Apr 30, 2026

28-04-2026 कंधे पर कंकाल

28-04-2026 

कंधे पर कंकाल 

( ऑडिश के क्योंझार जिले का अशिक्षित जीतू बैंक के नियमों की संतुष्टि के प्रमाण स्वरूप बहिन का कंकाल लेकर पहुँच गया - एक समाचार )





जीतू पहुँच बैंक में धर कंधे कंकाल 
औ' प्रधान सेवक उधर खेल रहे फुटबॉल  
खेल रहे फुटबाल, बॉल है जीतू मुंडा 
कर बैठा शालीन बैंक-नियमों का कुंडा 
कह जोशी कवि 'गर नीरव मोदी बन जाता 
कर्जा लेकर जा विदेश में मौज उड़ाता 














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Apr 29, 2026

24-04-2026 तीन में न तेरह में

24-04-2026 


तीन में न तेरह में 






आज जैसे ही तोताराम आया तो उसके बैठने से पहले ही हमने कहा- अब 4 मई को ही बात करेंगे । 


बोला- क्यों, मैं क्या कोई तेरा झालमुड़ी में खरीदा हुआ वोटर हूँ जो इस तरह दुत्कार रहा है । और लानत है तुझ पर जो मदर ऑफ  डेमोक्रेसी वाले चरित्रवान देश के एक बुजुर्ग मतदाता को इस तरह अपमानित कर रहा है । न तो मोदी जी बंगाल के मतदाताओं को इतना टुच्चा समझते हैं और न ही बंगाल की अस्मिता को । वे तो बंगाल के दीवाने हैं । उनका तो बंगाल से की जन्मों का नाता है । इसीलिए जिस इलाके में झालमुड़ी खाई उसमें आचार संहिता लागू हो गई तो गंगा में नौका विकार करने लगे लेकिन बंगाल नहीं छोड़ा  और फोकस में बने रहे । 

वैसे मैं चाय नहीं पीने वाला हूँ । अभी लूज मोशन की दवा चल ही रही है ।आमाशय की एप्सटीन फ़ाइल के पुनः लीक हो जाने की रिस्क नहीं ले सकता । मैं तो सोच रहा हूँ कि कोलकाता निकल जाऊँ । और 4 मई को मोदी जी के कर कमलों से कुछ मिठाई और झालमुड़ी ग्रहण करूँ क्योंकि वह बहुत शुद्ध सात्विक होगी । उससे किसी तरह की लीकेज की संभावना नहीं रहेगी । 


हमने कहा- चला जा लेकिन रहना सावधान क्योंकि कुछ भी हो सकता है । क्या पता जीत भी जाएँ और पानी के लिए भी न पूछें क्योंकि मोदी जी और शाह जी का इतिहास ऐसा ही रहा है । 2014 में वोट देकर लोग अब तक 15 लाख और अच्छे दिन के लिए आँखें फाड़े हुए हैं । हमें तो ये लोग विश्वसनीय लगते नहीं । मन हो तो अनुराग ठाकुर वाली सात्विक मछली भी टेस्ट कर सकता है ।   एक पुलिस अधिकारी ने बड़े प्रेम से वहाँ पुलिस का कर्तव्य समझाया है कि सही तरीके निबटेंगे । देश पुलिस का गलत तरीका ही जानती है । अब सही इससे और कितना खतरनाक होगा, पता नहीं । वैसे सही तरीका लोगों ने अतीक अहमद और विकास शुक्ला के समय कुछ कुछ देख तो लिया था ।




 

बोला- कोई बात नहीं । और कुछ नहीं तो इस गर्मी में गंगा में नौका विहार ही कर आऊँगा । अभी तो मोदी जी वाली नाव वहीं लगी हुई होगी । 

 

हमने कहा- एक बात तो हैं तोताराम, मोदी जी दिल्ली में छठ पूजा के समय यमुना में स्नान का साहस तो नहीं जुटा सके हालाँकि रेखा गुप्ता ने उनके लिए एक नई और स्वच्छ यमुना और घाट बनवा तो दिए थे लेकिन लोक प्रवाद की भी ताकत होती है जिसके चलते मोदी जी छठ स्नान नहीं कर सके । चलो, अब गंगा स्नान कर लिया । न सही गंगा पुत्र की गंदी गंगा, दीदी की साफ सुथरी हुगली ही सही । हमने तो आज से कोई 45 साल पहले देखी थी हुगली । तब लोग इसमें नहाते नहीं थे । इसका पानी हरिसन रोड़ और बड़ा बाजार की सड़कें धोने के काम आता था । 

फिर भी ...... 


बोला- फिर भी क्या ? 


हमने कहा- 4 मई को तू छुपना भी चाहेगा तो जगह नहीं मिलेगी ऐसा ऐलान योगी जी भी कर चुके हैं । शाह साहब ने भी कहा है कि 4 मई को उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे । कहीं उनकी पकड़ में आगया तो ? तू तो यह भी सिद्ध नहीं कर पाएगा कि तू भारत का वोटर है । बांग्लादेशी बताकर बी एस एफ वाले मगरमच्छों के आगे डाल देंगे । 


बोला- ऐसे कैसे ? हम तो शाह साहब के जन्म से पहले के 1961 में राजस्थान में पंचायतों के चुनाव से लेकर 1999 के जनरल इलेक्शन तक मतदान अधिकारी रह चुके मास्टर हैं ।   


हमने कहा- बंगाल में 27 लाख के वोट कट चुके हैं । कागजों में मृत । अच्छा हो कि कोलकाता जाने की बजाय यहाँ चुनाव के ऑफिस में चलकर पता कर आयें । कहीं शाह साहब ने हमें यहाँ उल्टा लटकाकर मृत घोषित न कर दिया हो । फिर कहते फिरना कि हम शाह साहब के जन्म से पहले के मतदान अधिकारी हैं । 


हमें अपनी हैसियत समझ लेनी चाहिए । हम न तीन में हैं, न तेरह में ।


बोला- मास्टर यह कहावत तो सुनी है, पुरानी है । हर कहावत के पीछे एक कहानी होती है तो  इसके पीछे की कहानी क्या है ? 


हमने कहा- वह फिर कभी सुनाएंगे । फिलहाल तो तू चुनाव  के ऑफिस में चलने का कार्यक्रम बना । 


 


 





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Apr 27, 2026

27-04-2026 बंगाल में चुनावी नाटक : बतर्ज़ कबीर


27-04-2026  

बंगाल में चुनावी नाटक : बतर्ज़ कबीर 


देखो साधो जग बौराना 





नहीं राम से सीख चाहिए 

सिर्फ वोट की भीख चाहिए 

वहाँ वहाँ ले राम बंदरिया 

मज़मा लगा नचाना ।साधो देखो.... 


कर साबुत मछली लटकाएं 

वोट माँगने हिन्दू जाएँ 

महँगे मशरूमों के रसिया 

सड़क किनारे मुड़ी चबाना । साधो देखो...... 


लल्लू पंजू रोब जमाएं 

अंडों की रेहड़ी हटवाएं 

पर बंगाल चुनाव जीतने 

मंगल मछली खाना । साधो देखो..... 


