Nov 4, 2023

2023-10-30 यह समय सोने का नहीं है


2023-10-30       


यह समय सोने का नहीं है 


कल इंडिया का क्रिकेट मैच इंग्लैंड से था ।हमें इसमें कोई खास रुचि थी भी नहीं लेकिन हो हल्ले के कारण दिन में सो नहीं सके इसलिए हम समय से ही अर्थात साढ़े आठ बजे ही सो गए । पड़ते ही नींद आ गई । नींद में ही पोती की आवाज सुनाई दी- बाबा, उठो, लेट अस सेलेब्रेट । 

हम नींद में ढंग से सुन नहीं पाए और न ही कुछ समझ में आया । पूछा- क्या मोदी जी तीसरी बार लोकसभा का चुनाव पूर्ण बहुमत से जीत गए । 

पोती हँसी-  क्या बाबा, अब भी नींद नहीं खुली ? लोकसभा चुनाव तो अभी छह महिने दूर हैं । और उसमें कोई शक भी नहीं है । मोदी जी नहीं तो कौन ? उन्हें ही जीतना है । और फिर 75 साल वाला नियम भी वे नहीं मान सकते ।मजबूरी है । लगता है आजीवन, अनंत काल तक इस देश की सेवा की जिम्मेदारी उन्हें ही निभानी पड़ेगी । मैं तो आज के क्रिकेट मैच की बात कर रही थी ।  

हमने कहा- दोनों ही महान टीमें हैं । दोनों में ही कोई कंसिस्टेंसी नहीं । कोई भी कभी भी किसी से भी हार सकती हैं । एक बार भारत बांग्लादेश से 5 विकेट से हार गया था । पिछले साल हम इंग्लैंड से 10 विकेट से हार गए थे । इस साल इंग्लैंड अफगानिस्तान से हार गया । महान व्यक्ति और महान देश सब इंक्रेडिबल होते हैं । 

हमें इंडिया या इंग्लैंड किसी की जीत से कोई फ़र्क नहीं पड़ता । और फिर क्या क्या सेलब्रैट करें। कुछ न कुछ आता ही रहता है । कभी जी-20, कभी नया संसद भवन, कभी आधा-अधूरा महिला आरक्षण बिल, कभी दुर्गापूजा, कभी दशहरा, कभी मोदी जी के मन की बात, आए दिन उनका हरी झंडी दिखाना, कभी चीन सीमा के सबसे नजदीक गाँव में जाकर पूजा पाठ करना, अब जगह जगह रिकार्ड बनाने के लिए लाखों दीये जलाने की प्रतियोगिता आने वाली है । 

पोती ने कहा- बाबा, ठीक है, लेकिन अपनी भाषा तो सुधारो । इंडिया नहीं, भारत बोलो। यह मोदी जी का भारत है । यह गुलामों वाली शब्दावली नहीं चलेगी । गुलामी का हर चिह्न मिटा दिया जाएगा । 

हमने कहा- लेकिन टीम की छाती पर तो अभी भी 'इंडिया' लिखा हुआ है । 

बोली- अगली बार से नहीं रहेगा । जी-20 में 'प्रेसीडेंट ऑफ भारत' कर तो दिया था । 

हमने कहा- लेकिन मोदी जी ने अपनी सभी योजनाओं में 'इंडिया' लगा रखा है । स्टैंड अप इंडिया, खेलो इंडिया, भागो इंडिया, छींको इंडिया, हगो इंडिया, मूतो इंडिया । लगता है 'इंडिया' गठबंधन से परेशान हैं । 

बोली- अब चलना है तो चलो हमारे कमरे में । आइसक्रीम से सेलेब्रेट कर रहे हैं । 

हम मैच छोड़ सकते हैं, मन की बात छोड़ सकते हैं लेकिन आइसक्रीम का लालच नहीं । सो सेलेब्रेट करते और बतियाते हुए दो-तीन घंटे निकल गए । फिर नींद आते आते कुछ और समय निकल गया । 

