Jan 24, 2009

मिलीबैंड: बजा गया बैंड



ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड मिलीबैंड मकर संक्रांति और पोंगल पर भारत पधारे । वैसे इस काम जितनी परिपक्वता और अनुभव तो कहीं उनके चेहरे और कामों में हमें दिखाई नहीं दिया । शायद उन्हें राहुल गाँधी ने भारत में पिकनिक मनाने के लिए के लिए बुला लिया हो । तभी तो उत्तर प्रदेश के गाँवों में गायें दिखाते फिर रहे थे । भारत में लाभदायक न रहने के कारण गाय का पहले जैसा सम्मान न रहा हो फिर भी हिन्दू उन्हें काटते और खाते तो नहीं ही हैं । अब भी लोग उन्हें मकरसंक्रांति पर हरा चारा खिलाकर पुण्य कमाते हैं । कर्नाटक में गायों और बैलों को सजाया-सँवारा जाता और पूजा की जाती है जैसे उत्तर भारत में गोपाष्टमी को किया जाता है । ब्रिटेन में तो शायद ही कोई ढंग की गाय बची होगी । सबको अखाद्य पदार्थ खिला कर पागल कर दिया और फिर पागलपन के नाम पर लाखों गायों को मार दिया । हो सकता है कि अब वहाँ कोई देखने लायक विश्वसनीय गाय बची ही न हो । हो सकता है कि पास जाने पर काटने दौड़ती हो । भारत में अब भी सामान्य गायें बची हैं । वैसे तो सारा भारत ही बेचारा गाय बना हुआ है । कोई भी आकर पिटाई करदे । इसके बाद इसी को उपदेश दिया जाता है जैसे कि बलात्कृत महिला से कहा जाए कि तुम बलात्कार करने लायक दिखती ही क्यों हो । गलती तुम्हारी है । जिस की चेन खींच ली जाए उससे कहा जाए कि तुम सोना पहन कर उचक्के को ललचाती क्यों हो ? ऐसी ही मासूम सलाह दे रहे हैं मिली बैंड । कह रहे हैं कि आतंकवाद का कारण है कश्मीर समस्या । मतलब कि पहले आप इसे सुलझाओ मतलब कि कश्मीर अलगाववादियों के हवाले कर दो । यही तो अमरीका १९४८ से चाह रहा है ।

मिली बैंड आतंकवाद का ऐसा मासूम हल अमरीका को क्यों नहीं सुझाते कि ईसाई धर्म छोड़ कर मुसलमान धर्म अपना लो फिर ओसामा तुम्हें अपना भाई मान लेगा और आतंकवाद बंद कर देगा । मिली बैंड को पता नहीं क्यों वे कश्मीरी पंडित दिखाई नहीं देते जिन्हें अज़हर मसूद जैसे संतों ने पाकिस्तान की शै पर, इस्लाम की सेवा करने के नाम पर डराकर अपनी मातृभूमि छोड़ने के लिए बाध्य कर दिया गया और दिल्ली की सभी सरकारें वोट बैंक के चक्कर में मौन रहीं । आख़िर एक छोटे से अधिकारी की ऐसी सलाह देने की हिम्मत कैसे हो गई ? राजस्थानी में एक कहावत है - जब दूल्हे के ही लार टपकती हो तो बारातियों को कौन पूछेगा । सो राहुल गाँधी क्या लाड़ लड़ा रहे थे इस गोरे को ? जब आप किसी को ज़्यादा सिर पर बैठाओगे तो वह सिर पर पेशाब करेगा ही ।

२४ जनवरी २००९

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Jhootha Sach

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