ की तरह हाई वे पर ही धकड़पना दिखा रहे हैं । चाय ही तो पी रहे हैं ।
बोला- आज तू बरामदे में ऐसे उकड़ू बैठकर चाय पी रहा है, कल को राहुल गांधी की तरह संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पकौड़ों का सेवन करेगा । दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की क्या इज्जत रह जाएगी ।
हमने कहा- हाँ,हाँ संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने से देश का लोकतंत्र बदनाम होता है और् संसद में किसी को कटुआ, भड़ुआ, आतंकवादी कहने से दुनिया में भारत के वसुधैव कुटुम्बकं का संदेश जाता है । और अब तो अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता आयोग द्वारा भारत में सांप्रदायिकता और उसमें आर एस एस की भूमिका पर चर्चा होने लगी है । वह क्या देश के लोकतंत्र के लिए शर्म की बात नहीं है ?
बोला- वह् तो भारत के दुनिया में बजने वाले डंके से जलने वालों का षड्यन्त्र है । लेकिन जब संसद की कैंटीन में अच्छी और सस्ती चाय, पकौड़े, बिस्किट सबकी व्यवस्था है, टेबल कुर्सी हैं तो सीढ़ियों पर चाय का क्या अर्थ है ?
हमने कहा- हो सकता है चाय पर चर्चा कर रहे हों क्योंकि अंदर तो ओम बिरला बोलने नहीं देते ।और चाय के बिना चर्चा हो नहीं सकती । मोदी जी भी तो चर्चा करने के लिए ओबामा को चाय बनाकर पिला रहे थे कि नहीं । तो चाय पीने में क्या बुराई है ?
बोला- चाय बना रहे थे थे लेकिन तूने सलीका नहीं देखा । उसके लिए विशेष रूप से सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहना था । आज भी उसकी दुनिया में चर्चा होती है । और कुछ नहीं तो इन काँग्रेसियों को मोदी जी से कम से कम इतना सलीका तो सीख ही लेना चाहिए ।
हमने कहा- क्या जर्सी गाय , कांग्रेस की विधवा, 50 करोड़ की गर्ल, फ्रेंड, शूर्पनखा जैसे शब्दों से देश के लोकतंत्र का सम्मान बढ़ता है ?संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने में ऐसा क्या हो गया जो तुम लोगों को लोकतंत्र पर खतरा नजर आने लगा है ।
बोला- इसमें एक और बड़ा षड्यन्त्र छुपा हुआ । आज चाय पी रहा है । कल को चाय बनाने लगेगा, परसों बेचने लगेगा और ऐसे करते करते देश का प्रधानमंत्री बन जाएगा । यह सब अनैतिक तरीकों से मोदी जी की कुर्सी हथियाने की चाल है लेकिन शाह साहब ऐसा नहीं होने देंगे । राहुल पर देशद्रोह का का केस लगा देंगे ।
हमने कहा- लेकिन साबित कैसे करेंगे ?
बोला- साबित करने की क्या जरूरत है । और बहुत से लोगों की तरह अनंत काल तक हिरासत में तो रख ही सकते हैं ।
हमने कहा- तोताराम, ये सब तो गाली और भीख की तरह ओ बी सी के नाम से सहानुभूति वोट बटोरने के नाटक हैं अन्यथा चाय से ही कुछ होना होता तो हम लोग 60 साल से चाय से चिपके हुए हैं लेकिन ‘भाजपा जिला वृद्ध मोर्चा के मोहल्ला प्रवक्ता’ तक तो बन नहीं पाए ।
2026-03-17
मोदी जी और असंवैधानिकता
आज जैसे ही तोताराम आया हमने उसे लपक लिया, पूछा- यह क्या हो रहा है मोदी जी के राज में ?
बोला- क्या हो रहा है ? सब ठीक तो चल रहा है । गैस की कोई किल्लत नहीं, कानून व्यवस्था दुरुस्त, दुनिया में डंका । और क्या चाहिए ?