सुबह पता ही नहीं चला। पोती हमारी पालतू 'मीठी' को घुमा लाई । दूधवाला हमारा इंतजार करने के बाद खुद ही दूध पहुँचा गया । तभी तोताराम की आवाज सुनी- अरे आलसी, अब तो उठ चाय भी ठंडी होने लगी । सुना नहीं, आलस्योहि मनुष्याणाम् शरीरस्थो महा रिपु, जो सोवत है सो खोवत है । 

हमने कहा- अब जब हमीं को सुरक्षा के लिए सारी रात जागना था तो फिर 56 इंच की छाती वाले महाबली को प्रधानमंत्री बनाने की जरूरत ही क्या थी ? वे 40 हजार रुपए किलो का मशरूम खाते हैं, वे दिन में 25 घंटे जाग और काम कर सकते हैं । 

बोला- यह बहुत संकट का समय है । माना कि मोदी ईश्वर के अवतार हैं लेकिन नागरिक के नाते हमारा भी तो कोई न कोई कर्तव्य है । यह सोने का समय नहीं है । कुछ भी हो सकता है । दुश्मन हर क्षेत्र में सक्रिय हैं । 

हमने उत्सुकता से पूछा- क्यों क्या हुआ ? 

बोया- कल क्रिकेट मैच देखा ? 

हमने कहा- हाँ, देखा लेकिन पूरा नहीं । वैसे हमें इतना पता है कि कल रात इंडिया  मैच जीत गया, पूरे एक सौ रन से ।  हमने तो पोती के साथ आइसक्रीम पर सेलेब्रेट भी कर लिया । 

बोला- ऐसे ही आइसक्रीम खाता रहा तो किसी दिन 'ये' 'विकेट जिहाद' के षड्यन्त्र के तहत क्रिकेट पर भी कब्जा कर लेंगे । तूने नोट किया या नहीं ? शामी ने 4 और बुमराह ने 3 विकेट लिए । देख, अखबार के पहले पेज पर इन दोनों का ही फ़ोटो छपा है ।  और इन दोनों के अलावा एक तीसरा 'विकेट जिहादी' भी है सीराज । 

हमने पूछा- यह 'विकेट जिहाद' कहाँ से आगया ? कुछ ढंग का पढ़ा-सुना कर ।  चह्वाणके का चंडूखाना चेनल देखेगा तो हर बात में जिहाद ही दिखाई देगा । वैसे जब इंडिया 100 रन से जीता है तो यह 'रन धर्मयुद्ध'' तो हो सकता है क्योंकि रोहित 'शर्मा' है ।   

बोला- जो टारगेट देता है वह विकेट से जीतता है और जो टारगेट चेज़ करता है वह रन से जीतता है लेकिन सब जानते हैं कि यह जीत इन दोनों जिहादियों के विकेट लेने के कारण ही मिली है ? चह्वाणके की मौलिकता को तू क्या समझेगा ?  अभी उसने बताया है कि हमें इजराइल का समर्थन करना चाहिए क्योंकि 'यहूदी' 'यादव' एक ही हैं ।वैसे कठियावाड़  (गुजरात) द्वारिका में 'यादव' कृष्ण और उनके यादवों की सेना का भी उल्लेख मिलता है ।  इस रिश्ते से तो नेतन्याहू  और यहूदी ( इजराइली )  अपने भाई हो  गए । 

हमने कहा- इस हिसाब से तो क्राइस्ट ही कृष्ण हैं और सभी क्रिश्चियन भी 'कृष्ण' के ही वंशज हैं । और यदि अपने दिल को थोड़ा और बड़ा करो तथा तुम्हारी कट्टरता इजाजत दे तो मुसलमान भी अपने ही सिद्ध होते हैं क्योंकि बलराम के शस्त्र हल-मूसल थे उसी से 'मूसलमान' (मुसलमान) निकले हैं । 

और सुन शामी शब्द पवित्र हिन्दू वृक्ष 'शमी' से निकला है, सीराज 'स्वराज' (सुषमा स्वराज) का तद्भव है, और बुमराह कोई गुमराह हुआ हिन्दू ही है तभी तो उसके सरनेम से पहले जसप्रीत लगा हुआ है । 

बोला- मुझे नहीं सुननी तेरी ये तुष्टीकरण वाली धर्मनिरपेक्ष बातें । ऐसे तो हमारे राष्ट्रभक्ति वाले सभी मुद्दों की हवा निकल जाएगी । 

