Mar 9, 2020

कोरोना की स्पीड और दिशा



कोरोना की स्पीड और दिशा 


आज तोताराम ने आते की ब्रेकिंग न्यूज फेंकी- मास्टर, गाज़ियाबाद पहुँच गया है |

हमने कहा- बिना प्रसंग-सन्दर्भ क्या समझें ? 

बोला- अब लोगों के 'अच्छे दिन' और '१५ लाख रुपए'  वाले बहम निकल गए हैं |देश के एक सामान्य व्यक्ति तक को विश्वास हो गया है कि वह एक जुमला ही नहीं बल्कि एक धोखा था |इसलिए तेरे जैसे तथाकथित बुद्धिजीवी को अच्छे दिन आने जैसी मूर्खतापूर्ण कल्पना तो करनी ही नहीं चाहिए |आजकल तो कोरोना का फैशन है सो उसके अतिरिक्त और किसके आने की खबर हो सकती है ?

हमने कहा- लेकिन भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी तो कह रहे हैं कि राहुल गाँधी की जाँच की जानी चाहिए क्योंकि वे इटली होकर आए हैं |इटली अपने राजस्थान से पश्चिम दिशा में है और गाजियाबाद पूर्व में |यदि इटली से आ रहा होता तो जोधपुर की तरफ से आता |यह गाजियाबाद की तरफ से क्यों आ रहा है ?

बोला- हो सकता है वह पार्टी का आधिकारिक वक्तव्य न हो |बिधूड़ी जी की अपनी व्यक्तिगत राय हो |वैसे जहाँ तक समाचारों की बात है तो सबसे पहले कोरोना वायरस के प्रकोप का पता चीन के वुहान शहर में लगा था | तो इस बात का औचित्य समझ में आता है कि कोरोना गाज़ियाबाद की तरफ से आ रहा है |

हमने पूछा- तो तेरे हिसाब से अपने सीकर तक पहुँचने में उसे कितना समय लगेगा ?

बोला- यह तो साधन पर निर्भर करता है |यदि प्लेन या बुलेट ट्रेन या हेलिकोप्टर से चले तो अब तक तो पहुँच गया है |यदि पैदल आए तो भी एक हफ्ते में तो पहुँच ही जाएगा |

हमने पूछा- लेकिन बिधूड़ी जी का इटली वाला भी आ पहुँचा तो ? कैसे पहचानेंगे ?



कार्टून


बोला- देख, यदि चीन की तरफ से गाज़ियाबाद होता हुआ तो बहुत संभव है उसका रंग भगवा हो |क्योंकि चीन का राजनीतिक रंग लाल है और नस्लीय रंग पीला है |कुछ रास्ते की थकान और कुछ योगी जी के प्रदेश के ऊपर से आने के कारण, बहुत संभव है उसका रंग भगवा होगया हो |

हमने फिर प्रश्न किया- यदि इटली वाला कोरोना हुआ तो ?

बोला- तो फिर बहुत संभव है उसका रंग हरा होगा  |क्योंकि एक तो वह पश्चिम से आ रहा है और पाकिस्तान के ऊपर से आएगा तो हरा हो ही जाएगा |और जहाँ तक  राजनीतिक रंग की बात है तो इटली हमें उतना ही प्रिय है जितना भाजपा को राहुल गाँधी |और फिर कुछ विद्वान केजरीवाल और राहुल में पकिस्तान परस्ती भी देखते हैं तो निश्चित है कि इटली की तरफ से आने वाले कोरोना वायरस का रंग हरा ही होगा |

हमने कहा- तो फिर तो इनके उपचार भी अलग-अलग ही होंगे ?

बोला- ज़रूर |यदि चीन वाला कोरोना है तो अपने घर की सजावट चीनी सामान से करो, उसके साथ झूला झूलते हुए चीनी कप-प्लेट में चीन की चाय पिओ |और यदि इटली-पाकिस्तान वाला हरा वायरस हो तो किसी के बहकावे में आकर उसे देशभक्ति के काढ़े से ठीक करने में समय बर्बाद मत करना |नहीं तो, हो सकता है केस बिगड़ जाए और तुम्हारी जान पर बन आए |उसे तो सीधे गोली ही मार देना जैसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए देश को  'कांग्रेस मुक्त' करना  |

हमने पूछा- मोदी जी का तो चीन से बहुत गहरा संपर्क और संबंध है |उनकी जाँच के बारे में क्या ख़याल है ?

