Sep 7, 2026

29-07-2026 स्वयंसेवकों से सावधान


29-07-2026 

स्वयंसेवकों से सावधान 





 



आज तोताराम के साथ एक और सज्जन भी थे ।


हमने पूछा- आप कौन ?


बोला- वैसे तो हालात को देखते हुए इसका पुराना और सीधा सा उत्तर है- खामखां, लेकिन ये खामखां नहीं हैं । मेरे बगल में ही किराये पर रहने आए हैं । वैसे तू पूछ तो ऐसे रहा है जैसे यह कोई घुसपैठिया है और तू देश का गृहमंत्री या आसाम का मुख्यमंत्री है और इसे बंगला देश भेज देगा । यह बात और है मनमोहन सिंह के जमाने में दस साल में बिना किसी हो हल्ले के नब्बे हजार वापिस भेजे गए और मोदी जी के दस साल में मात्र पाँच हजार ।


हमने कहा- तू बिना बात ही उत्तेजित हो रहा है । हम तो सामान्य सी जानकारी चाहते थे कि कहीं ये स्वयंसेवक तो नहीं हैं ?


बोला- और अगर स्वयंसेवक भी हों तो बुराई क्या है ? स्वयंसेवक तो सभी समयों में, सभी समाजों में होते आए हैं जो बिना किसी अपेक्षा के लोगों की मदद करते हैं । वैसे ही जैसे कोई हादसा हो जाए तो अनजान आदमी भी मदद के लिए हाथ बढ़ा देता है ।


हमने कहा- लेकिन आज वह ज़माना नहीं रहा । आजकल स्वयंसेवकों के वेश में जाने कैसे कैसे लोग सक्रिय हैं । किसी मजबूर को सड़क पार करवाने के बहाने उसका पर्स या मोबाइल झटक लेते हैं । मंदिर के बाहर जूते सुरक्षित रखवाने के नाम पर लेकर चंपत हो जाते हैं । हमें ऐसे चंपत रायों से बहुत डर लगता है । इसीलिए देख हमने सूचना लिखवाकर लगवा दी है- स्वयंसेवकों से सावधान । वैसे ही जैसे बस या रेल में जगह लिखा मिलता है- जेब कतारों से सावधान या अनजान व्यक्ति से खाने का कोई सामान न लें उसमें कोई नशीला पदार्थ मिला हुआ हो सकता है ।


बोला- लेकिन आज से पहले तो तूने कभी ऐसी कोई सूचना नहीं लिखवाई । अभी ऐसा क्या हो गया ?


हमने कहा- जंतर मन्तर पर हुई घटना का तो तुझे पता ही है । कैसे सादे वेश में पुलिस की लठियाँ लिए हुए कुछ लोग सक्रिय थे और बाद में उन्होंने बच्चों पर डंडे बरसाए । वे सब स्वयंसेवक ही तो थे जो संसद मार्ग के पेड़ों की शाखाओं से उतर उतर कर आए थे । सुना है कुछ तो सजायाफ्ता कैदी थे जिन्हें शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले बच्चों को सबक सिखाने के लिए विशेषरूप से स्वयंसेवकों के रूप तैनात किया गया था अन्यथा उनके पास पुलिस वाली लाठी कहाँ से आई ?


तुझे पता होना चाहिए कि जिसे सेवा का चस्का लग जाता है फिर वह बच्चा बूढ़ा, स्त्री पुरुष, अपराधी निरपराध कुछ नहीं देखता । जो नहीं चाहता है उसकी भी सेवा कर डालता है । इसलिए सूझे से बूझा भला । सावधानी हाती और दुर्घटना हटी । पता नहीं कब कौन क्या सेवा कर जाए ।






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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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