 






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Oct 15, 2023

2023-10-16 भारत ने जीता क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023


2023-10-16  

 भारत ने  जीता क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 

15 अक्टूबर 2023 की सुबह । स्थान सदैव की भाँति 'बरामदा विष्ठा' । हम अपनी स्टूल रूपी  सिंहासन पर बैठे हैं । राजदंड सिंगोल की तरह नीले रंग का प्लास्टिक पाइप का दो फुट का एक टुकड़ा हमारे बगल में रखा है । दरबारी, भक्त, चमचा या जो भी कुछ कहें तोताराम हमारे बगल में बैठा है । वैसे वह पार्टी के भक्तों की तरह हमारी हर बात पर न  तो ताली बजाता है और न ही बात-बिना बात हमारे बरामदे में अवतरित होते समय 'जोशी'-'जोशी' चिल्लाता है फिर भी हम उसे अपना ही मानते हैं क्योंकि वह हमारे बरामदा संसद का 'माननीय सदस्य' है लेकिन माननीय होते हुए भी उसने कभी हमें शालीनता-सम्राट रमेश विधूड़ी की तरह कटुआ, भड़वा और आतंकवादी भी नहीं कहा । 

अभी चाय आने में देर है । अखबार भी अभी नहीं आया है । इस मनहूस और सुनसान माहौल में पता नहीं, कब हमें झपकी आ गई । गर्दन को झटका सा लगा । 

तोताराम ने स्थिति को लपका और बोला- कोई काम नहीं है, सारे दिन खाने और सोने के अलावा । और अब सुबह- सुबह ऊँघ रहा है । ऐसी भी क्या नींद ! लोग तो 20-20 घंटे जागते हैं और देश की सेवा करते हैं । और कुछ नहीं तो देश के बारे में चिंतन करते हैं । फिर भी नींद नहीं आती तो हिमालय में जाकर भगवान शिव से देश के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं । 

हमने कहा- कल हम दोपहर से ही भारत पाकिस्तान का क्रिकेट मैच देख रहे थे । उसके बाद खाना खाकर सो गए, थक जो गए थे । हालांकि सोने में कोई विशेष देर नहीं हुई थी फिर भी टी वी जैसी घटिया क्रिकेट कमेंटरी देखने में तो आदमी 'मन की बात' से भी अधिक थक जाता है । और फिर हंगर इंडेक्स में 111/125 नंबर के देश का अस्सी पार का एक बुजुर्ग कौन सा 40 हजार रुपए किलो का मशरूम खाता है जो थकेगा नहीं । 

बोला- फिर भी ऐसी क्या थकान जो देवगौड़ा जी की तरह मंच पर ही सोने लगा ? 

हमने कहा- फिर सुबह जल्दी उठकर ट्रॉफी लेते हुए भारतीय कप्तान का फ़ोटो सेव करके समाचार भी तो बनाना था 'विश्वा' के लिए । हमारे पास कौन कोई रिपोर्टर, फोटोग्राफर रखा है जो समाचार तैयार करेगा । हम तो खुद ही पीर बवर्ची भिश्ती खर हैं । 

बोला- अभी कहाँ ट्रॉफी ? अभी तो और कई मैच खेलने हैं । भारत का क्या ठिकाना ? हारना चाहे तो बांगलादेश क्या अफगानिस्तान से हार जाए । 

हमने कहा- ऐसा नहीं हो सकता । मोदी जी के होते हार नहीं सकता । उनकी प्रेरणा में बड़ा दम है । देखा नहीं, एशियाड में सौ से ज्यादा मेडल क्या ऐसे ही आ गए बिना मोदी जी के प्रोत्साहन के ?

