Jan 5, 2014

ईश्वर-अल्लाह किसके नाम ?



आज तोताराम कागज़-कलम लेकर हाज़िर हुआ और आते ही जल्दी मचाने लगा कि हम झटपट गाँधी जी के नाम पत्र लिख दें । हमने समझाया- ऐसी क्या जल्दी है । अभी गाँधी जी कौनसा पाँच राज्यों के विधान-सभा के चुनावों में खड़े हो रहे हैं और कौनसा सर्वे में उनके जीतने की संभावना व्यक्त की गई है कि उन्हें मक्खन नहीं लगाया तो कोई बड़ा नुकसान हो जाएगा । अगर किसी और गाँधी को लिखने की बात होती तो समझ में आ सकती थी ।

तोताराम ने कहा- वह रिस्क मैं नहीं लेता । पता नहीं लगाने जाएँ मक्खन, और पड़ जाएँ लेने के देने । सुना नहीं, उत्तर प्रदेश में कुछ छुटभैये नेताओं को गाँधी परिवार की खुशामद में पोस्टर चिपकवाने के चक्कर में पार्टी से निलम्बित कर दिया गया । हमें तो उस बूढ़े की फ़िक्र है जिसके बारे में किसी को भी सोचने की फुर्सत नहीं है और यहाँ तक कि लोग जल्दी में उसके जन्मदिन को पुण्यतिथि तक लिख मारते हैं ।

हमने कागज-कलम थामा और पूछा - कहो, क्या लिखना है ?

बोला - कुछ खास नहीं, बस यह लिख दो कि भले ही अब वे फेवीकोल, शीला की जवानी, झंडू बाम या जलेबी बाई कुछ भी गाएँ लेकिन ‘ईश्वर-अल्ला तेरे नाम' नहीं गाएँ ।

हमने पूछा - इसमें क्या खराबी है ? ईश्वर, अल्लाह, गॉड, वाहे-गुरु सब उसी एक परवरदिगार, संसार के मालिक के नाम हैं । क्या फर्क पड़ता है ? बल्कि हम तो कहेंगे कि इससे भारत जैसे बहुधर्मी देश में राष्ट्रीय एकता और मज़बूत होगी ।

तोताराम ने कहा- छोड़ यह राष्ट्र की एकता की बात । इन्हीं बातों के चलते तो उस बुड्ढे को गोली मारी गई थी और अब नहीं समझाया तो वहाँ ऊपर भी 'ईश्वर अल्ला तेरे नाम' गाने पर कोई न कोई मलयेशियायी मुसलमान या इस्लाम का कोई और सच्चा अनुयायी उसकी खोपड़ी फोड़ देगा ।

हमने कहा- इसमें खोपड़ी फोड़ने की क्या बात है ? सभी धर्म यही मानते हैं कि ईश्वर एक है और सभी मनुष्य उसकी सन्तान हैं ।

तोताराम ने कहा- ये तर्क वहाँ चलते हैं जहाँ लोग आपस में बैठकर बातें करते हैं, समझते-समझाते हैं । धार्मिक आज्ञाएँ तो वैसे ही होती हैं जैसे कि किसी ने कहा- कौआ कान ले गया तो अपना कान संभालने की बजाय लोग कौए के पीछे दौड़ पड़ते हैं ।

हमने कहा- तोताराम, पहेलियाँ मत बुझा, साफ़-साफ़ बता कि यह ईश्वर-अल्लाह का चक्कर क्या है ?

कहने लगा- अब पता चल गया तेरे अखबार पढ़ने की असलियत का । मोदी और राहुल में ही उलझा रहता है । कोई काम की खबर भी पढ़ाकर । उसने हमारे सामने अखबार रखते हुए अंडरलाइन की हुई एक खबर दिखाई कि ‘मलयेशिया की एक अदालत ने यह फैसला दिया है कि मुसलमानों के अलावा कोई अल्लाह के नाम का उपयोग नहीं कर सकेगा’ ।



हमने कहा- तोताराम, वह कौए के कान ले जाने वाली कहावत और किसी पर लागू हो न हो लेकिन तुझ पर ज़रूर लागू होती है । अरे, मलयेशिया में ईसाई लोग अपने गॉड के लिए 'अल्लाह' नाम का उपयोग करते हैं । इसके बारे में वहाँ के मुसलमान धार्मिक नेताओं का मानना है कि ईसाई पादरी 'अल्लाह' नाम से मुसलमानों को भ्रमित करके उन्हें ईसाई बनाना चाहते हैं । मुसलमान नेताओं की अपील को निचली कोर्ट ने इसे ख़ारिज कर दिया था । अब ऊपरी अदालत ने मुसलमान धार्मिक नेताओं की इस आशंका को सही मानते हुए यह फैसला दिया है कि ईसाई अपने धर्म प्रचार में 'गॉड' की जगह 'अल्लाह' नाम का उपयोग न करें । इससे अपने गाँधी जी को कोई खतरा नहीं है ।

तोताराम ने कहा- झारखंड में सरना नामक गैर-ईसाई समुदाय जैसी साड़ी, गहनों और नाक-नक्श में, एक चर्च में मदर मेरी और ईसा की लगाई गई । उस मूर्ति के बारे में सरना समुदाय ने विरोध किया कि मेरी और ईसा को उनकी देवी की शक्ल और परिधान में न दिखाया जाय, क्योकि इस तरह दिखाना उनके समुदाय को भ्रमित करके उन्हें ईसाई बनाने की एक चाल है । तब भारत के किसी कोर्ट या सरकार ने नोटिस क्यों नहीं लिया ?

हमने कहा- तोताराम, एक भारत ही तो सच्चा धर्म निरपेक्ष देश है ।

तोताराम ने यह कहते हुए हमारी बोलती बंद कर दी- मास्टर, हमारे इन तथाकथित धर्म-निरपेक्ष नेताओं से तो वे कट्टर या धर्म-सापेक्ष नेता और देश अच्छे हैं जो कम से कम झूठ तो नहीं बोलते । हमारे ये नेता तो वोटरों को ही नहीं, भगवान को भी धोखा देते हैं । ये न खुदा के हैं और न भगवान के और न ही गॉड के । ये दिल्ली की रामलीला में राम को तिलक करेंगे, अजमेर में चादर चढ़ाएँगे, इफ्तार की दावत देंगे, गुरुद्वारे में पगड़ी बँधवाएँगे लेकिन हर समय मन में अपने फायदे का गणित ही चलता रहेगा । यदि इनकी तलाशी ली जाए तो इनकी सबकी जेबों में सभी धार्मिक स्थानों से चुराए गए जूते-चप्पलें तक निकलेंगे

१५ अक्टूबर २०१३

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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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