Jul 31, 2026

28-07-2026 पत्रिका बनाम पादुका


28-07-2026 


पत्रिका बनाम पादुका 





वह भी क्या ज़माना था जब दस-बीस पैसे में अखबार सुरक्षित पहुँच जाता करता था । दो पाँच रुपए में 400 ग्राम की पत्रिका बुक पोस्ट से भेजी मँगवाई जा सकती थी । आज बुक पोस्ट और सामान्य पत्र का पहुंचना आश्चर्य और किसी 15 लाख के जुमले के सत्य सिद्ध होने जैसा है । अब तो रजिस्टर्ड बुक पोस्ट भी बंद ।अब ज्ञान पोस्ट शुरू हुई है जो पता नहीं किस अज्ञान से बचाने का उपक्रम है । पत्रिका भेजना पत्रिका की कीमत से अधिक।  

हम एक पत्रिका का संपादन करते हैं । लेखकों को ज्ञान पोस्ट से भेजी जाती है कोई 40-42 रुपये लगते हैं । इतने पर भी अगर पहुँच जाए तो हम भगवान से पहले मोदी का शुक्रिया करते हैं क्योंकि नहीं पहुँचने पर भी किसी का क्या बिगाड़ लेंगे । ज्यादा चूँ चपड़ करेंगे तो कहीं कोई एफआईआर हो जाएगी या कोई देशद्रोह का मुकदमा । 



आज फैजाबाद से एक लेखक मित्र का फोन आया कि उन्हें पत्रिका नहीं मिली । दुखी थे । पत्रिका भी गई और गांठ से 42 रुपये भी । 


जैसे ही तोताराम आया, हमने कहा- तोताराम, सरकार का एक भरोसा हुआ करता था ।आदमी  आँख मीचकर नोट ले लेता है, डाक के डिब्बे में पत्र डाल देता है यह सोचकर कि किसी बनिए का थोड़े है, सरकारी है पहुँच ही जाएगा लिया पर अब वह भी खत्म । 


बोला- तो क्या हो गया ? एक पत्रिका ही तो है । और पढ़कर ही क्या कोई फाड़कर एक की  दो कर लेगा । लाखों नकली डिग्रियाँ लिए घूम रहे हैं, करोड़ों असली डिग्री लेकर नौकरी के इंतजार में बूढ़े हो गए । तू अपनी पत्रिका को रो रहा है वहाँ अयोध्या में भगवान राम का गर्भगृह टपक रहा है, पादुका पता नहीं कौन उठाकर ले गया ? आस्था आहत हो गई, धर्म की चूलें हिल गई । 


हमने कहा- लेकिन वह तो संघ और सरकार का निजी मामला है । किसे दोष दें । दूर दूर तक कोई विधर्मी और नास्तिक नहीं । सब के सब संस्कारी और परिवार वाले । 


बोला- लेकिन तू इस बारे में कुछ नहीं बोल सकता है । योगी जी ने साफ चेतावनी दे दी है कि अफवाहें फैलाकर धर्म का अपमान न करें । और फिर तूने कौन चन्दा दिया है जो बातें बना रहा है । पता नहीं किसे 1990 में 5 रुपये का चन्दा दिया था । ज्यादा की शुचिता की फिक्र है तो ये पकड़ तेरे पाँच रुपए और बंद कर सनातन को बदनाम करना । 


हमने कहा- बात पाँच रुपये की नहीं है । बात राम जी की है ।वैसे तो जो राम को लाए हैं वे ज़िंदगी भर राम को नाबालिग और निरक्षर रखेंगे । क्या पता पढ़ लिखकर राम लला कोई प्रश्न न उठाया दें । फिर भी अगर कभी राम लला को मंदिर के परिसर में ही थोड़ा बहुत घूमने का मन हुआ तो बिना पादुका के उनके पैर नहीं जल जाएंगे ?  


बोला- कोई भी मूर्ति कितनी भी प्राण प्रतिष्ठित की गई हो लेकिन न तो खाती है, न पीती है। अगर ऐसा होता तो गर्भगृह में अटेच टॉइलेट जरूर होता । बहुत सी बातें भक्तों के मनोरंजन और शिक्षा के लिए भी होती हैं लेकिन उनका रूप थोड़ा भिन्न होता है । जैसे जगन्नाथ भगवान का हर साल गरमियों में ठंडे जल से ज्यादा स्नान करने पर सर्द गरम होकर बुखार हो जाता है और 15 दिन तक चिकित्सा चलती है । हाँ, अगर इसे एक शिक्षा और याद दिलाने के रूप में लिया जाए तो शायद जनता का कल्याण हो और वह मौसमी बीमारियों के बारे में सजग रहे ।






 





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30-07-2026 नरेंद्र-मंदिर या किन्नर-मंदिर या नरेंद्र-किन्नर-मंदिर


30-07-2026 


नरेंद्र-मंदिर या किन्नर-मंदिर या नरेंद्र-किन्नर-मंदिर 

 

  

प्रिय नरेंद्र भाई, 

केम छो ? मजा ? तमे केता था कि तमे नॉन बायोलॉजीकल छो। कथन साचो । हवे तो भगवान बणी गया । बिहार माँ तमारा मंदिर नो प्रस्ताव पण पास थयी गयो । हवे पछी सूँ जोइए । 


वैसे कहा जाता है कि जीते जी व्यक्ति को अपनी मूर्ति स्थापित नहीं करवानी चाहिए । अशुभ माना जाता है । मायावती ने अपनी मूर्तियाँ लगवाई थीं सो अब मूर्ति बनी बैठी है । जीवत समाधि ।  

 आपके मंदिर की बात सुनते ही हमारा दिमाग चालू हो गया । उत्सुकता है कि इस मंदिर में आपकी किस छवि की मूर्ति होगी । हमने आपको फ़ोटो में हजारों रूपों में देखा है । साक्षात देखने का तो सौभाग्य मिल नहीं । फिर भी कोई तो बात है । दुनिया ऐसे ही तो दीवानी नहीं हो जाती । हमने एक महिला को आपके चेहरे के ग्लो से गदगद हुए देखा है । 


आपने खुद छप्पन इंची, पठान का बच्चा, एक अकेला सब पर भारी होते हुए भी कभी इन किन्नरों का अपमान नहीं किया । इन्होंने आपमें ऐसा क्या देखा कि फिदा हो गए ।जैसे आप विभिन्न समाजों के बीच जाकर उनके वेश बनाते हैं, वाद्य बजाते हैं, उनसे कोई न कोई रिश्ता जोड़ते हैं तो हो सकता है कि किसी दिन आप इनका मनोबल बढ़ाने के लिए इनके बीच जाएँ और बताएं कि पिछले जन्म में आपको एक वर्ष का अर्जुन वाला अनुभव भी है जब उसने राजा विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य सिखाया था । 


 भगवान की सबसे बड़ी कमजोरी होती है भक्त । कहते हैं भगवान भक्त के वश में होते हैं । एक बार तुलसीदास जी मथुरा गए द्वारिकाधीश के मंदिर में । तुलसी ठहरे राम भक्त, और कोई छवि जमती भी कैसे जैसे कि जिसके मन में आपकी छवि बस जाती है वह फिर गांधी, नेहरू, सुभाष, अटल किसी भी छवि से प्रभावित नहीं होता । सो तुलसी बाबा कहने लगे-


