Mar 31, 2026

31-03-2026 भाँति भाँति के कॉपीराइट





31-03-2026 

भाँति भाँति के कॉपीराइट 

2002 में सेवानिवृत्त होकर जयपुर से सीकर बच्चों के पास आ गए । 
उन दिनों दिल्ली में अटल जी जमे हुए थे लेकिन वैचारिक भिन्नता के बावजूद कुछ भी असामान्य नहीं लगता था । मजे से आलोचना-व्यंग्य चलते थे । फिर चुनाव जीतने के लिए उनके थिंक टैंक ने गहराई में जाकर एक नारा निकाला 'फ़ील गुड' और उसके बाद 'शाइनिंग इंडिया' । उस समय के उनके चाणक्य प्रमोद महाजन ने कहा- ये बच्चे क्या चुनाव लड़ेंगे ? और मजे की बात कि लोगों को गुड़ फ़ील नहीं हुआ और अटल जी धुंधलके में चले गए और बच्चों ने अश्वमेध का घोड़ा रोक लिया और उसके बाद एक बहुत कम बोलने वाले मनमोहन जी आये । बाद का इतिहास लगभग एक जैसा ही है और सभी के ज्ञान-ध्यान-संज्ञान में है । 

इन बारह वर्षों में राज्य सरकारों के परिवर्तन के अतिरिक्त सीकर का परिवेश लगभग एक जैसा ही रहा । सब कुछ सामान्य । सभी विचारों के लोग आपस में सामान्य रूप से मिलना जुलना, हँसी मजाक सब करते रहते थे । और एक सबसे अच्छी बात यह थी कि उन दिनों लिखने पढ़ने वाले महिने दो महिने में एक बार कहीं न कहीं मिलजुल लेते थे । इन कार्यक्रमों में युवा भी आया करते थे लेकिन अब सब कुछ लगभग बंद है । सब कुछ प्रदर्शन की राजनीति से आक्रांत हो गया है ।नौकरियां कम हो गई हैं। जो कुछ निकलती हैं वे पेपर लीक, नकली परीक्षार्थी आदि घपलों में उलझी हुई हैं । विकास कहाँ हो रहा है पता नहीं लेकिन विकास के विज्ञापन हर राज्य के दिखाई दे जाते हैं । युवा भगवा रैली, विराट हिन्दू सम्मेलन और काँवड़-कलश यात्रा में अपना और देश का विकास और भविष्य तलाशने लगे हैं ।

कुल मिलाकर सारी सांस्कृतिक गतिविधियां हमारी और तोताराम की 'चाय-चर्चा' पर परनिंदा तक सीमित रह गई है और साहित्य ? ओडिशा में विश्वनाथ मिश्र के 'नरेंद्र आरोहणम्' और मधु किश्वर के 'मोदीनामा'  तक रह गया है ।और मज़े की बात यह कि समाचारों में न तो ओडिशा के इस कवि का नाम मिला और न ही फ़ोटो । मोदी का नाम और मोदी का ही फ़ोटो । मानो महत्वपूर्ण कवि और काव्य नहीं 'मोदी' हैं । शायद इसीलिए गुप्त जी ने कहा था-
राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है 
कोई कवि बन जाए सहज संभाव्य है । 
इसी तरह मधु किश्वर और उनकी पुस्तक 'मोदीनामा' का नाम भी तभी पता चला  जब उन्होंने अपने यूज किये जाने का 'मी टू' टाइप खुलासा किया ।   
 
इन सब अनुलोमों-विलोमों-और प्रतिलोमों के बीच कल एक कनिष्ठ मित्र ने बताया कि एक छोटे-मोटे कार्यक्रम से यह साहित्यिक सन्नाटा तोड़ा जा सकता है और इसके लिए उन्होंने किसी संस्था का नाम भी बताया । भारत और उसके विकास से संबंधित कुछ नाम था ।  

हालाँकि हम जानते हैं कि तोताराम एकदम निठल्ला है, उसके पास कोई काम नहीं है जिस प्रकार भारत के रेल मंत्री और गार्डों तक के पास कोई काम नहीं है । ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने का काम तक मोदी जी कर लेते हैं । या फिर मास्टरों द्वारा बच्चों को परीक्षा से पूर्व गुरु मंत्र देने का काम भी मोदी जी सम्पन्न कर देते हैं । फिर भी तोताराम की ग्रन्थि को सहलाते हुए आज हमने उसके सामने यही शुभ समाचार रखते हुए कहा- तोताराम, अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर इस रविवार को शाम फ्री रखना । 

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बोला- मास्टर, कोई बहुत बड़ा लालच या भय न हो तो अब बाहर निकलने में ही भला है । वैसे ही साहसी युवा मोबाइल पर बतियाते, मोटर साइकल दौड़ाते, राह चलते लोगों को डराते, सबको पीछे छोड़कर जाने कहाँ पहुंचना चाहते हैं । या फिर घर से बाहर कोई कलश-यात्रा, काँवड़-यात्रा, देश भक्ति के रंग वाले झंडे फहराते वाहन । अच्छा है ऐसे में घर में ही रहना । कहीं मर मरा गए तो संभालने वाला भी नहीं मिलेगा । उत्साही भीड़ और त्योहारों का सांस्कृतिक जुनून ऐसा ही होता है । कोई जय श्रीराम का घोष करता है तो लगता है कि अब आया कोई पत्थर । 

हमने कहा- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है । बहुत दिनों बाद किसी विकास-विकूस जैसी किसी संस्था का कवि गोष्ठी का कोई कार्यक्रम है । 

बोला- क्या अपने यहाँ के किसी कवि ने 'मोदी चालीसा' या 'मोदी माहात्म्य' लिखा है क्योंकि जहाँ भी विकास होगा वहाँ मोदी जी के अतिरिक्त और कौन हो सकता है ? जहाँ कोई विकास दुबे हो या बुलडोज़र हो  वहाँ योगी जी के अतिरिक्त कोई और हो ही नहीं सकता । 

हमने कहा- ऐसा कुछ नहीं । कविता-शविता होगी । सुन सुना लेंगे, कुछ चेंज हो जाएगा । 

बोला- मैं तो कुछ व्यस्त हूँ लेकिन तू हो आ लेकिन सुनने-सुनाने में जरा सावधानी रखना । 

हमने कहा- कविता सुनने सुनाने में कैसी सावधानी । अपनी अपनी अभिव्यक्ति, अपनी स्वतंत्रता । 

बोला- अब वह बात नहीं रही । बहुत सोचना-विचारना पड़ता है । देखा नहीं, मध्यप्रदेश में 'भाइयो, बहनो' कहकर कुछ मिमिक्री करने वाला निलंबित कर दिया गया । कई लोगों के लिपटने-चिपटने और ही ही, खे खे करने वाले वीडियो हटवा दिए गए हैं । 

हमने कहा- भाइयो, बहनो, कहकर तो आज से कोई 132 वर्ष पहले विवेकानंद ने शिकागो में अमेरिकावासियों का दिल जीत लिया था । लेकिन उन्होंने या विवेकानंद मिशन वालों ने तो इस पर कोई कॉपीराइट नहीं जताया । 

बोला- जताते भी कैसे ? उनका नाम भी नरेंद्र था । वे ही फिर 1950 में जन्म लेकर आये हैं । 

हमने कहा- लेकिन उन्होंने 'लेडीज़ ऐंड जेन्टलमेन' कहा था । यह पश्चिम की संस्कृति है जबकि हमारे यहाँ पुरुष का नाम पहले आता है । इसीलिए मोदी जी 'भाइयो और बहनो'  बोलते हैं । 

बोला- मेरा काम बताना था सो बता दिया । अब आगे तू है और तेरे कर्म । जैसा कर्म करेगा वैसा फल देंगे अंधभक्त । ये तो मोदी जी हैं ।इनका तो 'ही ही खी खी' का भी पेटेंट है । देखा नहीं, ही ही खी खी करने पर राजीव निगम, भगत राम आदि के फेस बुक बंद हो गए कि नहीं ? 
उनकी तुलना में अत्यंत सामान्य लोगों तक ने अपने अपने छोटे छोटे कामों के पेटेंट करवा रखे हैं । 

हमने पूछा- जैसे ?

बोला- जैसे अनिल कपूर ने अपने एक शब्द 'झक्कास' का, जैकी श्रॉफ ने 'भीड़ू' और अमिताभ बच्चन ने 'देवियो और सज्जनो' का पेटेंट करवा रखा है । 

हमने कहा- तो फिर हम भी 'मास्टर' और 'तोताराम'  का पेटेंट करवा लेते हैं । फिर देखते हैं हमारी स्वीकृति के बिना मोदी जी कैसे कोई 'मास्टर स्ट्रोक' लगाते हैं । और कैसे कोई  'अपने मुँह मियां मिट्ठू' बनता है । 



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Mar 23, 2026

2026-03-01 वेद-विज्ञान

2026-03-01


वेद-विज्ञान

आज तोताराम बहुत खुश था । ​





हमने पूछा- क्या बात है तोताराम, तू तो ऐसे खुश हो रहा है जैसे बुकिंग करवाते ही एक साथ दो सिलेंडर पुराने रेट में मिल गए हों या ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल खरीदने के लिए एक और महिने की स्वीकृति दे दी हो या फिर मोदी जी ने कोरोना काल में हजम किया 18 महिने का डीए रिलीज़् कर दिया हो ।

बोला- छोटी औकात, छोटी कल्पना । गरीब आदमी कल्पना भी करेगा तो दो की जगह तीन रोटी और रूखी की जगह चुपड़ी की । उसे पुंगनूर गाय के घी में मशरूम फ्राई की कल्पना करते हुए भी बैंक का वसूली का नोटिस आने का डर लगता है ।