बोला- जाँचें तो सामान्य लोगों की होती हैं |मोदी जी तो सच्चे योगी हैं |उन पर किसी प्रकार का कोई भी वायरस असर नहीं कर सकता |  

हमने कहा- तो फिर चाय बंद |आज से रामदेव जी का नाम लेकर गिलोय का काढ़ा शुरू |अपने नीम पर से उतारी हुई है |

बोला- अपने लिए च्यवनप्राश और जनता के लिए गोमूत्र और नीम गिलोय ! क्यों इस नश्वर शरीर के चक्कर में क्यों सुबह का मज़ा किरकिरा करता है ?चिंता मत कर |इस देश का कोई वायरस कुछ नहीं बिगाड़ सकता |यह मरता है तो अपनों के मारे ही मरता है |

हमने कहा- तोताराम, प्राचीन भारत के शास्त्रों में सब प्रकार का ज्ञान-विज्ञान बताते हैं तो फिर इस कोरोना का भी कोई न कोई इलाज़ ज़रूर होना चाहिए |

बोला- है ना, है क्यों नहीं ? यदि कोरोना के वायरसों में से कुछ को हिन्दू और कुछ को मुसलमान बना दिया जाय तो वे आपस में लड़ते रहेंगे और हम, मतलब सेवक सुरक्षित रहेंगे |





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Mar 8, 2020

दूर से ही ठीक है



दूर से ही ठीक है 


आज अजीब संयोग हुआ |पत्नी का चाय लेकर बरामदे में आना और तोताराम का बरामदे के पास प्रकट होना |हमारी हालत 'मैं इधर जाऊँ या उधर जाऊँ, बड़ी मुश्किल में हूँ मैं किधर जाऊँ' |चाय थामें या तोताराम की अभ्यर्थना करें |तभी तोताराम ने सब संकोच दूर का दिया, बोला- चाय संभाल | मेरी तो दूर से ही 'राम-राम' ठीक है | 

हमने कहा- यह भी कोई बात हुई |भले ही अडवानी जी कितना ही कुढ़ रहे हों पर क्या उनकी मोदी जी से दुआ-सलाम बंद हो गई ? हमने तेरे साथ ऐसा क्या कर दिया जो एक पल में साठ साल की दोस्ती को धता बताकर दूर से ही 'राम-राम'  ?

बोला- भाई साहब, राष्ट्रहित और जनहित से पहले आत्महित ज़रूरी है |हम बचेंगे तो दोस्ती बचेगी |

हमने कहा- बात साफ़ कर |पहेलियाँ मत बुझा |हुआ क्या ?

बोला- इस साल मोदी जी, अमित शाह, जे पी नड्डा आदि सभी विशिष्ट लोग होली-मिलन से दूर ही रहेंगे |

हमने कहा- प्रेम के इस त्यौहार को नेताओं के कमीनेपन ने खूनी होली बना डाला |अब किस मुँह से होली खेलेंगे ?

बोला- यह तो कोई बात नहीं है |इतना बड़ा देश है |दंगे-फसाद, खून-खराबा तो होते ही रहते हैं | साल में दस-बीस बार कोई सिरफिरा किसी स्कूल-मॉल में गोली चल देता है, सौ-पचास आदमी मर जाते हैं तो क्या ट्रंप साहब क्रिसमस मनाना छोड़ देते हैं या अपने फ्लोरिडा वाले रिसोर्ट में गोल्फ खेलना बंद कर देते हैं |लेकिन अब हमारे सेवकों का  होली-मिलन ठीक नहीं है |

हमने कहा- बड़ा अद्भुत सस्पेंस हैं, बात हजम नहीं हो रही है | कल सुना था, मोदी जी मीडिया को छोड़कर झोला उठाकर चल देंगे |अब किसी गुफा में बैठकर चिंतन करेंगे लेकिन वह टेंशन तो दूर हुआ |अच्छा हुआ जो यह अर्द्ध सत्य निकला | एक दिन में ही  पोपुलैरिटी चेकिंग हो गई  |लाखों निठल्ले युवा बिलख पड़े तो क्या करें मोदी जी को फिर सोशियल मीडिया पर आना पड़ा |पर अब होली मिलन ?तुलसी ने तो होली ही नहीं, सामान्य परिस्थिति तक के लिए  कहा है-
तुलसी या संसार में सबसे मिलियो धाय |
ना जाने किस भेस में नारायण मिल जाय || 

