Mar 8, 2019

मंत्रा-मिशन



मंत्रा मिशन 

तोताराम ने आते कहा- कोई प्रश्न पूछकर समय व्यर्थ नहीं करना है |मंत्र को प्रभाव पैदा करने के लिए 'मंत्रा' बनाया गया है और आजकल देश में चल रहे समासीकरण के फैशन के तहत अग्रेजी शब्द 'मिशन' का उपयोग करते हुए बनाया गया है- 'मंत्रा-मिशन' | अब चल बाज़ार चलते हैं |

हमने कहा- यह तो वैसे ही हो गया जैसे सरकार ने कुम्भ के अवसर को मई २०१९ में होने वाले लोकसभा चुनाव से जोड़ दिया है |प्रवासी-दिवस भी तीन दिन आगे खिसका कर १४ जनवरी को कर दिया |चाहते तो २६ जनवरी को भी पहले खींचकर संक्रांति वाले दिन कर देते |

बोला- मास्टर, तेरा भी ज़वाब नहीं |हर बात को खींचकर राजनीति की तरफ ले ही जाता है |कभी तो समाज और सेवा के बारे में भी सोचाकर |

हमने पूछा- तो बता तेरे इस 'मंत्रा-मिशन' में किस समस्या का समाधान है ?यह भी प्रीति जिंटा वाले किसी 'रूप मंत्रा' की तरह लोगों को उल्लू बनाने का चक्कर होगा |सब जानते हैं कि किसी भी डिटर्जेंट पाउडर से वैसी सफेदी नहीं आ सकती जैसी विज्ञापन में दिखाई जाती है |तरह-तरह के केश तेल आजमाकर भी लोगों का गंजापन दूर नहीं हो रहा है |नवरत्न तेल लगा-लगाकर भी लोग तनाव ग्रस्त हुए जा रहे हैं |अब बता, तेरे इस 'मंत्रा मिशन' का क्या मिशन है ?

बोला- इसके द्वारा हम लोगों की मोटापे की समस्या का निदान करेंगे मतलब कि मोटे को पतला और पतले को मोटा बनाएँगे |

हमने कहा-इस प्रकार की तो एक दवा का अखबारों में रोज विज्ञापन आ रहा है |लोग यदि तुझे ही पूछ बैठे-  'महाराज, आप लोगों को मोटा बनाने का 'मंत्रा' बताने का दावा कर रहे हैं तो खुद क्यों पैंतीस किलो पर अटके हुए हैं ?' तो क्या ज़वाब देगा ?

बोला- उसी को समझाने के लिए तो बाज़ार चलना है |कोई फोटो शॉप ढूँढ़ते हैं |

हमने कहा- फोटो शॉप नहीं, फोटो स्टूडियो बोल |

बोला- मैं ठीक कह रहा हूँ |हमें स्टूडियो नहीं 'फोटो शॉप' जाना है |

हमने पूछा- इन दोनों में क्या फर्क है ?

बोला- स्टूडियो में फोटो खींचे जाते हैं और शॉप में बने बनाए फोटो से छेड़छाड़ करके नई तरह का फोटो बना दिया जाता है जैसे ओबामा से हाथ मिलाते हुए मोदी जी के फोटो से छेड़छाड़ करके तुझे मोदी जी से हाथ मिलाते हुए दिखाया जा सकता है | तू वह फोटो दिखाकर लोगों पर रोब जमा सकता है |  

हमने फिर पूछा- तो तू वहाँ क्या करवाएगा ?

बोला- मैं अमित शाह जी के फोटो पर अपना सिर चिपकवाकर एक फोटो बनवाऊँगा और दूसरा अपना ओरिजिनल फोटो |दोनों को विज्ञापन में एक साथ छपा दूँगा |और नीचे लिखवा दूँगा- मनचाहा वज़न प्राप्त करने का 'मंत्रा' पाइए | बिलकुल मुफ्त |नेट पर जाइए, लाइक का बटन दबाइए और मनचाहा बदन पाइए |

हमें फिर शंका की- इससे क्या होगा ?