कहा कहूँ छवि आपकी भले बने हो नाथ 

तुलसी मस्तक तब नवे जब धनुष बाण लो हाथ ॥  


हो सकता उस समय मथुरा में चुनाव होने वाले थे तो तुलसी दास जी को खुश करने के लिए कृष्ण से धनुष बाण लेकर राम का वेश बना लिया । कहीं ये भक्त किन्नर आपसे कुछ ऐसा वैसा कहें तो सोच समझकर कदम उठाइएगा ।जोश में आकर ‘जियो जियो रे लला’  मत गाने लग जाना । इनका ‘जियो’ अंबानी वाला नहीं है । कुछ और ही है ।  एक दो सीट की ही तो बात । अगर कहीं कॉकरोचों की ‘ नीम का पत्ता कड़वा है । नरेंद्र मोदी भ..वा है’ की तरह मजाक बना  लिया तो मुश्किल हो जाएगी । वैसे ही जब से ट्रम्प ने आपको बात बात में हड़काना शुरू किया है तो लोगों ने आपको नरेंदर सरेंडर कहाँ शुरू कर दिया कि नहीं ?  । 


 जहां तक इस मंदिर के नामकरण की बात है तो उसमें भी सावधानी जरूरी है । सामान्य रूप से ‘नरेंद्र-मंदिर’ हो तो ठीक है लेकिन अगर बाहर लिखा हो  ‘किन्नर मंदिर’  और अंदर आपकी 56 इंची छाती वाली मूर्ति तो ? और अगर ‘नरेंद्र-किन्नर-मंदिर’ नाम रख दिया तो फिर अर्थ का अनर्थ तय है । 

एक और बात । आजकल बड़े बड़े पुल और सड़कें उद्घाटन से पहले या तत्काल बाद दिवंगत हो रहे हैं । यह बिहार है और कमीशन खाने वालों की क्षमता का कोई  ठिकाना नहीं है । जगन्नाथ मिश्र और लालू जी जमाने एक मुर्गी रोज 800 रुपए का खाना खा जाती थी । हो सकता है कि उस समय आपके वाला 80 हजार रुपए किलो वाला 100-100 ग्राम मशरूम मुर्गियों को रोज खिलाया जाता हो । अभी कोरबा छत्तीसगढ़ में अटल जी की एक तथाकथित कांस्य प्रतिमा बरसात में धुल जाने के बाद पता चला कि वह घटिया सीमेंट से बनाकर रंग कर दिया गया था ।इसके निर्माण का ठेका जिला भाजपा अध्यक्ष को दिया गया था ।राजस्थान में भी स्कूलों के कमरों की छतें गिर रही हैं । कहीं आपके मंदिर की छत गिर गई तो ?

 

मंगलं भगवान विष्णु…   


आपका 

रमेश जोशी 



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31-07-2026 मूत्र-महिमा

31-07-2026 


मूत्र-महिमा 



प्रिय वीजिनाथन कामकोटि, 


खुश रहो । वैसे आपका फ़ोटो देखा तो लगा आपको खुश रहने के लिए किसी आशीर्वाद की जरूरत नहीं है । आप स्वभाव से ही सहज खुश, प्रसन्न रहने वाले आनंदी व्यक्ति लगे । हम जीवन भर अध्यापक रहे और अब भी कोई 75 साल तक का व्यक्ति हमारे सामने पड़ता है तो हम उम्र का फायदा उठाते हुए उसे अपना शिष्यतुल्य मानकर उस पर लद जाते हैं । 


आयु के हिसाब से आप हमारे सबसे छोटे बेटे से भी एक साल छोटे हैं । उसने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया था । उसके बाद मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चला गया । उन दिनों आईआईटी से स्नातक होने वालों को फटाफट स्कॉलरशिप या  नौकरी मिल जाती थी इसलिए वे आईआईटी से एमटेक नहीं करते थे । आज भी आईआईटी से एमटेक करने वाले अन्य संस्थानों के स्नातक ही अधिक होते हैं । टीचिंग में तो आईआईटी वाले आज भी कम ही जाते हैं । अच्छा है आप टीचिंग में आ गए । जब प्रतिभाशाली लोग टीचिंग में आएंगे तभी तो शिक्षा का स्तर सुधरेगा । अन्यथा तो शिक्षा का वही हाल होगा जो इंटर पास या नकली डिग्री वालों के मंत्री बन जाने से होता है । 


हम आपको पहले नहीं जानते थे । हम तो 50 साल पहले ओबामा, ट्रम्प, मोदी जी, शाह, अनुराग ठाकुर, स्मृति ईरानी आदि को भी नहीं जानते थे । अब पेपर लीक के बाद आपको इस लीकेज रोकने वाली कमेटी में रखा गया और प्रियंका गांधी ने आपका नाम लिए बिना कहा इस कमेटी में एक गौ मूत्र विशेषज्ञ भी है तो आप चर्चा में आ गए । संस्कारी शिक्षाविदों को लगा कि इस प्रकार प्रियंका एक विद्वान का अपमान कर रही हैं तो उन्होंने एक पत्र लिख डाला ।वैसे इन संस्कारी विद्वानों की आत्मा जब 50 लाख की गर्ल फ्रेंड, कटुआ, मुल्ला, जर्सी गाय आदि कहा गया तब नहीं कुलबुलाई । 


वैसे आप कंप्यूटर के आदमी हैं । उच्च पद पर है, कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हैं । निशिकान्त दुबे, अनुराग ठाकुर, स्मृति ईरानी, विधूडी आदि केवल एक काम ‘गाली निकालने’ के बल पर सांसद बन सकते हैं तो आप तो काम कोटि हैं मतलब करोड़ों काम के हैं  । वैसे यदि आप केवल मूत्र के विशेषज्ञ ही होते तो भी हमारी दृष्टि में आप कम महत्वपूर्ण नहीं होते ।और फिर गौ मूत्र !  ‘गौ मूत्र विशेषज्ञ’ कहने पर  पार्टी के एजेंडे के तहत प्रियंका को घेरने के लिए मुद्दा बनाने वाले कमअक्ल लोग नहीं जानते मल-मूत्र की महिमा । 


आज हम सोचते हैं कि मल मूत्र और वह भी राष्ट्र माता का ! अलौकिक, पवित्र !! मल-मूत्र किसी का भी हो वह उसके शरीर का सार  तत्व होता है । शरीर भोजन-पानी के सभी तत्वों का अवशोषण नहीं कर सकता और वे पर्याप्त मात्रा में मल मूत्र के साथ निकल जाते हैं । चिकित्सक मल मूत्र की जाँच से बहुत सी बातों का अनुमान लगाते हैं । आजकल तो सुना है कि दुनिया के बड़े बड़े नेता अपना मल मूत्र भी किसी अन्य देश में नहीं गिराते । अपने मोबाइल टॉइलेट में सही सलामत संचित करके अपनी मातृभूमि में ले जाते हैं । मोदी जी दुनिया के सबसे बड़े नेता हैं लेकिन वे अपने मल मूत्र के साथ क्या व्यवहार करते हैं, पता नहीं । 


पेट ही तंदुरुस्ती और बीमारी का प्रमुख कारण है । अगर पेट ठीक है तो सब ठीक है । और पेट ठीक होने का प्रमाण है कि मल मूत्र का त्याग समुचित हो । मतलब न ज्यादा और न कम । कब्ज और दो से अधिक बार दस्त बीमारी ही माने जाते हैं । दस्त के बारे में कहते हैं- एक बार योगी, दो बार भोगी, तीन बार रोगी । और अगर कोई पेपर की तरह जब चाहे लीक हो जाए तो फिर व राष्ट्रीय समस्या बन जाती है । अब लीकेज के इस मामले में आपका शामिल होना कम महत्वपूर्ण नहीं है । आप गौ मूत्र विशेषज्ञ हैं । हम सब जानते हैं कि सभी का कभी न कभी अपने बचपन में, जागृति या स्वप्न में लीकेज जरूर हुआ होगा । यह संकट कोई बायोलॉजीकल या नॉन बायोलॉजीकल नहीं देखता । संसद या सड़क भी नहीं । कहीं भी, किसी को भी हो सकता है । सोचिये अगर हनुमान को संजीवनी बूटी लाते समय या अर्जुन को स्वयंवर में तेल के पात्र में देखकर मछली की आँख बेधते समय ऐसा लीकेज हो जाता !    