बोला- यह उन्होंने सामान्य परिस्थिति के लिए कहा था | विशेष परिस्थिति के लिए वे कहते हैं-
तुलसी या संसार में भाँति-भाँति के लोग |
सबसे बच कर चालियो लिए फिरत हैं रोग ||
तुझे पता है, आजकल कोरोना वायरस फैला हुआ है |यह कोई शाहीन बाग़ तक करंट पहुंचाने या गोली मारने का सुझाव देने जैसा सामान्य काम थोड़े ही है |जान का खतरा है, भाई साहब !

हमने कहा- हमारे मोदी जी तो सबसे दौड़ कर गले मिलते हैं चाहे चीन के राष्ट्रपति हों, या जापान के प्रधान मंत्री; फ़्रांस के राष्ट्रपति हों या इज़राइल के प्रधानमंत्री |अभी देखा नहीं, कैसे ट्रंप से गले मिल रहे थे ? एक प्राण, दो देह !यदि कहीं कोरोना वगैरह कुछ हो जाता तो ?







बोला- वह बात और है |पहली बात तो नेता लोग खुद ही खतरनाक वायरस होते हैं |उनका कोई वायरस क्या बिगाड़ेगा ? घोड़े की लात के घोड़ा नहीं मरता, आदमी की बात और है | और फिर उनकी चमड़ी इतनी मोटी होती है जिसमें कोई वायरस नहीं घुस सकता | क्या कभी तुमने किसी नेता को भूख, कुपोषण से मरते देखा है ? कभी उसका घर बाढ़ में बहता है, दंगे में जलता है ? | ये सब तो हम पर ही लागू होते हैं | 

हमने कहा- जब यही बात है तो फिर छोड़ ये नेताओं वाले नखरे और आ बैठ |होली की योजना बनाते हैं ?अपन कौन कूटनीति के कोरोना लिए फिरते हैं |



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Mar 3, 2020

साबरमती आश्रम में ट्रंप



साबरमती आश्रम में ट्रंप 


२४ फरवरी २०२० को 'नमस्ते ट्रंप' नाम के एक सौ करोड़ी, अभूतपूर्व, वर्ल्ड रिकार्ड वाले स्वागत समारोह से पहले ट्रंप अपनी तीसरी मॉडल पत्नी मेलानिया के साथ गाँधी के साबरमती आश्रम में पधारे |धन्य भाग |आश्रम के, गाँधी के, अहमदाबाद के, गुजरात के, जगद्गुरु भारत के |पिछले ६० वर्षों में कई अमरीकी राष्ट्रपति भारत आए लेकिन इस आश्रम में आने वाले ट्रंप पहले हैं |और मज़े की बात कि उन्हें गाँधी ही याद नहीं रहा |

हमने कहा- तोताराम, यह भी कोई बात हुई कि गाँधी के आश्रम में कोई अमरीकी राष्ट्रपति पहली बार आए, गाँधी जी को सूत की माला अर्पित करे,  झुककर खादी का अंगवस्त्रम स्वीकार करे, चरखा चलाने का अभिनय करे, जूते उतारकर गाँधी के कक्ष में जाए लेकिन 'पर्यटक पुस्तिका' में गाँधी के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखे 

बोला- इसमें आश्चर्य की क्या बात है |ये गोरे हैं जर्मनी वाले, असली आर्य-रक्त |और गोरों ने हमेशा इस दुनिया पर राज किया है |इनके लिए 'काले' मनुष्य की श्रेणी में ही नहीं आते |तभी तो अंग्रेजों के समय में कई स्थान कुत्तों और भारतीयों के लिए निषिद्ध थे |याद है, चर्चिल ने तो गाँधी को अधनंगा फकीर कहा था |

हमने कहा- भले ही गाँधी जी अमरीका नहीं गए लेकिन भारत से बाहर गाँधी जी की सबसे अधिक प्रतिमाएं अमरीका में ही हैं | इनसे पहले ओबामा और उनसे भी पहले मार्टिन लूथर किंग साबरमती आश्रम तो नहीं आए लेकिन राजघाट की पर्यटक पुस्तिका में उन्होंने जो लिखा है वह अद्भुत है |

