Dec 31, 2015

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा

 स्वागत  है नववर्ष तुम्हारा


स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा, स्वागत है नव वर्ष |
करें कामना सब को सुखकर हो यह नूतन वर्ष |

कोई भ्रम, शंका हो तो भी बंद न हो संवाद |
आपस में मिल-जुल सुलझा लें हो यदि कोई  विवाद |
दुःख-पीड़ा आपस में बाँटें, बाँटें उत्सव-हर्ष |
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा, स्वागत है नव वर्ष |

सभी परिश्रम करें शक्ति भर, पर ना करें प्रमाद |
जले होलिका, विश्वासों का बचा रहे प्रह्लाद |
केवल कुछ का नहीं सभी का हो समुचित उत्कर्ष |
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा, स्वागत है नव वर्ष |

'स्वार्थ छोड़ कर्त्तव्य करे वह पुरुषोत्तम श्रीराम' |
यह आदर्श हमारा होवे, होंगे शुभ परिणाम |
न्याय-जानकी अपहृत हो तो मिलें, करें संघर्ष |
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा, स्वागत है नव वर्ष |

-रमेश जोशी 

Dec 30, 2015

सफ़ेद बाल

 सफ़ेद बाल

प्रिय ओबामा जी
वैसे तो यदि हमसे दस-बारह साल छोटे मोदी जी आपको बराक कह सकते हैं तो हम भी इसी तरह संबोधित  कर सकते हैं लेकिन हम इतने फ़ास्ट नहीं हैं |अब देखिए ना, वे बारह महीने में सारी दुनिया का चक्कर लगा आए और एक हम हैं कि सीकर में बैठे-बैठे एक साल निकाल दिया और लेखन का यह हाल है कि एक साल में यह दूसरा पत्र है |

आप एक साल बाद भूतपूर्व हो जाएंगे | जब तक कोई स्केंडल न हो तो भूतपूर्वों को मीडया घास नहीं डालता |जब कोई सत्ता में हो तो छींकने, खाँसने तक के समाचार आते हैं |२० नवम्बर २०१५ को आपने किसी कार्यक्रम में कहा था कि २००९ में जब राष्ट्रपति बना था तो एक भी बाल सफ़ेद नहीं था और अबअधिकतर बाल सफ़ेद हो गए हैं लेकिन मैं बूढ़ा नहीं हूँ |मेरी कैबिनेट के बहुत से लोग बाल रंगते हैं लेकिन मैं नहीं रंगता |

हालाँकि कि लम्पटता का उम्र और बालों के रंग से कोई संबंध नहीं है |८५ साल तक के महामहिमों को लम्पटता के चलते जूते खाते देखा, महाभियोग का सामना करते और रोते देखा है |एक बार आप भी जब जापान में तीए, चौथे या  उठाले में गए तो किसी सुन्दर चेहरे के साथ सेल्फी लेने से अपने को रोक नहीं सके थे |मैडम नाराज़ भी हुई थीं |खैर, अच्छा हुआ, आप जल्दी ही सँभल गए |

उम्र से पहले जब बाल सफ़ेद हो जाते हैं तो आदमी को अन्दर-अन्दर ही थोड़ा अखरता तो है |आपकी तो अभी उम्र ही क्या है ?हमारे बच्चों के बराबर | कवि केशव का किस्सा है जिन्होंने कहा है-

केशव केशनि  अस करी जस अरि हू न कराहिं |
चन्द्र बदनि मृग लोचनी बाबा-बाबा कही कही जाहिं ||
वे अपनी उम्र जानते थे,बाल भी नहीं रँगते थे | केशों के सफ़ेद होने का दुःख इसलिए कि सुंदरियां सफ़ेद केशों के कारण, डीयर की जगह बाबा कह देती हैं |

