Jun 27, 2026

25-06-2026 लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र


25-06-2026 


लोकतंत्र के तंत्र-मंत्र 



कोई चालीस साल पहले की बात है जब दिल्ली में हुआ करते थे । तब बाहर से दिल्ली में आने वाला हर आदमी यही सोचता था कि किसी तरह दिल्ली में कहीं भी सौ-पचास गज का प्लॉट हो जाए फिर भले ही उसे रहने लायक बनने में ज़िंदगी गुजर जाए । ऐसे प्लॉट दिल्ली के किसानों के खेतों में हुआ करते थे जहाँ निर्माण रोकने देने के नाम पर डी डी ए वाले वसूली करते घूमा करते थे । ऐसी खेतों में कटी कॉलोनियाँ अवैध कॉलोनियाँ कहलाती थीं । 

ऐसे में लोग अपनी कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए उसका नाम इंदिरा कॉलोनी या संजय कॉलोनी रख लिया करते थे । यह एक प्रकार का टोटका होता है । जैसे कोई अपने बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा देता है या कोई अपने मकान के मुख्य द्वार पर टायर लटका देता है या किसी दैत्य का मुखौटा लगा देता है । आज भी डरे हुए लोग भूत-पिशाच भगाने के लिए भगवा गमछा गले में डाल लेते है या फिर कई रंग के कलावे बांध लेते हैं या तिलक खींच लेते हैं या आठों अंगुलियों में तरह तरह की अंगूठिया पहन लेते हैं । ये सब लोक परलोक के तंत्र मंत्र हैं । 

आज तोताराम ने कहा- मास्टर, अपने बरामदे  का नाम ‘नमो बरामदा’  रख लेते हैं । 

हमने कहा- क्या हमें मोदी जी ने इसके लिए कोई सबसीडी दी है या यह कोई अवैध निर्माण है जो इसे ‘नमो’ की आड़ में वैधता प्रदान करें । मोदी जी चाहें तो स्टेडियम का नाम एक झटके में अपने नाम कर लें लेकिन यहाँ तो वही चलेगा जो हम चाहेंगे । 

बोला- 2016 में जब ट्रम्प पहली बार राष्ट्रपति बने थे तब सुलभ शौचालय वाले बिन्देश्वरी पाठक ने हरियाणा के मेवात इलाके में सफाई कर्मचारियों के लिए कुछ मकान बनवाए थे तो उनका नाम ‘ट्रम्प विलेज’ रखा था । 

हमने कहा- ठीक है जब उन्हें इसका कारण पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि हो सकता है इससे कुछ सहयोग या प्रचार मिल जाए लेकिन हुआ कुछ नहीं, भद्द बेकार में पिटी । वैसे ही जैसे ट्रम्प की जीत के लिए 2020 में हिन्दू महासभा वालों ने यज्ञ किया था । यह बात और है कि देवताओं ने उनकी एक नहीं सुनी । इसी तरह मोदी जी ने भी बेशर्मी से अमेरिका में नारा दे ही दिया था ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ । सोच अगर चुनाव के दिनों में कोई विदेशी नेता भारत में आकर राहुल के लिए ऐसा नारा लगाए तो ? लेकिन क्या किया जाए । राजस्थानी में कहावत भी तो है-  

आप गुरूजी कातरा मारै 

ओराँ नै परमोद सिखावै । 

बोला- मास्टर, सब एक दूसरे को समझाते हैं । भले ग्रहों को कोई नहीं पूछता है लेकिन बुरे ग्रहों के लिए शांति पाठ करवाता है ।  कहा भी है-

बसे बुराई जासु तन ताही को सनमान 

भलो भलो कहि छांडिए खोटे ग्रह जपदान 

हमने कहा- और क्या ? मोदी जी यहाँ कण कण पर अपना फ़ोटो छपवा दें, हर चीज के आगे पीछे ‘नमो’ जोड़ दें लेकिन देखा नहीं पिछले दिनों जब अमेरिका गए थे तो ट्रम्प कैसे मोदी जी को ब्यूटीफुल, एंजल आदि  कहकर मजे ले रहा था लेकिन मोदी जी बार बार ‘योर एक्सीलेंसी’ ‘योर  एक्सिलेंसी’ की रट लगाए हुए थे । ट्रम्प का क्या ठिकाना । बड़ा मुँहफट और गैरजिम्मेदार आदमी है । पता नहीं कब क्या बोल जाए । 

ग्रहशांति के लिए पता नहीं क्या क्या करना पड़ता है । ऐसे में 56 इंच का सीना कुछ काम नहीं आता । जेलेन्स्की ने बिना पर्ची के ही टीशर्ट में ही अपना जलवा दिखा दिया था । 

सारे नाटकों के बावजूद लोक ही सच और सत्य आचरण करता है । 

बोला- मतलब ? 

हमने कहा- जैसे कि कुछ अंधभक्त भले ही गोडसे के प्रति आदर का दिखावा करते हों लेकिन आज किसी गोडसे सरनेम वाले महाराष्ट्रियन का नाम ‘नाथूराम’ नहीं होगा । भले ही लोग विभीषण को कितना भी बड़ा भक्त बताएं लेकिन क्या किसी का नाम ‘विभीषण’ सुना है ?  



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27-06-2026 पादुका चोरी

27-06-2026 

पादुका चोरी 


भले ही मोदी जी ने हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा नहीं करवाई हो लेकिन अब भी देश में हवाई चप्पलें पहनने वालों की संख्या बहुत है । ऐसा हवाई चप्पलों के कारण हवाई यात्रा का अवसर मिलने की उम्मीद नहीं बल्कि महँगे जूते न खरीद सकने के कारण है । आजकल रुपये और राजनीति दोनों के स्तर की तरह हवाई चप्पलों का स्तर भी गिर गया है । दोनों में से किसी भी चप्पल का कोई पट्टा कहीं से भी तृणमूल वालों या राघव चड्ढा या ठाकरे ग्रुप के सांसदों की तरह भाजपा की ओर खिसक गया तो फिर कोई इलाज नहीं । पहले की तरह दस-बीस रुपये के पट्टे बदलने से काम नहीं चलता । पूरी चप्पलें ही बदलनी पड़ती हैं । और कीमत भी 250/- रुपये के लगभग । हमने कल ही नई चप्पलें खरीदनी पड़ी । 

हमारा और तोताराम का नाप एक ही है । तोताराम जैसे ही चाय पीकर चलने लगा तो अपनी पुरानी चप्पलों की जगह हमारी चप्पलें पैरों में डाल ली । हमारे ‘बरामदा ट्रस्ट’ की सुरक्षा किसी चंपत राय के भरोसे नहीं है जो सैंकड़ों करोड़ का चढ़ावा गुपचुप गायब हो जाए ।  हमने तुरंत पकड़ा और कहा- देखते देखते दिन दहाड़े !

बोला- भूल हो गई । और ये कोई राम की पादुकाएं हैं क्या, सौ रुपये की फुटपाथ वाली चप्पलें ही तो हैं ।अगर चोरी का इरादा होता तो ‘राम मंदिर’ की तरह चढ़ावा गणना के समय के सी सी टी वी कैमरे की फुटेज ही गायब नहीं करवा देता । वैसे यह ‘अमृत काल’ की भारतीय लोकतंत्र की बस है जिसमें लिखा हो या न लिखा हो लेकिन यात्रियों को अपने जान-माल की रक्षा खुद ही करनी होती है । 

हमने कहा- वैसे हुआ बहुत बुरा । राम भक्तों की निगहबानी में राम की पादुकाएं ही चोरी ! 