किंग कहते हैं-  ईसा मसीह ने हमें राह दिखाई थी और गाँधी ने भारत में हमें दिखाया कि वह राह सच में काम करती है |
मैं बाकी देशों में किसी तरह पर्यटक की तरह जा सकता हूँ  मगर भारत तो मैं तीर्थयात्री बनकर आया हूँ  |  

बोला- ट्रंप साहब का तो प्रोपर्टी का पुश्तैनी धंधा रहा है जिसमें व्यक्ति नहीं, जगह का मौका और मार्किट वेल्यू देखी जाती है |वे गाँधी के बारे में क्या जानें | तभी तो उन्होंने २०१९ में ह्यूस्टन में 'हाउ डी मोदी' कार्यक्रम में मोदी जी को 'भारत का बाप' बता दिया था |हो सकता है गाँधी की मुद्रा में चरखा चलाते मोदी जी का फोटो देखकर उन्होंने मोदी जी को ही गाँधी समझ लिया हो |और फिर मोदी जी ने ही तो उनके स्वागत का  का विश्व रिकार्ड बनवाया है |ऐसे में उनके अलावा और किसके बारे में लिखते | 

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 हमने कहा- अच्छा हुआ जो ये शुद्ध आर्य दम्पती गाँधी के जिंदा रहते नहीं आए अन्यथा वह बूढ़ा इन्हें फ़र्श पर बैठाकर अपने अल्यूमिनियम के कटोरे में जाने कौनसा दाल-दलिया खिला देता |और मेलानिया को तो ज़रूर ही चर्खा चलाना सिखा देता जैसे न्यूयार्क टाइम्स की फोटोग्राफर मार्गरेट व्हाईट १९४६ में जब गाँधी जी का फोटो लेने आई तो उन्होंने शर्त रखवाई कि पहले चर्खा चलाना सीखो तो फोटो खिंचवाऊँगा |

बोला- लेकिन तू ट्रंप साहब की इस बात के लिए प्रशंसा में एक शब्द भी नहीं कहेगा कि २००६ में जहाँ बुश के सुरक्षाधिकारी कुत्ते राजघाट पर विस्फोटक सूंघने के लिए चढ़ गए थे वहाँ ट्रंप साहब ने साबरमती में गाँधी की मूर्ति की केवल मेटल डिटेक्टर से ही चेकिंग करवाई |

हमने कहा- तोताराम, पता नहीं इन महाशक्तियों को उस निहत्थे फकीर की मूर्ति से भी क्यों इतना डर लगता है ?

बोला- जहाँ प्यार नहीं होता वहाँ डर नहीं होगा तो और क्या होगा ?





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Mar 2, 2020

दो सितारों का ज़मीं पर है मिलन...



दो सितारों का ज़मीं पर है मिलन...