 बोला- स्टेडियम में अमित शाह जी भी तो थे । 

हमने कहा- थे लेकिन मोदी जी की बात ही कुछ और है । वे विदेश में बैठकर भी चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवा सकते हैं । 

बोला- लेकिन तू ऐसा कैसा संपादक है जिसे क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल का भी पता नहीं । लोग तो इजराइल के होटलों में बैठकर फिलस्तीन का कवरेज दिखा रहे हैं । 

हमने कहा- हमारी दुनिया तो पाकिस्तान तक ही है ।उसका हारना ही हमारा जीतना है । बस, पाकिस्तान से न हारें फिर भले ही बांग्लादेश और अफगानिस्तान ही हमें हरा दें ।  उसके यहाँ की महंगाई और कर्जे के समाचारों से हम अपनी गरीबी और महंगाई भूल जाते हैं । उसकी गरीबी हमारी समृद्धि है, उसकी हार हमारी जीत है ।

पड़ोसी की दोनों आँखें फूट जाएँ तो अपनी एक फूटने का दुख नहीं । 

काम न करने वाली सरकारें अपनी जनता को घृणा के इसी मनोविज्ञान से बहलाती रहती है । कोई बात नहीं, हम तो अपने हिसाब से जीत चुके क्रिकेट का वर्ल्ड कप 2023 ।   


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Aug 7, 2023

सेल्फ़ी विद मिट्टी


सेल्फ़ी विद मिट्टी  


आज जैसे ही तोताराम बैठने को हुआ, हमने कहा- तोताराम, अच्छे दिन देखेगा ?

बोला- यह मोदी जी के जुमले पर और कौनसा जुमला आ गया ? दिल्ली से लेकर द्वारका तक और देहरादून से धनुषकोटी तक सारा देश ढूँढ़-ढूँढ़कर परेशान है, ऐसे में तू कौनसा अदानी लगा हुआ है जिसकी रोजाना की आय एक हजार करोड़ बढ़ गई और वह भी तब जब कोरोना में सारी दुनिया मंदी और बेरोजगारी से त्राहि त्राहि कर रही थी।

हमने कहा- देखना हो तो देख ले । दस दिन से रसोई में मेज पर रखा हुआ है ? सूखने सूखने को हो रहा है । फिर जब उठाकर फेंके देंगे तो फिर देखने को भी नहीं मिलेगा । 

बोला- मास्टर, लगता है तेरे मन में उसी तरह खोट आ गया है जैसे मोदी जी के मन में दुबारा लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद आ गया था । उसी के तहत उन्होंने हम बुजुर्गों की रेल किराये की छूट बंद कर दी, चुपके से गैस की सबसीडी डकार गए और बड़ी दादागीरी से कह दिया नहीं देंगे 18 महिने का डीए का एरियर। कर लो जो करना है । कोरोना का टीका क्या मुफ़्त में लगा था ? वैसे ही पहले तूने कहा था- अच्छे दिन । और अब कह रहा है- अच्छा दिन । मतलब इतनी सी देर में बहुवचन का एकवचन कर दिया । 

हमने कहा- इसमें हम क्या कर सकते हैं । जब है ही एक तो फाड़ कर दो कैसे कर दें ? 

बोला- अच्छे दिन कोई वस्तु थोड़े है ? वह तो एक भाव है, एक विचार है । जैसे भारत । लोगों को चुनाव के लिए लड़ा-भिड़ाकर,  घर घर तिरंगा फहराने का नाटक करने से क्या भारत बचेगा ?भारत बचेगा सबके मिलजुलकर प्रेम से रहने ।  किसी एक कौम को डराकर देश सुरक्षित हो सकता है ? सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के शब्दों में कहें तो देश कागज पर बना कोई नक्शा मात्र नहीं होता । अच्छे दिन कोई चाय या समोसा हैं जो लाकर सामने रख देगा ? फिर भी खैर, दिखा अच्छे दिन ?

हमने कहा- दूर से दिखाएंगे । हाथ में नहीं देंगे । वैसे ही दूर से दर्शन कर लेना जैसे दूर से ही करोड़ों लोग मोदी जी के मन की बात सुन लेते हैं और उनके दर्शन कर लेते हैं । 

बोला- अब जो करना है कर करा ले । जो दिखाना है दिखा दे । बिना बात क्यों चाय का सत्यानाश कर रहा है । 

हमने अंदर से लाकर एक छोटा सा टमाटर तोताराम को दिखाते हुए पूछा- यह क्या है ? 