मल मूत्र सनातन हैं । जैसे समुद्र और सृष्टि । कहते हैं पहले असुर देवताओं पर आक्रमण करके समुद्र में जा छुपते थे और देवता उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते । इस समस्या को सुलझाने के लिए अगस्त्य ऋषि ने तीन चुल्लू में समुद्र को पी लिया । देवताओं ने  असुरों को निकालकर बदला ले लिया लेकिन अगस्त्य जी ज्यादा देर तक समुद्र को झेल नहीं पाए और उनका समुद्र लीक हो गया । और चूंकि लीक हुआ ऐसा तरल पदार्थ नमकीन होता है सो समुद्र अब तक नमकीन है । अगस्त्य जी के उसी पेशाब से सभी चौदह रत्न निकले, शराब, अमृत, पारिजात, लक्ष्मी, कामधेनु, कल्पवृक्ष आदि । समुद्र के आसपास खनिज तेल निकलता है, समुद्र से ही मोती निकलते हैं, समुद्र से मछलियाँ मिलती हैं ।अगस्त्य जी  का यह लीकेज कितना महत्वपूर्ण है । 


इस प्रकार जिसने मूत्र अर्थात समुद्र को समझ लिया उसने सृष्टि और स्रष्टा सबके रहस्य को समझ लिया । अगर कभी पेशाब बंद हो जाए तो पता चलेगा कि मूत्र विशेषज्ञ का क्या महत्व होता है । 


मूत्र ऊर्जा का भी अक्षय स्रोत है जैसे पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा । कहते हैं महान लोगों के पेशाब में चिराग जलते हैं । रोज अपना  पेशाब इकट्ठा करो और ऊर्जा बनाओ। आत्मनिर्भर भारत । 


1977 में जनसंघ ने सत्ता में घुसने के लिए सभी इंदिरा विरोधी दलों के साथ कंधे पर हल रखकर ‘जनता पार्टी’ बना ली ।अब अपने बल पर सत्ता में आने पर 1977 वाले हल और हलधर को उतारकर फेंक दिया ।  उस समय के प्रधानमंत्री मोरारजी भाई शिवाम्बु अर्थात अपने पेशाब का सेवन करते थे । वे इसे औषधीय प्रयोग मानते थे । मोरार जी की निगाह में आने के लिए चरण सिंह, देवीलाल, राज नारायण, जार्ज फर्नांडीज आदि ने भी इस आत्मनिर्भर भारत का अनुसरण करने की बात कही । अगर आज ऐसी स्थिति होती तो कल्पना कीजिए । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्व मूत्र पान दिवस घोषित हो जाता । राष्ट्रीय मूत्र शोध संस्थान स्थापित हो गया होता । भक्तों के मूत्र पान करते हुए फ़ोटो प्रसारित होते । मूत्र मेले आयोजित होते ।


अब आपको इस मामले में किसी तरह की कमतरी का अहसास नहीं होना चाहिए । 


गर्व से कहो हम … ।  




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Jul 27, 2026

19-07-2026 मोदी जी का गुपचुप मीगा


19-07-2026 

मोदी जी का गुपचुप 'मीगा'  




हमने कहा- तोताराम, आजकल हमें मोदी जी को लेकर बहुत चिंता हो रही है । 


बोला- चिंता करने की कोई बात नहीं है। मोदी जी बाल ब्रह्मचारी, संयमी, शांतचित्त, ऋषि हैं । अवतारी हैं, अनादि हैं, अनंत हैं । जब तक चाहेंगे इस देश-दुनिया की सेवा करेंगे और फिर अपनी माया समेटकर अपने लोक को चले जाएंगे । 

हमने कहा- हमें उनकी क्षमताओं पर कोई संदेह नहीं है लेकिन आजकल जिस तरह ट्रम्प जैसे लफंगे लोग उन्हें गरिया रहे हैं, मजाक बना रहे हैं, कभी भी उनका करियर खराब करने की धमकी दे रहे हैं, जब जितना चाहे टेरिफ़ लगाकर मोदी जी को टेरिफाइ कर रहे हैं, जब चाहे युद्ध विराम करवाने का जुमला फेंककर मोदी जी को लज्जित कर रहे हैं, कभी ईरान या रूस से तेल नहीं खरीदने का आदेश देकर उन्हें अपनी औकात दिखा रहे हैं, उसी से हमें चिंता हो रही है । कहाँ तो 56 इंची छाती वाला पठान का बच्चा, कुर्सी को तुच्छ समझने वाला, कभी भी झोला उठाकर लेकर चल देने की घोषणा करने वाला मस्तमौला फकीर और कहाँ यह बेइज्जती, यह तमाशा ! 


बोला- आज मोदी जी को चुपचाप डरा हुआ सा देखकर कुछ भी उल्टा-सीधा समझने की जरूरत नहीं है । इनकी चुप्पी को कायरपन मत समझ । कभी कभी महान लोगों को कूटनीति के तहत इसी तरह दिखाना पड़ता है । हो सकता है जिसे कमजोर समझकर लोग लतिया रहे हों गली का वह मरियल सा खजुहा कुत्ता कोई बहुत खतरनाक जासूसी कुत्ता हो, किसी गुप्तचर एजेंसी का हैड हो जो वेश बदलकर किसी बड़े और सीक्रेट मिशन पर हो । 


हमने कहा- ऐसा तो नहीं है । मोदी जी जब चाहे बहुत ऊंची ऊंची फेंकते हैं । 24 जून 2023 को वाशिंगटन में कैनेडी सेंटर में बोलते हुए कहा था कि आज भारत में हर साल एक नई IIT और एक नया IIM बन रहा है। हर सप्ताह एक नई यूनिवर्सिटी बन रही है। हर दो दिन में एक नया कॉलेज बन रहा है। हर दिन एक नई आईटीआई की स्थापना हो रही है। जबकि हमें तो ऐसा कुछ होता-हवाता दिख नहीं रहा है । पिछले दस सालों में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल जरूर बंद हो गए । 


बोला- वास्तव में खुल तो रहे इससे कई गुना ज्यादा है लेकिन मोदी जी दुनिया को सच बता  नहीं रहे हैं । पत्रकारों को कहीं कोई जगह खाली खेत दिखाई दे रहे हैं जबकि वहाँ गुप्त रूप से विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं । वैसे ही जैसे कलाम साहब ने अमेरिका को धोखा देकर पोकरण में गुप्त रूप से परमाणु विस्फोट किया था । 

 

ट्रम्प दुनिया में हल्ला मचा रहा है- ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ लेकिन हो कुछ नहीं रहा है । मोदी जी किसीको को बताते नहीं हैं। गुपचुप काम कर रहे हैं । दुनिया को दिखाने के लिए बावले बने हुए हैं। लोग समझते हैं कायर हैं, किसी फ़ाइल से डरे हुए हैं । पर्ची देखकर योर एक्सीलेंसी बोल रहे हैं । बहुत सी बातों में चुप लगा जाते हैं । सब गुप्त योजना है । 


 वैसे तो इंडिया आल रेडी ग्रेट है फिर भी किसी एक दिन विस्फोट कर देंगे । दुनिया को भारत की प्रगति दिखाकर चमत्कृत कर देंगे । यह देखो ग्रेटेस्ट भारत । अमेरिका से भी ग्रेट । वैसे ही जैसे इधर-उधर से सांसद और विधायक जुगाड़कर कर भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बना रहे हैं । 

आज का अखबार पढ़ा ?


