Mar 23, 2026

2026-03-01 वेद-विज्ञान

2026-03-01


वेद-विज्ञान

आज तोताराम बहुत खुश था । ​





हमने पूछा- क्या बात है तोताराम, तू तो ऐसे खुश हो रहा है जैसे बुकिंग करवाते ही एक साथ दो सिलेंडर पुराने रेट में मिल गए हों या ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल खरीदने के लिए एक और महिने की स्वीकृति दे दी हो या फिर मोदी जी ने कोरोना काल में हजम किया 18 महिने का डीए रिलीज़् कर दिया हो ।

बोला- छोटी औकात, छोटी कल्पना । गरीब आदमी कल्पना भी करेगा तो दो की जगह तीन रोटी और रूखी की जगह चुपड़ी की । उसे पुंगनूर गाय के घी में मशरूम फ्राई की कल्पना करते हुए भी बैंक का वसूली का नोटिस आने का डर लगता है ।

मैं ऐसी छोटी कल्पना नहीं करता । आज तो सत्य साकार हो गया । हमारे सनातन और वैदिक ज्ञान को राष्ट्रीय मान्यता मिल गई है ।

हमने कहा- मोदी है तो मुमकिन है । आज तो उनका सितारा बुलंद है । दुनिया में कौन है जो उनकी बात टाल दे । फिर यह तो देश का एक छोटा सा बोर्ड या प्रवेश परीक्षा है । वे तो बिना डिग्री और प्रवेश परीक्षा के किसी को भी कुलपति बना दें, बिना किसी यूपीएससी परीक्षा के लेटरल एंट्री से सरकार में संयुक्त सचिव बना दें । फिर भी ज़रा बात को स्पष्ट तो कर जिससे हमें प्रतिक्रिया देने में सुविधा हो । वैसे ऐसे छोटे-मोटे शैक्षणिक मामलों में तो स्मृति ईरानी और सम्राट चौधरी भी प्रतिक्रिया दे सकते हैं ।

बोला-  महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड (MSRVVY) से वेद-विभूषण (12वीं समकक्ष) उत्तीर्ण छात्र अब एआईसीटीई के मानदंडों के अनुसार इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं जैसे जेईई मेन (JEE Main)आदि में बैठ सकते हैं और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।  

हमने कहा- इसके लिए किसी इंजीनीयरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने और डिग्री लेने की क्या जरूरत है ।देश में बहुत पहले से झाड़-फूँक,मंत्र-तंत्र, गोबर गोमूत्र से सब बीमारियों का इलाज लोग कर ही रहे हैं ।देखा नहीं कोरोना काल में एक संदिग्ध ज्ञान और डिग्री वाले वैदिक ज्ञानी बाबा के काढ़े का देश के स्वास्थ्य मंत्री लोकार्पण कर रहे थे । और तो और खुद मोदी जी ने ऐसे बहुत से प्राचीन भारतीय तथाकथित वेद ज्ञान-विज्ञान के नुस्खों का विज्ञान-भवन से उद्घोष किया है ।

बोला- तुझे पता होना चाहिए कि जब ये यूरोप के लोग भारत में आये थे तो इन्होंने हमारे देश का आर्थिक शोषण ही नहीं किया बल्कि हमारे वेदों का सारा ज्ञान भी निकालकर ले गए और फिर अपने वहाँ उसके आधार पर नए नए आविष्कार किये ।

हमने कहा- मदरसों और संस्कृत पाठशालाओं में केवल रटाया जाता है । प्रश्न, जिज्ञासा, तर्क और प्रयोग का वहाँ कोई विधान नहीं है । और इस प्रकार की शिक्षा से भक्त बनाए जा सकते हैं वैज्ञानिक नहीं । वैसे तो आजकल इंजीनीयरिंग मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटरों में बच्चों को केवल रटाया ही जाता है । तभी तो हमारे यहाँ सी वी रामन के बाद कोई नोबल नहीं प्राप्त कर सका ।

हमारे चाचाजी संस्कृत पाठशाला में ही पढ़े थे । एक बार आजादी से पहले संस्कृत पाठशालाओं में विज्ञान का प्रवेश करवाने के लिए सामान्य विज्ञान की एक छोटी सी पुस्तक शामिल की गई ।जिसे बच्चों ने रट लिया और परीक्षा में प्रश्नों को देखे बिना ही 'बच्चो तुमने रेल का इंजन तो देखा ही होगा । हमारा शरीर भी एक इंजन के समान ही होता है......।' से शुरु करके जितना लिख सकते थे लिख आये । ऐसे में विज्ञान के क्षेत्र में क्या करेंगे ।

बोला- तो बता हमारे यहाँ आकाशवाणी होती थी कि नहीं ? क्या था वह ? आज का रेडियो । संजय दूर से ही धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आँखों देखा हाल सुना रहा था । क्या था वह । टेलीविजन का लाइव टेलेकास्ट । राम का बाण लक्ष्य बेधकर वापिस उनके तरकश में आ जाता था वह गाइडेड मिसाइल ही तो था । हनुमान जी जब चाहे लघु और विराट रूप धरण कर लेते थे । है किसी देश के पास यह टेकनॉलॉजी ? ऋषि मुनि किसी को भी श्राप से भस्म कर देते थे । होलिका के पास फायर प्रूफ चुनरी थी ।शिव बहुत बड़े पशु चिकित्सक और सर्जन थे । उनके लिए गणेश वाली प्लास्टिक सर्जरी और अपने ससुर को बकरे का सिर लगा देना तो मामूली बात थी ।

हमने कहा- लेकिन आज की आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस ?

बोला- विष्णु द्वारा सुंदरी का वेश धारण करके एक ही बर्तन से सुरों और असुरों को शराब और अमृत पिलाने का धोखा करना आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस नहीं तो क्या था ? और तो और आजकल जिस ड्रोन का हल्ला मचा हुआ है उसका आविष्कार तो हमारे द्रोणाचार्य ने किया था । अंग्रेजी में ड्रोन और द्रोण एक ही तरह इसीलिए तो लिखा जाता है ।

हमने कहा- तो फिर मोदी जी को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में इस बात का मुकदमा कर देना चाहिए जो जो देश ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं वे बैक डेट से भारत को उसकी रॉयल्टी दें । ट्रम्प, नेतन याहू, चीन, रूस सबकी हवा खिसक जाएगी । भूल जाएंगे टेरिफ़ वार ।

बोला- मास्टर, तेरी ऊपर की मंजिल अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है । तेरा ज्ञान भी राम भद्राचार्य और सुधांशु त्रिवेदी की तरह अपार है । अब चुपचाप दिल्ली जाकर राष्ट्रहित में मोदी जी को यह महत्वपूर्ण जानकारी दे ही दे । अगर तेरे जैसा कोई ज्ञानी दिल्ली वाली अंतर्राष्ट्रीय ए आई सम्मिट के समय मोदी जी को यह ज्ञान दे देता तो गलघोंटिया वाले ड्रोन कुत्ते को लेकर चीन के आगे शर्मिंदा नहीं होना पड़ता । खैर दिल्ली जा तो सही । क्या पता तुझे किसी इंजीनीयरिंग विश्व विद्यालय का उपकुलपति ही बना दें । ऐसे ज्ञानियों की इस समय देश के शिक्षा संस्थानों में बहुत जरूरत है ।

-रमेश जोशी


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