Mar 13, 2026

2026-03-12 क्षमा वीरस्य भूषणम्


2026-03-12 

क्षमा वीरस्य भूषणम् 

आज सुबह तोताराम नहीं आया । नहीं आया तो क्या हुआ ? यह कोई मोदी जी के 'मन की बात' तो है नहीं जिसके महिने में एक बार न होने से महिना पूरा नहीं होगा, पेंशन नहीं मिलेगी या पानी-बिजली का बिल नहीं आएगा । सो तोताराम के बिना भी हमारे सभी काम यथावत पूरे हुए । रात को आठ बजे जैसे ही सोने के लिए लेटे तो दूर जयपुर रोड़ से घड़घड की आवाज आने लगी । और शनैः शनैः तेज होने लगी । यह कर्ण कटु ध्वनि अगर जल्दी से नजदीक आकर गुजर जाती तो पीछा छूटता लेकिन नहीं । यह तो हिन्दुत्व के रक्षक प्रचंड भक्तों के डी जे की तरह पीछा ही नहीं छोड़ रही थी । लग रहा था कि यह ध्वनि सीधे सीधे नजदीक नहीं आ रही थी बल्कि टेढ़ी-मेढ़ी चलकर आ रही थी । कुछ देर बाद स्थिति साफ हुई कि कोई सड़क पर गैस का सिलेंडर लुढ़काता ला रहा है ।और लुढ़काने वाला सिलेंडर को सीधा नहीं लुढ़का पा रहा है । 

जब परेशान हो गए तो सोचा कि बाहर निकल कर इस व्यक्ति की सिलेंडर लुढ़काने में कुछ सहायता कर दें जिससे यह गुजर जाए तो हम भी सोएं । बाहर निकले तो देखा कि तोताराम सिलेंडर लुढ़काता ला रहा है । 

यह कौनसा समय है सिलेंडर लाने का ? 

पूछा- इस समय कौन सी गैस एजेंसी खुलती है ? और फिर तुझे क्या जरूरत थी एजेंसी से घर तक सिलेंडर लाने की ? अब सिलेंडर हमारे यहाँ रख दे । चाय-वाय और चर्चा कुछ नहीं; सीधे घर जा । सुबह इसे तेरे घर तक पहुँचाने की कोई व्यवस्था करेंगे ।  मोदी जी के राज में सब कुछ सुव्यवस्थित चल तो रहा है ।

बोला- आज दोपहर में खत्म हो गया था । फोन किया तो एजेंसी वाले ने उठाया नहीं । ऑनलाइन बुक करवाया तो पता चला कि सर्वर डाउन है । तो सोचा कि ईरान इजराइल के झगड़े में क्या पता क्या चक्कर पड़ जाए । सोचा खुद ही ले आऊँ लेकिन लाइन में लगे-लगे रात हो गई मगर काम नहीं हुआ । 

हमने कहा- सरकार के तो वक्तव्य आ रहे हैं कि कोई समस्या नहीं है तो फिर यह क्या है ?

बोला- सच बताऊँ मास्टर, सारे राष्ट्र प्रेम, हिन्दुत्व और मोदी भक्ति के बावजूद अब लगने लगा है कि काम मोदी जी के बस का है नहीं ।हर खाते में 15-15 लाख, हर साल दो करोड़ नौकरियां, नोट बंदी, कोरोना, तालाबंदी, जी एस टी, ऑपरेशन सिंदूर सब में पोल खुलती गई । अब तो इनकी हालत वह हो गई है जैसे किसी ने भेड़ के कान पर जूती रख दी हो । एक दम मीनकुमारी की तरह 'मैं चुप रहूँगी' । 




हमने कहा- अभी तो तू कुछ कोयले पड़े हैं वे ले जा । कल तू और मैना दोनों हमारे यहाँ खाना खा लेना । फिर देखते हैं । हो सकता है मोदी जी यूक्रेन और रूस के वार के समय की तरह  'पापा, मोदी जी ने वार रुकवा दी' जैसा कोई चमत्कार कर दें । 

बोला- ये सब मीडिया का हैड लाइन मनेजमेंट है और कुछ नहीं । अगर कुछ दम होता तो जब ट्रम्प ने 80 बार कहा कि मैंने सीजफायर करवाया तब कुछ बोलते या खामेनाई की हत्या के बाद या वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अपहरण पर कुछ बोलते लेकिन कुछ नहीं बोले । जुबान तालू से चिपक गई । अब तो जब ट्रम्प को झख मारकर वियतनाम की तरह ईरान से भागना पड़ेगा तभी कुछ रास्ता निकलेगा । 

हमने कहा- हमें तो तब भी कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि वह एपस्टीन फ़ाइल वाला भी कोई न कोई गहरा झंझट फँसा हुआ लगता है । रूस से अपने स्तर पर सस्ता तेल तक नहीं खरीद पा रहे हैं । उसके लिए भी ट्रम्प की परमीशन चाहिए । गजब दुर्गति, बेइज्जती और जग हँसाई हो रही है देश की ।अब तो इन्हें चाहिए कि हिम्मत करके देश को सारा सच बता दें । माफी माँग लें । सच बोलने से सब पाप धुल जाते हैं और इस देश की जनता बहुत दयालु है । माफ भी कर देगी और साथ भी देगी लेकिन कोई सच बोलने और माफी मांगने का साहस दिखाए तो सही । 

बोला- मास्टर, क्षमा माँगना और क्षमा करना दोनों ही वीरता के काम हैं । तभी कहा है- क्षमा वीरस्य भूषणम् । 

-रमेश जोशी 

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