हमने पूछा- उसमें क्या है ? वांगचुक को उठवा लिया । 


बोला- और कुछ भी तो है । विकास का गुजरात मॉडल । दाहोद में 25 घंटे में बैंक खड़ा कर दिया । 

हमने कहा- वास्तव में नहीं । यह तो वहाँ के कुछ ठगों ने एक ज्वेलर से सोने का एक बिस्किट खरीदने के नाम पर उसे दिखाने के लिए वैसे ही एक बैंक का एक सेट अप खड़ा कर दिया था । ऐसे तो गुजरात में कुछ लोगों ने ऐसे ही राजमार्ग पर अवैध टोल बूथ भी चला रखा था ।

 

बोला- लेकिन इससे मोदी के वाइब्रेन्ट गुजरात की क्षमता का तो पता चलता ही है ।क्षमता तो क्षमता है । किसी भी तरह की हो सकती है । 


हमने कहा- फिर तो भारत पर 60 सालों में हुए  55 लाख करोड़ कर्ज का मोदी जी के 12 सालों में बढ़कर 255 लाख करोड़ हो जाना भी विकास है ?


बोला- बिल्कुल । अमेरिका की जीडीपी है 31 ट्रिलियन और कर्ज है 39 ट्रिलियन । अभी भारत की जीडीपी है 5 ट्रिलियन और कर्ज 2.5 ट्रिलियन । एक बार कर्ज 40 ट्रिलियन हो जाने दे उसके बाद जीडीपी भी बढ़ आएगी ।

 

हमने कहा- जीडीपी का तो पता नहीं लेकिन कर्ज जरूर बढ़ता जा रहा है ।


बोला- कर्ज भी जिसकी कोई साख होती है उसी को मिलता है । तुझे बैंक अब पेंशन पर एडवांस नहीं देता और अंबानी अदानी का लाखों करोड़ कर्ज माफ कर दिया जाता है और लाखों करोड़ कर्ज दे दिया जाता है ।  

तुझे ये बड़ी बातें समझ  नहीं आएंगी । चल चाय बनवा । 



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27-07-2026 जाहिल, ज़ालिम, जल-जिहादी जुनैद बनाम जोशी


27-07-2026 


जाहिल, ज़ालिम, जल-जिहादी जुनैद बनाम जोशी 


आज जैसे ही तोताराम आकर बैठने को हुआ तो हमने कहा- क्या कोई जरूरी काम है, तोताराम ? 


बोला- वही जरूरी काम जो रोजाना होता है । आना, मन की बात करना, चाय पीना और चले जाना । क्या यह कोई काम नहीं है ? अरे यह दुनिया है ही क्या ? दर्शन मेला ही तो है, मिलन-जुलना ही तो है । कोई न कुछ साथ लेकर आता है और न कुछ साथ लेकर जाता है । यहीं सब कुछ लुटाना है ।सबसे प्रेम से मिलते रहो । तभी तो तुलसी बाबा कहते हैं- 

तुलसी या संसार में सबसे मिलियो धाय । 

ना जाने किस देस से पुरस्कार मिल जाय ॥ 

यदि मोदी जी घर बैठे रहें तो पुरस्कार कैसे मिलें ? दुनिया में भारत का डंका कैसे बजे ?


हमने कहा- मोदी जी की बात अलग है। वे तो नेहरू जी से भी अधिक समय तक देश की सेवा करने वाले, दारासिंह से भी तीन इंच अधिक 56 इंची छाती वाले, दुनिया में सबसे अधिक देशों के सर्वोच्च सम्मान से विभूषित प्रधानमंत्री हैं । 2047 का एजेंडा घोषित कर ही चुके हैं । आगे भी जब तक आवश्यक होगा सेवा करते ही रहेंगे क्योंकि वे अवतारी है जिन पर सन्यास जैसे लौकिक नियम लागू नहीं होते । 

 

लेकिन हम तो सामान्य आदमी हैं और ज़माना खराब है इसलिए हम चाहते हैं कि अब तुम यहाँ न ही आओ तो ठीक है । 


बोला- मैं तो नेहरू जी के जमाने से यहाँ आता और चाय पीता रहा हूँ । अब क्या हो गया ? 


हमने कहा- तब की बात और थी । अब योगी जी और मोदी जी हैं । न खाते हैं, न खाने देते हैं । कोई भी अपराध चाहे वह आर्थिक हो या सामाजिक या धार्मिक या फिर जिहादी; बच नहीं सकता । अभी गाजियाबाद के पास के एक जिहादी से पूछताछ चल रही है ।  


मोबाइल की एक छोटी-मोटी दुकान चलाने वाला है कोई । जंतर-मंतर पर कॉकरोचों को मुफ़्त खाना-पानी उपलब्ध करवा रहा था । कहाँ से आ रहा था इतना पैसा ? जरूर कोई आर्थिक अपराध हो रहा था सो धर लिया पूछताछ के लिए योगी की पुलिस ने । अब कल को भजन लाल की पुलिस मुझे धर ले और पूछे कि इस महँगाई में जहां लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है वहाँ तू रोज कहाँ से चाय, पकौड़ी का भंडारा लगा रहा है ? तुझे तो काँवड़ियों की सेवा करने के लिए दिल्ली सरकार की तरफ से कोई ग्रांट भी नहीं मिल रही है । 


बोला- कहीं तू जुनैद की बात तो नहीं कर रहा ? वह तो अपनी वेशभूषा से ही पहचाना जा सकता है । ये लोग जब मौका मिलता है तरह तरह के जिहाद करते रहते हैं । पहले लव जिहाद, यू पी एस सी जिहाद, फिर वैष्णोदेवी में मेडिकल जिहाद और अब यह जल जिहाद । हमारे यहाँ तो पानी पीने से पहले जात पूछी जाती है और यह जात क्या, पानी पिलाकर संस्कारी हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट कर रहा है ।ये मुसलमान, ईसाई लोग ऐसे ही लोगों की मदद के बहाने धर्म परिवर्तन करवाते हैं । 

हमने कहा- एक दूसरे की मदद करना तो इंसानियत है । और अगर इससे ही धर्म परिवर्तन होता है तो हिंदुओं को भी चाहिए कि दुनिया के सभी जरूरतमंदों की मदद करके उन्हें हिन्दू बना लें । 


बोला- इसका काम तो बहुत ही खतरनाक था । यह जाहिल, ज़ालिम, जल-जिहादी जुनैद तो मोदी जी को उनके प्रिय और प्रधान धर्म (धर्मेन्द्र प्रधान) से अलग करने के लिए आंदोलन करने वालों को खाना खिला रहा था । कितना बड़ा अपराध कर रहा था ।अरे, जब धर्म ही नहीं रहेगा तो कौन मोदी जी की रक्षा करेगा ? जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है । धर्म के इन्द्र ने ही तो पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए संघ के आनुषंगिक संगठनों को ओएनजीसी से 688 करोड़ का चन्दा दिलवाया था । 


हमने कहा- तो अब मोदी जी क्या करेंगे ? बिना धर्म-धन के कैसे काम चलेगा ?


