May 30, 2026

30-05-2026 ले पानी पी


30-05-2026 


ले पानी पी 




जैसे ही तोताराम आया हमने उसकी जलसेवा करते हुए कहा- ले, पानी पी । 


तोताराम ने भी बड़ी शालीनता से गिलास थामा और धन्यवाद दिया । 


चाय आने में दस-पंद्रह मिनट लगने की संभावना थी सो पाँच मिनट बाद ही हमने फिर उसके गिलास में पानी डालते हुए कहा- ले, थोड़ा और पी ले ।


तोताराम ने दो घूंट लेकर गिलास अलग रख दिया । 


पाँच मिनट और बीते । कुल दस मिनट हो गए लेकिन चाय अभी नहीं आई । आ जाएगी, यह कौन सी मन की बात है जिसके बिना राष्ट्र की हृदय गति रुक जाएगी । हमने फिर पूछ लिया- पानी और दें ?


अब तो तोताराम फट पड़ा । वास्तव में कुचरणी बहुत बुरी चीज होती है । अगर मंदिर के चबूतरे पर बैठे पंडित जी को दस मिनट में पचास लोगों के  ‘पंडित जी, राम राम’  का जवाब देना पड़ जाए तो पंडित जी गाली निकालते हुए उनके पीछे भागने लगेंगे । कोई भी चीज हो, अति बहुत बुरी होती है । तभी कहा गया है-


अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।



बोला- मुझे पकड़कर टंकी में पटक दे जो रोज रोज का चाय का झंझट खत्म ।ईंधन, दूध और चाय पत्ती सबका खर्च बच जाएगा । देश की डांवाडोल अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी । पानी पिला रहा है या मेरे प्राण लेना चाहता है । ठीक है कुछ नहीं तो पानी से भी अभ्यागत का स्वागत किया जाता है । लेकिन यह क्या ? पाँच मिनट में तीसरी बार पानी । लगता है राजस्थान में भजन कीर्तन मंडली और मोदी जी के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘वंदे गंगा अभियान’ के तहत कल कुछ ज्यादा की पानी आ गया लगता है ?


हमने कहा- ऐसी बात नहीं है । परसों दिन में बिजली कटौती होने के कारण पानी नहीं आया और कल अज्ञात कारणों से बमुश्किल चार बाल्टी पानी आया । वैसे ही टंकी में पानी पेंदे से जा लगा है । लगता है कल तो एक टैंकर डलवाना ही पड़ेगा । पिछले महिने तो साढ़े तीन सौ लिए थे । अब जब से ट्रम्प ने मोदी जी को रूस से तेल लेने से मना किया तो हो सकता है चार सौ माँग ले । 


बोला- जब पानी की इतनी तंगी है तो मुझे बार बार क्यों पानी पिलाए जा रहा है । ट्रम्प से आदेशों के तहत मोदी जी ही बहुत हैं देश को पानी पिलाने के लिए ।  







हमने कहा- हमने भी अब अपने दिमाग को ताला लगाकर चाबी उस गंगा मैया में फेंक दी है । बस, अब कोई कष्ट नहीं । जो जो मोदी जी कहते हैं करते चले जाते हैं । दो दिन पहले उन्होंने मंत्रीमण्डल की बैठक में एक बहुत बड़ी ज्ञान की बात कही है कि गरमी के दुष्प्रभावों और लू से बचने के लिए बार बार पानी पियें । और मीडिया ने भी जनहित में यह समाचार बड़े उत्साह से देश में पहुंचाया दिया है । मोदी जी ने तो बच्चों तक को यह समझाया है कि अपने माता-पिता, नाना-नानी, दादा-दादी आदि को गरमी में बार बार पानी पीने के लिए याद दिलाते रहे । पहले तो पोते-पोतियाँ यदा-कदा फोन किया करते थे लेकिन अब दो दिन से  पोते-पोतियों के फोन आ रहे हैं कि बाबा पानी पीते रहना । सो हमने भी तेरा खयाल रखते हुए पानी के लिए पूछ लिया तो क्या गुनाह कर दिया । शुक्र मना कि मोदी जी हैं नहीं तो क्या कभी नेहरू जी, शास्त्रीजी या इंदिरा जी आदि ने फोन करके कहा था कि मास्टरों गरमी बहुत पड़ रही है पानी पीते रहना । 


बोला- मोदी जी का कोई व्यक्तिगत परिवार न होने का यही तो फायदा है कि 140 करोड़ ही क्या, पूरा संसार की उनका परिवार है । 


हमने कहा- हाँ, लेकिन कांग्रेस और मुसलमानों को छोड़कर ।

 

बोला- ऐसी बात नहीं है, देखा नहीं अभी अभी जब विदेश दौरे पर गए थे तो कैसे यू ए ई वाले की तरफ पेंगविन की तरह हाथ फैलाकर बढ़ रहे थे । लेकिन यह पानी वाली बात तो उन्होंने तेरे मेरे लिए नहीं बल्कि अपनी नेक सलाह को मानकर ऊर्जा और ईधन की बचत करने वाले सम्राट चौधरी जैसे देश के सच्चे सेवकों के लिए कही है । तुझे पता है सम्राट, जो चाहें तो धरती पर पैर न रखें लेकिन मोदी जी के आह्वान पर अपने घर से 400 मीटर दूर कार्यालय तक पैदल गए हैं । सोच कितनी धूप झेली होगी और कितनी ऊर्जा खर्च हुई होगी । मेरा क्या है यहीं दो कदम पर तो हूँ ।सच्चे भक्तों को बीच बीच में पानी पीते रहना बहुत जरूरी है । 


वैसे कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि भक्त लोग मोदी जी के कहने से ज्यादा पानी पीने लगे हों इसीलिए तेरे यहाँ कम पानी आ रहा हो । 



हमने कहा- तोताराम, कुछ भी मोदी जी की बात का प्रभाव तो होता है । अभी अपने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय सीकर के कुलगुरु रोज अपने घर से 100 मीटर दूर अपने कार्यालय पैदल जाएंगे ।अखबार में सचित्र समाचार आया है । अब सोच पेट्रोल की कितनी बचत हुई होगी । ऐसे ही थोड़ी कर पा रहे हैं मोदी जी ऊर्जा संकट का मुकाबला ? बड़े बड़े त्यागी पड़े हैं देश में । सब तेरी हमारी तरह आरामतलब और स्वार्थी थोड़े हैं ।



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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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