बोला- छोटे वाला बेर । 

हमने कहा- अभी बेर का मौसम कहाँ ? यह टमाटर है । 

बोला- टमाटर ? और मास्टर के यहाँ ? सुना है आजकल चीन से नकली अंडे, प्लास्टिक की पत्ता गोभी आ रही है । हो सकता है यह प्लास्टिक का टमाटर हो ।  तू क्या कोई फकीर है जो चालीस हजार रुपए किलो का मशरूम खाएगा ? सुना नहीं, दिल्ली में बड़े बड़े रिटायर्ड अफसर 80 रुपये किलो के टमाटर के लिए लाइन लगा रहे हैं । 

जरा दिखा तो ! चेक करें । 

हमने कहा- यह शर्त तो सबसे पहले सुना दी थी कि हाथ से नहीं छूने देंगे । क्या पता तू किसी मोदी की तरह बैंक के हजारों करोड़ रुपए के कर्ज की तरह लेकर अमरीका भाग जाए । 

बोला- मोदी का नाम मत ले । क्या पता, सूरत के किसी बाद में बने 'मोदी' का जातीय अपमान हो जाए तुझे अधिकतम सजा दे दी जाए । 

खैर, मत छूने दे लेकिन यह तो बता तू यह बेमौसम की, बे औकात की चीज ले कहाँ से आया । डीए का एरियर भी नहीं मिला । 


हमने कहा- हम कौनसे किसी उद्योगपति के साथ प्लेन में किसी नेता का फ़ोटो दिखा रहे हैं जो सदस्यता रद्द कर दी जाएगी । पीछे बाड़े में चार-पाँच टमाटर के पौधे लगे हुए थे । सूख गए थे । टमाटर लग नहीं रहे थे । यह एक पता नहीं कहाँ छुपा हुआ था हिन्दू हृदय सम्राट मोनू मानेसर जी और महान खिलाड़ी तथा शिक्षाविद ब्रजभूषण शरण सिंह जी की तरह । सो हिन्दुत्व के गौरव की तरह सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर इसकी सुरक्षा कर रहे हैं । 

बोला- चल बाड़े में,  अमृत महोत्सव के समापन पर 'मिट्टी के साथ सेल्फ़ी' की तरह जहां इसका पौधा उगा हुआ था वहाँ की मिट्टी और इस टमाटर के साथ 'थैंक यू मोदी जी' का केपशन देते हुए एक सेल्फ़ी लेकर मोदी को भेज देते हैं । 


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Jul 27, 2023

मोदी जी सीकर में क्या करने आ रहे हैं ?


मोदी जी सीकर में  क्या करने आ रहे हैं ?


आज सुबह ही हल्की बूँदाबाँदी सी शुरू हो गई। हम जैसे ही अपनी पेट 'कूरो' को घुमाने और लघु-दीर्घ शंकाओं से निवृत्त करवाने के लिए निकले तो देखा कूड़े के ढ़ेर में से तनिक सा झाँकते, स्वच्छ भारत लिखे कूड़ेदान के पास छाता ताने तोताराम चला आ रहा है । 

हमने छेड़ा- आज इतनी जल्दी ! तुझे पता है हम तुझे आजीवन चाय पिलाने के लिए वैसे ही अभिशप्त हैं जैसे देश की जनता स्वयंसेवकों से सेवा करवाने के लिए मजबूर है । हम तुझे चाय पिलाने से नहीं बच सकते । फिर भी ऐसी क्या जल्दी है जो दिन निकलने से पहले ही आ धमका । 

 बोला-  मोदी जी की कृपा से पेंशन मिल रही । ना सही ऐश लेकिन भूखे भी नहीं मरेंगे । हम तेरी चाय के मोहताज नहीं । और फिर आज तो चाय ही क्या, साथ में नाश्ते का पैकेट भी मिलेगा । जल्दी काम निबटा और चल मेरे साथ । पहुंचते-पहुंचते ही सात-आठ बज जाएंगे ।  

हमने पूछा- लेकिन चलना कहाँ है और क्यों  ? 