बोला- मोदी जी का भी कोई जवाब नहीं हैं । तेरे जैसे डरपोक जोशी से तो कुछ होना हवाना नहीं । अब वे एक असली ‘जोशी’ को लाए हैं ।

प्रह्लाद जोशी । पिछले जन्म में इन्हीं को हिरण्यकश्यप की पार्टी में ऑपरेशन लोटस करके भाजपा में लाया गया था । ‘जुनैद’ का इलाज करने के लिए ‘जोशी’ । जैसे कंस को  निबटाने के लिए कृष्ण और गांधी को निबटाने के लिए गोडसे । ज्योतिष में माना जाता है कि एक राशि वालों की कभी बनती नहीं ।


हमने कहा- फिर भी हम रिस्क नहीं लेना चाहते । हम कोई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो हैं नहीं जो हजारों करोड़ चन्दा इकट्ठा करके भी न रजिस्ट्रेशन, न हिसाब दें, न ऑडिट करवाएं । 

 

बोला- अगर तुझे ज्यादा ही डर लग रहा है तो कल से भगवा गमछा गले में डाल लिया कर और जनेऊ कुर्ते के ऊपर पहनना शुरू कर दे । 



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Jul 16, 2026

16-07-2026 संस्कारी हत्यारे


16-07-2026 

संस्कारी हत्यारे   




आज तोताराम ने बहुत उत्साहित होकर खबर दी कि दारा सिंह की अच्छे आचरण के कारण जेल से रिहाई की सिफारिश की गई है । 

हमने कहा- दारा सिंह जी को तो मरे हुए ही कोई दस बारह साल हो गए होंगे । अब किस रिहाई की सिफारिश ?  और फिर वे तो बहुत भले आदमी थे । बड़े पहलवान थे जिन्होंने कोई 500 कुश्तियाँ लड़ीं लेकिन एक में भी नहीं हारे   

बोला- यह दारा सिंह भी कम प्रसिद्ध नहीं है ।उस दारा सिंह ने रामायण सीरियल में हनुमान का काम किया । बहुत से राक्षसों का संहार किया और रावण की लंका को जला दिया था तो इसने भी धर्म की रक्षा के लिए बहुत बड़ा काम किया । इतिहास में धर्म की रक्षा के लिए बहुत से लोगों ने अपने प्राण दिए हैं । कृष्ण गीता में कहते हैं कि जब जब धर्म पर संकट आता है तो मैं धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेता हूँ । जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है । तभी तो धर्मपरायण सरकार धर्म की रक्षा करने वालों पर कृपालु है । 

हमने कहा- अभी तक तो हमने एक ही दारा सिंह का नाम सुना था । यह दूसरा दारा सिंह कहाँ से आगया ?

बोला- बस !  बड़ा संपादक-लेखक बना फिरता है । दारा सिंह के बारे में नहीं जानता । यह वही हिन्दू-हृदय-सम्राट है जिसने ओडिशा में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाकर भारत को एक ईसाई राष्ट्र बनाने के एक आस्ट्रेलियाई पादरी के षड्यन्त्र को विफल कर दिया था । 

हमने कहा- हाँ, कुछ याद आ रहा है । यह कहीं वह दुष्ट, निर्दय दारा सिंह तो नहीं जिसने ओडिशा के क्योंझार जिले में कुष्ठ रोगियों का एक आश्रम चलाने वाले ग्राहम स्टेंस को उसके दो बेटों सहित जिंदा जला दिया था ? वह तो बहुत पुरानी बात हो गई । क्या वह अभी तक जिंदा है ? दुष्ट लोग मरते भी बहुत मुश्किल से हैं । 

बोला- दुष्ट कैसे ? अगर वह दुष्ट होता तो क्या ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ‘अच्छे आचरण’ के आधार पर उसकी जेल से रिहाई की सिफारिश करता ?

हमने कहा- ऐसी सिफारिश करने वाले बोर्डों की बात छोड़ । आज जब न्यायालय, चुनाव आयोग, पुलिस, परीक्षक, डॉक्टर सब संदेह के घेरे में हैं तो इस बोर्ड की क्या बिसात । सिफारिश पर तो 2022 आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर गुजरात दंगों में बिलकीस बानो के बलात्कारियों, हत्यारों की रिहाई की भी की गई । उन्हें संस्कारी बताया गया था । बलात्कारियों की पत्नियों तक ने उनकी आरती उतारी थी ।

ऐसे ही होते हैं संस्कारी ? यह कैसा अमृत महोत्सव था ? कैसे अमरत्व की अवधारणा है यह । 


जब आँखों पर धार्मिक कट्टरता का पर्दा पड़ जाता है तो बुरे से बुरा काम भी धर्म का पुण्य काम लगने लग जाता है । सबसे अधिक बुरे काम आदमी सबसे अधिक उत्साह से धर्म के नाम पर ही करता है । अगर वे सामान्य बलात्कारी होते तो उनकी पत्नियाँ उन्हें कभी माफ नहीं करती । पर वे समझ रही थीं कि हमारे पतियों ने कुकर्म धर्म की रक्षा के लिए किया था । अरे, अभी कुछ दिनों पहले दिल्ली के त्रिनगर इलाके में कुछ हिंदुओं ने मुसलमानों को चिढ़ाने के लिए सूअर पाल लिए और सूअरों को वराह भगवान बताकर धन्य हो रहे थे ।

बोला- लेकिन पहले वह मदर टेरेसा भी तो सेवा के बहाने कुष्ठ रोगियों को ईसाई बना रही थी और अब वह ग्राहम स्टेंस । 

हमने कहा-  तब तो बहुत आसान काम है । अब तो मोदी जी, भागवत जी, योगी जी, अनुराग ठाकुर, धामी, हेमंत बिस्वा, सुवेन्दु अधिकारी जैसे सच्चे हिन्दू नेताओं के हाथ में है देश । सभी साधन-सुविधा भी जुटा देंगे । तुम एक ऐसा दल बनाओ जो दुनिया के विभिन्न देशों में जाए और वहाँ के ईसाई कुष्ठ रोगियों की सेवा करे और उन सबको हिन्दू बना ले । हम अपनी एक महिने की पेंशन इस पुण्य काम के लिए देने का अभी से संकल्प लेते हैं । और उसके बाद भी पाँच हजार रुपये महिना देते रहेंगे ।  

बोला- मास्टर, यह तो बहुत खतरे का काम है । 

हमने कहा- तो फिर ? 