मैं ऐसी छोटी कल्पना नहीं करता । आज तो सत्य साकार हो गया । हमारे सनातन और वैदिक ज्ञान को राष्ट्रीय मान्यता मिल गई है ।

हमने कहा- मोदी है तो मुमकिन है । आज तो उनका सितारा बुलंद है । दुनिया में कौन है जो उनकी बात टाल दे । फिर यह तो देश का एक छोटा सा बोर्ड या प्रवेश परीक्षा है । वे तो बिना डिग्री और प्रवेश परीक्षा के किसी को भी कुलपति बना दें, बिना किसी यूपीएससी परीक्षा के लेटरल एंट्री से सरकार में संयुक्त सचिव बना दें । फिर भी ज़रा बात को स्पष्ट तो कर जिससे हमें प्रतिक्रिया देने में सुविधा हो । वैसे ऐसे छोटे-मोटे शैक्षणिक मामलों में तो स्मृति ईरानी और सम्राट चौधरी भी प्रतिक्रिया दे सकते हैं ।

बोला-  महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVVY) से वेद-विभूषण (12वीं समकक्ष) उत्तीर्ण छात्र अब एआईसीटीई के मानदंडों के अनुसार इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं जैसे जेईई मेन (JEE Main)आदि में बैठ सकते हैं और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।  

हमने कहा- इसके लिए किसी इंजीनीयरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने और डिग्री लेने की क्या जरूरत है ।देश में बहुत पहले से झाड़-फूँक,मंत्र-तंत्र, गोबर गोमूत्र से सब बीमारियों का इलाज लोग कर ही रहे हैं ।देखा नहीं कोरोना काल में एक संदिग्ध ज्ञान और डिग्री वाले वैदिक ज्ञानी बाबा के काढ़े का देश के स्वास्थ्य मंत्री लोकार्पण कर रहे थे । और तो और खुद मोदी जी ने ऐसे बहुत से प्राचीन भारतीय तथाकथित वेद ज्ञान-विज्ञान के नुस्खों का विज्ञान-भवन से उद्घोष किया है ।

बोला- तुझे पता होना चाहिए कि जब ये यूरोप के लोग भारत में आये थे तो इन्होंने हमारे देश का आर्थिक शोषण ही नहीं किया बल्कि हमारे वेदों का सारा ज्ञान भी निकालकर ले गए और फिर अपने वहाँ उसके आधार पर नए नए आविष्कार किये ।

हमने कहा- मदरसों और संस्कृत पाठशालाओं में केवल रटाया जाता है । प्रश्न, जिज्ञासा, तर्क और प्रयोग का वहाँ कोई विधान नहीं है । और इस प्रकार की शिक्षा से भक्त बनाए जा सकते हैं वैज्ञानिक नहीं । वैसे तो आजकल इंजीनीयरिंग मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटरों में बच्चों को केवल रटाया ही जाता है । तभी तो हमारे यहाँ सी वी रामन के बाद कोई नोबल नहीं प्राप्त कर सका ।

हमारे चाचाजी संस्कृत पाठशाला में ही पढ़े थे । एक बार आजादी से पहले संस्कृत पाठशालाओं में विज्ञान का प्रवेश करवाने के लिए सामान्य विज्ञान की एक छोटी सी पुस्तक शामिल की गई ।जिसे बच्चों ने रट लिया और परीक्षा में प्रश्नों को देखे बिना ही 'बच्चो तुमने रेल का इंजन तो देखा ही होगा । हमारा शरीर भी एक इंजन के समान ही होता है......।' से शुरु करके जितना लिख सकते थे लिख आये । ऐसे में विज्ञान के क्षेत्र में क्या करेंगे ।

बोला- तो बता हमारे यहाँ आकाशवाणी होती थी कि नहीं ? क्या था वह ? आज का रेडियो । संजय दूर से ही धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आँखों देखा हाल सुना रहा था । क्या था वह । टेलीविजन का लाइव टेलेकास्ट । राम का बाण लक्ष्य बेधकर वापिस उनके तरकश में आ जाता था वह गाइडेड मिसाइल ही तो था । हनुमान जी जब चाहे लघु और विराट रूप धरण कर लेते थे । है किसी देश के पास यह टेकनॉलॉजी ? ऋषि मुनि किसी को भी श्राप से भस्म कर देते थे । होलिका के पास फायर प्रूफ चुनरी थी ।शिव बहुत बड़े पशु चिकित्सक और सर्जन थे । उनके लिए गणेश वाली प्लास्टिक सर्जरी और अपने ससुर को बकरे का सिर लगा देना तो मामूली बात थी ।

हमने कहा- लेकिन आज की आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस ?

बोला- विष्णु द्वारा सुंदरी का वेश धारण करके एक ही बर्तन से सुरों और असुरों को शराब और अमृत पिलाने का धोखा करना आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस नहीं तो क्या था ? और तो और आजकल जिस ड्रोन का हल्ला मचा हुआ है उसका आविष्कार तो हमारे द्रोणाचार्य ने किया था । अंग्रेजी में ड्रोन और द्रोण एक ही तरह इसीलिए तो लिखा जाता है ।

हमने कहा- तो फिर मोदी जी को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में इस बात का मुकदमा कर देना चाहिए जो जो देश ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं वे बैक डेट से भारत को उसकी रॉयल्टी दें । ट्रम्प, नेतन याहू, चीन, रूस सबकी हवा खिसक जाएगी । भूल जाएंगे टेरिफ़ वार ।

बोला- मास्टर, तेरी ऊपर की मंजिल अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है । तेरा ज्ञान भी राम भद्राचार्य और सुधांशु त्रिवेदी की तरह अपार है । अब चुपचाप दिल्ली जाकर राष्ट्रहित में मोदी जी को यह महत्वपूर्ण जानकारी दे ही दे । अगर तेरे जैसा कोई ज्ञानी दिल्ली वाली अंतर्राष्ट्रीय ए आई सम्मिट के समय मोदी जी को यह ज्ञान दे देता तो गलघोंटिया वाले ड्रोन कुत्ते को लेकर चीन के आगे शर्मिंदा नहीं होना पड़ता । खैर दिल्ली जा तो सही । क्या पता तुझे किसी इंजीनीयरिंग विश्व विद्यालय का उपकुलपति ही बना दें । ऐसे ज्ञानियों की इस समय देश के शिक्षा संस्थानों में बहुत जरूरत है ।

-रमेश जोशी


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Mar 21, 2026

2026-03-20 चाय और गंगाजल

2026-03-20 
चाय और गंगाजल  

आज तोताराम ने आते ही पूछा- मास्टर, तेरे पास थोड़ा गंगाजल पड़ा हुआ है क्या ?

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हमने कहा- गंगाजल की अभी क्या जरूरत आ पड़ी । अभी तो शतक लगाएंगे और मोदी जी के सपनों का 2047 वाला विकसित भारत भी देखेंगे । वैसे गंगाजल का क्या है ? पीकर मरने के लिए और भी बहुत कुछ उपलब्ध है । कफ सीरप पीकर मर सकता है, देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का पानी पीकर मर सकता है, किसी जुलूस-जलसे के हुड़दंग में जाकर मर सकता है, किसी धनबली या बाहुबली के सुपुत्र की कीमती तेज रफ्तार कार के नीचे आकर मर सकता है, स्वदेसी दारू पीकर मर सकता है, धार्मिक उत्साह और उन्माद में मर सकता है । वैसे भी अमर कौन है ? कुछ नहीं करेगा तो भी एक दिन मरना तय है । इसीलिए गालिब ने ठीक ही कहा है-

मौत का एक दिन मुअय्यन हैं 
नींद क्यों रात भर नहीं आती 

बोला- मुझ पर कौन देश के एक सौ चालीस करोड़ की जिम्मेदारी है और कौनसा पितृभूमि इजराइल के साथ खड़ा होना है जो रात भर नींद नहीं आएगी । मैं तो इसलिए पूछ रहा था कि अब किसी पोस्ट ऑफिस से या कहीं और से कोई गंगाजल मँगवाने का धरम नहीं रहा ।सुना है बनारस में कुछ मुसलमानों ने गंगा में रोजा इफ्तारी करके गंगाजल को अपवित्र कर दिया है । अब उसे पीकर तो जैसा थोड़ा बहुत धर्म बचा होगा वह भी भ्रष्ट हो जाएगा । 

 हमने कहा- तोताराम, धर्म न तो किसी पुस्तक में है और न ही किसी कर्मकांड में । धर्म तो हमारे सत्कर्मों में है, प्रेम और भाईचारे में हैं, शांति और करुणा में है । मिलकर रहेंगे तो शांति से जियेंगे, लड़ेंगे तो दुखी होकर तनाव में मरेंगे । और जहाँ तक पवित्रता की बात है तो वह आस्था की एक अवधारणा है । वैसे जो  हम खाएं पीएं वह वस्तु साफ-सुथरी और स्वच्छ हो । मंदिर के प्रसाद को भक्त पवित्र और पूज्य मान सकता है लेकिन अगर उसमें किसी अखाद्य पदार्थ की मिलावट होगी या वह बासी होगा तो उससे फूड पॉइजनिंग हो जाएगी और फिर मरने से कोई ईश्वर या खुदा नहीं बचा सकेगा । बहुत बार सुनते हैं कि नहीं कि प्रसाद खाने से लोगों को उलटी-दस्त हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा । 