हमने तो ऐसे-ऐसे बूढों को बाल रंगते देखा है जिनके न मुँह में दांत और न पेट में आंत |लकड़ियाँ श्मशान में पड़ी हैं, बोलते हैं तो चेहरा गुगली हो जाता है |वास्तव में बाल रँगना लम्पटता है, धोखा देने का इरादा है |लेकिन हमारी समझ में नहीं आता कि धोखा किसे देते हैं ये लोग |पत्नी को आपकी मर्दानगी और उम्र दोनों को पता है और  भगवान तो सब कुछ जानता ही है |सही समय पर यमदूतों को भेज देगा |वह यह नहीं सुनेगा कि अभी तो मेरे सारे बाल सफ़ेद हैं, अभी तो मेरी उम्र ही क्या है, अभी क्यों लिए जा रहे हो ?बाल रँगकर जवान दिखने का भ्रम अमरीका ही नहीं भारत में भी कम नहीं है |यहाँ बाल रँगने का प्रतिवर्ष २७००० करोड़ का बाजार है |जो लम्पटता के कारण बढ़ता ही जाएगा |चरित्र न सही, अर्थव्यवस्था तो सुधरे |

हमें तो बाल रँगने का कभी साहस ही नहीं हुआ |अपने अंतरतम को उजागर करना हर एक के वश का नहीं होता |हमारा तो आपसे कहना है कि अब एक साल के लिए इस चक्कर में नहीं पड़िएगा |यह ससुर ऐसी बीमारी है कि मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की |एक बार रंग लो तो जो दो चार काले बचे हैं वे भी सफ़ेद हो जाते हैं | हमारे यहाँ तो कहा जाता है- काले कर्म के और धौले धर्म के मतलब  कर्म करते हुए अपने बालों को सफ़ेद कीजिए |यही धर्म है |जिनके बाल बिना कर्म किए सफ़ेद हो जाते हैं उनके लिए ही कहा जाता कि बाल धूप में सफ़ेद किए हैं |

हमें बहुत से लोग और किसी नहीं तो, कम से कम इसलिए विश्वसनीय लगते हैं कि वे बाल नहीं रँगते जैसे अटल बिहारी, आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा,नरेन्द्र मोदी,अमित शाह, प्रकाश कारत, सीताराम येचुरी और आप |

अब तो अगले साल फ्री हो जाएंगे, लगा जाइए एक चक्कर भारत का |पिछली बार आए थे प्रदूषण के डर से प्रेम का प्रतीक आगरा का ताज नहीं देखा था लेकिन अब मोदी जी ने आपको पेरिस सम्मेलन में समझा दिया है और यहाँ सफाई अभियान भी ज़ोरों से चल रहा है इसलिए अबकी बार पर्यावरण संबंधी समस्या नहीं आएगी |समस्याएँ चाहे वे सुरक्षा की हों या साफ़ हवा की, वे सब कुर्सी पर बैठे लोगों के लिए होती हैं |भूतपूर्व होने पर तो सब धान बाईस पसेरी हो जाता है |

हाँ, उस ट्रिप में यदि दिल्ली भी आना हो तो दो गाड़ियां लाइएगा क्योंकि यहाँ 'सम-विषम' का चक्कर चल रहा है |मतलब एक उस नंबर की जिसमें दो का भाग लग जाए और एक वह जिसमें दो का भाग न लगे |और यदि दिसंबर में आएंगे तो ५० करोड़ रुपए का 'सैफई-महोत्सव' भी देख सकेंगे |आपके यहाँ तो पूंजीवाद है |आपको क्या पता कि समाजवाद क्या होता है ? इसे देखकर आपको लोहिया जी के समाजवाद की जानकारी भी हो जाएगी |

