Nov 20, 2010

तोताराम का मौन व्रत


अभी तक तोताराम नहीं आया । हम चाय पी चुके थे । अंदर जाने के लिए चबूतरे से उठ ही रहे थी कि तोताराम की सवारी नुक्कड़ के पास आती दिखाई दी । सोचा पहले ही चाय का आर्डर क्यों दिया जाए, क्या पता घर से पीकर ही आ रहा हो । तोताराम आकर चुपचाप बैठ गया । कोई चार-पाँच मिनट निकल गए । पता नहीं क्या बात है । हमेशा अमर सिंह और स्वर्गीय प्रमोद महाजन और राखी सावंत की तरह हर बात में बिना बात टपक पड़ने वाले तोताराम ने आज इतना बड़ा कोमर्शियल ब्रेक कैसे ले लिया ? अंत में हमें ही श्री गणेशायानमः करना पड़ा- क्या बात है, आज मैना ने कुछ कह दिया क्या ? तोताराम ने 'ना' में सर हिलाया । हमने अगला प्रश्न किया- चाय पीकर आया है क्या ? फिर 'ना' में मुंडी हिली ।
- पिएगा ?
अबकी बार 'हाँ' में खोपड़ी ऊपर-नीचे हुई ।

अब हमारा भी धीरज चुकने लगा, थोड़ा आवाज़ ऊँची करके कहा- क्या 'मैं चुप रहूँगी' की नायिका की तरह यह पाँच किलो की तूँबड़ी हिला रहा है, मुँह में जुबान नहीं है क्या ?
फिर वही मुर्गे की डेढ़ टाँग । 'ना' में सर हिला ।

हमने लगा, हो सकता है कोई विशेष बात है इसलिए सारा गुस्सा थूक कर पूछा- क्या दाढ़ में दर्द है या बिहार में तीन सौ सभाओं को संबोधित करके लालू जी तरह गला बैठ गया है ?
फिर वही 'ना' में सर हिला ।

अब हमारा धैर्य चुक गया । यदि सत्तर का दशक होता और यह हमारा विद्यार्थी होता तो एक ठीक-ठाक सी चपत जमा चुके होते या कान ही उमेठ दिया होता । मगर यह इक्कीसवीं शताब्दी है एक वरिष्ठ नागरिक तो दूर, आप कसाब तक को नहीं डाँट सकते अन्यथा मानवाधिकार वालों के पेट में दर्द होने लग जाएगा । इसलिए एक कागज और पेन्सिल लाकर उसके सामने रख दिए और कहा- प्रभु जी, इस सर-संचालन से हमारी संतुष्टि नहीं हो रही है । कृपया बोल नहीं सकते तो कुछ लिख ही दो ।

तोताराम ने लिखा- मैं चुप रहूँगा । कोई बीमारी नहीं है ।
- क्या मौन व्रत है ?
- नहीं ।
- तो फिर बोल
- नहीं ।
- तो फिर क्या तुझे बुलवाने के लिए मनमोहन जी की तरह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लाना पड़ेगा ? क्या तेरे किसी सहयोगी ने १.७६ लाख करोड़ का घोटाला कर लिया है ? क्या यह गठबंधन की कोई शर्त है ? क्या तूने भी कोई गोपनीयता की शपथ ले रखी है ? देख, कुछ ऐसे अवसर होते हैं जब न बोलना भी गलती की स्वीकृति मान लिया जाता है । 'मौनं स्वीकृति लक्षणं' । अरे, 'मौनी बाबा' कुछ तो बोल । पूरा सच नहीं तो युधिष्ठिर की तरह अर्ध-सत्य ही बोल मगर बोल तो सही । क्या तेरी दाढ़ी में तिनका है ?

तोताराम ने अपनी चार दिन से न बनाई हुई दाढ़ी पर हाथ फेरा और फिर निश्चिन्त होते हुए सर हिला दिया ।

हमने पत्नी को आवाज़ लगाई- हमें लगता है कि आज तोताराम का मौन व्रत के साथ-साथ कोई उपवास भी है, सो पकौड़ों की एक प्लेट ही लाना ।
तभी तोताराम चिल्लाया- भाभी, एक नहीं, दो प्लेटें लाना । मेरा कोई व्रत नहीं है ।

हमें तसल्ली हुई, चलो तोताराम का मुँह तो खुला । अब मनमोहन जी का मुँह न खुलने के तनाव को विपक्षी झेलें जिनकी आँखें छींकें पर लगी हैं कि अब गिरा और तब गिरा । अपने तो वही संतों वाली दिवाली है ।

१८-११-२०१०

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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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