2026-03-13
गटर-ज्ञान का मोदी-मंत्रा
आज सवेरे सवेरे तोताराम नहीं आया । कोई दस बजे उसका फोन आया । बोला- मास्टर, कहे तो खाना बनाने का सामान लेकर हम दोनों आ जाएँ ? खाना बनेगा तब तक गैस के लिए एक और कोशिश कर आएंगे ।
हमने कहा- तोताराम, आज तूने बहुत घटिया बात कर दी । नहीं हैं हम अंबानी की तरह अमेरिका में रिफाइनरी लगाने के लिए 3 अरब डॉलर की औकात वाले लेकिन इतने गए गुजरे भी नहीं कि तुम दोनों की चार रोटी के लिए पाव चून न जुटे । नेहरू के जमाने के मास्टर हैं । पेंशन मिल रही है । मोदी जी के जमाने में लगे होते तो बात और थी । पेंशन क्या पूरी तनख्वाह के लाले पड़ जाते ।
तोताराम और मैना दोनों आ गए । पत्नी और मैना रसोई में खाना बनाने और अर्थव्यवस्था से लेकर विदेश नीति तक पर अपने हिसाब से भारत का डंका बजाने लगीं ।
अवसर का लाभ उठाते हुए हमने तोताराम से राष्ट्रहित में चर्चा की शुरुआत की । पूछा- तोताराम, इजराइल और ट्रम्प की इस खुराफाती आपदा में क्या हम कोई अवसर खोज सकते हैं ? क्या इस ऊर्जा संकट में हम अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक ज्ञान में से कुछ सामयिक उपाय खोज निकाल सकते हैं ?
बोला- हाँ, मास्टर कोशिश तो करनी ही चाहिए । वैसे ये योरप के ईसाई वेदों में से सारा ज्ञान निकाल कर ले गए ।
हमने कहा- फिर भी कुछ न कुछ बचा हो तो खुरचकर खुरचाकर देखना तो चाहिए ।
बोला- हाँ, कोशिश हो तो रही है देश के विभिन्न आईआई टी में । की जा रही है गोबर और गोमूत्र से अक्षय ऊर्जा स्रोत ढूँढ़ने की कोशिशें ।
हमने कहा- वैसे इस समय गाँधी जी के सत्य के प्रयोग की तरह मोदी जी के गटर-गैस-ज्ञान के प्रयोग करने में क्या बुराई है ।
बोला- बुराई तो कुछ नहीं है लेकिन आजकल इन विपक्षियों और यूट्यूब वालों के पास मोदी जी के नाली में पाइप डालकर चाय बनाने वाले बयान का मजाक उड़ाने के अलावा और कोई कार्यक्रम है ही नहीं ।
हमने कहा- तोताराम, शुरू शुरू में नया सोचने और करने वाले प्रतिभाशाली लोगों का मज़ाक उड़ाया ही जाता है लेकिन मोदी जी के इस ज्ञान में नितांत झूठ भी तो नहीं ।
बोला- और क्या ? जेम्स वाट ने चाय की भाप से उछलते हुए ढक्कन को देखकर भाप का इंजन बना दिया, न्यूटन ने पेड़ से गिरते सेव को देखकर गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत खोज लिया । मोदी जी भी जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति है ।स्टेशन पर चाय बेचते, 35 साल भीख माँगते और अपने ज्योतिष ज्ञान से ट्रेन की भीड़भाड़ में सीट कबाड़ लेने वाले मोदी जी के पास लौकिक ज्ञान का अपार भंडार है । यह ठीक है कि उनकी डिग्री संदेहास्पद है लेकिन वाल्मीकि के पास कौन सी डिग्री थी । एकलव्य ने भी अपने स्वानुभाव और लगन से क्या धनुर्विद्या नहीं सीख ली थी ? वे झोला उठाकर चल दें उससे पहले देश को उनके ज्ञान का लाभ उठा लेना चाहिए । नहीं तो यह ज्ञान उनके साथ ही चला जाएगा ।
और फिर हमारे विद्वान लोग तो कहते आये हैं-
उत्तम विद्या लीजिए जदपि नीच पे होय
पर्यो अपावन ठौर में कंचन तजे न कोय ।।
हमने कहा- वैसे नाली की गैस लेकर चाय बनाने की बात कोई निराधार नहीं है । जीवों से निकलने वाले मल, मूत्र, डकार, पाद आदि में ज्वलनशील मिथेन गैस होती है । उसका कैसे उपयोग किया जाए यही तो प्रश्न है । वैज्ञानिकों का यही तो काम है कि किसी भी अवधारणा पर काम करें । हमें याद है जब हम 1985 से 2001 तक दिल्ली में थे तब लाजपतनगर में गटर से कुकिंग गैस बनाने के प्लांट की बात चली थी । गोबर गैस प्लांट क्या झूठ हैं ?
और फिर मोदी जी तो नीच भी नहीं है । महान ज्ञानी, विनम्र, संकोची, और संत स्वभाव वाले व्यक्ति हैं । उनसे ज्ञान लेने में क्या बुराई है ? ट्रम्प के शांति प्रयासों का लाभ क्या हमने ऑपरेशन सिंदूर में नहीं उठाया ? और क्या अब हम इज़राइल और ट्रम्प से साथ मिलकर विश्वशान्ति के लिए काम नहीं कर रहे ?
बोला- वैसे मास्टर, जमुना में दुनिया भर का कूड़ा भरा है, गाजीपुर में दुनिया के सबसे बड़े कूड़े के पहाड़ खड़े हैं । इस संकट के समय में क्या उसे जलाकर खाना नहीं बनाया जा सकता ?
लेकिन विघ्नसंतोषी लोग पर्यावरण के नाम से फिर मोदी जी को घेरने लगेंगे ।
हमने कहा- तोताराम, ये प्रदूषण वगैरह भी भरे पेट वालों के शगूफ़े हैं । प्रदूषण से कहाँ तक बचोगे ? अरे, दुनिया में हर समय जाने क्या क्या जलता रहता है ? और नहीं तो लोग मोदी जी के दुनिया में बजते डंके से ही जले जा रहे हैं । अरे, जब संसद में विधूड़ी के कटुवे, भड़ुए, मुल्ले और आतंकवादी से प्रदूषण नहीं फैला तो गाजीपुर का कूड़ा जलाने के क्या हो जाएगा । अच्छा है ऊर्जा की ऊर्जा और सफाई की सफाई ।
बोला- विधूड़ी का स्टेटमेंट तो प्रदूषण नहीं बल्कि सनातन का सार और हिन्दू राष्ट्र का जयघोष था ।
-रमेश जोशी
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