गाँधी जी के समय में एक थे परचुरे शास्त्री जिन्हें कुष्ठ होगया था । उनके घर वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था । गाँधी जी उन्हें अपने आश्रम में ले आये और उनके घाव धोने से लेकर अन्य सभी सेवाएं करते थे । हिन्दुत्व का ठेकेदार बना महाराष्ट्र का कोई चितपावन ब्राह्मण उस समय आगे नहीं आया परचुरे शास्त्री की सेवा करने के लिए जबकि वे तो एक विद्वान, हिन्दू और उनकी जाति-गोत्र के थे । ऐसे में एक विदेशी ईसाई पादरी द्वारा ओडिशा के कुष्ठ पीड़ित आदिवासियों की सेवा करने का एक संस्कारी हिन्दू द्वारा यह पुरस्कार ! !  

‘गोली मारो सालों को’ नारे लगाना आसान है, ग्राहम स्टेंस को जला देना आसान है, गुजरात के दंगों में बजरंग बली का नाम बदनाम करने वाले बाबू भाई पटेल उर्फ  ‘बाबू बजरंगी’ की तरह लगभग एक सौ लोगों की निर्मम हत्या कर देना आसान है क्योंकि सत्ता तुम्हारे साथ है लेकिन सेवा ! 

कबीर कहते हैं-

कथनी मीठी खाँड सी करनी बिस की लोय 

कथनी तज करनी करे तो बिस अमरित होय ।। 

कोरोना काल में देखा नहीं ? कैसे लोगों ने अपने परिजनों के शव लेने से इनकार कर दिया था और भोपाल के अग्निशमन विभाग के दो मुसलमान कर्मचारी उनके अंतिम संस्कार कर रहे थे । और अभी मोहर्रम के दिन का ही वाकया है जब  केन्सर के एक मृत रोगी नारायणन का शव उसके घर वालों ने लेने से मना कर दिया तो कासरगोड की इरफाना हबीब ने  उसका अंतिम संस्कार करवाया । उसकी भी वहाँ के कुछ दुष्ट लोगों ने आलोचना की । 

सेवा में षड्यन्त्र देखना संसार की सबसे बड़ी नीचता है । 


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16-07-2026 कोक्रोच : एक रुबाई ​

​16-07-2026 

कोक्रोच : एक रुबाई   ​



 न तो इस लिंक में पाया न तो उस लिंक में पाया 

न तो पाया उसे भगवा में ना तो पिंक में पाया 

मसीहा विश्वगुरु बलवान जिसको हम समझते थे  

उसे कॉक्रोच जैसा सेठ जी के सिंक में पाया 


 





 


  



 

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Jul 10, 2026

09-07-2026 मुकरी : हड़कंप


09-07-2026    

 

 मुकरी : हड़कंप 




दिन में चार बार जो खुद के 

कहे हुए से पलटी मारे 

जाने क्या क्या बकता रहता 

सोच समझ या बिना बिचारे 


घर बाहर मचता हड़कंप 

क्यों सखि पागल ? 

ना सखि ट्रम्प 



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09-07-2026 मुकरी : सरेंडर


09-07-2026 

 मुकरी : सरेंडर 







बनता  छप्पन इंची छाती 

दुनिया कहती चपड़कनाती 

आँख दिखाने के मौके पर 

इसकी दुम नीची हो  जाती 



जिस तिस आगे करे सरेंडर 


क्यों सखि  गीदड़  ? 


नहीं नरेंदर 


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09-07-2026 मुकरी : अनपढ़


 09-07-2026   

 मुकरी : अनपढ़ 




दो  दिन भी घर में ना टिकता 

दुनिया भर में फिरता  रहता 

उलटी पुलटी बात बनाए 

एक्स्ट्रा टू ए बी ले आए  


जगद्गुरू की साख डुबो दी  

क्यों सखि अनपढ़ 

ना सखि मोदी 


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10-07-2026 ट्रस्ट की कुदृष्टि

10-07-2026  

ट्रस्ट की कुदृष्टि 

( 'चुनाव के बाद उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे' - बंगाल में चुनाव भाषण में अमित शाह- 4 मई 2026 ) 




 

 

हम भी कितने मूर्ख थे किया ट्रस्ट पर ट्रस्ट 

भरे हुए थे ट्रस्ट में दुनिया भर के भ्रष्ट 

दुनिया भर के भ्रष्ट, बज गया जग में डंका 

भक्त अयोध्या और  विभीषण लूटे लंका 

कह जोशी अब चमत्कार 'चाणक्य' दिखाएं

इनको सीधा  करने को उल्टा लटकाएं । 



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Jul 8, 2026

07-07-2026 हनुमान जी का दल बदल


07-07-2026 

हनुमान जी का दल बदल 





जैसे कोई ट्रेवलिंग सेल्समैन छह दिन घूमघाम कर एक दिन के लिए घर आता है और फिर सूटकेस जमाकर निकल लेता है या जैसे मोदी जी 27 से 29 जून तक सशेल्स की ‘सम्मान समेट यात्रा’ से लौटे, सम्मान को सुरक्षित काँच की अलमारी में सजाया और फिर 6 जुलाई को केश सज्जा करवाकर, नए कपड़े लेकर, सम्मान समेटने के लिए इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया की यात्रा पर निकल गए वैसे ही तोताराम सुबह चाय पीकर गया था और लंच खाकर, दोपहर थोड़ा आराम  करके फिर चार बजे आ धमका । 

हमने कहा- मोदी जी ने तो सेवा के लिए घर परिवार छोड़ दिया । 20-20 घंटे रोज देश की सेवा के साथ साथ विश्वगुरु की जिम्मेदारी संभालने के लिए भागे फिरते हैं लेकिन तू घर पर क्यों नहीं टिकता ?

बोला- मैं चाय पीने नहीं आया हूँ । आज मंगलवार है । देश दुनिया में भूतपिशाच बहुत उपद्रव मचा रहे हैं सो चल जयपुर रोड़ तक चलते हैं । घूमना भी हो जाएगा और हनुमान जी के दर्शन भी । 

हमने कहा- तो क्या लौट आये ? 

बोला- कौन ? मोदी जी तो 11-12 जुलाई को लौटेंगे । फिर कहाँ का कार्यक्रम है मुझे पता नहीं । और हनुमान जी के कहीं जाने का सवाल नहीं उठता । 

हमने कहा- क्या पता, हमने तो कल एक वीडियो देखा था जिसमें हनुमान जी लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड़ शो में नाच रहे थे लेकिन अभी तक न तो किसी संस्कारी हिन्दू की भावना आहत हुई और न ही कहीं कोई एफ आई आर हुई । 

बोला- यह हमारा आंतरिक मामला है जैसे राम मंदिर की चोरी । हमारे राम, हमारा मंदिर, हम कुछ भी करें । कांग्रेस, राम मंदिर में दर्शन के लिए अभी तक नहीं गए लोग और जिन्होंने राम मंदिर के लिए कोई चंदा नहीं दिया उन्हें कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है । हम हनुमान को नचाएं या राम को स्कूल जाने की उम्र में गर्भगृह में बैठा दें हमारी मर्जी । हाँ, अगर कोई अन्य पार्टी या धर्म का व्यक्ति ऐसा कुकर्म करता तो दिखाते कि धर्म, भावना और सत्ता की ताकत क्या होती है । 

हमने कहा- ठीक है । लेकिन जब हनुमान जी आउट ऑफ स्टेशन हैं तो चल कर क्या करेंगे । 

बोला- वे हनुमान जी थोड़े थे । उनके हाथ में राम का ध्वज थोड़े था । उनके हाथ में भाजपा का झण्डा था जिस पर कमल का निशान साफ दिखाई दे रहा था । हो सकता है कोई संस्कारी और धार्मिक कार्यकर्ता हो जो यूपी के अगले चुनाव में टिकट पाने के लिए यह नाटक कर रहा हो । 

