Dec 18, 2025

गिरा गए ?





गिरा गए ?

आज जैसे ही तोताराम आया हमने उसे बोलने का मौका दिए बिना ही प्रश्न उछाल दिया- गिरा गए ? 
बोला- हमें कौन गिरा सकता है । हम आत्मनिर्भर भारत हैं । हमें कोई नहीं गिरा सकता । हम गिरेंगे, पड़ेंगे, फिसलेंगे, उठेंगे । सब अपनी इच्छा और अपनी आवश्यकता से और अपनी क्षमता से ।
 
हमने कहा- तोताराम, तू क्यों सत्ताधारी नेताओं की तरह चिढ़ने लगता है । हम न तो संसद में और बाहर विपक्ष को लेकर नेताओं की छिछली, सड़क छाप भाषा की बात कर रहे हैं । न डॉलर के मुकाबले रुपये के तेजी से गिरने की बात कर रहे हैं । न ही अपराधियों से चंदा लेकर उन्हें कुछ भी करने की छूट देने की गिरती नैतिकता की बात कर रहे हैं । न ही पुतिन के स्वागत में बिछाए गए किसी घटिया टेंट हाउस के रेड कार्पेट की बात कर रहे हैं । 

बोला- तो फिर किस की बात कर रहा है ? 

हमने कहा- हम तो पुतिन जी की बात कर रहे हैं । 

बोला- तो पुतिन ने क्या गिरा दिया ? 

हमने कहा- जूठन । अतिसभ्य आदमी किसी मेहमान को अपने यहाँ जब खाने पर बुलाते हैं तो कहते हैं- आज हमारे यहाँ भी जूठन गिराने की मेहरबानी करें । तो पुतिन से बड़ा मेहमान और कौन होगा । हम उनके जूठन गिराने मतलब खाने और भारत की पुण्य भूमि पर अन्य कुछ और भी गिराने की बात कर रहे हैं । 

बोला- यह अन्य क्या है ?

हमने कहा- जब दो दिन रहेंगे तो क्या नॉन बायोलॉजीकल की हाजत को रोक लेंगे ? अरे, मल-मूत्र भी तो गिराएंगे जूठन के साथ । 

बोला- ये क्या गू मूत की अशालीन और गंदी बातें कर रहा है । 
 
हमने कहा- तोताराम, बड़े आदमियों की बड़ी बातें । वे हम जैसे सामान्य लोगों की तरह कहीं भी टट्टी-पेशाब नहीं करते और न ही किसी को उनका टट्टी-पेशाब उपलब्ध हो जाता है । वे अपने साथ मोबाइल टॉइलेट लाते हैं और जाते समय अपना अमूल्य पदार्थ अपने साथ ही ले जाते हैं तो हो सकता है जूठन भी नहीं गिराते होंगे ।सुना है जब एक बार क्लिंटन आये थे तो उन्होंने भी जूठन नहीं गिराई थी और वहाँ विशेषरूप से रखवाई गई शराब तक को नहीं छुआ था । सुना है बड़े लोग अपना पानी भी अपने साथ लाते हैं ।
 
बोला- यह तो सुना है कि व्हेल मछली की उल्टी बहुत कीमती होती है । सोने से भी महंगी बिकती है । वैसे इन नेताओं के मल मूत्र से क्या कोई परमाणु ऊर्जा बनती है जो इतना दुर्लभ हो गया ?

हमने कहा- ऐसा तो क्या होता होगा । लेकिन यह हो सकता है कि मल मूत्र से उनकी बीमारियों का पता लगा कर उनके बारे में अफवाहें फैलाकर कूटनीतिक लाभ उठाया जा सकता है । 

बोला- तो फिर मोदी जी को भी कहीं विदेश में इन दोनों पदार्थों का विसर्जन नहीं करने चाहिए और अपना मोबाइल शौचालय अपने साथ ले जाना चाहिए । 

हमने कहा- मोदी जी के साथ यह समस्या नहीं है । वे अलौकिक और दैवीय हैं । और इसका यही फायदा है कि वे इस झंझट से मुक्त हैं । शाह साहब ने बताया नहीं था कि वे पार्टी की मीटिंग में सरलता से ऐसी शंकाओं पर विजय प्राप्त कर लेते हैं । 

बोला- लेकिन मैं अब तेरे यहाँ न तो चाय पीऊँगा और न ही हाजत होने पर भी पेशाब करूँगा । 

हमने कहा- न तो तू इतना महत्वपूर्ण व्यक्ति है और न ही हम इतने नीच । इसलिए इस बारे में निश्चिंत रह । 

-रमेश जोशी 

 



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