Jun 6, 2011

अमरीकी गधा


( इराक में २००८ में एक अमरीकी नेवल बेस के सैनिकों का एक इराकी गधे से परिचय हो गया जिसे अब कर्नल जॉन फोल्सम के विशेष प्रयत्नों से, उन्होंने हजारों डालर का खर्चा करके वहाँ से अमरीका मँगवा लिया है- एक समाचार, १६-५-२०११ )

कर्नल जॉन फोल्सम साहब,
नमस्ते । २००८ में ईराक में एक नेवल बेस पर नियुक्त एक सैनिक सिगरेट पी रहा था तभी एक इराकी गधा उसकी सिगरेट छीन कर चबा गया । सैनिकों को उसकी यह अदा बहुत पसंद आई और फिर तो वे उससे बहुत हिलमिल गए । सैनिक इराक से लौट आए । पता नहीं, उनको अपने उस प्रिय गधे की याद आती थी या नहीं मगर आप उसे नहीं भूल पाए । और कोई तीस हज़ार डालर का खर्च करके उसे मई २०११ में अमरीका बुलवा ही लिया । गधा आपकी ही नहीं, सब की आवश्यकता होता है । कुत्ते-बिल्ली भले ही मन बहला दें पर बोझ तो गधा ही ढोता है । इराक में आप उस गधे से बोझा ढुलवाते थे या नहीं, पता नहीं ।

इस गधे को अमरीका मँगवाने में काफ़ी खर्चा आया जिसे आपने चंदे से जुटाया । ठीक भी है, ऐसे कामों में कोई समझदार आदमी अपनी जेब से थोड़े ही खर्च करता है । उसे अमरीका लाने से पहले उसके खून की जाँच की गई और भी कई औपचारिकताएँ की गईं । अमरीका एक आर्थिक देश है जहाँ सब कुछ अर्थ को ध्यान में रख कर सोचा और किया जाता है । जब गोरे लोगों ने अमरीका पर कब्ज़ा किया था तो उस समय वहाँ ज़मीन बहुत थी और मशीने थीं नहीं सो उस ज़मीन को जोतने और अन्य विकास कार्यों के लिए गधों की बहुत आवश्यकता थी । तब अमरीका सीधे अफ़्रीका से गधे पकड़ कर लाता था । कुछ मुसलमान भी वहाँ से गधे पकड़ कर लाते और अमरीका को बेच देते थे । तब गधों को कीमत देकर ख़रीदा जाता था । इन गधों को मार-पीट कर काम लिया जाता था । और उन गधों को मालिक अपनी ओर से नया नाम दिया करते थे जैसे कि आपने भी इस गधे को 'स्मोक' नाम दिया । और उनका धर्म बदल कर ईसाई बना दिया जाता था और बिना कोई अतिरिक्त खर्चा किए ही धर्म-लाभ भी प्राप्त कर लिया जाता था । आप भी क्या इस 'स्मोक' नामक गधे का धर्म बदलवाकर उसे ईसाई तो नहीं बना रहे हैं ? वैसे ईसाई बनने पर भी वह रहेगा तो दो नम्बर का ईसाई ही जैसे कि दुनिया के और काले ईसाई दो नंबर के ईसाई हैं या जैसे कि अरब देशों में भारत के मुसलमान दो नंबर के मुसलमान माने जाते हैं । असली ईसाई तो गोरा ईसाई होता है । इन गधों की बदौलत अमरीका बहुत धनवान हो गया । फिर उसने मशीनें भी बना लीं और तब गधों को लाना और उनसे काम लेना महँगा पड़ने लगा तो उन्हें 'व्हाईट मैन्स बर्डन' कहा जाने लगा । ठीक भी है, काम निकल जाने पर गधा ही क्या, बाप तक बर्डन लगने लगता है ।

