22-05-2026
कमल को बचाना है
रात सोने में कुछ देर हो गई थी । नींद खुली तो बरामदे के आसपास मरियल सी आवाज सुनाई दी-
कमल को बचाना है
कॉकरोच को भगाना है
नारे के शब्द तो जुलूस जैसे थे लेकिन आवाज मात्र एक ही और वह भी मिमियाती हुई । वैसे ही जैसे वन मैन शो, वन मैन पार्टी या एकल विद्यालय । खुद ही झाड़ू लगाओ, खुद ही घंटी बजाओ, खुद ही पढ़ाओ वैसे ही जैसे चिराग पासवान, जयंत चौधरी, हनुमान बेनीवाल, जीतन राम मांझी, आठवले की पार्टी । पोस्टर चिपकाने से लेकर अध्यक्षता करने तक खुद ही खुद । जैसे भाजपा में फ़ोटो खिंचवाने, झंडी दिखाने और किसी भी विभाग की योजना का लोकार्पण करने के लिए अकेले मोदी जी ।
बाहर निकलकर देखा तो तोताराम । एक पुराने से कपड़े का बैनर दोनों हाथों में थामे जिस पर नीचे लिखा था-
कमल को बचाना है
कॉकरोच को भगाना है ।
और ऊपर एक तरफ झाड़ू, दूसरी तरफ चप्पल बीच में कॉकरोच ।
हमने कहा- कांग्रेस मुक्त भारत करते करते यह कॉकरोच मारो अभियान तक आ गए ! घुसपैठिया मुक्त भारत का क्या हुआ ?
बोला- घुसपैठिया मुक्त भारत तो एक चुनावी जुमला है जो यथासमय चलेगा लेकिन अब यह एक नई, गंदी और वाइराल बीमारी अचानक आ गई है जिसका तत्काल इलाज बहुत जरूरी है । उस एक जज ने नकली डिग्री वालों के चक्कर में बेकारों को भी लपेटकर कॉकरोच क्या कह दिया आफत हो गई । अब इन्होंने एक पार्टी बना ली है । कॉकरोच जनता पार्टी । और मजे की बात देख मास्टर, हमारी पार्टी के जितने फॉलोवर अब तक बन पाए हैं उससे ज्यादा इसके पाँच सात दिन में हो गए ।
हमने कहा- यह सब इन बेकारों के मजाक हैं । दो चार दिन में ठंडे हो जाएंगे ।
बोला- मास्टर, जब लोग सत्ता का मजाक उड़ाने लगते हैं तो समझो लोगों का भय कम हो रहा है । और शासन भय से ही तो चलता है । हँसना और मजाक करना निर्भयता की शुरुआत है । भय बिन होय न प्रीत ।
हमने कहा- कॉकरोचों से क्या डरना ? लाइट जला दो, भाग जाएंगे । जो न भागें उन पर चप्पल या झाड़ू जो भी सनातन हथियार उपलब्ध हो चला दो । कॉकरोच की भी कोई जान होती है ।
बोला- मास्टर, नेपाल श्रीलंका बांगलादेश में देखा नहीं ? ज़माना खराब है । पहले से ही एहतियात बरतना जरूरी है ।
हमने कहा- तो इन्हें पाकिस्तानी, बाबर की औलाद आदि कहकर बदनाम कर दो , यूएपीए लगा दो, ईडी भेज दो, बुलडोज़र चलवा दो ।
बोला- इनके साथ यह भी एक समस्या है । न इनके पास नौकरी, न घर, फटी जेब । नंगा राम से भी बड़ा । कोई अजित पवार, अशोक चव्हाण, सुवेन्दु अधिकारी, राघव चड्ढा, हिमांत बिस्वा सरमा, नारायण राणे, छगन भुजबल आदि होते तो ईडी की एक रेड में ही काम हो जाता । इनका अकाउंट भी बंद कर दिया लेकिन बात है कि वाइराल हुई जा रही है ।
हमने कहा- तो इन्हें पाकिस्तानी एजेंट बताया दो ।
बोला- क्या बताएं यह दाँव भी नहीं चलेगा क्योंकि मुसलमान न पढ़ते हैं क्योंकि न तो उन्हें सुविधा मिलती है और न ही नौकरियां । इसलिए वे दस-बारह साल के होते न होते खुद ही कोई न कोई छोटा-मोटा धंधा पकड़ लेते हैं । इन पढ़े लिखे बेकारों में तो अधिकतर हिन्दू ही हैं । चुनाव में अगर वोट न देने का चक्कर चल गया तो ज्ञानेश कुमार के एसआईआर के बावजूद जीतना मुश्किल हो जाएगा । विद्वान कह गए हैं-
बहुतन को न विरोधिए निबल जान बलवान
मिली भखि जाहिं पिपीलिका नागहिं नग के मान
हजारों चींटियाँ मिलकर पहाड़ जैसे साँप को खा जाती हैं ।
हमने कहा- तो कोई भ्रम फैलाकर इसकी हवा निकाल दो ।
बोला- यही तो कर रहे हैं । इसीलिए यह कमल रक्षा पार्टी बनाई है । कमल लक्ष्मी का सिंहासन है । अगर कमल नहीं रहा तो लक्ष्मी कहाँ बैठेगी । देश कंगाल हो जाएगा । किसी भी व्रत में कमल गट्टा खाया जाता है । कमल नहीं तो गट्टा कहाँ से मिलेगा । सनातन पर संकट । सृष्टि को बनाने वाले ब्रह्माजी भी कमल पर ही बैठते हैं । और इन कॉकरोचों का कुछ पता नहीं । खाने को न मिले तो कहीं कमल को ही न खा जाएँ । और रामचन्द्र कृपालु भी कंज (कमल )के बिना कैसे गाया जाएगा ।
बोलते बोलते अचानक तोताराम ने नारा बुलंद किया-
कमल को बचाना है
कॉकरोच को भगाना है ।
हमने कहा- बहुत हो गया । आज तुझे चाय नहीं, छाछ पिलाते हैं । दिल-दिमाग दोनों ठंडे हो जाएंगे । कमल की चिंता छोड़ । ये सब तो चुनाव चिह्न हैं । पहले दीपक था अब कमल है । कांग्रेस भी तो पहले बैलों से चली फिर गए बछड़े से और अब हाथ । अगर ये कॉकरोच कमल को खा जाएंगे तो क्या । कुछ भी रख लेंगे निशान । काम करेगी तो 56 इंच की सफेद दाढ़ी ही काफी है ।
बोला- फिर भी मास्टर, हवा का कुछ ठिकाना नहीं । सावधानी हटी और दुर्घटना घटी ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
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