08-05-2026
सिलेंडर में चूहा
कल हमारे मेल पर एक मेसेज आया जिसका भावार्थ यह था कि आपका महंगाई भत्ता 58 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है जिसका एरियर मई की पेंशन के साथ आपके खाते में जमा हो जाएगा ।
आज जैसे ही तोताराम आया, हमने कहा- ले संभाल, कॉमर्शियल सिलेंडर में से निकला चूहा ।
बोला- क्या मतलब, सिलेंडर में चूहा ? कभी कभी सिलेंडर में कुछ पानी या कभी एक आध किलो कम गैस की बात तो सुनी थी । कभी कभी रेगुलेटर पुराना होने पर कुछ लीकेज भी हो सकता है लेकिन गैस में चूहा ? इतनी जगह ही कहाँ होती है सिलेंडर में कि चूहा घुस जाए ।
हमने कहा- लोकतंत्र में चूहे ही सबसे शक्तिशाली होते हैं । वे कहीं भी घुस सकते हैं, कुछ भी खा सकते हैं । बिहार में कुछ समय पहले करोड़ों के गेहूं ही नहीं खा गए बल्कि बांध में घुस कर उसे ढहा दिया, थानों में पकड़कर रखी अवैध दारू पी गए । एक और राज्य में तो हेरोइन ही चट कर गए । और कभी किसी विशिष्ट सेवक के लिए घातक हो सकने वाली फ़ाइल भी कुतर जाते हैं । अब बस, एप्सटीन फ़ाइल में घुसने की फिराक में हैं चूहे ।
बोला- बात कॉमर्शियल सिलेंडर में चूहे की बात हो रही थी ।
हमने कहा- वह ऐसे है कि हर साल दो बार चार-चार परसेंट बढ़ने वाला डी ए इस बार दो परसेंट ही बढ़ा है । यह चूहा नहीं तो और क्या है ? घरेलू गैस के नहीं बढ़ाए तो क्या डी ए में खा गए ।
बोला- अगर डी ए भी नहीं बढ़ाते और घरेलू गैस के भी बढ़ा देते तो क्या कर लेता ? अच्छा है ना, घरेलू पर तो नहीं बढ़ाए । दुकानदारों की दुकानदार जानें ।
हमने कहा- कॉमर्शियल में बढ़ाए उनका बोझ भी हम पर ही पड़ेगा । दुकानदार नमकीन और मिठाई के दाम बढ़ा देगा । कौन अपनी जेब से लगाएगा ।
बोला- मास्टर, अब 84 का होने जा रहा है । इतना मत सोचाकर । मानसिक शांति के लिए भौतिक बातों से ऊपर उठकर भी कुछ सोचा कर । महानायक अमिताभ के ‘कुछ मीठा हो जाए’ की तरह ‘कुछ आध्यात्मिक हो जाए’ ।
हमने कहा- जब भौतिक न्याय नहीं होता तो आध्यात्मिकता का कोई अर्थ नहीं । कृष्ण ने गीता में अर्जुन को अध्यात्म का पलायनवादी उपदेश नहीं दिया बल्कि कर्म की कठोर भूमि पर जमकर पैर टिकाने के लिए कहा था । अगर आध्यात्मिकता की बात है तो कुछ नेताओं को भी तो बता जो 65 के होने पर भी वानप्रस्थ में भी नहीं जाना चाहते । दशरथ को तो जब अपने कान के पास एक सफेद बाल दिखाई दिया तो उन्होंने वशिष्ठ जी को बुलाकर राम को राज देकर वन में जाने का विचार कर लिया था । लेकिन शाह साहब का तो पूरा खल्वाट निकल आया और जो दो चार बाल बचे हैं वे भी सफेद हो चुके हैं । लेकिन लगे हुए हैं देश का उद्धार करने में । ऐसे ही मोदी जी 75 के हो रहे हैं लेकिन सन्यास तो दूर वानप्रस्थ तक के बारे में कुछ सोचने से भी भागते हैं । कहने को खुद को फकीर कहते हैं । शास्त्र कहते हैं कि संत तो ब्रह्मचर्य आश्रम से सीधे सन्यास में प्रवेश करते हैं । उनके लिए गृहस्थ और वानप्रस्थ होते ही नहीं ।और मोदी जी हैं कि लौट लौट कर गृहस्थ में गिरे पड़ते हैं ।जबकि ‘जोरू न जाता, अल्ला मियाँ से नाता’ ।
इन्हें दे अध्यात्म का उपदेश कि जाकर बरामदे में बैठे और अपने गुरु आडवाणी जी का हालचाल पूछें जिन्होंने इन्हें सिंहासन पर बैठाया है ।
हमारा क्या है ? हम तो आधी ज़िंदगी एक लुंगी और दो चाय पर काट रहे हैं । अगर तुझे ज्यादा लगता है तो इसमें भी कोई कटौती करें क्या ?
बोला- मास्टर, तेरी कोई भी बात चल सकती है लेकिन नाता अल्ला मियाँ से नहीं चलेगा। अल्ला मियाँ से नाता हो गया तो हमारा फिर बचेगा ही क्या ? ईश्वर अल्ला तेरे नाम हो जाएगा । फिर किस मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे ? यह बात और है कि हम चुनाव जीतने के लिए बंगाल में भगवा पटका धारण करके मंगलवार को मांस-मछली खाते हुए वीडियो डाल देते हैं और हमारे उम्मीदवार ज़िंदा मछली हाथ में लटकाकर चुनाव प्रचार करते हैं ।
पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)
(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
No comments:
Post a Comment