बोला- इसमें बुरा क्या है ? जहाँ नाली में कीचड़ होगा वहाँ कमल खिलें या नहीं लेकिन बदबू और मच्छर जरूर होंगे । जहाँ गंदगी होगी वहाँ मक्खियों को निमंत्रण देने की कोई जरूरत नहीं । अब जहाँ धन है वहाँ चोरों के अलावा और कौन चक्कर लगाएगा ? सुंदरियों का जमघट लगवाकर वहाँ मजबूरन ब्रह्मचारियों और संस्कारियों को बिठा दोगे तो क्या वे विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करेंगे ? 

हमने कहा- इस मामले में मोदी जी बहुत समझदार हैं । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- मोदी जी श्रद्धांजलि देते समय भी अपने जूते अर्थात पादुकाएं नहीं उतारते । पता नहीं, कब कौन उठाकर चंपत हो जाए । राजा की पादुकाएं होती ही ऐसी हैं । तभी तो भरत जी जैसे ही ननिहाल से अयोध्या आये सबसे पहले चित्रकूट जाकर पादुकाएं लेकर आये । राजा की पादुकाएं साधारण नहीं होतीं ।  जिसके पास राम की पादुकाएं वही अयोध्या का शासक । हो सकता है कोई गद्दी के चक्कर में ही पादुका लेकर चंपत हो गया हो । 

बोला- वैसे मास्टर, जब भरत राम की पादुकाएं ले आये तो राम को नंगे पाँव वन वन घूमने में परेशानी तो बहुत हुई होगी । कुछ भी हो योगी जी की न्यायप्रियता के कारण चंपत राय को त्यागपत्र तो देना ही पड़ा । 

हमने कहा- त्यागपत्र से क्या होता है ? बैंकों से अरबों लेकर भागा ललित मोदी अगर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दे तो क्या उसे निरपराध मान लिया जाएगा ? 

बोला- चंपत राय का ड्राइवर और कुछ और लोग भी हिरासत में लिए तो गए ही हैं । 

हमने कहा- यह तो तथाकथित रामराज्य है । असली रामराज्य में भी राम के वनवास का दोष आज भी मंथरा पर लगाया जाता है । इसी तरह सीता के वनवास के लिए राम के छवि निर्माण के लिए एक निरीह धोबी पर लानत भेजी जाती है । इसी तरह बड़े लोगों पर कुछ आंच नहीं आने वाली । और हिरासत में लिए गए लोगों को भी दस बीस दिन में जमानत मिल जाएगी । उसके बाद ज़िंदगी भर केस टेबल पर नहीं आएगा । और अगर आ भी गया और जेल भी हुई तो राम रहीम की तरह परोल पर बाहर आते रहेंगे । 

आखिर ये भी तो बिलकीस बनो के बलात्कारियों की तरह संस्कारी लोग हैं । वसीम बरेलवी को सुन-

ग़रीब लहरों पे पहरे बिठाए जाते हैं समुंदरों की तलाशी कोई नहीं लेता





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Jun 22, 2026

22-06-2026 योग किया ?


22-06-2026 

योग किया ? 


आते ही तोताराम ने पूछा- योग किया ? ठीक वैसे ही जैसे कोई मेट या मुंशी मिस्त्री से पूछता है- कितना प्लास्टर हुआ ? 

हमने कहा- क्या योग करना कोई मजदूरी है जो तू हमारे काम की रिपोर्ट ले रहा है ? यह हमारा व्यक्तिगत मामला है । हम योग करें या भोग। तू क्यों बिना बात की अफ़सरी झाड़ रहा है । और फिर योग, भोग, तप, तंत्र-मंत्र या अन्य कोई युक्ति सब हाईवे वाले ‘धाकड़’ की तरह थोड़े किये जाते हैं । तुलसी मानस के बालकाण्ड में कहते हैं-

जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ॥

योग, युक्ति, तप, मंत्र सब छुपाकर किये जाते हैं तभी उनका पूरा फल मिलता है ।  

बोला- तुझे पता होना चाहिए अब योग राष्ट्रीय कार्यक्रम हो गया है । कल छुट्टी थी लेकिन मास्टर स्कूलों में गए, और भी सरकार से लाभान्वित होने वाले या मोदी जी से लाभ पाने की उम्मीद रखने वाले सभी ने योग किया और फ़ोटो नेट पर डाले जिससे मोदी सरकार उन्हें देखकर उनकी कर्तव्यपरायणता और देशभक्ति का हिसाब-किताब रख सके । खुद मोदी जी ने कोलकाता में रेड रोड़ जैसी व्यस्त सड़क को सात दिन से बंद करवाकर कर मंच, कैमरे लगवाकर सभी देशभक्तों को योग सिखाया । इससे पता चलता है कि मोदी जी देशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कितने सजग और सक्रिय हैं । 

हमने कहा- दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल होता है । तभी कबीर कहते हैं-

करनी मीठी खाँड सी करनी बिस की लोय 

कथनी तज करनी करे तो बिस अमरित होय । 

मन वचन और कर्म की एकता ही सच्चा योग है । नहीं तो रामदेव वाला धंधा है । देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए केवल योग से काम नहीं चलता । सबसे पहले उन्हें स्वास्थ्यवर्द्धक और पूरा भोजन चाहिए, फिर भी अगर बीमार हो जाएँ तो असली दवाइयाँ, डॉक्टर और अस्पताल चाहिएं । योग स्वस्थ रहने के लिए पथ्य-परहेज, आहार-विहार की एक भारतीय पद्धति है । वह दवा और भोजन का विकल्प नहीं है । जब राजनीतिक पार्टियां नकली दवा बनाने वाली कंपनियों से चंदा लेंगी तो स्वास्थ्य का भगवान भी मालिक नहीं हो सकता । योग का ढोंग करने, योग करो स्वस्थ रहो का नारा लगाना जिम्मेदारी से बचने का बहाना है । जैसे कि जगह जगह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  का नारा लिखवा देने से काम नहीं होता । उसके लिए विज्ञापन की बजाय शिक्षा का बजट बढ़ाना पड़ता है और बेटियों को भ्रष्ट संतों और बाहुबली नेताओं से बचाना होता है । 

हाँ, योग से एक फायदा तो होता है । 

बोला- चल तूने कुछ तो माना । बता किसी आसन का कोई फायदा । 

हमने कहा- तीन आसन है एक शवासन, दूसरा कूर्मासन और तीसरा मार्जर्यासन । 

जब कोई समस्या या जिम्मेदारी लेने की बात आये तो शवासन लगा लो । सभी प्रभावित लोग धीरे धीरे सिर फोड़ कर चुप हो जाएंगे और इस तरह से सभी तनाव, समस्याएं और विवाद धीरे धीरे स्वतः शांत हो जाएंगे जैसे मणिपुर विवाद, महिला पहलवान शोषण, नीट पेपर लीक आदि । दूसरा है कूर्मासन । जब कोई संकट आये तो कछुए की तरह अपने हाथ पैर अपने खोल में समेट कर पड़े रहो । जब संकट टल जाए तब फिर देश के विकास में लग जाओ जैसे आजादी के आंदोलन में जब देश अंग्रेजों से लड़-भिड़ रहा था तब तथाकथित देशभक्तों ने ऐसे ही कूर्मासन लगा रखा था। और अब जब संकट नहीं है तब बिना कुछ किये खुद देशप्रेमी बनकर सबको हड़काते फिर रहे हैं । तीसरा है मार्जर्यासन । मार्जरी बिल्ली को कहते हैं । कभी उसे अंगड़ाई तोड़ते देखा है ? इस आसन से रीढ़ की हड्डी लचीली हो जाती है । जिससे आप ट्रम्प जैसे किसी भी कैरियर खराब कर सकने वाले दुष्ट या फायदा पहुँचाने वाले सेठ के आगे सरलता से झुककर अपना कैरियर बचा सकते हैं और धन जुटा सकते हैं । 