बार बार पैजामा खिसके 

अंदर का विकास सब दीखे 

क्या दिखलाना किसे छुपाना 

बिल्कुल समझ न आना । देखो साधो.... 


गंगा हुगली नाव चलाना  

फ़ोटो खींच और खिंचवाना 

छठ स्नान हेतु दिल्ली में 

नकली घाट बनाना । साधो देखो.....। 



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Apr 24, 2026

24-04-2026 तोताराम की एप्सटीन फ़ाइल


24-04-2026 


तोताराम की एप्सटीन फ़ाइल  






दो दिन हो गए लेकिन तोताराम नहीं आया । न आये । उसका आना कोई इतना महत्वपूर्ण भी नहीं ।  हम मोदी जी के मन की बात के लिए एक महिने तक इंतजार करते ही हैं । लेकिन मोदी जी तो बाकी उनतीस दिन 22-22 घंटे देश के लिए  कुछ न कुछ  करते ही  रहते हैं । चाहे रास्ते में पड़ने वाली किसी भी छोटीमोटी टपरी पर सामान्य झालमुड़ी खाना ही क्यों न हो । वे जो कुछ भी करें देश सेवा ही होती है । भौतिक सेवा नहीं तो आध्यात्मिक, भावनात्मक या प्रेरणात्मक सेवा से फुरसत कहाँ है ? ज्ञानेश कुमार और अमित शाह की तरह । एक साफ-सुथरा चुनाव करवाने के लिए करोड़ों  काट-पीट रहा है तो दूसरा चप्पे चप्पे पर पुलिस खड़ी करके सहज स्थितियाँ बना रहे हैं । 

लेकिन तोताराम क्या कर रहा होगा ? 

मन में तोताराम का खयाल आते ही हम उसके घर की ओर चल पड़े । कोई पचास कदम भी नहीं है उसका घर । 

जाकर देखा । तोताराम लेटा हुआ हैं । 

हमने छेड़ा- तू तो ऐसे विश्राम कर रहा है जैसे कोई चुनाव प्रचार से थका हुआ नेता मसाज करवा रहा है । क्या हुआ ? 

बोला- मास्टर, उस दिन झालमुड़ी नहीं खानी चाहिए थी । 

हमने कहा- जब हमने कहा तो तुझे समझ आया नहीं । वैसे हुआ क्या है ?

बोला- आमाशय की एप्सटीन फ़ाइल लीक हो गई ।

हमने कहा- लीक होकर कहीं पब्लिक तक तो नहीं पहुँच गई ? मतलब आमाशय से शौचालय के कमोड तक ही रहा मामला या आगे कुछ और ? 

बोला- नहीं पब्लिक तक तो नहीं पहुँचा मामला ।हाँ, उस रात को घुटन्ना थोड़ा गीला जरूर हो गया था । उसके बाद डाइपर लगा लिया था ।  

हमने कहा- आदमी को अपनी औकात में रहना चाहिए । किसी की भी देखादेखी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए ।नाल घोड़ों को ठोंकी जाती हैं, मेंढकी को नहीं । मोदी की नकल के लिए मोदी जी जैसा हाजमा और बल चाहिए । वे तो जवान हैं, बालब्राह्मचारी है, विष्णु के अवतार हैं । उनका क्या, वराह अवतार में उन्होंने पाताल तक खोदकर धरती को निकाल लिया था ।देवताओं के साथ सब कुछ देखते हैं लेकिन क्या किसी गर्भ गृह में शौचालय देखा ? उसका कारण है । शाह साहब ने क्या झूठ बताया था कि वे तो सारे सारे दिन पार्टी की मीटिंग लेते रहते हैं और बीच में एक बार भी शौचालय नहीं जाते । तुझे तो अपनी उम्र का खयाल करना चाहिए था । वैसे कितने दस्त हुए ?

बोला- उसकी क्या गिनती करना ।कहावत को थोड़ा बदल दे-  पानी पी और कमोड में डाल । 

हमने कहा- अगर मांसाहार की निंदा जैसे मुद्दों पर चुनाव जीतने वाली पवित्र पार्टी के युवा नेता की तरह मछली खा लेता तो ? 

बोला- अब बस भी कर । अब हो गई गलती । मुझे मोदी का अनुकरण करने के उपलक्ष्य में कौन सा मरणोपरांत परम वीर चक्र मिलने वाला था । 

भूल्यो बामण भेड़ खाई, 

ओजूँ खा तो राम दुहाई । 

      




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Apr 23, 2026

20-04-2026 आप प्रधानमंत्री हो क्या ?


  

20-04-2026 


आप प्रधानमंत्री हो क्या ? 



आज तोताराम कोई शाम 4 बजे भी आ टपका । 

हमने कहा- हमारे पास दिन में दो दो बार चाय पिलाने का बजट नहीं है । 


बोला- इस 42 डिग्री तापमान में मुझे चाय पीनी भी नहीं है । भाभी ने जरूर बेल का शर्बत बनाया होगा । लेकिन वह भी नहीं । अब तो बैंक जा रहा हूँ । कई महिने हो गए पास बुक ही पूरी करवा लाते हैं ।आ चलें । 

 

मन तो नहीं था लेकिन कुछ कहते नहीं बना । वैसे ही जैसे भले ही ट्रम्प दिन में चार बार कह दे कि मैंने युद्ध विराम करवाया लेकिन मोदी जी दोस्ती के लिहाज में यह नहीं कह पाते कि यह गलत है । वैसे ही हम भी मन न होते भी तोताराम के साथ चल पड़े । 


बैंक हमारे घर से ज़्यादा दूर नहीं है । जयपुर रोड़ हमारे घर से कोई 150-200 मीटर है और उस पर चढ़ते ही बाईं तरफ मुड़कर पूर्व दिशा में चलने पर कोई 50 मीटर चलकर इंडिस्ट्रीयल एरिया के मोड़ पर बैंक है । रोड़ पर चढ़ते ही बाई तरफ के कोने पर कई रेहड़ी ठेले वाले खड़े होते हैं जो गोलगप्पे, चाट पापड़ी, दही, भल्ले और झालमुड़ी बेचते हैं । रात के कोई नौ बजे तक अच्छी भीड़ और रौनक रहती है ।उनकी दुकानदारी शाम चार बजे से ही शुरू होती है । 

 

जैसे ही मोड़ पर पहुँचे तोताराम ने कहा- मास्टर, झालमुड़ी खाते हैं ।


हमने कहा-  यह क्या मोदी जी की तरह कहीं भी दुकान देखी और बच्चों की तरह मचल गए झालमुड़ी खाने के लिए ।उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना है । 2047 में देश को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में ‘मेक अमरीका ग्रेट अगैन’ (मेगा) की तरह ‘मेक इंडिया ग्रेट अगैन’ (मीगा) बनाना है । 