बोला- देश में करोड़ों लोगों के पास स्मार्ट फोन हैं और मुफ्त का डाटा |समय की तो कोई कमी है ही नहीं |मुफ्त के नाम पर इस देश के लोग ज़हर भी खा जाते हैं |इस देश में दो ही तरह के लोग हैं या तो मोटे या पतले |दोनों कुंठाग्रस्त है |दोनों ही बटन दबाएँगे |और इस दबाव में विज्ञापनदाता मेरी साइट पर विज्ञापन देंगे |बस, फिर क्या ? कमाई ही कमाई |

हमने पूछा- लेकिन अमित शाह की बीस इंची घेरे वाली गर्दन पर तेरी यह नौ इंची गर्दन फिट कैसे होगी ?

बोला- वैसे ही जैसे प्राचीन काल में प्लास्टिक सर्जरी के बल पर एक शिशु की गर्दन पर हाथी के बच्चे का सिर फिट कर दिया जाता था |

  

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Mar 6, 2019

हिसाब-किताब

हिसाब-किताब  

आज जैसे ही तोताराम आया, हमने घोषणा कर दी- तोताराम, मई २०१९ में मोदी जी को एक टर्म और मिलेगी |

बोला- क्यों, क्या तेरा भी मुलायम जी की तरह आय से अधिक संपत्ति का कोई मामला तो लंबित नहीं है ?

हमने कहा- हमारा आय से अधिक संपत्ति का मामला कहाँ से आएगा ? हमारी तो हो चुकी आय भी अभी तक तीन साल से अटकी पड़ी है |पता नहीं, मिलेगी भी या नहीं ? या जब मिलेगी तब तक उसकी क्रय शक्ति कितनी घट चुकी होगी ? पे कमीशन का पूरे तीन साल का एरियर बकाया है |

बोला- नियति पर विश्वास रख |हिसाब-किताब घूम फिरकर युगों बाद भी करना पड़ता है |

हमने कहा- कुछ होता-हवाता नहीं |जो खा गया, सो खा गया | बाद में पीटते रहो लकीर |नीरव मोदी का मामला ठंडा पड़ गया कि नहीं ? देशभक्ति के इस दौर में अब कोई आवाज़ उठाने में भी डरता है |लेकिन तू हमारे एरियर का हिसाब-किताब होने को लेकर इतना आश्वस्त कैसे है ?

बोला- मास्टर, ये जो मोदी जी संगम पर स्वच्छाग्रहियों अर्थात सफाई कर्मचारियों के चरण धो रहे हैं, यह क्या है ?

हमने कहा- मायावती बहिन जी के अनुसार- 'इस तरह से वादाखिलाफी के पाप नहीं धुलेंगे' |कुछ इसे चुनावी स्टंट कह रहे हैं |राज बब्बर कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो सफाई कर्मचारियों को कपड़े दे देते |  

बोला- ये सब फालतू के कमेंट हैं |यदि चरण धोने से मोदी जी या भाजपा के पाप नहीं धुलेंगे तो खुद की मूर्तियाँ बनवाने से कौन-सा दलितों का उद्धार हो जाएगा |सच का किसीको पता नहीं |यह तो कोई आपके अनुज जैसा त्रिकालदर्शी ही जान सकता है |

आज तोताराम का यह ज्योतिषाचार्यावतार हमारे लिए नितांत नया था |उत्सुकता हुई, पूछा- बता, जल्दी बता, सच क्या है ?

बोला- पिछले जन्म में मोदी जी राम थे और ये सफाई कर्मचारी उस केवट के परिवार के सदस्य जिसने राम, सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव से सरयू पार करवाई थी |उस समय नोटबंदी के कारण राम के पास केवल हजार और पाँच सौ के ही नोट थे जो केवट ने लिए नहीं; और कह दिया-

फिरती बार मोहि जो देवा 
सो प्रसाद मैं सिर धरि लेवा 

इसके बाद रामचरित मानस में केवट और राम के हिसाब-किताब का कोई प्रसंग नहीं आता |यह वही हिसाब-किताब है |

हम चकित, पूछा-कैसे ?

