May 7, 2026

07-05-2026 आज और यहाँ कैसे, प्रभु !

07-05-2026 


आज और यहाँ कैसे, प्रभु  !






आज फिर ब्रह्ममुहूर्त में आँख खुल गई । लगता है ऐसा होना कोई अलौकिक या आध्यात्मिक संकेत हैं । तोताराम के आने में अभी विलंब है । हाँ, सुबह सुबह की हवा से ऑक्सीजन खींच कर दीर्घायु होने का भ्रम पाले बहुत से लोग जाने जाने कहाँ कहाँ से कहाँ कहाँ के लिए निकल पड़ते हैं । अचानक एक बड़ी सौम्य,  दुग्ध धवल दाढ़ी और मूँछ युक्त, लंबा चोगे/ लबादे जैसा कोट, काली पेंट/ पायजामी,  काले बूट, कंधे पर अंग वस्त्रम जैसा कुछ धारण किए, सीने से एक हरी सी फ़ाइल चिपकाए एक आकर्षक और प्रभावशाली आकृति बरामदे के सामने से गुजरी ।

 

हमारे मुँह से हठात निकल पड़ा- मोदी जी, आप ! आज और यहाँ ? आपको तो इस समय बंगाल के नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए किसी विशिष्ट परिधान में तैयार होने में व्यस्त होना था । 


तभी तोताराम प्रकट हुआ और बोला- मास्टर, तुझे भ्रम हुआ है । ये मोदी जी नहीं, हमारे राष्ट्रगीत के रचनाकार महान मानवतावादी गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर हैं । मोदी जी होते तो क्या इस तरह चुपचाप प्रकट हो जाते । दस दिन पहले से रास्ता पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों के द्वारा किला बना दिया गया होता, सड़क पर खुलने वाले हर घर और खिड़की पर तैनाती हो जाती, कमांडो, कारें, सौ-पचास फोटोग्राफर होते । 



हमने गुरुदेव के चरण छुए, कहा- धन्य भाग्य जो आपके दर्शन हुए । आप तो हमारे जन्म से एक साल पहले ही दिवंगत हो गए थे । 2021  के पिछले चुनाव में मोदी जी भी बिल्कुल आपके ही वेश में बंगाल में घूम रहे थे । यह बात और है कि बंगाल के लोगों को उनमें  न तो आपकी सौम्यता और न ही अंतर्राष्ट्रीय मानवतावाद के दर्शन हुए । लेकिन अबकी बार तो मोदी जी ने झालमुड़ी खाकर और कुछ ने मछली खाकर चुनाव का रुख ही बदल दिया । और सबसे ऊपर ‘SIR’ की चालाकी और महिला रिजर्वेशन के नाम पर काम  बन गया लेकिन जीतते ही एक पुरुष को ममता जैसी साड़ी पहनाकर, कमर से रस्सी बांधकर अपमानित करके घुमाते हुए कुछ उद्दंड कार्यकर्ताओं ने संकेत दे दिया कि महिलाओं का कैसा सम्मान होने वाला है । 


कवीन्द्र बोले- मैंने तो बहुत पहले ही लिखा था-

मन हो निर्भय जहाँ, 

ज्ञान मुक्त हो जहाँ 

ऊंचा हो शीश जहाँ 

भारत को उसी स्वर्ग में तुम जाग्रत करो । लेकिन लोग हैं कि देश को ही एक मानवीय दृष्टि से नहीं देख रहे हैं और न ही देखने दे रहे हैं । जाति,धर्म और कट्टर राष्ट्रवाद के नाम पर भेदभाव फैलाकर,फूट डालकर अपनों पर ही शासन करना चाहते हैं तो कौन बचा सकता है देश को विनाश से । मैंने तो लीग ऑफ नेशंस बनने और प्रथम विश्वयुद्ध से भी पहले कट्टर राष्ट्रवाद के खतरे को भाँप लिया था । जो पहले जर्मनी में साकार हुआ और नस्लीय विनाश से कलंकित हुआ और अब उसी तरीके से दुनिया को विनाश की आग में धकेला जा रहा है । 


अब तक चुप तोताराम बोल पड़ा- गुरुदेव,  इस समय तो आपको मोदी जी के स्वागत के लिए कोलकाता में होना चाहिए था । आपको पता है इस महान विजय के लिए शांतिदूत ट्रम्प तक ने मोदी जी को बधाई दी है । 


कवीन्द्र बोले- पता है, जैसे तुम यहाँ एक धर्म के नाम पर गर्व कर रहे हो वैसे ही वह अमेरिका को फिर से ग्रेट बनाना चाहता है । यह दुनिया टुकड़ों में न बनती है, न विकसित होती है । यह बड़ी सोच से ही बचेगी । छोटी सोच और छोटे लोगों ने हमेशा इस दुनिया को दुखी किया है ।

 

मैं अब चलता हूँ । शपथ ग्रहण से बचकर ही तो इधर घूम रहा हूँ लेकिन कब तक ? जो भी बंगाल में तांडव होना है उसे देखना भी है और बचाने का प्रयत्न भी करना है ।अंग्रेजों के समय में बंगाल के विभाजन को भी हमने ही रोका था । 

  

हम कुछ और बोलते तब तक अचानक गुरुदेव गायब ! 


 



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

No comments:

Post a Comment