May 23, 2021

पीयूष गोयल का मितव्ययिता सिद्धांत


पीयूष गोयल का मितव्ययिता सिद्धांत    

     

आते ही तोताराम ने कहा- लगता है आज सूरज पश्चिम से उगा है. 

हमने कहा- किसी महामानव ने दिन भर हरी झंडी नहीं दिखाई होगी. अंत में लाचार होकर सूरज को उल्टा चक्कर लगाकर पश्चिम से निकलना पड़ा होगा. 

बोला- मास्टर, तेरा भी ज़वाब नहीं, जहां बात को व्यंजना में लेना होता है वहाँ अभिधा में लेगा और जहां अभिधा की बात होगी वहाँ लक्षणा घुसेड़ देगा. मैं मुहावरे में बात कर रहा हूँ. 

हमने कहा- तो आज ऐसा क्या हो गया जो सूरज को पश्चिम में उगा दिया. क्या अपनी सात साल की भूलों के लिए माफ़ी मांग ली ? 

बोला- नहीं, आज मोदी जी ने अपने सबसे बड़े शत्रु की तारीफ़ की.

हमने कहा- मोदी जी तो पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं. वे तो सबको साथ लेकर सबका विकास करने वाले महान नेता हैं. वे किसी से क्यों शत्रुता रखेंगे. 

बोला- देखो, हर एक का कोई न कोई शत्रु होता है. शत्रु के बिना प्रयत्नों को गति और मन को उत्साह नहीं मिलता. संघ के शलाका-पुरुष माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर ने अपनी पुस्तक 'बंच ऑफ़ थॉट्स' में संघ के तीन शत्रु बताये हैं- मुसलमान, ईसाई और कम्यूनिस्ट. और आज मोदी जी ने इन तीनों की एक साथ प्रशंसा कर दी है. तो यह सूरज का पश्चिम में उगना हुआ कि नहीं ?

हमने उत्सुकता से पूछा- वह कैसे ?

बोला- केरल मुसलमान, ईसाई और कम्यूनिस्टों का समुच्चय है. तीनों ही वहाँ की राजनीति तय करते हैं. ऐसे केरल की मोदी जी ने प्रशंसा करते हुए कहा है कि वेक्सीन में १०% वेस्टेज की छूट दी गई है जब कि केरल ने कोई वेस्टेज नहीं किया. और मज़े की बात यह रही कि ७३ लाख वेक्सीन ऐसे मितव्ययिता से लगाते हुए  ८७ हजार अतिरिक्त लोगों को निबटा दिया.

हमने कहा- यह केरल की नहीं, प्रकारांतर से केंद्र में भाजपा के मंत्री पीयूष गोयल की तकनीक की प्रशंसा है जिन्होंने कहा था कि ऑक्सीजन मितव्ययिता से काम में ली जानी चाहिए. अपने यहाँ के अनुभवी, व्यापारी किस्म  के बुज़ुर्ग लोग कहा करते हैं- जब किसी फंक्शन में मिठाई कम पड़ने लग जाए तो सब्जी में मिर्च और पानी में बर्फ डलवा देनी चाहिए. मिर्च से मुंह जलेगा तो बर्फ का ठंडा पानी खूब पिया जाएगा और ऐसे ही पेट भर जाएगा.

जब गोयल जी ने कहा था तो लोग मज़ाक बनाने लगे थे लेकिन अब उसीकी दाद दे रहे हैं. यही बात अगर कोई विदेशी विशेषज्ञ कहता तो लोग उद्धृत करते. इसीको कहते हैं- घर का जोगी जोगना,आन गाँव का सिद्ध. 

बोला- तभी सरकार के टीका विशेषज्ञ जहां पहले कहते थे कि दूसरा टीका चार हफ्ते बाद लगवाओ, अब वे ४५ दिन बाद की बात करने लगे हैं. सुनने में तो यह भी आ रहा है कि दूसरा टीका छह महीने बाद लगेगा.  हो सकता है कल को कह दें कि अगर एक टीका लग गया है तो दूसरे को कोई ज़रूरत नहीं है. 

हमने कहा- इसी सिद्धांत के अनुसार ही तो पिछले लॉक डाउन में उत्तर प्रदेश में दस किलो गेहूँ की जगह साढ़े आठ किलो और एक किलो चने की जगह आठ सौ ग्राम चने में लाखों लोगों को निबटा दिया गया था. तभी तो कहा है- बाँटन वारे को लगे ज्यों मेहंदी को रंग. 

 

 


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

No comments:

Post a Comment