देश का सम्मान जाए भाड़ में ।    

 



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Jun 21, 2026

21-06-2026 कॉकरोचों का धरना


21-06-2026 

कॉकरोचों का धरना  


जैसे ही तोताराम बैठने को हुआ हमने उसे आज की ब्रेकिंग न्यूज दी- कॉकरोचों का धरना अवैध घोषित कर दिया गया है । 

बोला- यह क्या कोई समाचार है ? कुछ कॉमन सेंस से काम लिया कर । कॉकरोच इस सृष्टि के सबसे पुराने जीवित प्राणी हैं । उनके इस सनातन का सम्मान करते हुए घर की दीवारों की दरारों, गटर, रसोई के सीलन भरे कोनों में आवास और सब प्रकार का बचा-खुचा खाना निःशुल्क उपलब्ध करवाया तो जाता है । अब कॉकरोच भी धरना देने लगे । इसीलिए नीति आयोग के अमिताभ कान्त ने कहा था कि भारत में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है । मदर ऑफ डेमोक्रेसी का मतलब यह भी नहीं है कि कॉकरोच भी धरना देने लगें । कल को मक्खी, मच्छर, दीमक भी धरना देने लगेंगे । लगता है अब इनका मुकाबला करने के लिए एक नई सी जे पी मतलब ‘चप्पल जनता पार्टी’ बनानी पड़ेगी जो इन्हें देखते ही चप्पल फटकारकर ठिकाने लगा देगी ।    

हमने कहा-  हम वास्तविक कॉकरोचों की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो परीक्षा व्यवस्था से दुखी और बेकार छात्रों की बात कर रहे हैं जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने कॉकरोच बताया था, और जिन्होंने अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई है । वे जंतर मंतर पर थाली और चम्मच बजाय कर प्रदर्शन कर रहे थे । 

बोला- वैसे तो जिस तरह से ये अन्याय को मूर्खतापूर्ण और कायराना तरीके से बर्दाश्त करते हैं उससे तो ये कॉकरोच से ज्यादा कुछ लगते भी नहीं । फिर भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब बातों की आजादी है लेकिन उसका एक शिष्टाचार होता है । कोरोना के समय ताली थाली बजवाई थी कि नहीं । तब बजा लेते । अब आगे भी ऐसे मौके आएंगे तब बजा लेना और पोस्ट कर देना ताली थाली बजाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की तरह अपना फ़ोटो । अगर कुछ और हल्ला  मचाने का मन है तो बना लें ‘डी जे पी’ मतलब डिस्क जॉकी पार्टी और मस्जिदों के सामने गाएं बजायें हनुमान चालीसा । कोई कुछ नहीं कहेगा बल्कि प्रोमोजिंग युवा नेता बनने का रास्ता भी साफ हो सकता है जैसे जयपुर में दिपके को थप्पड़ मारने वाला चर्चित हो गया और तत्काल जमानत भी मिल गई । 

हमने कहा- जंतर मंतर तो वैसे भी प्रायः प्रदर्शन करने का स्थान रहा है जैसे रामलीला मैदान या लंदन का हाइड पार्क । भाजपा और रामदेव ने भी तो अन्ना हजारे की आड़ में रामलीला मैदान पर कब्जा जमा लिया था । और अब देखा नहीं संस्कारी और राष्ट्रवादी लोगों का शासन आने के बाद कोलकाता का रेड रोड़ सात दिन के लिए योग के चक्कर में बंद कर दिया कि नहीं । जबकि कुछ दिन पहले नमाज के लिए दो घंटे के लिए भी मना कर दिया गया था । 

बोला- अन्ना का आंदोलन भ्रष्टाचार के विरुद्ध था और योग एक अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम है । नमाज तो एक कट्टर धार्मिक कार्यक्रम है जिससे आम जनता को परेशानी होती है । 

हमने कहा- यह भी अजीब बात है कि मुसलमानों और ईसाइयों के कार्यक्रम तो धार्मिक होते हैं और कोई न कोई जिहाद होते हैं । इसलिए इन्हें अपने घरों में मनाने में भी सोचना पड़ता है और हिंदुओं के होली, दिवाली, दुर्गा पूजा और पथ संचलन और भगवा रैली आदि सब कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं । इसलिए इन्हें स्कूलों में भी मनाया जाना चाहिए ।  क्या मुसलमानों और ईसाइयों की कोई संस्कृति नहीं होती ? 

हमें तो याद है कि हम स्कूलों में बच्चों के साथ सभी धर्मों के त्योहार बड़े सद्भाव और उत्साह से मनाते थे । 

बोला- तभी तो भारत में हिन्दू धर्म खतरे में पड़ गया । अब देखो मोदी जी, योगी जी, धामी जी आदि लगे तो हुए हैं सब काम छोड़कर । जब धर्म बचेगा तभी तो देश बचेगा । 

हमने कहा- लेकिन यह कैसा धर्म है जहाँ बिना किसी महमूद ग़ज़नवी के बिना ही राम मंदिर में करोड़ों का गबन हो गया । 

बोला- चुप, जो राम को बदनाम करने की कोशिश की तो । योगी जी ने कहा है कि जब तक फैसला न हो जाए तब तक इस बारे में कोई बात करके राम को बदनाम न किया जाए । 

हमने कहा- अजीब तमाशा और तर्क है । बदनामी चोर की होती है या जिसके घर चोरी हुई है उसकी ? कहीं इस तरह चोरों को बचाने का इरादा तो नहीं है ? सोमनाथ पर डाके से शिव बदनाम होते हैं या महमूद ग़जनवी ? हाँ, उस समय के देश-समाज में रक्षकों की कायरता जरूर रेखांकित होती है । 



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Jun 20, 2026

20-06-2026 मेलोनी की फिगर



20-06-2026 

मेलोनी की फिगर 


हमने पूछा- तोताराम, मेलोनी की फिगर क्या है ? 

बोला- इस बुढ़ापे में बच्चों के बारे में ट्रम्प की तरह लूज टाक करते हुए तुझे शर्म नहीं आती ? फिगर मॉडल की होती है । वह उसका प्रदर्शन करती है और लाभ उठाती है ।

हमने कहा- मेलोनी हमारे सबसे छोटे बेटे से भी 10 साल छोटी है । तूने क्या हमें इतना लंपट समझ लिया ।मॉडल विज्ञापन करने वाले ही नहीं होते । किसी भी क्षेत्र में कोई  मानदंड स्थापित करने वालों को भी मॉडल ही कहते हैं ।लगता है तूने एनटायर इंग्लिश में एम ए किया है ।  मेलोनी को हम एक मॉडल प्रधानमंत्री मानते हैं । बड़ी खुद्दार और दबंग नेता है । लेखिका सिंगल मदर की जिजीविषा वाली बेटी है ।कोई उचक्का टाइप प्रॉपर्टी डीलर नहीं है । उसका एक व्यक्तित्व है । 

बोला- लेकिन फिगर का तो एक ही अर्थ होता है छाती, कमर और कूल्हों का नाप जैसे 36-28-36 ।  इसे जानकर तुझे क्या करना है । वैसे इसमें पूछना क्या है । वैसे ही दिखाई देता कि सामान्य हाइट और फिगर की एक लड़की है । होगा 32 इंच सीना । 

