18-05-2026
गू, चू… और कॉकरोच
आजकल तथाकथित बड़े लोग मतलब खुद को खुदा समझने वाले लोग जिन्हें जनता फुद्दू समझती है,, कुछ भी उल्टा सीधा बोल देते हैं । लगता है संसद और कोर्ट सड़क पर आगए जैसे कि स्वच्छता की गिनती में ऊपर आने वाले शहरों में अस्वच्छ पानी पीकर लोग मर जाते हैं या सीवर की गंदगी सड़क से होती हुई गृहप्रवेश करने लगती है । हमारा फोन कौन मोदी जी और ट्रम्प उठाते हैं । ले देकर एक तोताराम ही है जिसे हम मन की बात के बहाने पकड़ लेते हैं । उसकी भी वैसे ही मजबूरी है जैसे कि मोदी जी की ।
हम तो खैर तोताराम को चाय तो पिलाते हैं लेकिन ट्रम्प है कि मोदी को वैसे ही बात, बिना बात हड़काता रहता है । कभी कहता है मैंने युद्ध विराम करवाया और सौभाग्य-सिंदूर को खतरे में डाल देता है । कभी कहता है मैं जब चाहे मोदी का कैरियर खत्म कर सकता हूँ । और जब कुछ ज्यादा हो जाता है तो बीच बीच में ठंडे छींटे दे देता है कि इंडिया बड़ा लक्की है कि उसे मोदी जी जैसा प्रधानमंत्री मिला । वैसे जनता जानती है अपने सौभाग्य श्री को । दुनिया का क्या है ? वह तो माँग देखती है या फिर करवा चौथ का व्रत ।
तो लब्बोलुआब यह कि जैसे ही तोताराम आया हमने उसे बोलने का मौका दिए बिना ही पकड़ा- यह ट्रम्प अपने को समझता क्या है ?
बोला- इस एक छोटी सी बात के पीछे ही सब कुछ छुपा है, मास्टर ! राई की ओट परबत । आदमी खुद को समझ ले तो दुनिया की सारी समस्याएं ही हल हो जाएँ । आदमी सब कुछ समझ लेता है लेकिन खुद की तरफ़ कभी ध्यान नहीं देता । पीछे से लगभग सारी खोपड़ी खाली हुई रहती है लेकिन सामने के चार बालों को माथे पर ऐसे सजाता है जैसे कि कोई जवान छैला । बात करते करते कुछ भी भूल जाता है, लिखते बोलते हाथ-जुबान लड़खड़ाते हैं लेकिन बात करता है 56 इंची छाती की । इसीलिए अपने मारवाड़ी में कहावत है- मन मैं मूरख और जूण मैं कोई दुखी कोनी अर्थात सब खुद को बहुत चतुर समझते हैं और गंदी नाली में पड़ा कीड़ा भी खुद को सुखी समझता है । ऐसी गलतफहमी के बिना जीवन कटता नहीं ।
वैसे मोदी जी के डीयर फ्रेंड ट्रम्प से तुझे क्या परेशानी है ?
हमने कहा- अभी अप्रैल में जन्म आधारित नागरिकता को लेकर उसने चीन और भारत को ‘नरक का गड्ढा’ कहा है । यह तो बहुत गलत बात है ।
बोला- इसमें गलत क्या है ? यह दुनिया है ही नरक का द्वार । जो भी जीव इस दुनिया में जिस कर्म से आता है उस कुकर्म के सारे इलाके नरक मतलब मल मूत्र के निकास द्वार के आसपास ही होते हैं । सभी धर्मों में इस संसार को नरक ही माना है । अगर यह दुनिया नरक नहीं होती तो धर्म का धंधा करने वाले लोग इससे अलग स्वर्ग का लालच देकर लोगों को बहकाते कैसे ? और ट्रम्प का मूल देश जर्मनी ही अगर स्वर्ग होता तो उसके पूर्वज जर्मनी छोड़कर अमेरिका आते ही क्यों ।और मज़े की बात कि अब ट्रम्प को उसी नरक के गड्ढे चीन जाना पड़ा कुछ फौरी फायदे के लिए ।
लेकिन तू ट्रम्प की ही आलोचना क्यों करता है ? अभी दो चार दिन पहले दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में चू… जैसे नरक के आसपास के इलाके में स्थित स्थान से उत्पन्न कहा गया है । इसमें भी क्या बुराई है । एक महंत जी ने भी कुछ महिनों पहले एक पत्रकार को इसी शब्द से विभूषित किया था । इसमें क्या है यह तो हमारे संस्कारी हिन्दी बेल्ट का लोकसंस्कृति से लथपथ शब्द है । इसी बेल्ट में माँ और बहिन को भी इस संस्कार में सहजता से शामिल कर लिया जाता है । सबका साथ, सबका विकास ।
हमने कहा- चलो ये तो सामान्य लोग हैं लेकिन भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भी तो कोई कमी नहीं छोड़ी । वे बेरोजगार युवकों को कॉकरोच बता रहे हैं ।
बोला- बेकार होना बहुत बड़ी पीड़ा है । चालीस साल नौकरी करके लाखों की पेंशन लेने वाला जज भी जब सोचता है कि घर बैठने की बजाय कहीं राज्य सभा में ही घुस जाऊँ । फिर चाहे वहाँ कुछ भी न करूँ मुफ़्त में सरकारी बंगले में रहूँ और मजे करूँ । ऐसा सोचने वाला भी कॉकरोच की गति को ही प्राप्त होता है । वह भी एक प्रकार से राजा की जूठन पर पलता है कॉकरोच की तरह । गंदी जगहों पर अधिक पाया जाता है । संसद में पीछे बैठकर हिजड़ा मुस्कराहट और ताली बजाने के अतिरिक्त कुछ करने लायक नहीं रहता ।
लेकिन सूर्यकांत जी ने तो सफाई दी है कि उन्होंने ऐसा उन वकीलों के लिए कहा है जिनकी डिग्रियाँ संदेहास्पद है ।
हमने कहा- तोताराम, यह तो और भी खतरनाक स्टेटमेंट है । यह तो विपक्ष को समझ ही नहीं आया नहीं तो मुद्दा और भी बड़ा बन जाता । यह इशारा तो प्रकारांतर से बहुत ऊपर तक पहुंचता है ?
कुछ दिनों पहले मोदी जी की एनटायर पॉलिटिकाल साइंस की डिग्री के बारे में प्रश्न करने पर भी तो कोर्ट ने रोक लगा दी थी और उसके लिए कुछ ज्यादा ही उछल कूद करने पर केजरीवाल पर 25 हजार का जुर्माना लगा दिया गया था ।
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