आज जैसे ही तोताराम आया, हमने पूछा- तोताराम, क्या कल अमावस्या थी?
बोला- अब पंडितों को भी तिथियों का ज्ञान नहीं रहा है| भले आदमी, जब आज ‘फलरिया दूज’ (फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया) का विवाह का अबूझ मुहूर्त है तो कल फागुन शुक्ल की प्रतिपदा थी | वैसे जहाँ तक चाँद दिखाई देने का प्रश्न है तो वह न अमावस्या को दिखता है और न ही प्रतिपदा को |
हमने कहा- कल हमें दोपहर ठीक बारह बजे सूरज कुछ धुंधला सा लगा| लगा, कहीं सूर्यग्रहण तो नहीं? सूर्यग्रहण अमावस्या को ही तो आता है|
बोला- वैसे कल न तो अमावस्या थी और न ही सूर्यग्रहण| लेकिन जहाँ सूरज के धुंधला दिखाई देने की बात है तो वह सच है| कल ठीक इसी समय दुनिया के सबसे बड़े महाबली, विश्व की सर्वमान्य महाशक्ति के शलाका-पुरुष, महामहिम ट्रंप भारत की धरती पर अवतरित हुए थे| और फिर धरती पर उनके स्वागत के लिए भारत को महाशक्ति बनाने वाले, करिश्माई, अनथक श्रम करने वाले और भारत के न भूतो, न भविष्यति नेता तत्पर हों तो फिर सूर्य तो धुंधला नज़र आना ही था |दो सितारों का ज़मीं पर है मिलन आज की रात…|
हमने कहा- वैसे यह सच है कि ट्रंप अतिमहत्त्वाकांक्षी, निरंतर सोचने वाले और निडर किस्म के हैं |उनमें ताक़त हासिल करने की ज़बरदस्त भूख है| जिद्दी हैं इसलिए सख्त निगोशियेटर भी हैं |
बोला- तू उनके बारे ऐसी तकनीकी शैली में कैसे कह सकता है ?
हमने कहा- यह हम नहीं बल्कि ब्रिटिश इन्स्टीट्यूट ऑफ़ ग्राफोलोजिस्ट्स की प्रोफ़ेसर ट्रेसी ट्रस्सल ने आँका है | यदि हमें उनका कमेन्ट नहीं मिलता तो भी हमने उनके दस्तखत देखकर ही अनुमान लगा लिया था |
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बोला- कैसे ?
हमने उत्तर दिया- उनके दस्तखत देखे ? ऐसे लगता है जैसे किसी ने दो देशों के बीच काँटेदार तारों की दीवार बना दी हो |तुझे पता होना चाहिए कि ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही सबसे पहले दो काम किए थे |पहला मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने का फैसला और दूसरा ओबामा वाली हेल्थकेयर स्कीम को समाप्त करना |ये दोनों ही निर्णय कोई जिद्दी और निडर आदमी ही ले सकता है |
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बोला- मैं तो इस ग्राफोलोजी को मानता नहीं |अपने मोदी जी निर्णय लेने के मामले ट्रंप से ज्यादा निडर हैं लेकिन उनके हस्ताक्षर देख कितने सौम्य, सरल और सहज हैं|
हमने कहा- तभी तो ट्रंप साहब मोदी जी को मानते हैं |और जहाँ तक स्वागत की बात है तो ट्रंप भी भौचक्के रह गए |क्या इवेंट मनेजमेंट था |दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम, ट्रंप के जीवन की ही क्या, दुनिया के किसी भी नेता के आज तक के स्वागत से अधिक भीड़ और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे शक्तिशाली नेता द्वारा स्वागत| सब कुछ नंबर वन |वैसे अमरीका में मोदी जी का भी स्वागत तो ज़बरदस्त हुआ था २०१४ में मेडिसन स्क्वायर और २०१९ में ह्यूस्टन में |
बोला- उसमें ट्रंप या ओबामा की क्या छाप है |पैसा फेंको, तमाशा देखो |
हमने कहा- तोताराम, बात कुछ हज़म नहीं हुई |वहाँ भी भारतीयों का ही खर्चा और यहाँ भी भारत का ही खर्चा |यहाँ तो ट्रंप को खर्चा करना चाहिए था |
बोला- क्यों ? हम मेज़बान थे तो खर्चा मेहमान का क्यों ? ट्रंप ने हमें महाशक्ति, सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध बताया है| भले ही उच्चारण सही नहीं था लेकिन सचिन, विराट कोहली, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे और विवेकानंद का ज़िक्र किया | भारत की धरती पर उतरने से पहले हिंदी में ट्वीट किया |इतने गर्व के बाद भी तुझे स्वागत के खर्च की पड़ी है ? अरे, इतनी प्रशंसा के बाद तो कोई गला भी काट ले तो परवाह नहीं |
हमने कहा- गला तो कटा ही है| अरे, कोई दुकानदार हजार दो हजार का सामान लेने वाले ग्राहक को ठंडा-गरम पिलाता है और एक हम हैं कि तीन बिलियन डालर का सामान भी खरीदें और सौ करोड़ का स्वागत भी करें |
बोला- तभी तो ब्रिटिश ग्राफोलोजिस्ट ने ट्रंप को सख्त निगोशियेटर कहा है |
हमने कहा- तोताराम, इस आयोजन को यदि हम आर्थिक गतिविधि में बदल सकें तो वारे-न्यारे हो जाएंगे |स्टेडियम है ही, गाने-बजाने वाले सेट हो ही गए हैं, झुग्गी-झोंपड़ियों को छुपाने के लिए दीवार बन ही गई |क्यों न स्वागत का वर्ल्ड रिकार्ड बनाने के लिए लालायित धनवानों का यहाँ दो-दो सौ करोड़ में स्वागत करने का स्थायी कार्यक्रम ही बना लें |
बोला- तो इसी बात पर एक खुशखबरी सुन ले |जनवरी की पेंशन बीस दिन देर से ही सही लेकिन खाते में आ गई है|





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