Jun 5, 2026

05-06-2026 ध्यान रखना मास्टर !


05-06-2026 


ध्यान रखना मास्टर !




हमारे घर का गेट सामान्य गेट है । न बहुत वज़नी और न ही सजावटी । न कहीं कोई नेमप्लेट और न ही वर्तमान या भूतपूर्व पद का उल्लेख । हालाँकि घर में कई अधिकारी, डॉक्टर, प्रिंसिपल आदि हैं फिर भी पता नहीं क्यों हमें यह भोंडा प्रदर्शन लगता है ।मोहल्ले वाले जानते हैं कि यहाँ मास्टर जी रहते हैं और कोई रजिस्ट्री या डिलीवरी वाला आता है तो उसके पास मोबाइल नंबर होता ही है । फोन कर लेता है । कौन तीन मिनट के लोकल कॉल का एक रुपया लगता है । हाँ, एक तरफ पानी का बिल देने वाले ने एक नंबर अटका रखा है और अब जनगणना वाले ने उसी के पास एक मकान नंबर जैसा कुछ लिख रखा है ।  


डिग्री और पद मनुष्य की बहुत बड़ी कुंठा होती है ।वह उसे प्रदर्शित किया बिना रह नहीं पाता । वर्तमान नहीं तो भूतपूर्व ही सही पद तो है । शुरू में भूतपूर्व पूरा लिखवाते हैं । फिर केवल भू. पू. किया और उसके बाद केवल पू. और बाद में तो वह संकोच भी गायब । पू. को भी थोड़ा घिसवा देते हैं । अपना परिचय ऐसे देते हैं जैसे कि अब भी उसी पद पर हैं । वैसे आज से कोई पचास साल पहले पोरबंदर में हमारे साथ अंग्रेजी के एक एंग्लो अमेरिकन अध्यापक हुआ करते थे चार्ल्स मैसी । मेरठ विश्वविद्यालय से पीएचडी भी थे ।  एक दिन हमने वैसे ही सहज भाव से कह दिया और मैसी भाई क्या हाल हैं ?

मैसी साहब तो बिफर पड़े- नो मैसी भाई मिस्टर जोशी,  कॉल मी डॉक्टर मैसी ।


वैसे आज भी कुछ ऐसे संकोची और विनम्र संत होते हैं जो लोगों की लाख कोशिशों के बावजूद न तो डिग्री दिखाते हैं बल्कि ऐसे और कहते हैं कि मैं पढ़-वढा कुछ नहीं हूँ ।  


तो प्रिय पाठकगण, चाय का गिलास थामे थामे तोताराम अचानक घर के गेट के पिलर के पास गया और लौट आया । दो घूंट लेने के बाद फिर वही प्रक्रिया ।

 

हमने पूछा- क्या बात है तू तो गेट के चक्कर ऐसे लगा रहा है जैसे मोदी जी चुनाव के समय बंगाल के । कभी झालमुड़ी खा रहे हैं तो कभी यमुना में छठ स्नान तक का साहस न जुटा पाने वाले, हुगली में नौका विहार कर रहे हैं भले ही लोग उसे नौका विहार, मौका विहार या धोखा विहार जाने क्या क्या कह रहे हैं । 


बोला- मास्टर, समय बहुत खराब है । सावधानी हटी और दुर्घटना घटी । पता नहीं, कब तेरे मकान के इस पिलर पर कोई अपना नाम लिख जाए और चार दिन बाद दावा करने लग जाए कि यह मकान मेरा है । देखा नहीं, पिछले कुछ दिनों में इलाहाबाद का प्रयाग हो गया, कलकत्ता का कोलकाता हो गया हालाँकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद हाईकोर्ट और कलकत्ता विश्वविद्यालय नाम अभी तक चल रहे हैं ।एक मिनट में सरदार पटेल स्टेडियम नरेंद्र मोदी हो गया । किंग्स वे राजपथ, रेसकोर्स लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ । अब बस मोदी धाम,मोदी-मंदिर बाकी रह गए हैं जहाँ लोग अपने अधिकारों के तहत नही बल्कि आरती, जागरण, प्रसाद चढ़ाने के लिए जाया करेंगे । 


