25-05-2026
मैं भी कॉकरोच
आज तोताराम बड़े ठसके से आया । धुले हुए कुर्ता-पायजामा ।आज ही की बनी हुई दाढ़ी और 56 का आधा 28 इंची सीना लेकिन हिन्दुत्व के गर्व से फूला हुआ । सिर पर टोपी जिस पर लिखा हुआ था- मैं भी कॉकरोच । जैसे कभी मनमोहन सरकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार को लेकर जिसे देखो वही ‘मैं भी अन्ना’ की टोपी लगाकर घूमने लगा था या जैसे कभी लोग बिना पूछे ही कहने लगे थे- मैं भी चौकीदार । यह और बात है कि इतने चौकीदारों के होते हुई भी विदेशी मुद्रा का भंडार और रुपए की क्रय शक्ति और लाखों लोगों के वोट वोटर लिस्ट से पता नहीं कैसे चोरी हो गए ।
तोताराम हमेशा की तरह बैठा नहीं, ऐसे खड़ा रहा जैसे हम माइक पर घोषणा करें-
अब मैं आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष आदरणीय तोताराम जी से आग्रह करूँगा कि वे आगे आयें और अपना स्थान ग्रहण करें । और उनको माल्यार्पण से स्वागत करेंगे फलाँ फलाँ जी ।
लेकिन हमने ऐसा कुछ नहीं कहा। तोताराम खुद ही बैठ गया ।
हमने कहा- आज यह अपना पद नाम लिखी टोपी लगाने की क्या जरूरत आ पड़ी ? दुनिया में कोई भी इस तरह का नाटक नहीं करता । न सूरज-चाँद, न शेर, न गीदड़ कोई अपने नाम की पट्टी लगाकर नहीं घूमता । मोदी जी भी अपने 32 सम्मान, ‘प्रधान सेवक’; ‘विश्व गुरु’ के बैज अपने सीने पर लगाए नहीं घूमते । उनके तेज से ही लोग लहचान जाते हैं कि ये अवतारी हैं । सब अपने गुणों और कर्मों से अपने आप ही पहचाने जा सकते हैं । कोई कम पढ़ा लिखा होता है वह दो-दो पेन रखता है और बात बात में अपने हाई स्कूल पास होने की बात करता है लेकिन मोदी जी ने कभी अपनी एनटायर पॉलिटिकाल साइंस की डिग्री नहीं दिखाई बल्कि जब भी कोई प्रसंग आया तो यही कहते रहे कि मैँ कोई पढ़-लिखा नहीं हूँ ।
वैसे तू यह अपनी परिचयात्मक टोपी न पहनता तो भी दुनिया जानती है कि मेरी औकात और हैसियत कॉकरोच से ज्यादा नहीं है ।
खैर, हमने उसके हाथ में गिलास थमाते हुए कहा- चाय पी ।
अभी तोताराम पूरा सा बैठा भी नहीं था कि उछल पड़ा और लगभग पूरी की पूरी चाय बिखर गई, बोला- कॉकरोच !!
हमने देखा कि वास्तव में एक छोटा सा कॉकरोच भागा जा रहा था ।
हमने कहा- कॉकरोच डर गए क्या ? निकल गई सारी वीरता ।
बोला- कुछ भी हो मास्टर, ये चूहे, कॉकरोच, छिपकली कोई बहुत खतरनाक नहीं होते फिर भी अच्छा भला आदमी इनसे डर ही जाता है ।
हमने कहा- अब दस दिन में ही तुम्हारी पार्टी के दो करोड़ सदस्य होने से क्या मोदी जी भी डर गए हैं ?
बोला- नहीं, वे ऐसे सतही आंदोलनों से डरने वाले नहीं हैं ।अभी तो ट्रम्प उन्हें कह रहे हैं-आई लव मोदी । वे जानते हैं ऐसे आंदोलनों की असलियत । 2011 में अन्ना आंदोलन कैसे, किस तरह शुरू हुआ और उससे कैसे, किसको लाभ हुआ और उसमें किसी वास्तविक बदलाव जैसा कुछ नहीं था ।तभी उस आंदोलन से निकले केजरीवाल जैसे चढ़े वैसे ही फिसल गए । धंधे वालों का धंधा सैंकड़ों गुणा बढ़ गया । जो असली खिलाड़ी थे वे सत्ता पर जम गए ।
सरकारें जब किसी सिद्धांत को लेकर बनती हैं तो परिवर्तन आता है फिर चाहे वे संघ की सरकार हो या कम्यूनिस्ट या मध्यमार्गी कांग्रेस की । असली सिद्धांतवादी संघ निसृत भाजपा ने ठोस काम किया और अपने सिद्धांतों के अनुसार सब कुछ सेट कर लिया ।अब जब तक कोई ठोस सिद्धांत वाली पार्टी निरंतर काम नहीं करेगी तब तक इन्हें कोई खतरा नहीं ।
हमने कहा- तो फिर कॉकरोच का क्या होगा ?
बोला- वही होगा, लोग टेरी तरह बिखरी चाय को भूल जाएंगे और अमेरिका से 500 अरब डॉलर की डील और एक और सरेंडर हो जाएगा ।
हमने कहा- ठीक है लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि बच्चा झुनझुने से बहुत देर तक नहीं बहल सकता । दूध की जगह तो दूध ही चाहिए भले ही पानी मिला हुआ ही क्यों न हो ।जब अन्ना का आंदोलन चल रहा था तब हम अमेरिका में थे । हमारे कई शिष्य ‘मैं भी अन्ना’ की टोपी लगाकर फ़ोटो भेजते थे और बाद में वे ही खीजते भी मिले ।
बोला- कोई बात नहीं । कुछ दिन का तो इंतजाम हो गया। बाद में कोई और झुनझुना देखेंगे ।
-रमेश जोशी
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