हमने कहा- मोदी के लोकसभा क्षेत्र में संविधान का उल्लंघन जो हो रहा है ।
बोला- और किसी की बात तो मैं नहीं कह सकता लेकिन मोदी जी के रहते और चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन संविधान का उल्लंघन नहीं हो सकता । क्या कभी तू ने भारत के किसी प्रधानमंत्री को संसद की सीढ़ियों पर इस माथा टेकते देखा था ? और अब तो उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए संसद में सेंगोल भी रखवा लिया है । वह सेंगोल जिसे नेहरू जी ने संग्रहालय में रखवा दिया था और कुछ राष्ट्रप्रेमियों के अनुसार वे जिसे वॉकिंग स्टिक के रूप में काम में लिया करते थे । जो भी संविधान की ओर आँख उठाकर भी देखेगा मोदी जी इसी सेंगोल से उसकी ठुकाई कर देंगे ।
हमने कहा- लेकिन सेंगोल तो राजदंड का प्रतीक है, लोकतंत्र का नहीं । और फिर जब मोदी जी लोगों को संविधान की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखने देंगे तो लोग उसे पढ़ेंगे कैसे ? और पढ़े बिना उस पर आचरण कैसे करेंगे ? फिर तो जो मोदी जी बताएंगे वही संविधान माना जाएगा ।
बोला- मास्टर, बात को इधर उधर नहीं भटकाना चाहिए । बात संविधान के उल्लंघन की हो रही थी तो बता मोदी जी ने कैसे संविधान का उल्लंघन किया या करवाया ?
हमने कहा- हमारे संविधान में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की बात कही गई है लेकिन जब मोदी जी के चुनाव क्षेत्र बनारस में कुछ जिज्ञासु बालक नाली पर गैस का चूल्हा रखकर चाय बनाने का प्रयोग कर रहे थे तो पुलिस ने उनके बर्तन भांडे छीन लिए और भगा दिया । अगर ऐसे ही हम बच्चों की जिज्ञासा का दमन करते रहेंगे तो देश में विज्ञान का विकास कैसे होगा ?
बोला- विज्ञान का विकास तो इस देश में बहुत पहले से ही हुआ हुआ है । वेदों का अध्ययन करना चाहिये और यूरोप वालों के निकाल लेने के बाद अगर कुछ बचा हुआ है तो पहले उसे निकालना चाहिए इससे पहले कि ये ईसाई लोग उसे निकाल कर यूरोप ले जाएँ । यह नाली वाला तो कहीं भागा जा रहा है क्या ? इसे तो कभी भी निकाल लेंगे ।
वैसे भी राष्ट्रवादी पार्टी होने के कारण भारतीय ज्ञान परंपरा पर भाजपा का एकाधिकार है । देख ले प्रमाण-
भारतीय ज्ञान परंपरा
BHARATIIYA JNYAN PARAMPARA
B J P
भा ज पा
हमने कहा- तोताराम, यह तो तूने बिल्कुल मोदी जी वाला ज्ञान पेल दिया । लेकिन बच्चों को इस तरह हतोत्साहित करना भी तो उचित नहीं । इससे वैज्ञानिक सोच का विकास रुकता है ।
बोला- ठीक है लेकिन इससे अराजकता फैलने का भी तो डर है । इस आविष्कार का तो मोदी जी का पेटेंट है । यह नियमों का उल्लंघन है ।इस प्रकार गैस बनाने से पहले मोदी जी से पूछना चाहिए या फिर नियमानुसार सरकार को रॉयल्टी देनी चाहिए । इस प्रकार ये अराजक तत्व आज नाली से बिना रायल्टी दिए गैस बना रहे हैं, कल को बिना रायल्टी दिए कहीं भी कुएं खोदकर तेल निकालने लग जाएंगे । नाली और नाली में प्रवाहित होने वाला सनातन पदार्थ राष्ट्र की संपत्ति है । यह राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी का मामला भी बनता है । इससे पहले भी इनका वह नेता राहुल गाँधी सारे देश में मोहब्बत की दुकानें खोलता फिर रहा था लेकिन आज तक सरकार को न जी एस टी दिया और न ही जमीन को रेसिडेन्शियल से बिजनेस में कन्वर्ट करवाया । थोड़े दिन रुक जा उस पर भी इनकम टेक्स और अतिक्रमण का केस किया जाएगा ।
वैसे जब तक यह गैस उत्पादक खाद्य पदार्थ किसी के पेट में है तब तक व्यक्ति का है लेकिन गटर में प्रवाहित होने के बाद वह राष्ट्र की संपत्ति हो जाता है । अगर किसी को व्यक्तिगत रूप से गैस बनानी है तो उसे अपने आगे-पीछे पाइप लगाकर अपने घर में ही गैस बनानी चाहिए । इस तरह नाली पर सामान रखकर सड़क रोकना अतिक्रमण है । यह तो योगी जी दयालुता है जो बुलडोज़र नहीं चलवाया । देखा किस प्रेम और शालीनता से मुस्कुराते हुए सामान ले जा रहे हैं ।
-रमेश जोशी
बोला- विधूड़ी का स्टेटमेंट तो प्रदूषण नहीं बल्कि सनातन का सार और हिन्दू राष्ट्र का जयघोष था ।
-रमेश जोशी
2026-03-09
फीकी चाय : मीठी चाय
आज तोताराम को आये और बैठे कई देर हो गई । बैठने की मुद्रा कई बार बदलने के बाद बोला- तो क्या आज बिना किसी कार्यवाही के ही बरामदा संसद का सत्रावसान हो जाएगा ?