अब तो हालत यह है कि आपके देश को गधे पकड़ कर लाने या खरीदने की ज़रूरत ही नहीं है । अब तो सारे विकासशील देशों के गधे जी-जान लगाकर वह पढ़ाई करते हैं जिसकी आपके देश में माँग होती है । फिर मोटी फीस देकर आपके आगे वीजा के लिए लाइन लगाते हैं और आपसे दुनिया के आर्थिक स्वर्ग में प्रवेश देने के लिए घिघियाते हैं । तब आप उसे प्रवेश देते हैं । वहाँ जाकर वह हाड़-तोड़ मेहनत करता है और आपकी अर्थव्यवस्था को और विकसित करता है । गधा भूल जाता है कि गधा गधा ही रहता है फिर चाहे वह अमरीका में हो या भारत में, किसी धोबी का हो या किसी कुम्हार का । गधों को तो लदना ही पड़ता है । यदि गधा अपने देश में रहें तो कम से उसे किसी न किसी कानून के बहाने आसानी से फँसाया तो नहीं जा सकता । कहते हैं आपके यहाँ मेक्सिको के गधे चोरी-छुपे घुस आते हैं । वास्तव में बात यह है कि आपके जान-बूझ कर आँखें मूँद लेने पर ही वे आ पाते हैं । आपके यहाँ के माफिया कम पैसे में उनसे काम करवाते हैं । और कभी-कभी वे ही उन्हें लूट भी लेते हैं । चूँकि उनका दर्ज़ा आपके यहाँ अवैध प्रवासी का होता है तो बेचारे शिकायत भी नहीं कर सकते । जो दूसरे देश में स्वर्ग तलाशते हैं वे गधे ही होते हैं; भले ही वहाँ जाकर दो पैसे अधिक कमा लें ।

राजनैतिक उपनिवेश के ज़माने में विदेशी आक्रांता उस देश के गधों को पालकर ही बहुसंख्यक जनता पर शासन करते थे । अब वैश्वीकरण के कारण गधों का बाज़ार विस्तृत हो गया है । अब तो आपके यहाँ सभी देशों के चुने हुए गधे सेवा कर रहे हैं । 'स्मोकी' नामक इस गधे को अमरीका आने की इज़ाज़त देने से पहले इसका रक्त परीक्षण किया गया । ठीक भी है,संसार में केवल अमरीका में ही इस समय शुद्ध रक्त बचा है । इसकी तलाशी भी ली गई होगी । वैसे गधे का तो सब कुछ पहले ही पारदर्शी रहता है । कपड़े तो वह पहनता ही नहीं कि आपको उसकी तलाशी लेने की ज़रूरत पड़े । वैसे ९/११ के बाद कई गधों ने बड़ी चालाकियाँ कीं और वे अपने पेटों और अन्य गुप्त स्थानों में कई चीजें छुपा कर ले जाते पकड़े गए । हमारे यहाँ तो पड़ोस में से कई गधों के पेट से विस्फोटक बाँध कर उन्हें सीमा पार धकेल दिया जाता है । अब गधा तो गधा उसे क्या पता, चाहे जिधर निकल जाता है और ठीक समय पर उसके पेट से बंधी सामग्री विस्फोटित हो जाती है ।
यह गधा तो आपका विश्वसनीय रहा है इराक से ही । इसलिए इसकी उस तरह से तलाशी नहीं ली गई जैसे भारत के कई नेताओं की ली गई । जो गधों की तरह से बिना सोचे समझे आपका बोझा नहीं ढोते हों, उनकी तलाशी लेना बहुत ज़रूरी है । पहले तो जो आपके लिए पेट से विस्फोटक बाँधकर कहीं भी घुसने को तैयार थे, उन गधों की आप तलाशी नहीं लेते थे बल्कि उन्हें अतिरिक्त सुविधाएँ भी देते थे जैसे कि पड़ोस से भारत में घुसने वाले या अफगानिस्तान में रूसी सेनाओं पर हमले करने वाले । पर अब वे गधे विश्वसनीय नहीं रहे तो तलाशी क्या, एक-एक हड्डी पसली भी निकाल-निकाल कर देखी जाती है ।

