Sep 2, 2026

15-06-2026 पैसा कहाँ से आता है ?


15-06-2026 


पैसा कहाँ से आता है ? 







आज तोताराम ने बड़ा अजीब प्रश्न पूछा- पैसा कहाँ से आता है ? 

हमने कहा- बैंक से लाते हैं । पेंशन का पैसा । सारी ज़िंदगी दी है देश को, ईमानदारी से बच्चों को । एक भी बच्चा आज तक न तो काँवड़ लेने गया, न ही किसी ने मस्जिद के आगे डीजे बजाया ।

बोला- अच्छा हुआ जो 2004 से पहले निबट गया नहीं तो नई पेंशन में चक्कर में बुढ़ापा खराब हो गया होता । आज जो वरिष्ठ नागरिक यूपी में भगवा हुए जा रहे हैं वे सब कांग्रेस के हेमवतीनन्दन बहुगुणा की पेंशन की कृपा से हैं । वैसे पेंशन कोई पैसा होता है क्या ? वह तो सरकारी कृपा का 5 किलो सड़ियल अनाज है जिसे कहकर न कोई पहलवान बनता और न ही मरता । पैसा होना तो उसे कहते हैं जब आदमी को खर्च करते समय सोचना नहीं पड़ता । तेरा हाल तो यह है कि चाय में चीनी भी रो रोकर डालता है ।

हमने कहा- तोताराम, कोई कितना भी अमीर हो लेकिन बिना मोल-भाव किए कोई भी पैसा नहीं लुटाता । बड़े बड़े व्यापारी सरकार या किसी पार्टी को चन्दा कमाई से ज्यादा थोड़े देते हैं । अगर एक सौ की कमाई या घपला करेंगे तो पीम एम केयर फंड में दस-पाँच रुपये ही देंगे । वैसे यह सब तू हमें क्यों बता रहा है ?

बोला- तेरी नौकरी, पेंशन आदि सबका सबको पता है । नहीं बताएगा तो तेरी शक्ल सूरत से पता चल जाता है । मैं तो राहुल गांधी के बारे में सोच रहा था कि इतना पैसा कहाँ से आता है जो जब चाहे अमेरिका चला जाता है । लगता है सोनिया जी के दुनिया कि चौथी सबसे अमीर वाली बात में कुछ दम है ।

 


 


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 हमने कहा- यह समाचार फेक्ट चेक में झूठा पाया गया है । और नेशनल हेराल्ड वाले मामले को भी इसीलिए लटकाकर रखा है कि बदनाम किया जा सके अन्यथा सब कुछ तुम्हारे अनुसार है पुलिस, ईडी, कोर्ट सब । फटाफट निबटाओ और सजा देकर एक तरफ करो लेकिन कुछ है ही नहीं तभी तो लटकाए हुए हैं । तू राहुल की विदेश यात्रा पर प्रश्न उठाता है तो बकौल खुद जब मोदी जी भीख मांगा करते थे तब कैसे अमेरिका के 29 राज्यों की यात्रा कर आए ।


बोला- मोदी जी का क्या ? भिखारी थे भिखारी । 35-40 साल भीख मांगी है देश-दुनिया में । प्रेमी, भिखारी, जेबकतरा, जुनूनी पत्रकार और चाय वाला किसी के भी पीछे लगकर कहीं भी जा सकते हैं । एक बार मैं ट्रेन से सीकर से गुड़गाँव जा रहा था । रेवाड़ी में चाय पी । पैसे छुट्टे नहीं थे चाय वाला मेरे साथ अगले स्टेशन खलीलपुर तक चल गया था ।


हमने कहा- और भिखारी की किस्मत का कुछ पता नहीं, भीख में कब, किससे, क्या मिल जाए । भीख मांगने की कला बहुत बड़ी कला है । इसी कला के बल पर देवताओं ने जाने क्या क्या नहीं उलट पुलट कर दिया । इन्द्र ने अर्जुन की जीत सुरक्षित करने के लिए कर्ण से उसके कवच कुंडल मांग लिए, विष्णु ने दैत्यराज बलि से वामन का वेश बनाकर छल किया और तीन कदम में देवताओं के लिए तीनों लोक मांग लिए । विश्वामित्र ने हरिश्चंद्र से जाने किस किस तरह से क्या क्या मांग लिया । इसलिए भिखारियों से सावधान रहना चाहिए और किसी प्रकार का कमिटमेंट तो करना ही नहीं चाहिए और अगर चुनावी चक्कर में कुछ वादा करना ही पड़ जाए तो फिर बड़ी बेशर्मी से जुमला कहकर पल्ला झाड़ लेना चाहिए ।

मोदी जी कभी शहीदों के नाम पर, तो कभी गालियों के नाम पर, तो कभी पाँच किलो अनाज के नाम पर लोगों से वचन लेना चाहते हैं लेकिन खुद न वचन देते हैं और अगर कभी किसी भ्रम, लाज शर्म में वचन दे भी दिया तो निभाते नहीं ।

और फिर मोदी जी के पास 'पी एम केयर फंड' भी तो है । 

बोला- पी एम केयर फंड तो किसी आपदा के लिए है । और फिर मोदी जी हैं भी तो बहुत मितव्ययी । हजारों करोड़ रुपये हैं फंड में लेकिन राम राम करके एक करोड़ से भी कम खर्च किए हैं । और नियम ऐसे कि कोई कुछ पूछ भी नहीं सकता । 

एक अच्छे लाइब्रेरियन की तरह । अच्छा लाइब्रेरियन मतलब कि किताबों की इतनी सुरक्षा करे कि किसी बच्चे को पढ़ने तक के लिए नहीं दे ।  



 







 



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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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