दुनिया में न धर्म बचा है और न कर्म बचा है । अब तो लालच बचा है पब्लिसिटी का, धन का, पद का । इसलिए पवित्रता का चक्कर छोड़ो स्वच्छता का ध्यान रखो । और नदियों को  पूजने का नाटक करने की बजाय उनकी सफाई पर ध्यान देना चाहिए भक्तों को भी और सरकार को भी ।गंगा दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी है इस पर शर्म आनी चाहिए । रिश्ता जोड़ना एक काव्यात्मक और मिथकीय भावना हो सकती है लेकिन उस भावना मात्र से कुछ नहीं होता । उसे व्यवहार में भी उतरना चाहिए ।  वास्तव में  योरप में न तो नदियों को माँ माना जाता है और न ही उनकी आरती उतारी जाती है लेकिन उनकी सफाई का ध्यान रखा जाता है । 

बोला- लेकिन क्या गंगा में इफ्तार पार्टी करना और वीडियो बनाकर डालना क्या उचित है । 

हमने कहा- बिल्कुल नहीं। धर्म और उसके कर्मकांड सबका निजी मामला है । उसे अपने घर या धार्मिक स्थान पर शालीनता और शांति से मनाना चाहिए । किसी प्रकार का अनावश्यक प्रदर्शन, धूम-धड़ाका, डी जे, यात्रा, जुलूस, रँग-बिरंगी रैलियाँ और लफंगई सर्वथा गलत है फिर चाहे वह बहुसंख्यकों द्वारा हो या फिर अल्पसंख्यकों द्वारा । धर्म आतंक, राजनीति और चुनाव का हथियार नहीं होना चाहिए ।

बच्चों को क्या दोष दें । आजकल तो बड़े-बूढ़े भी अपने गू मूत करने तक में अनेक फोटोग्राफरों को बुलाते हैं और अपने फ़ोटो, वीडियो तरह तरह से वाइरल करवाते हैं और फिर उसका चुनाव में फायदा उठाते हैं । अन्यथा क्या नेताओं को हम सरकारी खर्चे पर वी आई पी  तीर्थयात्रा करने के लिए चुनते हैं ?  अरे, तीर्थ यात्रा करनी है तो राजनीति को छोड़ो और जाओ चुपचाप पदयात्रा करते हुए चारों धाम । यह क्या कि अपनी ड्यूटी छोड़कर कभी किसी नदी में स्नान, कभी किसी धार्मिक कॉरीडोर का उद्घाटन, कभी किसी गुफा में ध्यान और साथ में सौ सौ फ़ोटोग्राफर ।
 
मौज मज़ा, पर्यटन, खेल तमाशा और आध्यात्मिकता में कुछ तो अंतर होना चाहिए कि नहीं ? क्या गरबा पहले नहीं होता था लेकिन अब वह बाजार द्वारा संचालित एक प्रदर्शन पूर्ण व्यवसाय हो गया है ।  वही हाल अन्य त्योहारों का हो गया है । इसके लिए जरूरी है कि आध्यात्मिक और सच्चे धार्मिक नेता इस अश्लील प्रदर्शन से अपने अपने धर्मों और समाजों को बचाएं । लेकिन वे क्या बचाएंगे वे तो खुद अपराधों,अय्याशी, प्रदर्शन और राजनीति के कीचड़ में लिथड़े हुए हैं । वैसे सच में तो सभी उत्सव हमें जोश में भी होश कायम रखना सिखाने के लिए होते हैं ।  

बोला- मास्टर, आज तो तूने बिना गैस के ही अपने मन की बात से मुझे मरणांतकता तक पका दिया है । अब कम से कम चाय तो पिला दे । 

हमने कहा- चाय भी पिला देंगे लेकिन समझ ले कि चाय भी गंगाजल की पवित्रता की तरह एक अवधारणात्मक मामला है । किसे पता कि चाय पिलाने वाला जो चाय और उसकी पत्ती को ताज़ा बताकर तुम्हें पिला रहा है वह किसी रेलवे स्टेशन की 65 साल पुरानी चाय हो ।  

बोला- अब बकवास मत कर और जैसी भी है पिला पिलू दे और साथ में सिर दर्द की कोई गोली हो तो वह भी ले आना । 

हमने कहा- तोताराम, कौन किसे गोली दे रहा है अगर यही समझ आ जाए तो कहीं भी लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ेगा । लोग इतने मूर्ख है कि गोली और जुमलों को ही मास्टर स्ट्रोक समझ और समझा देते हैं । 

वैसे तोताराम, गंगा में इफ्तार की इस दुर्घटना से हमारा ध्यान एक और बहुत बड़ी समस्या की ओर जा रहा है कि चलो इफ्तार करने वालों को तो जेल में डाल देंगे, इनके घर पर बुलडोज़र चला देंगे लेकिन गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा के किनारे बसे शहरों गांवों में तो सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सब कुछ खाते पीते हैं । उन सबका मलमूत्र गंगा-जमुना में जाता है । उसे कैसे हिन्दू गंदगी और मुसलमान गंदगी तथा अपवित्र करने वाली और अपवित्र न करने वाली गंदगी के रूप में अलग अलग करके माता स्वरूप धार्मिक नदियों की पवित्रता को बचाएंगे । 

 

बोला- उसकी चिंता मत कर । उसके लिए तो हमारे पास कपड़ों से पहचानने वाली तकनीक की तरह गंदगी के धर्म को पहचानने की तकनीक भी है ।

-रमेश जोशी 


  
  


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Mar 19, 2026

2026-03-19 आज चाय पी रहा है, कल को.....

2026-03-19 

आज चाय पी रहा है, कल को...... 

  

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राजस्थान में बारिश, आंधी और ओले गिरने का अलर्ट तो तीन चार दिन से था लेकिन वह सच रात को हुआ । ओले तो बहुत कम और छोटे छोटे गिरे लेकिन बारिश अच्छी हो गई । दो दिन पहले रात को खिड़की खोलनी पड़ती थी । रात उसे बंद करना पड़ा । बीच में उठकर बेड में से मोटा कंबल निकालना पड़ा । अच्छी नींद आई कुछ वैसी ही जैसी राहुल की सदस्यता रद्द करके मोदी जी और महुआ मोइत्रा की सदस्यता रद्द होने निशिकांत दुबे की आत्मा को शांति मिली थी । हाँ, खटर-पटर में नींद का जो घाटा हुआ वह सुबह देर से आँख खुलने से पूरा हो गया । 

सुबह उठकर देखा तो महिनों से रुकी हुई नाली बारिश के पानी के बहाव से साफ हो चुकी थी जैसे मोदी जी के आने की तैयारी में सब कुछ फिटफाट हो जाता है । बारिश के कारण दूध वाला भी नहीं आया । लेकिन कुछ ठंड होने से चाय का मूड बना तो नीबू वाली चाय ही बनाकर बरामदे में ले आये । लुंगी बनियान पर एक चद्दर डाले उकड़ू बैठे चाय की एक चुस्की ही ली थी कि तोताराम की आवाज आई- मास्टर कुछ तो लिहाज कर लिया कर । 

हमने पूछा- किसका ? यहाँ कौन हमारा जेठ या ससुर बैठा है जिससे घूँघट करना है । और फिर हम कौन भाजपा नेता मनोहर लाल धाकड़ की तरह हाई वे पर ही धकड़पना दिखा रहे हैं । चाय ही तो पी रहे हैं ।  

बोला- आज तू बरामदे में ऐसे उकड़ू बैठकर चाय पी रहा है, कल को राहुल गांधी की तरह संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पकौड़ों का सेवन करेगा । दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की क्या इज्जत रह जाएगी । 

हमने कहा- हाँ,हाँ संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने से देश का लोकतंत्र बदनाम होता है  और् संसद में किसी को कटुआ, भड़ुआ, आतंकवादी कहने से दुनिया में भारत के वसुधैव कुटुम्बकं का संदेश जाता है । और अब तो अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता आयोग द्वारा भारत में सांप्रदायिकता और उसमें आर एस एस की भूमिका पर चर्चा होने लगी है । वह क्या देश के लोकतंत्र के लिए शर्म की बात नहीं है ? 

बोला- वह् तो भारत के दुनिया में बजने वाले डंके से जलने वालों का षड्यन्त्र है ।  लेकिन जब संसद की कैंटीन में अच्छी और सस्ती चाय, पकौड़े, बिस्किट सबकी व्यवस्था है, टेबल कुर्सी हैं तो सीढ़ियों पर चाय का क्या अर्थ है ?

हमने कहा- हो सकता है चाय पर चर्चा कर रहे हों क्योंकि अंदर तो ओम बिरला बोलने नहीं देते ।और चाय के बिना चर्चा हो नहीं सकती । मोदी जी भी तो चर्चा करने के लिए ओबामा को चाय बनाकर पिला रहे थे कि नहीं । तो चाय पीने में क्या बुराई है ?

बोला- चाय बना रहे थे थे लेकिन तूने सलीका नहीं देखा । उसके लिए विशेष रूप से सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहना था । आज भी उसकी दुनिया में चर्चा होती है । और कुछ नहीं तो इन काँग्रेसियों को मोदी जी से कम से कम इतना सलीका तो सीख ही लेना चाहिए । 

हमने कहा- क्या जर्सी गाय , कांग्रेस की विधवा, 50 करोड़ की गर्ल, फ्रेंड, शूर्पनखा  जैसे शब्दों से देश के लोकतंत्र का सम्मान बढ़ता है ?संसद की सीढ़ियों पर चाय पीने में ऐसा क्या हो गया जो तुम लोगों को लोकतंत्र पर खतरा नजर आने लगा है । 

बोला- इसमें एक और बड़ा षड्यन्त्र छुपा हुआ । आज चाय पी रहा है । कल को चाय बनाने लगेगा, परसों बेचने लगेगा और ऐसे करते करते देश का प्रधानमंत्री बन जाएगा । यह सब अनैतिक तरीकों से मोदी जी की कुर्सी हथियाने की चाल है लेकिन शाह साहब ऐसा नहीं होने देंगे । राहुल पर देशद्रोह का का केस लगा देंगे । 

हमने कहा- लेकिन साबित कैसे करेंगे ?

