May 8, 2026

08-05-2026 झूठ और बाललीला


08-05-2026 


झूठ और बाललीला   




तोताराम आते ही बोला- अब केवल शर्म से काम नहीं चलेगा । अब तो कठोर दंड का विधान होना चाहिए । 


हमने पूछा- किस बात के लिए । नकली रेमडेसीवीयर बनाने के लिए, नकली कफ सीरप बनाने के लिए, प्रसाद के लिए चर्बी वाला घी सप्लाई करने के लिए, नकली डिग्री से डाक्टरी करके लोगों को मार डालने के लिए, झूठेवादों से जनता के वोट लेकर सत्ता पर काबिज हो जाने और फिर उसे जुमला कहकर मुकर जाने के लिए । किस अपराध के लिए कठोर दंड का विधान होना चाहिए । 


बोला- नहीं, ये तो हमारी अर्थव्यवस्था के सांस्कृतिक कार्यक्रम हैं जो सत्ता से मिलकर, उसे चुनावी चंदा देकर व्यवस्थित रूप से चलते रहते हैं । 


हमने पूछा- तो फिर किस अपराध के लिए  कठोर दंड का विधान चाहिए ?


बोला- अमित शाह जी ने कहा था कि अब ऐसा समय आने वाला है कि अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी ।

 

हमने कहा- सच बात है । हमें तो अब भी जब मोदी जी, या जय शाह अंग्रेजी बोलते हैं तो शर्म आती है ।  


बोला- मैं सब समझता हूँ तू कहाँ और क्या बोल रहा है लेकिन सच बात यह है कि अंग्रेजी ने हमारे राष्ट्र की अस्मिता और सम्मान को ही ठेस नहीं पहुंचाई है बल्कि हमारे देश के बच्चों को झूठा और मक्कार बना डाला है । वैसे यह खोज अमित शाह जी की नहीं है । यह उच्च स्तर का सत्य तो उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने खोजा है । 


हमने कहा- क्या है वह अंग्रेजी का आपराधिक कृत्य जिसे उपाध्याय जी ने खोजा है ?


बोला- उन्होंने सप्रमाण बताया है कि अंग्रेजी में एक कविता है-


जॉनी जॉनी 

यस पापा 

ईटिंग शुगर 

नो पापा 

ओपन योअर माउथ 

हा हा हा

 

अब बताओ इतना बड़ा झूठ इस देश के बच्चों को अंग्रेजी कविताओं के माध्यम से सिखाया जा रहा है । सत्यवादी हरिश्चंद्र के देश में यह सब कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है । यह देश तो है ही सत्य का ।

 

हमने कहा- तो फिर देश के सभी अंग्रेजी स्कूलों को संस्कृत माध्यम कर दिया जाना चाहिए । अंग्रेजी बोलने वाले देशों से सभी संबंध तोड़ लेने चाहियें । 


बोला- नहीं, बस पाठ्यक्रम से ऐसी झूठ सिखाने वाली कविताएं निकाल देनी चाहियें । 


हमने कहा- लेकिन तोताराम, हमें तो अंग्रेज इतने अनैतिक नहीं लगे बल्कि किसी हद तक हमसे ज्यादा लोकतान्त्रिक थे । स्वतंत्रता से पहले बहुत से भारतीयों जैसे श्याम जी कृष्ण वर्मा,सावरकर, लाल हरदयाल, मदन लाल ढींगरा, गाँधी आदि ने ब्रिटेन में रहते थे हुए भारत की आजादी के लिए काम किया, संगठन बनाए, अखबार निकाले लेकिन उन्हें कभी भी स्टेंस स्वामी, सुधा भारद्वाज, हैनी बाबू, तेलतुंबड़े, उमर खालिद, देवांगना कलिता, नताशा नरवाल आदि की तरह बिना मुकदमे के अनिश्चितकाल तक के लिए हिरासत में नहीं रखा ।  वहाँ की किसी सुषमा स्वराज ने नहीं कहा कि भारत मूल के ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री बनाया गया तो मैं सिर मुंडवा लूँगी । 


बोला- फिर भी जब कविता में जॉनी अपने पापा से चीनी खाने के बारे में झूठ बोलता है तो इससे गलत मेसेज तो जाता ही है । इस कविता से बच्चे आज थोड़ी चीनी के लिए झूठ बोलना सीख रहे हैं कल को झूठ बोलकर नीरव मोदी, ललित मोदी, माल्या, मेहुल चौकसे आदि की तरह कोई बड़ा घोटाला भी कर सकते हैं । कल को दो करोड़ नौकरी हर साल का बड़ा झूठ भी बोल सकते हैं । बुराई बढ़े उससे पहले ही उसे जड़ से समाप्त कर देना चाहिये । तभी कवियों ने कहा है- 


पावक बैरी रोग ऋण सपनहुँ राखिए नाहिं 

ये थोड़े हू बढ़त पुनि माह जातं से जाहिं  


हमने कहा- लेकिन तोताराम, अपने हिन्दी साहित्य में सूर का एक बहुत प्रसिद्ध पद है-


मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो॥

चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।

मैं बालक बहिंयन को छोटो, छींको केहि बिधि पायो॥

ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।

तू जननी मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो॥

जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।

यह ले अपनी लकुटि-कमरिया, बहुतहि नाच नचायो॥

'सूरदास' तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥ 


इसमें सबको पता हैं कि कृष्ण झूठ बोल रहे हैं लेकिन फिर भी माँ उसे हँसकर गले से लगा लेती है । क्या इससे झूठ बोलने का मेसेज नहीं जाता । 

इसी तरह जब एक बार कृष्ण हाँडी में से मक्खन चुराते हुए रँगे हाथों पकड़े जाते हैं तो वे कहते हैं कि मैं मक्खन चुरा नहीं रहा था बल्कि हाँडी में गिर गई चींटी निकाल रहा था । 


बोला- यह झूठ नहीं । यह कृष्ण की बाललीला है ।और हमारे यहाँ लीला का लाइसेंस तो भगवान, देवता ही क्या छोटे बड़े नेताओं सभी को है । 


-रमेश जोशी  



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