बोला- हद है मास्टर,  सारी दुनिया को पता चल गया है लेकिन तेरे कान पर जूँ तक नहीं रेंगी । 

हमने कहा- हमारा कान कोई प्रधान मंत्री का कान तो है नहीं जिसे कोई पकड़ न सके और जिस पर मणिपुर तक की जूँ भी नहीं रेंग सके । ब्रजभूषण को बचाने वाला कोई भी नेता हमारा कान तो महिला पहलवानों के कान की तरह कभी भी पकड़ सकता है । संसद मार्च के दौरान कोई भी लाठियाँ बरसा सकता है । 

कूड़ेदान के सामने ही लगे बिजली के खंभे की ओर इशारा करते हुए तोताराम बोला- उधर देख । वैसे तुझे आज के अखबार में भी सूचना देने वाले कई पम्पलेट मिल जाएंगे । 

हमने देखा, खंभे पर एक बोर्ड लगा हुआ है जिस पर लिखा है- विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी का वीरों की धरती, शिक्षा नगरी सीकर पधारने पर हार्दिक स्वागत । सभास्थल- साँवली रोड़, मेडिकल कॉलेज के पास, सीकर । निवेदक- क ख ग (करबद्ध फ़ोटो)  

हमने कहा-  यहाँ कौन देखने आएगा इन पोस्टरों को । तोताराम ये सब सत्ता से लाभान्वित और लाभ कबाड़ू  चतुर लोग हैं जो किसी न किसी बहाने बड़े बड़े नेताओं की आड़ में पोस्टर छपवाकर अपना राजनीतिक कद दिखाकर कोई बड़ा ठेका या चुनाव का टिकट कबाड़ना चाहते हैं और अपना कोई न कोई पाप छिपाना चाहते हैं । जब मौका लगेगा तब अधिक लाभ के लालच में ये ही सबसे पहले किसी और पार्टी में भाग जाएंगे । बैंकों से अरबों का लोन मिल गया तो ललित और नीरव की तरह नीरवतापूर्वक विदेश भाग जाएंगे । जिन्हें मोदी जी  के नाम से अपनी रोटियाँ सेंकनी हैं वे पोस्टर छपवाएं, स्वागत करने जाएँ, हमें क्या ? ये चापलूस लोग  श्री श्री रविशंकर की तरह दो ही क्या, हर अक्षर के बाद 'जी' लगाकर नाम लिख देंगे  जैसे श्री जी, न जी, रे जी, द्र जी, मो जी, दी जी । 

बोला- वैसे ये नीरव और ललित कौन ?

हमने कहा- समझ सके तो समझ ले । हम तो उनका सरनेम बताने का जोखिम नहीं लेंगे । आजकल भक्तों की भावनाएं कभी भी आहत हो सकती हैं । यूं हमारे पास छिन जाने को राहुल की तरह सांसदी नहीं है लेकिन क्या पता पेंशन ही बंद करवा दें । स्पष्ट बहुमत बहुत बुरी चीज होती है । और आज तक दुनिया के किसी भी देश में, किसी भी नेता को ऐसा स्पष्ट बहुमत नहीं मिला जितना मोदी जी को । तो फिर वे क्यों न ईश्वर की तरह सर्वशक्तिमान बन जाएँ । तभी देखा नहीं, सभी मंत्री ही नहीं, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तक 'जी जी' के अलावा एक अक्षर भी नहीं बोलते । देखा नहीं, फ्रांस में एक अधेड़ महिला किस प्रकार मोदी के चेहरे के तेज को देखकर गदगद हो रही थी । 

बोला- बातों में टाइम खराब मत कर । जल्दी निकल लें तो ठीक रहेगा । देर हो जाने पर क्या पता बैठने की भी जगह मिले, न मिले । 

हमने कहा- लेकिन आजकल तो मोदी जी की जन सभाएं बड़ी निर्जन चल रही हैं । कुर्सियाँ ही पूरी नहीं भर पा रही हैं । और फिर यहाँ सीकर में क्या करने आ रहे हैं मोदी जी ?दिल्ली में तो संसद में 'अविश्वास प्रस्ताव' चल रहा है । 

बोला- वहाँ संसद में बैठकर करेंगे क्या ? बैठते ही हर कोई मुंह उठाकर पूछने लगेगा- मणिपुर क्यों नहीं गए ? कहाँ कहाँ जाएँ ? सारी दुनिया की तो जिम्मेदारी सिर पर आ गई। यहाँ तो 20-20 घंटे काम करना पड़ता है । नींद की कमी से आदमी का दिमाग वैसे ही खराब हुआ रहता है। खोपड़ी भन्नाई हुई रहती है । 

जाना था इम्फाल 

पहुँच गए फ्रांस 

बाबू, समझे क्या ? 

