Mar 19, 2024

थिंक बिग


थिंक बिग

 

आज ठंड कम है । कहें तो 14 फरवरी बसंत पंचमी को बसंत की आधिकारिक घोषणा के बाद पहली बार लगा कि हाँ, मौसम बदल रहा है अन्यथा तो सर्दी पलट पलटकर तेवर दिखा रही थी जैसे सरकार अचानक कोई भी अध्यादेश लाकर अपनी विज्ञापनों के बावजूद नगण्य होती जा रही उपस्थिति को स्थापित करने का प्रयत्न करती है ।

हमने तो 2002 में ही खुद को बरामदा निर्देशक मण्डल में स्थायी रूप से स्थापित कर लिया था । वैसे भी हम कौन किसी हाई या सुप्रीम कोर्ट के जज हैं जिसे अपने सत्कर्मों के बदले सरकार बार बार सेवा करने के लिए दूसरी तीसरी पारी प्रदान करेगी । कुछ लोग देश के विकास के लिए इतने अपरिहार्य हो गए हैं कि उनके लिए निर्देशक मण्डल के नियम बदले जाने वाले हैं । बिना किसी भारत रत्न की प्रतीक्षा के बरामदे में बैठे रोज पहले पेज पर छपने वाले ‘मोदी की गारंटी’ और ‘डबल इंजन की सरकार’ के विज्ञापन में अपने मतलब की कोई गारंटी खोज रहे थे जो अब तक मिली नहीं और कोई संभावना भी नजर नहीं आती ।

अचानक बरामदे पर चढ़ने की प्रक्रिया में एक बड़ा लबादा या कहें किसी अरब शेख का लंबा चोगा सा हमारे पास आ गिरा । नीचे देखा तो एक कोई दस नंबर का जूता पड़ा था । लबादे में से खोज कर निकाला तो तोताराम। बड़ा अजीब लगा ।

कहा- तोताराम, आज ही तो लगा है कि बसंत ऋतु आ गई और तू है कि यह डबल बेड की चद्दर जितनी बड़ी शाल लादे हुए है । अब तो इस दलिद्दर को छोड़ ।और यह इतना बड़ा छह नंबर की जगह दस नंबरी जूता ! हालांकि शुरू शुरू में सभी बच्चों में यह कुंठा होती है कि वे बड़ों के जूतों में पाँव डालकर जल्दी से बड़ा होना चाहते है । और इस चक्कर में अधिकतर गिर भी जाते हैं लेकिन समय के साथ अधिकतर को समझ आ जाती है कि बड़ा बड़े कामों और सोच से होता है । केवल बातों और सोचने से नहीं । तेरे साथ भी वही हुआ लगता है । गिरना ही था ।

बोला- कल मोदी जी का गुड़गावां में द्वारका एक्सप्रेस वे के उद्घाटन पर भाषण नहीं सुना ? वे अपना ‘विजन 2047’ प्रस्तुत करते हुए कह रहे थे- मैं छोटा नहीं सोचता । मैं बड़े सपने देखता हूँ । तो क्या मेरा ‘विजन 2042’ नहीं हो सकता ? हमने कहा- लेकिन मोदी जी से संगत में तेरा भी विजन 2047 क्यों नहीं ? यहाँ भी अपनी डेढ़ चावल की अलग खिचड़ी !

बोला- 2042 में पूरा एक सौ साल का हो जाऊंगा । और कितना विकास देखना है ? जितना देख लिया वही क्या काम है ।100 साल का हो जाने पर पेंशन दुगुना हो जाएगी अगर मोदी जी ने कोई अध्यादेश लाकर लोचा न डाल दिया तो बस, एक बार पासबुक में एंट्री देख लूँ । मोदी जी की बात अलग है वे तो अजर अमर हैं । ‘विजन 2047’ क्या ‘विजन 3047’ बना लें । लिमिट करने की होती है । सोचने की कोई लिमिट नहीं होती ।

हमने फिर पूछा- लेकिन तेरा यह इतना बड़ा लबादा और यह दस नंबर का जूता पहनने का क्या तमाशा है ?बोला- कहा ना, थिंक बिग । अमरीका के टेक्सस के बारे में कहा जाता है- एवेरीथिंग इज बिग इन टेक्सस । वैसे ही मैंने भी सोच कुछ बिग किया जाए । सो पहन लिया यह पहलवान दारासिंह का 53 इंची सीने वाला कुर्ता और दस नंबर का जूता ।

हमने पूछा- 56 इंची सीने वाला कुर्ता और उसी के हिसाब से जूता क्यों नहीं ? बोला- उसके लिए तो कई उचक्के घूम रहे हैं ।मेरा नंबर कहाँ लगेगा । और फिर मैं कोई विष्णु का अवतार थोड़े हूँ । हमने कहा- तो अब चल, चलते हैं । क्या इस ‘थिंक बिग कुर्ते’ और ‘थिंक बिग जूते’ के बाद रोड शो नहीं करेगा ?बोला- अब क्या रोड शो करना । सारा मूड खराब कर दिया । चलूँ, जरा मंडी जाना है सब्जी लाने ।

हमने कहा– चले जाना, ऐसी भी क्या जल्दी है । बोला- जल्दी तो नहीं है फिर भी मुझे तो पैदल जाना है । सो निकल लेता हूँ । मुझे कौन मनोहरलाल खट्टर अपनी मोटर साइकल पर पीछे बैठाकर ले जाएगा ।हमने जाते हुए तोताराम को छेड़ा- कोई बात नहीं जा, लेकिन आजकल गारंटियों का मौसम चल रहा है तो तू भी कोई एक गारंटी ही देता जा । बोला- यह तोताराम की गारंटी है कि वह आजीवन रोज तेरे यहाँ बिला नागा चाय पीने आएगा ।


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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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