हमने कहा- आज तुम्हारी उसी तरह से कोई आवश्यकता नहीं है जिस प्रकार भारत की संसद में विपक्ष की । जब तू बोलने का अवसर न दिए जाने के कारण हल्ला मचा कर बहिर्गमन कर जाएगा तब हम सर्वसम्मति से बिल पास करवा लेंगे ।
बोला- मतलब ?
हमने कहा- मतलब यह कि आज चीनी नहीं है । थोड़ी देर में कोने वाले चौधरी की दुकान खुल जाएगी तब चीनी ले आएंगे । दुकान आठ बजे खुलती है और तब तक तुझे रुकना नहीं है । वैसे तू चाय पीता ही चीनी के चक्कर में है , फीकी चाय या ब्लेक कॉफी तो बुद्धिजीवी पीते हैं और तुम भक्त लोगों का बुद्धि के क्या लेना देना ।
बोला- फीकी या मीठी, चाय या कॉफी पिला या नहीं लेकिन हमारी बुद्धि पर शक ठीक नहीं है । वैसे तूने कोने वाले चौधरी की दुकान से चीनी लाने के लिए परमीशन ले ली है या नहीं ?
हमने कहा- चीनी खरीदें या नमक । इससे खरीदें या उससे, किसी से परमीशन लेने की क्या जरूरत । यह हमारे और दुकानदार के बीच का मामला है ।
बोला- नहीं मास्टर, अब वह बात नहीं रही । अब ज़माना बदल गया है । अब दुनिया बहुत छोटी, एक दूसरे पर निर्भर और कूटनीति से भरपूर हो गई है । अब नेहरू वाला ज़माना नहीं रहा जब हम स्टील के कारखाने, आई आई टी आदि अलग-अलग देशों के सहयोग से बना रहे थे ।यहाँ तक कि उस जमाने में अमेरिका ने बोकारो का स्टील प्लांट लगाने का वादा किया था लेकिन लटकाता रहा तो हमने रूस के सहयोग से लगा लिया ।
बोला- उस समय की बात और थी ।
हमने कहा- और बात क्या ? उस समय तो हम कोई विकसित देश क्या ढंगे से विकासशील भी नहीं थे ।देश का ढांचा खड़ा करने के लिए जाने किस किस काम के लिए दुनिया में भाग-दौड़ रहे थे । हाँ, लेकिन तब हम मानसिक और नैतिक रूप से कमजोर नहीं थे ।
बोला- तुझे क्या पता ? आज कल दुनिया वैसी नहीं रही । बहुत कुछ सोचना पड़ता है ।क्या पता किसी ऐसे वैसे से कोई सामान खरीद लें तो अमेरिका कहीं सौ दो सौ प्रतिशत टेरिफ़ न लगा दे । तुझे पता होना चाहिए कि यह दुकानदार कम्युनिस्ट अमराराम की पार्टी का है ।और अमेरिका कम्युनिस्टों से बहुत खार खाता है ।
हमने कहा- अमेरिका से डरें वे लोग जिनका एपस्टीन फाइल में नाम है । अपना रिकार्ड एकदम साफ है । इसलिए हम न किसी के सामने सरेंडर करेंगे और न ही कंप्रोमाइज्ड होंगे ।
बोला- लेकिन तू भी तो कई बार बच्चों के पास अमेरिका आता-जाता रहा है कि नहीं । बस, इतने पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जेल में डाला जा सकता है । फिर सिद्ध होते रहना निर्दोष केजरीवाल, सिसोदिया, स्टेंस स्वामी की तरह । तुझे कोई राम रहीम की तरह क्लीन चिट या पेरॉल नहीं देने वाला । हाँ, अगर तेरे पास भारत के रूस से तेल खरीदने के लिए एक महिने की परमीशन की तरह कोई छूट हो तो बात और है ।
हमने कहा- हम इस प्रकार की कोई बंदिश मानने वाले नहीं है ।साँच को आँच नहीं ।