हमने कहा- किसी के लिखने से क्या होता है ? झुंझुनू में एक बनिया परिवार था जलेबी चोर । उनके किसी पूर्वज ने लालच में खाने के साथ साथ दो चार जलेबी जेब में भी रख ली होगी और मजाक मजाक में लोगों ने तलाशी भी ले ली होगी तो नाम पद गया ‘जलेबीचोर’ । लोग सीधे सरल हुआ करते थे सो नाम चल निकला । अब कहीं उनके वंशजों को खयाल आया तो सरनेम बदल लिया ‘अग्रवाल’ । फिर भी पुराने लोग जब पूछने आते हैं तो वही ‘जलेबीचोर’ पूछते हैं । बहुत देर बाद बात इस पर स्पष्ट होती ही कि जी हमारा मतलब उन्हीं से है जिन्हें पहले जलेबीचोर कहते थे ।

 

बोला- अब वह बात नहीं है । अब तो किसी बंदोपाध्याय ने बनर्जी, बसु ने बासु, घोष ने घोषाल, मुखोपाध्याय ने मुखर्जी बता दिया तो वोटर लिस्ट से नाम कट जाता है । तेरे तीनों बच्चों के हायर सेकेंडरी के सर्टिफिकेट में पोर्टब्लेयर नाम लिखा हुआ है लेकिन अब कहाँ है पोर्टब्लेयर ? जल्दी से अमित शाह जी से मिलकर श्री विजयपुरम करवा ले । अगर उन्हें नकली प्रमाण पत्र के नाम पर परेशान किया गया तो मुश्किल हो जाएगी। और तू भी अपना रीजनल कॉलेज ऑफ एज्यूकेशन, भोपाल से अपनी बीएड की डिग्री में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की जगह ‘माँ वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करवा ले । 


याद रख तुझे डिग्री दिखाने से कोई हाई कोर्ट छूट देने वाला नहीं है । 


हमने कहा- देखेंगे । अभी क्या कोई कल ही चेंज हुआ जा रहा है ?


बोला- यह राम भक्तों का रामराज्य है और देश ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’। जैसे एक धोबी ने अपने घर में सीता के बारे में कुछ कहा लेकिन पता लगते ही राम ने सीता के वनवास का निर्णय ले लिया वैसे ही अगर किसी काँवड़िए, गौरक्षक और स्वयंसेवक ने उलटे मन से भी सुझाव दे दिया तो ऐसे सुझावों को लागू करने के लिए भले ही विपक्ष को बाहर निकालना पड़े लेकिन काम होगा फटाफट । बचाव में ही सुरक्षा है । जो भी आवश्यक कार्यवाही हो, शुरू कर ही दे ।


हमने कहा- लेकिन बरकतुल्लाह तो बहुत बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे । सुभाष से भी पहले राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में काबुल में निर्वासन में बनी पहली भारत सरकार में वे प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए थे । 


बोला- वह सब तो ठीक है लेकिन थे तो मुसलमान । अब बता मुसलमान कैसे भारतभक्त हो सकता है ? भले ही वह जस्टिस सय्यद आगा हुसैन,अशफाकुल्ला या अब्दुल हमीद या सोफिया कुरैशी या दीपक मुहम्मद कोई भी हो । वैसे ही जैसे कोई भी हिन्दू देशद्रोही नहीं हो सकता चाहे वह सर शोभासिंह, सर शादीलाल, हंसराज वोहरा, फणीन्द्र नाथ, जय गोपाल, मनमोहन, ललित कुमार ही क्यों न हो ।     



-रमेश जोशी    



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