Sep 6, 2026

07-06-2026 रोशनी का धर्म


07-06-2026 


रोशनी का धर्म




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मौसम की भविष्यवाणी  और नेताओं के आश्वासन प्रायः उलटे पड़ते हैं इसलिए हम इन्हें बहुत गंभीरता से नहीं लेते । कभी की संयोग बैठ जाए तो बात और है । आज शाम को तेज धूलभरी आँधी की भविष्यवाणी थी । आसमान में कुछ मटमैले बादल से छाए जरूर लेकिन हम सामान्य रूप से शाम को छह बजे आने वाले पानी के लिए तैयारी करते रहे । तभी अचानक आंधी के रूपक बन गए और बाजार से लौटते तोताराम ने प्रवेश किया ।


बोला- चल, यहाँ बाहर क्या कर रहा है ? अंदर बैठते हैं । अभी लाइट जाने वाली है ऐसे में पानी का आना न आना बराबर । मोटर के बिना तो पानी चढ़ना नहीं ।


कमरे में तो और भी कम रोशनी । हमने पूछा- लाइट जला दें ?


बोला- कोई हिन्दू लाइट हो तो जला ले । नहीं तो ऐसे ही ठीक है ।


हमने कहा- तोताराम, सांप्रदायिक राजनीति ने तुम्हारा दिमाग खराब कर दिया है । लाइट भी क्या कोई हिन्दू-मुसलमान होती है ? अरे मुंह ही तो छुपाना है फिर चाहे हिजाब हो या घूँघट । तन ही तो ढँकते हैं फिर चाहे लिबास हो या परिधान ? क्या किसी रोशनी, पानी, अनाज पर किसी का नाम लिखा होता है । जिसके मुँह पड़ जाए उसीके के नाम का भोजन । तभी तो कहा गया है- दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम ।


बोला- नहीं, दाने दाने पर देने वाले का नाम लिखा होता है जैसे पाँच किलो अनाज के थैले पर मोदी जी या योगी जी का फ़ोटो ।


हमने कहा- क्या तुझे पता चलता है कि जिस घी से प्रसाद बनता है उस गए का मालिक कौन है या जिस गन्ने से चीनी बनी है वह हिन्दू के खेत का है या मुसलमान के खेत का ? नल में आने वाला पानी किस धर्म का होता है ?


बोला- मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता लेकिन केरल में जो हुआ उसके बाद हमें भी इस दृष्टि से सोचना पड़ेगा । धर्म की रक्षा का प्रश्न है ।


हमने पूछा- केरल में क्या हुआ ?


बोला- हरिता इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की केरल राज्य समिति के तहत काम करने वाली एक महिला छात्र विंग है । इसकी स्थापना 2012 में हुई थी और फातिमा तहिलिया इसकी संस्थापक राज्य अध्यक्ष और संस्थापक महासचिव थीं । यह संगठन मुस्लिम समुदाय की छात्राओं के बीच महिला सशक्तिकरण, शिक्षा को बढ़ावा देने और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए बनाया गया था ।अब वह विधायक चुनी गई है । उसने ने पिछले हफ़्ते एक स्थानीय रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान 'निलाविलक्कु' (पारंपरिक तेल का दीपक) जलाया था। इस पर केरल के सुन्नी धार्मिक संगठन समस्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर कोई मुसलमान गैर-मुसलमानों की उन मान्यताओं के आधार पर ऐसा काम करता है जो इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ हैं, तो ऐसा करने से वह व्यक्ति इस्लाम से बाहर हो सकता है । इसलिए हमें भी तो हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा ।


हमने कहा- ये सब धर्म का धंधा करने वालों की मिलीभगत और नूरा कुश्ती है जिसके चक्कर में अंधभक्त लड़ते भिड़ते रहते हैं और ये मजे करते रहते हैं । अंग्रेजों के साथ दोनों का गठबंधन था । न धर्मांध हिन्दू नेता लड़े और न ही मुस्लिम नेता । वे तो आपस में मिलकर सत्ता और उसकी कृपा का मज़ा ले रहे थे । लड़े तो उदार भगत सिंह, अशफाक, चंद्र शेखर, सुभाष आदि ।


अमरूद इलाहाबादी होता है, साड़ी बनारसी न कि हिन्दू मुसलमान । संतरा नागपुरी होता है संघी या अम्बेडकरवादी नहीं ।




 



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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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