बोला- गाँधी का आज भी सारी दुनिया सम्मान करती है । लेकिन मारने वाले ने तो उनको निबटा दिया कि नहीं । मैं इस चक्कर में पड़ने वाला नहीं हूँ । इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से मैं चौधरी की दुकान से चीनी खरीदने के मामले से अपने आप को उसी तरह से अलग करता हूँ जिस प्रकार मोदी जी ने खामेनई की हत्या के मामले में श्रद्धांजलि देने या शोक प्रकट करने से अपने आप को अलग कर लिया ।
और तोताराम उठकर चल गया है ।
-रमेश जोशी
तोताराम की संवेदनशीलता
हमारी गली में कुछ ही कुत्ते यहाँ के स्थायी निवासी हैं । उन्हें यहाँ किसी SIR का खतरा नहीं है क्योंकि अभी उनको वोट देने का अधिकार नहीं मिला है । किसी पार्टी को उनके वोट कटवाकर या जुड़वाकर जीत का गणित बैठाने की जरूरत नहीं है । एक ही मकान में 00 नंबर लगाकर दो चार सौ कुत्तों के वोट दिखाने की जरूरत नहीं है । इसलिए यहाँ दूसरे मोहल्ले के कुत्तों के आने को 'घुसपैठ' नाम नहीं दिया जाता । हम जब जरूरत हो उनके साथ संवाददाता सम्मेलन कर लेते हैं । हमें उनके किसी भी प्रश्न से असहजता महसूस नहीं होती । वे जो चाहें प्रश्न पूछ सकते हैं । न तो हमारी मोहल्ले में 'घुसपैठ' रोकने की जिम्मेदारी है और न ही हम किसी अन्य मोहल्ले से चुनाव के समय बस और ट्रेन से उन्हें यहाँ फर्जी वोट डालने के लिए भेजते-बुलाते हैं । वे सहज भाव से आते-जाते रहते हैं जैसे सत्ताधारी पार्टी में अन्य पार्टियों के भ्रष्टाचारी नेता सहज ही शामिल हो जाते हैं ।
उनमें किसी तरह के सांप्रदायिक दंगे नहीं होते क्योंकि न तो वे कोई विशेष प्रकार के वस्त्र पहनते हैं जिनसे उन्हें पहचाना जा सके और न ही किसी खास तरह की दाढ़ी रखते और न ही किसी राष्ट्रवादी रंग का पटका डालते और न ही किसी देवता के नाम का किसी अन्य कुत्ते से जबरदस्ती नारा लगवाते और न ही किसी को वन्देमातरम गीत के छह छंद गाने के लिए बाध्य करते । कभी कभी किसी खाद्य पदार्थ को लेकर वैसे ही मामूली झड़प हो जाती है जैसे कि किसी पार्टी के भोज में स्वयंसेवक गुलाबजामुन या बादाम की बरफी के लिए धक्कामुक्की करने लगते हैं । ऐसे में हम उनके बीच ट्रम्प की तरह युद्ध विराम करवा देते हैं लेकिन सप्ताह में दो दो बार 'मैंने युद्ध विराम करवाया' कहकर हम कभी उन्हें ह्यूमिलिएट नहीं करते इसलिए वे हमारा सम्मान भी करते हैं ।
आज जैसे ही हमने तोताराम के सामने चाय का गिलास रखा एक कुत्ते ने उसे सूंघने का दुस्साहस किया । वह गिलास से मुँह टच कर दे उससे पहले ही हमने उसे 'हट साले' कहकर भगा दिया ।
हालाँकि हमने कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया था । कुत्ते को ही तो और वह भी उसके अनुचित काम के लिए डाँटा था । और फिर यह शब्द तो संसद में भी चलता है ।कुत्ता तलवे चाटने का विनम्र काम ही तो करता है ।इस शब्द का प्रयोग करने पर किसी 'अति माननीय' पर कोई कार्यवाही नहीं होती । बस, संसद की कार्यवाही में शामिल न करने का कठोर दंड दे दिया जाता है । लेकिन तोताराम उसी तरह भड़क उठा जैसे कि निर्वाचित होते ही, शपथ-ग्रहण से पहले ही कोई अति सनातनी विधायक जनसेवा के सनातन काम 'किसी अंडे की रेहड़ी को हटवाने' के लिए पहुँच जाता है ।