वैसे तो मोदी जी पास स्पष्ट बहुमत है, अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं होगा फिर भी इस बहाने विपक्ष वाले कुछ न कुछ गालियां निकाल ही लेंगे । वैसे ही अब तक 92 गालियां इकट्ठी हो गई हैं । आदमी कब तक बर्दाश्त करे । यह भी कोई बात हुई- 20-20 घंटे सेवा करो और बदले में गालियां खाओ । 

हमने कहा- तो क्या संसद का सामना करने से बचने के लिए ही तो सीकर में नहीं आ रहे ?

बोला- तू तो ऐसा कहेगा ही लेकिन मोदी जी को सारी सदिच्छाओं के बावजूद नेताओं ने तीन कृषि कानूनों के द्वारा किसानों का कल्याण नहीं करने दिया । वही बचा हुआ कल्याण करने सीकर आ रहे हैं । 

हमने कहा- तो इसका मतलब मोदी जी कल्याण किये बिना मानेंगे नहीं । कोई बात नहीं, ठीक है । अभी घर चल कर सोचते हैं चलने के  बारे में कुछ । लेकिन भीग गए तो ?

बोला - भीग क्यों जाएंगे, देखा नहीं, बारह तानी का यह छाता !

हमने कहा-  लेकिन इसका रंग तो काला है । तुझे याद नहीं, पाँच साल पहले भी जुलाई 2018 में मोदी जी राजस्थान आए थे तब उनकी सभा में काली पेंट, काली साड़ी, काला बुर्का ही क्या, काली बेल्ट तक भी वर्जित थी । मोदी जी श्वेत सात्विक विचारों और कर्मों वाले संत हैं । उन्हें यह तमोगुणी काला रंग अच्छा नहीं लगता । 

बोला- लेकिन मैंने तो बाजार में कहीं भगवा रंग का कोई छाता नहीं देखा ? 

हमने कहा- जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे कीचड़ पैठ । मध्यप्रदेश या उत्तर प्रदेश से पता कर लेता ।वहाँ गंगा और नर्मदा का जल भगवा हो चुका है । कहीं न मिले तो कांग्रेस से भाजपा में आए आसाम के नए नए देशभक्त बने और सबसे ज्यादा 'हाय हाय हिन्दुत्व' करने वाले,, कभी भी अपने किसी भी  कृत्य से न शर्माने वाले सरमा से मिल लेते ।  उनके वहाँ तो गायें तक भगवा दूध देने लगी हैं । 

बोला- कोई बात नहीं, छाता नहीं ले चलेंगे लेकिन अपनी  28 इंची छाती वाली इस श्याम वर्णी देह यष्टि क्या करूँ ? 

हमने कहा- चल तो सही ? यहाँ भी जरूर कोई वाशिंग मशीन लगी हुई होगी जो अजित पवार की तरह तुझे भी उजला बना देगी । और हाँ, यदि तुझे ठीक लगे तो 'बी जे पी' का कोई बैनर-वैनर भी बनाकर साथ ले चलें । शोभा बढ़ जाएगी और लोगों का ध्यान भी जाएगा । 

बोला- लेकिन अपन तो  कानूनी रूप से भाजपा के सदस्य नहीं हैं । 

हमने कहा- तो क्या ? हमारी 'बरामद जनता पार्टी' तो है ही । शॉर्ट फॉर्म 'बी जे पी' । 

बोला- यह ठीक रहेगा । 'इंडिया'  का 26 दलों का गठबंधन बन जाने के बाद भाजपा को भी संख्या बढ़ाने के लिए पार्टियों की बड़ी जरूरत है । भले ही 38 में से 25 का एक भी सांसद न हो । 



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