बोला- उसकी तू चिंता मत कर । अगर छाती 56 इंच की है तो पेट भी लक्कड़ हजम पत्थर हजम होगा । 35 साल भिक्षा माँग कर खाया है तो उन्हें कुछ नहीं होगा । भिखारी का न खाने समय होता है और न ही कोई मीनू फिक्स होता है ।  किसी माई ने जो भी ठंडा-बासी दे दिया सो खा लिया । 


हमने कहा-  इस उम्र में हम ठेले पर बिकने वाली चीजें नहीं खाना चाहते । जब तिरुपति के प्रसाद में चर्बी की मिलावट हो सकती है, जिस देश में भक्त भगवान तक को कुछ नहीं समझते वहाँ इन ठेले रेहड़ी वालों से ज़्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए । वैसे भी जब हम पहली बार पोर्टब्लेयर गए थे तो शिप मिस हो जाने के कारण हमें 15 दिन तक केन्द्रीय विद्यालय, फोर्ट विलियम में रहना पड़ा था । वहाँ अंदर की एक बाजार भी था वहीं हम खाना और नाश्ता कर लेते थे ।जिधर जाओ वही मछली और सरसों के तेल की गंध ।  बंगाल में मछली और चावल का खाना है । वहाँ सब्जी-मछली पकाने में सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता । हमें उसकी आदत नहीं । हम तो गुजरात की तरह मूँगफली का तेल काम में लेते हैं । वहीं से हमें सरसों के तेल की गंध बड़ी अजीब लगती है । और फिर झालमुड़ी में तो सरसों का तेल कच्चा ही डालते हैं ।

तुझे खाना है तो खा ले । 


तोताराम ने एक झालमुड़ी बनवाई और अच्छी तरह से तीखी बनवा कर खाई । खाने के बाद दस का एक नोट निकाल कर दिया तो ठेलेवाले बड़ी अजीब निगाहों से तोताराम को देखा और बोला- मास्टर जी, दस रुपए में एक झालमुड़ी वाला ज़माना गया ।पच्चीस रुपए निकालिए ।

 

बोला- क्यों ? कल सारे देश ने देखा नहीं कि एक अप्रत्याशित रूप से व्यवस्थित,स्थाई, विभिन्न सामानों से ठसाठस भरी, साफ सुथरी दुकान वाले एक बिहारी मुड़ी वाले ने बंगाल में मोदी जी को दस रुपए में एक मुड़ी खिलाई थी। एक दिन में अढ़ाई गुणा महंगाई बढ़ गई क्या ? 


रेहड़ी वाला भी अकड़ गया, बोला- मास्टर जी, आप कोई प्रधानमंत्री हो क्या ? जो दस रुपये में झालमुड़ी खिला दूँ इस आशा में कि आप मुझे कोई एयर पोर्ट दिलवा दोगे । अगर प्यार से कहते तो बात और थी लेकिन आप तो नेतागीरी लगा रहे हैं तो सुन लीजिए कि जब तक 25 रुपए नहीं आएंगे तब तक आप यहीं बैठे रहिए ।   


हमने भी बीच में बोलना उचित नहीं समझा और चुपचाप उठकर इंडिस्ट्रीयल एरिया के सामने वाले शर्माजी की दुकान से लाकर उस झालमुड़ी वाले को दिए और तोताराम को बंधकी से छुड़वाकर लाए ।


हमने कहा- तोताराम,अगर नीयत खराब हो तो बड़ा सोचो। अगर हजार दो हजार करोड़ रुपये बैंक से उधार लेकर भागते तो सरकारें तुम्हें सेफ पेसेज उपलब्ध करवा देतीं लेकिन 15 रुपए में कोई दया दिखाने नहीं आएगा । जैसे कि बैंक में सामान्य लोगों का मिनिमम बैलेंस से दो रुपये कम होने पर लेकर जुर्माना लग जाता है ।लेकिन नीरव मोदी विदेश में मजे कर रहा है । 


अब घर चल, हो गई पासबुक पूरी । क्यों ईरान युद्ध में भारत की तरह हमारा तमाशा बनवा रहा है  ।  

    



    




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Apr 18, 2026

19-04-2026 बिल गिर गया


19-04-2026  


बिल गिर गया 






आज तोताराम कुछ परेशान सा था, बोला- मास्टर, बिल गिर गया ।

 

हमने कहा- कोई चिंता की बात नहीं । चूहे की कौन सी फिक्स ड्यूटी होती है । सुना है सेवा के लिए प्रतिबद्ध कुछ मनुष्य तो दिन में 20-20 घंटे और बिना कोई छुट्टी लिए ही देश की नींव खोदते रहते हैं । फिर ये तो चूहे हैं । बिल खोदना ही इनका काम है ।इन्हें किसी हार्वर्ड की डिग्री नहीं चाहिए । इनके पास बिल खोदने के हार्ड वर्क की एनटायर मास्टर्स की डिग्री है ।ऐसे में खोदा गया कोई बिल अगर  गिर भी गया तो क्या ?  एक नहीं और अनेक बिल खोद डालेंगे ।

 

तुझे चिड़िया और चुहिया की कहानी पता है ना ? दोनों में दोस्ती थी । एक दिन चुहिया ने चिड़िया से अपना घर दिखाने के लिए कहा । चिड़िया ने कहा कि उसका घर बहुत दूर है और रास्ते में कई तरह की समस्याएं हैं । लेकिन चुहिया नहीं मानी । रास्ते में चुहिया कँटीली झाड़ियों में फँस गई । चिड़िया ने हाल पूछा तो बोली, मैं फँसी नहीं मैं तो नाक छिदवा रही थी । इसी तरह डूबने पर उसने उसे स्नान करना बताया । लेकिन हार नहीं मानी । 


एक दिन चुहिया का बिल गिर गया तो चिड़िया ने कमेन्ट किया- चुहिया रे चुहिया तेरा तो बिल गिर गया । 

चुहिया भी बड़ी ढीठ थी, बोली- मैं तो इसे गिराना ही चाहती थी । शत्रु को धोखा देकर नया एजेंडा और मुद्दा सेट करना मेरे मकसद थे  ।यही मेरी चाणक्य नीति थी । 


तोताराम बोला- मैं तो तुझे राजनीतिक रूप से जाग्रत रखने के लिए अवगत कराता रहता हूँ और तू है कि ऐसी ऐसी फालतू और बेसिर पैर की बातें करता है कि मेरा दिमाग खराब हो जाता है । जी करता है अपना जूता निकालकर अपना ही सिर पीट लूँ ।

 

हमने कहा- इस समय तेरा ही नहीं सारी दुनिया में ही भले आदमियों का यही हाल हो रहा है ।यहाँ या वहाँ, कहीं देख ले सब सिर पीटने वाली बातें । जिनको कुछ नहीं करना वे ऐसी ही बातें करते रहते हैं । अब उधर ट्रम्प दिन में सौ बकवास करता है ।और यहाँ ये चूहे । अरे भाई होना हवाना कुछ नहीं । जो करना है कर लें । कर दे फाड़कर एक की दो । बरसने को कुछ है नहीं । बस गरजना और वह भी हर समय । वनस्पति बादल के गरजने से नहीं बरसने से पुष्ट होती है । 


