01-05-2026
भारतीय ज्ञान परंपरा
आज पहली मई है । मजदूर दिवस । इसी उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन की माँग करने वाले मजदूरों को नक्सली और पाकिस्तानी बता दिया गया और उनके समर्थकों को हिरासत । तभी से दिल धड़क रहा था को कोई मास्टर स्ट्रोक लगने वाला है । वैसे इस स्ट्रोक से मास्टरों का कोई लेना देना नहीं है । यह तो दो ही लगाते हैं एक क्रिकेट खेलने वाला और दूसरा चाय बेचने वाला और नाम बदनाम हम मास्टरों का ।
हर महिने पेंशन क्रेडिट होने की सूचना महिने के अंतिम दिन आ जाती है लेकिन इस बार नदारद । तोताराम विलंब से आया, कोई 10 बजे । आते ही पूछा- लगता है, मोदी जी ने मास्टर स्ट्रोक लगा दिया है ?
हमने पूछा- तुम्हें किस अशुभ को देख सुनकर यह अनुभव हुआ ?
बोला- यह देख । और तोताराम ने हमारे सामने केन्द्रीय विद्यालय के किसी साथी पेंशनर का साझा किया हुआ एक मेसेज दिखा दिया, लिखा था- अब भविष्य में रिटायर्ड कर्मचारियों को कोई वेतन आयोग और महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिलेगा । इसलिए अभी बैंक चल देते हैं । खुलते ही पूछ लेंगे कि पेंशन का क्या हुआ ?
हमने कहा- तुझे पता है तापमान 43 चल रहा है । लू लग जाएगी ।
बोला- अब उसकी चिंता मत कर । 51 डिग्री तक का तो इलाज मिल गया है ।
हमने पूछा - क्या किसी जेबी ए सी का आविष्कार हुआ है जिसे जेब में रख कर लू से सुरक्षित घूमते रहो ।
बोला- कुछ ऐसा ही है लेकिन आविष्कार सनातन है । कभी देखा है इस गरमी में भी 55 वर्षीय सिंधिया कैसे खिले खिले रहते हैं । सब इसी आविष्कार का कमाल है ।
हमने कहा- लेकिन ए सी तो बिजली के बाद का आविष्कार हैं सनातन कैसे हुआ ।
बोला- सनातन, वैदिक और शुद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा का है । जानते तो ज्योतिरादित्य पहले से भी थे लेकिन भारतीय ज्ञान परंपरा की विरोधी कांग्रेस ने उस ज्ञान को उजागर नहीं होने दिया । इसी दुख के कारण भारतीय ज्ञान, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति आदि के उपासक सिंधिया जी ने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा के नेतृत्व में निकल पड़े भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रचार करने । और कल बता ही दिया कि जेब में प्याज रखने मात्र से 51 डिग्री तापमान में सुरक्षित रहा जा सकता है । और क्या चाहिए । चल, निश्चिंत होकर चल ।
हमने कहा- ये सब नेताओं की फालतू बातें हैं । आजकल बाबाओं से लेकर नेताओं और गली कूचे के निठल्ले सब ऐसा ही ज्ञान पेले जा रहे हैं क्योंकि ऊपर से ही ज्ञान (!) की यह गंगोत्री निरंतर प्रवाहित हो रही है ।
बोला- नहीं, ऐसी बात नहीं है । यह सिंधिया परिवार का अचूक, अनुभूत नुस्खा है ।
हमने पूछा- वह कैसे ?
बोला- मई 1857 में देश का पहला सम्मिलित स्वतंत्रता संग्राम हुआ था । उसकी गरमी में बहुत से स्वतंत्रता-प्रेमी राजवंश झुलस गए थे । दिल्ली के बहादुर शाह के वंशज आज भी गरीबी में जीवन बिता रहे हैं ।घरबार, लालकिला सब छिन गए । झांसी की रानी के वंशजों की कोई खोज खबर है ?लेकिन उस आग में सिंधिया परिवार का कुछ नहीं बिगड़ा । वे तब भी अपने 400 कमरों के राजमहल में रहते थे और आज भी । ज़रा सी भी गरमी उन तक नहीं पहुंची ।
हमने कहा- वह किसी प्याज का नहीं बल्कि अंग्रेज-भक्ति का चमत्कार था । आज भी जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, आमेर, कुंभलगढ़, बूंदी, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, जूनागढ़ आदि किले उनके अंग्रेज भक्तों के मालिकों केवंशजों के पास हैं जिनमें होटल का धंधा चल रहा है ।
हाँ, ‘प्याज जेब में रखने’ का कुछ व्यापारिक संदेश यह हो सकता है कि निकट भविष्य में प्याज की कमी होने वाली है । कमाई करने के लिए जमाखोरी कर लें ।
-रमेश जोशी
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