Jul 1, 2026

26-06-2026 अभी यहीं घूम रहा है ?





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26-06-2026  


अभी यहीं घूम रहा है ? 


तोताराम मोदी जी के मन की बात की तरह तय समय पर आ पहुँचा । हमने कुछ नहीं कहा तो खुद ही बोला- क्या बात है, चाय हो गई ?

हमने कहा- चाय तो हो गई लेकिन तू अभी यहीं घूम रहा है ? 

बोला- यहाँ नहीं तो क्या सेशेल्स जाऊँगा । मोदी जी बात और है । उन्हें तो देश के लिए सम्मान लेने जाना ही पड़ता है । सेशेल्स तो फिर भी एक लाख तीस हजार की जनसंख्या वाला देश है । तुवालू (हवाई और आस्ट्रेलिया के बीच) में नौ हजार चार सौ, नाऊरू (प्रशांत महासागर में एक छोटा सा द्वीप) में 12 हजार, पलाऊ ( पश्चिमी प्रशांत महासागर में 34 छोटे छोटे द्वीपों का देश) में 18 हजार लोग रहते हैं और शी लैंड ( इंग्लैंड के सफोक तट से 12 किलोमीटर दूर) नाम के देश की जनसंख्या तो मात्र 27 ही है । सम्मान देने के लिए बुलाया जाएगा तो वहाँ भी जाना पड़ेगा । 

हमने कहा- हमारा ज्ञानवर्द्धन करने के लिए धन्यवाद लेकिन हम तो तेरी तीर्थयात्रा को लेकर उत्सुक थे सो पूछ लिया । कल ही तो मोदी जी ने सीकर जिले के 2392 हिन्दू बुजुर्गों को ट्रेन से और 293 हिन्दू बुजुर्गों को हवाई जहाज से तीर्थ यात्रा करवाने के लिए लाटरी निकाली है । क्या तेरा नंबर नहीं लग सकता ? 

बोला- और मुसलमान ?

हमने कहा- उनका परलोक बहुत सुधर गया । इसलिए 2018 से उन्हें सबसीडी देना बंद कर दिया है ।  अगर ज्यादा ही सुधारना है तो पाकिस्तान चले जाएंगे लेकिन हिंदुओं का तो एक ही देश है । यहाँ परलोक नहीं सुधरेगा तो कहाँ सुधरेगा । 

बोला- क्या कहा, मोदी जी ने लॉटरी निकाली है ? यह देश बेचारे मोदी जी से क्या क्या काम करवाएगा । पहले ही 20-20 घंटे काम करते हैं । बच्चों को परीक्षा के लिए टिप्स देने से लेकर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने तक के जाने क्या क्या काम करने पड़ रहे हैं । पहले से ही सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री का रिकार्ड बना चुके हैं । एक बुजुर्ग सेवाभवी सज्जन का यह देश जाने और कितना शोषण करेगा । 

हमने कहा- यह लॉटरी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने नहीं बल्कि जिलाधीश आशीष मोदी ने निकाली है । यह लॉटरी केवल हिन्दू बुजुर्गों के लिए है । सबसीडी नहीं पूर्ण निःशुल्क । 

बोला- एक तो मैंने अप्लाई नहीं किया । कर भी देता तो नंबर नहीं आता । 

हमने कहा- क्यों, क्या कमी है तुझ में ? 83 साल का बुजुर्ग है । हिन्दू है, ब्राह्मण है, शाकाहारी है । 

बोला- वह तो ठीक है लेकिन मैं तेरी संगति में संस्कारहीन हो गया हूँ । न तो रोज नहाता, न संध्या वंदन करता, न आठों अंगुलियों में अंगूठियाँ पहनता, न लंबा तिलक लगाता, न गले में भगवा पटका डालता, न किसी कलश यात्रा और भगवा रैली या विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेता, न अजान से मुझे सिर दर्द होता, न मैं कपड़ों से आतंकवादियों को पहचान  सकता, न मैंने कभी किसी मस्जिद पर भगवा झण्डा फहराया । 