बोला- साबित करने की क्या जरूरत है । और बहुत से लोगों की तरह अनंत काल तक हिरासत में तो रख ही सकते हैं ।

हमने कहा- तोताराम, ये सब तो गाली और भीख की तरह ओ बी सी के नाम से सहानुभूति वोट बटोरने के नाटक हैं अन्यथा चाय से ही कुछ होना होता तो हम लोग 60 साल से चाय से चिपके हुए हैं लेकिन ‘भाजपा जिला वृद्ध मोर्चा के मोहल्ला प्रवक्ता’  तक तो बन नहीं पाए ।  

  



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Mar 18, 2026

2026-03-17 मोदी जी और असंवैधानिकता

2026-03-17 

 मोदी जी और असंवैधानिकता 


आज जैसे ही तोताराम आया हमने उसे लपक लिया, पूछा- यह क्या हो रहा है मोदी जी के राज में ?

बोला- क्या हो रहा है ? सब ठीक तो चल रहा है । गैस की कोई किल्लत नहीं,  कानून व्यवस्था दुरुस्त,  दुनिया में डंका । और क्या चाहिए ?

हमने कहा- मोदी के लोकसभा क्षेत्र में संविधान का उल्लंघन जो हो रहा है । ​

 


बोला- और किसी की बात तो मैं नहीं कह सकता लेकिन मोदी जी के रहते और चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन संविधान का उल्लंघन नहीं हो सकता । क्या कभी तू ने भारत के किसी प्रधानमंत्री को संसद की सीढ़ियों पर इस माथा टेकते देखा था ? और अब तो उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए संसद में सेंगोल भी रखवा लिया है । वह सेंगोल जिसे नेहरू जी ने संग्रहालय में रखवा दिया था और कुछ राष्ट्रप्रेमियों के अनुसार वे जिसे वॉकिंग स्टिक के रूप में काम में लिया करते थे । जो भी संविधान की ओर आँख उठाकर भी देखेगा मोदी जी इसी सेंगोल से उसकी ठुकाई कर देंगे । 

हमने कहा- लेकिन सेंगोल तो राजदंड का प्रतीक है, लोकतंत्र का नहीं । और फिर जब मोदी जी लोगों को संविधान की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखने देंगे तो लोग उसे पढ़ेंगे कैसे ? और पढ़े बिना उस पर आचरण कैसे करेंगे ? फिर तो जो मोदी जी बताएंगे वही संविधान माना जाएगा ।  

बोला- मास्टर, बात को इधर उधर नहीं भटकाना चाहिए । बात संविधान के उल्लंघन की हो रही थी तो बता मोदी जी ने कैसे संविधान का उल्लंघन किया या करवाया ? 

हमने कहा- हमारे संविधान में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की बात कही गई है लेकिन जब मोदी जी के चुनाव क्षेत्र बनारस में कुछ जिज्ञासु बालक नाली पर गैस का चूल्हा रखकर चाय बनाने का प्रयोग कर रहे थे तो पुलिस ने उनके बर्तन भांडे छीन लिए और भगा दिया । अगर ऐसे ही हम बच्चों की जिज्ञासा का दमन करते रहेंगे तो देश में विज्ञान का विकास कैसे होगा ? 

बोला- विज्ञान का विकास तो इस देश में बहुत पहले से ही हुआ हुआ है । वेदों का अध्ययन करना चाहिये और यूरोप वालों के निकाल लेने के बाद अगर कुछ बचा हुआ है तो पहले उसे निकालना चाहिए इससे पहले कि ये ईसाई लोग उसे निकाल कर यूरोप ले जाएँ । यह नाली वाला तो कहीं भागा जा रहा है क्या ?  इसे तो कभी भी निकाल लेंगे । 

वैसे भी राष्ट्रवादी पार्टी होने के कारण भारतीय ज्ञान परंपरा पर भाजपा का एकाधिकार है । देख ले प्रमाण- 

भारतीय ज्ञान परंपरा 

 BHARATIIYA     JNYAN    PARAMPARA 

 B J P     

भा  ज  पा 


हमने कहा- तोताराम, यह तो तूने बिल्कुल मोदी जी वाला ज्ञान पेल दिया ।  लेकिन बच्चों को इस तरह हतोत्साहित करना भी तो उचित नहीं । इससे वैज्ञानिक सोच का विकास रुकता है । 

बोला- ठीक है लेकिन इससे अराजकता फैलने का भी तो डर है । इस आविष्कार का तो मोदी जी का पेटेंट है । यह नियमों का उल्लंघन है ।इस प्रकार गैस बनाने से पहले मोदी जी से पूछना चाहिए या फिर नियमानुसार सरकार को रॉयल्टी देनी चाहिए । इस प्रकार ये अराजक तत्व आज नाली से बिना रायल्टी दिए गैस बना रहे हैं, कल को बिना रायल्टी दिए कहीं भी कुएं खोदकर तेल निकालने लग जाएंगे । नाली और नाली में प्रवाहित होने वाला सनातन पदार्थ राष्ट्र की संपत्ति है । यह राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी का मामला भी बनता है । इससे पहले भी इनका वह नेता राहुल गाँधी सारे देश में मोहब्बत की दुकानें खोलता फिर रहा था लेकिन आज तक सरकार को न जी एस टी दिया और न ही जमीन को  रेसिडेन्शियल से बिजनेस में कन्वर्ट करवाया । थोड़े दिन रुक जा उस पर भी इनकम टेक्स और अतिक्रमण का केस किया जाएगा । ​

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वैसे जब तक यह गैस उत्पादक खाद्य पदार्थ किसी के पेट में है तब तक व्यक्ति का है लेकिन गटर में प्रवाहित होने के बाद वह राष्ट्र की संपत्ति हो जाता है । अगर किसी को व्यक्तिगत रूप से गैस बनानी है तो उसे अपने आगे-पीछे पाइप लगाकर अपने घर में ही गैस बनानी चाहिए । इस तरह नाली पर सामान रखकर सड़क रोकना अतिक्रमण है । यह तो योगी जी दयालुता है जो बुलडोज़र नहीं चलवाया । देखा किस प्रेम और शालीनता से मुस्कुराते हुए सामान ले जा रहे हैं ।  

हमने कहा- न्यायालय ने भी तो अनुराग ठाकुर के मुसलमानों के साथ सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने वाले 'गोली मारो' वाले बयान पर कोई संज्ञान नहीं लिया था क्योंकि उन्होंने यह वाक्यांश प्रेमपूर्ववक मुस्कुराते हुए कहा था । 

-रमेश जोशी  

          

     



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Mar 16, 2026

2026-03-01 बोल, थैंक यू मोदी जी


2026-03-01 

बोल, थैंक यू मोदी जी 


आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया-  'बोल- थैंक यू मोदी जी' ।  वैसे ही जैसे आजकल के नए नए राम भक्त किसी भी मुसलमान को घेरकर कहते हैं- 'बोल, जय श्री राम' । 

हमने कहा- तोताराम, हम इतने मजबूर नहीं हैं कि 200 रुपए, नाश्ते का एक पैकेट और एक बीड़ी का बंडल/पाँच गुटके/ कोल्ड ड्रिंक लेकर किसी चुनावी रैली में जाएँ और 'मोदी-मोदी' चिल्लाएँ और न ही इतने डरपोक हैं कि किसी भी ऐरे-गैरे के कहने से किसी को धन्यवाद देने लगें । हाँ, किसी ने धन्यवाद के लायक कुछ किया हो तो हम इतने कृतघ्न भी नहीं हैं कि धन्यवाद न कहें । लेकिन मोदी जी ने हमारे लिए या देश के लिए कौनसा ऐसा काम किया है जिसके लिए 'थैंक यू मोदी जी' बोलें । 

बोला- सीधे सीधे तेरे लिए नहीं किया तो क्या देश के किसी भी भाग के लिए कुछ भी अच्छा किया है तो धन्यवाद तो बनता ही है । तेरे लिए नहीं, राजस्थान के लिए नहीं तो केरल के लिए तो किया ही है ना । केरल का नाम केरलम् करने को मंजूरी दे तो दी । 

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हमने पूछा- पहली बात तो यह कि इस प्रकार नाम बदलने से क्या होता है । मूर्ख को मूर्खम् , दुष्ट को दुष्टम्, मूत्र को मूत्रम् करने से क्या उनका चरित्र या अवगुणों में कोई कमी आ जाएगी ? 