बोला- पहले केवट ने राम के चरण धोने के बहाने अपने परिवार और पूर्वजों-पितरों तक का उद्धार करवा लिया था |स्वर्ग में आरक्षण ले लिया था |अब इस जन्म में मोदी जी ने इनसे अगले चुनाव में अपने, अपने संघ-परिवार और पिछली पाँच सहस्राब्दियों के ब्राह्मणवादी पितरों-पुरुखों के उद्धार का वचन ले लिया |  

हमने कहा- लेकिन तोताराम, केवट-प्रसंग में तो यह भी आता है-

पद पखार जल पान करि,आपु सहित परिवार |
पितरु पार करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ ले पारि ||

केवट ने राम के चरणामृत का आचमन भी किया था उसका तो हिसाब इस पद-प्रक्षालन में नहीं हुआ |

बोला- भावार्थ समझाकर | केवट ने भी राम से डील फाइनल होने के बाद जलपान किया |फिर  राम, सीता, लक्ष्मण को सरयू पार करवाई |उसी तरह मोदी जी ने भी पहले स्वच्छाग्रहियों के चरण धोए, फिर जलपान किया और फिर रैली में भाषण दिया |

पूछा- तो तोताराम, यह भी हिसाब लगा कि हम अपने पे कमीशन के एरियर के लिए किस केवट के चरण धोएँ ? 

बोला- हे अग्रज, यदि तोताराम को मौसम-विज्ञान का इतना ही ज्ञान होता तो राम विलास पासवान जी की तरह परिवार शक्ति पार्टी का प्रधान नहीं होता ! क्यों अडवानी जी की तरह तेरे इस निर्देशक मंडल के बरामदा-कार्यालय में बैठकर मुफ्त की चाय का इंतज़ार करता रहता |






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Mar 5, 2019

सबसे बड़ी गीता



सबसे बड़ी गीता 


जैसे कुछ मनहूस लोग दुःखी होने का मौका खोज ही लेते हैं वैसे तोताराम हमें बधाई देने का कोई न कोई अवसर निकाल ही लेता है |आते हो बोला- बधाई हो, भी साहब |

हमने पूछा- बधाई किस बात की ? पे कमीशन के एरियर की तो कोई संभावना है नहीं | और जब देश संकट में हो तो अपनी छोटी-छोटी तकलीफों का रोना लेकर बैठना शोभा भी नहीं देता |देखा नहीं, केजरीवाल जी ने भी अपना अनशन स्थगित कर दिया कि नहीं ? 

बोला- वह तो होता भी तो प्रतीकात्मक होता |आजकल आंध्र वाले रामुलू की तरह कोई वास्तव में आमरण थोड़े ही करता है |वैसे भी ये सब अब मई २०१९ तक चलते ही रहेंगे |मैं तो दुनिया की सबसे बड़ी गीता के अनावरण की बधाई दे रहा था |

हमने कहा- इसमें क्या ख़ास बात है ? वैसे भी महाभारत दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य है ही |और जहाँ तक गीता की बात है तो उसमें ७०० श्लोक हैं |उनमें चौथे अध्याय का १२ वाँ श्लोक ही उस गीता का सार है- सिद्धिर्भवति  कर्मजा- कर्म से ही सिद्धि होती है, व्यर्थ के नाटकों से या केवल कामना मात्र से सिद्धि नहीं होती |इसलिए इसे बड़े या छोटे आकार में लिखना-लिखाना कोई महत्त्व नहीं रखता |पैसे और पहुँच हो तो कोई भी कुछ भी करके गिनीज बुक में अपना नाम लिखवा सकता है | देखा नहीं, डबल श्री जी ने और कुछ नहीं तो हजारों लोगों को इकठ्ठा करके यमुना के किनारे नचाकर रिकर्ड बना दिया था कि नहीं ?  चार सौ श्लोक तो बहुत होते हैं |तेरे पास पैसे हों तो तू कोई पहाड़ खरीदकर उस पर अपने हस्ताक्षर खुदवाकर सबसे वज़नी हस्ताक्षर का रिकर्ड बना सकता है |

बोला- हाँ मास्टर, यह बात तो है | अपने सीकर में चातुर्मास के दौरान अगस्त  २०१७ में  जैन संत तरुण सागर ने भी तो अपनी ५१ फुट ऊँची और ३१ क्विंटल वज़नी पुस्तक का विमोचन किया था |

हमने पूछा- क्या तूने उस पुस्तक को देखा था ?

