Jun 27, 2011

श्री रमेश जोशी की दो व्यंग्य पुस्तकों का विमोचन

साहित्य समाचार 
श्री रमेश जोशी की दो व्यंग्य पुस्तकों का विमोचन



‘बेगाने मौसम’ का विमोचन - (बाएँ से ) शायर श्री शेख हबीब ; लेखक व कवि रमेश जोशी ; कवि डॉ रणजीत ; कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्य संयुक्त सचिव और यूनेस्को में भारत के भूतपूर्व राजदूत श्री चिरंजीव सिंह ; साहित्यानुरागी श्री श्याम गोइन्का |

१९ जून २०११, बंगलुरु, कर्नाटक हिन्दी प्रचार समिति का सभागार, नगर के चुने हुए हिंदी प्रेमियों और साहित्यकारों की उपस्थिति; अवसर था कवि, लेखक, केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त उपप्राचार्य एवं हिंदी के वरिष्ठ व्यंग्य साहित्यकार रमेश जोशी की दो व्यंग्य पुस्तकों का विमोचन – ‘बेगाने मौसम’(गज़लें-गीतिकाएँ) और ‘माई लेटर्स टु जार्ज बुश’ ।

‘बेगाने मौसम’ का परिचय देते हुए कवयित्री सुश्री मंजू वेंकट ने बताया कि इस में वर्तमान की संवेदनहीनता, कुंठाओं व मुख्य सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक विडंबनाओं का छोटी बहर में मार्मिक चित्रण किया है । जैसे -

उनका साया जहाँ-जहाँ पर ।
तिनका तक ना उगा वहाँ पर ।


गर्दन, आँखें, कमर झुक गईं
जो भी हो आया दरबार ।


छुप कर लोग मचानों में ।
छोड़ें तीर ढलानों में ।


एक गज़ल – “परिंदा डर रहा है आसमाँ से । चमन सहमा हुआ है बागबाँ से ।” को प्रसिद्ध शायर शेख हबीब ने अपने मधुर स्वर से श्रोताओं के दिल में उतार कर महफ़िल का सा माहौल बना दिया । ‘बेगाने मौसम’ का विमोचन साहित्यानुरागी श्री श्याम गोइन्का ने किया ।

‘माई लेटर्स टु जार्ज बुश’ का विमोचन - (बाएँ से ) लेखक व कवि रमेश जोशी ; कवि डॉ रणजीत ; कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्य संयुक्त सचिव और यूनेस्को में भारत के भूतपूर्व राजदूत श्री चिरंजीव सिंह ; साहित्यानुरागी श्री श्याम गोइन्का |

‘माई लेटर्स टु जार्ज बुश’ का परिचय देते हुए प्रसिद्ध मानवतावादी, सोवियत भूमि नेहरू अवार्ड से सम्मानित कवि डा. रणजीत ने कहा- “जोशी का व्यंग्य कहीं भी कटु नहीं है मगर उसने न तो अमरीकी ‘उदारीकरण’ को ही बख्शा है और न ही भारतीय विडंबनाओं को । आज के विश्व की सोचनीय स्थिति सर्वत्र उजागर हुई है । ”

‘माई लेटर्स टु जार्ज बुश’ का विमोचन कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्य संयुक्त सचिव और यूनेस्को में भारत के भूतपूर्व राजदूत और धुरंधर विद्वान श्री चिरंजीव सिंह ने किया । उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के साहित्य में व्यंग्यात्मक रचनाओं की कमी है । क्षेत्रीय भाषाओं का अधिकतर साहित्य क्लिष्ट तथा गंभीर विषयों तक सीमित है । ऐसी स्थिति में हिंदी भाषा में रमेश जोशी जैसे व्यंगकार ने यह साबित कर दिया है कि व्यंग्य के माध्यम से भी समाज की गंभीर समस्याओं तथा विसंगतियों पर प्रहार किया जा सकता है । चाहे गद्य हो या पद्य लेखक ने दोनों विधाओं में एक विशिष्ट शैली में सराहनीय साहित्य का सृजन किया है ।

मध्याह्न ११.३० से १.३० तक चले इस कार्यक्रम का आतिथ्य और संचालन ‘एटीट्यूड शिफ्ट – आधुनिक जीवन के लिए संस्कृत न्याय’ के लेखक और ‘थिंकिंग हार्ट्स’ प्रकाशन के शशिकांत जोशी ने किया । रविवार को ‘फादर्स डे’ था सो उन्होंने रमेश जोशी के कविता संग्रह ‘पिता’ से एक कविता ‘घर का नक्शा’ का भी पाठ किया । शशिकांत ने ‘पिता’ पुस्तक का ‘Musings of a Father’ के नाम से अनुवाद भी किया है जो अमेजोन के वेबसाईट पर ‘किंडल’ पर डिजिटल पुस्तक के रूप में उपलब्ध है ।

हिन्दी साहित्य के पठन पाठन को प्रोत्साहित करने के लिये दोनों पुस्तकें एक के मूल्य पर दी जा रही हैं । कृपया लाभ उठायें ।  अधिक जानकारी के लिए देखें – ThinkingHeartsOnline.com/books

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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

6 comments:

  1. जोशी जी को ढेर सारी शुभकामनाएं।

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  2. जोशी जी,आपको नई पुस्तकों की बधाई ! अब आप एक स्थापित साहित्यकार बन गए हैं !

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  3. पुस्तकों के विमोचन पर ढेर सारी शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई स्वीकार करे !!

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  4. नई पुस्तक की बहुत बधाई., पुस्तक पढ़ने की प्रबल इच्छा है. आपसे बात कर प्राप्ति का मार्ग पता करते हैं.

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  5. हिन्दी साहित्य के पठन पाठन को प्रोत्साहित करने के लिये दोनों पुस्तकें एक के मूल्य पर दी जा रही हैं । कृपया लाभ उठायें । अधिक जानकारी के लिए देखें – ThinkingHeartsOnline.com/books

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