बोला- अगर मोदी जी को तेरे इस जुमले का पता चल जाए तो वे शीघ्र ही केरल में होने वाले चुनाव में इसे मुद्दा बना सकते हैं कि कुछ कांग्रेसी केरल को दुष्ट और मूर्ख बता रहे हैं । वैसे ही जैसे राष्ट्रपति के बंगाल में अपमान की आड़ में ध्रुवीकरण करने लगे ।
 
हमने कहा- लेकिन यह भूल गए कि खुद की पार्टी ने राम मंदिर शिलापूजन,राम लला की प्राणप्रतिष्ठा और संसद भवन के उद्घाटन में दलित और आदिवासी राष्ट्रपतियों को उपेक्षित किया था । लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे । और फिर केरल के लोग पढ़े लिखे और समझदार हैं । वे महाराष्ट्र,  बिहार, दिल्ली वालों की तरह दो चार हजार में बिकने वाले नहीं है ।  

वैसे केरलं करने से कुछ होना हवाना नहीं फिर भी तुझे बता दें  कि यह प्रस्ताव 2024 का है जिसे आज चुनाव से ठीक पहले स्वीकार करके एक घटिया केरल-प्रेम का प्रदर्शन किया जा रहा है । केरल का सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, बौद्धिकता, काम करने की शिद्दत पूरे देश के लिए अनुकरणीय है लेकिन उससे कोई कुछ सीखना नहीं चाहता । 

खैर चल, आज तुझे इसी बात पर गिलासम् में चायम्  पिलाएंगे  । 

बोला- वही सड़ियल चाय । 

हमने कहा- तो बस, यह 'थैंक यू मोदी जी' भी वैसे ही है जैसे केरल का केरलं या पोर्टब्लेयर का श्री विजयपुरम हो जाना । अब भी श्री विजयपुरम अर्थात पोर्टब्लेयर से भेजी गई किताब उसी तरह 20 दिन में आती है जैसे 40-50 साल पहले आती थी । वे सोचते हैं श्रीविजयपुरम करने से तमिलनाडु के जागरूक नागरिक मूर्ख बन जाएंगे । वे काँवड़िए नहीं हैं । 
और जहाँ तक केरल की बात है तो केरलं दो शब्दों से बना है केरा और आलम अर्थात नारियल की भूमि और दूसरा  "चेर - स्थल", 'कीचड़' और "अलम-प्रदेश" शब्दों के योग से चेरलम बना था, जो बाद में केरल बन गया। केरल शब्द का एक और अर्थ है : - वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो। समुद्र और पर्वत के संगम स्थान को भी केरल कहा जाता है। 

बोला- जब कीचड़ है तो कमल भी खिलकर ही रहेगा । 

हमने कहा- हाँ, हाँ कमल खिलेगा लेकिन संप्रदायिकता, नस्ल, जाति, धर्म वाला कमल नहीं बल्कि इस कीचड़ से नितांत असंपकृत, अप्रभावित भारतीय माइ थोलॉजी का एक शानदार प्रतीक, एक अद्भुत मिथक- कमल  । खिलेगा क्या ? सौभाग्य से आज भी खिला हुआ है और खिला रहेगा । यही तो हमारे संविधान की आत्मा है । सद्भाव । 

-रमेश जोशी  

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Mar 15, 2026

2026-03-15 आपदा में अवसर


2026-03-15 
आपदा में अवसर 








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आज तोताराम अपेक्षाकृत जल्दी आ गया । 

हमने कहा- तोताराम, ठीक है मुफ़्त के माल पर बड़े बड़े संत भी पिल पड़ते हैं लेकिन बाद में भुगतना तो खुद को ही पड़ता है । अन्य दिनों की बजाय आदमी दीर्घ शंका के लिए जल्दी जाना पड़ता है । कहाँ भागी जा रही थी तेरी चाय । 

बोला- मास्टर, चाय की बात नहीं है । एक अच्छी खबर है । आपदा में अवसर ।

हमने कहा- आपदा में अवसर व्यापारियों के लिए होते हैं । वे अपने पास पड़े पुराने स्टॉक की कालाबाजारी करने लग जाते हैं । अभी इजराइल वाले लफड़े में देख ले । आपदा का फायदा उठाकर बिकने लगा कि नहीं सिलेंडर तीन तीन हजार में । अदानी ने भी अपनी गैस के दाम बढ़ा दिए कि नहीं । और मोदी जी ने भी प्रति सिलेंडर 60 रुपये बढ़ा ही दिए । 

बोला- मोदी जी कोई व्यापारी थोड़े हैं । वे तो सब कुछ राष्ट्रहित में करते हैं । यहाँ तक कि दिन में दस-दस ड्रेसें बदलना भी वे भी भारत की गरीब राष्ट्र की इमेज सुधारने के लिए करते हैं अन्यथा वे तो संत हैं । उनके लिए तो एक चीवर ही पर्याप्त है । देखा नहीं था केदारनाथ की गुफा में और गंगा में स्नान करते हुए मात्र एक भगवा वस्त्र में । 

हमने कहा- देख लेना जब अमेरिका इज्जत बचाने के लिए ईरान से खिसक लेना तब भी मोदी जी 60 रुपये की यह वृद्धि वापिस नहीं लेंगे । जी एस टी उत्सव की तरह दस रुपये घटाकर फिर कोई बचत उत्सव जरूर मना लेंगे ।  

बोला- छोड़, ये सब बड़े लोगों की बातें हैं । मैं तो अपने लिए आपदा में अवसर की बात कर रहा था । 

हमने कहा- हमारे लिए तो आपदाएं ही होती हैं । अवसर तो व्यापारियों और नेताओं के लिए होते हैं । राम मंदिर को ही देख ले ।राम मंदिर और विकास के नाम पर लोगों की ज़मीनें कब्जा लीं और दुकाने उजाड़ दीं और बड़े व्यापारियों को होटलों के लिए दे दीं । नेताओं को राम के नाम पर गद्दी मिल गई और गुजरात के व्यापारियों को धंधा । दोनों की बंदरबाँट । और भगवान और सच्चे भक्तों को क्या मिला ? मिलावटी प्रसाद । ये तो प्रभु कुछ खाते नहीं हैं अन्यथा अब तक पेट स्थायी रूप से खराब हो गया होता ।

बोला- अपने मन की बात छोड़ और काम की बात सुन । अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि ईरान के दस लोगों के बारे में खबर देने वाले को दस मिलियन डालर का इनाम दिया जाएगा । अब हम लोगों को गैस के सिलेंडर का चक्कर छोड़कर ईरान के अमेरिका के लिए वांटेड लोगों का पता लगाना चाहिए । वैसे भी मोदी जी ने कह दिया है कि गैस की कोई समस्या नहीं है । और कुछ कमी हुई तो नाले से निकाल लेंगे । 

हमने कहा- हमें जब बैंक का क्लर्क सीट पर नहीं मिलता तो यह तक तो पता लगा नहीं सकते कि वह छुट्टी पर है या इधर उधर चाय या पूजा के बहाने मटरगश्ती कर रहा है । मोदी जी तक का तो पता नहीं लगा सकते कि मणिपुर और संसद की महत्वपूर्ण कार्यवाही छोड़कर इजराइल गए हैं या किसी गुफा में ध्यान लगा रहे हैं या चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ईरान के नेताओं का पता लगा लेंगे । अंधभक्तों की तरह दुनिया के नक्शे में ईरान ढूँढ़ने में चार दिन लग जाएंगे । यह  कोई मस्जिद में नीचे मंदिर ढूँढ़ने जितना आसान थोड़े है । 

बोला- जैसे मोदी जी कपड़े देखकर आतंकवादियों को पहचान लेते हैं तो अपन भी किसी काली पगड़ी वाले का पता दे देंगे या ट्रम्प से उन दस लोगों का कोई अंतःवस्त्र या दाढ़ी का बाल मँगवा लेंगे और उससे कोई टोना टोटका या मारण मंत्र का जाप कर देंगे तो वहीं का वहीं मर जाएगा । अपने सतातन में तो ऐसे बहुत मिसाइलों का ज्ञान भरा पड़ा है । पहले भी तो हमारे यहाँ के भक्तों ने यज्ञ करके ट्रम्प को चुनाव जिताया था कि नहीं ? और कुछ नहीं तो इस बहाने कुछ एडवांस ही ट्रम्प से कबाड़ लेंगे । काम नहीं हुआ तो वापिस कर देंगे । 

हमने कहा- तू ट्रम्प को इतना भोला समझता है क्या ? वह कोई गांधी नेहरू की तरह भला आदमी नहीं है । उसका इतिहास सुनेगा तो तेरी तेरी अकल ठिकाने आ जाएगी । वह नेता नहीं प्रॉपर्टी डीलर है । उसे अपनी राजनीति के थ्रू अपने बेटे को दुनिया में बिजनेस दिलवाना है । मोदी जी खुद को बड़ा चतुर समझते थे । उनसे ही अमेरिका में अपने लिए चुनाव प्रचार करवा लिया और अब उन्हीं को बर्फ में लगा दिया कि नहीं ? पता नहीं, किस किस फ़ाइल के चक्कर में ऐसा फँसा दिया कि अब थूक सूख रहा है, जुबान नहीं खुल रही है । रूस से अच्छी भली दोस्ती थी, सस्ता तेल मिल रहा था । ईरान से रुपये में डील हो रही थी । सब गड़बड़ करवा दिया । अब खरीदो महंगा तेल और पिटवाओ दुनिया में भद्द । 

बोला- फिर भी किसी न किसी तरह यह खबर उड़वा दें कि तोताराम और मास्टर ने ईरान के दस लोगों की अमेरिका को खबर देने का ठेका लिया तो कम से कम एक बार चर्चा तो वाइरल हो जाएगी । निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर की तरह चर्चित तो हो जाएंगे । 

हमने कहा- ये फालतू बातें छोड़ । चाय पीकर गैस एजेंसी का एक चक्कर लगा आते हैं । क्या पता बुकिंग हो ही जाए । 

बोला- आज संडे है । कल सोचेंगे । अब तो निश्चिंत होकर चाय पर बकवास करते हैं । और 2047 तक भारत को विकसित बनाने का ड्राफ्ट तैयार करते हैं । 

हमने कहा- कोई बात नहीं  । वैसे यह काम मोदी जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कर दिया था । अब तो बस इंतजार कर उस दिन का अगर प्रभु तब तक जिंदा रखे तो । मोदी जी की बात और है वे तो ...... । 

