तोताराम की संवेदनशीलता
हमारी गली में कुछ ही कुत्ते यहाँ के स्थायी निवासी हैं । उन्हें यहाँ किसी SIR का खतरा नहीं है क्योंकि अभी उनको वोट देने का अधिकार नहीं मिला है । किसी पार्टी को उनके वोट कटवाकर या जुड़वाकर जीत का गणित बैठाने की जरूरत नहीं है । एक ही मकान में 00 नंबर लगाकर दो चार सौ कुत्तों के वोट दिखाने की जरूरत नहीं है । इसलिए यहाँ दूसरे मोहल्ले के कुत्तों के आने को 'घुसपैठ' नाम नहीं दिया जाता । हम जब जरूरत हो उनके साथ संवाददाता सम्मेलन कर लेते हैं । हमें उनके किसी भी प्रश्न से असहजता महसूस नहीं होती । वे जो चाहें प्रश्न पूछ सकते हैं । न तो हमारी मोहल्ले में 'घुसपैठ' रोकने की जिम्मेदारी है और न ही हम किसी अन्य मोहल्ले से चुनाव के समय बस और ट्रेन से उन्हें यहाँ फर्जी वोट डालने के लिए भेजते-बुलाते हैं । वे सहज भाव से आते-जाते रहते हैं जैसे सत्ताधारी पार्टी में अन्य पार्टियों के भ्रष्टाचारी नेता सहज ही शामिल हो जाते हैं ।
उनमें किसी तरह के सांप्रदायिक दंगे नहीं होते क्योंकि न तो वे कोई विशेष प्रकार के वस्त्र पहनते हैं जिनसे उन्हें पहचाना जा सके और न ही किसी खास तरह की दाढ़ी रखते और न ही किसी राष्ट्रवादी रंग का पटका डालते और न ही किसी देवता के नाम का किसी अन्य कुत्ते से जबरदस्ती नारा लगवाते और न ही किसी को वन्देमातरम गीत के छह छंद गाने के लिए बाध्य करते । कभी कभी किसी खाद्य पदार्थ को लेकर वैसे ही मामूली झड़प हो जाती है जैसे कि किसी पार्टी के भोज में स्वयंसेवक गुलाबजामुन या बादाम की बरफी के लिए धक्कामुक्की करने लगते हैं । ऐसे में हम उनके बीच ट्रम्प की तरह युद्ध विराम करवा देते हैं लेकिन सप्ताह में दो दो बार 'मैंने युद्ध विराम करवाया' कहकर हम कभी उन्हें ह्यूमिलिएट नहीं करते इसलिए वे हमारा सम्मान भी करते हैं ।
आज जैसे ही हमने तोताराम के सामने चाय का गिलास रखा एक कुत्ते ने उसे सूंघने का दुस्साहस किया । वह गिलास से मुँह टच कर दे उससे पहले ही हमने उसे 'हट साले' कहकर भगा दिया ।
हालाँकि हमने कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया था । कुत्ते को ही तो और वह भी उसके अनुचित काम के लिए डाँटा था । और फिर यह शब्द तो संसद में भी चलता है ।कुत्ता तलवे चाटने का विनम्र काम ही तो करता है ।इस शब्द का प्रयोग करने पर किसी 'अति माननीय' पर कोई कार्यवाही नहीं होती । बस, संसद की कार्यवाही में शामिल न करने का कठोर दंड दे दिया जाता है । लेकिन तोताराम उसी तरह भड़क उठा जैसे कि निर्वाचित होते ही, शपथ-ग्रहण से पहले ही कोई अति सनातनी विधायक जनसेवा के सनातन काम 'किसी अंडे की रेहड़ी को हटवाने' के लिए पहुँच जाता है ।
बोला- मास्टर, तुझे पता होना चाहिए आज तूने बंगाल का अपमान किया है । कोई भी सच्चा बंगाली इसे बर्दाश्त नहीं करेगा ।
हमने कहा- तोताराम, इस कुत्ते के पूर्वज तो अनेक पीढ़ियों से राजस्थान के सीकर शहर के इसी मोहल्ले में रहते आये हैं । न यह माछ-भात खाता है, न लुंगी पहनता है, न बांग्ला बोलता है । और अगर कुत्ते को भैरों जी से जोड़ता है तो वे तो बनारस के कोतवाल माने जाते हैं । नाराज भी होंगे तो बनारस के लोग होंगे । और फिर हो जाएँ नाराज हमें कौन सा वहाँ से चुनाव लड़ना है । लेकिन हमारी गली के इस कुत्ते का बंगाल से क्या संबंध है ? और अगर तुझे ज्यादा ही समस्या है तो हम इसे कुत्ते ही जगह 'श्वान' कह देते हैं जैसे आवारा सांड कहकर गौ भक्तों की नाराजगी से बचने के लिए समझदार पत्रकार उन्हें 'बेसहारा साँड' लिख देते हैं ।वैसे 'साँड' अपने आप में दादागीरी का पर्याय होता है । हालाँकि इससे उनके गर्व और गौरव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । वे उसी तरह राहगीरों को आतंकित और घायल करते रहते हैं ।
बोला- तुझे पता होना चाहिए कि दुर्गा के दो मुख्य कमांडो हैं दो भैरव, एक काला और एक गोरा । उनके साथ दो कुत्ते भी हैं- एक काला और एक सफेद । कुत्ते का अपमान प्रकारांतर से दुर्गा और दुर्गा मतलब बंगाल का अपमान है ।
हमने कहा- हमें कौनसा बंगाल से या कहीं और से चुनाव लड़ना है जो इस फालतू के पचड़े में पड़ेंगे ।
बोला- लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है उन्हें तो फ़र्क़ पड़ता है ना । वे तो गाली की गिनती की तरह इसे भी मुद्दा बना सकते हैं ना ।
हमने कहा- ये सब मोदी जी जैसे समर्पित और देश के सम्मान के लिए सतर्क 56 इंची छाती वालों की चिंता के विषय हैं । वैसे यह समय राष्ट्रपति की आड़ में खेल खेलने की बजाय 'अमेरिका द्वारा 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की आज्ञा देने' के समाचार से होने वाले देश के अपमान के प्रतिकार में खड़े होने का अधिक है ।
-रमेश जोशी
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