Oct 29, 2026

29-10-2026 इज्जत की कीमत


29-10-2026 

इज्जत की कीमत  

 

 

आज तोताराम ने आते ही हमेशा से हटकर इतर प्रश्न किया, बोला- तूने वह वीडियो देखा कि नहीं ? 

हमने कहा- इस समय देखने के लिए और बचा ही क्या है । बूढ़ों को कोई काम करना नहीं है, जवानों को काम मिलता नहीं । स्मार्ट फोन सबके पास है और मोदी जी की कृपा से डाटा भी सस्ता है । तो जब देखो सब अपना-अपना ‘हनुमान चालीसा’ खोल कर बैठ जाते हैं और देखते रहते हैं रील । जिन्हें कोई सार्थक काम करके देश,जनता की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए था वे भी ए आई की मदद से एक दूसरे की निंदा की रीलें बनवाकर डालते रहते हैं । रीलों में ही सब कुछ हो रहा है ।  

बोला- मैं उन रीलों की बात नहीं कर रहा हूँ । मैं तो उस डॉक्यूमेंट्री ‘ द फ्रेंडशिप फाइल्स’ के बारे पूछ रहा था जो सुबीर भाटिया ने बनाई है मोदी जी और अदानी जी के अंतरंग संबंधों को लेकर ।  

हमने कहा- हाँ देखी है लेकिन अंतरंग संबंधों को लेकर का क्या मतलब है ? क्या मनमोहन जी की तरह रेनकोट पहनकर नहा रहे थे ? उसमें  भाटिया ने अपनी तरफ से कुछ भी नहीं मिलाया है । सब कुछ निरपेक्ष भाव से तथ्यों के आधार पर डॉक्यूमेंटेड किया है ।  

बोला- मुझे तो बता दिया लेकिन आगे से किसी और को मत बताना । और हाँ, अपने फोन से डिलीट तो अभी कर दे ।  

हमने कहा-  झूठ तो गुजरात दंगों को लेकर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की तरह इसमें भी नहीं है ।  

बोला- बात वह नहीं है । भाटिया की इस डॉक्यूमेंट्री को कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आर्यक दत्त ने प्रतिबंधित कर दिया है और अदानी ने भाटिया पर 50 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा कर दिया है ।  

हमने कहा- लेकिन इज्जत की कीमत कोई रुपयों में थोड़े आँकी जाती है । वह तो अमूल्य होती है जैसे कि वोट । अब यह बात और है कि संस्कारी सरकारें  जनता को दो-पाँच हजार रुपए का वादा करके वोट लेकर कुर्सी पर काबिज हो जाती हैं और फिर सत्ता के बल पर भ्रष्टाचार करके दुगुने वसूल कर लेती हैं । इस तरह तो ऐसे मामलों में भी वैसा ही हो सकता है ।  

बोला- यह ऐसा वैसा क्या है ?  

हमने कहा- एक बार एक आदमी ने किसी को एक झाँपड़ मार दिया । जज ने उसे 50 रुपये जुर्माने की सजा दी । उस आदमी ने वहीं उसे एक झाँपड़ मारा और एक सौ रुपये का नोट जज साहब की ओर बढ़ाते हुए बोला-  जज साहब, मेरे पास छुट्टे नहीं है । चलिए दो झाँपड़ का जुर्माना जमा कर लीजिए । अगर कोई ऐसा ही रईस मिल गया तो क्या होगा । वैसे अदानी जी ने अपनी इज्जत की कीमत लगाने में बड़ी कंजूसी की । लोग तो अपनी इज्जत के लिए जान तक दे देते हैं ।लेकिन हो सकता है वे लोग समझदार नहीं होते । एक और किस्सा है- 

किसी डाकू ने एक सेठ की कनपटी पर बंदूक लगाकर कहा- जान देगा या माल ? सेठ ने उत्तर दिया- जान ही ले ले । माल तो बुढ़ापे में काम आएगा ।  

बोला- इन किस्सों को छोड़ । यह सोच कि अगर भाटिया वाली डॉक्यूमेंट्री देखने के अपराध में अदानी ने तुझ पर एक करोड़ का भी केस कर दिया तो क्या होगा ?  

हमने कहा- अपने पास कौन प्रॉपर्टी पड़ी है अटेच  करने के लिए ? कौन बुर्ज खलीफा में फ्लेट है जिस पर योगी जी बुलडोजर चलवा देंगे ।  कह देंगे कि पेंशन से एक हजार रुपये महिने की किश्तों में काट लेना ।  

वैसे लगे हाथ एक और किस्सा सुन ले । किसी युद्ध में एक सैनिक को बंदी बना लिया गया । विजेता राजा ने कहा- तुम्हारी जान मेरे हाथ में है । तुम कुछ भी नहीं कर सकते । उस सैनिक ने कहा- मैं अब भी बहुत कुछ कर सकता हूँ ।  

उसने राजा के मुंह पर थूक दिया ।


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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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