हमने कहा- कोई बात नहीं । चाय बनवाते हैं । अगले साल अप्लाई कर देना । हम तेरा मस्जिद के सामने सुंदरकांड का पाठ करते हुए एक बढ़िया सा फ़ोटो खिंचवा देंगे । फॉर्म के साथ वही लगा देना । और यहीं सड़क पर कनक दंडवत करते हुए फागुन में खाटू श्याम् जी के मेले के समय तेरा फ़ोटो एक फ़ोटो छपवा देंगे- शीर्षक होगा-  कनक दंडवत करते खाटू श्याम जी जाते हुए एक 83 वर्षीय श्रद्धालु मास्टर तोताराम । फिर तीर्थ यात्रा क्या एम एल ए का टिकट भी मिल सकता है । 

बोला- मास्टर, इसमें तो बहुत खर्च होता होगा । 

हमने कहा- कुछ ज्यादा नहीं । इस मद में राजस्थान 200 करोड़, उत्तर प्रदेश 500 करोड़ और सारा देश एक वर्ष में केवल साढ़े तीन-चार हजार करोड़ खर्च करता है । 

बोला- लेकिन इतना कर्ज आता कहाँ से है ? 

हमने कहा- आदमी की साख होनी चाहिए कर्ज की क्या कमी है । अभी तो मोदी जी का डंका बज रहा है तभी तो पिछले  13 प्रधानमंत्रियों ने 67 साल में जितना कर्ज लिया उससे तीन गुणा मोदी जी को अकेले 12 साल में मिल गया । जितना सम्मानित राष्ट्र और नेता उतना अधिक कर्ज । अमेरिका को देख 38 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है । अपना तो एक ट्रिलियन भी नहीं है । राम राम करके पौन ट्रिलियन है । बड़े सेठ बने फिरने वाले अंबानी पर 4 लाख करोड़ और अदानी पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये मात्र कर्ज । अभी बहुत गुंजाइश है । 

बोला- तो फिर राजस्थान में स्कूलों की छत क्यों गिर रही हैं ? मोदी जी के 12 साल में देश में 80 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए । स्कूलों के बढ़िया भवन बनाएं, अच्छी सुविधाएं दें । देश ज्ञान विज्ञान में आगे बढ़ेगा । अगर चाहें तो तीर्थ यात्राओं पर होने वाले बजट का सदुपयोग करें तो एक साल में तीन आई आई टी या तीन एम्स बन सकते हैं । 

हमने कहा- जब तक हिन्दू तीर्थयात्री और काँवड़िए बन रहे हैं तब तक ही हिन्दुत्व सुरक्षित है । नहीं तो पढ़-लिखकर नौकरी मांगेंगे, पेपर लीक को लेकर दुखी होंगे, कॉकरोच बनेंगे, आंदोलन करेंगे । 

हमें तो युवाओं को धर्म योद्धा, गौरक्षक, सनातन संस्कृति सेनानी बनाना है । देश की सुख शांति और धर्मपरायणता के लिए तीर्थ यात्रा और मंदिर कॉरीडोर निर्माण ही ठीक हैं । 

बोला- लेकिन आजकल मंदिरों में तो चोरी डाका हो रहा है । 

हमने कहा- यह तो होगा ही । कोई नई बात नहीं । ज्यादा धन होने से महमूद ग़ज़नवी सोमनाथ आया । अब उसकी कोई जरूरत नहीं है । यहीं हजारों ग़ज़नवी धर्म की ध्वजा लेकर घूम रहे हैं । जहाँ गंदगी वहाँ मक्खियाँ, जहाँ कीचड़ वहाँ कमल, जहाँ कमल वहाँ लक्ष्मी का वास । चिंता मत कर इस दुनिया में धर्म ही एक ऐसा धंधा है जिसमें सारे नेताओं और कामचोरों का गुजारा होता है ।  इस धंधे में हमेशा बहुत गुंजाइश है । 




 



 

 



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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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