हमने कहा- वो तो ठीक है । लेकिन जी -7 सम्मिट में अपने फूहड़ और बड़बोले स्वभाव के अनुसार कुछ भी बोल देने वाले ट्रम्प ने जब कहा कि मेलोनी तो मेरे साथ फ़ोटो खिंचवाने के लिए गिड़गिड़ा रही थी, मरी जा रही थी तो मेलोनी ने जो जवाब दिया उससे हम कन्फ्यूज हो गए । उसने कहा- ट्रम्प बकवास कर रहे हैं । न इटली और न मैं किसी के सामने गिड़गिड़ाने वाले हैं । उसके इस जवाब से हमें लगा कि उसका सीना कम से कम 112 इंच का तो होगा ही । 

बोला- वीरता और आकार दो चीजें हैं । जरूरी नहीं कि बड़े आकार वाला वीर हो ही । वीरता तन का नहीं मन का विषय है । वीरता का मूल भाव है साहस । तभी सूक्ति है-  

न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।

संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥

  • सरल अर्थ: बिना जोखिम (मुसीबत या संदेह) उठाए कोई भी मनुष्य सुख, समृद्धि या भलाई प्राप्त नहीं कर सकता। लेकिन यदि वह जोखिम उठाता है और जीवित बच जाता है, तभी वह सफलता (कल्याण) का दर्शन करता है। 

  •  संदेश: यह श्लोक हमें सिखाता है कि महान उपलब्धियों के लिए साहस और कदम उठाना जरूरी है। डरकर पीछे रहने वाले कभी आगे नहीं बढ़ते, और जो जोखिम उठाकर आगे बढ़ते हैं, विजय उन्हीं को मिलती है।

ऐसे नेता को ही जनता दिल से अपना नेता मानती है और उसके पीछे चट्टान की तरह खड़ी हो जाती है जैसे कि ईरान के नेताओं के साहस के कारण वहाँ की जनता एकजुट हो गई और विजयी हुई । 


हल्दीघाटी  के युद्ध में महाराणा प्रताप अकबर को हरा नहीं सके और युद्ध के बाद उन्हें चित्तौड़ छोड़कर जंगलों में भटकना पड़ा लेकिन वे पराजित नहीं हुए थे । सिकंदर के सामने क्या आपको पर्वतेश्वर पराजित लगते हैं ? चीन  के साथ 1962 के युद्ध में हमें बहुत नुकसान हुआ लेकिन हम शर्मिंदा नहीं थे क्योंकि हम दृढ़तापूर्वक सत्य पर कायम थे। क्या महाभारत में चक्रव्यूह में घेरकर मारा गया अभिमन्यु कहीं किसी महारथी से कमतर नजर आता है ? किसी का यही गुण उसे सच्चा वीर बनाता है । जीत हार तो संघर्ष में होते ही रहते हैं । क्या बिहार बंगाल की जीत पर वर्तमान विजेता दल गर्व कर सकता है ? वीरता विजय मात्र नहीं बल्कि सत्य, उत्साह और साहस का एक अद्भुत मेल होती है । 

हमने कहा- लेकिन मोदी जी ने 56 इंची सीने के बावजूद ट्रम्प से अपने नागरिकों की हत्या के बारे में कुछ नहीं कहा । पहले जहाँ ‘माइ फ्रेंड’  कहा करते थे वहाँ हर वाक्य में  ‘योर एक्सेलेंसी’ कह रहे थे । 

बोला- अब जब ट्रम्प बार बार मोदी जी को कभी ब्यूटीफुल, कभी एंजिल कह कर खुशामद कर रहा था तो फिर उसे झिड़कना अच्छा भी नहीं लगता । 80 साल का बुजुर्ग आदमी है ।  

मोदी जी बहुत संवेदनशील और लिहाज करने वाले विनम्र व्यक्ति हैं ।उन्होंने कभी सलमान खान या धर्मेद्र की तरह कमीज उतारकर अपने 56 इंची सीने का प्रदर्शन नहीं किया । कुम्भ में स्नान किया भी तो धोती कुर्ता पहनकर । जैसे मनमोहन बाथरूम में भी रेन कोट पहनकर नहाते थे ।   

और फिर यह 56 इंची सीना वास्तव में थोड़े होता है । यह तो अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतीकात्मक कथन है । दारा सिंह का सीना भी 56 नहीं केवल 52 इंच का ही था ।  



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20-06-2026 बही लिख लिख के क्या होगा


20-06-2026 

बही लिख लिख के क्या होगा 



आज तोताराम ने आते ही कहा- मास्टर, यह कांग्रेस भी कम नहीं ?

हमने कहा- कम ही है । कभी देश के सभी राज्यों में जिसकी सरकारें थीं, बिना किसी को गाली निकाले, बिना  हिन्दू-मुसलमान किये केवल नेहरू जी के नाम से दो बैलों के निशान पर वोट मिल जाते थे वह बड़ी मुश्किल से विरोधी दल के दर्ज़े को पा सकी है । राम राम करके तीन चार राज्यों में सरकार है । अब और इससे क्या कम होगी । 

बोला- मैं सीटों और सत्ता की बात नहीं कर रहा हूँ । कुचरणी करने के मामले में कह रहा हूँ कि कांग्रेस भी कम नहीं । उसके पास ईडी नहीं है, यूएपीए नहीं है फिर भी  कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि जिस संगठन के लाखों करोड़ों अनुयायी हैं, अरबों का फंड जिसके पास है, जो दुनिया के अनेक देशों में फैली हुई है और जिसका सदस्य हुए बिना कोई इस देश का प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या और किसी बड़े पद पर नहीं बैठ सकता, जिसके प्रधान को फ्री में जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है और प्रधानमंत्री के अनुसार जो दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है उसे अपना हिसाब किताब देना, बताना चाहिए, आय-व्यय और गतिविधियों के लेख जोखा सार्वजनिक करना चाहिए । क्यों वह एक रहस्यमय संगठन की तरह काम करता है । 


हमने कहा- इसमें क्या बुराई है ? पारदर्शिता तो ईमानदारी का प्रमाण है । इसीसे कोई संगठन विश्वसनीय बनता है ।अगर कोई संगठन अपनी गतिविधियां, योजनाएं, हिसाब-किताब  गुप्त रखता है तो वह संदेहास्पद हो ही जाता है जैसे कि तालिबान, माओवादी आदि । जब पैसा इकट्ठा करते हैं, जुलूस-जलसा करते हैं, मीटिंग-मंत्रणा करते हैं तो किसी से क्या छुपाना । गाँधी जी तो जब भी कोई कार्यक्रम, आंदोलन, जलसा-जुलूस आदि करते थे तो बाकायदा अंग्रेज सरकार को  सूचित करते थे कि अमुक स्थान पर इतने लोग इस समय इस प्रकार से आंदोलन करेंगे । अब ऐसे में अंग्रेज उन्हें किस आधार पर दंडित करें । उन्हें कैसे अलोकतांत्रिक सिद्ध करें । ऐसे में उन पर अत्याचार करें तो दुनिया में बदनामी । इसी सच्चाई और पारदर्शिता के कारण उनका आंदोलन सत्याग्रह कहलाया जिसने दुनिया में प्रतिरोध का एक नया  विमर्श स्थापित किया । यही गाँधी की महानता थी जिसे दुनिया ने स्वीकार किया । आज भी हमारे पास दुनिया के सामने अपने परिचय के लिए गाँधी और बुद्ध के अतिरिक्त कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं देता । 

बोला- लेकिनसंघ है तो एक परिवार ही जिसका कोई भी सदस्य अगर किसी को कुछ देता है तो किसी को क्या परेशानी है । देने वाला गुरु दक्षिण देने से पहले टेक्स तो दे ही चुका है । फिर क्या बार बार टेक्स लिया जाएगा ?