बोला- मास्टर, एक बार मन तो किया लेकिन फिर डर के मारे रुक गया |जिस देश में जब-जहाँ चाहे पुल आदि गिर जाते हैं वहाँ एक पुस्तक की क्या बिसात |इसलिए रिस्क  नहीं ली |क्या पता, मेरा जिस क्षण उसके पास जाना हो उसी क्षण उसे गिरना हो | 

हमने कहा- फिर भी तोताराम, इस गीता में एक विचित्र संयोग तो ज़रूर है |इसका अनावरण मोदी जी ने किया |मोदी जी गुजरात से दिल्ली आए हैं |कृष्ण भी महाभारत के युद्ध में भाग लेने के लिए गुजरात से हस्तिनापुर आए थे और गीता का उपदेश दिया था |गीता की यह रिकार्डधारी प्रति भी पहले समुद्री मार्ग से गुजरात पहुँची फिर दिल्ली के इस्कोन मंदिर में आई |गीता को शंकराचार्य ने उपनिषद् रूपी गाय का दूध कहा है |मोदी की शैली में गीता, गुजरात और गाय का अनुप्रास भी मिल जाता है |

बोला- इसमें एक और विचित्र संयोग है | मोदी जी के राजनीतिक दर्शन में इटली का भी प्रमुख स्थान है और मज़े की बात यह है कि भारत के समस्त ज्ञान-विज्ञान के बावजूद गीता की इस सबसे बड़ी प्रति का निर्माण भी इटली में किया गया |

हमने कहा- लेकिन इसे पढ़ेगा कौन ? यहाँ तो किसी सामान्य आदमी की अर्थी को उठाने के लिए चार आदमी नहीं जुटते जबकि इस गीता का तो पन्ना पलटने भर को चार आदमी चाहियें |









 

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Mar 3, 2019

चंचल लोलिताएँ और वार्धक्य की कुंठा



  चंचल लोलिताएँ और वार्धक्य की कुंठा 

कल बसंत पंचमी आने वाली है और दिल्ली में बेमौसमी ओलों ने जाने किस-किस के फागुनी इरादों पर पाला पटक दिया |लोग आरोपों की गरमी से खुशनुमा वातावरण बनाने की असफल कोशिश कर रहे हैं |२ और ३ फरवरी २०१९ को लखनऊ विश्वविद्यालय में 'महात्मा गाँधी और हिंदी साहित्य' पर एक आयोजन में गए थे |वहाँ एक पीला लखनवी कुरता भेंट में मिला | अभी बंगलुरु में हैं |अखबार में ओलों से सफ़ेद हुई दिल्ली की सड़कें देखकर भेंट में मिला कुरता पहनने की हिम्मत नहीं हो रही |हिम्मत करें तो भी राजस्थान में शुरू हो चुके गुज्जर बंधुओं के शांति पूर्ण आन्दोलन और उसका इतिहास याद करके फिर कँपकँपी छूटने लगती है क्योंकि ११ फरवरी को जयपुर होते हुए सीकर जाना है |बैंगलुरु में पंखे चलने लग गए हैं |बालकनी में बैठकर अकेले चाय पी रहे हैं |तोताराम यहाँ नहीं है |

अकेले चाय पीने में मज़ा नहीं आ रहा है और फिर यहाँ के अंग्रेजी अखबार में मुखपृष्ठ पर खबर है कि कांग्रेस के सहयोग से मुख्यमंत्री बने जनता दल सेक्यूलर के कुमार स्वामी और कांग्रेस को डर सता रहा है कि कहीं उनके १० विधायक किसी छिनाल की तरह बेवफाई न कर गुजरें |इसलिए स्वामी ने उन्हें पत्र लिखकर दल बदल  के विरुद्ध कार्यवाही की धमकी दी है |