बोला-मास्टर, मैं किसी चूहे के बिल की नहीं मैं संसद में महिला आरक्षण बिल के गिरने की बात करना चाहता था । 


हमने कहा- लेकिन तू तो इस तरह घबराया हुआ बोल रहा है जैसे किसी बुजुर्ग होती जा रही महिला का बड़ी मुश्किल से धारण किए गर्भ का 'पात' हो गया हो ।


बोला- मास्टर, क्या अद्भुत संयोग है कि तूने भी इस स्थिति का उसी गंभीरता से सटीक वर्णन किया है जैसे रात को अपने राष्ट्र के नाम संदेश में मोदी जी ने ।


हमने कहा- वैसे तोताराम जहाँ तक किसी के कल्याण की बात है तो अगर नीयत ठीक है तो महिला ही क्या किसी का भी कल्याण बिना किसी बिल के भी किया जा सकता है । सभी माननीय अपने घर, परिवार और आसपास संपर्क में आने वाली महिलाओं के प्रति ही सम्मान और सहानुभूति रख लें ।अपने घरों में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और पूरा वेतन दे दें । न्यूनतम वेतन माँगने वाले मजदूर, मजदूरनियों पर डंडे कहाँ की पुलिस बरसा रही है ? महिला पहलवानों को किसने घसीटा था संसद मार्ग पर ।  मुफ़्त शिक्षा, सड़क और कार्य स्थल पर पूर्ण सुरक्षा  किसकी जिम्मेदारी है ?  निकालो अपने बलात्कार के आरोपी सांसदों को बाहर, जाओ मणिपुर और माँगो वहाँ की पीड़ित महिलाओं से माफी ।चुनावी रैली, रोड़ शो, फ़ोटो सेशन से तो फुरसत मिलती नहीं और करने चले है महिलाओं का सम्मान । पचास करोड़ की गर्ल फ्रेंड, जर्सी गाय जैसे सम्मान सूचक शब्द किस संत के हैं ?  ये तो अपनी छोड़ी पत्नी से ही गुजारा भत्ता न मांगें तो ही बहुत है । और तो और आदिवासी महिला राष्ट्रपति से ही माननीयों का व्यवहार देख लो । 


बोला- लेकिन मास्टर, बिल .....

 

हमने कहा- क्या बिल बिल । चूहों का काम ही है बिल खोदना ।कुछ भी खा जाना ।  किसी भी पुल में घुसकर खोदेंगे,किसी बांध को बिल बना बना कर ढहा देंगे, किसी भी सड़क में घुसकर बिल बना देंगे, खाद्य निगम के गोदामों में घुसकर करोड़ों का अनाज खा जाएंगे और तो और शराब बंदी वाले राज्यों में बरामद करोड़ों की शराब पी जाएंगे । चूहे तो हर माननीय केजघन्य मुकदमों की फ़ाइलें खा जाएंगे । अभी विदेशों में चूहे इतने सक्रिय नहीं हुए हैं । अगर इन्हें अमेरिका का वीजा दे दिया जाए तो ये वहाँ जाकर एप्सटीन वाली फ़ाइल तक कुतर आएंगे । फिर दाग ढूँढता रह जाएगा नेतन्याहू । 


तोताराम उठा और कहते हुए चल दिया- तुझे तेरा बिल और चूहे मुबारक ।मेरे मुँह से गुस्से में शाह साहब या विधूड़ी की तरह कोई  संसदीय शब्द निकल जाए उससे पहले चल ही देना चाहिए । चाय का क्या है ? यह कौन सी मोदी जी द्वारा ओबामा या छोटी आँख वाले गणेश जी को पिलाई जाने वाली विशेष चाय है ।  







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Apr 17, 2026

07-04-2026 8. नमो मगरमच्छ मनेजमेंट मिशन

 

नमो मगरमच्छ मनेजमेंट मिशन 


तोताराम एक छोटी सी बोतल लाया जिसमें एक छोटा सा जीव था चार पैर वाला ।  



बोतल को हमारे सामने रखते हुआ बोला- यह क्या है ? 

हमने कहा- जब तू लाया है तो पता भी तुझे ही होना चाहिए कि यह क्या है ।वैसे तू जो कहे वही सही । 

बोला- यह भी कोई उत्तर है । लगने को क्या है ? इस तरह से तू मुँहदेखी भी तो कह सकता है ।  

हमने कहा- हाँ, हो सकता है जैसे कि मोदी जी जहाँ भी जाते हैं कोई रिश्तेदारी निकाल लेते हैं । इज़राइल से हमारा कोई लेना देना नहीं है और रिश्तेदारी का तो सवाल ही नहीं उठता फिर भी मोदी जी कह बैठे कि इज़राइल फादरलैंड है और भारत मदरलैंड है । सभी देशों के लोग अपने देश को फादरलैंड मदरलैंड कुछ भी तो कहते हैं । इज़राइल की तरह जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड आस्ट्रिया आदि भी अपने देश को फ़ादरलैंड कहते हैं । हमारे हिसाब से मदरलैंड  ज़्यादा सही है क्योंकि मदर कभी संदेहास्पद नहीं हो सकती । बाप का क्या है ? जो भी ताकतवर आकर देश पर कब्जा कर लेता है वही बाप बन बैठता है । हालाँकि मोदी जी का ऐसा कोई विचार भी नहीं था लेकिन लोगों को अनर्थ करने का मौका मिल गया । कल को पूछने लगेंगे कि अब हमारा मौसालैंड, फूफालैंड, चाचालैंड , नानालैंड भी बताओ । 

वैसे हमें तो यह एक मरियल छिपकली लगती है । 

बोला- नहीं, तेरा अनुमान गलत है । यह छिपकली नहीं, एक मगरमच्छ है । 

हमने कहा- हो सकता है कुछ और हो । इसे निकालकर पेड़ पर रखकर देख ।अगर रंग हरा हो जाए तो गिरगिट है क्योंकि गिरगिट भी मौके के अनुसार रंग बदल लेता है । 

बोला- यह मगरमच्छ है । 

हमने कहा- अगर मगर से क्या होता है और अगर मगर है तो फिर यह कुपोषित है। हो सकता है इसके हिस्से का पोषाहार कोई अधिकारी खा गया हो । 

बोला- यह शीघ्र ही विष्णु के मत्स्यावातार की तरह बड़ा हो जाएगा । और जैसे विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर मनु के नेतृत्व में  जल प्रलय से सृष्टि को बचाया था वैसे ही यह बंगलादेश से जुड़ी भारत की जल सीमा  वाले क्षेत्र में तैनात होकर अवैध घुसपैठ को रोकेगा । 

हमने पूछा- वैसे ऐसी अद्भुत योजना है किस चाणक्य के दिमाग की उपज ? 

बोला- सही पहचाना । यह चाणक्य के अवतार अमित शाह जी के दिमाग की उपज है । डंकी रूट से अमेरिका में घुसने वालों को रोकने के लिए ऐसी योजना तो ट्रम्प के दिमाग में भी नहीं आई । लेकिन यह वर्तमान में छिपकली और भविष्य का  मगरमच्छ बंगलादेश वालों को कैसे पहचानेगा ? 

