Jan 5, 2016

तोताराम की इनोवेटिव डिप्लोमेसी

  तोताराम की इनोवेटिव डिप्लोमेसी 

आज चाय पीने के बाद ग्यारह बजे के करीब तोताराम फिर आ गया  और कई देर बैठा रहा | कोई दो बजे तक गप्पें लगती रहीं तभी देखा कि उसकी पत्नी मैना भी आ गई |आते ही उस पर बरस पड़ी- यह क्या है, क्या भाई साहब से बातों से मन नहीं भरा  ? कुछ बातें बची हुई हों तो कल कर लेना,सुबह तो फिर चाय पीने तुम्हें आना ही है | |सब्ज़ी मुझे दो , मैं जाकर बनाती हूँ, जल्दी चले आओ |

तोताराम अचकचा गया, बोला- सब्ज़ी तो लाने गया ही नहीं, यहीं मास्टर के पास रुक गया |

हमने कहा- तोताराम, यह तो बहुत गैर ज़िम्मेदारी की बात है |पहले सब्ज़ी घर देकर आना चाहिए था |तुम्हारा यह बचपना कब जाएगा ?

बोला- यह बचपना नहीं है |यह इनोवेटिव डिप्लोमेसी है | 

हमने पूछा- भई, क्रिकेट और बस यात्रा आदि कई तरह की डिप्लोमेसियाँ सुनीं और उनके सुखद परिणाम भी देखे लेकिन यह नई डिप्लोमेसी कहाँ से आ गई ?

बोला- मुझे ज्यादा तो पता नहीं, लेकिन मोदी जी का रूस से काबुल होते हुए भारत आते समय रास्ते में बिना किसी योजना के नवाज़ शरीफ से मिलने के लिए अचानक पाकिस्तान में रुक जाना, राजनाथ सिंह जी के अनुसार इनोवेटिव डिप्लोमेसी है | सो सब्जी लेकर घर लौटते समय तेरे यहाँ रुक जाना मेरी इनोवेटिव डिप्लोमेसी है | बस, गलती यह हो गई कि मैं आते समय रुकने की बजाय जाते समय रुक गया |

मैना बोली- मोदी जी तो पूरी तरह देश सेवा को समर्पित हैं और फिर उनकी लाई सब्ज़ी का इंतजार करने वाला कौन बैठा है ?दो रोटी खानी है सो कहीं भी खा लेंगे |और अगर अमरीका प्रवास की तरह उपवास हुआ तो वह झंझट भी नहीं लेकिन आपकी सब्ज़ी का घर पर इंतज़ार करने वाले दस प्राणी हैं |आपको ऐसी इनोवेटिव डिप्लोमेसी की इजाज़त नहीं हो सकती |

हमने कहा- तोताराम, हमारे अनुसार तो मोदी जी का यह स्टाइल ऊर्जा बचाने और पर्यावरण फ्रेंडली कदम है | जाना तो था ही पाकिस्तान, रास्ते में ही तो था सो रुक गए |पेट्रोल की बचत हो गई |

चुप रहना तो तोताराम की फितरत नहीं |बोला-लेकिन इससे मोदी जी की यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले राष्ट्राध्यक्षों को तो टेंशन हो गया ना  | बेचारे चाय का पानी चढ़ा कर ही रखेंगे कि पता नहीं,कब मोदीजी- कहो मियाँ, कैसे हो, कहते हुए दरवाजा खटखटा दें | 

२८-१२-२०१५

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