हमने कहा- टेक्स तो बार बार नहीं लिया जाएगा लेकिन जब जनता का पैसा है, इतना बड़ा बजट और संगठन है, देश दुनिया में मान्यता है तो हिसाब रखना और देना अच्छा ही है । पारदर्शिता से संगठन का सम्मान और बढ़ेगा । 

बोला- जो संस्कारी होते हैं वे अपने दान-दक्षिणा का ढोल नहीं पीटते हैं । वे गुप्त दान में विश्वास करते हैं । 

हमने कहा- फिर भी हिसाब किताब तो हिसाब किताब ही होता है । मंदिर में चढ़ावे का भी हिसाब रखा जाता है । इससे मंदिर का सम्मान बढ़ता है और अगर चढ़ावे कुछ गड़बड़ी दिखाई देती है तो सम्मान में कमी आती है जैसे आजकल राम  मंदिर की विश्वसनीयता खतरे में पड़ी हुई है । गाँधी जी के आश्रम में अगर किसी दिन हिसाब किताब में एक पैसे का भी अंतर होता था तो खजांची को अपनी जेब से जमा करवाकर हिसाब ठीक करना होता था । यह दंड के बतौर नहीँ बल्कि पारदर्शिता के लिए जरूरी था ।

बोला- लेकिन संघ में तो गुरुदक्षिणा होती है । अब पति-पत्नी, गुरु-शिष्य, पिता-पुत्र आदि के संबंधों का भी कांग्रेस हिसाब मांगेगी ? फिर क्या शालीनता रह जाएगी इन पवित्र रिश्तों में । हमारा दर्शन तो कहता है- बही लिख लिख के क्या होगा यहीं सब कुछ लुटाना है । सजन रे झूठ मत बोलो ।

हमने कहा- लेकिन अगर हिसाब देने से सच की स्थापना होती है तो हिसाब मांगा और दिया भी जाना चाहिए । राम ने तो एक धोबी के अपने खुद में घर में रात को अपनी पत्नी के साथ झगड़े में सीता के बारे में प्रवाद करने मात्र से सीता को त्याग दिया । हालाँकि सीता की समस्त सुरक्षा का प्रबंध भी किया लेकिन राजधर्म की स्थापना और जनता के विश्वास को कायम रखने के लिए जो किया वह भी जरूरी था । इसलिए अगर दाढ़ी में तिनका या मन में चोर नहीं है तो हिसाब देने में क्या बुराई है । 

हमारे यहाँ तो ईडी आएगी तो हम बचने के लिए भाजपा में जाने की बजाय हिसाब देना बेहतर समझेंगे क्योंकि हमारे दिल में चोर नहीं है । 

आगे तुम जानो, तुम्हारी सरकार है जिसे चाहो देशद्रोही बताकर जेल में डाल दो और दस दस साल तक केस ही टेबल पर मत आने दो या चाहे जिस बलात्कारी को साल में छह महिने बेल और फरलो दे दो । 

विवाह खुल्लम खुल्ला, धूम-धड़ाके से होता है, कार्ड छपते हैं, अनेक लोग गवाह होते हैं, उसका पंजीकरण होता है । हाँ, अवैध संबंधों को छुपाया जाता है । वैसे आजकल तो ‘लिव इन’ का भी रजिस्ट्रेशन होने लगा है ।  

बोला- जब हिन्दू धर्म ही रजिस्टर्ड नहीं है तो हिंदुओं की संस्थाओं का कैसा रजिस्ट्रेशन ? 

हमने कहा- रजिस्ट्रेशन तो जैन, बौद्ध, ईसाइयत, इस्लाम किसी भी धर्म का नहीं है तो क्या वे कानून से ऊपर हो जाएंगे ? किसी के प्रति उनका कोई दायित्व नहीं ? ईसाइयों को विदेशी मिशनरी चंदे और मस्जिदों को पेट्रो डॉलर से जोड़ा जाता है कि नहीं ? लेकिन सब चंदे चिट्ठे का हिसाब रखते हैं । विदेशों में संघ के संगठन ‘हिन्दू सेवक संघ’ के नाम से रजिस्टर्ड है और जिनसे उसे डॉलर में चंदा मिलता है । कम से कम उसका हिसाब तो फेरा के तहत दिया ही जाना चाहिए ।  

 



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Jun 19, 2026

19-06-2026 तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा


19-06-2026 

तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा 



आज तोताराम बहुत विचलित था । इतना परेशान तो मोदी जी ट्रम्प द्वारा रूस से तेल खरीदने की मनाही या 100% टेरिफ़ की धमकी से भी नहीं हुए होंगे । 

हमने पूछा- वत्स, इतना परेशान क्यों है ? तू तो ईडी के भयभीत तृणमूल कॉंग्रेस के सांसदों और विधायकों की तरह डरा हुआ लग रहा है ।  

बोला- मास्टर, ईडी का क्या है । बड़ा सरल उपाय है । भाजपा में शामिल हो जाओ । तत्काल पवित्र, ईमानदार और संस्कारी । मैं तो एक सामान्य नागरिक के नाते अपनी जान की सुरक्षा चाहता हूँ ।जहाँ तक माल का प्रश्न है तो वह तो मेरे पास है नहीं । अपने नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व होता है । 

हमने कहा- दायित्व तो सरकार के और भी बहुत से होते हैं लेकिन हर बस में लिखी सूचना से सरकार का उत्तर समझा जा सकता है-  ‘यात्री अपने जान माल की रक्षा स्वयं करें’ । वैसे तेरी जान को खतरा किससे है ?

बोला- जब सुबह तेरे यहाँ आता हूँ तो तीन चार कुत्ते नियमित रूप से भोंक भोंककर मुझे डराते हैं जैसे कि कुछ उत्साही राष्ट्रवादी युवक मस्जिद के पास हनुमान चालीसा का पाठ करके या जय श्रीराम के नारे लगाकर मुसलमानों को डराते हैं । 

हमने कहा- कल ध्यान से देखकर, पहचानकर बताना कहीं वे कुत्ते मुसलमान तो नहीं ।   

बोला- कैसे पहचान सकता हूँ । वे कोई कपड़े थोड़े पहनते हैं । वैसे जब से भागवत जी ने कहा है कि हिन्दू और मुसलमानों का डीएनए एक है तो कन्फ्यूजन और बढ़ गया है । 

हमने कहा- ऐसे मामलों में तू भागवत जी को नहीं, हिमन्ता बिस्वा सरमा, धामी, सुवेन्दु अधिकारी, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, योगी जी आदि को सुनाकर । 

बोला- मुझे इन बातों से कोई मतलब नहीं । बस, मुझे तो सुरक्षा चाहिए । जेड प्लस सुरक्षा जिससे तीन चार क्या हजार कुत्ते भी मेरा कुछ न बिगाड़ सकें । 

हमने कहा- फावड़े का एक टूटा हुआ डंडा पड़ा है जाते समय ले जाना और जब भी कुत्ते भोंकें एक दो बार फटकार देना, भाग जाएंगे । 

बोला- भागवत जी तो बहुत बढ़िया लाठी चलाते हैं । मैंने एक बार स्वयंसेवकों को लट्ठ संचालन सिखाते हुए उनका वीडियो भी देखा था । अब भी क्या लट्ठ भाँजते हैं । सुना है कोई अच्छा लाठी चलाने वाला हो तो तीव्र घुमावदार संचालन से बंदूक की गोली से भी बचाव के सकता है । वैसे भी उनके अंडर में तो करोड़ों स्वयंसेवकों की सेना आती है । फिर उन्हें जेड प्लस सुरक्षा क्यों मिली हुई है ? वे न तो आयकर देते हैं, न उनकी कोई नौकरी और वेतन है । फिर जेड प्लस सुरक्षा का 40-50 लाख रुपया महिना कहाँ से देते हैं ?

