Nov 13, 2016

अमर सिंह का वात्सल्य

  अमरसिंह का वात्सल्य

आज जैसे ही तोताराम बरामदे में आकर खड़ा हुआ तो उसके रोम-रोम से टपकती बूँदों के कारण बरामदा गीला हो गया |हमने कहा- तोताराम, क्या बात है, इतना पसीना ?खैरियत तो है ? न हो तो, अन्दर चल कर बैठ |थोड़ा सुस्ताले, पानी पीले | 

बोला- चिंता की कोई बात नहीं है | मैनें तो थोड़ी देर पहले अमरसिंह जी का स्टेटमेंट पढ़ा है |

हमने उसे आगे बोलने ही नहीं दिया, कहा- पसीने से लथपथ होगा स्टेटमेंट देने वाला |तू क्यों परेशान है ?

बोला- बात का सत्यानाश मत कर | अमरसिंह जी ने कहा है- यदि अखिलेश मुझे बार-बार मारेंगे तो भी मैं यही पूछूँगा- बेटे, कहीं चोट तो नहीं लगी ?  

हमने कहा- अमरसिंह जी तो दरियादिल शख्स है |यदि कोई उनके सीने पर लात भी मारेगा तो वे कहेंगे- कहीं मेरे सीने की धूल से आपके चरण-कमल गंदे तो नहीं हो गए ? वैसे जहाँ तक चरणों को चोट लगने की बात है तो यह वाक्य भृगु जी को भगवान विष्णु ने कहा था, जब उन्होंने उनके वक्षस्थल पर पदाघात किया था |  भृगु उम्र में बड़े होने के साथ-साथ ब्राह्मण भी थे इसलिए विष्णु का यह कथन ठीक था लेकिन यहाँ तो अमरसिंह खुद को अखिलेश का चाचा मानते हैं |ऐसी स्थिति में यदि अखिलेश ऐसा करे तो यह उद्दंडता है |
  
भृगु विष्णु की सहनशीलता और क्षमाशीलता टेस्ट करना चाह रहे थे |ठीक भी है, समय-समय पर सबकी टेस्टिंग और चेकिंग होती रहनी चाहिए |सो ठीक भी है |अमर सिंह जी सभी तरह की टेस्टिंग के लिए तैयार हैं |तभी वे यह चुनौती देते हैं कि अखिलेश जब चाहे टेस्टिंग कर ले |वे हर परीक्षा में खरे उतरेंगे |वास्तव में अखिलेश ने उन्हें लात थोड़े ही मारी है |

तोताराम कहने लगा- लेकिन अमरसिंह जी का दिल तो देख | वे नाराज़ होने की बजाय अखिलेश में महर्षि भृगु को देख रहे हैं |

हमने कहा- लेकिन तोताराम, कुछ भी अमरसिंह जी तो बड़े नाज़ुक से, नफीस और बड़े साइस्ता शख्स हैं |वे तो बात भी बहुत धीरे से करते हैं,दोस्ती भी नाज़ुक फ़िल्मी लोगों से है, और नाम भी कोई पत्थर दिल नहीं है जैसे-पहाड़ सिंह, खूँख्वार सिंह,जोरावर सिंह आदि |और फिर अखिलेश भूतपूर्व मुख्यमंत्री और सर्वेसर्वा मुलायम सिंह जी के पुत्र और उत्तर प्रदेश के भावी प्रधान मंत्री के पिता भी हैं |

वैसे अमर सिंह जी हैं भी बहुत उदार |कभी किसी का दिल नहीं तोड़ा |दोस्तों पर दिल और दौलत लुटाते रहे और लुटते रहे |जब एक बार हरकिशन सिंह सुरजीत के साथ सोनिया गाँधी से बिना बुलाए मिलने गए थे तो अपनी उपेक्षा को छुपाया नहीं और बहार निकलते ही पत्रकारों को बताया कि हमें किसी ने नहीं पूछा |हमारी तो कुत्ते जितनी भी कद्र नहीं हुई |   किसी को बड़ा भाई माना, किसी को कुछ | लोगों ने अपने स्वार्थ से पास बुलाया और स्वार्थ से दूर बैठाया लेकिन बन्दे के चेहरे पर कोई शिकन नहीं | 

आज भी लोग कहते हैं- लंका का यह ढहना यह किसी बाहर वाले का काम है | अब और तो सब अपने हो गए और अमरसिंह हो गए बाहर वाले | 

कोई बात नहीं, जैसे उनके दिन फिरे वैसे सब के फिरें | अंत भला सो भला |चलो चुनाव से पहले पार्टी महासचिव बन गए और क्या चाहिए |अब अगले चुनाव तक इस नए सत्ता-सुख का आनंद लें और और यदि पार्टी हार जाए तो हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देकर नैतिकता का उच्च आदर्श स्थापित कर दें | और यदि जीत जाएँ तो संन्यास लेकर त्याग का उच्च आदर्श |

तोताराम बोला- बन्धु, बात तो तुम्हारी सही है लेकिन यह ससुर राजनीति की हड्डी बहुत बुरी होती है |जैसे रंडी करेगी धंधा,  भले ही चाय अपनी जेब से पिलानी पड़े |


No comments:

Post a Comment