20-04-2026
आप प्रधानमंत्री हो क्या ?
आज तोताराम कोई शाम 4 बजे भी आ टपका ।
हमने कहा- हमारे पास दिन में दो दो बार चाय पिलाने का बजट नहीं है ।
बोला- इस 42 डिग्री तापमान में मुझे चाय पीनी भी नहीं है । भाभी ने जरूर बेल का शर्बत बनाया होगा । लेकिन वह भी नहीं । अब तो बैंक जा रहा हूँ । कई महिने हो गए पास बुक ही पूरी करवा लाते हैं ।आ चलें ।
मन तो नहीं था लेकिन कुछ कहते नहीं बना । वैसे ही जैसे भले ही ट्रम्प दिन में चार बार कह दे कि मैंने युद्ध विराम करवाया लेकिन मोदी जी दोस्ती के लिहाज में यह नहीं कह पाते कि यह गलत है । वैसे ही हम भी मन न होते भी तोताराम के साथ चल पड़े ।
बैंक हमारे घर से ज़्यादा दूर नहीं है । जयपुर रोड़ हमारे घर से कोई 150-200 मीटर है और उस पर चढ़ते ही बाईं तरफ मुड़कर पूर्व दिशा में चलने पर कोई 50 मीटर चलकर इंडिस्ट्रीयल एरिया के मोड़ पर बैंक है । रोड़ पर चढ़ते ही बाई तरफ के कोने पर कई रेहड़ी ठेले वाले खड़े होते हैं जो गोलगप्पे, चाट पापड़ी, दही, भल्ले और झालमुड़ी बेचते हैं । रात के कोई नौ बजे तक अच्छी भीड़ और रौनक रहती है ।उनकी दुकानदारी शाम चार बजे से ही शुरू होती है ।
जैसे ही मोड़ पर पहुँचे तोताराम ने कहा- मास्टर, झालमुड़ी खाते हैं ।
हमने कहा- यह क्या मोदी जी की तरह कहीं भी दुकान देखी और बच्चों की तरह मचल गए झालमुड़ी खाने के लिए ।उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना है । 2047 में देश को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में ‘मेक अमरीका ग्रेट अगैन’ (मेगा) की तरह ‘मेक इंडिया ग्रेट अगैन’ (मीगा) बनाना है ।
बोला- उसकी तू चिंता मत कर । अगर छाती 56 इंच की है तो पेट भी लक्कड़ हजम पत्थर हजम होगा । 35 साल भिक्षा माँग कर खाया है तो उन्हें कुछ नहीं होगा । भिखारी का न खाने समय होता है और न ही कोई मीनू फिक्स होता है । किसी माई ने जो भी ठंडा-बासी दे दिया सो खा लिया ।
हमने कहा- इस उम्र में हम ठेले पर बिकने वाली चीजें नहीं खाना चाहते । जब तिरुपति के प्रसाद में चर्बी की मिलावट हो सकती है, जिस देश में भक्त भगवान तक को कुछ नहीं समझते वहाँ इन ठेले रेहड़ी वालों से ज़्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए । वैसे भी जब हम पहली बार पोर्टब्लेयर गए थे तो शिप मिस हो जाने के कारण हमें 15 दिन तक केन्द्रीय विद्यालय, फोर्ट विलियम में रहना पड़ा था । वहाँ अंदर की एक बाजार भी था वहीं हम खाना और नाश्ता कर लेते थे ।जिधर जाओ वही मछली और सरसों के तेल की गंध । बंगाल में मछली और चावल का खाना है । वहाँ सब्जी-मछली पकाने में सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता । हमें उसकी आदत नहीं । हम तो गुजरात की तरह मूँगफली का तेल काम में लेते हैं । वहीं से हमें सरसों के तेल की गंध बड़ी अजीब लगती है । और फिर झालमुड़ी में तो सरसों का तेल कच्चा ही डालते हैं ।
तुझे खाना है तो खा ले ।
तोताराम ने एक झालमुड़ी बनवाई और अच्छी तरह से तीखी बनवा कर खाई । खाने के बाद दस का एक नोट निकाल कर दिया तो ठेलेवाले बड़ी अजीब निगाहों से तोताराम को देखा और बोला- मास्टर जी, दस रुपए में एक झालमुड़ी वाला ज़माना गया ।पच्चीस रुपए निकालिए ।
बोला- क्यों ? कल सारे देश ने देखा नहीं कि एक अप्रत्याशित रूप से व्यवस्थित,स्थाई, विभिन्न सामानों से ठसाठस भरी, साफ सुथरी दुकान वाले एक बिहारी मुड़ी वाले ने बंगाल में मोदी जी को दस रुपए में एक मुड़ी खिलाई थी। एक दिन में अढ़ाई गुणा महंगाई बढ़ गई क्या ?
रेहड़ी वाला भी अकड़ गया, बोला- मास्टर जी, आप कोई प्रधानमंत्री हो क्या ? जो दस रुपये में झालमुड़ी खिला दूँ इस आशा में कि आप मुझे कोई एयर पोर्ट दिलवा दोगे । अगर प्यार से कहते तो बात और थी लेकिन आप तो नेतागीरी लगा रहे हैं तो सुन लीजिए कि जब तक 25 रुपए नहीं आएंगे तब तक आप यहीं बैठे रहिए ।
हमने भी बीच में बोलना उचित नहीं समझा और चुपचाप उठकर इंडिस्ट्रीयल एरिया के सामने वाले शर्माजी की दुकान से लाकर उस झालमुड़ी वाले को दिए और तोताराम को बंधकी से छुड़वाकर लाए ।
हमने कहा- तोताराम,अगर नीयत खराब हो तो बड़ा सोचो। अगर हजार दो हजार करोड़ रुपये बैंक से उधार लेकर भागते तो सरकारें तुम्हें सेफ पेसेज उपलब्ध करवा देतीं लेकिन 15 रुपए में कोई दया दिखाने नहीं आएगा । जैसे कि बैंक में सामान्य लोगों का मिनिमम बैलेंस से दो रुपये कम होने पर लेकर जुर्माना लग जाता है ।लेकिन नीरव मोदी विदेश में मजे कर रहा है ।
अब घर चल, हो गई पासबुक पूरी । क्यों ईरान युद्ध में भारत की तरह हमारा तमाशा बनवा रहा है ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
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