बोला- यह गुजरात के उसी मगरमच्छ के परिवार से है जिसके बच्चे को मोदी जी बचपन में पकड़कर घर लाए थे । 


यह भी उनकी तरह बंगलदेशियों को उनके कपड़ों से पहचान लेगा । 

हमने कहा- तो फिर अयोध्या, बनारस आदि के मंदिरों के ठेकों की तरह सीमा सुरक्षा बल में गुजरात मे मगरमच्छों का 100% रिजर्वेशन पक्का । 




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15-04-2026 बिहार को सम्राट मिल गया


15-04-2026 


बिहार को सम्राट मिल गया 




आज तोताराम बहुत प्रसन्न था । 

बोला- मास्टर, आज बिहार को सम्राट मिल गया । 

हमने कहा- बहुत देर से मिला । ईसा पूर्व एक हुए सम्राट चंद्र्गुप्त मौर्य, फिर अशोक और उसके कोई पाँच सौ साल बाद मिले सम्राट समुद्रगुप्त । और उसके 1700 साल बाद के लंबे इंतजार के बाद ये सम्राट । बिहार के नए सम्राट । सुना है ये दुर्योधन के मामाजी शकुनी जी के पुत्र हैं । इन्होंने तो लगता है कोई पाँच हजार साल तक इंतजार किया । वैसे इन्हें बनना तो अफगानिस्तान का सम्राट चाहिए था लेकिन क्या करें वहाँ तो अब मुसलमानों की सरकार है । 

बोला- लगता है तू कोई स्मृतिभ्रंश सनातनी है जिसका कालबोध समाप्त हो गया है । यह भी हो सकता है तुझे अलझाइमर हो गया है । कुछ भी याद नहीं रहता । अब 21 वीं शताब्दी है । और अब उस मनुस्मृति को जलानेवाले विरोधी आंबेडकर का संविधान चल रहा है । बड़ी मुश्किल से मोदी जी ने नया संसद भवन सेंट्रल विष्टा बनवाया और उसमें राजतन्त्र का प्रतीक सेंगोल रखवाया तब कहीं जाकर सम्राट का सिंहसनारोहण संभव हुआ । 

हमने कहा- नहीं ऐसा नहीं है । हमें सब याद है । इनसे पहले नीतीश कुमार थे जो तरह तरह से इधर उधर होते रहे यही कोई दस बार मुख्यमंत्री बने लेकिन अंत में छोड़ना ही पड़ा ।   

बोला- तो फिर देर कहाँ हुई । 15 अप्रैल 2026 को नीतीश जी ने इस्तीफा दिया और 15 को ही सम्राट सिंहासनारूढ़ हुए । एक पल का भी विलंब नहीं हुआ । 

हमने कहा- लेकिन कई दिनों से मामला इधर उधर हो रहा था । बात बन ही नहीं रही थी । नीतीश जी भी फूँक फूँक कर कदम उठा रहे थे कि कहीं ऐसा न हो कि यहाँ से छोड़ें और दिल्ली पहुँचें तो राज्यसभा की सांसदी भी निरस्त हो जाए ।  लेकिन चलो धनखड़ की तरह फजीता तो नहीं हुआ जिन्हें कोई फ़ेयरवेल पार्टी देने वाला तक नहीं मिला । वैसे ये सम्राट महाभारत वाले शकुनी सुत नहीं हैं तो फिर किस वंश के कुलदीपक है । 

बोला- वैसे तो चौधरी लिखते हैं लेकिन चौधरी तो बिहार और बंगाल में ब्राह्मण होते हैं । हरियाणा और राजस्थान में जाट और कई जगह बनिए भी होते हैं । अपने चिड़ावा में नहीं थे पोद्दार पार्क के इंचार्ज चिरंजी लाल चौधरी ? उनका बेटा विश्वनाथ चौधरी था अपने साथ । 

हमने कहा- अपने को क्या ? जो भी सिंहासन पर बैठता है वह कुछ भी न हो तो भी क्षत्रिय हो जाता है । ऐसे एक नहीं अनेक उदाहरण हैं । सुनते हैं ब्राह्मणों ने शिवाजी का राज्याभिषेक नहीं करवाया था । चाणक्य ने नन्द को उसके वर्ण के आधार पर बड़ी हिकारत से संबोधित किया था । खैर, सिंहासन बैठे सो क्षत्रिय होई । वैसे सम्राट किस गुरुकुल के स्नातक हैं ?

बोला- सम्राटों के बारे ऐसी बातें पूछकर अपने को संकट में नहीं डालना चाहिए । जितने मुँह उतनी बातें । वैसे उन्होंने अपने बारे में सब कुछ हाफिटडिफीट  में बता दिया है । सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँग ले  लेकिन कहीं मोदी जी के डिग्री के चक्कर में केजरीवाल की तरह कोई 25 हजार का जुर्माना लगा दे तो मुझे मत कहना ।


-रमेश जोशी   



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17-04-2026 संतुष्टि (लघु कथा )


17-04-2026   

संतुष्टि   (लघु कथा ) 

-बिजली गई 
-???????? 
- क्या फ्यूज देखूँ  
-नहीं, अँधेरे में ठीक नहीं 
-बिजली विभाग को फोन करूँ 
-वहाँ कोई उठाता नहीं 
-तो क्या करूँ 
-पड़ोसी की देख 
-उसकी भी गई हुई है 
-तो फिर कोई बात नहीं, आराम से बैठ या कोई बहुत जरूरी काम हो तो मोमबत्ती जला ले । 

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15-04-2026 ट्रम्प का फोन आया क्या ?


15-04-2026 

ट्रम्प का फोन आया क्या ?