बोला- मास्टर, तुझे पता होना चाहिए आज तूने बंगाल का अपमान किया है । कोई भी सच्चा बंगाली इसे बर्दाश्त नहीं करेगा ।
हमने कहा- तोताराम, इस कुत्ते के पूर्वज तो अनेक पीढ़ियों से राजस्थान के सीकर शहर के इसी मोहल्ले में रहते आये हैं । न यह माछ-भात खाता है, न लुंगी पहनता है, न बांग्ला बोलता है । और अगर कुत्ते को भैरों जी से जोड़ता है तो वे तो बनारस के कोतवाल माने जाते हैं । नाराज भी होंगे तो बनारस के लोग होंगे । और फिर हो जाएँ नाराज हमें कौन सा वहाँ से चुनाव लड़ना है । लेकिन हमारी गली के इस कुत्ते का बंगाल से क्या संबंध है ? और अगर तुझे ज्यादा ही समस्या है तो हम इसे कुत्ते ही जगह 'श्वान' कह देते हैं जैसे आवारा सांड कहकर गौ भक्तों की नाराजगी से बचने के लिए समझदार पत्रकार उन्हें 'बेसहारा साँड' लिख देते हैं ।वैसे 'साँड' अपने आप में दादागीरी का पर्याय होता है । हालाँकि इससे उनके गर्व और गौरव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । वे उसी तरह राहगीरों को आतंकित और घायल करते रहते हैं ।
बोला- तुझे पता होना चाहिए कि दुर्गा के दो मुख्य कमांडो हैं दो भैरव, एक काला और एक गोरा । उनके साथ दो कुत्ते भी हैं- एक काला और एक सफेद । कुत्ते का अपमान प्रकारांतर से दुर्गा और दुर्गा मतलब बंगाल का अपमान है ।
हमने कहा- हमें कौनसा बंगाल से या कहीं और से चुनाव लड़ना है जो इस फालतू के पचड़े में पड़ेंगे ।
बोला- लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है उन्हें तो फ़र्क़ पड़ता है ना । वे तो गाली की गिनती की तरह इसे भी मुद्दा बना सकते हैं ना ।
हमने कहा- ये सब मोदी जी जैसे समर्पित और देश के सम्मान के लिए सतर्क 56 इंची छाती वालों की चिंता के विषय हैं । वैसे यह समय राष्ट्रपति की आड़ में खेल खेलने की बजाय 'अमेरिका द्वारा 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की आज्ञा देने' के समाचार से होने वाले देश के अपमान के प्रतिकार में खड़े होने का अधिक है ।
-रमेश जोशी
अब देश की इज्जत बढ़ाने के लिए बड़ी मुश्किल से ए आई पर सम्मिट करवाई, जाने कहाँ कहाँ के विशेषज्ञ और सी ई ओ बुलाए तो कांग्रेस ने कुछ बदमाशों को भेजकर शर्ट लेस प्रदर्शन करवा दिया । क्या समझें होंगे लोग कि इस देश के युवाओं के पास कमीज तक नहीं है । क्या मोदी जी और शाह जी की तरह ‘बार बाला’ ‘जर्सी गाय, ‘50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड’, ‘साले’ जैसे शालीन, लोकतान्त्रिक शब्दों से विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते थे ?