May 10, 2026

30-04-2026 ऑटो फेयर


30-04-2026 

ऑटो फेयर 



हमने पूछा- तोताराम, ऑटो फेयर के बारे में पढ़ा ? 




बोला- सीकर में किसी बधाई, फेयर और यात्रा की कोई औकात ही नहीं । अखबार में इसके अलावा और होता ही क्या है ? क्या देखना पढ़ना ? अब चूँकि अखबार एक वैसा ही कार्यक्रम हो गया है जैसे ‘मन की बात’ । जिनको पार्टी में अपने नंबर बढ़ाने हैं, जिन्हें अपनी कुर्सी पक्की करनी है वे सुनते हैं, बल्कि सुनने का नाटक करते हैं लेकिन अब किसी को इससे कोई मतलब नहीं ।रोज कोई न कोई कलश यात्रा निकलती है, कोई न कोई स्कूल इतिहास रचता है और उनसे विज्ञापन लेने वाले अखबार उस विज्ञापन को खबर बनाकर छपते हैं ।


ऐसे ही अखबारों में कोई जनहित या जन सरोकार का या सरकारों के भ्रष्टाचारों के समाचार छापने का साहस तो है नहीं सो ऐसे ही आलतू फालतू समाचारों से पन्ने भर देते हैं ।कभी कोई कलश यात्रा, कभी कोई शोभा यात्रा,कभी कोई लाल नीली, हरी पीली भगवा रैली । और कुछ नहीं तो किसी अखबार की तरफ से कोई न कोई फेयर । जिसमें किसी स्थानीय ग्राउंड को किराये पर लेकर दुकानें  लगवाना और धंधा करना । लोकतंत्र का चौथा पाया न हुआ दिल्ली का कोई न कोई मंगल, बुध बाजार हो गया । 


तो हो सकता है किसी अखबार ने ऑटो फेयर भी लगवा लिया हो । वैसे अपने सीकर शहर में ही चार हजार रजिस्टर्ड और एक दो हजार बिना रजिस्टर्ड ऑटो तो होंगे ही । 


हमने कहा- हम ऐसे किसी छोटे मोटे फेयर की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो चीन के बीजिंग में कोई चार लाख वर्ग मीटर में फैले ऑटो मतलब ऑटो रिक्शा नहीं, तरह तरह की एडवांस्ड कारों की प्रदर्शनी लगाई है । 



बोला- मैं उस टुच्चे, छोटी आँख वाला गणेश बनाने वाले देश की बात ही नहीं करना चाहता । अरे, एक संस्कारी विश्वविद्यालय के सीधे सादे बच्चों ने एक खिलौना कुत्ता खरीदकर क्या दिखा दिया, दुनिया में हमारा मज़ाक बनाने लगा । अरे भाई ये छोटी मोटी बातें चलती रहती हैं । मैंने तो बहुत पहले सुना था कि चीन दूसरे देशों से तरह तरह के यंत्र मँगवाता है और उन्हें खोल खालकर थोड़ा बहुत इधर उधर करके अपने नाम से कुछ नया बना लेता है । उसका हमसे क्या मुकाबला । इतने वर्गमीटर में तो हम किसी छोटे मोटे उत्सव में दस-बीस लाख दीये जलवा देते हैं ।इतना बाद कार्यक्रम तो हम दस बीस लोगों को सरकारी नौकरी देने का हल्ला-गुल्ला मचाने के लिए कर देते हैं ।  


हमने कहा- ये कारें दुनिया की सबसे एडवांस्ड कारें है । विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में चीन 2080 में चल रहा है । ये कारें बहुत से काम खुद ही कर लेती हैं । परिस्थिति के अनुसार निर्णय तक ले लेती हैं, फटाफट चार्ज हो जाती हैं, टायर फटने पर भी रुकने का काम नहीं, जरूरी हो तो उड़ भी लेंगी । 


बोला- बस ? ये सब विशेषताएं तो हमारे यहाँ के वाहनों में जाने कब से पाई जाती हैं । हमारे पुराणों में तो जाने कैसे कैसे अस्त्र शस्त्र हुए हैं जो अपना लक्ष्य बेधकर कर सकुशल अपने गैराज, स्टोर या तरकश में आ जाते थे । नो वेस्टिज । 


कारें तो जाने क्या, क्या करके कहाँ लुप्त हो जाती हैं । यहाँ तो एक सामान्य बुलडोज़र तक इतना समझदार होता है कि वह अपराधी का धर्म, जाति, वस्त्र आदि पहचान कर स्वविवेक से न्याय करके निर्णय भी कार्यान्वित कर देता है कि कहाँ, कब, किसका घर, कितना ढहाना है । जीपें भी निर्णय ले लेती हैं कि उसमें  बैठा व्यक्ति कौन है, कितना बड़ा अपराधी है और उसके अनुसार फैसला करके यथा समय, यथा स्थान पलट भी जाती हैं ।   



पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

No comments:

Post a Comment