Oct 20, 2026

19-10-2026 कौन सा दशानन-दहन


19-10-2026  

कौन सा दशानन-दहन      

 

 

 

 

 

तोताराम आज सुबह नहीं आया । हमने भी दशहरा-पूजन के चक्कर में विशेष ध्यान नहीं दिया । शाम को कोई तीन साढ़े तीन बजे बड़ी हड़बड़ी में प्रकट हुआ, बोला- फटाफट तैयार हो जा । थोड़ी आगे जगह मिल जाएगी तो दशानन-दहन ढंग से देख पाएंगे ।  

हमने कहा- आज तो राष्ट्र, संस्कृति की तरह दशानन-दहन के समास द्वारा बहुत तत्सम-प्रधान हुआ जा रहा है लेकिन इन तमाशों और भीड़-भड़क्कों से दूर रहना ही ठीक है । आजकल उत्सवों में बहुत भगदड़, आग, वाहनों की टक्कर हो रही है । रावण का तो कुछ बिगड़ना नहीं लेकिन हमारा तीया-पाँचा जरूर हो लेगा । हम कोई कार सेवक भी नहीं हैं जो ढंग का मुआवजा या पेंशन मिल जाएगी । बंगाल के दुर्गापूजा पंडाल अग्नि कांड के घायलों की तरह कोई अमित शाह पूछने नहीं आएगा ।  

वैसे चलने से पहले यह तो तय कर ले कि कौन से दशानन-दहन में चलना है ?  

बोला- दशानन भी क्या कोई दस बीस हुए हैं ? उसी दशानन का दहन देखने चलना है जिसने  सीता का हरण किया था ।  

हमने कहा-  वास्तव में दस सिर का कोई व्यक्ति नहीं होता । कविता और मिथकों में प्रतीक होते हैं । रावण भी दस अवगुणों का प्रतीक है- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, ईर्ष्या, अहंकार, 

घृणा, अन्याय और जड़ता ।   

आज इन अवगुणों से युक्त दुष्ट लोग क्या ऐसे ही चौराहे पर मिलेंगे ? उन सबको तो जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है । उन तक तो किसी की भी पहुँच ही नहीं है । हाँ, राम जरूर कहीं जंतर-मंतर पर पुलिस की धक्के, डंडे, पेलेट गन और कीलों वाली लाठियाँ खाते मिल जाएंगे ।  

बोला- तू और भी कई तरह के रावणों के बारे में बता रहा था ना ।  

हमने कहा- एक रावण तो वह जिसका कार्टून गोडसे और नारायण  आप्टे की सावरकर द्वारा पोषित मराठी पत्रिका ‘अग्रणी’ में छापा गया था जिसमें गांधी को रावण बनाया गया था और अन्य सिरों में नेहरू, सुभाष, पटेल, मौलाना आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खान, अंबेडकर आदि दस स्वतंत्रता सेनानी थे और उन पर धनुष पर बाण चढ़ाए लक्ष्य साध रहे थे सावरकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ।  

और इस कार्टून के मिशन को 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने अंजाम दे दिया ।  

अब उसी की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में जगह जगह एक और दशानन-दहन के पोस्टर लगे हैं जिसमें किसी सनातन रक्षा संगठन ने पार्टी लाइन पर दस दशासन तय किए हैं जिनमें कुछ मुसलमानों के अलावा अखिलेश और राहुल गांधी के भी हैं ।   

अगर 1945 के कार्टून और उसके मिशन से इसकी तुलना करें तो पता चल जाएगा कि ये किस सनातन और किस रावण की बात कर रहे हैं और इनके भावी इरादे क्या हैं ।  

लेकिन मजे की बात देख कि 100% टेरिफ़  लगाने की धमकी देने वााले, रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदने देने वाले के सामने इनके डाइपर गीले हो जाते हैं ।  

बोला- सुना है कॉकरोचों के पुतले भी रावण कुंभकर्ण के साथ जलाने के कार्यक्रम हैं ।  

हमने कहा- लेकिन इन्हें पता नहीं है कि कॉकरोचों के लिए इनकी बंदूकें, लठियाँ, सब कम पड़ जाएंगी । ये सत्य और अहिंसा से सुसज्जित हैं जिसके आगे अंग्रेजी भी हार मान गए ।  

बोला- लेकिन कॉकरोचों को भी ध्यान रखना चाहिए कि उनका पाला अंग्रेजों से भी बड़े दुष्टों से पड़ा है जो झूठे ही नहीं बेशर्म भी हैं ।   

 

 

 


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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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