सड़क पर सांड

   सड़क पर साँड़

हालाँकि रात को तापमान शून्य रहा लेकिन सुबह दस-ग्यारह बजे बरामदे में सुहानी धूल निकल आई |पता नहीं, अटल जी के विगत सुशासन या जन्म-दिन का प्रभाव था या वर्तमान में दुनिया में चमक रही इण्डिया की छवि का लेकिन अच्छा लग रहा था |तोताराम और हम चाय के साथ क्रिसमस और पौष-बड़ा दोनों एक साथ मना रहे थे |जैसे ही तोताराम पकौड़ों की अगली खेप लेने गया तो रास्ते से जा रहे सांड पकौड़ों सहित हमारी प्लेट उठा ले गया |हमें गुस्सा तो बहुत आया लेकिन कर क्या सकते थे ? वह धार्मिक, राजनीतिक और शारीरिक तीनों रूपों में हमसे कहीं शक्तिशाली |

जैसे ही तोताराम पकौड़े लेकर आया, हमने उसकी प्लेट को लपक लिया और कहा-अपने लिए दूसरी ले आ |हमारे वाली तो नंदी जी महाराज ले गए | पता नहीं, सरकार इनका कुछ करती क्यों नहीं ?

तोताराम बोला- बन्धु, ये चाहें तो किसी को भी घायल कर दें, सब्ज़ी मंडी में आतंक  फैला दें, छात्र संघ के नेताओं के गैंगवार की तरह मोहल्ले के लोगों का जीना हराम कर दें लेकिन इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता |सड़क से संसद तक इन्हीं का राज है |खाएँगे, दहाड़ेंगे, स्वच्छ भारत अभियान के बावजूद सड़क के बीच लघु और दीर्घ शंका समाधान करेंगे |ये या तो भावी नेता हैं या भूतपूर्व लेकिन साधारण, मेहनत की कमाई खाने वाले आम लोग नहीं हैं | 

हमने कहा- अपने यहाँ सब चलता है लेकिन यदि बनारस हुआ होता तो सब बाड़े में बंद कर दिए गए होते |

बोला-यह तो एक असामान्य घटना है |जापान  के प्रधान मंत्री आने वाले थे इसलिए यह नाटक किया गया था | जैसे लोकतंत्र की शोभा गुंडई, दलाली और भ्रष्टाचार है वैसे ही बनारस की शोभा हैं-सांड,रांड और सन्यासी | देखा नहीं, दो दिन में ही आस्था का प्रश्न उठने लगा | सांड शिव के नंदी हैं |किसी का भी यज्ञ विध्वंस कर सकते हैं | जब किसी को निबटाना होता था तो शिव नंदी को ही भेजते थे |

बनारस में भी इन्हें कोई  'बाड़ा' नहीं सँभाल सकेगा |जब तक इनका पेट नहीं भरेगा, ये गौशाला के अध्यक्ष तक को नहीं खाने देंगे |जब खाने को नहीं मिलेगा तो कौन अध्यक्ष इन्हें रखना चाहेगा | और प्रति गाय भी २५ रूपए और प्रति सांड भी २५ रूपए |कोई संसद की कैंटीन थोड़े ही है जो १२ रूपए में भर पेट माल मिल जाए |यह तो बड़ी नाइंसाफी है, कालिया |गायों की बात और है |खाने को दो या मत दो | पड़ी रहेंगी किसी कोने में लेकिन ये तो भूखे और भरे पेट दोनों स्थितियों में दहाड़ते हैं |और इनके खिलाफ थाने में भी कोई रिपोर्ट नहीं लिखता |कहते हैं- भैया, ये तो हमारे भी बाप हैं |नियुक्ति, प्रमोशन और ट्रांसफर सब इनके हाथ में हैं |

हमने कहा- तो फिर पकौड़ों की यह प्लेट भगवान शिव या लोकतंत्र या सरकार -किसी के भी नाम लिख दे और अपनी भाभी से अपने लिए दूसरी बनवा ले |

 