हमने अपने मोबाइल के बचे-खुचे बेलेंस की बलि देकर 'मोदी स्टाइल' में तोताराम से चाय पर चर्चा करने का साहस जुटाया |कहा-  तोताराम, यह क्या हो रहा है ? एक तरफ तो लोग बुरका और पर्दा प्रथा को समाप्त करके महिलाओं का सशक्तीकरण कर रहे हैं और जनता दल एस और कांग्रेस को अपने ही सदस्यों पर विश्वास नहीं है |ये उन्हें परदे में रखना चाहते हैं |नीची निगाह किए अपने पीछे-पीछे चलाना चाहते हैं |क्या सिद्धांतों का पतिव्रत-धर्म इतना कमजोर हो गया ? क्या भाजपा के शोहदे इतने साहसी हो गए हैं कि विधायक-सुंदरियों का सदन पहुँचना तक मुश्किल हो गया है ?

तोताराम ने फोन पर अपना स्वर ऊँचा करते हुए कहा- मास्टर, ज़माना बदल गया है |हर सुंदरी अपने यौवन की अच्छी कीमत तत्काल चाहती है |कैसा पातिव्रत्य और किसी लज्जा ? जवानी ढलने के बाद कोई नहीं पूछता | और इस लम्पटता के लिए भाजपा को ही दोष क्यों देता हैं ? अपने-अपने विधायकों को होटल-होटल, रिसोर्ट-रिसोर्ट लिए फिरने का इतिहास कोई नया नहीं है |कर्णाटक, हरियाणा, आंध्र, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, महाराष्ट्र कहाँ नहीं हुआ यह चंचल लोलिताओं को लिए-लिए होटल-होटल फिरने का नाटक ?

हमने पूछा- तोताराम, बात को बदल मत |अच्छी भली राजनीति में यह 'लोलिता' कहाँ से आगई ? क्या यह कहीं कटरीना जैसी कोई अमरीकी तूफ़ान-सुंदरी तो नहीं है ?

बोला- नहीं |यह तो फ्रांस में १९५५ में छपा रूसी-अमरीकी ब्लादीमीर नाबाकोव का एक उपन्यास है जिसमें हम्बर्ट नाम का एक अधेड़ विधुर बारह वर्ष की एक कन्या की ओर आकर्षित होता है और उसे पाने के लिए उसकी विधवा माँ से शादी करता है |इस प्रकार वह रिश्ते में उस लड़की का सौतेला बाप बन जाता है | इस उपन्यास का यह प्रेम केवल एक नाबालिग लड़की से संबंध बनाने के कारण ही अनुचित नहीं है बल्कि इसमें पारिवारिक रिश्तों की शुचिता पर भी आँच आती है |हम्बर्ट हत्या का अपराधी भी है |वह इस दोहरे अपराध की कुंठा से बचने के लिए लोलिता को लिए-लिए  जगह-जगह फिरता है |

आज की राजनीति में लोक कल्याण का पौरुष किसी के पास नहीं है |भ्रष्टाचार के सब अपराधी हैं |  सत्ता की लोलिता को सब कब्जाना चाहते हैं |और लोलिता है कि बाथरूम के पाइप से फिसलकर फरार हो जाती है |

हमने कहा- तोताराम, हमने भी बचपन में चोरी-चोरी यह उपन्यास पढ़ा तो था लेकिन अब पूरी कहानी याद नहीं |लेकिन उसमें ऐसा कुछ नहीं था |लोलिता पाइप से फिसलकर नहीं भागती है |

बोला- फिर असाहित्यिक बात कर दी |अरे, ये विधायक ही तो चंचल लोलिताएं हैं |याद नहीं, १९८२ में चौधरी देवीलाल अपने और भाजपा के विधायकों को लेकर दिल्ली के एक होटल में चले गए थे और उनमें से एक विधायक बाथरूम की पाइप से नीचे उतर कर फरार हो गया था और अगले ही दिन हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बन गई थी |





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