हमने कहा- वे राष्ट्रवादी, संस्कारी, स्वयंसेवी संस्था के सर्वेसर्वा हैं । उनके प्रचारक सरकार में हैं । उनसे कौन कुछ माँग सकता है ? ये तो 40-50 लाख रुपये महिने की बात है उनका तो हजारों करोड़ का आधारभूत ढांचा है, अरबों का बजट है फिर भी किसी को कोई हिसाब किताब नहीं देते जबकि एक छोटी सी गौशाला और दुकान चलाने वाला तक अपना हिसाब देता है । तूने तो सारी ज़िंदगी में 40-50 लाख नहीं कमाए होंगे । इसलिए जेड प्लस सुरक्षा की बात छोड़ । इन कुत्तों का तुष्टीकरण कर दिया कर । 

बोला- कैसे ?

हमने कहा- जैसे राष्ट्रवादी सरकारें अपने अवैतनिक सैनिकों और भक्तों को कभी गौशाला के नाम से तो कभी काँवड़ियों

के लिए भंडारे लगाने आदि के बहाने लाखों रुपया अनुदान देकर लाभान्वित करती रहती हैं

वैसे ही तू भी इन्हें कभी कभी टुकड़ा फेंक दिया कर । ये कौनसे सिद्धांतवादी हैं, है तो कुत्ते ही भले ही किसी भी

धर्म, जाति और देश के हों । 

 



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19-06-2026 अब और क्या बाकी रह गया


19-06-2026 

अब और क्या बाकी रह गया 



तोताराम आज बहुत उत्साहित था, बोला- अब और क्या बाकी रह गया ?

हमने कहा- कुछ नहीं । कुछ बाकी नहीं रहा । जिस राम मंदिर के कारण भाजपा पावर में आई, जिसका शिलापूजन, प्राणप्रतिष्ठा, ध्वज-उत्तोलन मोदी जी ने किया उस रामलला के गर्भगृह की छत से पानी टपक रहा है । चंदे और चढ़ावे में चोरी और घपला हो रहा है, बहुमूल्य शिलाएं गायब हैं ।और मजे की बात यह कि  बात बात पर बुलडोज़र चलवा देने वाले और एनकाउंटर करवा देने वाले दबंग योगी जी के राज में एफआईआर तक नहीं हो रही है । मथुरा के कृष्ण मंदिर के तोशाखाना से हजारों करोड़ के सोने और रत्न गायब होने की शिकायत फलाहारी बाबा से अपने खून से पत्र लिखकर की है लेकिन सब तरफ चुप्पी है । हिन्दू ही नहीं अब तो उनके आराध्य तक खतरे में हैं और वह भी तब जब चपरासी से लेकर राष्ट्रपति तक सब हिन्दू हैं ।  सचमुच अब और क्या बाकी रह गया ? 

बोला- अब अपनी इस बुलेट वाणी को विराम दे । मैं मोदी जी की जी-7 सम्मेलन में अद्भुत उपलब्धि के बारे में बताना चाहता था । किसी को कुछ भी ऊलजलूल बक देने वाले नितांत फूहड़, अविश्वसनीय ट्रम्प ने मोदी जी के बारे में क्या कहा ? ‘सबसे सुंदर दिखने वाले फ़रिश्ते जैसे’ । क्या आजतक किसी प्रधानमंत्री के बारे में किसी अमेरिका राष्ट्रपति से ऐसा कुछ कहा था ? इंदिरा गाँधी को तो निक्सन ने चुड़ैल कहा था । 

हमने कहा- जैसे ट्रम्प विश्वसनीय वैसे ये फ़रिश्ते । प्रशंसा और निंदा महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि कर कौन रहा है ? किसी अज्ञानी, स्वार्थी और लफ़्फ़ाज़ व्यक्ति की बात का कोई महत्व नहीं होता । वह पल पल में स्वार्थ के अनुसार बदलता रहता है ।अब तुझे कोई तुझसे ही पूरा खर्चा लेकर साहित्य मनीषी, राष्ट्ररत्न जैसा कोई सम्मान दे दे तो उसका क्या कोई महत्व है । हमारे पास ‘विश्वा’ में छपने के लिए ऐसे ऐसे कवियों की रचनाएं आती हैं जिनको दो दोहे तक छंद में  लिखने नहीं आते लेकिन उनके परिचय में 50-60 सम्मानों की लिस्ट होती है ।हमें भी इलाहाबाद की किसी हिन्दी सेवी संस्था ने 2000 रुपये रजिस्ट्रेशन के बदले सम्मान लेने के लिए बुलाया था लेकिन हमारे बजट में ऐसा प्रोविजन नहीं था सो नहीं गए । आजकल सम्मान भी खरीदे जाते हैं । 

बोला- तो तू क्या कहना चाहता है ? क्या मोदी जी को जो 40-45 सम्मान मिले हैं वे उन्होंने खरीदे हैं ? 

हमने कहा- हमने ऐसा तो नहीं कहा लेकिन यह भी सच है कि किसी को मूर्ख बनाने के लिए उसकी झूठी प्रशंसा की जाती है और जो वस्ताव में मूर्ख होता है वह चक्कर में आ भी जाता है जैसे अपने गाने की प्रशंसा सुनकर कौआ लोमड़ी को अपनी रोटी गंवा बैठा । इंदिरा जी को तो निक्सन ने चुड़ैल कहा था क्योंकि वे उसके दबाव में नहीं आईं । लेकिन इंदिरा को यह देश और दुनिया क्या मानते हैं यह किसी से छुपा नहीं है । इस एंजिल (फ़रिश्ते) और ब्यूटीफुल लु किंग (सुंदर) विशेषण में लोमड़ी की चालाक खुशामद नजर आती है किसी पारखी की नजर कम । वैसे ट्रम्प के सौंदर्य-प्रेम का अनुमान उनके अनेक वैवाहिक और विवाहेतर संबंधों के आधार पर लगाया जा सकता है । 

और जहाँ तक अमेरिका के राष्ट्रपतियों के मन में भारत के प्रधानमंत्रियों के प्रति सम्मान का प्रश्न है तो उसका अनुमान  रीगन द्वारा राजीव गाँधी पर छाता तानकर चलने में, नेहरू जी के लिए ट्रू मैन का देर तक हवाई अड्डे पर उनके इंतजार करने से पता चलता है जबकि ब्यूटीफुल लुकिंग को लेने व्हाइट हाउस के दरवाजे पर एक तृतीय श्रेणी का कर्मचारी भेजा जाता है । ओबामा कहते थे जब मनमोहन बोलते हैं तो सारी दुनिया सुनती है । 

बोला- फिर भी प्रशंसा तो प्रशंसा ही होती है । 

हमने कहा- प्रशंसा क्या, जिस तरह से पर्ची लेकर ट्रम्प से बात कर रहे थे उससे यह लगता था जैसे किसी चौथी फेल को यूपीएससी के इंटरव्यू में बैठा दिया हो । सब लोग हँस रहे हैं । साथ में ले गई पर्ची भी ढंग से नहीं देख पा रहे थे । इससे अच्छा तो जाते ही नहीं या आमिर शाह जैसे चाणक्य और इतिहास के विद्यार्थी को भेज देते । 

वैसे भी हम वास्तविक  जी-7 की गिनती में थोड़े आते हैं । वह तो कुछ देशों को खुश करने के लिए गैलरी में खड़े होकर फिल्म देखने जैसा दर्जा दिया गया है जैसे दक्षिण कोरिया, ब्राजील, मिस्र, कीनिया के साथ मोदी जी के शब्दों में विश्वगुरु भारत को ।  