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 आज तोताराम ने आते ही प्रश्न किया- ट्रम्प का फोन आया क्या ? 
हमने भी प्रतिप्रश्न दाग दिया- क्यों तेरे पास स्मार्ट फोन नहीं है क्या ? और क्या तेरे फोन में बेलेन्स नहीं है या फिर इंकमिंग बंद है या नेटवर्क काम नहीं कर रहा है ?   
बोला- इतने प्रश्न एक साथ । तू तो मुझे साँस ही नहीं लेने देना चाहता, कोई मुद्दे की बात  नहीं करने देना चाहता जैसे मोदी जी हर दिन कोई न कोई मुद्दा उठाकर 'इंडिया' को उलझाए हुए हैं । 
हमने कहा- तू भी तो हमें फालतू की बातों में उलझाए हुए रहता है ।  ट्रम्प के पास कौनसी हमारी कोई गुप्त फ़ाइल है या हम कौन उसके दबैल हैं जो जब चाहे फोन करके कुछ भी बोल देगा और हम चुपचाप 'मैंने युद्ध विराम करवाया' जैसे उसके जुमले सुनते हुए भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं रहेंगे ।  
बोला- हाँ या ना में उत्तर दें । 
हमने कहा- ऐसे नहीं होता । अगर तू आज एप्सटीन फ़ाइल के नाम पर चुप्पी लगा जाने वाले किसी संत से पूछे कि क्या आपका नाम फ़ाइल से हटा दिया गया ? हाँ या ना में उत्तर दें । तो क्या यह संभव है ? उगले बने न निगले । फिर भी आज चाय जैसे जमीनी प्रश्न से उठकर सीधे ट्रम्प तक कैसे पहुँच गया ?बोला- कल मोदी जी ने बताया था-  “मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। हमने विभिन्न क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।हमने पश्चिम एशिया की स्थिति के बारे में भी चर्चा की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।ट्रम्प ने भी बताया कि बात 40 मिनट चली और अंत में उसने लिखा- बस मैं आपको बताना चाहता हूँ कि  हम सभी आपसे प्यार करते हैं  वी आल लव यू । 
हमने कहा- इतनी अंतरंग बातें ! क्या तेरे पास भी कोई एप्सटीन फ़ाइल लग गई ? क्या इन दोनों के पास तेरा नंबर है ? हम तो न तो किसी को अपना नंबर देते और न ही किसी अनजान नंबर से फोन आने पर उठाते हैं ।सुना है आजकल फोन पर जासूसी हो रही है । हो सकता है कोई चालाकी करके हमारे बैंक खाते से पैसे भी निकाल सकता है । 
बोला- नहीं ऐसा कुछ नहीं है । यह सब तो मुझे इन दोनों के ट्विटर अकाउंट से पता चला है । ये दोनों ही पहुँचे हुए संत हैं । दोनों ही भगवान के अवतार । गाँधी जी की तरह पूर्णतः पारदर्शी । किसी के कुछ छिपाते नहीं । ट्रम्प ने तो अपने अकाउंट का नाम ही 'ट्रुथ सोशियल ' । और मोदी जी तो बिला नागा हर महिने समस्त सृष्टि से मन की बात करते ही हैं । 
हमने पूछा- तोताराम, हमें उत्सुकता है कि बात किस भाषा में हुई होगी ? 
बोला- नेताओं के लिए भाषा की कोई समस्या नहीं होती ।वे दिखाने के लिए फ़ोटो खिंचवाते हैं, बिना बात हा हा ही ही करते हैं । वास्तव में तो सभी एजेंडा पहले से तय होता है । और फिर जैसे प्रेम और युद्ध में जब जायज होता है वैसे ही प्रेमकी एक यूनिवर्सल भाषा होती है । फिर ये दोनों तो संत है । दोनों प्रेम के ढाई अक्षर पढ़ रखे हैं । दोनों पंडित हैं । दोनों ईश्वर या ईश्वर के अवतार । इनके लिए कुछ भी संभव है । ट्रम्प आज ईसा के रूप में दिखे हैं कल मोदी जी की तरह विष्णु के रूप में नज़र आ सकते हैं ।    

  


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Apr 12, 2026

11-04-2026 राजा भोज और गंगू तेली


11-04-2026 

राजा भोज और गंगू तेली 





आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया- हाथ-पैर धोकर, साफ-सुथरे आसन पर शांत और एकाग्रचित्त होकर बैठ ।  

हमने कहा- आसन क्या, कहे तो सिंहासन पर बैठ जाएँ लेकिन स्वच्छ, शुद्ध और पवित्र होकर तो तुझे बैठना है । और अगर दो दिन से उपवास किया हुआ है तो और भी बेहतर ।  

बोला-  यह मुँह और एक लाख रुपए किलो का मशरूम । तू क्या कोई मोदी जी है जो मैं अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन की तरह तेरा इंटरव्यू लेने के लिए सही मानसिकता और आध्यात्मिक स्तर पर बात करने के लिए  45 घंटे उपवास करके आऊँगा । 

हमने कहा- तो फिर हमें क्यों पूजा की इस मुद्रा में बैठाना चाहता है ? 

बोला- तुझे अलाय,बलाय, भावी अनिष्ट और एफ आई आर से बचाने के लिए । 

हमने पूछा- हम कौन सा कोई कुकर्म कर रहे हैं जो अनिष्ट की संभावना हो सकती है । 

बोला- एक तो तू बात बात में ‘ही-ही,खी-खी’ करता रहता है दूसरे व्यंग्य लिखता है । 

हमने कहा- तो व्यंग्य लिखना क्या कोई अपराध है ?

बोला- हाँ, है । व्यंग्य के अतिरक्त चाहे बलात्कार, गबन, घपला कुछ भी कर ले । उनसे बचने के रास्ते हैं ।  लेकिन व्यंग्य में तो सीधे सीधे गैरजमानती गिरफ़्तारी होती है । और केस और फैसले की कोई अवधि तय नहीं । 

हमने पूछा- तो तू कैसे हमें बचा लेगा ?

बोला- वही तो उपक्रम करने के लिए तुझे आसन बिछकर बैठने को कह रहा हूँ । 

हमने पूछा- उससे क्या होगा ?

बोला- आज शनिवार है और मैं तुझे शनि महाराज की कथा सुनाऊँगा जिससे तेरा अनिष्ट निवारण होगा । 

हमने पूछा- कौन सी कथा ?

बोला- वही राजा भोज और गंगू तेली की कथा । जिसमें शनि की कुदृष्टि से खूँटी हार निगल गई थी और चोरी के इल्ज़ाम में राजा भोज के हाथ पैर काटे डाले गए थे और उस लुंज-पुंज राजा भोज को गंगू तेली की घाणी पर बैठकर कोल्हू के बैलों को हाँकना पड़ा था । 

हमने कहा- इस प्रकार गंगू तेली की कहानी के बहाने हो सकता है तू भी मोदी जी का मजाक उड़ा रहा हो । 

बोला- मोदी जी इन बातों का बुरा नहीं मानते । यह सब तो उनके कुछ अति उत्साही भक्त करते हैं । मोदी जी तो दो दो किलो गालियां खाकर पोषण प्राप्त करते हैं । वे तो खुद बताते हैं कि लोग उन्हे कौन कौन सी गालियों से विभूषित करते हैं । और नाराज क्यों होंगे । हो सकता है उनका किसी अगले-पिछले जन्म का गंगू तेली से कोई रिश्ता-नाता ही हो । 

हमने पूछा- तू  ऐसा किस आधार पर कह सकता है । 

बोला- उनके देश-विदेश में दिए गए कई भाषण हैं जिनमें वे सभी जगह से अपना कोई न कोई नाता-रिश्तानिकाल लेते हैं । हो सकता है कभी किसी तेली बहुत क्षेत्र में चुनावी रैली करते समय वे रहस्योद्घाटन कर दें कि मेरा तेलियों से बहुत गहरा और सुख दुख का रिश्ता है ।  पिछले जन्म में जब मैं राजा भोज था तब मैंने शनि देव के श्राप से पीड़ित अपने दुख के दिन गंगू तेली के यहाँ काटे थे ।  

 

