13-07-2026
ज्ञान पात्र
तोताराम ने आते ही जुमला फेंका- क्या चंपत होने का इरादा है ?
हमने कहा- हमने कौनसा नीरव मोदी या मेहुल चौकसे की तरह बैंक से कोई बड़ा लोन ले रखा है जो चंपत हो जाएंगे । या कौन सुवेन्दु अधिकारी की तरह मोदी जी के देखते हुए रिश्वत के नोट खीसे में रखे हैं जो दल बदल लेंगे । हम तो पिछली शताब्दी से इसी बरामदे में बैठे हैं और आजीवन इसी बरामदे में बैठेंगे अगर अयोध्या की तरह सड़क चौड़ीकारण के चक्कर में बुलडोजर नहीं चल गया तो । लेकिन तेरे दिमाग में यह बात आई कैसे ?
बोला- बरामदे के कोने में रखे इस दान पात्र को देखकर । आजकल दानपात्र रखे ही चोरी करके चंपत होने के लिए जाते हैं ।
हमने कहा- यह सब आदमी की पहुँच और ताल्लुकात पर निर्भर करता है । जिन्होंने हजारों करोड़ का चन्दा चोरी कर लिया उनका क्या बिगड़ गया । न कोई एफआईआर, न कोई हिरासत । कुछ दिन मीडिया और पदों से दूर रहकर फिर कहीं और दुकान लगाकर बैठ जाएंगे । लेकिन ध्यान से देख । यह दान पात्र नहीँ है ।
बोला- तो फिर क्या है ?
हमने कहा- यह एक पात्र है जिसमें कुछ भी दान किया या रखा जा सकता है जैसे मसालदान, कूड़ादान, पीकदान, उगालदान, कलमदान, रोशनदान, गुलदान, इत्रदान या सुरमेदानी, चूहेदानी आदि । लेकिन यह इनमें कुछ भी नहीं है । इसमें न कूड़ा डालना है, न पीक । यह ज्ञानदान है । जिसे भी ज्ञान का अजीर्ण हो वह हमारे कानों में ज्ञान न ठूँसे । जब जितना मन हो इसमें पात्र में डाल दे और अगर भरा हुआ हो तो कृपा करके मंडी वाले प्लॉट के कोने पर कचरे में खाली भी कर आए ।
बोला- लेकिन पात्र की शक्ल तो कचरा पात्र जैसी है ।
हमने कहा- आजकल ज्ञान से बड़ा कचरा और है ही क्या । जिसे देखो ज्ञान देने में ही लगा हुआ है, आचरण का कोई उपक्रम नहीं । कोई रेडियो पर, कोई टीवी पर, कोई रैलियों-जुलूसों में, कोई लाल किले से । अपनी अपनी हैसियत और मौका । देश के सबसे बड़े तथाकथित सांस्कृतिक संगठन और उनके पुरोधा बातें तो सभी धर्मों, समाजों की एकता की करते है लेकिन काम सारे लड़ाने भिड़ाने के करते हैं । और कुछ नहीं तो लोगों को कपड़ों से पहचानने वाले या गोली मारने वाले बयानों की ही निंदा कर दें । लेकिन नहीं ।
चोर की दाढ़ी में तिनका ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
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