Jun 21, 2026

21-06-2026 कॉकरोचों का धरना


21-06-2026 

कॉकरोचों का धरना  


जैसे ही तोताराम बैठने को हुआ हमने उसे आज की ब्रेकिंग न्यूज दी- कॉकरोचों का धरना अवैध घोषित कर दिया गया है । 

बोला- यह क्या कोई समाचार है ? कुछ कॉमन सेंस से काम लिया कर । कॉकरोच इस सृष्टि के सबसे पुराने जीवित प्राणी हैं । उनके इस सनातन का सम्मान करते हुए घर की दीवारों की दरारों, गटर, रसोई के सीलन भरे कोनों में उनके आवास और सब प्रकार का बचा-खुचा खाना खा सकने की निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है । अब कॉकरोच भी धरना देने लगे । इसीलिए नीति आयोग के अमिताभ कान्त ने कहा था कि भारत में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है । मदर ऑफ डेमोक्रेसी का मतलब यह भी नहीं है कि कॉकरोच भी धरना देने लगें । कल को मक्खी, मच्छर, दीमक भी धरना देने लगेंगे । लगता है अब इनका मुकाबला करने के लिए एक नई सी जे पी मतलब ‘चप्पल जनता पार्टी’ बनानी पड़ेगी जो इन्हें देखते ही चप्पल फटकारकर ठिकाने लगा देगी ।    

हमने कहा-  हम वास्तविक कॉकरोचों की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो परीक्षा व्यवस्था से दुखी और बेकार छात्रों की बात कर रहे हैं जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने कॉकरोच बताया था, और जिन्होंने अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई है । वे जंतर मंतर पर थाली और चम्मच बजाय कर प्रदर्शन कर रहे थे । 

बोला- वैसे तो जिस तरह से ये अन्याय को मूर्खतापूर्ण और कायराना तरीके से बर्दाश्त करते हैं उससे तो ये कॉकरोच से ज्यादा कुछ लगते भी नहीं । फिर भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब बातों की आजादी है लेकिन उसका एक शिष्टाचार होता है । कोरोना के समय ताली थाली बजवाई थी कि नहीं । तब बजा लेते । अब आगे भी ऐसे मौके आएंगे तब बजा लेना और पोस्ट कर देना ताली थाली बजाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की तरह अपना फ़ोटो । अगर कुछ और हल्ला  मचाने का मन है तो बना लें ‘डी जे पी’ मतलब डिस्क जॉकी पार्टी और मस्जिदों के सामने गाएं बजायें हनुमान चालीसा । कोई कुछ नहीं कहेगा बल्कि प्रोमोजिंग युवा नेता बनने का रास्ता भी साफ हो सकता है जैसे जयपुर में दिपके को थप्पड़ मारने वाला चर्चित हो गया और तत्काल जमानत भी मिल गई । 

हमने कहा- जंतर मंतर तो वैसे भी प्रायः प्रदर्शन करने का स्थान रहा है जैसे रामलीला मैदान या लंदन का हाइड पार्क । भाजपा और रामदेव ने भी तो अन्ना हजारे की आड़ में रामलीला मैदान पर कब्जा जमा लिया था । और अब देखा नहीं संस्कारी और राष्ट्रवादी लोगों का शासन आने के बाद कोलकाता का रेड रोड़ सात दिन के लिए योग के चक्कर में बंद कर दिया कि नहीं । जबकि कुछ दिन पहले नमाज के लिए दो घंटे के लिए भी मना कर दिया गया था । 

बोला- अन्ना का आंदोलन भ्रष्टाचार के विरुद्ध था और योग एक अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम है । नमाज तो एक कट्टर धार्मिक कार्यक्रम है जिससे आम जनता को परेशानी होती है । 

हमने कहा- यह भी अजीब बात है कि मुसलमानों और ईसाइयों के कार्यक्रम तो धार्मिक होते हैं और कोई न कोई जिहाद होते हैं । इसलिए इन्हें अपने घरों में मनाने में भी सोचना पड़ता है और हिंदुओं के होली, दिवाली, दुर्गा पूजा और पथ संचलन और भगवा रैली आदि सब कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं । इसलिए इन्हें स्कूलों में भी मनाया जाना चाहिए ।  क्या मुसलमानों और ईसाइयों की कोई संस्कृति नहीं होती ? 

हमें तो याद है कि हम स्कूलों में बच्चों के साथ सभी धर्मों के त्योहार बड़े सद्भाव और उत्साह से मनाते थे । 

बोला- तभी तो भारत में हिन्दू धर्म खतरे में पड़ गया । अब देखो मोदी जी, योगी जी, धामी जी आदि लगे तो हुए हैं सब काम छोड़कर । जब धर्म बचेगा तभी तो देश बचेगा । 

हमने कहा- लेकिन यह कैसा धर्म है जहाँ बिना किसी महमूद ग़ज़नवी के बिना ही राम मंदिर में करोड़ों का गबन हो गया । 

बोला- चुप, जो राम को बदनाम करने की कोशिश की तो । योगी जी ने कहा है कि जब तक फैसला न हो जाए तब तक इस बारे में कोई बात करके राम को बदनाम न किया जाए । 

हमने कहा- अजीब तमाशा और तर्क है । बदनामी चोर की होती है या जिसके घर चोरी हुई है उसकी ? कहीं इस तरह चोरों को बचाने का इरादा तो नहीं है ? सोमनाथ पर डाके से शिव बदनाम होते हैं या महमूद ग़जनवी ? हाँ, उस समय के देश-समाज में रक्षकों की कायरता जरूर रेखांकित होती है । 



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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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