कभी हम रूस और अमेरिका के दो ध्रुवीय विश्व में गुटनिरपेक्ष सिद्धांत के रूप में तीसरी निष्पक्ष शक्ति हुआ करते थे । इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में दिल्ली में 92 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ विराट सम्मेलन हुआ था । हमारी आवाज दुनिया में सुनी जाती थी । तब कोई ट्रम्प हमें इस तरह गरिया नहीं सकता था । और अब कहीं गैलरी में खड़े हैं । अब तो बस धक्के मारकर बाहर भागना ही बाकी रह गया है । सचमुच कुछ बाकी नहीं रह गया है ।



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Jun 17, 2026

16-06-2026 कितने चंपतराय

16-06-2026   

कितने चंपतराय 





(राम मंदिर चढ़ावा घोटाला प्रकट हुआ- 15-06-2026)

क्या क्या ले चंपत हुए कितने चंपतराय 
भक्त भला क्या चीज है प्रभु भी समझ न पाय 
प्रभु भी समझ न पाय, धर्म के खातिर चंदा 
निकला नेता-व्यापारी का साझा धंधा 
कह जोशी कविराय राम को घट माँहि समाना 
 भैय्या मूरख बनकर काहे दर दर धक्के खाना  




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Jun 7, 2026

07-06-2026 सर फोड़ना


07-06-2026 


सर फोड़ना 





आज तोताराम कुछ उदास था । कई देर चुपचाप बैठे रहने के बाद बोला- मास्टर, तू अगर मज़ाक न उड़ाये तो एक बात कहूँ ? आज मेरा रोने को जी कर रहा है । क्या तेरे कंधे पर सिर रखकर रो लूँ । हमारे प्रभु को तो अपने सात समुद्र पार के प्रभु की स्नेहिल डांट झेलने से ही फुरसत नहीं है । ऊपर से अपना रोना ही पूरा नहीं होता तो हमारा रोना क्या सुनेंगे ? 


हमने कहा- तोताराम, हम सब मनुष्य हैं । सबकी अपनी अपनी समस्याएं हैं, सुख -दुख हैं । आते जाते रहते हैं । एक दूसरे के साथ मिल बाँटकर, रो-धोकर कर जीवन काट लेते हैं । कुछ नहीं तो अपना कंधा तो तुझे दे ही सकते हैं । रो ले, जी हल्का हो जाएगा । वैसे  कल कोक्रोचों के दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल हुए वांगचुक ने कहा है कि घर पर रोने से अच्छा है सड़क पर उतरें । तो चल, हम दोनों जयपुर रोड़ पर या कलेक्ट्रेट के सामने चल कर रोयें । क्या पता, किसी का दिल ही पसीज जाए । 


बोला- इस जमाने में किसी का दिल पसीजने वाला नहीं है। इसीलिए पाँच सौ साल पहले ही रहीम जी कह गए हैं- 


रहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखो गोय । 

सुन अठिलैहैं लोग सब बाँटि न लैहैं कोय ।। अपना दुख मन में छुपा कर रखो। कोई मदद नहीं करेगा, सब मज़ाक उड़ाएंगे । 


तभी तो सोनिया गाँधी ने अपने जीवन के अनेक हृदयविदारक कष्ट दिल पर पत्थर रखकर चुपचाप सह लिए । क्या मिला इस देश से उसे । पहले देवर का निधन, फिर सास और पति की हत्या और स्वयंसेवी निंदकों से निरंतर निंदा- कभी बार बाला, कभी जर्सी गाय, कभी काग्रेस की विधवा । उसने अपनी जीवनी में एक पत्र में लिखा हैं- मैंने जितना जीवन राजीव के साथ बिताया है उससे अधिक जीवन इस देश में उनके बिना बिता दिया है । अगर आपको मुझसे शिकायत है तो मुझे मेरा राजीव लौटा दो, मैं इटली लौट जाऊँगी । और अगर नहीं लौटा सकते तो मुझे शांति से यहाँ की मिट्टी में मिल जाने दो । 


हमने कहा- लेकिन दुख को चुपचाप सह लेने और घर में बैठकर रो लेने से क्या फायदा हुआ ? मोदी जी को देख, अपनी गरीबी, चाय विक्रय और चतुराई से हथियाये गए ओ बी सीत्व का कार्ड खेलकर प्रधानमंत्री बन गए और अब अपनी माँ का अपमान और गालियों का कार्ड खेलकर चुनाव जीत रहे हैं । इसलिए रोओ, नकली आँसू निकालकर रोओ, दिखा दिखाकर रोओ ।घड़ियाली आँसू रोओ ऐसे आँसू नहीं निकलें तो ग्लिसरिन लगाकर रोओ ।  


बोला- लेकिन मोदी जी के पास तो गोदी मीडिया है, जनता के टेक्स का फ्री का पैसा है । मैं कैसे रोने के लिए अखबार में फुल पेज का विज्ञापन छपाऊँ । वे तो मन की बात की आड़ में भी कोई न कोई मतलब का एंगल निकाल लेते हैं ।


हमने कहा- देखो गालिब ने भी यही कहा है कि अपने दुख का हल्ला मचाने में शर्म मत करो । जहाँ भी मौका मिले दुख को भुनाओ । जिस तिस की चौखट पर सिर फोड़ो । वह कहता है- 


वफ़ा कैसी कहाँ का इश्क जब सर फोड़ना ठहरा

तो फिर ऐ संग-ए-दिल ! तेरा ही संग-ए-आस्तां क्यों हो 


इसी ट्रिक को ही सभी धर्म भी अपनाते हैं क्योंकि धर्मों के पास आपकी दुनियावी समस्याओं का कोई हल नहीं है बल्कि कहीं न कहीं धर्म ही आपकी समस्या है ।  सभी धर्म सभी समस्याओं का एक काल्पनिक हल बताने का धंधा हैं इसीलिए वे भी आपको सिर फोड़ने के लिए तरह तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं जैसे हिंदुओं को सिर फोड़ने के लिए मूर्तियाँ और शिवलिंग, मुसलमानों के लिए काबे का काला प्रस्तर का ढांचा,  यहूदियों के लिए रोने के लिए ‘विलाप की दीवार’, ईसाइयों के लिए तरह तरह के क्रॉस ।इंग्लैंड में भी एक स्थान है हाइड पार्क जहाँ जाकर कोई भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी के भी विरुद्ध अपनी भड़ास निकाल सकता है । भी तो किसी जाति के वोट लेने के लिए, उनके लिए शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार की सुविधा मुहय्या करवाने की बजाय  अलग अलग जातियों के लोगों के लिए उनके महापुरुषों की मूर्तियाँ स्थापित करवा देती हैं । रोओ और फोड़ो सिर और हमें जिताते रहो चुनाव । ज्यादा ही कष्ट है तो चलो तुम्हारे नेता के जन्म दिन को राजकीय अवकाश घोषित कर देते हैं । अगर झारखंड के आदिवासियों को अपनी जमीन व्यापारियों को दिए जाने से परेशानी है तो कोई बात नहीं, रख देते हैं किसी हवाई अड्डे का नाम बिरसामुण्डा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ।

बोला- लेकिन मास्टर, अपने इधर तो पानी की भी बड़ी किल्लत है ।

हमने कहा- उसके लिए भजन मंडली ‘वंदे गंगा’ नृत्य नाटिका लेकर घूम तो रही है । और फिर भी तू संतुष्ट नहीं है तो

अपने झुंझुनू जिले के इस्लामपुर का नाम श्रीरामपुर करने प्रस्ताव रख तो दिया है । बोला- हाँ, यह ठीक है । पहले वहाँ

पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में ‘आब-ए-ज़मज़म’ आया करता था अब पवित्र गंगा जल आया करेगा ।




 



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Jun 5, 2026

05-06-2026 ध्यान रखना मास्टर !


05-06-2026 


ध्यान रखना मास्टर !