कोई आदमी भी जब लालच में आ जाता है तो गधा बन जाता है और पूरा खाना न मिलने पर भी जी तोड़ काम करता रहता है और ऊपर से मार भी खाता है । ऐसे ही एक गधे का किस्सा है । दो गधे थे । एक धोबी के यहाँ और एक कुम्हार के यहाँ । एक बार संयोगवश दोनों का मिलना हो गया । कुम्हार वाले गधे ने धोबी वाले गधे के कमजोर स्वास्थ्य को देखकर पूछा- बंधु, क्या बात है ? इतने कमजोर कैसे हो रहे हो ? धोबी वाले गधे ने उत्तर दिया- भाई, मुझे दोनों तरफ लदना पड़ता है, आते-जाते । जाते तरफ गंदे कपड़े ले जाता हूँ और आते समय धुले हुए । कुम्हार वाले गधे ने कहा- मेरे यहाँ काम की इतनी मार नहीं है । बाज़ार जाते समय बर्तन ले जाता हूँ और आते समय कोई छोटा-मोटा सामान या फिर भी कुछ नहीं । मेरा मालिक एक गधा और रखने की बात कर रहा था । तू कहे तो बात करूँ ? धोबी वाले गधे ने कहा- यह ठीक है कि मेरे लिए काम ज्यादा है मगर फ्यूचर ब्राईट है । मेरा मालिक कहा रहा था कि वह भी एक गधा और लाएगा । जब वह एक गधा और ले आएगा तो फिर मेरा प्रमोशन हो जाएगा और मैं हैड गधा हो जाऊँगा । तेरे यहाँ तो तू सीनियर है सो मुझे तेरे अंडर में काम करना पड़ेगा । थोड़े दिन का ही तो कष्ट है । कोई बात नहीं, फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्स को ध्यान में रखते हुए यह कष्ट कोई ज्यादा नहीं है । सो आपके विदेशों से गए यहाँ सारे गधे ब्राईट फ्यूचर की आशा में हाड़ तोड़ रहे है और बूढ़े हो रहे हैं ।

कुछ भी हो, इराक के लाया गया यह गधा आपकी कृपा से अब 'अमरीकी गधा' हो गया । अब वह अपने देश में एन.आर.आई. गधा कहलाएगा । विदेशी निवेश आमंत्रित करने के सम्मेलनों में उसे बुलाया जाएगा, उसे इराकी फूड खिलाया जाएगा, इराकी नृत्य दिखाए जाएँगे, उसे दोहरी नागरिकता दी जाएगी । उसे दामाद के रूप में पाकर इराकी लड़कियों के पिता धन्य हो जाएँगे भले ही अमरीका में वह एक गधा ही हो पर जब वह किसी अन्य देश में जाएगा तो महत्त्वपूर्ण हो जाएगा और रेमंड डेविस की तरह उसे बचाने के लिए सारा अमरीकी प्रशासन सक्रिय हो जाएगा ।

इसी गधे का एक और किस्सा है । धोबी ने एक दिन दूसरा गधा न लाने की घोषणा कर दी तो उसका सीनियर गधा बनने का स्वप्न चूर-चूर हो गया मगर फिर भी वह चिपका रहा क्योंकि एक दिन कुम्हार अपनी बेटी से नाराज़ होकर कह रहा था कि यदि वह उसका कहना नहीं मानेगी तो वह उसकी शादी किसी गधे से कर देगा । सो गधे के लिए एक और लालच पैदा हो गया कि कभी न कभी तो वह दिन भी आएगा जब धोबी नाराज़ होकर उसकी शादी किसी गधे से कर देगा । तब उसका नंबर पहला होगा क्योंकि वह उनका चिरपरिचित गधा है । दूसरे गधे उसकी इस आशावादिता पर हँसते थे । एक दिन ऐसा ही हुआ । धोबी ने अपनी बेटी की शादी उस गधे से कर दी और अब उस गधे पर कुम्हार के साथ-साथ उसकी बेटी का बोझ भी लद गया । मतलब कि अब वह डबल ड्यूटी करता है ।

अमरीका एक महान देश है । यदि वह न हो तो न तो इस दुनिया का विकास हो और न ही कहीं पर लोकतंत्र ही बचे । यही देश है जो दुनिया में लोकतंत्र की रक्षा के लिए कहीं भी अपनी सेनाएँ भेज देता है । इसलिए आपके शुभचिंतक होने के कारण हम आपको बता देना चाहते हैं कि ठीक है, गधा अपने सीधेपन के लिए सब को चाहिए, मगर जो ज्यादा सीधा होता है वह जब अपनी पर उतर आता है तो मुश्किल खड़ी कर देता है । कहते हैं कि गधे की दुलत्ती शेरों तक को नानी याद दिला देती है ।

देखा नहीं, एक हज़ार साल तक विदेशी शासन में रहे इस देश की एक दुलत्ती में ही अंग्रेज बहादुर उलटे हो गए । अब यह बात और है कि यहीं के कुछ पढ़े लिखे गधे प्रत्यक्ष रूप से वैश्वीकरण के नाम पर उन्हें ढोने को आमादा हैं और सारे देश से भी यही चाह रहे हैं, भले ही कुछ भी उल्टा-सीधा करना पड़े ।

१७-५-२०११
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