हमने कहा- भले ही हम किसी संस्कारी संस्था के स्वयंसेवक नहीं हैं लेकिन राम के निस्वार्थ सेवक, पराक्रमी और सामान्य लोगों के लिए सहज सुलभ रहने वाले हनुमान जी का बहुत आदर करते हैं । अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए उनका वेश धारण करना हमें बहुत बुरा लगता है । अगर पार्टी में स्थान बनाना हो तो हनुमान बनने की जगह गाँधी नेहरू परिवार को गाली निकाल सकता था, किसी मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा सकता था, किसी मुसलमान के फ्रिज में गौ मांस ढूंढ सकता था, किसी मस्जिद के आगे सुंदरकांड का पाठ कर सकता था, किसी तृणमूल वाले सांसद पर अंडे फेंक सकता था । 

बोला- चल, मंदिर तो चलते हैं । पक्का मान अपने जयपुर रोड़ वाले हनुमान जी यथास्थान मिलेंगे । यह होगा कोई लखनऊ कानपुर का कार्यकर्ता । 

हमने कहा- तोताराम, यह भी हो सकता है कि ये असली हनुमान जी ही हों । अयोध्या में अपनी चौकीदारी के बावजूद ट्रस्ट के चंदा गिनती करने वाले अनट्रस्टवर्दी लोगों के कुकर्मों से दुखी होकर हमेशा के कहीं हिमालय में जा रहे हों । या उन्हें डर  हो कि बचने का कोई रास्ता न देखकर ट्रस्ट वाले कहीं इन्हें ही न फँसा दें कि हनुमान जी से पूछो । यहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं की है । या यह डर रहा हो कि कहीं कोई उनकी गदा ही न गायब कर दे । दुष्टता पर उतरे आदमी का कोई ठिकाना नहीं । गदा के बिना उनसे कौन डरेगा  जैसे यूएपीए, कोर्ट और ईडी के बिना सरकार से  । 

-रमेश जोशी 



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Jul 6, 2026

05-07-2026 चंदन-पानी


05-07-2026 

चंदन-पानी 



इससे पहले कि तोताराम पेपर लीक या राम मंदिर चोरी जैसा कोई मुद्दा उठाए या सरकारी कर्मचारियों की पे कमीशन, डीए की तर्ज पर चाय के साथ किसी खाद्य पदार्थ की मांग करे हमने अपनी तरफ से मोदी जी तरह उसे उलझाने के लिए प्रश्न उछाल दिया, पूछा- यह ई-20 क्या है ? कहीं भारतीय क्रिकेट की महान हस्ती, शाह साहब के साहबज़ादे जय शाह ने क्रिकेट का कोई नया फॉर्मेट ईजाद किया है ?  एक पिकनिक जैसे परंपरागत पाँच दिवसीय क्रिकेट मैच के आयोजन से आगे जाकर वन डे, डे नाइट, 20-20 आदि । 

बोला- ऐसे तो सर्वज्ञ होने का दावा करता है और फरक आस्ट्रेलिया और आस्ट्रिया का मालूम नहीं । यह टी-20 जैसा कुछ नहीं है ।  यह तो गड़करी के सुपुत्र द्वारा आविष्कृत एक ऐसा पदार्थ  है जो उत्पादक के लिए तो सस्ता है लेकिन ग्राहक को उसका कोई लाभ नहीं मिलता । वह पदार्थ है ‘ई-20’ । ई मतलब ईथेनॉल । गन्ने के रस जैसा कुछ । दुनिया में कोई देश इस तरह, इतना और इस उत्साह से इसे काम में नहीं ले रहा है लेकिन मोदी जी इसका ‘गटर-गैस’ की तरह जहाँ तहाँ प्रचार करते फिर रहे हैं । इस पदार्थ को 80 लीटर पेट्रोल या डीजल में 20 लीटर के हिसाब से मिलाया जाता है ।  इससे ऑटो मोबाइल क्षेत्र का तीव्र विकास होगा ?

हमने कहा- हमने तो सुना है कि इससे माइलेज कम हो जाता है और कार में कई तरह की खराबियाँ आ जाती हैं । 

बोला- तभी तो । ज्यादा चलाऊ पुख्ता चीजों से बाजार की गति थम जाती है । यूज एण्ड थ्रो और फिर नया लो । इसीसे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है जैसे कि उद्घाटन से पहले ही सड़क या पुल टूट जाए तो रूलिंग पार्टी की अर्थव्यवस्था सुधरती है । नकली दवा बनाने वाले और घटिया निर्माण करने वाले ही तो 40% कमीशन देंगे, पी एम केयर फंड की केयर करेंगे और इलेक्शन बॉन्ड खरीदेंगे । 

हमने कहा- एक योगी जी का 80-20 भी तो है ?

बोला- वह तो चुनाव जीतने और बुलडोज़र चलाने का एक फार्मूला है जिसमें 20 प्रतिशत मुसलमानों को 80 प्रतिशत हिंदुओं के लिए खतरा बताया जाता है । 

हमने कहा- लेकिन यह तो उनके नाथ पंथ के सिद्धांतों के खिलाफ है । तुझे पता होना चाहिए-

नाथ पंथ (विशेषकर गोरखनाथ संप्रदाय) का मुसलमानों के साथ एक गहरा और ऐतिहासिक रूप से समावेशी संबंध रहा है। इस पंथ ने सदियों से हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के अनुयायियों को अपने दर्शन और साधना से जोड़ा है। यह सनातन के बरक्स लोकधर्म है जो बुद्ध से होता हुआ कबीर तक जाता है । इसके मूल में शिव हैं जो कल्याण के देवता हैं और अर्द्ध नारीश्वर हैं । 


नाथ पंथ और इस्लाम के मुख्य जुड़ाव बिंदु:

  • मुस्लिम जोगी (फकीर): इस पंथ में एक समय में बड़ी संख्या में "मुस्लिम जोगी" शामिल थे। उत्तर प्रदेश (जैसे गोरखपुर), पंजाब और बंगाल में ऐसे कई परिवार आज भी हैं जो नाथ परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इस्लाम को मानते हैं। 

  • पीर रतन नाथ की कथा: नाथ परंपरा में पीर रतन नाथ (या कायानाथ) एक प्रमुख संत माने जाते हैं, जिनका संबंध मक्का और पैगंबर मोहम्मद से भी जोड़ा जाता है। हिंदू और मुसलमान दोनों उनकी पूजा करते हैं।

  • साझा पूजा स्थल: कई नाथ स्थलों पर संतों की समाधियों को हिंदू और मुस्लिम दोनों समान रूप से पूजते हैं। पंजाब के बठिंडा में स्थित बाबा रतन हाजी की दरगाह (या मठ) इसका एक प्रमुख उदाहरण है। 

  • सूफीवाद से समानता: नाथ पंथ की हठयोग और कुंडलिनी जैसी रहस्यवादी साधनाएं, सूफी संतों (जैसे बाबा बुल्ले शाह और अन्य) की विचारधारा के बहुत करीब रही हैं।

  • 'पीर' की उपाधि: नाथ पंथ के कई मठों में मुख्य संतों या पुजारियों को "पीर" कहकर भी संबोधित किया जाता है।