-रमेश जोशी 
 

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Mar 13, 2026

2026-03-13 गटर-ज्ञान का मोदी-मंत्रा


2026-03-13 

गटर-ज्ञान का मोदी-मंत्रा 

आज सवेरे सवेरे तोताराम नहीं आया । कोई दस बजे उसका फोन आया । बोला- मास्टर, कहे तो खाना बनाने का सामान लेकर हम दोनों आ जाएँ ? खाना बनेगा तब तक गैस के लिए एक और कोशिश कर आएंगे । 

हमने कहा- तोताराम, आज तूने बहुत घटिया बात कर दी । नहीं हैं हम अंबानी की तरह अमेरिका में रिफाइनरी लगाने के लिए 300 अरब डॉलर की औकात वाले लेकिन इतने गए गुजरे भी नहीं कि तुम दोनों की चार रोटी के लिए पाव चून न जुटे । नेहरू के जमाने के मास्टर हैं । पेंशन मिल रही है । मोदी जी के जमाने में लगे होते तो बात और थी । पेंशन क्या पूरी तनख्वाह के लाले पड़ जाते । 

तोताराम और मैना दोनों आ गए । पत्नी और मैना रसोई में खाना बनाने और अर्थव्यवस्था से लेकर विदेश नीति तक पर अपने हिसाब से भारत का डंका बजाने लगीं । 

अवसर का लाभ उठाते हुए हमने तोताराम से राष्ट्रहित में चर्चा की शुरुआत की । पूछा- तोताराम, इजराइल और ट्रम्प की इस खुराफाती आपदा में क्या हम कोई अवसर खोज सकते हैं ? क्या इस ऊर्जा संकट में हम अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक ज्ञान में से कुछ सामयिक उपाय खोज निकाल सकते हैं ?

बोला- हाँ, मास्टर कोशिश तो करनी ही चाहिए । वैसे ये योरप के ईसाई वेदों में से सारा ज्ञान निकाल कर ले गए । 

हमने कहा- फिर भी कुछ न कुछ बचा हो तो खुरचकर खुरचाकर देखना तो चाहिए । 

बोला- हाँ, कोशिश हो तो रही है देश के विभिन्न आईआई टी में । की जा रही है गोबर और गोमूत्र से अक्षय ऊर्जा स्रोत ढूँढ़ने की कोशिशें । 

हमने कहा- वैसे इस समय गाँधी जी के सत्य के प्रयोग की तरह मोदी जी के गटर-गैस-ज्ञान के प्रयोग करने में क्या बुराई है । 





​ ​

बोला- बुराई तो कुछ नहीं है लेकिन आजकल इन विपक्षियों और यूट्यूब वालों के पास मोदी जी के नाली में पाइप डालकर चाय बनाने वाले बयान का मजाक उड़ाने के अलावा और कोई कार्यक्रम है ही नहीं ।
 
हमने कहा- तोताराम, शुरू शुरू में नया सोचने और करने वाले प्रतिभाशाली लोगों का मज़ाक उड़ाया ही जाता है लेकिन मोदी जी के इस ज्ञान में नितांत झूठ भी तो नहीं । 

बोला- और क्या ? जेम्स वाट ने चाय की भाप से उछलते हुए ढक्कन को देखकर भाप का इंजन बना दिया, न्यूटन ने पेड़ से गिरते सेव को देखकर गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत खोज लिया । मोदी जी भी जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति है ।स्टेशन पर चाय बेचते, 35 साल भीख माँगते और अपने  ज्योतिष ज्ञान से ट्रेन की भीड़भाड़ में सीट कबाड़ लेने वाले मोदी जी के पास लौकिक ज्ञान का अपार भंडार है । यह ठीक है कि उनकी डिग्री संदेहास्पद है लेकिन वाल्मीकि के पास कौन सी डिग्री थी । एकलव्य ने भी अपने स्वानुभाव और लगन से क्या धनुर्विद्या नहीं सीख ली थी ? वे झोला उठाकर चल दें उससे पहले देश को उनके ज्ञान का लाभ उठा लेना चाहिए । नहीं तो यह ज्ञान उनके साथ ही चला जाएगा । 

और फिर हमारे विद्वान लोग तो कहते आये हैं-

उत्तम विद्या लीजिए जदपि नीच पे होय 
पर्यो अपावन ठौर में कंचन तजे न कोय ।।  

हमने कहा- वैसे नाली की गैस लेकर चाय बनाने की बात कोई निराधार नहीं है । जीवों से निकलने वाले मल, मूत्र, डकार, पाद आदि में ज्वलनशील मिथेन गैस होती है । उसका कैसे उपयोग किया जाए यही तो प्रश्न है । वैज्ञानिकों का यही तो काम है कि किसी भी अवधारणा पर काम करें । हमें याद है जब हम 1985 से 2001 तक दिल्ली में थे तब लाजपतनगर में गटर से कुकिंग गैस बनाने के प्लांट की बात चली थी । गोबर गैस प्लांट क्या झूठ हैं ? 
और फिर मोदी जी तो नीच भी नहीं है । महान ज्ञानी, विनम्र, संकोची, और संत स्वभाव वाले व्यक्ति हैं । उनसे ज्ञान लेने में क्या बुराई है ? ट्रम्प के शांति प्रयासों का लाभ क्या हमने ऑपरेशन सिंदूर में नहीं उठाया ? और क्या अब हम इज़राइल और ट्रम्प से साथ मिलकर विश्वशान्ति के लिए काम नहीं कर रहे ?

बोला- वैसे मास्टर, जमुना में दुनिया भर का कूड़ा भरा है, गाजीपुर में दुनिया के सबसे बड़े कूड़े के पहाड़ खड़े हैं । इस संकट के समय में क्या उसे जलाकर खाना नहीं बनाया जा सकता ? 
लेकिन विघ्नसंतोषी लोग पर्यावरण के नाम से फिर मोदी जी को घेरने लगेंगे । 

हमने कहा- तोताराम, ये प्रदूषण वगैरह भी भरे पेट वालों के शगूफ़े हैं । प्रदूषण से कहाँ तक बचोगे ? अरे, दुनिया में हर समय जाने क्या क्या जलता रहता है ? और नहीं तो लोग मोदी जी के दुनिया में बजते डंके से ही जले जा रहे हैं । अरे, जब संसद में विधूड़ी के कटुवे, भड़ुए, मुल्ले और आतंकवादी से प्रदूषण नहीं फैला तो गाजीपुर का कूड़ा जलाने के क्या हो जाएगा । अच्छा है ऊर्जा की ऊर्जा और सफाई की सफाई । 

बोला- विधूड़ी का स्टेटमेंट तो प्रदूषण नहीं बल्कि सनातन का सार और हिन्दू राष्ट्र का जयघोष था । 

-रमेश जोशी 


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2026-03-12 क्षमा वीरस्य भूषणम्


2026-03-12 

क्षमा वीरस्य भूषणम् 

आज सुबह तोताराम नहीं आया । नहीं आया तो क्या हुआ ? यह कोई मोदी जी के 'मन की बात' तो है नहीं जिसके महिने में एक बार न होने से महिना पूरा नहीं होगा, पेंशन नहीं मिलेगी या पानी-बिजली का बिल नहीं आएगा । सो तोताराम के बिना भी हमारे सभी काम यथावत पूरे हुए । रात को आठ बजे जैसे ही सोने के लिए लेटे तो दूर जयपुर रोड़ से घड़घड की आवाज आने लगी । और शनैः शनैः तेज होने लगी । यह कर्ण कटु ध्वनि अगर जल्दी से नजदीक आकर गुजर जाती तो पीछा छूटता लेकिन नहीं । यह तो हिन्दुत्व के रक्षक प्रचंड भक्तों के डी जे की तरह पीछा ही नहीं छोड़ रही थी । लग रहा था कि यह ध्वनि सीधे सीधे नजदीक नहीं आ रही थी बल्कि टेढ़ी-मेढ़ी चलकर आ रही थी । कुछ देर बाद स्थिति साफ हुई कि कोई सड़क पर गैस का सिलेंडर लुढ़काता ला रहा है ।और लुढ़काने वाला सिलेंडर को सीधा नहीं लुढ़का पा रहा है । 

जब परेशान हो गए तो सोचा कि बाहर निकल कर इस व्यक्ति की सिलेंडर लुढ़काने में कुछ सहायता कर दें जिससे यह गुजर जाए तो हम भी सोएं । बाहर निकले तो देखा कि तोताराम सिलेंडर लुढ़काता ला रहा है । 

यह कौनसा समय है सिलेंडर लाने का ? 

पूछा- इस समय कौन सी गैस एजेंसी खुलती है ? और फिर तुझे क्या जरूरत थी एजेंसी से घर तक सिलेंडर लाने की ? अब सिलेंडर हमारे यहाँ रख दे । चाय-वाय और चर्चा कुछ नहीं; सीधे घर जा । सुबह इसे तेरे घर तक पहुँचाने की कोई व्यवस्था करेंगे ।  मोदी जी के राज में सब कुछ सुव्यवस्थित चल तो रहा है ।

बोला- आज दोपहर में खत्म हो गया था । फोन किया तो एजेंसी वाले ने उठाया नहीं । ऑनलाइन बुक करवाया तो पता चला कि सर्वर डाउन है । तो सोचा कि ईरान इजराइल के झगड़े में क्या पता क्या चक्कर पड़ जाए । सोचा खुद ही ले आऊँ लेकिन लाइन में लगे-लगे रात हो गई मगर काम नहीं हुआ । 

हमने कहा- सरकार के तो वक्तव्य आ रहे हैं कि कोई समस्या नहीं है तो फिर यह क्या है ?

