30-07-2026
नरेंद्र-मंदिर या किन्नर-मंदिर या नरेंद्र-किन्नर-मंदिर
प्रिय नरेंद्र भाई,
केम छो ? मजा ? तमे केता था कि तमे नॉन बायोलॉजीकल छो। कथन साचो । हवे तो भगवान बणी गया । बिहार माँ तमारा मंदिर नो प्रस्ताव पण पास थयी गयो । हवे पछी सूँ जोइए ।
वैसे कहा जाता है कि जीते जी व्यक्ति को अपनी मूर्ति स्थापित नहीं करवानी चाहिए । अशुभ माना जाता है । मायावती ने अपनी मूर्तियाँ लगवाई थीं सो अब मूर्ति बनी बैठी है । जीवत समाधि ।
आपके मंदिर की बात सुनते ही हमारा दिमाग चालू हो गया । उत्सुकता है कि इस मंदिर में आपकी किस छवि की मूर्ति होगी । हमने आपको फ़ोटो में हजारों रूपों में देखा है । साक्षात देखने का तो सौभाग्य मिल नहीं । फिर भी कोई तो बात है । दुनिया ऐसे ही तो दीवानी नहीं हो जाती । हमने एक महिला को आपके चेहरे के ग्लो से गदगद हुए देखा है ।
आपने खुद छप्पन इंची, पठान का बच्चा, एक अकेला सब पर भारी होते हुए भी कभी इन किन्नरों का अपमान नहीं किया । इन्होंने आपमें ऐसा क्या देखा कि फिदा हो गए ।जैसे आप विभिन्न समाजों के बीच जाकर उनके वेश बनाते हैं, वाद्य बजाते हैं, उनसे कोई न कोई रिश्ता जोड़ते हैं तो हो सकता है कि किसी दिन आप इनका मनोबल बढ़ाने के लिए इनके बीच जाएँ और बताएं कि पिछले जन्म में आपको एक वर्ष का अर्जुन वाला अनुभव भी है जब उसने राजा विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य सिखाया था ।
भगवान की सबसे बड़ी कमजोरी होती है भक्त । कहते हैं भगवान भक्त के वश में होते हैं । एक बार तुलसीदास जी मथुरा गए द्वारिकाधीश के मंदिर में । तुलसी ठहरे राम भक्त, और कोई छवि जमती भी कैसे जैसे कि जिसके मन में आपकी छवि बस जाती है वह फिर गांधी, नेहरू, सुभाष, अटल किसी भी छवि से प्रभावित नहीं होता । सो तुलसी बाबा कहने लगे-
कहा कहूँ छवि आपकी भले बने हो नाथ
तुलसी मस्तक तब नवे जब धनुष बाण लो हाथ ॥
हो सकता उस समय मथुरा में चुनाव होने वाले थे तो तुलसी दास जी को खुश करने के लिए कृष्ण से धनुष बाण लेकर राम का वेश बना लिया । कहीं ये भक्त किन्नर आपसे कुछ ऐसा वैसा कहें तो सोच समझकर कदम उठाइएगा ।जोश में आकर ‘जियो जियो रे लला’ मत गाने लग जाना । इनका ‘जियो’ अंबानी वाला नहीं है । कुछ और ही है । एक दो सीट की ही तो बात । अगर कहीं कॉकरोचों की ‘ नीम का पत्ता कड़वा है । नरेंद्र मोदी भ..वा है’ की तरह मजाक बना लिया तो मुश्किल हो जाएगी । वैसे ही जब से ट्रम्प ने आपको बात बात में हड़काना शुरू किया है तो लोगों ने आपको नरेंदर सरेंडर कहाँ शुरू कर दिया कि नहीं ? ।
जहां तक इस मंदिर के नामकरण की बात है तो उसमें भी सावधानी जरूरी है । सामान्य रूप से ‘नरेंद्र-मंदिर’ हो तो ठीक है लेकिन अगर बाहर लिखा हो ‘किन्नर मंदिर’ और अंदर आपकी 56 इंची छाती वाली मूर्ति तो ? और अगर ‘नरेंद्र-किन्नर-मंदिर’ नाम रख दिया तो फिर अर्थ का अनर्थ तय है ।
एक और बात । आजकल बड़े बड़े पुल और सड़कें उद्घाटन से पहले या तत्काल बाद दिवंगत हो रहे हैं । यह बिहार है और कमीशन खाने वालों की क्षमता का कोई ठिकाना नहीं है । जगन्नाथ मिश्र और लालू जी जमाने एक मुर्गी रोज 800 रुपए का खाना खा जाती थी । हो सकता है कि उस समय आपके वाला 80 हजार रुपए किलो वाला 100-100 ग्राम मशरूम मुर्गियों को रोज खिलाया जाता हो । अभी कोरबा छत्तीसगढ़ में अटल जी की एक तथाकथित कांस्य प्रतिमा बरसात में धुल जाने के बाद पता चला कि वह घटिया सीमेंट से बनाकर रंग कर दिया गया था ।इसके निर्माण का ठेका जिला भाजपा अध्यक्ष को दिया गया था ।राजस्थान में भी स्कूलों के कमरों की छतें गिर रही हैं । कहीं आपके मंदिर की छत गिर गई तो ?
मंगलं भगवान विष्णु…
आपका
रमेश जोशी
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