बोला- राजनीति का कोई पंथ नहीं होता । वहाँ चुनाव जीतना ही महत्वपूर्ण होता है । चुनाव के लिए भला नहीं,  जिताऊ कैंडीडेट ढूँढ़ा जाता है ।  फिर उसके पास शिक्षा या सज्जनता की जगह कोई एनटायर या एफ़िडिफिट वाली डिग्री ही क्यों न हो । 

हमने कहा- लेकिन मिलने में क्या बुराई है । मिलने से ताकत बढ़ती है जैसे मिश्र धातु मतलब अलॉय । मुसलमानों,दलितों, आदिवासियों को सम्मान और प्रेम से जोड़कर देश और और मजबूत बनाया जा सकता है । गहनों का जोड़ मजबूत करने के लिए सोने चांदी में तांबे का टांका लगाया जाता है । सूती कपड़े में 20 प्रतिशत सिंथेटिक मिला देने से वह मजबूत और धोने-प्रेस करने में आसान हो जाता है । दूध में पानी, घी में चर्बी, सीमेंट में रेता, ईडी से डरकर तृणमूल, शिवसेना और आप विधायकों और सांसदों के भाजपा में जाने की तरह मत मिलो । मिलना है तो चंदन-पानी की तरह मिलो जिसकी सुवास अंग अंग में समा जाए ।  

बोला- ऐसे रैदासी सिद्धांतों से राजनीति नहीं चलती । अगर ऐसे नियम मानने लगे तो देश सेवा कैसे करेंगे ? देश सेवा के लिए बहुमत चाहिए और बहुमत के लिए सुवेन्दु, हिमंता, राघव, एकनाथ जरूरी हैं ।  

हमने कहा- सारी माथाकूट छोड़ तोताराम, हमें फ्री का एक आइडिया आया है । गाड़ी में गौ मूत्र भरके, ड्राइवर को एक पव्वा पिलाकर उसके गले में एक भगवा गमछा डालकर, जयश्रीराम का नारा लगाते हुए वाहन को एक जोर का धक्का दे दो और फिर देखो वाहन कैसे फ्री में पवन वेग से अपने गंतव्य तक पहुंचता है ।  

-रमेश जोशी 

 



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06-07-2026 अमृत काल ( एक कुण्डलिया )

    06-07-2026 
अमृत काल ( एक कुण्डलिया ) 





राम-कोष की लूट है जी भरकर के लूट 
अमृत काल के बाद में मिले ना मिले छूट 
मिले ना मिले छूट, टूट जब भ्रम जाएगा 
चंदा देने मंदिर कोई क्यूँ आएगा 
जोशी जब तक चक्कर चलता स्वर्ग-नरक का 
तब तक रस्ता नहीं खुलेगा ज्ञान-तरक का 

-रमेश जोशी 







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Jul 4, 2026

30-06-2026 हड़बड़ी में गड़बड़ी


30-06-2026 

हड़बड़ी में गड़बड़ी 






 


हमने कहा- तोताराम, जल्दी का काम शैतान का । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- झूठ नहीं कहा है कि सहज पके सो मीठा होय लेकिन जिसे अपने कर्मों पर विश्वास नहीं होता और जो ईवेंट मनेजमेंट के सहारे अपनी इमेज बनाता है वह जल्दी करता है और उसी चक्कर में अपनी भद्द पिटवाता है । 

 बोला- यह, वह, जो, उस आदि में लपेट कर बात मत कर । साफ साफ बता । 

हमने कहा- जैसे चुनावी लाभ लेने के लिए शिखर के बिना ही प्राणप्रतिष्ठा कर दी गई तो राम मंदिर का गर्भगृह टपकने लगा कि नहीं ? 400 पार वाले 240 पर अटक गए और जिस राम के राज में-

बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।

मांगें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ 

इस दोहे अर्थ है कि राम जी के राज में चंद्रदेव अपनी अमृतमयी किरणों से पृथ्वी को परिपूर्ण रखते हैं। सूर्य देव केवल उतनी ही गर्मी देते हैं, जितनी वर्षा या अन्य कार्यों के लिए आवश्यक होती है। बादल भी ऐसे हैं जो केवल मांगने पर और आवश्यकता के अनुसार ही जल बरसाते हैं, अर्थात वहां अतिवृष्टि या अनावृष्टि जैसी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। 


लेकिन आज कट्टरता की राजनीति तथा मूर्खता और स्वार्थपूर्ण विकास के कारण स्थिति यह हो गई है कि गरमी भयंकर और दूर दूर तक बरसात नहीं । अल्पवृष्टि का खतरा मंडरा रहा है । जहाँ तहाँ सड़कें और पुल टूट रहे हैं । इतनी सुरक्षा और संस्कारी लोगों के ट्रस्ट, व्यवस्था में होते हुए राम लला की पादुकाएं चोरी हो गईं । और बुलडोज़र चलेगा 100 मीटर का प्लॉट खरीदने वाले लवकुश पर । हो सकता है कल को यह सिद्ध कर दिया जाए कि चोरी-वोरी कुछ नहीं हुई है बल्कि राम लला के बेटों लव कुश ने सुरक्षा की दृष्टि से सामान एक बैंक लाकर में रखवा दिया था । 

हड़बड़ी का एक और ताज़ा उदाहरण देख ले । 1400 करोड़ की सहायता के बदले एक सम्मान लिया उसमें भी तीन गलतियाँ । 

बोला- तू यहाँ बरामदे में बैठा नितंबों से सुपारी फोड़ता रहता है । देश दुनिया को संभालना पड़े तो पता चले । जहाँ 240 पर अटकने की बात है तो राम के चढ़ावे और चंदे के बल पर पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र में खरीद-फरोख्त करके 400 पार भी हो जाएंगे ।  

हमने कहा- तो फिर पीयूष गोयल को नंबर बढ़वाने के लिए सम्मान का ड्राफ्ट फाइनल होने से पहले ही इसे अपने ट्विटर पर डालने की क्या जरूरत थी ? चल, एक और उदाहरण देते हैं । 2018 में पटेल की मूर्ति के उद्घाटन के विज्ञापन में 8-10 गलतियाँ थीं । और नया उदाहरण ओडिशा की स्कूली पाठ्य पुस्तकों का जिनमें कई हजार गलतियाँ है । 

बोला- ये छोटी-मोटी बातें हैं । शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।विदुर की पत्नी कृष्ण को देखकर इतनी भावविह्वल हो गई कि केलों की गिरी नीचे गिराकर कृष्ण को केले के छिलके खिलाती रही । रीतिकाल के कवि पद्माकर ने नायिका की अत्यधिक उत्सुकता बड़ा ही मनोवैज्ञानिक और सुंदर चित्रण किया है जो नायक के आने का समाचार सुनकर इतनी हड़बड़ी में होती है कि पैरों में लगाने वाला महावर आँखों में और आँखों में लगाने वाला काजल पैरों में लगा लेती है।

आए हैं समीप पीय, प्रीति की प्रतीति मानों,

भई अति अकुलाहट, सुहाई सब बात है।

आनँद की उमंग में, उमंगि अनुराग भई,

भूलि सुधि-बुधि, देह-गेह की न घात है॥

पग में लगाई काजर, नैनन महावर दे,

हिय हुलसाए, भई बावरी सी ज्ञात है। 

 

-रमेश जोशी 



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