Dec 28, 2015

सबसे बड़ा नशा

  सबसे बड़ा नशा 

२३ दिसंबर २०१५, पत्नी का जन्म दिन है |बहत्तर वर्ष की हो जाएगी कल |ठण्ड भी कुछ अधिक ही है |पास के कस्बे फतेहपुर में तापमान -०.४ है | हमारे यहाँ का पता नहीं | फिर भी जैसे यमुना के जल में खड़े ब्राह्मण को अकबर के महल के दीये की रोशनी से गरमी मिलती है वैसे ही हम फतेहपर की ठण्ड से ठिठुर रहे हैं | लेकिन इतनी भी कम नहीं कि बरामदे में बैठ सकें सो कमरे में अँगीठी के पास बैठे बिना दूध की चाय पी रहे थे कि तोताराम का अवतरण हुआ |पत्नी से बोला- भाभी, चौबीस घंटे एडवांस में जन्म दिन मुबारक हो | और यह क्या ? यह सूफी इस बुढ़ापे में आज तुम्हारे जन्म-दिन को रम से सेलेब्रेट कर रहा है ?

हमने कहा- ऐसा कुछ नहीं है |रात का दूध बचा नहीं और अभी तक दूध वाला आया नहीं सो बिना दूध  की, नींबू वाली चाय पी रहे हैं |

कहने लगा-  हमें ज़िन्दगी ने इतना अवकाश ही नहीं दिया कि किसी और नशे की सोचते |वैसे यदि तू वास्तव में रम पीता तो भी नशा होने वाला नहीं था |

हमने कहा- यह नया ज्ञान तुझे कहाँ से मिला ? 

बोला- पहले तो मैं भी यही समझता था लेकिन जब से पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री सुरजीत सिंह ज्ञानी जी का स्टेटमेंट पढ़ा है कि शराब में नशा नहीं होता , मेरा विचार बदल गया है | 
हमने कहा- उनके कहने से क्या होता है ? 

बोला- होता क्यों नहीं ? वे कोई साधारण आदमी हैं  ? उनका तो सरनेम ही ज्ञानी है | और नाम शुरू होता है 'सुर' से |अब बता, सुरों से अधिक शराब या सोमरस के बारे में और कौन बता सकता है ? ऊपर से स्वास्थ्य मंत्री अलग | उनके स्टेटमेंट में शंका की गुंजाइश कहाँ रह जाती है ?

हमने पूछा- तो फिर नशा किसमें होता है ?

कहने लगा- वैसे तो लोग कहते हैं कि रूप का नशा होता है, जवानी का होता है, ओफिसरी का होता है लेकिन ये नशे समय के साथ ख़त्म हो जाते हैं |देखा नहीं, मेकअप की हुई बूढ़ी सुंदरी, बूढ़ा पहलवान और रिटायर्ड अफसर कितने दयनीय लगते हैं ?यदि शराब में नशा होता तो हर एक को गाली निकालने वाला शराबी थानेदार को देखते ही नमस्ते क्यों करने लग जाता है ?
एक नशा होता है सत्ता का ? यह सबसे पक्का नशा होता है |एक बार चढ़ गया तो ज़िन्दगी भर नहीं उतरता | बूढ़ा और भूतपूर्व नेता भी अपने को सामान्य नहीं मान पाता | वह भी लोगों पर अकड़ जमाता रहता है |यदि सत्ताधारी हुआ तो फिर कहना ही क्या ? किसी भी पुलिसये या कर्मचारी तो क्या एस.पी. तक पर हाथ छोड़ देता है |निधड़क सब तरह के भ्रष्टाचार और चोरियाँ करता है सो अलग |हारा हुआ नेता तक जब जेल में आता है तो जेल का अधीक्षक, चरण-स्पर्श करता है कि पता नहीं, कब यह पिशाच फिर चुन कर आ जाए | जीते हुए नेता को तो हमने मंच पर चीफ सेक्रेटरी से खैनी बनवाते देखा है |

अब बता, सबसे बड़ा नशा शराब है कि सत्ता ?