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Apr 10, 2026

2026-04-08 ढोल और सौभाग्य


2026-04-08 

ढोल और सौभाग्य 






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आज तोताराम आते ही शुद्ध सनातनी की तरह ज्योतिष और वास्तु में हर समस्या का समाधान बताने वाले आजकल के प्रपंची संतों की तरह बोला- 

नृपस्य चित्तं, कृपणस्य वित्तं, मनोरथाः दुर्जनमानवानाम्। 

त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यं, देवो न जानाति, कुतो मनुष्यः॥

प्रिय भक्तो,  इसका अर्थ है कि राजा का मन (निर्णय), कंजूस का धन, दुष्टों के विचार, स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य- इन पाँचों को समझना स्वयं देवताओं के लिए भी कठिन है, तो मनुष्य की क्या बिसात वह तो कुत्ता होता है ।  

हमने कहा- आजकल के अनपढ़ बाबाओं की तरह संस्कृत की आड़ में भारतीय वांग्मय के बकवासी अर्थ मत कर । हमारी डिग्रियाँ कोई नकली या एन्टायर एम ए वाली नहीं हैं । किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट के प्रश्नोत्तरों का रट्टा लगाकर नहीं कबाड़ी है । जैसे मोदी जी चाय विक्रय, भिक्षाटन और ज्योतिष के सालिड ज्ञान के बल पर आगे बढ़े हैं, वैसे ही हमने असली टेक्स्ट बुक्स पढ़कर अपने उत्तर तैयार करके प्राप्त की है । तू अंतिम दो शब्दों का अनर्थ कर रहा है । 

‘कुतो’ का अर्थ कुत्ता नहीं बल्कि ‘कहाँ’ होता है । मतलब जब देवता ही नहीं समझ सकते तो मनुष्य ‘कहाँ’ से समझेगा ? अर्थात मनुष्य में तो इतनी बुद्धि होने का प्रश्न ही नहीं उठता । यह सच है कि अगर लंपटता की दृष्टि से देखें तो पुरुष कुत्ता ही ठहरता है । पहले अप्सराओं के लिए तपस्या किया करता था और आजकल भी दान-पुण्य, तीर्थ-व्रत हूरों और अप्सराओं के लालच में करता है । आजकल भी तो तरह तरह की देशी-विदेशी एपस्तीनी फ़ाइलें खुल रही हैं जिन्हें केरल, कश्मीर फ़ाइलों की आड़ में छुपाते छुपाते भी फ़ाइलें हैं कि खुली ही जा रही हैं और तथाकथित संस्कारी ब्लेकमेल हुए जा रहे हैं । 

बोला- पता नहीं, क्यों मेरा ही राम निकल जाता है जो तुझसे अपने मन की बात, सुख-दुख, जिज्ञासाएँ साझा करता हूँ । अच्छा हो चाय पीकर चुपचाप निकल लूँ । मैं तो पंजाब के नवाँ शहर के गुरुचरण की बात कर रहा था कि जिसका लॉटरी में पूरे डेढ़ करोड़ का इनाम निकला है । 

हमने कहा- तोताराम, यह लॉटरी का धंधा कभी जनता के फायदे का नहीं होता । 10 करोड़ के टिकट बेचकर दो करोड़ के इनाम निकाल देते हैं । कमाई लॉटरी का धंधा करने वालों की और पैसा जनता का । सभी धंधा करने वाले इसी तरह लोगों को उल्लू बनाते हैं । चुनावों में दो हजार रुपए का आश्वासन देकर जीत जाते हैं ।  कुछ लोगों को दो सौ पकड़ा कर तरह तरह नियमों की आड़ में पल्ला झाड़ लेते हैं । और फिर महंगाई बढ़ाकर उससे दोगुना फिर खींच लेते हैं ।साथ ही इससे भाग्यवाद को बढ़ावा मिलता है जो किसी समाज को पुरुषार्थ से दूर ले जाता है । ऐसे समाजों में ही धार्मिक स्थान और धर्म का धंधा और धर्म की राजनीति अधिक मिलते हैं । तभी ऐसे देशों में सरकारें स्कूल, कॉलेज, कारखाने आदि बनाने की बजाय मूर्तियाँ, धार्मिक कॉरीडोर आदि पर खरबों रुपया लुटाती हैं और अरबों डकार जाती हैं । ऐसे ही कोचिंग सेंटर वाले हजारों छात्रों से करोड़ों फीस ले लेते हैं और फिर दस-बीस झूठे सच्चे सलेक्टेड बच्चों का विज्ञापन करके फिर नए छात्रों को जुटा लेते हैं ।  

बोला- मुझे अब चाय भी नहीं पीनी । मैं चलता हूँ । मैं कोई लॉटरी का टिकट बेचने थोड़े ही आया था ।  

हमने कहा- फिर भी तोताराम, हमारे पूर्वजों ने अपने अनुभव से ज्ञान की बहुत सी बातें एक साथ इतने बढ़िया ढंग से कही हैं कि बस । अब देख राजा के बारे में कहा है कि राजा हजार ‘मन की बात’ करे लेकिन उसके मन का कुछ पता नहीं चलता । जाने कब कहाँ, कितना टेरिफ़ बढ़ा दें, कब नोटबंदी कर दे । इसी तरह कंजूस आदमी का कुछ पता नहीं चलता । कब किसी बैंक से लोन लेकर खुद को दिवालिया घोषित करके हजारों करोड़ लेकर विदेश भाग जाए । इसी तरह दुष्ट का कोई ठिकाना नहीं कि कब किस नेकी का बदला बदी से चुका दे । कब लालच में अपनी पितृ पार्टी को छोड़कर सत्ताधारी पार्टी में चला जाए । लेकिन पुरुष के मामले में भाग्य की बात से हम सहमत नहीं हैं क्योंकि जिसे भाग्य कहा जाता है वह या तो संयोग है या फिर सिंधिया, अशोक चव्हाण, शुभेन्दु अधिकारी, चिराग पासवान, हिमन्त बिस्वा आदि की सफलता एक शुद्ध सौदा है ।  लेकिन स्त्रियों पर लगाए गए इकतरफा आरोप से हम सहमत नहीं हैं ।  

बोला- क्यों ?

हमने कहा- क्योंकि इसमें स्त्री की अकेली की ही गलती नहीं होती । उसे पुरुष भ्रष्ट करता है । क्या अहिल्या अकेली ही दोषी थी ? क्या उसमें गौतम द्वारा उसकी जरूरतों को न समझना और इन्द्र की लंपटता का कोई रोल नहीं था ?

बोला- लेकिन ऋषि मुनि तो अप्सराओं के पास नहीं जाते थे । वे ही तरह-तरह से लुभाकर उनका तप भंग करती थीं । 

हमने कहा- वे क्या करें । वे कौन अपनी मर्जी से आती थीं । उन्हें तो इन्द्र की एप्सटीन फ़ाइल के तहत आना पड़ता था । 

बोला- तो ढोल का सौभाग्य से कोई संबंध हो सकता है क्या  ?

