Aug 1, 2026

29-07-2026 मंगल-मिलन, पाप और प्रायश्चित


29-07-2026


मंगल-मिलन, पाप और प्रायश्चित 






आज जैसे ही तोताराम आया हमने कहा- तोताराम,पेपर लीक … 


उसने हमारा वाक्य भी पूरा नहीं होने दिया और बिफर पड़ा- क्या हर समय पेपर लीक, पेपर लीक लगा रखी है । वहाँ जंतर मंतर पर वे लौंडे-लपाड़े मोदी जी को परेशान किए हुए हैं और यहाँ तू इस  सड़ियल चाय के बहाने मेरे प्राण खाता है । अच्छा था पुराना ज़माना जब गुरु अपने स्तर पर सब निर्णय ले लेता था और परिणाम सुना देता था या कि जैसे महंतों और संघ परिवार में गुरु अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर देता है और बात खत्म , न कोई चुनाव, ना वोटिंग । यह सब नेहरू द्वारा मेकॉले की परीक्षा पद्धति को स्वीकारने से हुआ है ।  


और फिर कल ‘मंगल-मिलन’ में मोदी जी ने कह तो दिया कि पेपर लीक एक घोर पाप है । 


हमने कहा- वैसे कुछ भी हो तोताराम, मोदी जी इवेंट के मामले में तो अनुपम और सर्वश्रेष्ठ हैं । थूकने-हगने-मूतने-खाने-पीने जैसे रूटीन काम को भी एक राष्ट्रीय घटना बना देते हैं । लगता है ऐसा महान काम तो आज से पहले किसी ने किया ही नहीं । अब तो देश के दिन फिरने ही वाले हैं । शाम तक अच्छे दिन आ ही जाएंगे । कल मंगलवार को मंगल-मिलन मनाया , फिर कभी सोमवार को सांसदों की मीटिंग करेंगे तो वह ‘सोम-सत्संग’ हो जाएगा, बुधवार को विराट-बौद्धिक । अगर मल-मूत्र की बात को भी ‘मल-महिमा-महोत्सव’ नाम दे दिया जाए तो शौचालय भी हरसिंगार की खुशबू से महकने लगता है । 


वैसे अब पेपर लीक को घोर पाप घोषित कर देने के बाद कब और कौन प्रायश्चित कर रहा है ?  


बोला- पाप-पुण्य का मामला या तो धर्माधिकारियों के अंडर में आता है या फिर अंतिम निर्णय ऊपर स्वर्ग में बैठा भगवान, खुदा या गॉड लेगा । मोदी जी का इससे क्या लेना देना । पाप जाने, पापी जाने और पाप का दंड देने वाला जाने । पर दंड मिलता जरूर है, इस नहीं तो अगले जन्म में । जैसे कि यही फ़र्क स्वच्छ और पवित्र में होता है । गंगा गंदी हो सकती है, उसका जल पीने से गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं फिर भी उसका जल पवित्र है । उसे पीने से स्वर्ग प्राप्त होता है । ऐसे ही पाप का दंड भगवान देता है । उसके लिए कानून को कुछ नहीं करना । उस पर कोई धारा लागू नहीं होती । 


हमने कहा- वैसे पाप तो और भी बहुत से होते हैं जैसे सोना चुराना ।इसे पाँच महापातकों में एक माना गया है ।  राम मंदिर में सोना चोरी हुआ, केदारनाथ में ऐसा ही हुआ । काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सुना था कि सोने की जगह पीतल का पत्तर चढ़ा दिया । मथुरा के बारे में बहुत कुछ सुनने में आया था । भगवान और भक्तों की अमानत में खयानत । इन सब घोर पापों का प्रायश्चित कौन कर  रहा है ?


बोला- मोदी जी जब चाहे जिस तीर्थ में जाते हैं, गंगा में डुबकी लगते हैं, रामेश्वरम में मौन व्रत धारते हैं, केदारनाथ की गुफा में समाधि लगते हैं, नवरात्र में उपवास करते हैं ।  ये सब जाने किस किस के पापों का प्रायश्चित करने के लिए ही तो है । इस चक्कर में बहुत से जरूरी कामों के लिए भी समय कम पड़ जाता है । 


हमने कहा- बाबा तुलसी ने तो एक लाइन में ही सब कुछ समझा दिया था । कोई न समझना चाहे तो बात और है । वे कहते हैं-

दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान । 


एक बार आदमी सारी अकड़ और अहंकार छोड़कर सच को स्वीकार कर ले तो रास्ता निकल सकता है । रावण विद्वान था लेकिन उसके घमंड ने लंका का नाश करवा दिया ।

 

 वैसे मजबूरी भी हो सकती है क्योंकि लगभग सभी नेताओं के निजी कॉलेज, कोचिंग संस्थान हैं और सब हफ्ता देते हैं । अगर शिक्षा, चिकित्सा, दवा सब मुफ़्त और सरकारी कर दो, फिर देखना नीट की सब मारामारी एक दिन में बंद ।जब माल ही नहीं होगा तो वास्तव में ही चिकित्सा से सेवा करने वाले इस क्षेत्र में आएंगे । करोड़ों खर्च करने वाले सूखी तनख्वाह के लिए नहीं आएंगे । वे कोई और धंधा देखेंगे । 




  



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