03-09-2026
रँगाए जोगी कपड़ा
हमारे घर का गेट 'इंडिया गेट’ की तरह कोई मामूली गेट नहीं है कि मोदी जी जिसके राजपथ के ‘राजधर्म’ से मुक्त करके सारी जिम्मेदारी जनता पर डालने के लिए उसे ‘कर्तव्य पथ’ बना दें । हमारे घर के गेट में पिछले 25 साल से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है । सिवाय इसके कि मौसम ने उसके लोहे को जंग से काट दिया ।
आज तोताराम ने आते ही कहा- मास्टर, इस गेट को ठीक करवा ले नहीं तो किसी दिन यह झालावाड़ के स्कूल की छत की तरह मेरे ऊपर गिर पड़ा तो मैं 1947 में मोदी जी द्वारा विकसित भारत कैसे देखूँगा ।
हमने कहा- तू कौन मोदी जी तरह नब्बे हजार रुपये किलो का मशरूम खाता है जो 2047 देख पाएगा । किसी (अ) मृत काल की डबल इंजिन की ' न खाऊँगा : न खाने दूँगा’ वाली सरकार द्वारा बनवाया गया थोड़े है जो उद्घाटन से पहले ही पुल गिर जाएंगे, राजमार्ग में गड्ढे पड़ जाएंगे और अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे में भर जाएगा या छत गिर जाएगी । यह हमने अपनी मेहनत की कमाई से बनवाया है जिसमें किसी ने 40 % कमीशन नहीं खाया है । गेट अभी कहीं नहीं जाएगा ।
बोला- कहीं नहीं जाएगा, ठीक है लेकिन क्या पता कल को राहुल गांधी की देखादेखी और जेन जी को प्रभावित करने के लिए मोदी जी दिल्ली की मेट्रो की तरह ऑटो में बैठकर कॉलोनी में आ धमके तो ? क्या देखेंगे ? उनके 12 साल के विकास पीड़ित राष्ट्र का यह हाल ?
हमने कहा- अगर हमें भी कहीं से संघ की तरह कुछ बिना हिसाब किताब वाला चन्दा मिल जाता तो केशव कुंज की तरह खड़ा कर देते 7 स्टार बुलंद दरवाजा । फिर भी तू कहता है तो अगले साल पेंट करवा लेंगे ।
बोला- यह पेंट वाली संस्कृति ठीक नहीं है । दिल्ली में आजकल जगह जगह बहुत सी पी जी वाली इमारतें गिर रही हैं और गुजरात का मोरबी वाला तो तुझे पता ही है । झूलते पुल की मरम्मत का काम दिया गया था एक घड़ी बनाने वाली कंपनी को । उसने कुछ नहीं किया बस पेंट करवा दिया । यह वैसे ही है जैसे किसी को भोजन न देकर गोरा बनाने वाली क्रीम दे दी जाए या बेरोजगार को काँवड़, झण्डा या वन्दे मातरम । या फिर किसी मरीज को दवाई की जगह हनुमान चालीसा ।
बढ़िया सा नया गेट लगवा और उस पर लिखवा दे ‘स्वयं सेवा तीर्थ’ ।
हमने कहा- हम पेंट भी मोदी जी और तेरी संतुष्टि के लिए करवा रहे हैं । अभी तो दिवाली के चक्कर की शुरुआत हो सकती है । ऑफ सीजन में देखेंगे ।
बोला- मास्टर, तू हैं बहुत कंजूस ।
हमने कहा- कंजूस नहीं मितव्ययी कह । मुफ़्त का माल नहीं है जो बेरहमी से खर्च करें ।
बोला- वैसे तू कहे तो सस्ता पेंट और कुछ साहस करे तो पेंट मुफ़्त भी मिल सकता है ।
हमने कहा- तो फिर विचार किया जा सकता है ।
बोला- लेकिन उसमें रंग एक ही भगवा । सस्ता मिल जाएगा और अगर तू दो चार मस्जिदों या आनंद बाजार पत्रिका के दफ्तर के गेट पर भगवा पेंट करने का साहस दिखाए तो पेंट मुफ़्त भी मिल सकता है ।
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach
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