11-04-2026
राजा भोज और गंगू तेली
आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया- हाथ-पैर धोकर, साफ-सुथरे आसन पर शांत और एकाग्रचित्त होकर बैठ ।
हमने कहा- आसन क्या, कहे तो सिंहासन पर बैठ जाएँ लेकिन स्वच्छ, शुद्ध और पवित्र होकर तो तुझे बैठना है । और अगर दो दिन से उपवास किया हुआ है तो और भी बेहतर ।
बोला- यह मुँह और एक लाख रुपए किलो का मशरूम । तू क्या कोई मोदी जी है जो मैं अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन की तरह तेरा इंटरव्यू लेने के लिए सही मानसिकता और आध्यात्मिक स्तर पर बात करने के लिए 45 घंटे उपवास करके आऊँगा ।
हमने कहा- तो फिर हमें क्यों पूजा की इस मुद्रा में बैठाना चाहता है ?
बोला- तुझे अलाय,बलाय, भावी अनिष्ट और एफ आई आर से बचाने के लिए ।
हमने पूछा- हम कौन सा कोई कुकर्म कर रहे हैं जो अनिष्ट की संभावना हो सकती है ।
बोला- एक तो तू बात बात में ‘ही-ही,खी-खी’ करता रहता है दूसरे व्यंग्य लिखता है ।
हमने कहा- तो व्यंग्य लिखना क्या कोई अपराध है ?
बोला- हाँ, है । व्यंग्य के अतिरक्त चाहे बलात्कार, गबन, घपला कुछ भी कर ले । उनसे बचने के रास्ते हैं । लेकिन व्यंग्य में तो सीधे सीधे गैरजमानती गिरफ़्तारी होती है । और केस और फैसले की कोई अवधि तय नहीं ।
हमने पूछा- तो तू कैसे हमें बचा लेगा ?
बोला- वही तो उपक्रम करने के लिए तुझे आसन बिछकर बैठने को कह रहा हूँ ।
हमने पूछा- उससे क्या होगा ?
बोला- आज शनिवार है और मैं तुझे शनि महाराज की कथा सुनाऊँगा जिससे तेरा अनिष्ट निवारण होगा ।
हमने पूछा- कौन सी कथा ?
बोला- वही राजा भोज और गंगू तेली की कथा । जिसमें शनि की कुदृष्टि से खूँटी हार निगल गई थी और चोरी के इल्ज़ाम में राजा भोज के हाथ पैर काटे डाले गए थे और उस लुंज-पुंज राजा भोज को गंगू तेली की घाणी पर बैठकर कोल्हू के बैलों को हाँकना पड़ा था ।
हमने कहा- इस प्रकार गंगू तेली की कहानी के बहाने हो सकता है तू भी मोदी जी का मजाक उड़ा रहा हो ।
बोला- मोदी जी इन बातों का बुरा नहीं मानते । यह सब तो उनके कुछ अति उत्साही भक्त करते हैं । मोदी जी तो दो दो किलो गालियां खाकर पोषण प्राप्त करते हैं । वे तो खुद बताते हैं कि लोग उन्हे कौन कौन सी गालियों से विभूषित करते हैं । और नाराज क्यों होंगे । हो सकता है उनका किसी अगले-पिछले जन्म का गंगू तेली से कोई रिश्ता-नाता ही हो ।
हमने पूछा- तू ऐसा किस आधार पर कह सकता है ।
बोला- उनके देश-विदेश में दिए गए कई भाषण हैं जिनमें वे सभी जगह से अपना कोई न कोई नाता-रिश्तानिकाल लेते हैं । हो सकता है कभी किसी तेली बहुत क्षेत्र में चुनावी रैली करते समय वे रहस्योद्घाटन कर दें कि मेरा तेलियों से बहुत गहरा और सुख दुख का रिश्ता है । पिछले जन्म में जब मैं राजा भोज था तब मैंने शनि देव के श्राप से पीड़ित अपने दुख के दिन गंगू तेली के यहाँ काटे थे ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
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