बोला- सच बताऊँ मास्टर, सारे राष्ट्र प्रेम, हिन्दुत्व और मोदी भक्ति के बावजूद अब लगने लगा है कि काम मोदी जी के बस का है नहीं ।हर खाते में 15-15 लाख, हर साल दो करोड़ नौकरियां, नोट बंदी, कोरोना, तालाबंदी, जी एस टी, ऑपरेशन सिंदूर सब में पोल खुलती गई । अब तो इनकी हालत वह हो गई है जैसे किसी ने भेड़ के कान पर जूती रख दी हो । एक दम मीनकुमारी की तरह 'मैं चुप रहूँगी' । 




हमने कहा- अभी तो तू कुछ कोयले पड़े हैं वे ले जा । कल तू और मैना दोनों हमारे यहाँ खाना खा लेना । फिर देखते हैं । हो सकता है मोदी जी यूक्रेन और रूस के वार के समय की तरह  'पापा, मोदी जी ने वार रुकवा दी' जैसा कोई चमत्कार कर दें । 

बोला- ये सब मीडिया का हैड लाइन मनेजमेंट है और कुछ नहीं । अगर कुछ दम होता तो जब ट्रम्प ने 80 बार कहा कि मैंने सीजफायर करवाया तब कुछ बोलते या खामेनाई की हत्या के बाद या वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अपहरण पर कुछ बोलते लेकिन कुछ नहीं बोले । जुबान तालू से चिपक गई । अब तो जब ट्रम्प को झख मारकर वियतनाम की तरह ईरान से भागना पड़ेगा तभी कुछ रास्ता निकलेगा । 

हमने कहा- हमें तो तब भी कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि वह एपस्टीन फ़ाइल वाला भी कोई न कोई गहरा झंझट फँसा हुआ लगता है । रूस से अपने स्तर पर सस्ता तेल तक नहीं खरीद पा रहे हैं । उसके लिए भी ट्रम्प की परमीशन चाहिए । गजब दुर्गति, बेइज्जती और जग हँसाई हो रही है देश की ।अब तो इन्हें चाहिए कि हिम्मत करके देश को सारा सच बता दें । माफी माँग लें । सच बोलने से सब पाप धुल जाते हैं और इस देश की जनता बहुत दयालु है । माफ भी कर देगी और साथ भी देगी लेकिन कोई सच बोलने और माफी मांगने का साहस दिखाए तो सही । 

बोला- मास्टर, क्षमा माँगना और क्षमा करना दोनों ही वीरता के काम हैं । तभी कहा है- क्षमा वीरस्य भूषणम् । 

-रमेश जोशी 

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Mar 9, 2026

2026-03-09 फीकी चाय : मीठी चाय

2026-03-09 

 फीकी चाय : मीठी चाय 

आज तोताराम को आये और बैठे कई देर हो गई । बैठने की मुद्रा कई बार बदलने के बाद बोला- तो क्या आज बिना किसी कार्यवाही के ही बरामदा संसद का सत्रावसान हो जाएगा ? 

हमने कहा- आज तुम्हारी उसी तरह से कोई आवश्यकता नहीं है जिस प्रकार भारत की संसद में विपक्ष की । जब तू बोलने का अवसर न दिए जाने के कारण हल्ला मचा कर बहिर्गमन कर जाएगा तब हम सर्वसम्मति से बिल पास करवा लेंगे । 

बोला- मतलब ?

हमने कहा- मतलब यह कि आज चीनी नहीं है । थोड़ी देर में कोने वाले चौधरी की दुकान खुल जाएगी तब चीनी ले आएंगे । दुकान आठ बजे खुलती है और तब तक तुझे रुकना नहीं है । वैसे तू चाय पीता ही चीनी के चक्कर में है , फीकी चाय या ब्लेक कॉफी तो बुद्धिजीवी पीते हैं और तुम भक्त लोगों का बुद्धि के क्या लेना देना । 

बोला- फीकी या मीठी, चाय या कॉफी पिला या नहीं लेकिन हमारी बुद्धि पर शक ठीक नहीं है । वैसे तूने कोने वाले चौधरी की दुकान से चीनी लाने के लिए परमीशन ले ली है या नहीं ?

हमने कहा- चीनी खरीदें या नमक । इससे खरीदें या उससे, किसी से परमीशन लेने की क्या जरूरत । यह हमारे और दुकानदार के बीच का मामला है । 

बोला- नहीं मास्टर, अब वह  बात नहीं रही । अब ज़माना बदल गया है । अब दुनिया बहुत छोटी, एक दूसरे पर निर्भर  और कूटनीति से भरपूर हो गई है । अब नेहरू वाला ज़माना नहीं रहा जब हम स्टील के कारखाने, आई आई टी आदि अलग-अलग देशों के सहयोग से बना रहे थे ।यहाँ तक कि उस जमाने में अमेरिका ने बोकारो का स्टील प्लांट लगाने का वादा किया था लेकिन लटकाता रहा तो हमने रूस के सहयोग से लगा लिया । 

बोला- उस समय की बात और थी । 

हमने कहा- और बात क्या ? उस समय तो हम कोई विकसित देश क्या ढंगे से विकासशील भी नहीं थे ।देश का ढांचा खड़ा करने के लिए जाने किस किस काम के लिए दुनिया में भाग-दौड़ रहे थे । हाँ, लेकिन तब हम मानसिक और नैतिक रूप से कमजोर नहीं थे । 

बोला- तुझे क्या पता ? आज कल दुनिया वैसी नहीं रही । बहुत कुछ सोचना पड़ता है ।क्या पता किसी ऐसे वैसे से कोई सामान खरीद लें तो अमेरिका कहीं सौ दो सौ प्रतिशत टेरिफ़ न लगा दे । तुझे पता होना चाहिए कि यह दुकानदार कम्युनिस्ट अमराराम की पार्टी का है ।और अमेरिका कम्युनिस्टों से बहुत खार खाता है ।  

हमने कहा- अमेरिका से डरें वे लोग जिनका एपस्टीन फाइल में नाम है ।  अपना रिकार्ड एकदम साफ है । इसलिए हम न किसी के सामने सरेंडर करेंगे और न ही कंप्रोमाइज्ड होंगे । 

बोला- लेकिन तू भी तो कई बार बच्चों के पास अमेरिका आता-जाता रहा है कि नहीं ।  बस, इतने पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जेल में डाला जा सकता है । फिर सिद्ध होते रहना निर्दोष केजरीवाल, सिसोदिया, स्टेंस स्वामी की तरह । तुझे कोई राम रहीम की तरह क्लीन चिट या पेरॉल नहीं देने वाला । हाँ, अगर तेरे पास भारत के रूस से तेल खरीदने के लिए एक महिने की परमीशन की तरह कोई छूट हो तो बात और है । 

हमने कहा- हम इस प्रकार की कोई बंदिश मानने वाले नहीं है ।साँच को आँच नहीं । 

बोला- गाँधी का आज भी सारी दुनिया सम्मान करती है । लेकिन मारने वाले ने तो उनको निबटा दिया कि नहीं । मैं इस चक्कर में पड़ने वाला नहीं हूँ । इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से मैं चौधरी की दुकान से चीनी खरीदने के मामले से अपने आप को उसी तरह से अलग करता हूँ जिस प्रकार मोदी जी ने खामेनई की हत्या के मामले में श्रद्धांजलि देने या शोक प्रकट करने से अपने आप को अलग कर लिया । 

और तोताराम उठकर चल गया है । 

-रमेश जोशी 

 



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Mar 8, 2026

तोताराम की संवेदनशीलता


 

तोताराम की संवेदनशीलता


हमारी गली में कुछ ही कुत्ते यहाँ के स्थायी निवासी हैं । उन्हें यहाँ किसी SIR का खतरा नहीं है क्योंकि अभी उनको वोट देने का अधिकार नहीं मिला है । किसी पार्टी को उनके वोट कटवाकर या जुड़वाकर जीत का गणित बैठाने की  जरूरत नहीं है । एक ही मकान में 00 नंबर लगाकर दो चार सौ कुत्तों के वोट दिखाने की जरूरत नहीं है । इसलिए यहाँ दूसरे मोहल्ले के कुत्तों के आने को 'घुसपैठ' नाम नहीं दिया जाता । हम जब जरूरत हो उनके साथ संवाददाता सम्मेलन कर लेते हैं । हमें उनके किसी भी प्रश्न से असहजता महसूस नहीं होती । वे जो चाहें प्रश्न पूछ सकते हैं । न तो हमारी मोहल्ले में 'घुसपैठ' रोकने की जिम्मेदारी है और न ही हम किसी अन्य मोहल्ले से चुनाव के समय बस और ट्रेन से उन्हें यहाँ फर्जी वोट डालने के लिए भेजते-बुलाते हैं । वे सहज भाव से आते-जाते रहते हैं जैसे सत्ताधारी पार्टी में अन्य पार्टियों के भ्रष्टाचारी नेता सहज ही शामिल हो जाते हैं ।

उनमें किसी तरह के सांप्रदायिक दंगे नहीं होते  क्योंकि न तो वे कोई विशेष प्रकार के वस्त्र पहनते हैं जिनसे उन्हें पहचाना जा सके और न ही किसी खास तरह की दाढ़ी रखते और न ही किसी राष्ट्रवादी रंग का पटका डालते और न ही किसी देवता के नाम का किसी अन्य कुत्ते से जबरदस्ती नारा लगवाते और न ही किसी को वन्देमातरम गीत के छह छंद गाने के लिए बाध्य करते । कभी कभी किसी खाद्य पदार्थ को लेकर वैसे ही मामूली झड़प हो जाती है जैसे कि किसी पार्टी के भोज में स्वयंसेवक गुलाबजामुन या बादाम की बरफी के लिए धक्कामुक्की करने लगते हैं । ऐसे में हम उनके बीच ट्रम्प की तरह युद्ध विराम करवा देते हैं लेकिन सप्ताह में दो दो बार 'मैंने युद्ध विराम करवाया'  कहकर हम कभी उन्हें ह्यूमिलिएट नहीं करते इसलिए वे हमारा सम्मान भी करते हैं । 