हमने कहा- यह तुमने एक वैज्ञानिक प्रश्न पूछा है । विज्ञान है ही कार्य-कारण का संबंध जानने का नाम । एक होता है अपनी रोटी-रोजी के लिए किसी के लिए भी एक तय रकम के बदले ढोल बजाने वाला । उसकी सीमित आमदनी होती है । दूसरा होता है किसी के एजेंडे के तहत ढोल बजाने वाला जैसे विदेशों में प्रभु के स्वागत में हो-ही, हो-ही चिल्लाने वाला । वह कैजुअल लेबर की तरह होता है । ढोल बजाओ । कभी किसी का तो कभी किसी का । ढोल  का धंधा न मिले तो किसी खास रंग के झंडे की रैली निकालो तो कभी किसी धार्मिक स्थान के आगे डी जे की धुन पर नाचो ।कोई पहचान नहीं ।  

सबसे सही वह होता है जो किसी पर भरोसा नहीं करता बल्कि अपना ढोल खुद बजाता है । हो सकता है कुछ समय कुछ भी न मिले लेकिन जब मौका लग जाता है तो वारे-न्यारे हो जाते हैं । सड़क से सीधा संसद पहुँच जाता है । इसीलिए तुमने देखा होगा कि अच्छे भले इंजीनीयर, डॉक्टर अपना काम छोड़कर अपने खर्चे से बड़े सेवकों के होर्डिंग लगवाते हैं, उनके जन्म दिन पर अखबारों में बधाई संदेश छपवाते हैं, यात्रा-रैली निकालते हैं, सम्मेलन करवाते हैं । और एक दिन सेवा का अवसर पा ही जाते हैं । 

सेवा का मतलब तो तू समझता ही है । बकवास करो और जनता के टेक्स के पैसे की बंदरबाँट में शामिल हो जाओ । 

-रमेश जोशी 



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Apr 9, 2026

02-04-2026 गुजरात, तंत्र और उल्लू



02-04-2026 

गुजरात, तंत्र और उल्लू 

  

 


(इसका साइज़ इतना रखेंगे कि पढ़ा जा सके 

आज तोताराम बहुत खुश था । बोला- मास्टर, विकल्प मिल गया । 

हमने पूछा- क्या ? मोदी जी का विकल्प मिल गया ?

बोला- कैसी बातें करता है । मोदी जी का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता तो मिलेगा कहाँ से ? अगर ऐसा होता तो लोग क्यों कहते 'मोदी नहीं तो कौन ? वे तो एक ही हैं, निर्विकल्प । तभी तो न कोई आगे और न कोई पीछे फिर भी मजबूरी में देश हित में रोज 20-20 घंटे इस संन्यास की उम्र में भी काम किये जा रहे हैं । 

मोदी जी नहीं, हाँ,कामधेनु का विकल्प मिल गया । सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला, तंत्र में काम आने वाला चमत्कारी उल्लू । 

हमने कहा- तेरे होते हुए इस बरामदा विष्ठा को किसी और की जरूरत ही क्या है ? वैसे सारे तंत्र उल्लुओं के बल पर ही चलते हैं । समझदारों से तो तंत्र को खतरा हो जाता है तभी वह किसी न किसी बहाने उनका मुँह बंद करवा देता है । फिर चाहे वे 'ही-ही,खी-खी' पर वीडियो बनाने वाले व्यंग्यकार हों या पोल खोलने वाले पत्रकार । सबके चेनल इसीलिए तो बंद करवाए जा रहे हैं । ​



बोला- मैं समझता हूँ तेरा व्यंग्य । लेकिन चुल्लू भर चाय में उल्लू बनने वाला तोताराम ही हो सकता है वरना लोग भले ही उल्लू को मूर्ख समझते हों लेकिन उल्लू वास्तव में होता बहुत चालाक है ।  

हमने कहा- वैसे धेनु भी चाहे कामधेनु न हो लेकिन होती बड़े काम की चीज है ।सरकार को वोट दिलवाती है, गौशाला वालों को कागजों में दर्ज होकर अनुदान दिलवाती है, किसी काम की न हो तो बूचड़खाने में जाकर तो हिन्दू बीफ निर्यातकों को कमाई करवाती है और अगर कोई मुसलमान उसे कहीं ले जा रहा हो तो गौ रक्षकों को हफ्ता वसूली करवाती है । 

बोला- बात को घुमाया मत । मैं उल्लू की बात कर रहा हूँ । गुजरात में  तांत्रिक क्रियाओं में काम आने वाला उल्लू 10-10 लाख तक में बेचा जा रहा है । दावा है कि इससे सिद्धि प्राप्त होती है जिसके फलस्वरूप सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । 

हमने कहा- उल्लू भी कई तरह तरह के होते हैं । यह उल्लू कैसा उल्लू है ? उल्लू के प्रकार के अनुसार दाम होने चाहियें । 

बोला- उल्लू तो उल्लू होता है जैसे गधा, अंधभक्त । 

हमने कहा- नहीं । एक होता है सामान्य उल्लू, एक काठ का उल्लू, एक उल्लू का पट्ठा । और एक होता है सुपर उल्लू । सुपर उल्लू ही लक्ष्मी का वाहन होता है । ये सब जगह न तो दिखाई देते हैं और न ही सरलता से पकड़ में आते हैं । ये बड़े बड़े नेताओं के आसपास ही पाए जाते हैं । ये उल्लू नहीं किसी और ही वेश में मिलते हैं । ये रात में शिकार करते नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति, परोपकार के प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं । लक्ष्मी के साथ फ़ोटो में तो कभी नहीं । ये वास्तव में मूर्ख नहीं होते जैसा कि उल्लुओं के बारे में फैलाया गया है । 

बोला- और ?

हमने कहा- सामान्य उल्लू दिन में सोते हैं और रात में पेट भरने का जुगाड़ करते हैं । इन्हें खेती के लिए भी उपयोगी माना जाता है क्योंकि ये चूहों को खाते हैं । काठ का उल्लू किसी से कुछ नहीं माँगता-चाहता । वह तो परंपरा से किसी के भी द्वारा यूज किया जाता है । उल्लू का पट्ठा स्वयं की प्रेरणा से कुछ नहीं करता । उसे अपने उस्ताद से जैसा आदेश मिलता है वैसा करता है जैसे कहीं वाहन रैली निकालना, कहीं विराट सम्मेलन करना, कभी किसी अन्य धर्म-स्थान के आगे डी जे बजाना आदि आदि ।  

बोला- साफ-साफ बता तुझे किसी मनोकामना की सिद्धि के लिए कोई उल्लू खरीदना है ?

हमने कहा- पहली बात तो हमें इनमें बातों में विश्वास नहीं है, दूसरे आठवें पे कमीशन या 18 महिने के बकाया डीए के लिए लाखों का खर्च क्यों किया जाए तीसरे गुजरात का कोई भरोसा नहीं । वहाँ नकली माल बहुत बनता है । जैसे नकली डॉक्टर, नकली जज/कोट, नकली डिग्री, नकली, पठान का नकली बच्चा और कभी न नापी गई असंभव 56 इंच की छाती । 

बोला- फिर भी देश को उल्लू बनाने में कोई कमी हो तो बता ?  

 

 


 


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