हमारे घर का गेट सामान्य गेट है । न बहुत वज़नी और न ही सजावटी । न कहीं कोई नेमप्लेट और न ही वर्तमान या भूतपूर्व पद का उल्लेख । हालाँकि घर में कई अधिकारी, डॉक्टर, प्रिंसिपल आदि हैं फिर भी पता नहीं क्यों हमें यह भोंडा प्रदर्शन लगता है ।मोहल्ले वाले जानते हैं कि यहाँ मास्टर जी रहते हैं और कोई रजिस्ट्री या डिलीवरी वाला आता है तो उसके पास मोबाइल नंबर होता ही है । फोन कर लेता है । कौन तीन मिनट के लोकल कॉल का एक रुपया लगता है । हाँ, एक तरफ पानी का बिल देने वाले ने एक नंबर अटका रखा है और अब जनगणना वाले ने उसी के पास एक मकान नंबर जैसा कुछ लिख रखा है ।  


डिग्री और पद मनुष्य की बहुत बड़ी कुंठा होती है ।वह उसे प्रदर्शित किया बिना रह नहीं पाता । वर्तमान नहीं तो भूतपूर्व ही सही पद तो है । शुरू में भूतपूर्व पूरा लिखवाते हैं । फिर केवल भू. पू. किया और उसके बाद केवल पू. और बाद में तो वह संकोच भी गायब । पू. को भी थोड़ा घिसवा देते हैं । अपना परिचय ऐसे देते हैं जैसे कि अब भी उसी पद पर हैं । वैसे आज से कोई पचास साल पहले पोरबंदर में हमारे साथ अंग्रेजी के एक एंग्लो अमेरिकन अध्यापक हुआ करते थे चार्ल्स मैसी । मेरठ विश्वविद्यालय से पीएचडी भी थे ।  एक दिन हमने वैसे ही सहज भाव से कह दिया और मैसी भाई क्या हाल हैं ?

मैसी साहब तो बिफर पड़े- नो मैसी भाई मिस्टर जोशी,  कॉल मी डॉक्टर मैसी ।


वैसे आज भी कुछ ऐसे संकोची और विनम्र संत होते हैं जो लोगों की लाख कोशिशों के बावजूद न तो डिग्री दिखाते हैं बल्कि ऐसे और कहते हैं कि मैं पढ़-वढा कुछ नहीं हूँ ।  


तो प्रिय पाठकगण, चाय का गिलास थामे थामे तोताराम अचानक घर के गेट के पिलर के पास गया और लौट आया । दो घूंट लेने के बाद फिर वही प्रक्रिया ।

 

हमने पूछा- क्या बात है तू तो गेट के चक्कर ऐसे लगा रहा है जैसे मोदी जी चुनाव के समय बंगाल के । कभी झालमुड़ी खा रहे हैं तो कभी यमुना में छठ स्नान तक का साहस न जुटा पाने वाले, हुगली में नौका विहार कर रहे हैं भले ही लोग उसे नौका विहार, मौका विहार या धोखा विहार जाने क्या क्या कह रहे हैं । 


बोला- मास्टर, समय बहुत खराब है । सावधानी हटी और दुर्घटना घटी । पता नहीं, कब तेरे मकान के इस पिलर पर कोई अपना नाम लिख जाए और चार दिन बाद दावा करने लग जाए कि यह मकान मेरा है । देखा नहीं, पिछले कुछ दिनों में इलाहाबाद का प्रयाग हो गया, कलकत्ता का कोलकाता हो गया हालाँकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद हाईकोर्ट और कलकत्ता विश्वविद्यालय नाम अभी तक चल रहे हैं ।एक मिनट में सरदार पटेल स्टेडियम नरेंद्र मोदी हो गया । किंग्स वे राजपथ, रेसकोर्स लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ । अब बस मोदी धाम,मोदी-मंदिर बाकी रह गए हैं जहाँ लोग अपने अधिकारों के तहत नही बल्कि आरती, जागरण, प्रसाद चढ़ाने के लिए जाया करेंगे ।


 हमने कहा- किसी के लिखने से क्या होता है ? झुंझुनू में एक बनिया परिवार था जलेबी चोर । उनके किसी पूर्वज ने लालच में खाने के साथ साथ दो चार जलेबी जेब में भी रख ली होगी और मजाक मजाक में लोगों ने तलाशी भी ले ली होगी तो नाम पड़ गया ‘जलेबीचोर’ । लोग सीधे सरल हुआ करते थे सो नाम चल निकला । अब कहीं उनके वंशजों को खयाल आया तो सरनेम बदल लिया ‘अग्रवाल’ । फिर जब लोग ‘अग्रवाल’ के नाम से पूछने आते तो ‘जलेबीचोर’ सरनेम के अभ्यस्त कन्फ्यूज हो जाते तो घर ढूँढ़ने वाले को स्पष्ट करना पड़ता कि जी उनका घर जिन्हें पहले ‘जलेबीचोर’ कहते थे । मतलब अग्रवाल जी का इतिहास जलेबीचोरी के बिना अपूर्ण रहता ।

 

 

बोला- अब वह बात नहीं है । अब तो किसी बंदोपाध्याय ने बनर्जी, बसु ने बासु, घोष ने घोषाल, मुखोपाध्याय ने मुखर्जी बता दिया तो वोटर लिस्ट से नाम कट जाता है । तेरे तीनों बच्चों के हायर सेकेंडरी के सर्टिफिकेट में पोर्टब्लेयर नाम लिखा हुआ है लेकिन अब कहाँ है पोर्टब्लेयर ? जल्दी से अमित शाह जी से मिलकर श्री विजयपुरम करवा ले । अगर उन्हें नकली प्रमाण पत्र के नाम पर परेशान किया गया तो मुश्किल हो जाएगी। और तू भी अपना रीजनल कॉलेज ऑफ एज्यूकेशन, भोपाल से अपनी बीएड की डिग्री में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की जगह ‘माँ वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करवा ले । 


याद रख तुझे डिग्री दिखाने से कोई हाई कोर्ट छूट देने वाला नहीं है । 


हमने कहा- देखेंगे । अभी क्या कोई कल ही चेंज हुआ जा रहा है ?


बोला- यह राम भक्तों का रामराज्य है और देश ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’। जैसे एक धोबी ने अपने घर में सीता के बारे में कुछ कहा लेकिन पता लगते ही राम ने सीता के वनवास का निर्णय ले लिया वैसे ही अगर किसी काँवड़िए, गौरक्षक और स्वयंसेवक ने उलटे मन से भी सुझाव दे दिया तो ऐसे सुझावों को लागू करने के लिए भले ही विपक्ष को बाहर निकालना पड़े लेकिन काम होगा फटाफट । बचाव में ही सुरक्षा है । जो भी आवश्यक कार्यवाही हो, शुरू कर ही दे ।


हमने कहा- लेकिन बरकतुल्लाह तो बहुत बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे । सुभाष से भी पहले राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में काबुल में निर्वासन में बनी पहली भारत सरकार में वे प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए थे । 


बोला- वह सब तो ठीक है लेकिन थे तो मुसलमान । अब बता मुसलमान कैसे भारतभक्त हो सकता है ? भले ही वह जस्टिस सय्यद आगा हुसैन,अशफाकुल्ला या अब्दुल हमीद या सोफिया कुरैशी या दीपक मुहम्मद कोई भी हो । वैसे ही जैसे कोई भी हिन्दू देशद्रोही नहीं हो सकता चाहे वह सर शोभासिंह, सर शादीलाल, हंसराज वोहरा, फणीन्द्र नाथ, जय गोपाल, मनमोहन, ललित कुमार ही क्यों न हो ।     



-रमेश जोशी    



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