आज जैसे ही हमने तोताराम के सामने चाय का गिलास रखा एक कुत्ते ने उसे सूंघने का दुस्साहस किया । वह गिलास से मुँह टच कर दे उससे पहले ही हमने उसे 'हट साले' कहकर भगा दिया ।  

हालाँकि हमने कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया था । कुत्ते को ही तो और वह भी उसके अनुचित काम के लिए डाँटा था । और फिर यह शब्द तो संसद में भी चलता है ।कुत्ता तलवे चाटने का विनम्र काम ही तो करता है ।इस शब्द का प्रयोग करने पर किसी 'अति माननीय'  पर कोई कार्यवाही नहीं होती । बस, संसद की कार्यवाही में शामिल न करने का कठोर दंड दे दिया जाता है । लेकिन तोताराम उसी तरह भड़क उठा जैसे कि निर्वाचित होते ही, शपथ-ग्रहण से पहले ही कोई अति सनातनी विधायक जनसेवा के सनातन काम 'किसी अंडे की रेहड़ी को हटवाने' के लिए पहुँच जाता है । 

बोला- मास्टर, तुझे पता होना चाहिए आज तूने बंगाल का अपमान किया है । कोई भी सच्चा बंगाली इसे बर्दाश्त नहीं करेगा । 

हमने कहा- तोताराम, इस कुत्ते के पूर्वज तो अनेक पीढ़ियों से राजस्थान के सीकर शहर के इसी मोहल्ले में रहते आये हैं । न यह माछ-भात खाता है, न लुंगी पहनता है, न बांग्ला बोलता है । और अगर कुत्ते को भैरों जी से जोड़ता है तो वे तो बनारस के कोतवाल माने जाते हैं । नाराज भी होंगे तो बनारस के लोग होंगे । और फिर हो जाएँ नाराज हमें कौन सा वहाँ से चुनाव लड़ना है । लेकिन हमारी गली के इस कुत्ते का बंगाल से क्या संबंध है ? और अगर तुझे ज्यादा ही समस्या है तो हम इसे कुत्ते ही जगह 'श्वान' कह देते हैं जैसे आवारा सांड कहकर गौ भक्तों की नाराजगी से बचने के लिए समझदार पत्रकार उन्हें 'बेसहारा साँड' लिख देते हैं ।वैसे 'साँड' अपने आप में दादागीरी का पर्याय होता है । हालाँकि इससे उनके गर्व और गौरव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । वे उसी तरह राहगीरों को आतंकित और घायल करते रहते हैं ।  

बोला- तुझे पता होना चाहिए कि दुर्गा के दो मुख्य कमांडो हैं दो भैरव, एक काला और एक गोरा । उनके साथ दो कुत्ते भी हैं- एक काला और एक सफेद । कुत्ते का अपमान  प्रकारांतर से दुर्गा और दुर्गा मतलब बंगाल का अपमान है । 

हमने कहा- हमें कौनसा बंगाल से या कहीं और से चुनाव लड़ना है जो इस फालतू के पचड़े में पड़ेंगे । 

बोला- लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है उन्हें तो फ़र्क़ पड़ता है ना । वे तो गाली की गिनती की तरह इसे भी मुद्दा बना सकते हैं ना । 

हमने कहा- ये सब मोदी जी जैसे समर्पित और देश के सम्मान के लिए सतर्क 56 इंची छाती वालों की चिंता के विषय हैं । वैसे यह समय राष्ट्रपति की आड़ में खेल खेलने की बजाय 'अमेरिका द्वारा 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की आज्ञा देने' के समाचार से होने वाले देश के अपमान के प्रतिकार में खड़े होने का अधिक है । 

-रमेश जोशी   


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Mar 7, 2026

मोदी जी अकेले क्या क्या करें ?


मोदी जी अकेले क्या क्या करें ? 

आज तोताराम बहुत परेशान था । आते ही न चाय की बात की और न ही अपने या मोदी जी के मन की बात का कोई जिक्र । 
बोला- मास्टर, मोदी जी अकेले क्या क्या करें ? 
हमने कहा- इसमें गलती मोदी जी की ही है । कोई और कर भी क्या सकता है  ?  और फिर यह तो उन्हें प्रधान मंत्री बनने से पहले सोचना चाहिए था । 

बोला- कर क्यों नहीं सकता । कर तो रहे हैं दिन रात कोशिश । इतने राष्ट्रभक्त संस्कारी लोगों को छाँट छाँटकर मंत्रीमण्डल में रखा है । नहीं मिले तो लेटरल एंट्री के द्वारा जाने कहाँ कहाँ से योग्य व्यक्तियों को पिछले दरवाजे से विभिन्न संस्थानों में बैठा तो दिया है । अब और क्या करें । 

हमने कहा- लेकिन लगता है कोई भी मोदी जी के योग्यता के पैमानों पर खरा नहीं उतरता । तभी तो चाहे रेल को हरी  झंडी दिखाना हो या राफेल की डील करना हो, ए आई पर भाषण देना हो या परीक्षा पर चर्चा करनी हो । न तो शिक्षा मंत्री से कोई मदद मिल पाती है और न ही कोई तकनॉलॉजी मंत्री कुछ कर या कह पाता है । अब ऐसे में हम क्या कर सकते हैं ? भुगतें । दिखाएं ट्रेन को हरी झंडी, करें मंदिरों में आरती , पढ़ाएं कक्षाओं में जाकर । छाँटा तो उन्होंने ही है ना । 

बोला- मैं इन छोटे छोटे मुद्दों की चर्चा नहीं कर रहा हूँ । मैं तो दुनिया में देश की बेइज्ज़ती और बदनामी की बात कर रहा हूँ । 

हमने कहा- दुनिया में मोदी जी का डंका बज तो रहा है । दुनिया के बड़े से बड़े नेता मोदी जी से गले मिलने के लिए तरस रहे हैं । जहाँ जाते हैं वहीं के राष्ट्राध्यक्ष अपने देश का सर्वोच्च सम्मान देने हवाई अड्डे पर ही आ जाते हैं । छप्पन इंची सीना  पदकों से दोनों तरफ से भर गया है, पदक लगाने के लिए जगह ही नहीं बची है ।  लाखों लोग हवाई जहाज से उतरने से पहले ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाने लग जाते हैं । औरतें उनके ग्लो को देखकर विह्वल हो जाती हैं, उनको छूकर धन्य हो जाती हैं । और क्या चाहिए । 

बोला- यह तो ठीक है लेकिन ये कांग्रेस वाले वाले देश और मोदी जी की छवि बिगाड़ने के लिए आजादी के पहले से लगे हुए हैं । इसका क्या किया जाए ? 

हमने कहा- मोदी जी का तो जन्म ही 1950 में हुआ है तो आजादी के पहले की बिगड़ी हुई छवि के लिए मोदी जी कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं । 2014 के बाद से मोदी जी की जिम्मेदारी है । सो लगे तो हुए हैं देश की छवि सुधारने में । तभी तो चौबीसों घंटे न सोते हैं , न सोने देते हैं । संसद से शौचालय तक अपने सुंदर फ़ोटो, सेल्फ़ी पॉइंट बना तो दिए । जहाँ देखो वहाँ खंभ में राम, खड्ग में राम की तरह सब जगह मोदी जी ही मोदी जी । राम मंदिर तक में राम से पहले मोदी जी । अब तो 5 किलो राशन के अनाज के दानों पर नाम लिखवाना बाकी रह गया है । 

ओबामा को 15 लाख का सूट पहनकर चाय पिला तो दी । ह्यूस्टन में भारत मूल के सवर्ण हिंदुओं का पैसा खर्च करके ‘हाऊ डी मोदी’ और अहमदाबाद में हमारा टेक्स  का पैसा खर्च करके ‘नमस्ते ट्रम्प’ करवा तो दिया । और क्या क्या करें ? 

बोला- अकेले मोदी जी क्या करें । मोदी जी का काता कूता ये कांग्रेस वाले कपास कर देते हैं । पहले वह महात्मा गाँधी ! एक छोटी सी धोती पहनकर चला गया इरविन से मिलने । करवा दिया देश की इज्जत का कचरा । आज तक वहाँ के सभ्य लोग उसे अधनंगे फकीर के नाम से जानते हैं । फिर तुम्हारा या केजरीवाल । याद है कैसे 200 रुपये के सेंडल पहनकर फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद के साथ फ़ोटो खिंचवाने पहुँच गया था राष्ट्रपति भवन और करवा दिया था कि नहीं देश और मोदी जी की इज्जत का कबाड़ा । और फिर यह राहुल गाँधी एक टी शर्ट में घूमता फिर रहा था भारत जोड़ो के नाम पर देश का फजीता करवाता । तभी तो इसे पुतिन से मिलने नहीं दिया गया । लेकिन ये मानते कहाँ है ? 

अब देश की इज्जत बढ़ाने के लिए बड़ी मुश्किल से ए आई पर सम्मिट करवाईजाने कहाँ कहाँ के विशेषज्ञ और सी ई ओ बुलाए तो कांग्रेस ने कुछ बदमाशों को भेजकर शर्ट लेस प्रदर्शन करवा दिया । क्या समझें होंगे लोग कि इस देश के युवाओं के पास कमीज तक नहीं है । क्या मोदी जी और शाह जी की तरह  ‘बार बाला’  ‘जर्सी गाय, ‘50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड’, ‘साले’ जैसे शालीनलोकतान्त्रिक शब्दों से विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते थे ? 

 




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