13-05-2026
चाय फ्रॉम होम
आज जैसे ही तोताराम आया हमने कुछ नीची नज़रों और नीची आवाज में कहा- हमें माफ करना, तोताराम !
बोला- जैनियों में एक अच्छी प्रथा है ‘क्षमावणी’ । साल में एक बार अपने अच्छे बुरे कर्मों के लिए उल्टे मन से ही सही माफी मांगते हैं । माफी मांगना और माफ करना दोनों ही बड़प्पन की निशानी है । वैसे तो तुझे एक सड़ियल चाय पर रोज एक घंटा अपने मन की बकवास पेलने के लिए बहुत पहले माफी ही नहीं माँगनी चाहिए थी बल्कि प्रायश्चित स्वरूप चांद्रायण व्रत करना चाहिए था ।
हमने कहा- हम चाय और मन की बात के लिए माफी नहीं माँग रहे है । चाय अपने आप में कुछ नहीं होती । वह तो एक संस्कृति और शिष्टाचार है । जिसे कभी कोई चलती ट्रेन में पिलाकर निभाता है तो कभी कोई 15 लाख का सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहनकर निभाता है । हम तो तुझे, मैना और कुछ परिजनों को एक सरप्राइज़ देना चाहते थे । हमने इसी 10 मई को अपनी शादी के 68 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किसी लक्जरी क्रूज़ शिप से योरप के कुछ देशों के एक महिने के ट्रिप का कार्यक्रम बनाया था । पाँच मिलियन का नॉन रिफंडेबल एडवांस भी दे दिया था लेकिन हम ठहरे मोदीभक्त और मोदी जी ठहरे सच्चे और सबसे बड़े, न भूतो न भविष्यति की श्रेणी वाले देशभक्त । सो देश की अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को देखते हुए सभी देशवासियों से विदेश यात्राएं टालने की अपील के कारण अपना यह कार्यक्रम निरस्त कर दिया है । बस, इसीके लिए माफी मांग रहे थे ।
बोला- मास्टर, मैं भी तुमसे एक बात के लिए माफी मांगने वाला था । मैंने भी अपने दोनों परिवारों के साथ चार्टर्ड प्लेन से अयोध्या यात्रा का कार्यक्रम बनाया था । सोचा था प्राणप्रतिष्ठा पर नहीं जा पाए थे । इस साल दशहरे के आसपास मैना अस्सी साल की हो जाएगी सो इस उपलक्ष्य में मैना के वजन के बराबर 55 किलो सोना राममंदिर में दान दे आएंगे । लेकिन मोदी जी ने कहा है कि एक साल तक सोना नहीं खरीदना है ।सो मैंने भी अमेरिका से 55 किलो सोने के आयात का ऑर्डर केन्सल कर दिया है । क्या मैं अपने ऐसे छोटे मोटे शौक कुछ समय के लिए स्थगित नहीं कर सकता ?
हमने कहा- तोताराम, क्या तुमने आज कुछ ज्यादा लंबी तो नहीं फेंक दी ?
बोला- भाई साहब, शुरूआत किसने की थी ?
हमने कहा- तोताराम, सच है झूठे के उपदेश का कोई असर नहीं पड़ता । हमें याद है 1962 में जब हम सीमेंट फेक्टरी सवाईमाधोपुर के स्कूल में अध्यापक थे तो भारत चीन का युद्ध शुरू हो गया था । हमारे स्कूल में चंदे के लिए कलेक्टर आये थे । हमने जोश में आकर अपनी शादी में मिली सोने की अंगूठी दे दी थी । उसके बाद ऐसा संयोग हुआ कि आज तक कोई सोने चांदी तो क्या तांबे पीतल का भी कोई गहना नहीं पहना ।
उसी माहौल में इंदिरा जी ने अपने सभी गहने रक्षाकोष में दे दिए थे । शास्त्री जी ने 1965 के अन्न संकट के समय जब देशवासियों से सप्ताह में एक दिन सोमवार शाम को भोजन न करने का आह्वान किया था तो उसे पहले खुद अपने घर में लागू किया था । एक बार एक महिला गाँधी जी के पास आई और अपने बेटे को गुड़ न खाने की सलाह देने का आग्रह करने लगी । गांधी जी ने उसे तीन दिन बाद आने को कहा । तीसरे दिन जब वह आई तो गाँधी जी उसके बेटे से कहा कि गुड़ खाना तुम्हारे लिए ठीक नहीं है । महिला ने कहा- बापू, जैसे आज आप यह बात कह रहे हैं वैसे ही उस दिन भी कह देते । बिना बात ही दो चक्कर लगवाए । बापू बोले- पहले मैं भी गुड़ खाया करता था तो तुम्हारे बेटे को न खाने के लिए कैसे कह सकता था । अब तीन दिन से गुड़ खाना छोड़ने के बाद मुझमें ऐसा कहने का आत्मबल आया है ।
खुद किसी न किसी बहाने, किसी न किसी मंदिर में जाकर रोड़ शो में करोड़ों फूंकने वाले मोदी जी की अपील का कोई असर नहीं होने वाला । वैसे भी जिस देश में 80 करोड़ लोग दो जून के अन्न के लिए भिखारियों की तरह लाइन लगाते हों वहाँ सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने के चोंचलों से कुछ नहीं होने वाला । और लो अब चल दिए हवाई यात्रा और मितव्ययिता का उपदेश देकर विदेश यात्रा पर । क्या यह काम यहीं से फोन से नहीं हो सकता था । ट्रम्प ने तो फोन पर ही युद्ध विराम नहीं करवा दिया था क्या ? ये भी कर लेते वर्क फ्रॉम होम ।
बोला- मास्टर, तू इस संसार के लिए मोदी जी के दायित्त्वों को नहीं समझ सकता । वे विश्वगुरु हैं, दुनिया की सुख शांति, सुव्यवस्था की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है उन पर । तेरा क्या है, तू तो साल में छह महिने एक लुंगी में यहाँ बरामदे में बैठा बकवास करता रह सकता है लेकिन मोदी जी को तो वसुधैव कुटुंबकम् के मानने वाले हैं । सब रिश्ते नाते, संबंध निभाने पड़ते हैं । फरवरी में फादर लैंड गए थे तो क्या उसके आसपास में चाचा लैंड, फूफा लैंड, मामा लैंड आदि नहीं जाएंगे ? फिर कभी किसी मौसी, नानी लैंड भी जाना पड़ सकता है ।
हमने कहा- और इसी चक्कर में तीन साल से मणिपुर की ओर ध्यान देने का समय नहीं मिला ।घर से पहले बाहर पोपुलर होने के चक्कर वालों के घर उजड़ते देर नहीं लगती । लेकिन कोई बात नहीं, हम तो एक कदम और आगे जाकर मोदी जी की बात को मानेंगे । अब कल से तेरी चाय भी ‘फ्रॉम होम’ और डिजिटल हुआ करेगी । नो कमिंग टु बरामदा ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
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